GDP ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा, फिर लगातार क्यों गिर रहा भारत का शेयर बाजार?

भारतीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट ने इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट पहुंचाई है। एक तरफ जहां शेयरों में सीधे पैसे लगाने वाले लोग मायूस हैं तो दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में हर महीने सिप से इनवेस्ट करने वाले लोग चिंतित है। पिछले करीब दो साल में उनका पैसा बढ़ने की जगह घटा है। अब इनवेस्टर्स का धैर्य टूटने लगा है। इस हफ्ते के मध्य में निफ्टी गिरकर 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। ऐसे में उनके मन में एक सवाल चल रहा है। इनवेस्टर्स यह जानना चाहते हैं कि जब दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी है तो हमारा बाजार क्यों गिर रहा है?

भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर 

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट इसलिए भी परेशान कर रही है, क्योंकि देश की जीडीपी की ग्रोथ अच्छी है। यह 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ी समस्या नहीं दिख रही है। देश का मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है। सरकार का फिस्कल डेफिसिट अनुमान के मुताबिक है। इकोनॉमी में डिमांड अच्छी है। इसकी तस्दीक हर महीने जीएसटी कलेक्शन के डेटा से हो जाती है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस के डेटा भी सामान्य हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ बेहदत है। तीन साल से ज्यादा समय के बाद आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया है। इसका मतलब है कि अब तक इंटरेस्ट रेट ज्यादा नहीं था। किसी इकोनॉमी की स्थिति ऐसी होने पर शेयर बाजारों में अच्छी तेजी दिखती है। लेकिन, भारत का शेयर बाजार चढ़ने की जगह गिर रहा है।

दुनिया के कई बड़े शेयर बाजारों में शानदार तेजी 

दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों में भी बीते एक साल में अच्छी आई है। अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक डाओ जोंस (Dow Jones) इंडस्ट्रियल एवरेज ने बीते एक साल में 13.58 फीसदी रिटर्न दिया है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी ने इस साल 83 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। यहां तक कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक FTSE ने भी बीते एक साल में करीब 12 फीसदी रिटर्न दिया है। लेकिन, बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांकों Nifty और Sensex में  बड़ी गिरावट आई है। निफ्टी जहां करीब 11 फीसदी फिसला है, वही सेंसेक्स 12 फीसदी से ज्यादा लुढ़का है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को पहुंचाई चोट

भारतीय बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है। बीते कई सालों से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। पिछले दो सालों में यह बिकवाली काफी बढ़ी है। 2026 में FIIs की शुद्ध बिक्री 4.41 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। बर्नस्टीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में नया निवेश करने की कोई वजह नहीं दिखती। यह रिपोर्ट सितंबर के तीसरे हफ्ते में आई थी। अगर बीते दो सालों की बात की जाए तो FIIs ने भारतीय बाजार से करीब 40 अरब डॉलर निकाले हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) खासकर म्यूचुअल फंडों ने इस दौरान लगातार निवेश किया है, जिससे बाजार को बड़ा सहारा मिला है।

महंगे वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी निवेशकों ने की बिकवाली

FIIs की भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली की दो बड़ी वजहें हैं। पहला, भारतीय शेयरों की वैल्यूएशंस पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई थी। निफ्टी और सेंसेक्स की वैल्यूएशंस अपनी लंबी अवधि की औसत वैल्यूएशंस से काफी आगे निकल गई थी। इसका मतलब है कि भारतीय शेयर बाजार काफी महंगा हो गया था। इस वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने करने के लिए कंपनियों की अर्निंग्स में तेज उछाल की जरूरत थी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, जून तिमाही से कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट दिखा है। लेकिन, इससे निफ्टी की वैल्यूएशन घटकर करीब 19 फीसदी पर आ गई है। यह पिछले साल 23 फीसदी तक पहुंच गई थी। दुनिया के कई दूसरे देशों के बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार की वैल्यूएशन अब भी ज्यादा है।

