8वें वेतन आयोग पर आया बड़ा अपडेट! अब केंद्रीय कर्मचारी 7 और 10 अगस्त के लिए कर लें पूरी तैयारी

8th Pay Commission updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के अगले पे रिवीजन के लिए जारी हलचल के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने दिल्ली स्थित केंद्रीय कर्मचारियों के संघों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ वार्ता करने के लिए तारीख का ऐलान कर दिया है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक 8वें वेतन आयोग ने दिल्ली में स्थित या पंजीकृत कर्मचारी यूनियनों को 7 अगस्त और 10 अगस्त को आयोग के साथ बातचीत करने का निमंत्रण दिया है। यह बैठकें अगली सैलरी रिवीजन पर चल रहे विचार-विमर्श की प्रक्रिया के तहत आयोजित की जा रही हैं।

23 जुलाई के नोटिस में आयोग ने क्या कहा?

वेतन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले स्टेकहोल्डर्स की सिफारिशें और विचार जानने के लिए यह परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। 23 जुलाई को जारी अपने नोटिस में आयोग ने कहा कि वह सिर्फ दिल्ली में स्थित या पंजीकृत केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश (UT) के कर्मचारियों के संघों, परिसंघों और यूनियनों से 7 अगस्त और 10 अगस्त को बातचीत करेगा। हालांकि, इस बैठक में भाग लेने के लिए एक शर्त रखी गई है। सिर्फ वही संगठन इस बैठक के लिए अपॉइंटमेंट मांग सकते हैं जिन्होंने पहले ही अपना ज्ञापन जमा कर दिया है और आयोग के साथ दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में अब तक कोई वार्ता नहीं की है।

31 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य

बैठक में शामिल होने के पात्र संगठनों के लिए आयोग ने समय-सीमा तय कर दी है। इच्छुक पात्र संगठनों को 31 जुलाई तक ऑनलाइन माध्यम से अपना अनुरोध जमा करना होगा। अनुरोध भेजते समय संगठनों को अपनी यूनिक मेमो आईडी साथ में दर्ज करनी होगी। बैठकों का स्थान और समय अलग से बताया जाएगा।

अन्य राज्यों के यूनियनों के लिए भी तय होगी तारीखें

आने वाले महीनों में देश भर के अन्य राज्यों के यूनियनों के साथ भी बातचीत की जाएगी। दिल्ली-एनसीआर के बाहर के कर्मचारी संघ और यूनियनें अपने स्वयं के राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आयोग के साथ बातचीत के लिए समय मांग सकते हैं। आयोग ने बताया है कि आने वाली बैठकों और परामर्श का पूरा शेड्यूल उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाता रहेगा।

क्यों अहम हैं ये बैठकें?

कर्मचारी यूनियनों और संघों के साथ बातचीत हर वेतन आयोग के कामकाज का एक मानक हिस्सा होती है। इस बातचीत के दौरान स्टेकहोल्डर्स आयोग के सामने अपने मेमोरेंडम देके हैं। इनमें पे-स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन लाभ, करियर में प्रगति और सेवा शर्तें जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल होते हैं। आयोग इन सभी मेमोरेंडम के साथ-साथ अलग अलग मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के इनपुट की समीक्षा करने के बाद ही केंद्र सरकार के लिए अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करता है।

क्या है 8वां वेतन आयोग?

केंद्र सरकार ने लाखों वर्किंग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन लाभों में संशोधन की सिफारिश करने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। आयोग की सिफारिशें एक बार अंतिम रूप ले लेने और सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद देश के लाखों सेवारत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए अगले दौर के वेतन संशोधन को निर्धारित करेंगी। फिलहाल आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले अलग अलग स्टेकहोल्डर्स से मिलने और राय बनाने के दौर में है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को दी मंजूरी, जानिए कर्मचारियों-पेंशनर्स को क्या होगा फायदा, 8वें पे कमीशन पर कैसा असर

पश्चिम बंगाल सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को दी मंजूरी, जानिए कर्मचारियों-पेंशनर्स को क्या होगा फायदा, 8वें पे कमीशन पर कैसा असर

वेतन आयोग Update: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे, महंगाई भत्ते (DA), पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम से लाखों कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व भत्तों के भविष्य के पुनरीक्षण का रास्ता साफ हो गया है।

पूर्व केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाले इस चार सदस्यीय पैनल को 6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर इस समय सीमा को आगे बढ़ा सकती है।

क्या होता है वेतन आयोग?

वेतन आयोग सरकार द्वारा गठित एक समिति होती है, जिसका मुख्य काम यह जांचना होता है कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में संशोधन की जरूरत है या नहीं। यह आयोग महंगाई, आर्थिक स्थिति, वित्तीय क्षमता और सार्वजनिक प्रशासन की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मौजूदा वेतन ढांचे की समीक्षा करता है। समीक्षा के आधार पर आयोग पे-स्केल, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा लाभों में बदलाव की सिफारिश करता है। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग का गठन करती है, जबकि राज्य सरकारें अपने स्वयं के आयोग का गठन करती हैं और उनकी सिफारिशों को लागू करने का निर्णय स्वतंत्र रूप से लेती हैं।

पश्चिम बंगाल का 7वां वेतन आयोग किन विषयों की जांच करेगा?

आयोग को दिए गए संदर्भ शर्तों के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों के मुआवजे और सेवा ढांचे की व्यापक समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है। यह पैनल यहां नीचे दिए गए विषयों की जांच करेगा-

मूल वेतन (Basic Pay), महंगाई भत्ता (DA), विशेष और अन्य भत्ते।

यात्रा भत्ता, पेंशन लाभ, पदोन्नति नीतियां और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ।

आयोग से एक ऐसे परिलब्धि ढांचे का सुझाव देने को कहा गया है जो सरकारी सेवा में प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने के साथ-साथ दक्षता, जवाबदेही और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा दे सके। नए वेतन ढांचे के तहत मौजूदा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के तरीकों की सिफारिश करना भी इसमें शामिल है।

महंगाई भत्ता (DA) की समीक्षा क्यों है खास?

महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए दिया जाने वाला जीवन-यापन समायोजन भत्ता है। यह बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में तय होता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है। आयोग को मौजूदा डीए ढांचे की समीक्षा करने और प्रस्तावित वेतन ढांचे के तहत एक उपयुक्त फॉर्मूले की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है। यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि उसकी योजना एक बार में बड़ी वृद्धि करने की बजाय राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच के डीए अंतर को धीरे-धीरे कम करने की है।

क्या कर्मचारियों की सैलरी तुरंत बढ़ जाएगी?

नहीं, इस चरण में तुरंत सैलरी नहीं बढ़ेगी। वेतन आयोग का गठन होते ही स्वचालित रूप से वेतन या पेंशन में वृद्धि नहीं होती है। पैनल पहले मौजूदा वेतन ढांचे का अध्ययन करेगा, जरूरत के हिसाब से स्टेकहोल्डर्स से परामर्श करेगा और अपनी सिफारिशें सौंपेगा। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार यह तय करेगी कि सिफारिशों को पूरी तरह स्वीकार किया जाए, उनमें संशोधन किया जाए या उन्हें चरणों में लागू किया जाए। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेतन, भत्तों या पेंशन में कोई संशोधन लागू होगा।

पेंशनभोगियों के लिए क्या हैं संकेत?

यह समीक्षा केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। आयोग से मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन को संशोधित करने की विधि की सिफारिश करने और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ योजनाओं और चिकित्सा लाभों सहित सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की जांच करने को कहा गया है। अगर सरकार पैनल की सिफारिशों को स्वीकार करती है तो कार्यरत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों दोनों के कुल मुआवजे और पेंशन लाभों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

क्या 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का पड़ेगा असर?

राज्य सरकार के संकल्पमें कहा गया है कि आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर भारत सरकार के निर्णय को ध्यान में रख सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार स्वचालित रूप से केंद्र के वेतन ढांचे को पूरी तरह अपनाएगी। राज्य वेतन आयोग स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और उनकी सिफारिशें राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती हैं।

आगे क्या होगा?

आयोग को गठन के 6 महीने के भीतर जितनी जल्दी हो सके अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। सिफारिशें प्रस्तुत होने के बाद, राज्य सरकार उन्हें लागू करने पर अंतिम फैसला लेने से पहले उनका गहराई से अध्ययन करेगी।

8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं! जानिए वे 5 बड़े आर्थिक कारण जो तय करेंगे आपकी सैलरी

8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ ‘फिटमेंट फैक्टर’ ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।

फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।

यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।’

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?

फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।

आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।

New Tax Regime: अब 10 में 9 टैक्सपेयर्स चुन रहे हैं न्यू टैक्स रिजीम, जानिए 5 बड़े कारण

New Tax Regime: इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले ज्यादातर लोग न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल उनके पास रिटर्न फाइल करने वाले 80% से 95% तक टैक्सपेयर्स ने नया टैक्स सिस्टम चुना है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या लगातार बढ़ी है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं।

  1. टैक्स में ज्यादा राहत मिलने लगी

न्यू टैक्स रिजीम में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाई है। टैक्स स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा बढ़ाया गया है। इसी वजह से पहले के मुकाबले कई सैलरीड लोगों का टैक्स कम हो गया है।

ClearTax का कहना है कि कम टैक्स दरें, ज्यादा टैक्स रिबेट और बढ़ा हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बना रहे हैं।

2. कागजी झंझट लगभग खत्म

ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA, 80C, 80D और दूसरे डिडक्शन के लिए कई तरह के दस्तावेज संभालकर रखने पड़ते हैं। न्यू टैक्स रिजीम में इसकी जरूरत काफी कम हो जाती है। इसलिए ITR भरना भी आसान हो गया है।

SBHS & Associates के पार्टनर हिमांक सिंगला कहते हैं कि लोग अब सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश नहीं करना चाहते। आसान प्रक्रिया की वजह से वे तेजी से न्यू टैक्स रिजीम की तरफ बढ़ रहे हैं।

3. कम टैक्स रेट का फायदा

जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए न्यू टैक्स रिजीम सीधे टैक्स बचाने का मौका दे रही है। यही वजह है कि हर साल इसे चुनने वालों की संख्या बढ़ रही है।

HJ Aggarwal & Co. के पार्टनर सीए हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, इस साल उनकी फर्म के करीब 95% क्लाइंट्स ने न्यू टैक्स रिजीम चुनी है। पिछले साल यह आंकड़ा 70% से थोड़ा ज्यादा था, जबकि दो साल पहले सिर्फ 20% लोग इसे चुन रहे थे।

4. ITR फाइल करना पहले से आसान

न्यू टैक्स रिजीम में कम कैलकुलेशन और कम दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इससे रिटर्न जल्दी फाइल हो जाता है।

TaxSpanner के को-फाउंडर और CEO सुधीर कौशिक कहते हैं कि 12 लाख रुपये तक की आय वाले कई टैक्सपेयर्स सिर्फ इसलिए न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं क्योंकि इसमें दस्तावेज कम लगते हैं और पूरी प्रक्रिया आसान है।

5. फिर भी हर किसी के लिए सही नहीं

न्यू टैक्स रिजीम भले ही ज्यादातर लोगों की पहली पसंद बन गई हो, लेकिन हर टैक्सपेयर के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है। NA Shah Associates के पार्टनर गोपाल बोहरा का कहना है कि जिन लोगों को HRA, होम लोन के ब्याज, Chapter VI-A के तहत मिलने वाले डिडक्शन या दूसरे बड़े टैक्स बेनेफिट मिलते हैं, उनके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अब भी ज्यादा फायदे की हो सकती है।

वहीं, S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना भी सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपना टैक्स निकालकर जरूर देखें। अगर आपके पास HRA, होम लोन, NPS, PPF, EPF या दूसरे बड़े डिडक्शन हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आज भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

EPS Pension Calculation: 10 से 25 साल की नौकरी पर कितनी बनेगी मंथली पेंशन? 

