अमेरिका के सैन एंटोनियो में एक सैनिक की 170 फीट की ऊंचाई से गिरने की वजह से मौत हो गई। सैनिक शनिवार को अलामडोम स्टेडियम में एक फुटबॉल मैच से पहले रस्सी से उतरने का लाइव डेमो दे रहा था। इसी दौरान उसका बैलेंस बिगड़ गया और वह तेजी से जमीन पर गिर गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हादसे के दौरान स्टेडियम में 23 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। सैनिक की पहचान उजागर नहीं हुई है। अमेरिकी वायुसेना की ट्रेनिंग यूनिट में तैनात था सैनिक हादसे के समय दर्शक स्टैंड में बैठे थे और मैदान के पास एक बैंड भी मौजूद था। हादसे के बाद मैदान पर करीब 10 मिनट तक जवान का इलाज किया गया। इसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रदर्शन के दौरान आखिर क्या हुआ था। 10 मिनट की देरी के बाद शुरू हुआ फुटबॉल मैच हादसे के बाद भी फुटबॉल मैच रद्द नहीं किया गया। AP के मुताबिक, करीब 10 मिनट की देरी के बाद मैच शुरू हो गया। यह मैच सेना में काम कर चुके और काम कर रहे सैनिकों के सम्मान में रखा गया था। यह यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट सैन एंटोनियो (UTSA) और नेवी के बीच हुआ। UTSA ने घटना पर दुख जताते हुए कहा, “हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं प्रभावित सैनिक, उसके परिवार और सेना में उसके साथियों के साथ हैं।” इस कार्यक्रम में उस सैनिक के अलावा तीन अन्य सैन्यकर्मियों को भी रस्सी के सहारे नीचे उतरने के प्रदर्शन में हिस्सा लेना था। हेलिकॉप्टर से रस्सी के सहारे उतरने की ट्रेनिंग लेते हैं सैनिक ——————– यह खबर भी पढ़ें… चर्च में प्रेयर के दौरान पादरी पर क्रूस गिरा, मौत:ऑनलाइन प्रसारण में रिकॉर्ड हुआ वीडियो; कुछ मिनट पहले कहा था- एक दिन हम सबको मरना है दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर में शनिवार की प्रेयर के दौरान पादरी के ऊपर लकड़ी से बना क्रॉस गिर गया। पूरी खबर पढ़ें…
आलीशान घर, शानदार लोकेशन, स्विमिंग पूल और प्राइवेट गार्डन लग्जरी घर खरीदते समय लोग आमतौर पर इन्हीं सुविधाओं पर ध्यान देते हैं। लेकिन हैदराबाद में कुछ लग्जरी होमबायर्स की प्राथमिकताएं अब कुछ अलग नजर आ रही हैं। वे घर पसंद करने से पहले यह भी जानना चाहते हैं कि आसपास किसी बड़े नेता का घर तो नहीं है। वजह घर की कीमत या सुविधाएं नहीं, बल्कि शांति, निजता और रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाली संभावित परेशानियां हैं। हैदराबाद के एक रियल एस्टेट कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस दिलचस्प ट्रेंड को चर्चा में ला दिया है।
विला खरीदने पहुंचे ग्राहक ने सबसे पहले पूछा ये सवाल
हैदराबाद के रियल एस्टेट कारोबारी सतीश रेड्डी ने 19 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक प्रीमियम विला प्रोजेक्ट में ग्राहक के साथ जाने पर उन्हें एक दिलचस्प सवाल सुनने को मिला। रेड्डी के मुताबिक, ग्राहक ने सेल्स हेड से सबसे पहले पूछा, “ई विलास लो पेद्दा पॉलिटिशियंस एवरु तीस्कोलेदु कदा?” यानी इन विला में किसी बड़े नेता ने तो घर नहीं खरीदा है?
लग्जरी प्रॉपर्टी खरीदने के दौरान इस तरह का सवाल आमतौर पर सुनने को नहीं मिलता। लेकिन रेड्डी के मुताबिक, यह कोई पहला मौका नहीं था, जब किसी ग्राहक ने आसपास रहने वाले लोगों और उनके प्रभाव के बारे में ऐसी चिंता जताई हो।
बड़े नेताओं के आसपास घर होने से क्या हो सकती है परेशानी?
रेड्डी ने अपनी पोस्ट में बताया कि किसी प्रमुख राजनीतिक हस्ती के आसपास रहने पर कुछ परिस्थितियों में आम निवासियों की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। किसी खास घर पर लोगों की आवाजाही बढ़ना, आगंतुकों की भीड़ जुटना और आसपास हलचल बने रहना ऐसी संभावित परेशानियां हैं।
उन्होंने जन्मदिन या अन्य अवसरों पर राजनीतिक समर्थकों की ओर से लगाए जाने वाले बड़े-बड़े बैनरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कुछ आवासीय परिसरों में ऐसे बैनर कई दिनों तक लगे रह सकते हैं और कभी-कभी लंबे समय तक भी दिखाई देते हैं।
रेड्डी ने इस संदर्भ में हैदराबाद के NCC Urban One का उदाहरण दिया। हालांकि, ये अनुभव और टिप्पणियां उनकी पोस्ट पर आधारित हैं, न कि सभी आवासीय परिसरों की स्थिति का प्रमाण।
Last evening, I was with a client at a premium villa project, and the first question he asked the sales head was:
“Ee villas lo pedda politicians evvaru teesukoledu kada” (No big politicians have bought villas here, right?)
Apart from occasional bursts of visitors and the regular high volume of visitors at certain homes, residents also have to deal with ugly banners put up by sycophants at the entrance and sometimes all along the lanes on birthdays and other occasions.
At some places, like NCC Urban One, these banners remain for days or even most part of the year too.
This is increasingly becoming an important factor for homebuyers looking for privacy, peace and exclusivity.
And this isn’t the first time I’ve heard this. Someone who moved from a community in Financial district to another villa community in Gandipet told me the same thing.
— Satish Reddy | Hyderabad Real Estate & Infra (@HydREGuide) October 19, 2026
फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट से गांडीपेट तक सामने आई ऐसी चिंता
रेड्डी ने बताया कि उन्हें पहले भी ऐसा अनुभव सुनने को मिला था। उनके अनुसार, हैदराबाद के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट स्थित एक आवासीय समुदाय से गांडीपेट के दूसरे विला समुदाय में शिफ्ट हुए एक व्यक्ति ने भी इसी तरह की चिंता जाहिर की थी।
यह उदाहरण दिखाता है कि प्रीमियम घर खरीदने या बदलने के दौरान कुछ लोगों के लिए सिर्फ प्रॉपर्टी की खूबसूरती और सुविधाएं ही अहम नहीं हैं। वे यह भी देखना चाहते हैं कि वहां रहने के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी शांत और निजी रहेगी।
लग्जरी घर का मतलब सिर्फ महंगी प्रॉपर्टी नहीं
सतीश रेड्डी की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी चर्चा की। कुछ लोगों ने माना कि घर के आसपास का माहौल, लोगों की आवाजाही और निजता किसी प्रॉपर्टी को चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दरअसल, महंगा घर खरीदने वाले कई लोगों के लिए लग्जरी का मतलब केवल बड़ा घर या शानदार सुविधाएं नहीं, बल्कि सुकून से रह पाना भी है। हैदराबाद में सामने आया यह मामला इसी बदलती सोच की ओर इशारा करता है, जहां घर खरीदने से पहले लोग सिर्फ यह नहीं पूछ रहे कि प्रॉपर्टी कितनी शानदार है, बल्कि यह भी जानना चाहते हैं कि वहां उनकी निजी जिंदगी कितनी प्रभावित हो सकती है।
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Tiger Shroff Attack: मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर कथित हमले के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया है। गैंग से जुड़े बताए जा रहे अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि टाइगर श्रॉफ को सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, पुलिस अभी इस सोशल मीडिया पोस्ट और एक वॉयस नोट की जांच कर रही है।
कौन है अनिल पंडित?
