12 साल बाद बदला PF का नियम! जानिए ₹10,000, ₹20,000 और ₹25,000 से ज्यादा सैलरी वालों पर क्या पड़ेगा असर?

EPFO Wage Ceiling Hike Update: केंद्र सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बीते दिनों एक बड़ा तोहफा दिया। सरकार ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेज सीलिंग को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया है। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले से देश के करीब 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को सीधे तौर पर पीएफ, पेंशन और बीमा का फायदा मिलने लगेगा।

12 साल बाद हुए इस बड़े बदलाव से आपकी टेक-होम सैलरी, पीएफ फंड और पेंशन पर क्या असर पड़ेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आपकी सैलरी ब्रैकेट के हिसाब से इस फैसले के क्या मायने हैं।

अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹10,000 है, तो क्या बदलेगा?

जवाब: कुछ नहीं बदलेगा।

जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹15,000 से कम थी, वे पुराने नियमों के तहत भी EPFO के दायरे में अनिवार्य रूप से आते थे। इसलिए ₹10,000 कमाने वाले कर्मचारियों के लिए इस नियम से कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। उनके पीएफ खाते और टेक-होम सैलरी में पहले की तरह ही कटौती जारी रहेगी।

अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹20,000 है, तो क्या होगा?

जवाब: सबसे बड़ा फायदा इसी ग्रुप को मिलेगा।

पुराना नियम: सितंबर 2014 के नियम के मुताबिक, अगर कोई नया कर्मचारी ₹20,000 की बेसिक सैलरी पर कंपनी जॉइन करता था, तो वह ₹15,000 की सीमा से ऊपर होने के कारण पीएफ के अनिवार्य दायरे से बाहर रहता था।

नया नियम: अब वेज सीलिंग ₹25,000 हो जाने के कारण ₹20,000 कमाने वाला हर नया कर्मचारी अनिवार्य रूप से पीएफ, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा सहबद्ध बीमा (EDLI) के दायरे में आएगा।

असर: आपकी इन-हैंड सैलरी में से पीएफ कटेगा, जिससे हाथ में आने वाला पैसा तो थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन आपके रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड और पेंशन सुरक्षा पक्की हो जाएगी।

अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹25,000 से अधिक है, तो क्या असर पड़ेगा?

जवाब: टेक-होम सैलरी कम होगी, लेकिन पीएफ फंड तेजी से बढ़ेगा।

जो कर्मचारी पहले से ही पीएफ के सदस्य हैं और जिनकी पीएफ कटौती अब तक ₹15,000 की वैधानिक सीमा पर कैप्ड थी:

पुराना पीएफ योगदान: 12% ऑफ ₹15,000 = ₹1,800 प्रति माह

नया पीएफ योगदान: 12% ऑफ ₹25,000 = ₹3,000 प्रति माह

यानी आपकी इन-हैंड सैलरी से हर महीने ₹1,200 ज्यादा पीएफ कटेगा। इससे हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी थोड़ी कम होगी, लेकिन आपके पीएफ खाते में हर महीने ज्यादा पैसा जमा होगा, जिस पर आपको 8% से ज्यादा की दर से चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा मिलेगा।

सरकार ने 12 साल बाद क्यों लिया यह फैसला?

पिछली बार पीएफ वेज सीलिंग को सितंबर 2014 में संशोधित किया गया था। पिछले 12 वर्षों में न्यूनतम वेतन और कर्मचारियों की औसत आय में भारी बढ़ोतरी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में एक नियमित वेतनभोगी कर्मचारी की औसत सैलरी करीब ₹23,000 प्रति माह पहुंच चुकी है, और कई राज्यों में न्यूनतम वेतन भी ₹15,000 के पार जा चुका है। ऐसे में पुराना ₹15,000 का कट-ऑफ व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसी खाई को पाटने के लिए सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया है।

अक्सर कर्मचारियों को टेक-होम सैलरी कम होने पर थोड़ा मलाल होता है, लेकिन पीएफ की वेज सीलिंग बढ़ना एक बेहद पॉजिटिव कदम है। अनिवार्य पीएफ कटौती बढ़ने से न सिर्फ कर्मचारियों की बचत करने की आदत मजबूत होगी, बल्कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली पेंशन का आधार भी बड़ा हो जाएगा। यदि आपकी सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है, तो यह बदलाव आपके सुरक्षित भविष्य और रिटायरमेंट प्लानिंग की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

PM Kisan Samman Nidhi Updates: 24वीं किस्त का इंतजार जल्द होगा खत्म, अगले महीने आएगा किसानों के खाते में पैसा

देश के करोड़ों किसानों को जल्द खुशखबरी मिल सकती है। पीएम किसान सम्मान योजना की 24वीं किस्त अगले महीने उनके बैंक अकाउंट में आ सकती है। इस योजना के दायरे में आने वाले किसानों को एक साल में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं। यह पैसा सरकार की तरफ से किसानों के खातों में दो-दो हजार की तीन किस्तों में ट्रांसफर किया जाता है।

