लाल मार्केट में इक्विटी म्यूचु्अल फंडों पर निवेशकों का दांव, SIP में आया रिकॉर्ड निवेश, Gold ETF की बढ़ी चमक

Mutual Fund Data: शेयर मार्केट में मचे तूफान के बीच पिछले महीने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा। हालांकि डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी से ओवरऑल म्यूचुअल फंड में निवेश निगेटिव रहा। म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के लेटेस्ट आंकड़ों से यह बात सामने आई है। पिछले महीने सितंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश करीब ₹9000 करोड़ बढ़ गया तो डेट फंड्स से निकासी मासिक आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़ गई। वहीं सितंबर में SIP में कॉन्ट्रिब्यूशन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया लेकिन खातों की संख्या में कमी आई।

Equity Funds में सबसे अधिक क्रेज दिखा SmallCap Funds का

अगस्त महीने में इक्विटी फंडों में निवेश लगभग 19% बढ़ा था और फिर सितंबर महीने में नेट इनफ्लो में और बढ़ोतरी हुई। मासिक आधार पर ₹8,977.93 करोड़ की बढ़ोतरी मासिक निवेश में बड़ी तेजी है। AMFI के आंकड़ों के हिसाब से पिछले महीने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹38,306.55 करोड़ का निवेश आया जोकि अगस्त महीने में ₹29,328.62 करोड़ के निवेश की तुलना में करीब 31% अधिक रहा।

कैटेगरीवाइज बात करें तो सबसे अधिक ₹9,038.57 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप फंडों में आया। इसके बाद मिड-कैप फंडों में ₹7,834.84 करोड़ का निवेश हुआ। इन दोनों में कुल ₹16,873.41 करोड़ का निवेश आया, जो सभी इक्विटी फंडों में हुए कुल निवेश का लगभग 44% है।

सितंबर महीने में फ्लेक्सी-कैप फंडों में भी निवेश बढ़कर ₹6,701.80 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹5,059.42 करोड़ था।

लॉर्ज-कैप फंड के भी निवेशक सितंबर में लौटे और लगातार दो महीने तक शुद्ध निकासी के बाद सितंबर में निकासी से अधिक निवेश किया। लॉर्ज कैप फंडों में पिछले महीने ₹859.47 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।

इक्विटी इनफ्लो में उछाल के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM सितंबर में घटकर ₹37.54 लाख करोड़ रह गई। अगस्त में यह ₹39.21 लाख करोड़ थी यानी इसमें लगभग 4.3% की गिरावट आई।

डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंडों में सबसे बड़ा बदलाव दिखा। इन फंडों से शुद्ध निकासी बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गई, जबकि अगस्त में यह ₹8,127 करोड़ थी।

सबसे अधिक निकासी लिक्विड फंडों से हुई। सितंबर में इनसे ₹95,743.20 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹19,934.29 करोड़ का निवेश आया था। सितंबर में मनी मार्केट फंडों से भी ₹50,846.21 करोड़ की निकासी हुई, जबकि अगस्त में इन फंडों में ₹11,734.71 करोड़ का निवेश आया था। इन दोनों फंडों से कुल मिलाकर से लगभग ₹1.47 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई और इन्होंने डेट फंडों पर ओवरऑल दबाव डाला।

डेट फंड्स का एयूएम मासिक आधार पर अगस्त में ₹19.33 लाख करोड़ से 8.8% फिसलकर सितंबर में ₹17.64 लाख करोड़ पर आ गया।

हाइब्रिड फंड्स हुआ निगेटिव, ईटीएफ इनफ्लो में उछाल

पिछले महीने सितंबर में हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पिछले महीने इससे ₹456.68 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,045.34 करोड़ का शुद्ध निवेश आया था। इसकी बड़ी वजह ऑर्बिट्रेज फंड्स रहे, जिनसे सितंबर महीने में ₹3,956.38 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹3,789.02 करोड़ का निवेश आया था।

पिछले महीने बैलेंस्ड-एडवांटेज फंडों से भी ₹912.43 करोड़ की निकासी हुई। वहीं मल्टी-एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश का सिलसिला जारी रहा और इनमें ₹3,666.98 करोड़ आए।

पिछले महीने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में ₹15,501.40 करोड़ का निवेश आया, जो अगस्त के ₹10,160.87 करोड़ से लगभग 53% अधिक है।

सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगभग 71% बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹2,596.70 करोड़ था तो सिल्वर ETF में भी इस दौरान निवेश भी ₹9,959.96 करोड़ से बढ़कर ₹1,974.32 करोड़ हो गया।

इंडेक्स फंडों की बात करें तो अगस्त महीने में इसमें ₹787.49 करोड़ का निवेश आया था, जबति पिछले महीने इससे ₹3,614.03 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई थी।

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले ओवरसीज फंडों से निकासी जारी रही। सितंबर में इनसे ₹159.18 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में निकासी ₹72.19 करोड़ थी।

सितंबर महीने में लाइफ साइकिल फंडों में ₹143.75 करोड़ और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹373.90 करोड़ का निवेश आया।

SIP में निवेश पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर

सितंबर में मासिक SIP कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़कर ₹32,490 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। अगस्त में यह ₹32,297 करोड़ था। इस बढ़ोतरी के साथ सितंबर 2026 में एसआईपी का एयूएम ₹17.86 लाख करोड़ हो गया। हालांकि एक खास बात ये है कि सितंबर में लगभग 63 लाख नए एसआईपी रजिस्टर हुए, जबकि 73 लाख एसआईपी या तो मेच्योर हो गए या उन्हें बंद कर दिया गया। सितंबर की शुरुआत से लेकर आखिरी तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 10.75 करोड़ से 10.06 करोड़ पर आ गई।

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Nifty Outlook: सितंबर में 1600 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी, क्या अब 22600 का अहम लेवल बचेगा?