32 वर्षीय पंडित के अमेरिका से काम करने का संदेह है। जांचकर्ताओं ने उसे हरियाणा, दिल्ली और पुणे में हुई गोलीबारी और जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामलों से जोड़ा है।
मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के एक गांव का रहने वाला अनिल पंडित, 2023 में भारत छोड़कर कनाडा गया था और बाद में अमेरिका चला गया। वहां गैंगस्टर रणदीप मलिक के संपर्क में आने के बाद, वह कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हो गया।
आरोप है कि पिछले छह महीनों में पंडित ने भारत में मौजूद शूटर्स के एक नेटवर्क का इस्तेमाल करके कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है। हरियाणा, दिल्ली और पुणे की घटनाओं सहित गोलीबारी के कई मामलों की जांच में भी उसका नाम सामने आया है।
पानीपत से अमेरिका तक
सूत्रों के अनुसार, पंडित का सफर हरियाणा के पानीपत जिले से शुरू हुआ। बताया जाता है कि वह 2023 में भारत छोड़कर कनाडा चला गया था। बाद में, लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े गैंगस्टर बताए जाने वाले रणदीप मलिक के संपर्क में आने के बाद, वह अमेरिका के कैलिफोर्निया पहुंच गया।
जांचकर्ताओं को शक है कि विदेश में रहते हुए भी पंडित भारत में मौजूद शूटर्स के साथ तालमेल बिठाता रहा। उससे जुड़ी कुछ घटनाओं में हरियाणा में गोलीबारी और जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के मामले शामिल हैं, जिनमें पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स ने इसमें शामिल होने के शक में शूटर्स को गिरफ्तार किया था।
दिल्ली के जिम में हुई गोलीबारी मामले में नाम सामने आया
पंडित पर दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित एक जिम में गोलीबारी की साजिश रचने का भी आरोप है। इस जिम में अक्सर गायक गुरु रंधावा आते-जाते थे। बताया जा रहा है कि इस घटना का संबंध गायक के सलमान खान के साथ जुड़ाव से है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने इस मामले में पंडित से जुड़े चार शूटरों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी पंडित से बातचीत करने के लिए ‘सिग्नल’ ऐप का इस्तेमाल करते थे और उनके पास से विदेशी हथियार बरामद हुए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, जिम के बाहर हुई इस गोलीबारी की जिम्मेदारी पहले ही पंडित ले चुका था।
पुणे के ज्वेलरी स्टोर पर गोलीबारी में भी आया नाम
दिल्ली में हुई घटना के करीब 15 दिन बाद पुणे में एक ज्वेलरी स्टोर पर गोलीबारी की खबर सामने आई। इस मामले की जांच के दौरान एक बार फिर अनिल पंडित का नाम सामने आया।
महाराष्ट्र पुलिस ने इस घटना में कथित तौर पर शामिल शूटरों को गिरफ्तार किया। जांच में उनके तार अनिल पंडित और लॉरेंस बिश्नोई के करीबी बताए जाने वाले शुभम लोनकर से जुड़े होने की बात सामने आई।
रिपोर्ट के मुताबिक, गोलीबारी के तीनों आरोपी राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले थे। उन पर शक है कि वे खास तौर पर इस वारदात को अंजाम देने के लिए पुणे पहुंचे थे।
टाइगर श्रॉफ पर हमले का दावा
यह नया घटनाक्रम तब सामने आया जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली। पंडित द्वारा पोस्ट किए गए संदेश में, उसने और हरमन संधू ने अभिनेता के खिलाफ की गई इस कार्रवाई की जिम्मेदारी ली है।
पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि श्रॉफ ने सलमान खान के साथ काम न करने की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। साथ ही, मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के उन अन्य लोगों को भी धमकी दी गई है जो इस सुपरस्टार के साथ काम करना जारी रखे हुए हैं। इसमें विरोधी गैंग के सदस्यों को भी धमकी दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने कथित तौर पर कई दिनों तक श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर रखी थी। पुलिस जांच के हिस्से के रूप में इस सोशल मीडिया पोस्ट और एक वॉयस नोट की पुष्टि कर रही है।
अलग-अलग राज्यों के मामलों में पंडित की कथित भूमिका ने भारत में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और विदेशों में मौजूद गैंग के सदस्यों के बीच संभावित संबंधों की ओर ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे और पंडित को अलग-अलग घटनाओं से जोड़ने वाले आरोप अभी भी पुलिस जांच के दायरे में हैं।
Spy News: जम्मू में एक भारतीय सेना के अधिकारी की पत्नी के खिलाफ कथित जासूसी से जुड़ी गतिविधियों के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने चीनी खुफिया एजेंट के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विश्लेषणात्मक दस्तावेज तैयार करने के लिए ‘चैटजीपीटी’ और ‘क्लाउड’ जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल किया। मेजर की पत्नी पर विदेशी खुफिया एजेंटों के संपर्क में आने और संवेदनशील सैन्य जानकारी शेयर करने के आरोपों की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, महिला के पति की तैनाती पठानकोट में 9 कोर की इंटेलिजेंस यूनिट के साथ है। मामले में सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारी शेयर की गई और इसका सोर्स क्या था।
अधिकारियों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली आरोपी महिला हाइली क्वालिफाइड है। उसने 2023 में संयुक्त राष्ट्र (UN) में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के क्षेत्र में इंटर्नशिप की थी। फिलहाल वह स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि उसे गिरफ्तार तो नहीं किया गया है। लेकिन FIR दर्ज होने के बाद उससे पूछताछ की गई है। वह जांच एजेंसियों का सहयोग कर रही है।
महिला के खिलाफ केस दर्ज, जांच शुरू
अधिकारियों ने बताया कि महिला को संवेदनशील सुरक्षा, रक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विश्लेषणात्मक लेख तैयार करने का काम सौंपे जाने का आरोप है। इन विषयों में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) से जुड़ी गतिविधियां, अरुणाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ड्रोन की तैनाती शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार को जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।
महिला पर जासूसी करने और गोपनीय सरकारी जानकारी को बिना अनुमति इस्तेमाल करने से जुड़े शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, आपराधिक साजिश रचने और देश की संप्रभुता के खिलाफ अपराधों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी लगाई गई हैं।
कैसे हुआ शक?
