DA Hike: त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा तोहफा! DA पर आ गया ये बड़ा अपडेट

8th CPC Latest Updates September 2026: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद देश के लगभग 55 लाख मौजूदा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स के लिए बड़ी खबरें निकलकर सामने आ रही हैं। आयोग के नियम एवं शर्तों (ToR) को मंजूरी मिले लगभग 10 महीने बीत चुके हैं और अब इसकी सिफारिशें लागू होने की दिशा में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इसी बीच सितंबर महीने में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी से लेकर राज्यों के दौरों और पेंशन संशोधन की मांगों तक, कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई बड़े अपडेट्स आए हैं। आइए जानते हैं कि इस बार कम फिटमेंट फैक्टर के बावजूद कर्मचारियों की सैलरी में 7वें वेतन आयोग से भी बड़ा उछाल क्यों आ सकता है।

सितंबर में मिल सकती है खुशखबरी, 63% तक बढ़ सकता है DA

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को सितंबर 2026 में जुलाई महीने के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का तोहफा मिलने की पूरी उम्मीद है। जनवरी 2026 में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद वर्तमान में कुल DA दर 60% है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीनों के आंकड़ों के आधार पर इस बार 3% की बढ़ोतरी का अनुमान है। 3% की इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, आमतौर पर इसकी घोषणा सितंबर में होती है, हालांकि कई बार यह अक्टूबर तक भी जा सकती है।

8वें वेतन आयोग का राज्यों का दौरा जारी

8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है। आयोग 1 सितंबर 2026 को जयपुर का अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर रहा है। आयोग 8 सितंबर को पुडुचेरी, 16 और 18 सितंबर को चंडीगढ़, और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु का दौरा करेगा। इससे पहले दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बैठकें पूरी की जा चुकी हैं।

पूर्व पेंशनरों की पेंशन समीक्षा का मामला व्यय विभाग को ट्रांसफर

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 18 अगस्त 2026 के एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन और ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन की याचिकाओं को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेजा है।

संगठन चाहते हैं कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को भी 8वें वेतन आयोग के ToR में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। इसके लिए 1985 (चौथे वेतन आयोग) की उस ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया जा रहा है, जब पूर्व कर्मचारियों के लिए भी नियमों में बदलाव कर आयोग के दायरे में लाया गया था।

कम फिटमेंट फैक्टर में भी 7वें वेतन आयोग से ज्यादा बढ़ेगी सैलरी!

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि 8वें वेतन आयोग में अगर 7वें वेतन आयोग (2.57) की तुलना में कम फिटमेंट फैक्टर (जैसे 2.1) भी रखा जाता है, तब भी कर्मचारियों को हाथ में ज्यादा सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के समय DA 125% तक पहुंच चुका था, जिससे बेसिक पे तो बढ़ा लेकिन प्रभाव कम हो गया। 8वें वेतन आयोग के समय कम DA होने के कारण 2.1 के फिटमेंट फैक्टर पर भी कर्मचारियों को सीधा 53% का शुद्ध फायदा होगा, जो 7th CPC के 32% से काफी अधिक है।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की सिफारिशें लागू होने की तय तारीख 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट की हरी झंडी के बाद ही होगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! इस डेट से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन पर आयोग ने उठाया ये कदम

8th CPC Pension Revision Update: 8वां वेतन आयोग की बैठकों के बीच देश के लाखों पेंशनर्स के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की मांग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन की मांग करने वाले आवेदनों को अंतिम विचार और उचित कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास भेज दिया है। आइए आपको बताते हैं कि पेंशन संगठनों ने क्या मांग रखी है और इस कदम का पूर्व कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।

किन पेंशनभोगी संगठनों ने भेजी है अर्जी?

DoPT ने जिन दो मुख्य कर्मचारी/पेंशनभोगी संगठनों के ज्ञापनों को व्यय विभाग को फॉरवर्ड किया है, उनके नाम ये हैं:

1- ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन: संगठन के महासचिव गिरिराज सिंह द्वारा 30 जुलाई 2026 को भेजा गया आवेदन।

2- ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन: संगठन के महासचिव सी. श्रीकुमार द्वारा 4 अगस्त 2026 को प्रस्तुत किया गया आवेदन।

DoPT ने 18 अगस्त 2026 के अपने ऑफिस मेमोरेडम में स्पष्ट किया है कि इन ज्ञापनों पर ‘उचित कार्रवाई’ के लिए इन्हें व्यय विभाग को सौंपा जा रहा है।

पेंशनभोगियों की मुख्य मांग क्या है?