भारतीय बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का अभाव

दूसरा, भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियां मौजूद नहीं हैं। पिछले दो सालों में उन बाजारों में ज्यादा तेजी आई है, जहां सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियां मौजूदा हैं। इनमें पहले नंबर पर अमेरिका है। एशिया में दक्षिण कोरिया और ताइवान है। विदेशी निवेशकों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स से जुड़ी कंपनियों में जमकर निवेश किए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत जैसे बाजारों से अपने पैसे निकाले हैं। इस निवेश से एआई और सेंमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि Nvidia का मार्केट कैपिटलाइजेशन 6 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह भारत की जीडीपी से ज्यादा है। Nvidia का शेयर एक साल में 25 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। यही हाल दक्षिण कोरिया में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों का है। विदेशी निवेशक उसी बाजार में निवेश करते हैं, जहां उन्हें ज्यादा प्रॉफिट की उम्मीद दिखती है।

अमेरिका और ईरान की लड़ाई ने बढ़ाया दबाव

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू हुई। इसका असर क्रूड ऑयल के उत्पादन पर पड़ा। क्रूड की सप्लाई घटने से इसकी कीमतें आसमान में पहुंच गईं। पिछले कई दिनो से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा है। यह भारत जैसे देश के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि भारत क्रूड की अपनी 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है।

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क्रूड में उछाल का इकोनॉमी पर पड़ रहा असर 

क्रूड में उछाल से सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब आ गया है। महंगे क्रूड की वजह से इस साल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। इसका असर आम आदमी की खर्च करने की क्षमता पर पड़ रहा है। क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ी है। इससे शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

RBI ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए उठाए बड़े कदम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

आरबीआई ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने इसका ऐलान 9 अक्टूबर को किया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिसके बाद आरबीआई को एक्शन लेना पड़ा।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए सोमवार से स्पेशल विंडो

RBI तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रोजाना की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए एक स्पेशल विंडो ओपन करेगा। इससे स्पॉट मार्केट में रुपये पर दबाव में कमी आएगी। कई बार रुपये पर दबाव ज्यादा बढ़ने पर आरबीआई ऑयल कंपनियों को सीधे अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की सप्लाई करता है।

सीधे आरबीआई से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेंगे डॉलर

केंद्रीय बैंक के इस कदम से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum 12 अक्टूबर यानी मंगलवार से सीधे आरबीआई के स्पेशल विंडो से डॉलर ले सकेंगे। आरबीआई ने यह भी कहा है कि फॉरेक्स डीलर्स यूजहर्स को किसी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव्स रीबुक करने की इजाजत नहीं देंगे।

 एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट घटी

आरबीआई ने रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट 10 करोड़ डॉलर 50 लाख डॉलर कर दी है। केंद्रीय बैंक ने फॉरेक्स डीलर्स को रुपये से जुड़े सभी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ‘फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व’ बनाए रखने को कहा है। यह हर ट्रांजेक्शन के नोशनल अमाउंट के 20 फीसदी के बराबर होगा।

डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंचा

बीते कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव दिखा है। 9 अक्टूबर यानी शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 96.73 के लेवल पर बंद हुआ। यह 8 अक्टूबर के रुपये के क्लोजिंग लेवल जितना है। यह डॉलर के मुकाबले रुपया के अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। इस साल मई में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.96 के लेवल पर आ गया था। यह डॉलर के मुकाबले रुपया का सबसे निचला स्तर है।

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RBI के कदमों से रुपये में उतार-चढ़ाव में आ सकती है कमी 

मुंबई में एएनजेड बैंक के फॉरेक्स स्ट्रेटेजिस्ट धीरज निम ने कहा कि ऑयल कंपनियों की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए स्पेशल विंडो के ऐलान से फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की मांग का एक बड़ा स्रोत खत्म हो गया है। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव में कमी आएगी, लेकिन इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटेगा।