मामले की जांच का जिम्मेदारी एक पुलिस उपाधीक्षक (SP) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि खुफिया सूचना मिलने के बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी और पुलिस की संयुक्त टीम ने 14 अक्टूबर को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन पर महिला को उस समय रोका, जब वह कथित तौर पर पठानकोट जाने वाली ट्रेन में सवार होने की तैयारी कर रही थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए पास के एक सैन्य स्टेशन ले जाया गया। महिला का मोबाइल फोन जब्त कर विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
खुफिया इनपुट के बाद सुरक्षा कर्मियों ने रोका
सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद महिला को उसके परिवार के साथ यात्रा करते समय 9 कोर के क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों ने रोका था। इसके बाद खुफिया अधिकारियों और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के कर्मियों की एक टीम ने उससे पूछताछ की। जांच एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी खुफिया नेटवर्क से उसके संपर्कों और सैन्य सूचनाओं के संभावित आदान-प्रदान की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
विदेश में पढ़ाई के दौरान संपर्क में आने का दावा
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह आशंका जताई गई है कि महिला पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान एक विदेशी खुफिया एजेंट के संपर्क में आई थी। बताया जा रहा है कि स्विट्जरलैंड समेत कुछ देशों की यात्रा के दौरान उसे लेख लिखने के काम के बहाने संपर्क किया गया। आरोप है कि शुरुआत में उसे प्रत्येक लेख के लिए 200 से 300 डॉलर देने की पेशकश की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि शुरुआत में लेख लिखने के नाम पर शुरू हुआ यह संपर्क बाद में कथित तौर पर संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा करने तक पहुंच गया। हालांकि, विदेशी एजेंट से संपर्क और जानकारी साझा करने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सेना की तैनाती और प्रतिबंधित क्षेत्रों की जानकारी लीक करने का आरोप
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी में सेना की कोर, सैन्य संरचनाओं, जवानों की तैनाती और प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं। अब जांच का अहम पहलू यह है कि महिला को ये जानकारियां कहां से मिलीं। एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या उसे अपने पति की आधिकारिक तैनाती से जुड़ी किसी जानकारी तक पहुंच थी या उसने किसी अन्य माध्यम से संवेदनशील डिटेल्स हासिल किए थे।
भुगतान और वित्तीय लेन-देन की जांच
सूत्रों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर लेख लिखने के बदले नियमित भुगतान मिलने की बात स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब उसके वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भुगतान किसने किया, रकम कहां से आई और क्या किसी लेन-देन का संबंध कथित खुफिया गतिविधियों से है। हालांकि, भुगतान मिलने की बात अपने आप में जासूसी के आरोप को साबित नहीं करती। जांच एजेंसियों को कथित सैन्य जानकारी साझा किए जाने और विदेशी संपर्कों के बीच संबंध स्थापित करना होगा।
दो महीने की बच्ची होने की भी चर्चा
सूत्रों से मिली जानकारी में दावा किया गया है कि महिला को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके पीछे उसकी दो महीने की बच्ची होने की बात बताई जा रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं होने के इस कथित कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। महिला पर लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगा कि संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के कथित लीक में उसकी क्या भूमिका थी और क्या इस मामले के तार किसी विदेशी खुफिया नेटवर्क से जुड़े हैं।
ICICI BANK SHARE PRICE: ICICI बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिसके बाद ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक को लेकर काफी बुलिश हैं। जेपी मॉर्गन और नोमुरा ने बैंक के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है, जबकि कई अन्य फर्मों ने ‘Buy’ या इसी तरह की रेटिंग बरकरार रखी है। जिन ब्रोकरेज फर्मों ने इस पर अपनी राय दी है, उनमें गोल्डमैन सैक्स सबसे ज्यादा तेजी की उम्मीद जता रहा है। गोल्डमैन सैक्स ने 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार के 1,397 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 45 फीसदी की तेजी दिखाता है।
स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज फर्मों की राय
Bernstein
इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है और प्रति शेयर ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 28.8% तक की तेजी आ सकती है।फर्म ने कहा कि ICICI बैंक ने एक और शानदार तिमाही पेश की है, जिससे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बड़े प्राइवेट बैंक के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।
बैंक के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ में काफी तेजी आई है। लोन ग्रोथ में कॉर्पोरेट, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल सेगमेंट – सभी क्षेत्रों का मजबूत योगदान रहा है। बर्नस्टीन के अनुसार, हालांकि इस तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह गिरावट अन्य बैंकों के अनुरूप ही है। साथ ही, मजबूत बैलेंस शीट ग्रोथ के कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी अच्छी बनी रही। फर्म ने आगे कहा कि मजबूत फीस इनकम और बेहतर होती एसेट क्वालिटी के चलते, बैंक अपनी बेहतरीन ऑपरेटिंग और अर्निंग्स ग्रोथ को बनाए रखने में कामयाब रहा है।
JPMorgan
जेपी मॉर्गन ने ICICI बैंक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि बैंक ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹25,340 करोड़ रही, जो जेपी मॉर्गन के अनुमान से 2% ज्यादा है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) ₹20,580 करोड़ रहा, जो अनुमान से 7% अधिक है, और टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) ₹14,840 करोड़ रहा, जो अनुमान से 11% ज्यादा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने बताया कि IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर, कोर NII में पिछली तिमाही के मुकाबले 6% और पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। इसे पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% की लोन ग्रोथ से सपोर्ट मिला, जो इंडस्ट्री में सबसे बेहतर है।
ICICI बैंक का कोर NIM (IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर) पिछली तिमाही के मुकाबले 4 बेसिस पॉइंट्स कम हो गया है, जिसका मुख्य कारण FCNR (B) का असर है।
फर्म ने आगे कहा कि हालांकि FCNR (B) का पूरा असर तीसरी तिमाही में देखने को मिलेगा, जिससे NIM पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन JP मॉर्गन को चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2028 में NIM बढ़ने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि बैंक का 57% लोन बुक रेपो रेट से जुड़ा है। साथ ही, अब अनुमानों में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी (जिसमें दिसंबर 2026 की एक बढ़ोतरी भी शामिल है) को भी जोड़ लिया गया है।
Nomura
नोमुरा ने ICICI बैंक को “Buy” (खरीदने) की रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,700 से बढ़ाकर ₹1,740 प्रति शेयर कर दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 24.6% की संभावित बढ़त को दर्शाता है।
नोमुरा के अनुसार, ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2029 के लिए अपने ‘अर्निंग पर शेयर’ (EPS) के अनुमानों को क्रमशः 3% और 7% बढ़ा दिया है।
फर्म ने बताया कि वन-ऑफ (असाधारण) आइटम्स को एडजस्ट करने के बाद NII में पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। यह नोमुरा के अनुमान से 2% अधिक है, जिसमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ क्रमशः 30% और 27% रही।