पेंशनभोगी संगठनों की प्राथमिक मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन किया जाए। वर्तमान में पेंशनभोगी चाहते हैं कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के मुद्दे को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि जब आयोग वेतन और पेंशन ढांचे की समीक्षा करे, तो पुराने पेंशनभोगियों के हितों की भी अनदेखी न हो।

क्या पेंशन संशोधन को मंजूरी मिल गई है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। DoPT के मेमोरेंडम को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। DoPT ने अभी केवल पेंशनभोगियों की मांग को वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित किया है। इस आदेश में पेंशन संशोधन को मंजूरी नहीं दी गई है और न ही ToR में कोई संशोधन हुआ है। इस मेमोरेंडम में किसी भी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित पेंशन फॉर्मूले या अतिरिक्त लाभ का ऐलान नहीं किया गया है। आयोग के ToR में बदलाव का निर्णय केवल केंद्र सरकार के औपचारिक आदेश द्वारा ही संभव है।

चौथे वेतन आयोग (1985) का दिया गया ऐतिहासिक संदर्भ

पेंशनभोगी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया है।8 नवंबर 1985 को वित्त मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पारित कर चौथे वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन किया था। इसके जरिए आयोग को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पुराने और नए दोनों पेंशनभोगियों के लिए एक न्यायसंगत पेंशन ढांचे की समीक्षा करे।

इसी तर्ज पर संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी पुरानी और नई पेंशन दरों के बीच तालमेल बिठाने के लिए ToR में संशोधन किया जाए।

आगे क्या होगा?

अब यह पूरा मामला वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पाले में है। व्यय विभाग इन ज्ञापनों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि क्या 8वें वेतन आयोग के ToR में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाना चाहिए या नहीं। जब तक वित्त मंत्रालय या कैबिनेट की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 1 जनवरी 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा पर अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की जयपुर में अहम बैठक! सैलरी और पेंशन पर हो सकता है ये बड़ा फैसला

8th Pay Commission Jaipur Meeting: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन की प्रक्रिया के तहत आयोग देश भर के विभिन्न संघों और संगठनों के साथ लगातार परामर्श कर रहा है।

इसी कड़ी में 8वां वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ आधिकारिक बैठकें करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग कर्मचारियों की समस्याओं, मांगों और कामकाजी परिस्थितियों का जायजा ले रहा है।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सितंबर और अक्टूबर में किन-किन शहरों का दौरा करेगा आयोग?

मार्च से ही आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर आंकड़े और सुझाव जुटा रहा है। आगामी दिनों का शेड्यूल इस प्रकार है:

  • चेन्नई (तमिलनाडु): 7 से 8 सितंबर
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर
  • चंडीगढ़: 16 से 18 सितंबर
  • बेंगलुरु (कर्नाटक): 7 से 8 अक्टूबर (अपॉइंटमेंट के लिए 18 सितंबर तक आवेदन खुला है।)
  • मुंबई (सेंट्रल रेलवे): रेलवे कर्मचारियों की कामकाजी स्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव लेने के लिए आयोग मुंबई में सेंट्रल रेलवे का दौरा भी करेगा।

जयपुर बैठक और राज्य दौरों का क्या है मुख्य एजेंडा?

हालांकि आयोग ने कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों के आधार पर बैठकों में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा हो रही है:

फिटमेंट फैक्टर और बेसिक पे: बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी और नए फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण।

महंगाई के हिसाब से वेतन संशोधन: महंगाई दर और जीवन यापन की लागत के अनुकूल सैलरी स्ट्रक्चर तैयार करना।

भत्तों का पुनर्गठन: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में सुधार।

पेंशन सुधार: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा को बेहतर बनाना।

कर्मचारी कल्याण और कार्य परिस्थितियां: कर्मचारियों के मनोबल और कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आयोग के गठन 3 नवंबर 2025 से 18 महीने के भीतर सिफारिशें सौंपनी हैं। इसका मतलब है कि आयोग फरवरी से मई 2027 के बीच अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।

पिछले वेतन आयोगों के रुझान को देखें तो सिफारिशें आने के बाद उनके अंतिम क्रियान्वयन में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। यानी 2027 में होने वाली घोषणाओं का पूर्ण लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल सकता है।

SCSS vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद कौन-सी स्कीम से होगी ज्यादा रेगुलर इनकम? समझिए पाई-पाई का कैलकुलेशन!

Senior Citizens Savings Scheme vs Post Office MIS: रिटायरमेंट के बाद हर किसी की सबसे बड़ी प्राथमिकता एक सुरक्षित और तय रेगुलर इनकम की होती है। ऐसे में डाकघर की दो सबसे लोकप्रिय सरकारी योजनाएं सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) और पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS) निवेशकों की पहली पसंद बनती हैं।

दोनों ही स्कीम्स पूरी तरह से सरकारी गारंटी के साथ सुरक्षित हैं, लेकिन दोनों की ब्याज दरें, निवेश की सीमा, भुगतान का तरीका और टैक्स नियम काफी अलग हैं। आइए जानते हैं कि आपके रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम ज्यादा बेहतर रहेगी।

कौन कर सकता है निवेश?