Market Outlook : बाजार में दिखी जोरदार तेजी, जानिए 12 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद सेंसेक्स 879 अंक यानी 1.23%) बढ़कर 72,472 पर और निफ्टी 289 अंक यानी 1.30% बढ़कर 22,520 पर बंद हुआ। बाज़ार का रुख पॉजिटिव रहा। 2,344 शेयरों में बढ़त हुई जबकि 1,686 शेयरों में गिरावट आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT सेक्टर में सबसे ज़्यादा 3.02% की तेज़ी रही, जबकि FMCG में 2.25% और PSU बैंकों में 1.62% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप शेयरों में 1.46% और स्मॉलकैप शेयरों में 0.55% की बढ़त हुई, वहीं इंडिया VIX में 6.09% की गिरावट आई। TCS, ITC और अपोलो हॉस्पिटल्स में से हर एक में 4% से ज़्यादा की बढ़त हुई और ये निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि हाल ही में आई भारी गिरावट के बाद, वैल्यू बाइंग और शॉर्ट कवरिंग के दम पर घरेलू इक्विटी मार्केट में राहत भरी रैली देखने को मिली। Q2 अर्निंग्स सीज़न की मज़बूत शुरुआत और AI-आधारित रेवेन्यू के मौकों पर बढ़ते भरोसे के कारण IT शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के मिड-टर्म चुनावों से पहले होने की संभावना कम होने के संकेतों से भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुईं। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और बाज़ार के सेंटीमेंट में सुधार हुआ। हालांकि, लगातार हो रही FII की बिकवाली और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी, रिकवरी की उम्मीदों पर दबाव बनाए हुए है। RBI के ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) के रुख के बाद, निवेशक अब ब्याज दरों की चाल के बारे में और संकेतों के लिए सोमवार को आने वाले घरेलू CPI डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं। आगे चलकर, Q2 के नतीजे (जिसके सालाना आधार पर अच्छा रहने का अनुमान है) बाज़ार में आई तेज़ी के बने रहने के लिहाज़ से अहम होंगे।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि आज शुक्रवार को निफ्टी में अच्छी रिकवरी दिखी और इसमें 1% से ज़्यादा की बढ़त हुई। हालांकि, यह 22,600 के आसपास बने 50EMA के लेवल को पार नहीं कर पाया। अगर इंडेक्स 22,600–22,650 के रेजिस्टेंस ज़ोन के ऊपर जाता है तो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड में सुधार हो सकता है और रिकवरी जारी रह सकती है। लेकिन, अगर यह इस ज़ोन को पार नहीं कर पाता है, तो बाज़ार में फिर से कमज़ोरी आ सकती है। निचले स्तर पर इसके लिए 22,450, 22,350 और 22,100 पर सपोर्ट हैं।

360 ONE वेल्थ की प्रेसिडेंट अनु जैन ने एक अहम टेक्निकल गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा कि मार्केट अपने 200 वीक के मूविंग एवरेज (जो एक लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है) से नीचे आ गया है। इससे पता चलता है कि एडजस्टमेंट का दौर अभी और चल सकता है। या तो कीमतें और गिर सकती हैं या फिर लंबे समय तक कंसोलिडेशन का दौर रह सकता है। इससे पता चलता है कि अभी और मुश्किल दौर आ सकता है। टेक्निकल इंडीकेटर बताते हैं कि बाजार में अभी और गिरावट की गुंजाइश है।

बजाज ऑल्ट्स की ग्रुप प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट्स) और मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO लक्ष्मी अय्यर ने हाल में आई गिरावट को मार्केट में बनी अस्वाभाविक तेजी ज़रूरी सफ़ाई बताते हुए कहा है कि मोमेंटम इंडिकेटर कमज़ोर हुए हैं और मार्केट के मज़बूत स्थिति में आने से पहले निवेशकों को और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। अय्यर ने मौजूदा दौर की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा क पहले ज़हर मिलेगा, लेकिन आपको अमृत का इंतज़ार करना होगा। यानी असल वैल्यू सामने आने से पहले उथल-पुथल का दौर देखने को मिलेगा।

अभी हर जगह वैल्यूएशन की स्थिति सही नहीं है। अय्यर ने कहा कि वैल्यूएशन अब धीरे-धीरे सही स्तर की ओर बढ़ रहे हैं और बाज़ार के कुछ हिस्सों में ये लंबे समय के औसत से नीचे आ गए हैं। लार्ज-कैप की वैल्यूएशन ठीक लग रही है, लेकिन कई सालों की ज़बरदस्त री-रेटिंग के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप में अभी भी बहुत ज़्यादा राहत की गुंजाइश नहीं दिख रही है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड कैप स्टॉक लार्जकैप के मुकाबले 55-60% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं और स्मॉल-कैप में भी लगभग इतना ही प्रीमियम मिल रहा है। फिर भी, उनका कहना है कि कई मिड साइज़ कंपनियों की अर्निंग में मज़बूती बनी हुई है, इसलिए यह बिना सोचे-समझे खरीदारी करने के बजाय सोच-समझकर निवेश करने वालों का बाज़ार है। यह स्टॉक पिकर्स) का बाज़ार है।