कोर PPOP ₹20,800 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22% अधिक है। नोमुरा ने बताया कि बैंक ने ₹1.6 लाख करोड़ के FCNR (B) डिपॉजिट जुटाए (जो कुल डिपॉजिट का 8% है)। इसमें से 50% हिस्सा इन्हीं डिपॉजिट्स के बदले दिए गए लोन से आया है। बैंक के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले दो तिमाहियों में इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा।
Goldman Sachs
गोल्डमैन सैक्स ने Buy” रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से 44.9% की बढ़त की संभावना दिखाता है। बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर मोर्चे पर उम्मीदों से बेहतर रहा। लोन ग्रोथ 24% रही, जो अनुमान से 2% ज्यादा है, और कोर रेवेन्यू ग्रोथ 18% रही, जो गोल्डमैन सैक्स के अनुमान से 2% अधिक है।
बैंक का NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) अनुमान से 5 बेसिस पॉइंट ज्यादा रहा और PPoP (प्रोविजन से पहले का मुनाफा) भी उम्मीद से बेहतर रहा, जबकि प्रोविजन (संभावित नुकसान के लिए रखी गई रकम) कम रहे। NIM का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा; सिस्टम में सबसे मजबूत FCNR (B) डिपॉजिट बेस होने के बावजूद, इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 10 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, बैंक ने ब्याज दर चक्र के निचले स्तर पर भी लिक्विडिटी (नकदी) को बनाए रखा है। इसका लिक्विडिटी डिपॉजिट रेशियो (LDR) 95% है। इससे मध्यम अवधि में कमाई बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश मिलती है, क्योंकि इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल आगे किया जा सकता है।
UBS
UBS ने ICICI बैंक के लिए “Buy” रेटिंग दी है और 1,800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म का कहना है कि बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर लिहाज से शानदार रहा, जिसे मजबूत लोन और डिपॉजिट ग्रोथ का सहारा मिला।
बैंक की लोन ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% और पिछले साल के मुकाबले 30% रही, जो उम्मीदों और अन्य बैंकों के प्रदर्शन से काफी बेहतर है। इसमें बिजनेस बैंकिंग की लगातार मजबूती के अलावा, कॉर्पोरेट लोन में भी काफी तेजी देखी गई।
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में मार्जिन अपने निचले स्तर पर आ जाएंगे, जिसके बाद चौथी तिमाही में इनमें सुधार देखने को मिलेगा।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर अब YSR कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने रुख पर सवाल उठाए हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने रविवार को माना कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े बिल पर NDA सरकार का समर्थन करना उनकी पार्टी की गलती थी। उन्होंने कहा कि पार्टी को अब अपने उस फैसले पर अफसोस है।
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमें अब इस बात का पछतावा है… हमें एहसास हुआ है कि ऐसी चयन प्रक्रिया को मंजूरी देना हमारी गलती थी, जिसमें चुनाव आयुक्त का चुनाव तीन सदस्यीय पैनल द्वारा किया जाता है। इस पैनल में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।” उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था ने चुनाव आयोग (EC) के ढांचे को असंतुलित कर दिया है।
इस दौरान जगन ने कानून में संशोधन की भी मांग की, ताकि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को फिर से शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा, “अभी की प्रक्रिया इतनी एकतरफा है, जैसे कि छात्र खुद ही अपना परीक्षक चुन रहे हों। ऐसा नहीं होना चाहिए।”
बता दें कि यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि 2023 के कानून का YSRCP ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगह समर्थन किया था, जबकि विपक्ष ने इसमें से CJI को हटाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
‘सोच बदल गई है’
यह पहली बार नहीं है जब जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयोग (EC) के कामकाज को लेकर चिंता जताई है। सितंबर में, चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की जांच पर प्रतिक्रिया देते हुए, उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि “लोकतंत्र तभी कायम रह सकता है जब लोगों को चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा हो”।
रिपोर्ट में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई आपत्तियों का जिक्र किया गया था।
इस पर जगन ने लिखा था, “आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय, जनता को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि क्या आपत्तियां दर्ज की गईं, उन पर क्या कार्रवाई हुई, और मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी तरीके से पूरी की गई।”
उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करने, नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की मांग की कि लोग बिना किसी डर के अपने इन अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
YSRCP के एक नेता ने कहा, “हमने हमेशा कहा है कि (NDA) सरकार को हमारा समर्थन मुद्दों पर आधारित होगा। इस मामले में, हमें लगता है कि जनता को सरकार से और अधिक आश्वासन मिलने की जरूरत है।”
NDA को संसदीय समर्थन
कुछ विधायी मामलों में NDA को पार्टी का समर्थन मिलने का मतलब यह नहीं था कि BJP के साथ कोई औपचारिक गठबंधन हो गया है। हालांकि, संसद में पार्टी के रुख ने अक्सर सरकार को अपने गठबंधन के दायरे से बाहर भी समर्थन जुटाने में मदद की, जिससे जगन का बदला हुआ रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
YSRCP ने संसद में लगातार NDA का समर्थन किया है। 2020 में, पार्टी ने केंद्र सरकार को उन विवादास्पद कृषि कानूनों पर समर्थन दिया था, जिन्हें बाद में रद्द कर दिया गया। 2023 में, जब विपक्षी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया था, तब भी YSRCP के विधायक उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
साल 2019 से 2024 के बीच, जब आंध्र प्रदेश में YSRCP सत्ता में थी, तब पार्टी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के मुद्दों पर NDA का समर्थन किया था।
जानकारी के मुताबिक, 2024 के चुनावों के बाद, जब YSRCP के केवल चार लोकसभा सांसद ही जीत पाए और आंध्र प्रदेश में पार्टी सत्ता से बाहर हो गई, तब भी उसने स्पीकर पद के लिए NDA की पसंद का समर्थन किया था। इसके अलावा, 2025 में पार्टी ने सत्ताधारी गठबंधन की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन का भी समर्थन किया, और इस साल की शुरुआत में उसने परिसीमन विधेयक (डिलिमिटेशन बिल) पैकेज को अपना समर्थन देने की घोषणा की।
वाम दलों के साथ तालमेल
जगन के करीबी सूत्रों ने बताया कि YSRCP वाम दलों (जिसमें CPI(M) और CPI शामिल हैं) के साथ बातचीत कर रही है। यह बातचीत आंध्र प्रदेश में मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर हो रही है।
एक सूत्र ने कहा, “आंध्र प्रदेश में विपक्ष की एक पार्टी होने के नाते, हमारा मानना है कि हमें उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए जो उन मतदाताओं के हितों का समर्थन कर रहे हैं, जिनके नाम अवैध रूप से हटा दिए गए हैं। TDP के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार, राज्य चुनाव आयोग (EC) का पक्ष ले रही है और अपनी बात मानने वाले इस आयोग का फायदा उठा रही है।”
गौरतलब है कि जगन मोहन रेड्डी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब YSRCP और सत्ताधारी TDP के नेतृत्व वाले गठबंधन (जिसमें BJP और जन सेना पार्टी भी शामिल हैं) के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
YSRCP ने सत्ताधारी गठबंधन पर अपने लोकसभा फ्लोर लीडर, पी.वी. मिथुन रेड्डी की हत्या की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। वहीं, TDP ने आरोप लगाया है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान, मिथुन ने भीड़ को आगजनी के लिए उकसाया था।
राज्य में TDP के नेतृत्व वाला गठबंधन पूरी तरह से सत्ता में है। ऐसे में, YSRCP मतदाता सूची में बदलाव और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज जैसे मुद्दों पर विपक्ष का समर्थन एकजुट करने की कोशिश कर रही है।
क्या एक व्यापक विपक्षी मोर्चा बनेगा?