अगले महीने बड़े त्योहार

अगले महीने दशहरा है। उसके बाद नवंबर में दिवाली है। ऐसे में खाते में इस स्कीम का पैसा आने से किसानों को काफी राहत मिलगी। पिछले साल 19 नवंबर को सरकार की तरफ से इस स्कीम की दूसरी किस्त का पैसा किसानों के खातों में ट्रांसफर हुआ था। हालांकि, 2024 में 5 अक्तूबर को ही किसानों के खातों में स्कीम का पैसा आ गया था।

ई-केवायसी जरूरी है

यह ध्यान में रखना जरूरी है कि पीएम किसान योजना का फायदा उन किसानों को नहीं मिलेगा, जिन्होंने ई-केवायसी नहीं कराई है। इस योजना के दायरे में आने वाले किसानों को ई-केवायसी कराने पर ही पैसा खाते में आएगा। साथ ही उन्हें अपने बैंक अकाउंट को भी आधार से लिंक करना होगा। इसके बाद ही उनके खाते में योजना की 24वीं किस्त आएगी।

अगले महीने आ सकता है पैसा

इस स्कीम से जुड़ी खबरों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि अक्तूबर में दशहरा है। दूसरे हफ्ते नवरात्र शुरू हो जाएगा। इस वजह से 24वीं किस्त के अक्तूबर की शुरुआत या दूसरे हफ्ते तक आ जाने की उम्मीद है। योजना की 23 किस्त इस साल जून में किसानों के खाते में आई थी।

कुछ किसानों को 23वीं किस्त भी मिल सकता है

इस बार कुछ किसानों को 24वीं किस्त के साथ 23वीं किस्त का भी पैसा मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि कई किसानों को ई-केवायसी और जमीन का सत्यापन नहीं होने से से 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला था। अब जिन किसानों ने अपना ई-केवायसी पूरा कर लिया है और जमीन का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें 24वीं किस्त के साथ 23वीं किस्त का पैसा भी मिल सकता है।

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2019 में शुरू हुई थी केंद्र सरकार की स्कीम

पीएम किसान सम्मान निधि केंद्र सरकार की स्कीम है। इस स्कीम के तहत किसानों को मिलने वाला पूरा पैसा केंद्र सरकार की तरफ से आता है। इस योजना का ऐलान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 2019 के अंतरिम बजट में किया था। इस स्कीम का मकसद देश के करोड़ों किसानों की इनकम को सपोर्ट देना है।

EPF New Rules: अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹40,000 या ₹50,000 है तो ईपीएफ के नए नियमों का असर किस तरह पड़ेगा?

EPF New Rules: सरकार ने ईपीएफओ के नियम में हाल में बड़ा बदलाव किया है। अब ईपीएफओ कवरेज के लिए बेसिक सैलरी (प्लस डीए) की लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी गई है। अब तक यह सीमा 15,000 रुपये थी। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले और 51 लाख लोग ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे।

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि ईपीएफओ के तहत प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग आते हैं। यह रिटायरमेंट बेनेफिट्स स्कीम है। इस स्कीम के मुख्य रूप से तीन बेनेफिट्स हैं। पहला एंप्लॉयीज के रिटायर करने पर उसके ईपीएफ में जमा पैसा उसे एकमुश्त मिल जाता है। दूसरा, रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति को हर महीने पेंशन मिलती है। यह ईपीएफओ के एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम के तहत मिलती है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें हैं। तीसरा फायदा एंप्लाॉयीज डिपॉजिट-लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम के तहत मिलता है।

ईपीएफओ के तहत एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) से हर महीने 12 फीसदी पैसा कटता है। यह पैसा उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। एंप्लॉयर भी एंप्लॉयीज के लिए हर महीने 12 फीसदी (बेसिक सैलरी प्लस डीए) का कंट्रिब्यूशन करता है। लेकिन, इस 12 फीसदी में से 8.33 फीसदी एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जाता है और 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाता है। रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयीज को जो हर महीने पेंशन मिलती है, वह एंप्लॉयीज के पेंशन फंड में जमा पैसे से ही मिलती है।

नए नियम के मुताबिक, अब ऐसे एंप्लॉयीज भी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के तहत आएंगे, जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक होगी। अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है तो इसका 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयीज की सैलरी से जाएगा। यह अमाउंट 3000 रुपये होगा। 3000 रुपये का ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। एंप्लॉयर को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा। इससे एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट पर फायदा होगा।