नुवामा एसेट मैनेजमेंट के प्रेसिडेंट और हेड, अंशु कपूर की राय है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए भारत अभी भी पसंदीदा मार्केट नहीं है, क्योंकि दूसरे मार्केट में तुलनात्मक रूप से बेहतर मौके मिल रहे हैं। उनका कहना यह नहीं है कि भारत का स्ट्रक्चरल आकर्षण खत्म हो गया है, बल्कि यह है कि मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से निकट भविष्य में कुछ और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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Mobikwik Share Price: बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने खरीदे ₹11 करोड़ के शेयर, कीमत 8% तक उछली

डिजिटल पेमेंट्स फर्म ‘वन मोबिक्विक सिस्टम्स’ के शेयर में 9 अक्टूबर को अच्छी तेजी है। शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से 8 प्रतिशत तक उछली। BSE पर शेयर 263.90 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। One MobiKwik Systems को मोबिक्विक भी कहा जाता है। एक दिन पहले खबर आई कि बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड ने ओपन मार्केट ट्रांजेक्शंस के जरिए कंपनी के 10.78 करोड़ रुपये में 4.48 लाख इक्विटी शेयर खरीदे।

ये शेयर कंपनी की 0.57 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। ट्रांजेक्शन 240.48 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर हुआ। कुछ दिन पहले वन मोबिक्विक सिस्टम्स ने शेयर बाजारों को बताया था कि प्रमोटर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर उपासना टाकू ने खुले बाजार में लेनदेन के जरिए कंपनी के 1.07 लाख इक्विटी शेयर खरीदे हैं। डील की वैल्यू करीब 2.12 करोड़ रुपये रही। इस खरीद के बाद कंपनी में टाकू की हिस्सेदारी बढ़कर 10.24 प्रतिशत हो गई है। टाकू ने 28 सितंबर 2026 को 1.04 करोड़ रुपये में कंपनी के 52,000 इक्विटी शेयर खरीदे।

इसके बाद 29 सितंबर को 1.09 करोड़ रुपये में अतिरिक्त 55,000 इक्विटी शेयर खरीदे। दोनों लेनदेन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर हुए। MobiKwik दिसंबर 2024 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 572 करोड़ रुपये का था। उपासना टाकू ने दिसंबर 2024 में आए कंपनी के IPO के बाद से कुल 294,177 इक्विटी शेयर खरीदे हैं।

Mobikwik का शेयर एक सप्ताह में 30 प्रतिशत मजबूत

कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 290.35 रुपये और एडजस्टेड लो 151.95 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 40 प्रतिशत चढ़ा है। एक सप्ताह में कीमत 30 प्रतिशत मजबूत हुई है। अप्रैल 2026 में मोबिक्विक को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी मिली थी। इसके बाद कंपनी के लिए एक नई डिवीजन मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (MFSPL) शुरू करने का रास्ता साफ हो गया। इससे ग्रुप को अपनी रेगुलेटेड लेंडिंग क्षमताएं बढ़ाने, नए-नए क्रेडिट प्रोडक्ट्स तैयार करने, और ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों और मर्चेंट्स को ज्यादा कुशलता और बेहतर नियंत्रण के साथ सेवाएं देने में मदद मिलेगी।

TCS Share Price: अच्छे Q2 नतीजों से IT कंपनी का शेयर 6% तक उछला, अब ब्रोकरेज की क्या राय- बाय, सेल या होल्ड?