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8th Pay Commission: कब से आएगी बढ़ी हुई सैलरी? जानें 8वें वेतन आयोग में किसे मिलेगा फायदा और कब तक लागू होंगी सिफारिशें

8th CPC Beneficiaries & Timeline: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की बेसिक सैलरी, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए बनाए गए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग पर बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है। दशक में एक बार गठित होने वाला यह आयोग लगभग 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन ढांचे को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से डेटा जुटाने और बैठकें करने में जुटा है। आइए जानते हैं कि इस आयोग से किन-किन लोगों को लाभ मिलेगा और इसकी सिफारिशें कब तक लागू हो सकती हैं।

8वें वेतन आयोग की मौजूदा स्थिति

8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके अलावा पूर्व आईएएस पंकज जैन (सदस्य-सचिव) और आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) इस पैनल का हिस्सा हैं।

आयोग ने सुझाव जमा करने की समयसीमा 15 जून तय की थी और सैलरी/सर्विस डेटा कलेक्शन की समयसीमा 31 जुलाई रखी है। मार्च से ही आयोग की टीम देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों, रेलवे और रक्षाकर्मियों के प्रतिनिधियों से सीधे सुझाव ले रही है।

किन-किन चीजों की समीक्षा कर रहा है आयोग?

आयोग कुल 18 पे-लेवल्स के आधार पर कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के पूरे पे-स्ट्रक्चर की समीक्षा कर रहा है:

  • मूल वेतन: बेसिक पे और पे-मैट्रिक्स का पुनर्गठन।
  • भत्ते: महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR) और मकान किराया भत्ता (HRA) आदि।
  • पेंशन और अन्य लाभ: पेंशन फॉर्मूला, इंक्रीमेंट नियम, पदोन्नति और अन्य वित्तीय लाभ।

किसे मिलेगा फायदा?

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लगभग 1 करोड़ लाभार्थियों पर लागू होंगी जिसमें करीब 50 लाख एक्टिव केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। पात्र श्रेणियों की पूरी सूची इस प्रकार है:

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी: औद्योगिक और गैर-औद्योगिक दोनों।

ऑल इंडिया सर्विसेज: अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी।

सशस्त्र बल: भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के जवान व अधिकारी।

केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी: सभी UTs के प्रशासनिक और अन्य कर्मी।

भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग (IA&AD): कैग (CAG) और संबंधित ऑडिट विभागों के कर्मचारी।

नियामक निकायों के सदस्य: संसद के अधिनियमों के तहत गठित रेगुलेटरी बॉडीज के अधिकारी।

न्यायपालिका: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स के कर्मचारी, साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी।

कब तक आएंगी सिफारिशें और कब मिलेगा पैसा?

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया था और इसे अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। 18 महीने के तय समय के हिसाब से आयोग की अंतिम रिपोर्ट फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच आ सकती है।

पिछले वेतन आयोगों के रुझान को देखें तो सिफारिशें जमा होने के बाद उन्हें लागू करने और संशोधित वेतन देने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में आने वाली सिफारिशों का पूरा लाभ कर्मचारियों और पेंशनर्स को 2029 या 2030 तक पूरी तरह मिल पाएगा।

नौकरी 10 साल से पहले छोड़ने पर आपके EPS का क्या होगा? जानिए ईपीएफओ का नियम क्या है

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग ईपीएफओ की स्कीम ईपीएफ और ईपीएस के तहत आते हैं। ईपीएफ का मतलब एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) है, जबकि ईपीएस का मतलब एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। ईपीएफ में जमा पैसा रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयीज को मिल जाता है। ईपीएस में जमा पैसे से एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। शर्त यह है कि नौकरी कम से कम 10 पूरी होने के बाद ही एंप्लॉयीज पेंशन का हकदार होता है। सवाल है कि नौकरी 10 साल पूरी नहीं हुई है तो क्या होगा?

EPS 2026 में पेंशन के लिए शर्त

एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) 2026 ने ईपीएस 1995 की जगह ले ली है। नई स्कीम में भी यह कहा गया है कि कोई एंप्लॉयीज पेंशन का हकदार तभी होगा, जब उसकी नौकरी कम से कम 10 साल पुरानी होगी। ईपीएस 1995 में भी यह शर्त थी। इस शर्त को पूरी करने वाले एंप्लॉयीज रिटायरमेंट के बाद पेंशन के हकदार होंगे।

10 साल से पहले नौकरी छोड़ने पर विकल्प

एंप्लॉयी की नौकरी अगर 10 साल पुरानी नहीं है तो ईपीएस में जमा उसके पैसे के लिए दो विकल्प हैं। वह इस पैसे को विड्रॉ यानी निकाल सकता है या स्कीम सर्टिफिकेट हासिल कर सकता है। अगर एंप्लॉयी की उम्र रिटायरमेंट की उम्र से कम है तभी वह इन दोनों विकल्पों में से किसी एक का इस्तेमाल कर सकता है।

नौकरी छोड़ने के 36 महीने बाद ही विड्रॉल की इजाजत

ईपीएस 2026 में विड्रॉल के नियम में बदलाव किया गया है। नए नियम के मुताबिक, अगर कोई एप्लॉयी रिटायरमेंट की उम्र से पहले नौकरी छोड़ देता है वह ईपीएस अकाउंट में अंतिम बार जमा कंट्रिब्यूशन के 36 महीने बाद ही अपना पैसा निकालने का हकदार होगा। दूसरा, रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचने पर वह इस पैसे को निकाल सकता है। इन दोनों में से जो पहले होगा वह लागू होगा।