SCSS: यह स्कीम मुख्य रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। हालांकि, VRS लेने वाले या सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी कुछ शर्तों के साथ 60 साल से पहले भी खाता खुलवा सकते हैं।

Post Office MIS: इस योजना में उम्र की कोई पाबंदी नहीं है। सीनियर सिटीजन के अलावा 18 साल से अधिक का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें खाता खुलवा सकता है।

ब्याज दरें और पे-आउट का तरीका

SCSS: जुलाई से सितंबर 2026 तिमाही के लिए SCSS में 8.2% सालाना का ब्याज मिल रहा है। इस योजना में ब्याज का भुगतान हर तीन महीने अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले कार्यदिवस पर होता है।

Post Office MIS: POMIS में 7.4% सालाना का ब्याज दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें ब्याज का भुगतान हर महीने सीधे आपके बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते में होता है, जो घरेलू खर्च चलाने के लिए बेहद सुविधाजनक है।

अधिकतम कितना कर सकते हैं निवेश?

SCSS: इसमें एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है।

Post Office MIS: सिंगल अकाउंट में अधिकतम ₹9 लाख और जॉइंट अकाउंट में अधिकतम ₹15 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

कैलकुलेशन: किसमें कितना मिलेगा रिटर्न?

आइए गणित के जरिए समझते हैं कि अधिकतम निवेश पर आपको किस स्कीम से कितनी कमाई होगी:

केस 1: SCSS (₹30 लाख का निवेश @ 8.2%)

  • कुल निवेश: ₹30,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹2,46,000
  • हर 3 महीने की कमाई: ₹61,500
  • मंथली एवरेज: लगभग ₹20,500 प्रति माह

केस 2: Post Office MIS – जॉइंट अकाउंट (₹15 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹1,500,000
  • सालाना ब्याज: ₹1,11,000
  • हर महीने की कमाई: ₹9,250

केस 3: Post Office MIS – सिंगल अकाउंट (₹9 लाख का निवेश @ 7.4%)

  • कुल निवेश: ₹9,000,000
  • सालाना ब्याज: ₹66,600
  • हर महीने की कमाई: ₹5,550

लॉक-इन पीरियड और टैक्स के नियम

दोनों ही योजनाओं का मैच्योरिटी पीरियड 5 साल का होता है। हालांकि, कुछ कटौतियों और शर्तों के साथ समय से पहले निकासी की जा सकती है। दोनों ही स्कीम्स से मिलने वाला ब्याज निवेशक की टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह से टैक्सेबल होता है। तय सीमा से अधिक ब्याज होने पर बैंक/डाकघर द्वारा TDS भी काटा जा सकता है। (SCSS में सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ शुरुआती निवेश पर मिलता है)।

आपके लिए कौन-सी स्कीम है बेस्ट?

SCSS चुनें: अगर आपके पास रिटायरमेंट कॉर्पस बड़ा है, आपकी उम्र 60 साल से ऊपर है और आप ज्यादा रिटर्न (8.2%) के साथ हर 3 महीने में एक बड़ी रकम पाना चाहते हैं।

Post Office MIS चुनें: अगर आपको हर महीने रसोई और घर के रेगुलर खर्चों के लिए तय मंथली इनकम की जरूरत है।

स्मार्ट स्ट्रेटेजी: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद दोनों का कॉम्बिनेशन सबसे बेस्ट होता है। आप अपने फंड का बड़ा हिस्सा SCSS में डालकर ज्यादा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और एक हिस्सा MIS में लगाकर हर महीने का कैश-फ्लो मेंटेन रख सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NPS Equity: किस पेंशन फंड ने NPS इक्विटी में सबसे ज्यादा रिटर्न दिया? समझिए 10 साल का पूरा हिसाब

NPS Equity: NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम में रिटायरमेंट के लिए निवेश के सबसे अच्छे विकल्पों में गिना जाता है। इसमें इक्विटी यानी Scheme E एक अहम विकल्प है। इसमें आपके निवेश का पैसा मुख्य रूप से शेयरों और शेयर से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है।

इसलिए इसमें डेट या सरकारी सिक्योरिटीज की तुलना में ज्यादा रिटर्न की संभावना रहती है। लेकिन बाजार गिरने पर नुकसान का जोखिम भी होता है। यह विकल्प खासतौर पर लंबे समय के रिटायरमेंट निवेश के लिए देखा जाता है।

NPS Scheme E में किसने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?