कंपनी ने कहा था कि NBFC का कामकाज तभी शुरू होगा, जब कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद RBI से ‘सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन’ (COR) मिल जाएगा। इसकी सर्विसेज पूरे भारत में उपलब्ध होंगी, लेकिन मुख्य रूप से फोकस टीयर 2 और टीयर 3 ​शहरों पर होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market View : बाजार का ढ़ांचा कमजोर, एक्सपर्ट्स जानिए अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Market View : ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का असर भारतीय इक्विटी इंडेक्स पर भी पड़ा। US बॉन्ड यील्ड में तेजी और इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर $102 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण बेंचमार्क निफ्टी 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। FII द्वारा घरेलू शेयरों की भारी बिकवाली और RBI द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से भी लोकल इन्वेस्टर्स में घबराहट है,क्योंकि ऊंची ब्याज दरों से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। इसके चलते 8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,250 के स्तर से नीचे आ गया। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64% गिरकर 22,231.80 पर आ गया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू बाजार में आज भारी बिकवाली का दौर जारी रहा। RBI की सख़्त पॉलिसी का असर उन सेक्टर्स पर पड़ा जो ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म वैल्यूएशन मल्टीपल्स में बदलाव आया। FII की लगातार निकासी,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की गिरती कीमत ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।

इसके अलावा,कच्चे तेल की कीमतों में वोलैटिलिटी,जो लगातार $100 के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं,देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। अच्छे हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का पता चलता है, जबकि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना इक्विटी वैल्यूएशन को दबाए हुए है।

मार्जिन से जुड़ी चिंताओं और टैक्टिकल प्रॉफ़िट बुकिंग के बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सुस्ती रही। आगे बाज़ार का फोकस अब Q2 अर्निंग्स सीज़न पर है,जहां डिमांड की स्थिरता और इनपुट कॉस्ट को संभालने के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री शॉर्ट-टर्म के लिए बाजार की दिशा तय करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP-रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और बाजार लगभग 1.5 फीसदी नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स ज्यादातर समय दबाव में रहे और अंत में दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो बिकवाली हर तरफ थी। मेटल, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई,जबकि IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जिसने कुछ हद तक मजबूती दिखाई।

ब्रॉडर मार्केट में और भी तेज बिकवाली हुई इससे मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा गिरे। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में जोखिम लेने से बचा जा रहा है और बाजार का दायरा (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर हो रहा है।

घरेलू और ग्लोबल मैक्रो चिंताओं का बाजार के सेंटीमेंट पर भारी असर रहा। RBI के रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.50% करने और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) की ओर रुख करने के फैसले से वित्तीय हालात के और सख्त होने की चिंता बढ़ गई है। साथ ही,भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $102–103 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। TCS के तिमाही नतीजों से पहले सावधानी का माहौल और IT सेक्टर में घबराहट ने भी बाजार पर असर डाला।

तकनीकी तौर पर,मामूली सुधार (पुलबैक) के बाद निफ़्टी ने एक बार फिर अप्रैल 2026 के निचले स्तर 22,182.55 को टेस्ट किया है जो मौजूदा ढांचे में और कमजोरी का संकेत है। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो बाजार 21,700–22,000 के जोन की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ़,22,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है और उसके बाद 22,700–22,800 अगला बड़ा रेजिस्टेंस हो सकता है। मौजूदा गिरावट के दौर में इंडेक्स के नए निचले स्तर बनाने और बाजार के दायरे में तेजी से गिरावट के कारण,निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की ज़रूरत है।

बाजार में अपनी पोजीशन उसी हिसाब से बनानी चाहिए और हेज्ड अप्रोच (जोखिम कम करने वाला तरीका) अपनाना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि अर्निंग सीजन के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स में गिरावट जारी रही और यह पिछले सेशन के निचले स्तर से भी नीचे चला गया। पूरे सेशन के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा और तेजड़ियों को कोई राहत नहीं मिली।

चाहे वह आवरली चार्ट हो या वीकली चार्ट, इंडेक्स क्रिटिकल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। यह लगातार बनी कमजोरी का संकेत है। हालात निराशाजनक लग रहे हैं और यह माहौल कुछ और दिनों तक ऐसा ही बना रह सकता है।

RSI बेयरिश क्रॉसओवर में है और ओवरसोल्ड जोन में बना हुआ है। निचले स्तर पर निफ्टी के लिए 22180 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स में और गिरावट आ सकती है और यह 22000 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 22350 पर रेजिस्टेंस है।

 

Market Outlook : कमजोर नोट पर बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 सितंबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

HDFC Bank Share Price: FIIs ने बेची होल्डिंग तो शेयर धड़ाम, ब्रोकरेजेज का ये है रुझान

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज बिकवाली का भारी दबाव दिखी और इसकी वजह इसका सितंबर तिमाही का शेयरहोल्डिंग पैटर्न है। इसमें सामने आया कि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी 2.43% कम की और अब जून तिमाही के आखिरी में 41.82% से घटकर सितंबर तिमाही के आखिरी में 39.39% (FIIs Holding in HDFC Bank) तक आ गई। इसने बैंक के शेयरों पर दबाव बढ़ाया और फिलहाल बीएसई पर यह 1.65% की गिरावट के साथ ₹692.20 पर है। इंट्रा-डे में यह 1.79% टूटकर ₹691.20 तक आ गया था।

FIIs vs DII in HDFC Bank: किसकी कितनी होल्डिंग?