एंप्लॉयी के पास स्कीम सर्टिफिकेट का भी विकल्प

नियम में कहा गया है, “रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचने से पहले अगर एंप्लॉयी नौकरी छोड़ता है और उसकी सर्विस 10 साल पूरी नहीं हुई है तो ईपीएस अकाउंट में अंतिम कंट्रिब्यूशन की तारीख से 36 महीने बाद ही विड्रॉल बेनेफिट का इस्तेमाल कर सकता है।” दूसरा विकल्प स्कीम सर्टिफिकेट का है। इसमें एंप्लॉयी के दूसरी नौकरी ज्वाइन करने पर पिछली नौकरी का सर्विस पीरियड कैरी-फॉरवर्ड हो जाता है।

विड्रॉल अमाउंट के कैलकुलेशन का फॉर्मूला

EPS 2026 के शिड्यूल II के मुताबिक, विड्रॉल की स्थिति में एंप्लॉयी को मिलने वाले पैसे का कैलकुलेशन एलिजिबल सर्विस की महीनों की संख्या पर निर्भर करता है। एग्जिट के वक्त पेंशनएबल सैलरी को उस फैक्टर से गुणा किया जाता है जिसके बारे में सर्विस के पीरियड के हिसाब से शिड्यूल में बताया गया है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं।

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उदाहरण से ऐसे समझ सकते हैं

मान लीजिए कोई व्यक्ति 36 महीने नौकरी करने के बाद इस्तीफा दे देता है। उसकी पेंशनएबल सैलरी 15,000 है तो विड्राल बेनेफिट के कैलकुलेशन के लिए पेंशनएबल सैलरी को शिड्यूल में बताए गए फैक्टर से गुणा करना होगा।

8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन से कर्मचारी नाराज! इस बात पर यूनियनों और सरकार में भारी टकराव

8th Pay Commission Pension Update: 8वें वेतन आयोग के गठन को 3 नवंबर 2026 तक लगभग 9 महीने पूरे होने वाले हैं। आयोग अपनी 18 महीने की निर्धारित समय-सीमा का आधा सफर जल्द तय कर लेगा। जुलाई महीने में कोलकाता और भुवनेश्वर का दौरा पूरा करने के बाद अब आयोग देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों के साथ बैठकों का अगला दौर शुरू करने जा रहा है।

लेकिन आयोग की इन सिफारिशों के बीच पेंशन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन और कर्मचारी यूनियनों की मांगों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सरकार नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के रिव्यू पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली पर अड़े हुए हैं।

गजट नोटिफिकेशन का क्या है मैंडेट?

नवंबर 2025 में जारी सरकारी गजट नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग की नियम एवं शर्तों (ToR) को स्पष्ट किया गया है:

मौजूदा स्कीम्स का रिव्यू: आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह NPS और अप्रैल 2025 में लागू हुई UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन लाभों की समीक्षा करे।

सुधार की सिफारिशें: नोटिफिकेशन में NPS/UPS को खत्म करने या ओपीएस (OPS) वापस लाने का कोई जिक्र नहीं है। आयोग को केवल मौजूदा फ्रेमवर्क के भीतर ही सुधार और सुविधाएं बढ़ाने के सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

वित्तीय बोझ का ध्यान: सरकार ने आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि बिना योगदान वाली पेंशन योजनाओं के वित्तीय प्रभाव का ध्यान रखकर ही कोई फैसला लिया जाए।

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारी यूनियनों की मांगें और सरकार का रुख एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं:

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों का क्या है तर्क?

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में ओपीएस की बहाली की पुरजोर वकालत की है। यूनियनों का तर्क है कि NPS के तहत पेंशन पूरी तरह से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, जिससे 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

कर्मचारी संगठनों ने आंकड़े देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 में UPS लागू होने के बावजूद, लगभग 26 लाख NPS सब्सक्राइबर्स में से केवल 1.22 लाख (लगभग 4.5%) कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। यह दिखाता है कि कर्मचारियों को यह स्कीम खास पसंद नहीं आ रही है।

पेंशनर्स एसोसिएशनों की मांग है कि अगर ओपीएस पूरी तरह लागू नहीं होता, तो कम से कम न्यूनतम पेंशन की गारंटी, सरकार का अधिक अंशदान और निश्चित आय का मजबूत प्रावधान किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

8वां वेतन आयोग आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों का दौरा कर राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और कर्मचारी यूनियनों के साथ अपनी परामर्श प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, आयोग और केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गजट के सीमित दायरे (NPS/UPS रिव्यू) और कर्मचारियों की मुख्य मांग OPS बहाली के बीच एक संतुलित और सर्वमान्य रास्ता निकालने की होगी।

सपा-कांग्रेस से सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे, इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा : योगी

CM Yogi Barabanki Speech

CM Yogi Barabanki Speech: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी की धरा से प्रदेशवासियों को आगाह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व समाजवादी पार्टी विरासत, विकास, गांव-गरीब, किसानों, नौजवानों और महिलाओं की जन्मजात विरोधी हैं। इनसे सावधान और सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे अन्यथा जैसे ही इनसे सटेंगे तो खतरा बढ़ेगा। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव, सरकारी धन की डकैती व लूट के बारे में बताइए। मुख्यमंत्री ने लोधेश्वर महादेव के सामने से जाने वाली सड़क को टूलेन से फोरलेन बनाने और गेट को भव्य बनाने के लिए प्रस्ताव मांगा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बाराबंकी में रामनगर व दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 542 करोड़ से अधिक की 82 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। सीएम ने साहित्यिक विभूतियों, खिलाड़ियों, किसानों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, सीमा की सुरक्षा करने वाले युवाओं आदि का नाम लेकर बाराबंकी को विरासत, आध्यात्मिकता, साहित्य, समर्पण, युवा शक्ति से ओतप्रोत, स्वतंत्रता आंदोलन में अविस्मरणीय योगदान वाली प्रतिभाशाली व समृद्ध धरा बताया। 

 

कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो विकास की लौ पहुंची लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर पर ध्यान नहीं दिया गया