NPS Scheme E के 10 साल के आंकड़ों में HDFC पेंशन सबसे आगे है। सरकारी सेक्टर में इसने 10 साल में 13.01% का सालाना रिटर्न दिया। बेंचमार्क का रिटर्न 13.12% रहा। ICICI Prudential 12.90% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। Kotak ने 12.75% रिटर्न दिया।

पेंशन फंड10 साल का रिटर्नशुरुआत से रिटर्न
HDFC Pension13.01%13.93%
ICICI Prudential12.90%12.44%
Kotak12.75%11.82%
UTI12.54%12.19%
LIC11.69%12.24%
SBI11.64%10.66%

नोट : आंकड़े NPS Trust के हैं। डेटा 25 अगस्त 2026 तक का है।

प्राइवेट सेक्टर में भी HDFC आगे

नॉन गवर्नमेंट सेक्टर में भी HDFC Pension का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। इसने 10 साल में 12.99% का सालाना रिटर्न दिया। ICICI Prudential का रिटर्न 12.88% रहा। Kotak ने 12.74% रिटर्न दिया।

NPS में 100% इक्विटी का विकल्प

NPS में इक्विटी में ज्यादा पैसा लगाने के विकल्प भी हैं। Active Choice में निवेशक खुद एसेट अलोकेशन तय कर सकता है। Auto Choice में उम्र के हिसाब से इक्विटी का हिस्सा बदलता रहता है। Multiple Scheme Framework के तहत नॉन गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स के लिए 100% तक इक्विटी का विकल्प भी है।

सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला न करें

किसी NPS फंड को चुनते समय सिर्फ रिटर्न देखना ठीक नहीं है। लंबी अवधि का प्रदर्शन देखना जरूरी है। बाजार गिरने पर फंड ने कैसा प्रदर्शन किया, यह भी देखना चाहिए।

इसके अलावा बेंचमार्क से तुलना करें। पोर्टफोलियो और जोखिम भी देखें। रिटायरमेंट के लिए निवेश है, इसलिए सिर्फ पिछले एक साल के अच्छे रिटर्न के पीछे भागना सही नहीं है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8th Pay Commission: 3.61 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग! जानिए कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी और पेंशन?

8th Pay Commission Fitment Facto: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। 7वें वेतन आयोग में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था जिससे न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुई थी। अब 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियनों ने 3.61 से लेकर 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

कागज पर फिटमेंट फैक्टर के ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन असलियत में इनसे हर महीने कर्मचारियों की सैलरी में हजारों रुपये का अंतर आने वाला है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों है अहम?

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिसे कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे से गुणा करके नए वेतन आयोग के तहत नई सैलरी तय की जाती है। यह न केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को समाहित करता है, बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आय में वृद्धि भी सुनिश्चित करता है। पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन तय करने में भी इसी फैक्टर का इस्तेमाल होता है।

यूनियनों की प्रमुख मांगें: किसकी कितनी है सिफारिश?

अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगें और कैलकुलेशन रखी हैं:

BPMS (फिटमेंट फैक्टर 4.00 – न्यूनतम पे ₹72,000): भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने सबसे ज्यादा 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 तय करने का प्रस्ताव है। BPMS का कहना है कि इसमें 1.58 घटक केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को बेअसर करने के लिए है, जबकि बाकी हिस्सा राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आधार पर है।

NCJCM स्टाफ साइड और BPS (फिटमेंट फैक्टर 3.833 – न्यूनतम पे ₹69,000): नेशनल काउंसिल JCM (स्टाफ साइड) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है।

इसके तहत न्यूनतम सैलरी ₹69,000 होगी। NCJCM ने 5 सदस्यों के परिवार के खाने, कपड़े, मकान, शिक्षा, शादी और तकनीक जैसे 15वें ILC मानदंडों के आधार पर यह गणना की है।

MSA (फिटमेंट फैक्टर 3.61 – न्यूनतम पे ₹65,000): मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है, जिससे न्यूनतम पे ₹65,000 (लेवल-1) हो जाएगी।

सैलरी मैट्रिक्स: लेवल के हिसाब से कितना होगा फायदा?

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के कारण पे-मैट्रिक्स में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:

लेवल 1: MSA (3.61) के तहत ₹64,980, NCJCM (3.833) के तहत ₹69,000 और BPMS (4.00) के तहत यह ₹72,000 होगी।

लेवल 6: NCJCM के प्रस्ताव के अनुसार बेसिक पे बढ़कर ₹1,35,700 हो जाएगी।

लेवल 9 व 10 (मर्ज्ड): NCJCM के तहत यह ₹2,15,100 तक पहुंच जाएगी।

क्या सरकार उठा पाएगी इसका वित्तीय बोझ?

NCJCM का तर्क है कि 2014-15 के बाद से देश की जीडीपी में 165.23% और कुल कर राजस्व में 205.41% की भारी वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार के पास वेतन में इस बढ़ोतरी के वित्तीय प्रभाव को आसानी से संभालने की पूरी क्षमता है। रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी जोर दिया है कि बेसिक पे में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने से रिटायर्ड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होती है।

50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग द्वारा चुना जाने वाला फिटमेंट फैक्टर बेहद निर्णायक होगा। यह न केवल हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी तय करेगा, बल्कि पेंशन, ग्रेच्युटी की सीमा और कम्यूटेशन अमाउंट पर भी लंबे समय तक असर डालेगा।

ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

Pension Scheme: अटल पेंशन योजना या PM मानधन, किस स्कीम में ज्यादा फायदा? 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के अहम फैसलों पर लगाई मुहर, प्रदेश के विकास के लिए 10 हजार 630 करोड़ रुपये मंजूर