सितंबर 2026 तिमाही के आखिरी में एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों यानी FIIs की हिस्सेदारी 2.43 पर्सेंटेज प्वाइंट्स कम होकर 39.39% पर आ गई। वहीं दूसरी तरफ इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की होल्डिंग 1.69 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बढ़कर 43.44% हो गई। इसमें म्यूचुअल फंड्स की 31.88% हिस्सेदारी है तो ₹2 लाख तक के निवेश वाले यानी खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 10.87% है।

क्या कहना है एक्सपर्ट्स का

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट ऐसे समय में आई है, जब सीईओ के तौर पर अनूप बागची की नियुक्ति के असर का मार्केट आकलन कर रहा है। अधिकतर ब्रोकरेज फर्म ने उनकी नियुक्ति का सपोर्ट किया है लेकिन कुछ एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी कि उन्हें काम संभालने में समय लगेगा।

नुवामा के बीएफएसआई एनालिस्ट हेड आनंद दामा का कहना है कि अनूप को पहले अपनी टीम फिर से बनाने की जरूरत पड़ेगी और फिर एक लंबे समय में वह नए आइडिया ला सकते हैं और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि अनूप बागची की नियुक्ति से एचडीएफसी बैंक की लीडरशिप से जुड़ी एक बड़ी चिंता दूर हो गई और अनूप बागची का अनुभव एक बड़ी ताकत साबित होगी।

अनूप बागची अभी ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के सीईओ हैं और देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ICICI Bank में सीनियर पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने रिटेल और होलसेल बैंकिंग बिजनेस संभाला था। उन्होंने छह साल तक ICICI सिक्योरिटीज को भी लीड किया। उनकी उम्र 56 साल है तो वह लंबे समय तक एचडीएफसी बैंक की कमान संभाल सकते हैं क्योंकि RBI के नियमों के मुताबिक बैंक सीईओ 70 साल की उम्र तक बने रह सकते हैं।

इंडिपेंडेंट एनालिस्ट नीरज दीवान का कहना है कि प्रोविजनल डेटा और एचडीएफसी ग्रुप के बाहर के किसी शख्स को सीईओ की कमान बैंक के लिए पॉजिटिव है लेकिन निवेशक अभी सतर्कता बरत रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर कुछ और तिमाहियों तक दबाव बना रह सकता है। बैंक ने शनिवार को सितंबर के आखिरी तक अपने डिपॉजिट में लगभग 18.8% और ग्रॉस एडवांस में 16.3% की बढ़ोतरी की जानकारी दी थी।

शेयरों पर क्यों आया दबाव

साल 2023 में अपनी पैरेंट कंपनी एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक के मार्जिन और ग्रोथ पर असर पड़ा। इसका असर बैंक के शेयरों पर पड़ा और अपने पियर्स के मुकाबले यह कमजोर हुआ। गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे ने भी सेंटीमेंट पर बुरा असर डाला। हालांकि एक स्वतंत्र जांच में उनके दावों की पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन शेयरों पर दबाव बना रहा। प्राइस-टू-एडजस्टेड बुक वैल्यू के आधार पर यह स्टॉक अब आईसीआईसीआई बैंक के मुकाबले 25% डिस्काउंट पर है और साल 2025 में अपने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद से इसमें लगभग 31% की गिरावट आई है।

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Stock Market Fall: 7 वजह, Sensex लाल, Nifty आया 22500 के नीचे, IT Sector की कोशिश फेल

Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।

Stock Market Fall: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।

कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली

FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव

आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।

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Market Trend : बाजार पर बढ़ सकता है दबाव, गिरते बाजार में भी कमाई के लिए इस दो शेयरों पर रहे नजर