सीएम ने कहा कि बाराबंकी को लोधेश्वर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त है। सोमवार को बाबा का दर्शन कर अंतःकरण से आनंद की अनुभूति हुई। यहां अगल-बगल के कई जनपदों से श्रद्धालु आते हैं, फिर भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण ही रहा। आजादी के बाद भी आपके पैसे से विकास की लौ कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल तक तो पहुंची, लेकिन लोधेश्वर महादेव मंदिर, केडी सिंह बाबू की हवेली, पारिजात के महाभारत कालीन वृक्ष के संरक्षण, महादेवा, अयोध्या, काशी विश्वनाथ, गोला गोकर्णनाथ, महापुरुषों, वीरांगनाओं आदि के नाम पर योजनाओं के लिए पैसा नहीं मिला।

 

हमारी सरकार भगवान लोधेश्वर महादेव का कॉरिडोर बना रही है, जिससे देश-प्रदेश के हर कोने से यहां आने वाला श्रद्धालु अभिभूत होगा और बाराबंकीवालों को आशीर्वाद व धन्यवाद देकर जाएगा। सरकार गोला गोकर्णनाथ में भी भव्य कॉरिडोर बना रही है। विंध्यवासिनी मंदिर का कॉरिडोर बन गया। पहले काशी में गंदगी थी और गलियां संकरी थीं लेकिन अब वह भी दिव्य-भव्य बन गई है। देश से जो भी काशी व अयोध्या आता है, हमें भी धन्यवाद देकर जाता है। 

केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी में 36 वर्ष बाद भारतीय टीम ने ओलंपिक में पदक जीता लेकिन उससे पहले मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू के समय भारत ने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता था। जिस खिलाड़ी ने हॉकी को पूरा जीवन दिया, उन केडी सिंह बाबू की हवेली बिक जाए, हमारी सरकार यह कतई स्वीकार नहीं करेगी। हमने तय किया कि वहां संग्रहालय का निर्माण होगा। सीएम ने अमेरिका के न्यू जर्सी में हुए फीफा विश्वकप का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्पेन व अर्जेंटीना के मैच को देखकर लोगों में गजब का उत्साह था। ऐसे ही जब हॉकी चलती है तो भारत की निगाहें उस पर रहती हैं। मेजर ध्यानचंद व केडी सिंह बाबू ने इसे नई ऊंचाई दी थी। 

सनातन सुरक्षित तो सब सुरक्षित

सीएम ने कहा कि विरासत के संरक्षण व सनातन मूल्यों के रक्षा के लिए महापुरुषों ने योगदान दिया। राजा बलभद्र सिंह, लाखन पासी, बिजली पासी, महाराज सुहेलदेव, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए योगदान दिया। सुहेलदेव ने जहां सालार मसूद को मारा था, हमारी सरकार ने बहराइच में वहीं उनका भव्य स्मारक बनाया है। लखनऊ में वीरांगना उदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई, बदायूं में अवंती बाई के नाम पर पीएसी बटालियन, बांदा में महारानी दुर्गावती, औरैया में लोकमाता अहिल्याबाई मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, निषादराज नाम पर रैनबसेरा का निर्माण किया है। देश के लिए योगदान व सनातन के लिए समर्पण देने वाले महापुरुषों को सरकार ने सम्मान दिया है। सनातन की सुदृढ़ नींव पर ही हमारा भविष्य सुरक्षित होगा। सनातन सुरक्षित है तो हम सभी सुरक्षित हैं। सनातन पर खतरा आया तो कोई बच नहीं पाएगा। लोगों को बांटने वाले इन सपाइयों व कांग्रेसियों के नमूनों के मुंह संकट के समय बंद हो जाते हैं। 

कट्टा- बम बनवाने वाले कराते थे गुर्गों से वसूली

सीएम ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बनाने और कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी, रामनवमी की शोभायात्रा, दुर्गापूजा के पंडाल पर प्रतिबंध लगाना सपा के लिए निरपेक्षता का मानक था। हमें ऐसे धर्मनिरपेक्षता को उखाड़ फेंककर सनातन की सुदृढ़ भूमि पर सुरक्षित भारत का निर्माण करना होगा। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सनातन को अपमानित करने वाले लोग त्योहारों के पहले उपद्रव और गुर्गों से वसूली कराते थे। इन लोगों ने गांवों- शहरों में कट्टा-बम बनवाना शुरू कर दिया, जिससे व्यापारी व बेटी की इज्जत से खिलवाड़ होता था। अब लखनऊ में बने ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान व उसके आका बाप-बाप कहकर चिल्लाते हैं। निवेश आने से अब यूपी में ही युवाओं को नौकरी मिल रही है। 

बुजुर्गों से बोले- युवाओं को सपा की गुंडागर्दी, उपद्रव व लूट के बारे में बताइए

सीएम ने कहा कि समाजवादी जाति से जाति को लड़ा रही है। एक समय कहावत थी कि देख सपाई, बिटिया घबराई। सीएम ने बुजुर्गों से अपील की कि युवाओं को इनकी गुंडागर्दी, उपद्रव, डकैती, अराजकता, लूट के बारे में बताइए। उन्होंने कहा कि सैफई घराना ने आमजन के पैसे पर लूट मचाई थी। सपा जिस जेपीएनआईसी को बना रही थी, उसकी कीमत 200 करोड़ थी, लेकिन 864 करोड़ खर्च होने के बावजूद भी बिल्डिंग अधूरी थी। हमारी सरकार से पहले सपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। सीएम ने यहां भी उनके घोटाले को उजागर किया। कहाकि जिसके लिए वे 15,200 करोड़ का एस्टिमेट बनाए थे। दो वर्ष बाद जमीन आने पर हमने प्रधानमंत्री जी से इसका शिलान्यास कराया और 11,800 करोड़ रुपये में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनाया। गोमती रिवर फ्रंट का कुल एस्टिमेट 167 करोड़ रुपये था, लेकिन 1700 करोड़ खर्च होने के बावजूद वह अधूरा ही रहा।