सवाल है कि अगर किसी एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी 40,000 है या 50,000 रुपये है तो क्या होगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई कंपनियों में पहले से एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी के आधार पर ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन होता है। ऐसी कंपनियों के एंप्लॉयीज पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है और पहले से आपकी बेसिक सैलरी पर 12-12 फीसदी कंट्रिब्यूशन का नियम लागू है तो आपकी नेट सैलरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में पहले की तरह आपकी 40,000 की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी यानी 6 हजार रुपये ईपीएफ अकाउंट में जमा होगे। 6,0000 रुपये का कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा, जिसका 8.33 फीसदी एंप्लॉयी के पेंश फंड में जाएगा और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएफ अकाउंट में जाएगा। इसका मतलब है कि आपके रिटायरमेंट बेनेफिट भी पहले की तरह बने रहेंगे।

अगर आपका एंप्लॉयर कहता है कि वह सिर्फ 25,000 रुपये की नई वेज सीलिंग का पालन करेगा तो आपकी सैलरी से सिर्फ 3000 रुपये कटेंगे। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। ऐसी स्थिति में आपकी नेट सैलरी घट जाएगी, क्योंकि पहले के नियम के तहत एंप्लॉयर 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी (प्लस डीए) पर आपका पैसा काटता था और खुद भी उतना कंट्रिब्यूशन करता था। यह बात 50,000 की बेसिक सैलरी पर भी लागू होगी। बेसिक सैलरी 50,000 होने के बावजूद एंप्लॉयर कंट्रिब्यूशन के लिए सिर्फ 25,000 बेसिक सैलरी की सीमा का इस्तेमाल करेगा।

NPS Swasthya scheme: इन 10 सवाल और जवाब के जरिए आसानी से समझें क्या है एनपीएस स्वास्थ्य स्कीम

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने एनपीएस स्वास्थ्य स्कीम के नए नियम पेश कर दिए हैं। इस स्कीम को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। आखिर यह स्कीम क्या है, इस स्कीम में निवेश के क्या फायदे हैं, यह स्कीम किसके लिए हैं? आइए ऐसे सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

एनपीएस स्वास्थ्य क्या है?

एनपीएस स्वास्थ्य एक एनपीएस स्कीम है, जिसका मकसद एक रिटायरमेंट फंड तैयार करने के साथ ही इनवेस्टर को हेल्थ इंश्योरेंस और हेल्थ से संबंधित सर्विसेज ऑफर करना है।

एनपीएस स्वास्थ्य का फायदा कौन उठा सकता है?

ऐसा कोई व्यक्ति जो एनपीएस का सब्सक्राइबर बन सकता है, वह एनपीएस स्वास्थ्य का भी फायदा उठा सकता है। इस बारे में पीएफआरडीए की गाइडलाइंस में सभी शर्तों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

क्या हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य है?

हां, एनपीएस स्वास्थ्य के दो पार्ट्स हैं। इनमें एनपीएस स्वास्थ्य इनवेस्टमेंट अकाउंट और एक एक सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल है। इंश्योरेंस पॉलिसी लेना अनिवार्य है।

इसमें शुरुआत में कम से कम कितना कंट्रिब्यूशन जरूरी है?

शुरुआती कंट्रिब्यूशन में पहले साल का इंश्योरेंस प्रीमियम, हेल्थ बेनेफिट एडमिनिस्ट्रेटर के लिए 200 रुपये का सालाना मेंटेनेंस चार्ज, अप्लिकेबल टैक्स और एनपीएस स्वास्थ्य अकाउंट में 1000 रुपये का निवेश शामिल है।

बाद में कम से कम कितना कंट्रिब्यूशन करना होगा?

बाद में कम से कम 10 रुपये का कंट्रिब्यूशन जरूरी है। कंट्रिब्यूशंस का इनवेस्टमेंट पीएफआरडीए की गाइडलाइंस के तहत किया जाएगा।

क्या सब्सक्राइबर इलाज के खर्च के लिए पैसे निकाल सकता है?

सब्सक्राइबर एलिजिबल हेल्थकेयर एक्सपेंसेज के लिए कुछ पैसे निकाल सकता है। इसमें एलिजिबल आउटपेशेंट और इनपेंशेंट एक्सपेंसेज शामिल हैं। एनपीएस स्वास्थ्य अकाउंट में किए गए कुल कंट्रिब्यूशन के 25 फीसदी से ज्यादा निकालने की इजाजत नहीं होगी।

सब्सक्राइबर कितनी बार हेल्थकेयर के लिए पैसे निकाल सकता है?

पैसे निकालने (partial withdrawal) की संख्या की कोई लिमिट तय नहीं की गई है। पहली बार या उसके बाद पैसे निकालने के लिए कोई वेटिंग पीरियड भी तय नहीं की गई है। हालांकि, कितना पैसा निकाला जा सकता है, इसकी जो लिमिट तय है वह लागू होगी। पैसा सीधे सब्सक्राइबर को देने की जगह हॉस्पिटल या हेल्थकेयर प्रोवाइडर को दी जाएगी।

हेल्थ इंश्योरेंस के तहत कौन-कौन कवर होगा?