जगन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं को सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन दिया है। बता दें कि CJP के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रंका को जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस पर जगन ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने एक पोस्ट में कहा, “व्यवस्था में एक खामी है जिसे ठीक करने की जरूरत है। चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा फिर से बहाल होना चाहिए। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी से कोई समस्या हल नहीं होगी, बल्कि इससे हालात और बिगड़ेंगे।”
उनका यह कदम तब आया है जब पड़ोसी राज्य तेलंगाना की एक क्षेत्रीय पार्टी, ‘भारत राष्ट्र समिति’ (BRS) ने भी CJP का समर्थन किया है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय पार्टियों के राजनीतिक हित आपस में मेल खा सकते हैं।
बता दें कि जगन का यह बदला हुआ रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्रीय पार्टियों को मिलाकर एक व्यापक विपक्षी मोर्चा बनाने की कोशिशों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
वहीं तमिलनाडु में, इस साल हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के विजय की पार्टी ‘TVK’ के साथ हाथ मिलाने से, कांग्रेस और DMK के रिश्तों में खटास आ गई है। DMK ने भी CJP का समर्थन किया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, YSRCP के लिए इस तरह का कोई भी गठबंधन मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में उसकी राजनीतिक लड़ाई से प्रेरित होगा।
एक सूत्र ने बताया, “आंध्र प्रदेश में YSRCP को समर्थन देने वाले गठबंधनों के लिए जगन हमेशा तैयार रहे हैं। फिलहाल, राज्य में TDP के नेतृत्व वाले गठबंधन को रोकने के लिए ‘लेफ्ट फ्रंट’ (वाम मोर्चा) या क्षेत्रीय दलों का गठबंधन काफी लग रहा है।”
हालांकि, कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना फिलहाल कम ही है, क्योंकि जगन और उनकी बहन YS शर्मिला के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हैं। शर्मिला कांग्रेस की राज्य इकाई की प्रमुख हैं।
एक सूत्र ने कहा, “फिलहाल कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।”
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बुद्धि के ब्रह्म ने मानो मशीन में, एआई में अपना निवास बना लिया हो। तभी अब मशीनें मनुष्य से लाखों गुना विशाल दिमाग दिखलाते हुए हैं। हर दिन, हर सप्ताह इतनी खबरें, ऐसी-ऐसी कवर स्टोरीज आ रही हैं कि अब एआई का न ओर है और न छोर। इस सप्ताह पत्रिका द इकोनॉमिस्ट का कवर देखा, यूरेका एआई! यदि विज्ञान की खोजों का जिम्मा मशीनों ने अपने हाथ में ले लिया तो? देख पढ़ने की तुक समझ नहीं आई। लगा पढ़ने की जरूरत ही नहीं है! आखिर मनुष्य यानी पाठक पढ़े भी तो उसमें एआई के असीम को समझने, विचारने का सामर्थ्य कितना है? उसके करने के लिए अब है क्या? बेचारा मनुष्य। जहाँ वह असंख्य दिमागी सीमाओं में बँधा हुआ है, वहीं एआई स्वतंत्र है, स्वच्छंद है, बेफिक्र है और अपने ही पुर्जों, भाषा के अनंत में उड़ता हुआ।
बात केवल लिखने-पढ़ने की ही नहीं है। द इकोनॉमिस्ट की 15 अक्टूबर की कवर स्टोरी के अनुसार, छह अक्टूबर 2026 का दिन गणित के इतिहास का सबसे बड़ा दिन साबित हो सकता है। कैसे? इस दिन अमेरिकी कंपनी ओपनएआई ने एक ही दिन में 719 शोधपत्र जारी किए। दावा किया कि उसके एआई मॉडल ने गणित की कम से कम 372 ऐसी समस्याओं के समाधान खोज लिए हैं जिनमें बड़े-बड़े गणितज्ञ दशकों से उलझे हुए थे। उससे पहले सितंबर में एआई ने तरल पदार्थों की गति से जुड़ी एक ऐसी गणितीय समस्या को महज 88 घंटों में हल करने का दावा किया जिस पर गणितज्ञ एक सदी से माथापच्ची कर रहे थे।
नतीजतन गणितज्ञ हैरान-परेशान हैं। कुछ तो विरोध में उतर आए हैं। आखिर मनुष्य के वर्षों के अध्ययन, चिंतन और शोध का अर्थ क्या बचेगा यदि मशीन चंद घंटों में उत्तर निकाल दे? और वह भी ऐसे उत्तर जिन्हें सही मानने से पहले मनुष्य को समझने में ही महीनों लग जाएँ! ध्यान रहे, ये एआई कंपनियों के घोषित समाधान हैं, जिनकी स्वतंत्र वैज्ञानिक जाँच और पुष्टि अलग प्रश्न है।
पर गणित मात्र एक विषय है। मौसम की भविष्यवाणी, परमाणु संलयन के प्रयोग, नई धातुओं और पदार्थों की खोज, प्रोटीन की संरचना, दवाइयों का निर्माण आदि सभी में तो एआई घुस चुकी है। जीव विज्ञान में भी छलाँगें हैं। मशीनें डीएनए की भाषा पढ़ रही हैं। उसमें फेरबदल सुझा रही हैं। सूखे और गर्मी को झेलने वाली फसलें तैयार करने की कोशिश हो रही है। प्रयोगशालाओं में जीवित कोशिकाओं के कंप्यूटर मॉडल बनाने की तैयारी है। मतलब कल को वैज्ञानिक किसी दवा का असर पहले कंप्यूटर की आभासी कोशिका पर जाँचेंगे। और आगे? बिल्कुल नए जीवों की रचना भी संभव होगी! द इकोनॉमिस्ट ने बताया है कि एआई की मदद से प्राकृतिक वायरसों से अलग सोलह प्रयोगात्मक वायरस बनाए जा चुके हैं, जो बैक्टीरिया पर हमला करते हैं। सोचें, जिस जीव-जगत को समझने में मनुष्य को सदियाँ लगीं, अब उसकी जैविक संरचना में परिवर्तन और नए जीव बनाने की संभावनाएँ मशीनों से लगातार खुल रही हैं और खुलती जाएँगी।
असली बात इससे भी आगे की है। गूगल डीपमाइंड, ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी कंपनियाँ एआई को केवल वैज्ञानिकों की सहायता करने वाला औजार नहीं बनाए रखना चाहतीं। वे स्वयं वैज्ञानिक खोजों के मैदान में उतर रही हैं। क्यों? इसलिए भी कि विज्ञान की कठिन समस्याएँ हल करते हुए उनके एआई मॉडल और अधिक बुद्धिमान बन सकते हैं। यानी मशीन विज्ञान की समस्याएँ सुलझाएगी, उससे अपनी बुद्धि बढ़ाएगी और फिर उसी बढ़ी हुई बुद्धि से अपने से भी बेहतर मशीन बनाने की कोशिश करेगी।
तब मनुष्य कहाँ होगा? वैज्ञानिक खोज का मालिक, उसका निरीक्षक या मशीन द्वारा निकाले गए निष्कर्षों को समझने में लगा एक विद्यार्थी, शोधकर्ता? द इकोनॉमिस्ट की संपादकीय चिंता यही है कि विज्ञान में मनुष्य की समझ और नियंत्रण बना रहना चाहिए। अन्यथा वह स्थिति भी संभव है जिसमें मशीनें खोजें करती रहें और मनुष्य केवल उनसे पूछता रहे कि अब क्या करना है। पत्रिका ने तो यहाँ तक लिखा है कि ऐसा समाज मनुष्यों को मशीनों के पालतू प्राणियों जैसी स्थिति में पहुँचा सकता है!