CM Yogi Barabanki Speech

डबल इंजन सरकार ने रोकी सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट 

सीएम ने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने तो कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर यहां तक कह दिया कि 100 में से 15 पैसे ही नीचे आम जनता तक जाता है। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने सपा की डकैती और कांग्रेस की लूट को रोका। इस पैसे से अब नौजवान को छात्रवृत्ति, बेटी की शादी, कन्या सुमंगला योजना का लाभ, टैबलेट, किसानों को सम्मान निधि, गरीबों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। जिस पैसे से यह कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल बना रहे थे, उस पैसे का हमने मुंह घुमा दिया और अब इससे कॉरिडोर बन रहा है। सैफई सिडिंकेट का युवाओं की नौकरी पर कब्जा था। नौकरियों की नीलामी होती थी, लेकिन अब बाराबंकी के युवाओं को भी निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरी मिल रही है। 

सनातन विरोधी है सपा-कांग्रेस का चरित्र

मुख्यमंत्री ने विपक्षियों (सपा-कांग्रेस) के वास्तविक चरित्र को सनातन विरोधी बताया, कहा कि य़ह जनता के हक, विकास की परियोजनाओं पर डकैती डालते थे। इनके कारनामों से यूपी के सामने पहचान का संकट था। देश में यूपी टॉप-3 इकॉनमी बन गया है। अब बाढ़ बचाव का स्थायी समाधान और गोमती नदी का सुंदरीकरण-पुनरुद्धार हो रहा है। लखनऊ व अयोध्या के बीच स्टेट कैपिटल रीजन (एससीआर) में शामिल बाराबंकी का विकास कोई रोक नहीं सकता।  

सपा चट कर जाती थी राशन

सीएम ने कहा कि हमने दरियाबाद के विधायक सतीश चंद्र शर्मा को खाद्य व रसद राज्यमंत्री बनाया तो वे यहां के साथ ही अन्य जनपदों का भी विकास कर रहे हैं। सपा गरीब का राशन चट कर जाती थी, लेकिन अब हर गरीब का राशन उसे ही मिलता है। धांधली करने वालों पर कार्रवाई होती है। सपा व कांग्रेस के समय गरीब को पेंशन, छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने से पहले घूस लिया जाता है। आज सीधे अकाउंट में पैसा जाता है, बीच में घूसखोरी नहीं चल सकती। रामनगर ने जिन्हें 2022 और बाराबंकी ने जिन्हें 2024 में चुना, उन्हें विकास की चर्चा करने की फुर्सत नहीं है। इन लोगों ने एक बार भी विकास के प्रस्ताव नहीं दिए। यदि रामनगर विधानसभा और बाराबंकी लोकसभा में कमल खिला होता तो यह क्षेत्र भी विकास की बुलंदियों को छू रहा होता। 

 

इस अवसर पर कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही, खाद्य व रसद राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा, विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा, दिनेश रावत, विधान परिषद सदस्य अंगद कुमार सिंह, इंजी. अवनीश कुमार सिंह, जिला पंचायत प्रशासक राजरानी रावत, उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद प्रियंका रावत, क्षेत्रीय अध्यक्ष अवधेश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष राम सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।

एंडी बर्नहैम ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने:10 साल में सातवें PM; पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद वित्त मंत्री बन सकती हैं