स्टैंडर्ड पॉलिसी में फैमिली फ्लोटर के तहत सब्सक्राइबर, पत्नी/पति और दो तक आश्रित बच्चे कवर होंगे। स्कीम में एंट्री की उम्र 18 से 70 साल है। पॉलिसी के नियम और शर्तों के मुताबिक, इसे 85 साल तक रिन्यू किया जा सकता है।

इंश्योरेंस कवर के विकल्प क्या है?

स्टैंडर्ड पॉलिसी फैमिली फ्लोटर के तहत 1 लाख रुपये, 5 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 30 लाख रुपये के सम एश्योर्ड (कवर) के विकल्प उपलब्थ हैं। इसके हिसाब से कुल सालाना डिडक्शंस 10,000 रुपये, 50,000 रुपये, 1 लाख रुपये और 3 लाख रुपये होंगे।

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एनपीएस स्वास्थ्य में इंश्योरेंस प्रीमियम कैसे काम करेगा?

इंश्योरेंस प्रीमियम बीमा कंपनी की तरफ से IRDAI के फ्रेमवर्क के तहत तय किया जाएगा। इसका अमाउंट सब्सक्राइबर की एंट्री-एज बैंड पर निर्भर करेगा, जिसमें 18-40 साल, 40 से 60 साल और 60-70 साल के बैंड शामिल होंगे। पहले साल का प्रीमियम टैक्स के साथ अपफ्रंट चुकाना होगा। यह न्यूनतम शुरुआती कंट्रिब्यूश का हिस्सा होगा। रिन्यूअल के समय प्रीमियम का पेमेंट एनपीएस स्वास्थ्य कॉर्पस से किया जा सकता है।

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चीन का AI में बड़ा निवेश, लेकिन अर्थव्यवस्था कमजोर:कार-घर की बिक्री घटी, युवाओं में बेरोजगारी 18.9%

चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से पैसा लगा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ रही है। 2026 की पहली छमाही में घरेलू कारों और घरों की बिक्री घट गई। वहीं अगस्त में युवाओं में बेरोजगारी 18.9% रही। ऐसे में कई चीनी अर्थशास्त्रियों को चिंता है कि सरकार AI जैसे सेक्टर में ज्यादा पैसा लगा रही है, जबकि अर्थव्यवस्था को नौकरियां और लोगों की खरीदारी बढ़ाने के लिए ज्यादा मदद की जरूरत है। चीन की अर्थव्यवस्था की हालत समझिए चीन की आर्थिक परेशानी आंकड़ों से साफ दिख रही है। कारों की बिक्री 2026 के पहले 6 महीनों में घरेलू कारों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 20% घट गई। घरों की बिक्री इसी दौरान घरों की बिक्री में 14% की गिरावट आई। अर्थशास्त्री बोले- अर्थव्यवस्था को ज्यादा सहारे की जरूरत जुलाई में चीन के पूर्व केंद्रीय बैंक सलाहकार ली दाओकुई ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था जरूरत से ज्यादा धीमी चल रही है। एक और पूर्व सलाहकार लियू शिजिन ने ग्रामीण लोगों की पेंशन बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने पेंशन को करीब 2,800 रुपए से बढ़ाकर 14,000 रुपए महीने करने की बात कही। केंद्रीय बैंक के सलाहकार हुआंग हाइजौ ने कहा कि टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने से पहले देश में थोड़ी महंगाई और कंपनियों की कमाई बढ़ना जरूरी है। सरकार का पूरा फोकस AI पर जुलाई में पोलितब्यूरो की बैठक के बाद चीन के नेताओं ने AI से जुड़ी नई अर्थव्यवस्था को बढ़ाने पर जोर दिया। सरकार ने सीमित आर्थिक मदद जारी रखने का फैसला भी किया। AI में सरकारी निवेश लगातार बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड के अर्थशास्त्री शू चेंगगांग का कहना है कि इससे रोजगार और लोगों की खरीदारी बढ़ाने वाले क्षेत्रों के लिए कम पैसा बच सकता है। उनके मुताबिक, AI कंपनियों को सिर्फ सरकारी मदद नहीं, बल्कि ऐसे ग्राहक और कारोबार भी चाहिए जो उनके उत्पाद खरीदें। चीन की हालत की तुलना सोवियत संघ से क्यों? बीजिंग के प्रमुख समाजशास्त्री सन लिपिंग ने चीन की मौजूदा आर्थिक स्थिति की तुलना सोवियत संघ से की है। उनके मुताबिक, सोवियत संघ के सबसे मजबूत दौर में उसकी अर्थव्यवस्था अमेरिका के आकार की करीब 70% थी। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के कुछ क्षेत्रों में वह अमेरिका से आगे भी था। लेकिन मजबूत विज्ञान और तकनीक के बावजूद सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था आखिरकार कमजोर पड़ गई। AI और डेटा सेंटरों पर लाखों करोड़ का निवेश स्टैनफोर्ड की AI इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 से 2023 के बीच सरकारी पहल पर बनाए गए निवेश फंडों ने AI कंपनियों में करीब 15 लाख करोड़ रुपए लगाए। अब चीन AI के लिए जरूरी डेटा सेंटर भी तेजी से बना रहा है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, चीन अगले 5 साल में देशभर में डेटा सेंटर बनाने पर करीब 28 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रहा है। इन डेटा सेंटरों को सरकारी कंपनियां चलाएंगी। इसलिए इसे ‘AI ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ कहा जा रहा चीन के कुछ इंटरनेट यूजर्स सरकार के बड़े AI अभियान को ‘AI ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ कह रहे हैं। इसका नाम चीन के पूर्व नेता माओ जेडोंग के ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ अभियान से लिया गया है। माओ ने 1958 में चीन को तेजी से औद्योगिक और ताकतवर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उद्योग और खेती में बदलाव शुरू किए थे। लेकिन यह अभियान बुरी तरह नाकाम रहा और इसके कारण चीन में भयानक अकाल पड़ा। आज चीन सरकार भी AI को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पैसा लगा रही है। इसलिए कुछ लोग इसकी तुलना पुराने अभियान से कर रहे हैं। सवाल है कि जब देश की अर्थव्यवस्था सुस्त है, युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, तब सरकार AI पर इतना बड़ा पैसा क्यों लगा रही है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… AI की गलती से अमेरिका-चीन में जंग हो जाती: चैटबॉट ने चीनी जहाज में परमाणु उपकरण होने की फेक खबर दी अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट की गलती से चीन से जंग के करीब पहुंच गया था। खबर यहां पढ़ें…