इस नई दुनिया का बाजार तेजी से सभी ओर बन रहा है। एआई की बुद्धि अब टोकन के हिसाब से बिक रही है। जिस तरह कभी अनाज, नमक या पशुओं से मूल्य का हिसाब होता था, वैसे अब मशीन की भाषा पढ़ने, लिखने और सोचने की कीमत टोकन में तय हो रही है। एक कंपनी का एआई दूसरी कंपनी से चालीस गुना सस्ता हो सकता है। सस्ते और महँगे एआई मॉडलों के बीच ग्राहक को चुनाव कराने वाली ओपनराउटर जैसी कंपनी को खरीदने के लिए भुगतान कंपनी स्ट्राइप ने कथित तौर पर 7.5 अरब डॉलर का सौदा किया है।
यानी बुद्धि का नया बाजार! किस काम के लिए सस्ती मशीन का दिमाग लगाना है और किस काम के लिए महँगी मशीन का, यह कारोबार का नया हिसाब, नया मॉडल है। जाहिर है औद्योगिक उत्पादनों, सेवाओं में जैसे सस्ते विकल्प देकर बाजार पर कब्जा करता है वैसे ही एआई बाजार में भी चीन की डीपसीक जैसी कंपनियाँ सस्ते एआई मॉडल बेचकर अमेरिकी कंपनियों को चुनौती दे रही हैं।
और अब जरा कल्पना करें, दिमाग में भारत पर सोचें तो क्या मिलेगा? खाली खोखा! दुनिया में जब अमेरिका और चीन की कंपनियाँ मशीनों से गणित की अनसुलझी समस्याएँ हल कराने, नई दवाएँ और जीव बनाने तथा एआई से एआई की बुद्धि बढ़ाने में लगी हैं, तब भारत इस वैज्ञानिक क्रांति में कहाँ खड़ा है? बकौल विश्व बौद्धिक संपदा संगठन के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2026 के, भारत इनोवेशन में 139 अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में 38वें स्थान पर है। स्विट्जरलैंड पहले, स्वीडन दूसरे, अमेरिका तीसरे, दक्षिण कोरिया चौथे और सिंगापुर पाँचवें स्थान पर हैं। चीन दसवें स्थान पर पहुँच चुका है।
मतलब दुनिया में नवाचार की दौड़ का हिसाब देखें तो भारत अभी पहले तीस देशों में भी नहीं है। जबकि भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्थाओं में एक है। उसके नौजवान वैश्विक तकनीकी कंपनियों में काम कर रहे हैं। कहने को भारत सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं के निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है। ऐसे ही विकसित चरण के स्टार्टअप उद्यमों में वेंचर कैपिटल सौदों के मामले में चौथे स्थान पर है। नवाचार से प्राप्त परिणामों में 25वें स्थान पर है। लेकिन मार कहाँ खा रहा है? नवाचार के लिए आबोहवा याकि जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं में 49वें स्थान पर होने के कारण! मतलब दुनिया की तकनीक को चलाने, उसके लिए सेवाएँ देने और उसका बाजार बनने के जुगाड़ों में भारत आगे है, लेकिन मौलिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीक बनाने की बुनियादी क्षमता में पीछे।
जबकि चीन की छलाँगें क्या हैं? वह सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन से आगे सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और गहन वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, अमेरिका में गहन विज्ञान और भौतिक तकनीक पर आधारित 12,752 स्टार्टअप हैं। चीन में ऐसी कंपनियों की संख्या 2025 में 3,466 हो गई। पाँच वर्षों में दोगुने से अधिक! और ये कंपनियाँ केवल मोबाइल एप्लीकेशन बनाने या ऑनलाइन सामान बेचने वाली नहीं हैं। ये भौतिक दुनिया की नई तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियाँ हैं।
यानी चीन की तैयारी उस दुनिया के लिए है जिसमें मशीनें विज्ञान की खोज करेंगी और उनसे नई मशीनें, नई दवाएँ, नए पदार्थ और नई उत्पादन प्रणालियाँ बनेंगी। तब सवाल है कि भारत क्या करेगा? दुनिया की तकनीक का सेवा प्रदाता और उपभोक्ता बना रहेगा? या अपनी खोज, अपने आविष्कार और अपनी वैज्ञानिक क्षमता से उस दुनिया के निर्माण में भी हिस्सा लेगा?