ब्रिटेन में सोमवार को एंडी बर्नहैम ने नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। वह पिछले 10 साल में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का वादा करते हुए कहा है कि उनकी सरकार लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं, जैसे महंगाई और खराब सार्वजनिक सेवाओं, पर सबसे ज्यादा ध्यान देगी। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण देने के बाद किंग चार्ल्स को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम ने किंग से मुलाकात की और औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 56 वर्षीय बर्नहैम ऐसे समय सत्ता में आए हैं, जब ब्रिटेन कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, खराब प्रदर्शन करने वाली सार्वजनिक सेवाएं और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं प्रमुख हैं। सरकार संभालने के साथ ही उन्हें अपनी नई कैबिनेट का भी गठन करना है। नई कैबिनेट पहली चुनौती होगी प्रधानमंत्री बनने के बाद बर्नहैम की पहली बड़ी चुनौती अपनी कैबिनेट का गठन होगी। खास तौर पर वित्त मंत्री की नियुक्ति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि पहले भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के बीच मतभेद कई सरकारों के लिए मुश्किल बने हैं। ऊर्जा सुरक्षा मंत्री एड मिलिबैंड को पहले इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन अब गृह मंत्री शबाना महमूद का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। शबाना पाकिस्तानी मूल की नेता हैं। हालांकि बर्नहैम ने कहा है कि उन्होंने अभी अपनी टीम पर अंतिम फैसला नहीं लिया है और अटकलों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। पहला फैसला- डिजिटल पहचान पत्र लागू करने का फैसला रद्द किया बर्नहैम सरकार के शुरुआती फैसलों पर भी सबकी नजर रहेगी। सरकार ने पहले ही एक अहम कदम उठाते हुए सभी कर्मचारियों के लिए डिजिटल पहचान पत्र लागू करने की योजना रद्द कर दी है। इस की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सरकार ने सितंबर 2025 में की थी। इसका मकसद यह था कि देश में काम करने वाले हर कर्मचारी की पहचान और उसके काम करने के कानूनी अधिकार की डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा सके। सरकार का मानना था कि इससे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कम होगा और अवैध प्रवासन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि इस योजना का शुरुआत से ही विरोध होने लगा। आलोचकों का कहना था कि इससे सरकार नागरिकों की निजी जानकारी पर जरूरत से ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकती है। डेटा सुरक्षा और निजता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। बर्नहैम के सामने 5 बड़ी चुनौतियां 1. सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से कमजोर बनी हुई है। 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी, ब्रेक्जिट और कोविड-19 महामारी के कारण लोगों का जीवन स्तर लगातार प्रभावित हुआ है। बर्नहैम ने वादा किया है कि वह आम लोगों की जिंदगी में वास्तविक सुधार लाएंगे। उन्होंने टैक्स न बढ़ाने का भी वादा किया है। 2. यूक्रेन, मिडिल ईस्ट और अमेरिका के साथ रिश्तों में संतुलन बर्नहैम घरेलू मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट नहीं देंगे। यूक्रेन युद्ध अभी जारी है और मिडिल ईस्ट में भी तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि इन दोनों मुद्दों पर ब्रिटेन की विदेश नीति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, क्योंकि NSA जोनाथन पॉवेल अपने पद पर बने रह सकते हैं। साथ ही अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्ते भी नई सरकार के लिए अहम होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ अच्छे संबंध बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं करने के कारण दोनों नेताओं के बीच तनाव पैदा हो गया था। 3. रक्षा बजट बढ़ाना और उसके लिए पैसा जुटाना रक्षा खर्च बढ़ाने को लेकर मतभेद की वजह से पिछले महीने कीर स्टार्मर सरकार के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि सेना के लिए प्रस्तावित बजट बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। इसके कुछ हफ्तों बाद स्टार्मर ने अगले चार वर्षों में रक्षा बजट में 15 अरब पाउंड (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी का ऐलान किया। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि एक्स्ट्रा पैसा कहां से आएगा और किन सरकारी विभागों के बजट में कटौती कर इसकी भरपाई की जाएगी। 4. इमिग्रेशन पर सख्त नीति और राजनीतिक संतुलन हाल के वर्षों में ब्रिटेन में शुद्ध प्रवासन (नेट माइग्रेशन) में काफी गिरावट आई है। इसकी वजह पिछली कंजर्वेटिव सरकार द्वारा लागू की गई सख्त इमिग्रेशन नीतियां हैं। इसे लेबर सरकार ने भी जारी रखा है। मई में एंडी बर्नहैम ने माना था कि इमिग्रेशन में कमी आई है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे और कम करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह पूर्व गृह मंत्री शबाना महमूद की सख्त इमिग्रेशन नीति को बड़े पैमाने पर जारी रखेंगे। हालांकि लेबर पार्टी के कई सांसद और उदारवादी समर्थक इसका विरोध करते रहे हैं। ऐसे में बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी के भीतर विरोध के बीच संतुलन बनाना होगी। 5. बढ़ता कल्याण और पेंशन खर्च ब्रिटेन में सरकार का सामाजिक कल्याण (वेलफेयर) पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह कामकाजी उम्र के उन लोगों की बढ़ती संख्या है, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सरकारी सहायता ले रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है, जो बेरोजगार हैं। हालांकि सामाजिक सुरक्षा पर होने वाले कुल सरकारी खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा सेवानिवृत्त लोगों पर जाता है। सरकारी पेंशन और दूसरी सहायता योजनाओं पर कुल सामाजिक सुरक्षा बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा खर्च होता है। अगर बर्नहैम इस खर्च को नियंत्रित कर पाते हैं, तो उनके पास सामाजिक आवास जैसी दूसरी योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करने का मौका मिलेगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। कीर स्टार्मर ने भी वेलफेयर खर्च घटाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी ही पार्टी के सांसदों के विरोध के बाद उन्हें अपने फैसले वापस लेने पड़े थे। यही वजह है कि बर्नहैम के लिए यह आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक होगी।

…तो बंद हो गया होता यूपी का चीनी उद्योग : सीएम योगी

CM Yogi Amroha rally: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले विकास, औद्योगिक निवेश व किसानों को गन्ना भुगतान संभव नहीं था। 2007 से 2017 के बीच सरकारों ने 29 चीनी मिलों को बंद किया था और 21 चीनी मिलों को औने-पौने दाम पर बेच दिया था। यदि वे सरकारें अभी होतीं तो अब तक यूपी का चीनी उद्योग बंद हो चुका होता। डबल इंजन की भाजपा सरकार 122 चीनी मिलों का संचालन कर रही है। 3.23 लाख करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। गन्ना मूल्य भी बढ़कर 400 रुपए प्रति कुंतल हो गया है। यूपी अब चीनी, गन्ना, एथेनॉल उत्पादन करने वाला नंबर-वन राज्य है।

 

सीएम योगी शनिवार को वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, गजरौला में अमरोहा व धनौरा विधानसभा क्षेत्र के लिए 207 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 43 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर जनपद के आध्यात्मिक इतिहास व महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कह सकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरोहा को अब कोई पिछड़ा नहीं कहेगा। इसने हस्तशिल्प व कारीगरी के माध्यम से दुनिया में अपना लोहा मनवाया है। ओडीओपी के जरिए अमरोहा के तबला व ढोलक की पहचान बनी है। यहां का किसान आम की उपज को वैश्विक बाजार में पहुंचा रहा है। मध्य गंगा नहर परियोजना भी पूरी हो रही है। गंगा एक्सप्रेसवे ने राह आसान कर दी है। 10 साल पहले कोई सोच नहीं सकता था कि अमरोहा से दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज की दूरी कम हो पाएगी। अब अमरोहा से हरिद्वार की दूरी भी आसान बनाएंगे और किसानों को जमीन का अच्छा दाम देंगे। विकास के नए प्रतिमान पर स्थापित हो रहा अमरोहा अपनी नई पहचान बनाएगा। औद्योगिक विकास के लिए हसनपुर में बन रहा पार्क जनपद को नई ऊंचाई देगा। 

यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ बरस रही समृद्धि 

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में आगामी 50-100 वर्ष की योजना को लेकर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। अब नौजवान बेरोजगार नहीं होगा, पलायन नहीं करेगा। 2017 के बाद से यूपी में सुरक्षा, सुशासन के साथ समृद्धि बरस रही है। सरकार तिगरी व गढ़ के लिए काम कर रही है। मां गंगा तिगरी की तरफ कुछ बढ़ रही हैं, इसलिए सिंचाई विभाग को निर्देश दिया गया है कि गंगाजी को चैनलाइज कर तिगरी व गढ़ मेले के स्वरूप को और भव्य करो, जिससे यह पश्चिमी उप्र में माघ व कुंभ मेले की तरह चमकता दिखे। 