Market Trend : ब्याज दरों में बढ़ोतरी और सख्त कमेंट्री से कल 7 अक्टूबर को बाजार का मूड बिगड़ गया। सेंसेक्स और निफ्टी कल गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि बैंक निफ्टी निचले स्तरों से संभला,लेकिन मिडकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला। मेटल, रियल्टी, ऑटो शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। डिफेंस, IT और PSE इंडेक्स भी गिरावट पर बंद हुए। वहीं, PSU बैंक और कैपिटल मार्केट इंडेक्स बढ़त पर बंद हुए।

निफ्टी 173 प्वाइंट गिरकर 22,603 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 429 प्वाइंट गिरकर 72,639 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी भी 73 प्वाइंट गिरकर 55,056 पर बंद हुआ। मिडकैप 379 प्वाइंट गिरकर 59383 पर बंद हुआ।

निफ्टी के 50 में से 41 शेयरों में बिकवाली रही। सेंसेक्स के 30 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। बैंक निफ्टी के 14 में से 7 शेयरों में बिकवाली रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 36 पैसे कमजोर होकर 96.78 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अब सवाल ये है कि अज कैसी रह सकती है बाजार की चाल? इस पर अपनी राय देते हुए HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि पिछले कुछ सेशन में अच्छी रिकवरी दिखाने के बाद,RBI की MPC मीटिंग में ब्याज दरों में 0.25% (25bps) की बढ़ोतरी के कारण निफ्टी ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया और इसमें कमजोरी आ गई। निफ्टी 173 अंक गिरकर बंद हुआ।

डेली चार्ट पर एक साफ नेगेटिव कैंडल बनी है,जो गैप-डाउन ओपनिंग के बाद निचले स्तर पर बंद हुई है। टेक्निकल तौर पर ऐसा लगता है कि निफ्टी 22800 के सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस लेवल के पास से नीचे की ओर मुड़ गया है। मंगलवार को बने 22776 के हाई पर एक नया ‘लोअर टॉप’ बनता दिख रहा है। हालांकि, आज के सेशन में और कमजोरी आने पर ही ‘लोअर टॉप’ बनने की पुष्टि हो पाएगी।

यहां से और कमजोरी आने पर निफ्टी को 22400 और उसके बाद 22200 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है। अगर इसमें कोई उछाल आता है,तो निकट भविष्य में इसे 22800 और उसके बाद 23100 के लेवल पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।

Mantri FinMart के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी उम्मीद के मुताबिक ही रही। बाजार कि बात करें तो यूएस बॉन्ड यील्ड्स और क्रूड ऑयल और रुपए की कमजोरी बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में निफ्टी 22250-22220 के आसपास स्थित पिछला लो छू सकता है। जब तक 22800 का लेवल नहीं पार होता बाजार पर दबाव रहेगा।। आने वाले 1-2 दिन में निफ्टी में 22,400-22,300 तक के लेवल्स देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में सेल ऑन राइज़ की स्ट्रेटजी रखनी चाहिए। अगर आज उछाल मिलता है या फिर बाजार फ्लैट भी खुलता है मार्केट तो एक शॉर्ट पोजीशन मार्केट में लेकर चल सकते हैं। 22800 का स्टॉप लॉस लगा कर रखें। नीचे में आज या कल में निफ्टी 22400-22350 के लेवल हिट कर सकता है।

इसी तरह का व्यू बैंक निफ्टी में भी है। बैंक निफ्टी थोड़ा आउटपरफॉर्मस जरूर दिखा रहा है। खासकर Kotak बैंक में जिस हिसाब से मोमेंटम है, उससे इसको सपोर्ट मिल रहा है। Axis Bank ने भी काफी सपोर्ट किया है। बैंक निफ्टी में भी ऐसा लगता है कि अगर 54,800 टूटता है तो और वीकनेस आ सकती है। अगर बैंक निफ्टी 54,800 के नीचे जाता है तो वहां पर भी शॉर्ट ट्रेड लेकर चल सकते हैं। बैंक निफ्टी में भी 54,400 तक के टारगेट आ सकते हैं। ओवरऑल शॉर्ट करना है तो मुझे लग रहा है निफ्टी एक ज्यादा अच्छा कैंडिडेट है। 22,300 के टारगेट के लिए शॉर्ट करके चल सकते हैं।