सवाल केवल विज्ञान की प्रयोगशालाओं का नहीं है। मनुष्य के जीवन का भी है। आखिर विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक विकास किसलिए हैं? नागरिक के बेहतर जीवन के लिए ही न? पर भारत और भारत के नागरिक याकि भीड़ बेहतर जीवन की जिद कहाँ करते हैं? लोगों की जिंदगी खैराती बनने, प्रदूषणों, झुग्गी झोपड़ियों, कॉकरोचपने में ही विकसित भारत के सपनों की है। कोई आश्चर्य नहीं कि 2026 में भारत का एक भी शहर दुनिया के सौ सबसे रहने योग्य शहरों में नहीं है! इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की 173 शहरों की ग्लोबल लिवेबिलिटी रैंकिंग में नई दिल्ली 120वें, मुंबई 121वें, चेन्नई 123वें और बेंगलुरु 127वें स्थान पर हैं। दुनिया में कोपेनहेगन पहले, वियना दूसरे और मेलबर्न तीसरे स्थान पर हैं।
भारत की राजधानी दिल्ली को स्वास्थ्य सेवाओं में महज 41.7 और संस्कृति तथा पर्यावरण में 35.4 अंक मिले। सोचें, देश की राजधानी की यह स्थिति! और वह भी तब जब दिल्ली में चमचमाते एयरपोर्ट हैं, मेट्रो है, एक्सप्रेसवे हैं, गगनचुंबी इमारतें हैं। खरबों रुपये निर्माण पर खर्च हुए हैं। बावजूद इसके नागरिक के लिए साफ हवा, अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित परिवेश और सुविधाजनक रोजमर्रा का जीवन उपलब्ध कराना चुनौती है। जबकि चीन के सभी सर्वेक्षित शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लगातार दर्ज होता हुआ है।
तो तस्वीर में एक मशीनें मनुष्य से आगे निकलने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत में मनुष्य अभी रहने योग्य शहर की बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है। वहाँ चिंता है कि एआई कहीं विज्ञान पर अधिकार न कर ले। यहाँ चिंता है कि प्रदूषण से साँस कैसे बचे, बीमारी में अस्पताल कैसा मिले, सड़क पर चलना कितना सुरक्षित हो और रोजमर्रा की जिंदगी कैसे कटे। दुनिया की वैज्ञानिक छलाँग और भारत के नागरिक की वास्तविकता का अंतर दिन-रात का है! कुछ भी हो सारे विकास की कसौटी तो अंततः मनुष्य जीवन के अपने बदलाव ही तो हैं!
और घूम फिर कर सवाल बुद्धि (मनुष्य की) पर लौटता है। अब तक मनुष्य स्वयं ज्ञान अर्जित करता था। उसे समझने, परखने, उस पर संदेह करने और आगे बढ़ाने में पीढ़ियाँ खपती थीं। अब मशीनें ज्ञान के ऐसे परिणाम सामने रख सकती हैं जिन तक पहुँचने का रास्ता स्वयं वैज्ञानिकों को समझ न आए। तब ज्ञान बढ़ेगा, लेकिन क्या मनुष्य की समझ उसी अनुपात में बढ़ेगी? खासकर भारत जैसे देशों में? दुनिया निश्चित ही आगे अधिक बुद्धिमान मशीनों और उन पर अधिक निर्भर मनुष्यों की बनेगी। उसके जो स्वामी मनुष्य होंगे, मालिक होंगे वे क्या हैसियत इसलिए हुए होंगे, इसकी कल्पना ही दहलाने वाली है!
यूरोप के 6 देशों में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, महंगाई, बेरोजगारी और महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी के हिंसक विरोध में अब तक 1800 लोग गिरफ्तार हुए हैं। स्पेन में घर खरीदना तो दूर, किराया चुकाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, ग्रीस में 10 साल में किराया 3 गुना बढ़ चुका है। बेल्जियम, इटली और अल्बानिया में भी छात्र शिक्षा पर खर्च बढ़ाने, रोजगार और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। फ्रांस: 140 शहरों में 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत, शिक्षकों की कमी और बढ़ती महंगाई के विरोध में 17 अक्टूबर को 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। करीब 8 लाख लोग सड़कों पर उतरे। इसमें छात्र संगठनों के साथ ट्रेड यूनियन और कर्मचारी भी शामिल थे। पेरिस, मार्सेई और बोर्डो समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई। लीमोज में 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगा दी गई और कई गाड़ियों को जला दिया गया। 18 अक्टूबर तक करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की खबर है। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की है। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फायदा उठाया। इटली: स्कूलों की हालत पर 30 अक्टूबर को हड़ताल का ऐलान इटली में छात्र शिक्षा पर कम सरकारी खर्च, जर्जर स्कूलों और पढ़ाई के बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। रोम और ट्यूरिन समेत कई शहरों में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा कर लिया। 16 अक्टूबर को रोम में हजारों छात्र शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। उन्होंने शिक्षा मंत्री ग्यूसेपे वाल्दितारा के फैसलों का विरोध किया। इससे पहले हुए प्रदर्शनों में पुलिस के साथ झड़प और पथराव की घटनाएं भी हुई थीं। अब छात्र संगठन इस आंदोलन से कर्मचारियों को भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। छात्रों की मांग है कि शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाए, स्कूलों की हालत सुधारी जाए और सस्ते हॉस्टल उपलब्ध कराए जाएं। स्पेन: बढ़ते किराए के खिलाफ प्रदर्शन स्पेन में महंगे घरों और बढ़ते किराए के खिलाफ आंदोलन कई शहरों में फैल गया है। राजधानी मैड्रिड के सोल चौक पर प्रदर्शनकारी कई दिनों से टेंट लगाकर बैठे हैं। सितंबर के आखिर में 87 साल की एक बुजुर्ग महिला को किराया बढ़ने के कारण घर से निकाल दिया गया था। इसके बाद आंदोलन तेज हो गया। प्रदर्शनकारी किराए पर नियंत्रण लगाने, लोगों को घरों से निकालने पर रोक लगाने और सस्ते सरकारी मकान बनाने की मांग कर रहे हैं। किराएदारों के संगठन और आवास अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। मैड्रिड के अलावा दूसरे शहरों में भी रैलियां निकाली गई हैं। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने आवास संकट दूर करने के लिए कदम उठाने की बात कही है, लेकिन प्रस्तावित उपायों पर राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच, 29 नवंबर को समय से पहले चुनाव कराने का ऐलान भी किया गया है। ग्रीस: हॉस्टल की कमी के खिलाफ टेंट लगाकर प्रदर्शन ग्रीस की राजधानी एथेंस में छात्रों ने संसद के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन किया। छात्र हॉस्टल की कमी, महंगे किराए और पढ़ाई के बढ़ते खर्च से परेशान हैं। छात्र संगठनों के मुताबिक, देश में बहुत कम छात्रों को हॉस्टल मिल पाते हैं। करीब 96% छात्रों को हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलती, जबकि पिछले 10 साल में कमरों का किराया तीन गुना हो गया है। कुछ छोटे कमरों का मासिक किराया 600 यूरो तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी किराए की सीमा तय करने, सरकारी हॉस्टल बनाने, स्कॉलरशिप बढ़ाने और यूनिवर्सिटीज का बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व छात्र संगठन कर रहे हैं। बेल्जियम: शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ गुस्सा बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में शिक्षा बजट में कटौती और सुधारों के विरोध में छात्रों ने मार्च निकाला। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की और पुलिस पर चीजें फेंकीं। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। 18 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। प्रदर्शन का नेतृत्व छात्र संगठन कर रहे हैं। सरकार ने हिंसा की निंदा की है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है। अल्बानिया: प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी पढ़ाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और यूनिवर्सिटीज की खराब हालत के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। हजारों युवा 15 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय के बाहर जुटे और प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। सरकारी इमारतों और बैंकों में भी आग लगा दी गई। पांच दिन से चल रहे आंदोलन में 167 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए है। आंदोलन में छात्र संगठनों के अलावा सरकार से नाराज दूसरे लोग भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री रामा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने छात्रों से बातचीत की पेशकश की, लेकिन तोड़फोड़ करने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही। उनका कहना है कि हिंसा से अल्बानिया के यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश को नुकसान पहुंच सकता है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन: पेंशन से लेकर महंगाई तक, सरकार के फैसलों पर सड़कों पर उतर आते हैं लोग फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। पूरी खबर पढ़ें…