पहले आस्था पर होता था प्रहार, अब किसी त्योहार पर रोक नहीं 

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले आस्था पर प्रहार होता था। कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, रामनवमी की शोभायात्रा, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोक लगाई जाती थी। जयश्रीराम कहने पर लाठी-डंडे चलते थे और सरकारें मौन रहती थीं लेकिन अब किसी त्योहार पर रोक नहीं है, बल्कि सरकार आस्था का सम्मान करते हुए हरसंभव सहयोग करती है।

सुरक्षा में सेंध लगाने वाले जेल या जहन्नुम जाएंगे 

सीएम ने जनपदवासियों से कहा कि सरकार जनप्रतिनिधियों के हर प्रस्ताव को धरातल पर उतार रही है। विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी नहीं है, लेकिन इसके लिए समय, सोच, संवेदना, नीति और नीयत चाहिए। पिछली सरकारों में हर जनपद में दंगे होते थे, लोग असुरक्षित थे। हमने कहा कि सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के लिए जेल या जहन्नुम ही जगह है। हमारी सरकार ने माफिया को मिट्टी में मिलाने का काम किया।

यहां के लोग कभी एक मंत्री से थे आतंकित

सीएम ने कहा कि यूपी अब सुरक्षा का मॉडल दे रहा है। सुरक्षा सुशासन लाती है। सुशासन निवेश और निवेश समृद्धि लेकर आता है। अब हर भर्ती में अमरोहा-धनौरा का नौजवान भी नियुक्ति पत्र पाता है, लेकिन पहले रामपुर व सैफई का सिडिंकेट नौकरियों में डकैती डालता था। अब आपकी अपनी सरकार है, कोई हक पर डकैती नहीं डाल सकता। 2017 में महेंद्र खड़गवंशी के प्रचार में आया था तो लोग एक मंत्री के आतंक से भयभीत थे। तब मैंने कहा था कि भाजपा सरकार आएगी तो ये सभी दुम दबाकर बिल में घुसकर ही खुद को सुरक्षित कर पाएंगे। अब यहां किसी का भय या आतंक नहीं। 

सीएम ने चेतन चौहान को भी याद किया

मुख्यमंत्री ने पूर्व क्रिकेटर व पूर्व मंत्री चेतन चौहान को भी याद किया। कहा कि वह नौगावां सादात व जनपद में खेल, विकास को बढ़ाने के लिए समर्पित थे। एनडीए सरकार चौधरी चरण सिंह के सपनों को साकार कर रही है। हर तबके को बिना भेदभाव सभी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जबकि 2017 के पहले यह संभव नहीं था।

 

गरीबों के हक पर डकैती डालते थे सपा-कांग्रेस के लोग

सीएम ने कहा कि कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने अपनी लाचारगी जताते हुए कहा था कि 100 में से 85 पैसे ही नीचे जनता तक पहुंचते हैं। यह छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि, गरीब के राशन, आवास, पेंशन, शौचालय का पैसा था, जिस पर सपा व कांग्रेस वाले डकैती डालते थे। अब डबल इंजन सरकार में गरीब को पूरी रकम सीधे उसके बैंक खाते में मिलती है। 

हर वर्ग के लिए योजनाएं लाई है सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर वर्ग के लिए योजनाएं हैं। निराश्रितों के लिए अटल आवासीय विद्यालय, गरीब, पिछड़ी व अनुसूचित जाति की बच्चियों के लिए कस्तूरबा गांधी विद्यालय है। आज मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय का शिलान्यास भी हो रहा है। बेटियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ मिल रहा है। सरकार ने हाल में शिक्षकों के लिए हर वर्ष पांच लाख रुपए के कैशलेस इलाज की व्यवस्था की है।

शिक्षामित्रों का मानदेय 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपए किया गया है। हर शिक्षामित्र, अनुदेशक, शिक्षक के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना भी लागू की गई। आपदा की चपेट में आने वाले शिक्षक के परिजनों को 80 लाख से डेढ़ करोड़ की सहायता मिलेगी। शिक्षामित्र या अनुदेशक के साथ घटना-दुर्घटना होने पर परिवार वालों को 30 से 80 लाख रुपए तथा रसोइया के परिजनों को दो लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। आपदा की चपेट में आने वाले किसानों के परिवारों को मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना में 24 घंटे के भीतर पांच लाख रुपए की सहायता दिलाई जाती है। 

विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं तरारा व खड़गवंशी, अमरोहा व नौगावां सादात वाले रजाई तानकर सोते हैं 

सीएम ने कहा कि किसानों-नौजवानों के हित में सरकारें आती हैं तो हर वर्ग के विकास के लिए कार्य होता है। जहां खानदान का कब्जा हो और एक ही परिवार सभी पदों पर काबिज हो, वहां विकास नहीं हो सकता। आपने राजीव तरारा व महेंद्र सिंह खड़गवंशी जैसे अच्छे विधायकों व कंवर सिंह तंवर को सांसद चुना तो विकास कार्य हो रहे हैं। हमारे विधायक निरंतर विकास के प्रस्ताव लेकर लखनऊ आते हैं। अमरोहा सदर व नौगावां सादात वाले शासन में पैरवी नहीं करते, वे जीतने के बाद रजाई तानकर सो गए। जनता ने इन दोनों क्षेत्रों में भी कमल खिलाया होता तो विकास की गति कई गुना बढ़ जाती। सीएम ने अमरोहावासियों को आश्वस्त किया कि डबल इंजन सरकार हर हित का ध्यान रखेगी। उन्होंने पैरोकारी के लिए अच्छे विधायक व सांसद चुनने की अपील करते हुए आमजन को आश्वस्त किया कि जल्द ही वे नौगावां सादात व हसनपुर भी आएंगे।

 

इस अवसर पर कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, सांसद कंवर सिंह तंवर, जिला पंचायत अध्यक्ष ललित तंवर, विधायक राजीव तरारा, महेंद्र सिंह खड़गवंशी, विधान परिषद सदस्य हरि सिंह ढिल्लो, भाजपा के जिलाध्यक्ष उदय गिरि गोस्वामी आदि मौजूद रहे।