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के अहम फैसलों पर लगाई मुहर, प्रदेश के विकास के लिए 10 हजार 630 करोड़ रुपये मंजूर

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अगस्त को मध्यप्रदेश के विकास के लिए कई अहम फैसले लिए। उनके नेतृत्व में कैबिनेट ने प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सायबर सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को गति देने के लिए 10 हजार 630 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी। कैबिनेट ने मप्र सड़क विकास निगम द्वारा नाबार्ड इंफ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस (निडा) से 4 हजार 600 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किए जाने के लिए राज्य शासन द्वारा प्रत्याभूति (गारंटी) प्रदाय किए जाने का अनुमोदन दिया। सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) को 12 मार्गों के निर्माण के लिए नाबार्ड इंफ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट अस्सिटेंस के माध्यम से 4,600 करोड़ रुपये के ऋण के लिए शासकीय गारंटी देने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

इन मार्गों में भोपाल-विदिशा मार्ग, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ-मप्र, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग को 6-लेन मय पेव्ड, नीमच-मनासा-रामपुरा झालावाड मार्ग एसएस-7, इंदौर-देपालपुर मार्ग का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर, चापडा-नेवरी से देवास तक एसएच-64 का 2-लेन मय, दिनारा-दतिया,सेवड़ा मार्ग,आगर-सांरगपुर मार्ग, सोयत-माचलपुर-जीरापुर, राहतगढ़-खुरई से खिमलासा मार्ग तथा सुन्दरा- सिंहपुर-कोठी-बिरसिंहपुर-सेमरिया गोहदा-सिरमोर शामिल है।

 

राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व हस्तांतरण नाममात्र मूल्य पर 'मप्र सड़क विकास निगम' (एमपीआरडीसी) को किया जाएगा। इसके बदले निगम का संचालक मंडल राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी (शेयर) जारी करेगा। इस ऋण के ब्याज और ऋण का भुगतान हस्तांतरित मार्ग से प्राप्त टोल संग्रहण और अन्य स्त्रोतों से प्राप्त राशि से किया जाएगा। मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम, 2012 में संशोधन किया जाकर इस मार्गों पर टोल संग्रहण और अन्य स्त्रोतों से प्राप्त राशि को सीधे निगम की आय माना जाएगा। स्वीकृत ऋण सीमा के भीतर मार्गों में परिवर्तन और नवीन मार्गों के चयन का अधिकार निगम के संचालक मंडल के पास रहेगा। परियोजना के तहत राशि का आहरण 'जस्ट इन टाइम' (जेआईटी) सिद्धांत के अनुसार केवल आवश्यकता पड़ने पर ही किया जाएगा।

 

सिवनी-बालाघाट मार्ग निर्माण पर फोकस-कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट 91.64 किमी मार्ग, 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ निर्माण और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कुल 3,960 करोड़ 9 लाख रुपये का अनुमोदन दिया। स्वीकृति अनुसार मार्ग निर्माण के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर परियोजना और वित्तीय लागत 3,458 करोड़ 93 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत राशि 704 करोड़ 38 लाख रुपये राज्य बजट के माध्यम से और शेष 60 प्रतिशत 2,253 करोड़ 39 लाख रुपये संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से व्यय किया जाएगा।

निर्माण से पूर्व के कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) और सुपरविजन चार्जेस के लिए 501 करोड़ 16 लाख रुपये का भी अनुमोदन दिया है। सिवनी-बालाघाट मार्ग मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण राज्य राजमार्ग-72 है, जो जिला मुख्यालय सिवनी को महत्वपूर्ण वन एवं खनिज क्षेत्र बालाघाट से जोड़ता है। यह मार्ग दो राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (नागपुर-लखनादौन), राष्ट्रीय राजमार्ग 543 (गोंदिया-मण्डला) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 543 के (बालाघाट-भंडारा) मार्गों को भी जोड़ता है। यह मार्ग मलाजखंड तांबा परियोजना, भरवेली मैंगनीज़ माईन्स, कान्हा टाइगर रिज़र्व, पेंच टाईगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ राज्य से संपर्क प्रदान करता है। बालाघाट खनिज एवं वन उत्पादों का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है तथा सिवनी क्षेत्र कृषि, एवं पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यह मार्ग क्षेत्रीय आर्थिक विकास एवं लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्यटकों की आवाजाही में वृद्धि होने से कान्हा नेशनल पार्क, पेंच नेशनल पार्क सहित सिवनी तथा बालाघाट क्षेत्र की ग्रामीण एवं शहरी आबादी को लाभ मिलेगा। लगभग 8 से 10 लाख जनसंख्या को यह मार्ग बेहतर संपर्क प्रदान करेगा।

 