Mantri FinMart के अरुण कुमार के दो टॉप पिक

स्टॉक में अरुण की एक पिक बॉय की है और दूसरी सेल की है। बॉय में एक एक सेक्टर है जो जिसने काफी अच्छा किया है वो है केबल सेक्टर। इसमें कल काफी मोमेंटम देखने को मिला। तो केईआई में खरीदारी की सलाह रहेगी। इसे 4670- 4660 के आसपास खरीदें। 4615 का स्टॉप लॉस रहेगा और 4778 तक के टारगेट रहेंगे।

दूसरी पिक रियलिटी से है। जिस हिसाब से आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी आई है उसे देखते हुए इस स्पेस में ब्रेकडाउन की उम्मीद है। ऐसे में डीएलएफ को शॉर्ट करने की सलाह है। इसे 655 रुपए के आसपास शॉर्ट करें, 663 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा। 642 रुपए के स्पॉट लेवल्स के टारगेट डीएलएफ में आ सकते हैं।

 

Market Outlook : बाजार में दो दिन की बढ़त का सिलसिला टूटा, जानिए 8 सिंतबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन गिरी, चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: घरेलू बाजार में सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। बुधवार को दिल्ली में सोना 700 रुपये सस्ता हुआ। इसका भाव 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मंगलवार को यह 1,49,600 रुपये पर था।

24 कैरेट वाला सोना भी एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। 29 सितंबर को इसका भाव 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

कमजोर मांग का असर

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग कमजोर रही। ऊपर से ग्लोबल मार्केट में भी संकेत अच्छे नहीं थे। इसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ा।

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके कारण क्रूड की कीमत फिर चढ़ी। इसका भी सोने पर दबाव पड़ा।

रुपये की कमजोरी ने संभाला

हालांकि, रुपये की कमजोरी ने सोने की कीमत को ज्यादा गिरने से रोक दिया। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 43 पैसे टूटकर 96.78 के स्तर पर बंद हुआ।

कमजोर रुपया आमतौर पर भारत में आयात होने वाले सोने को महंगा करता है। इसलिए घरेलू बाजार में सोने की गिरावट कुछ सीमित रही।

चांदी 2.27 लाख रुपये पर स्थिर

चांदी की कीमत में बुधवार को कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है, जब चांदी 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

हालांकि, ग्लोबल मार्केट में चांदी की हालत कमजोर रही। इसकी कीमत 2.26% गिरकर 59.97 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह करीब तीन महीने का निचला स्तर है। चांदी इससे पहले 9 जुलाई को इस स्तर के आसपास थी।

ग्लोबल मार्केट में सोना भी दबाव में

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 47.42 डॉलर यानी 1.14% गिरकर 4,116.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। ग्लोबल ट्रेड में सोना करीब 4,120 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

मुद्रेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर है। इससे आगे ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

मजबूत डॉलर भी बना दबाव

डॉलर इस समय करीब 18 महीने के उच्च स्तर पर है। मजबूत डॉलर से सोने की कीमत पर दबाव बढ़ता है। दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 70% मानी जा रही है।

यानी फिलहाल सोने के लिए माहौल बहुत मजबूत नहीं दिख रहा। ग्लोबल ब्याज दरों और डॉलर की चाल आगे भी इसकी कीमत तय करने में अहम रहेगी।

RBI की दर बढ़ोतरी से भी बदला माहौल

इधर, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बुधवार को बड़ा फैसला लिया। RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी है।

RBI ने यह कदम बढ़ती महंगाई और कमजोर रुपये के बीच उठाया है। केंद्रीय बैंक ने आगे भी दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

आगे 75 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी की उम्मीद

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट राधिका पिपलानी के मुताबिक, RBI ने अपना रुख न्यूट्रल से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

उनका मानना है कि इस साइकिल में RBI कुल 75 बेसिस प्वाइंट तक दरें बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट 6.25% तक पहुंच सकता है। इसमें दिसंबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी भी शामिल है। बाजार इस बढ़ोतरी की काफी हद तक उम्मीद पहले से कर रहा है।

Bank of India ने लोन महंगा किया, दूसरे बैंक भी जल्द बढ़ा सकते हैं इंटरेस्ट रेट