Market news : भारतीय बाजारों में आज पॉजिटिव शुरुआत होने की की उम्मीद है। सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त देखने को मिली है। लगातार 15 सत्रों के बाद FIIs शुद्ध खरीदार बनते दिखे हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
मार्केट ओवरव्यू
16 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी बाजारों में लगातार दूसरे सत्र में तेजी जारी रही। बाजार को आईटी,मीडिया और मेटल शेयरों में हुई खरीदारी से सपोर्ट मिला। कमजोर ग्लोबल संकेतों के बावजूद,शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी पर बिकवाली का दबाव दिखा,लेकिन जैसे-जैसे सेशन आगे बढ़ा, इनमें धीरे-धीरे सुधार आया। निफ्टी 23,149.85 के इंट्राडे हाई तक पहुंचा और कारोबारी सत्र के अंत में दिन के हाई के करीब बंद हुआ,जो लगातार बनी हुई खरीदारी की दिलचस्पी का संकेत है।
कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,146.15 पर बंद हुआ।
बाजार के लिए मिले-जुले संकेत
निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए मिले-जुले संकेत हैं। FIIs की करीब 1200 करोड़ रुपये की खरीदारी देखने को मिली है। लेकिन 108 डॉलर के करीब पहुंचकर कच्चा तेल फिक्र बढ़ा रहा है। वहीं शुक्रवार को US INDICES में तेज गिरावट रही। नैस्डैक दो फीसदी से ज्यादा फिसला है, एशिया भी कमजोर दिख रहा है। हालांकि गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट है।
ट्रंप के फैसले से राहत, 100% टैरिफ खतरा टला
रूस से तेल खरीदने पर भारत को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्टपति ट्रंप ने 100% टैरिफ वाला कानून 60 दिनों के लिए टाला है।
अनुमान के करीब HDFC बैंक के नतीजे
HDFC BANK के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान पर खरे उतरे हैं। बैंक का मुनाफा 5% तो ब्याज से कमाई करीब 10% बढ़ी है। बैंक की असेट क्वॉलिटी में भी सुधार दिखा है। हालांकि तिमाही आधार पर नेट इंटरेस्ट मार्जिन में10 बेसिस प्वाइंट का दबाव दिखा है। हालांकि बैंक के CEO शशिधर जगदीशन ने अगली तिमाही से मार्जिन में सुधार की उम्मीद जताई है।
ICICI बैंक ने पेश किए शानदार नतीजे
ICICI बैंक ने शानदार नतीजे पेश किए हैं। दूसरी तिमाही में बैंक का मुनाफा 20 परसेंट बढ़ा है। NII में भी पौने 18% का उछाल दिखा है। बैंक ने NIM के मामले में भी चौंकाया है। Q2 में मार्जिन 4.18% रहे। मार्जिन इंडस्ट्री में सबसे शानदार रहे हैं। एसेट क्वालिटी भी सुधरी है।
एक्सिस बैंक के Q2 नतीजे रहे अच्छे
एक्सिस बैंक के भी Q2 नतीजे अच्छे रहे हैं। बैंक का दूसरी तिमाही में मुनाफा 38% बढ़ा है। NII 12% बढ़ा है। बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार दिखा है। तिमाही और सालाना आधार पर NIM में हल्की कमजोरी दिखी है।
DLF का मुनाफा बढ़ा, लेकिन मार्जिन पर मार
दूसरी तिमाही में DLF का मुनाफा 10% बढा है। लेकिन रेवेन्यू 23% तो EBITDA 92% घटा है। कंपनी के मार्जिन पर भी तगड़ी मार पड़ी है। वहीं ओबेरॉय रियल्टी का प्रॉफिट फ्लैट रहा। रेवेन्यू में 6% की कमी आई है। लेकिन मार्जिन में सुधार हुआ है।
नतीजों के लिहाज से आज बड़ा दिन
नतीजों के लिहाज से आज बड़ा दिन है। निफ्टी की दो कंपनियों अल्ट्राटेक और बजाज फाइनेंस के नतीजे आएंगे । दूसरी तिमाही में बजाज फाइनेंस का मुनाफा 31 परसेंट बढ़ सकता है । वहीं ब्याज से कमाई यानी NII में 24% का उछाल संभव है। साथ ही HIND ZINC, IREDA, UNION BANK के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।
एशियन करेंसी
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। इनमें इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा 0.49 प्रतिशत गिरा है। फिलीपीन पेसो और ताइवान डॉलर में भी 0.27 प्रतिशत की कमजोरी आई, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.13 प्रतिशत फिसल गया है। दूसरी ओर जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की मजबूती आई है और चीनी रेनमिनबी 0.06 प्रतिशत चढ़ गया है। थाई बाहत और मलेशियाई रिंगित में क्रमशः 0.06 प्रतिशत और 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई है, जबकि सिंगापुर डॉलर में 0.04 प्रतिशत की गिरावट आई है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमी
लगातार 15 कारोबारी सत्रों तक नेट बिकवाली करने के बाद, 16 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट खरीदार (net buyers) बन गए और उन्होंने लगभग 1,166 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार 45 सत्रों से चली आ रही अपनी खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया और इस सत्र के दौरान 3,661 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
Stock market news : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राओं में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। इनमें इंडोनेशियाई रुपया सबसे ज्यादा 0.49 प्रतिशत गिरा है।
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा सुस्त शुरुआत के संकेत, एशिया, यूएस के बाजार गिरे
देश में सोने की कीमत और नीचे आ गई है। 19 अक्टूबर को महानवमी की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में भाव 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बीते सप्ताह अलग-अलग शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 3760 रुपये तक फिसली। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 3450 रुपये तक सस्ता हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.12 डॉलर प्रति औंस पर है। बीते सप्ताह सोने का वैश्विक भाव 0.7 प्रतिशत कमजोर हुआ। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।
देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट
दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।
| शहर | 22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) | 24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹) |
| दिल्ली | 135490 | 147800 |
| मुंबई | 135340 | 147650 |
| अहमदाबाद | 135390 | 147700 |
| चेन्नई | 135340 | 147650 |
| कोलकाता | 135340 | 147650 |
| हैदराबाद | 135340 | 147650 |
| जयपुर | 135490 | 147800 |
| भोपाल | 135390 | 147700 |
| लखनऊ | 135490 | 147800 |
| चंडीगढ़ | 135490 | 147800 |
चांदी की कीमत
दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट दिख रही है। 19 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते सप्ताह चांदी का भाव 10000 रुपये नीचे आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.05 डॉलर प्रति औंस है। इस साल जनवरी में देश के अंदर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी।