निर्धन और कमजोर वर्ग का होगा कल्याण-कैबिनेट ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की निर्धन और कमजोर वर्ग के सामाजिक और आर्थिक विकास से संबंधित  19 योजनाओं के वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 1 हजार 740 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह योजनाएं समाज के गरीब, कमजोर, निर्धन, निराश्रित, वरिष्ठजनों, कन्या विवाह-निकाह सहायता, दिव्यांगजनों, नशा पीड़ितों एवं ट्रांसजेण्डर व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक एवं समग्र विकास से संबंधित है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निःशक्त पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना, बहु विकलांग एवं मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति को आर्थिक सहायता योजना, अंध मूक बधिर शालाओं को अनुदान,अन्त्येष्टि सहायता योजना, मुख्यमंत्री निकाह योजना, अंधमूक बधिरों को वृत्तियां, विश्व विकलांग दिवस, दिव्यांजनों को आईटीआई प्रशिक्षण, दधीचि पुरस्कार योजना, कृत्रिम अंग उपकरण वितरण योजना, भारतीय कुष्ठ निवारण संघ को ब्लाक ग्रांट, दिव्यांगजनों के लिए बाधारहित वातावरण, अटल वयो अभ्युदय (एव्हीवायएवाय) योजना, माता-पिता भरण पोषण योजना, इंदिरा गांधी समाज सेवा पुरस्कार योजना, वरिष्ठ नागरिकों की राज्य परिषद, नशाबंदी कार्यक्रम और नशीली दवा की मांग में कमी लाने के लिये राष्ट्रीय कार्य योजना शामिल है।

 

मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय में भरे जाएंगे पद-कैबिनेट ने मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रभावी संचालन के लिए 154 नियमित पद, 1 संविदा पद और 89 आउटसोर्स के माध्यम से रखे जाने वाले व्यक्तियों इस प्रकार कुल 244 पदों-व्यक्तियों को रखे जाने की स्वीकृति दी है। पदों के वेतनमान, भर्ती पद्धति, सेवा शर्तों और पद-स्वरूप का परीक्षण वित्त विभाग एवं लागू विश्वविद्यालयीन परिनियम, अध्यादेश और सेवा नियमों के अनुसार की जाएगी। विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा प्रशासन का संस्थागत विकेन्द्रीकरण होगा।

इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम और चंबल संभाग के 31 जिलों के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षण संस्थानों के लिए संबद्धता, निरीक्षण, परीक्षा और अन्य विश्वविद्यालयीन सेवाओं के लिए पृथक प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध होने से निर्णय एवं सेवा प्रदायगी में अधिक समयबद्धता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जा सकेगा। पाठ्यक्रम, परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली के मानकीकरण, परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, समयबद्ध परिणाम एवं प्रमाण-पत्र प्रदाय तथा संस्थाओं के अकादमिक निरीक्षण की सुदृढ़ व्यवस्था से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध कराने की राज्य की दीर्घकालीन क्षमता सुदृढ़ होगी।

 

राज्य कम्प्यूटर सेक्युरिटी इंसीडेंट-रेसपान्स ऑपरेशन सेन्टर को आर्थिक मदद-कैबिनेट ने राज्य कम्प्यूटर सेक्युरिटी इंसीडेंट-रेसपान्स ऑपरेशन सेन्टर की स्थापना से संबंधित योजना की वित्तीय वर्ष 2026-2027 से 2030-2031 तक निरंतर संचालन के लिए 80 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए प्रशासनिक, तकनीकी, परामर्श, इंसीडेंट रिस्पांस, फॉरेंसिक और एसओसी कार्य के लिए 25 नवीन पदों सहित अनुमानित वित्तीय लागत राशि 3.99 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके साथ ही पूर्व से स्वीकृत 21 मानव संसाधनों के वेतन पुनर्निर्धारण के लिए 3.24 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

एमपी-सीईआरटी के उपरोक्त स्वीकृत तकनीकी मानव संसाधनों को पीईएमटी फ्रेमवर्क अनुरूप प्रबंधन किया जाएगा। निर्णय अनुसार पीईएमटी फ्रेमवर्क में प्रिंसिपल कंसलटेंट से 5 पद, सीनियर कंसलटेंट से 8 एवं कंसलटेंट से 3 पदों को सरेंडर (अभ्यर्पण) किया जाकर इसका उपयोग एमपीसीईआरटी पद संरचना अंतर्गत सृजित किए जाने वाले नवीन पदों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एमपी-सीईआरटी अन्तर्गत अल्प-अवधि के लिए 50 हजार रुपये तक अधिकतम 2 विषय विशेषज्ञों की सेवाएं अनुबंधित की जाएंगी।