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? DA मर्जर, फिटमेंट फैक्टर और HRA पर ये है बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Salary Hike Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ 8वां वेतन आयोग इस समय देशभर में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों, रेलवे और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श के दौर में है। हाल ही में चंडीगढ़, चेन्नई और पुडुचेरी में बैठकों के बाद अगले महीने आयोग की टीम बेंगलुरु के दौरे पर जाने वाली है।

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बंपर इजाफा होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी और किन-किन घटकों में बड़ा बदलाव होने वाला है?

सैलरी हाइक के ये है 4 मुख्य पिलर

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा कर रहा है। सैलरी रिवीजन मुख्य रूप से इन 4 घटकों पर निर्भर करेगा:

1. बेसिक पे: इसमें नया वेतन मैट्रिक्स, पे-स्ट्रक्चर और सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर शामिल है।

2. भत्ते: महंगाई भत्ता (DA/DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA)।

3. कैश और अन्य लाभ: सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और रिवॉर्ड।

4. अन्य ढांचागत सुधार: कामकाजी जरूरतें और विभिन्न पदों का युक्तिकरण।

बेसिक पे में महंगाई भत्ते के विलय की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत डीए का विलय मूल वेतन में किया जाए। बेसिक सैलरी ही वह आधार है जिससे प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना होती है। अगर डीए को बेसिक पे में मिला दिया जाता है, तो बेसिक सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी, जिससे मिलने वाले सभी अन्य भत्ते और रिटायर्मेंट बेनेफिट्स कई गुना बढ़ जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर से ही होगा पूरा खेल

फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक है, जिसका उपयोग पुराना बेसिक वेतन बदलकर नया बेसिक वेतन तय करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा इस पर फिलहाल आयोग में चर्चा जारी है, लेकिन विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों की रिपोर्ट के मुताबिक यह 2.28 से लेकर 3.83 के बीच तय हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.68 या 3.83 तक जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

HRA में संशोधन: 2017 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी!

नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन ने आयोग के सामने HRA बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। 2017 के बाद से मकान किराए भत्ते (HRA) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि शहरों में कमरों और मकानों का किराया काफी बढ़ चुका है।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि शहरों की कैटेगरी के हिसाब से HRA को X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% किया जाए। साथ ही, जब-जब डीए बढ़े, तब-तब HRA में भी अपने आप बढ़ोतरी का नियम बने।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

गठन के नियमों के अनुसार आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त (मई 2027 तक) मिला है। वैसे जानकारों का मानना है कि फरवरी या अप्रैल 2027 के आसपास कुछ अंतरिम सिफारिशों की घोषणा की जा सकती है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें तो आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरी तरह लागू होने और एरियर जारी होने में 2029 या 2030 तक का समय लग सकता है।

 

पार्टी के बुरे प्रदर्शन के बाद भी नीतियों पर कायम चांसलर

पार्टी के बुरे प्रदर्शन के बाद भी नीतियों पर कायम चांसलर

Germany chancellor Friedrich Merz

रजत शर्मा

चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया और बर्लिन के चुनावों में अपनी कंजरवेटिव क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक यूनियन (सीडीयू) पार्टी को लगे झटकों के बाद भी अडिग रुख दिखाया है। एग्जिट पोल्स में सीडीयू मेक्लेनबुर्ग में मात्र 5.1 प्रतिशत के आसपास नजर आ रही है। एग्जिट पोल्स सामने आने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मैर्त्स ने कहा, “मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया के नतीजे को हम बातों में नहीं टाल सकते। यह एक संकट है।”

 

वहीं, बर्लिन में राज्य की सत्ता संभाल रही सीडीयू को करीब 8 फीसदी नुकसान के साथ 20 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं।

 

जर्मनी सुधार करने में सक्षम है: मैर्त्स

चांसलर ने जर्मनी की आर्थिक समस्याओं और गहराते विभाजन की ओर इशारा करते हुए कहा, “इसका जवाब अच्छे पुराने दिनों की ओर लौटना नहीं हो सकता। इसका जवाब यह भी नहीं हो सकता कि हम हर अच्छी चीज को लगातार अपनी बातों से डिगाते रहें।”

 

मैर्त्स ने कहा, “जवाब यह होना चाहिए कि हम अपने देश को भविष्य के लिए तैयार करें।” उन्होंने आगे कहा कहा, “हमें सुधार करने ही होंगे। जर्मनी सुधार करने में सक्षम है।” मैर्त्स ने आगे कहा, “हम यह जिम्मेदारी उठा रहे हैं। मैं यह जिम्मेदारी उठा रहा हूं, क्योंकि मैं अपने देश को आगे ले जाना चाहता हूं।”

 

मैर्त्स की घटती अप्रूवल रेटिंग

प्रेसवार्ता में चांसलर ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जर्मनी के बेहतर भविष्य के लिए वे क्या कदम उठाने वाले हैं। लेकिन, उनके लहजे से स्पष्ट था कि मैर्त्स इन झटकों के बाद भी अपने पद पर बने रहेंगे।  राष्ट्रीय स्तर पर इस हफ्ते की शुरुआत में मैर्त्स की अपनी अप्रूवल रेटिंग गिरकर मात्र 14 फीसदी तक पहुंच गई।

 

वहीं इसी हफ्ते की शुरुआत में जारी ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, धुर दक्षिणपंथी एएफडी राष्ट्रीय स्तर पर 27 से 29 फीसदी समर्थन के साथ पहले स्थान पर पहुंच गई है। मैर्त्स की सीडीयू को राष्ट्रीय स्तर पर 18 से 20 फीसदी समर्थन मिलता दिख रहा था।

 

गठबंधन सरकार के सहयोगियों का रुख

सीडीयू इस वक्त सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी (एसपीडी) के साथ गठबंधन में संघीय सरकार चला रही है। बर्लिन और मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया के नतीजों के बाद उप-चांसलर और एसपीडी के नेता लार्स क्लिंगबाइल ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद संघीय सरकार को अपना रवैया फिर से परखना होगा।

 

क्लिंगबाइल ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर एआरडी से कहा, “संघीय सरकार के तौर पर हमें यह समझना होगा कि देश में इतनी ज्यादा अनिश्चितता क्यों है।” उन्होंने कहा कि सरकार सुधार से जुड़ी अपनी योजनाओं को लोगों तक इस तरह नहीं पहुंचा पाई, जिससे उन्हें भरोसा होता कि ये सुधार बेहतरी लाएंगे। वहीं अमूमन बहस अक्सर खर्च में कटौती के आसपास होती रही।

 

क्लिंगबाइल जर्मनी के वित्त मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि 45 साल तक योगदान देने के बाद मिलने वाले पूरे रिटायरमेंट लाभों को खत्म करने के विवादित प्रस्ताव को लेकर लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

 

एसपीडी के महासचिव टिम क्लूसनडॉर्फ ने अलग से चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के सीडीयू-एसपीडी गठबंधन से दिशा बदलने की मांग की। क्लूसनडॉर्फ ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर जेडडीएफ से कहा कि ये चुनाव, “एक बहुत साफ संदेश हैं कि आप बस जोर-जबरदस्ती से आगे नहीं बढ़ सकते।” उन्होंने कहा कि सरकार को सुधार करने होंगे। उनका तर्क था कि सुधारों का जोर सिर्फ कटौती पर नहीं, बल्कि ढांचागत बदलावों पर होना चाहिए।

 

क्या पेंशन सुधार रहे बुरे प्रदर्शन की वजह?