साथ ही प्रदेश में साइबर सिक्यूरिटी प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता में सकारात्मक भागीदारी बनाये रखने की दृष्टि से एमपीसीईआरटी में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों यथा एनएफएसयू-आईआईटी-एनआईटी-आईआईएसईआर/सीडीएसी आदि संस्थानों से उत्तीर्ण ग्रेजुएट इंजीनियर्स को मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम एमपीसीईआरटी में प्रति वर्ष एक वर्ष के लिए इंजीनियरिंग स्नातक उत्तीर्ण 10 प्रशिक्षुओं को 25 हजार रुपये प्रति माह का प्रशिक्षण भत्ते की दर से एक वर्ष के लिए साक्षात्कार के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। प्रदेश में सायबर सुरक्षा घटनाओं के प्रभावी प्रबंधन, त्वरित प्रतिक्रिया, जोखिम न्यूनीकरण तथा महत्वपूर्ण शासकीय सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (एमपी-सीईआरटी) की स्थापना की गई है। वर्तमान समय में शासन की अधिकांश सेवाएं, नागरिक केंद्रित प्लेटफॉर्म, डिजिटल भुगतान प्रणालियां, डेटा भंडार, क्लाउड अवसंरचना तथा विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण सूचना प्रणालियां सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित हैं।

 

अतिथि गृह के उन्नयन और संचालन के लिए राशि स्वीकृत-कैबिनेट ने आवासीय आयुक्त कार्यालय मप्र भवन नई दिल्ली में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों से संबंधित योजनाओं को 16वें वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए राजस्व एवं पूंजीगत मद की 250 करोड़ 67 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार आवासीय आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश भवन, नई दिल्ली के लिए राजस्व एवं पूंजीगत मद में 191 करोड़ 828 लाख रुपये, ज्यूडिशियल स्टॉफ के लिए परिवहन व्यवस्था के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपये, विशेष आयुक्त कार्यालय, मप्र शासन, नई दिल्ली के लिए राजस्व एवं पूंजीगत मद में 6.593 करोड़ रुपये, मध्या लोक, मुम्बई कार्यालय के लिए 4.2655 करोड़ रुपये और विभागीय परिसम्पतियों का संधारण के लिए राजस्व मद में 1 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसी तरह नई दिल्ली में प्रस्तावित मध्यांचल भवन के विस्तार निर्माण कार्य के लिए पूंजीगत मद में 44.5803 करोड़ रुपये और नई दिल्ली में प्रस्तावित कार्यालयों की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये की स्वीकृति दी।

 

आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति में संशोधन की स्वीकृति-कैबिनेट ने आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति 12 नवम्बर 2014 में संशोधन की स्वीकृति दी है। इसके अनुसार संगणित पुनर्वास अनुदान के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्र में स्थित निजी कृषि भूमि पर स्थापित स्थावर परिसंपत्तियों को छोड़कर कृषि भूमि के लिये कलेक्टर द्वारा जारी की गई गाईडलाईन की तत्समय प्रभावशील दर के अनुसार संगणित मूल्य से दौगुनी राशि भी पुनर्वास अनुदान के रूप में दी जाएगी। नीति के अनुरूप प्रारूपों में आवश्यक संशोधन कर विभाग अपने स्तर से जारी कर सकेगा और अतिरिक्त आवश्यक प्रारूपों को भी जारी कर सकेगा। सार्वजनिक हित की परियोजनाओं में भूमि का अर्जन, भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के अंतर्गत किया जाता है जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि के लिये वह कारक जिसके आधार पर बाजार मूल्य को गुणित किया जाना है।

मध्यप्रदेश राजपत्र अधिसूचना 24 अप्रैल 2026 से 1.00 के स्थान पर 2.00 किया गया है। इसे शीघ्र क्रियान्वित करने के लिए आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति, 12 नवम्बर 2014 में संशोधन किया गया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों-उपक्रमों को उनकी अधोसंरचना निर्माण कार्यों एवं विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए समय-समय पर निजी भूमि की आवश्यकता पड़ने पर भू-अर्जन की प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त समय और लागत को बचाने की दृष्टि से प्रतिफल का भुगतान करके भू-धारकों की आपसी सहमति से भूमि प्राप्त की जा सके तथा शासकीय परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में क्रियान्वित किए जाने के लिए राज्य शासन द्वारा “आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति” 14 नवम्बर, 2014 से लागू की गई है।

 

कैबिनेट ने महिला टी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट 2025 (ब्लाइंड) की 3 खिलाडियों को कुल प्रोत्साहन राशि 75 लाख रुपये और महिला खिलाड़ियों के 3 प्रशिक्षक को कुल प्रोत्साहन राशि 3 लाख रुपये इस तरह कुल 78 लाख रुपये की प्रतिपूर्ति प्रोत्साहन मद से करने की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की है। महिला टी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट 2025 (ब्लाइंड) 23 नवंबर 2025 कोलंबो (श्रीलंका) में नेपाल को पराजित कर स्वर्ण पदक जीतने पर उल्लेखनीय उपलब्धि के दृष्टिगत राज्य शासन द्वारा भारतीय विजेता टीम की सदस्य एवं मध्यप्रदेश की खिलाडी सुनिता सराठे (नर्मदापुरम), दुर्गा येबले (बैतूल) एवं सुषमा पटेल (दमोह) को 25-25 लाख रुपये, जिसमें से 10-10 लाख रुपये नगद एवं 15-15 लाख रुपये फिक्सड डिपाजिट के रूप में तथा महिला खिलाडियों के प्रशिक्षक सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पाहड़े को एक-एक लाख रुपये इस प्रकार कुल 78 लाख रुपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान करने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई।