चांसलर मैर्त्स के सत्ताधारी गठबंधन के कुछ सुधारों की आलोचना होती रही है। इन्हीं में से है रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन में होने वाले सुधार। सरकार यहां कुछ कटौतियां करना चाहती है, लेकिन विपक्षी पार्टियों समेत लोग और सामाजिक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

 

मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में वोटरों के लिए बर्लिन की संघीय सरकार का पेंशन सुधार एक बड़ा मुद्दा था। जर्मनी का यह इलाका एकीकरण से पहले पूर्वी जर्मनी का हिस्सा था। मेक्लेनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया, जर्मनी में सबसे कम आमदनी वाला राज्य है। 45 साल नौकरी करने के बाद भी यहां के लोगों की पेंशन इतनी नहीं है कि जीवन-खर्च आसानी से चल सके। इसलिए धुर-दक्षिणपंथी एएफडी ने इसे मुख्य मुद्दों में शामिल किया है।

 

हालांकि, सैक्सनी-अनहाल्ट में दक्षिणपंथी एएफडी की जबरदस्त चुनावी जीतके बाद, पेंशन सुधारों पर दोबारा विचार किया जा रहा है। अगर मतदाता अपने वोट के जरिए यह संदेश देते हैं कि उन्हें सुधार नहीं चाहिए, तो इससे चांसलर की अहम सुधारों को लागू करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।

 

एग्जिट पोल के अनुमान देखकर यही लगता है कि पेंशन सुधारों पर दोबारा विचार करने की बात लोगों तक नहीं पहुंची, या फिर वाकई उन्हें चांसलर मैर्त्स के काम पर भरोसा नहीं है।

EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000 हुई, आपके वेतन और पेंशन पर क्या असर होगा?

EPFO salary Hike: सरकार ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवरेज के लिए वेज सीलिंग यानी सैलरी सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इसका मकसद ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “प्रोविडेंट फंड कटौती के लिए नई वेतन सीमा अब ₹25,000 प्रति माह होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।”

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा, “संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू हो गई है।” EPFO वेतन सीमा 2004 और 2014 के बीच बदली नहीं गई थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया था। सितंबर 2014 से पहले वेतन सीमा ₹6,500 प्रति माह थी। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैलरी और आय में लगातार बढ़ोतरी और संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने को देखते हुए अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

इस फ़ैसले से सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ होगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “यह फैसला ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत बीमा कवरेज का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।”

सैलरी बढ़ने से नौकरीपेशा को क्या होगा फायदा?

यह बदलाव प्रोविडेंट फंड योगदान और पेंशन योग्य सैलरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा। अभी, ₹15,000 से ज्यादा मासिक वेतन वाली नौकरी शुरू करने वाला कोई नया कर्मचारी अपने आप EPF के दायरे में नहीं आता है। लेकिन अब वेतन सीमा (wage ceiling) बढ़ने से हर महीने ₹15,000 से ₹25,000 कमाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी दायरे में आ जाएगा।

सरकार ने कहा कि सितंबर 2014 में पिछली बार सैलरी सीमा बढ़ाए जाने के बाद से देश भर में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही संगठित क्षेत्र में रोजगार का विस्तार भी हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कैबिनेट का यह फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सोशल सिक्योरिटी देगा और संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी बढ़ावा देगा।”

वेज सीलिंग बढ़ने पर पेंशन पर क्या असर होगा?

इसका सबसे बड़ा और लंबे समय का असर एंप्लॉय पेंशन स्कीम (EPS) के तहत मिलने वाले पेंशन फायदों पर पड़ सकता है। स्टैंडर्ड EPS फ्रेमवर्क के तहत पेंशन-योग्य वेतन की सीमा 2014 से ₹15,000 तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे असल में एम्प्लॉयर का EPS योगदान पेंशन-योग्य वेतन के 8.33% के हिसाब से लगभग ₹1,250 प्रति माह तक सीमित हो गया था। अब जब यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो रही है, तो इसके हिसाब से 8.33% योगदान लगभग ₹2,083 प्रति माह होगा।

इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर नई लिमिट लागू होती है, उनके लिए EPS में ज्यादा से ज्यादा योगदान में हर महीने लगभग 833 रुपये की बढ़ोतरी होगी। स्टैंडर्ड EPS पेंशन फॉर्मूले के तहत पेंशन मुख्य रूप से पेंशन योग्य सैलरी और पेंशन योग्य सर्विस से जुड़ी होती है।

अधिकारी का अनुमान है कि 35 साल की पेंशन योग्य सर्विस वाले कर्मचारी की मासिक पेंशन, नई लिमिट के हिसाब से गिनी गई सर्विस के लिए लगभग 7,500 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो सकती है। यह पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट के आधार पर गिनी गई पेंशन की तुलना में लगभग 66% की बढ़ोतरी होगी।

EPFO क्या है?

EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक का मैनेजमेंट करता है। यह एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का संचालन करता है। लेटेस्ट EPFO ​​आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.98 करोड़ सदस्य करीब 7.68 लाख कंपनियों से जुड़े हैं। EPS के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलता है। EDLI स्कीम EPF सदस्यता से जुड़ा इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है।

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ओमप्रकाश राजभर का दावा: यूपी के चार टुकड़े होंगे, पूर्वांचल का सीएम बनेगा राजभर समाज का बेटा

ओमप्रकाश राजभर का दावा: यूपी के चार टुकड़े होंगे, पूर्वांचल का सीएम बनेगा राजभर समाज का बेटा

omprakash rajbhar

उत्तर प्रदेश के देवरिया में रविवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सामाजिक समरसता रैली आयोजित की गई। इस रैली में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा सियासी दांव चलते हुए उत्तर प्रदेश के भविष्य और आरक्षण के मुद्दे पर तीखे बयान दिए।

 

करीब साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंचे सुभासपा प्रमुख राजभर ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने पुरजोर दावा किया कि यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है, तो वहां राजभर समाज का कोई बेटा ही मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा। उनके इस बयान को पूर्वांचल की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

आरक्षण और शिक्षा पर जोर

राजभर ने 27 प्रतिशत आरक्षण के भीतर हिस्सेदारी और इसके वर्गीकरण की मांग एक बार फिर उठाई। उन्होंने कहा कि 1993 से पिछड़ों को 27% आरक्षण मिल रहा है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा जातियों तक ही सीमित रह गया है। इस लाभ को समाज की हर पिछड़ी जाति तक पहुँचाने के लिए आरक्षण का बंटवारा बेहद जरूरी है।

 

उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर वे लखनऊ में पंचायत करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी अपना पक्ष रख चुके हैं, जिसके बाद केंद्र स्तर पर ‘रोहिणी आयोग’ का गठन भी हुआ था।

 

रैली के दौरान राजभर ने गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड, पेंशन योजनाओं और सरकारी कल्याणकारी स्कीमों का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक गरीब और पिछड़े वर्ग के बेटा-बेटी नहीं पढ़ेंगे, तब तक समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है।

8वें वेतन आयोग में 3.25 फिटमेंट फैक्टर और Level 10 की डिमांड, समझिए सरकारी कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ सकती है

आठवें वेतन आयोग लगातार एंप्लॉयीज संगठनों, एंप्लॉयीज यूनियंस और इंस्टीट्यूशंस के प्रतिनिधियों से मिलकर उनका राय जानने की कोशिश कर रहा है। चंडीगढ़ में आयोग की दो दिन की मीटिंग 18 सितंबर को खत्म हो गई। आयोग अब 7 और 8 अक्तूबर को बेंगलुरु में मामले से जुड़े पक्षों की राय जानने की कोशिश करेगा।

चंडीगढ़ में आयोग की बैठक के बाद नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस (NWA) और पोस्ट ग्रेचुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने बताया कि उन्हें भरोसा है कि आयोग उनकी मांगें मान लेगा। नर्सों के एसोसिएशंस ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशंस (AINEF) से जुड़े हैं।

AINEF से जुड़े नर्सों के एसोसिएशंस का मानना है कि आयोग अगर उनकी मांगें मान लेता है तो इससे केंद्र सरकार के हॉस्पिटल्स, पीजीआई, ईएसआईसी हॉस्पिटल्स, एम्स और दूसरे हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशंस के 3 लाख से ज्यादा नर्सों को फायदा होगा। NWA ने कहा, “8वें वेतन आयोग और नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस की प्रतिनिधियों के बीच काफी अहम और फायदेमंद बातचीत आज पूरी हो गई।”

NWA की दलील है कि नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 एंट्री-लेवल पे की डिमांड जीएनएम से बीएससी नर्सिंग की अपग्रेडेड एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के मुताबिक है। यह मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर की उस सिफारिश के भी मुताबिक है, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के बराबर रखने की बात कही गई है।

उनकी मांगों में सभी नर्सिंग अधिकारियों के लिए डेडिकेटेड नाइट ड्यूटी अलाउंस और R1H1 मैट्रिक्स के तहत रिस्क एंड हार्डशिप अलाउन्स की मांगें शामिल हैं। उनकी दलील है कि नर्स का काम काफी चैलेंजिंग है। उन्होंने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कंप्रिहेंसिव टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की भी मांग की है।

एसोसिएशन ने हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउन्स (TA) के कैलकुलेशन के मकसद से चंडीगढ़ को A1 सिटी की कैटेगरी में शामिल करने की भी मांग की है। इसके अलावा एसोसिएशन ने नर्सिंग अलाउन्स, ड्रेस अलाउन्स और स्पेशल अलाउन्स की भी मांग की है। एसोशिएशन ओल्ड पेंशन स्कीम की भी वापसी चाहता है।

PGIMR के नर्सों ने 3.25 फिटमेंट फैक्टर की भी मांग की है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लिविंग कॉस्ट, हाउसिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन से जुड़े खर्चों को देखते हुए ज्यादा फिटमेंट फैक्टर जरूरी है। उनकी मांग एनुअल इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने की भी है। उनकी दलील है कि अभी जितनी इंक्रीमेंट होती है, उससे बढ़ते खर्च से निपटना मुश्किल है।