Delhi Lakshmi Yojana First Installment: कंफर्म हो गया, 26 अगस्त को लक्ष्मी योजना की जारी होगी पहली किस्त, ऐसे चेक करें स्टेटस

Delhi Lakshmi Yojana First Installment: दिल्ली की महिलाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना की पहली किस्त 26 अगस्त को जारी होने जा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बुधवार को एक भव्य कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के खातों में 2500 रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर करेंगी। इस योजना की शुरुआत दिल्ली में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से की गई है।

तालकटोरा स्टेडियम में भव्य कार्यक्रम, 2500 महिलाओं को मिलेगी किस्त

इस योजना की पहली किस्त जारी करने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 26 अगस्त की सुबह 11 बजे शुरू होगा। इस विशेष समारोह में लगभग 2500 महिलाओं को सांकेतिक रूप से पहली किस्त दी जाएगी। आपको बता दें कि दिल्ली लक्ष्मी योजना 1 अगस्त से प्रभावी हुई थी और अब तक इस योजना के तहत 6 लाख से अधिक महिलाओं ने अपना पंजीकरण कराया है।

2500 रुपये का पूरा गणित: बैंक खाते और एफडी/आरडी का नियम

दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जानी है। ये मदद 1 सितंबर से लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा होना शुरू हो जाएगी। हालांकि इस 2500 रुपये की राशि को पूरा का पूरा अकाउंट में नहीं भेजा जाएगा। बाय डिफॉल्ट 2500 रुपये में से 1500 रुपये लाभार्थी महिला के RD या फिक्स्ड डिपॉजिट (खाते में जमा किए जाएंगे। बाकी 1000 रुपये लाभार्थी के उस बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे जो सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट से जुड़ा होगा। आरडी या एफडी में जमा की गई राशि पर 31 जुलाई 2029 तक लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा।

अगर कोई लाभार्थी महिला चाहे तो वह पूरी 2500 रुपये की राशि को भी एफडी या आरडी में जमा करने का विकल्प चुन सकती है, जिस पर भी समान समय तक लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा।

ऐसे चेक करें अपनी एप्लीकेशन का स्टेटस

अगर आपने दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन किया है और अपने आवेदन की स्थिति देखना चाहते हैं, तो इन आसान स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:

  • सबसे पहले दिल्ली लक्ष्मी योजना के आधिकारिक पोर्टल dly.delhi.gov.in पर जाएं।
  • होमपेज पर दिखाई दे रहे Track Application विकल्प पर क्लिक करें।
  • इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा, जहां आपको अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर, जन्म तिथि और स्क्रीन पर दिखाई दे रहा कैप्चा डालना करना होगा।
  • सभी जानकारी भरने के बाद Sign In बटन पर क्लिक करें। इसके बाद आपके आवेदन का स्टेटस स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा।

क्या अभी भी किया जा सकता है आवेदन?

जो महिलाएं अभी तक इस योजना में आवेदन नहीं कर सकी हैं, वे पोर्टल पर जाकर कभी भी आवेदन कर सकती हैं। दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरे साल खुली रहेगी। इसके लिए महिलाएं dly.delhi.gov.in/Account/Login पर जाकर आवेदन कर सकती हैं। हर महीने की अंतिम तारीख को उस महीने मिलने वाले आवेदनों के लिए कट-ऑफ तारीख माना जाएगा। इसके बाद स्वीकृत होने वाले पात्र आवेदनों को अगले महीने से योजना का लाभ दिया जाएगा।

कौन कर सकता है आवेदन? पात्रता और शर्तें

दिल्ली लक्ष्मी योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता मापदंड तय किए हैं-

  • आवेदन जमा करने की तिथि पर महिला की आयु 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए और वह अपने परिवार की सबसे बड़ी महिला सदस्य होनी चाहिए।
  • परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • महिला दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए। इसके अलावा आवेदक, उसके पति या उसके माता-पिता में से कोई भी आवेदन की तिथि पर कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना चाहिए।
  • पिछले 12 महीनों के दौरान परिवार की बिजली की खपत 2400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

कौन नहीं होगा पात्र?

  • सरकारी पेंशन या नियमित वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाली महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
  • आयकरदाता, जीएसटी भरने वाले, सरकारी कर्मचारी और जन प्रतिनिधि इस योजना से बाहर रखे गए हैं।
  • अगर आवेदक या उसके परिवार का कोई सदस्य चार पहिया वाहन का मालिक है या सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बोर्ड या स्थानीय निकाय में काम करता है तो लाभ नहीं मिलेगा।
  • जिन आवेदकों के 3 से अधिक बच्चे हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, वे भी इस योजना की शर्तों के तहत अपात्र हैं।

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