Nifty Outlook: सितंबर एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। Nifty50 मंगलवार को 64 अंक गिरकर 22,716 पर बंद हुआ। पूरे सितंबर में इंडेक्स 1,600 अंक से ज्यादा यानी करीब 6.5% टूट चुका है।

मंगलवार को Nifty की शुरुआत गैप-डाउन हुई। शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज रही और इंडेक्स काफी नीचे चला गया। हालांकि, दिन के निचले स्तर से रिकवरी आई और Nifty ने शुरुआती नुकसान का बड़ा हिस्सा कम कर लिया।

एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा। आखिर में Nifty 0.28% की गिरावट के साथ 22,716 पर बंद हुआ। सेक्टरों की बात करें तो IT, Realty और FMCG में गिरावट जारी रही। हालांकि, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

200-वीक मूविंग एवरेज तक पहुंचा निफ्टी

गिरावट के साथ Nifty अपने 200-वीक मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह लेवल अभी करीब 22,600 है। कोविड के समय बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद पहली बार Nifty इस लंबे समय के टेक्निकल सपोर्ट तक पहुंचा है।

यही वजह है कि अब 30 सितंबर को 22,600 का स्तर बाजार के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इसके आसपास इंडेक्स का अगला रुख तय हो सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दबाव

बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 0.99% गिरा। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.81% की गिरावट आई।

बाजार में कमजोरी का असर अब सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

लगातार आठवें हफ्ते बाजार गिरा

हाल की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। Nifty में करीब 6.8% की गिरावट दर्ज हुई है। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते गिरा है।

2020 के बाद यह Nifty की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ आंकड़े अभी राहत दे रहे हैं।

इकोनॉमी से मिले कुछ अच्छे संकेत

अगस्त में भारत की इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन ग्रोथ 8% रही। यह दो महीने में सबसे तेज बढ़त है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। इससे शहरी इलाकों में लोगों के खर्च में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। GDP ग्रोथ भी बाजार के लिए एक सपोर्टिव फैक्टर बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड भी महत्वपूर्ण रहेंगी। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बाजार के लिए अहम होगी।

22,550 के नीचे गिरावट पर दबाव

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक निफ्टी का ट्रेंड अभी कमजोर है। उनका कहना है कि 22,900 से 23,000 के बीच आने वाली तेजी ज्यादा टिक नहीं सकती। इस स्तर पर बिकवाली देखने को मिल सकती है।

उनके मुताबिक, अगर निफ्टी 22,550 के नीचे जाता है तो 22,200 तक गिरावट बढ़ सकती है।

22,570-22,550 का जोन अहम

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 22,570 से 22,550 का जोन Nifty के लिए तत्काल सपोर्ट है। इसके नीचे गिरावट आने पर 22,400 तक दबाव बढ़ सकता है।

ऊपर की तरफ 22,900 से 22,930 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर Nifty इस रेंज के ऊपर टिकता है तो रिकवरी 23,050 तक जा सकती है।

22,600 के ऊपर टिकना जरूरी

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक 22,600 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली तेज हो सकती है। वहीं, अगर Nifty इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी की गुंजाइश रहेगी।

उनके मुताबिक 22,600 फिलहाल अहम सपोर्ट है। वहीं 22,800 तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: लगातार 7 हफ्ते गिरा निफ्टी, अब 28 सितंबर को कैसी रहेगी चाल? जानिए एक्सपर्ट्स से

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते बुधवार की तेज बिकवाली के बाद शुक्रवार को निफ्टी संभला। इंडेक्स 77 अंक चढ़कर 23,140 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते निफ्टी 0.88% नीचे रहा। यह लगातार सातवां हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ है।

निफ्टी दिन के निचले स्तर से करीब 142 अंक संभला। इसके बावजूद अगस्त की शुरुआत के 24,772 के स्तर से इंडेक्स अब 1,750 अंक से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इन शेयरों में दिखी तेजी

Axis Bank, Asian Paints और M&M शुक्रवार को निफ्टी के टॉप गेनर्स रहे। दूसरी तरफ Max Healthcare, Tata Motors Passenger Vehicles और Infosys सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहे।

सेक्टोरल इंडेक्स में भी तस्वीर मिली-जुली रही। Consumer Durables, Realty और Auto में खरीदारी दिखी। वहीं Healthcare, Media और IT कमजोर रहे।

ब्रॉडर मार्केट में भी ज्यादा हलचल नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.14% की गिरावट आई। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.15% की बढ़त रही।

रुपये में भी मजबूती

भारतीय रुपया 15 पैसे मजबूत होकर करीब 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एशियाई करेंसी में मजबूती से रुपये को सपोर्ट मिला।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का भी फायदा मिला। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की संभावित बातचीत से भी बाजार को राहत मिली।

अगले हफ्ते किन चीजों पर नजर?

अगले हफ्ते बाजार की नजर कच्चे तेल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। पश्चिम एशिया की खबरें भी बाजार की चाल तय कर सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सऊदी अरब और हूती तनाव पर भी नजर रहेगी। इन घटनाक्रमों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर होर्मुज रूट को चरणबद्ध तरीके से फिर खोलने की दिशा में कोई प्रगति होती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है।

ग्लोबल मार्केट से मिलेंगे ये संकेत

चीन के आधिकारिक और Caixin PMI आंकड़े अगले हफ्ते अहम रहेंगे। अमेरिका के Consumer Confidence और JOLTS Job Openings के आंकड़ों पर भी नजर होगी।

यूरोजोन की सितंबर की महंगाई के आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के तीन अधिकारियों के बयान और Bank of Japan की बैठक के मिनट्स भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

23,000 है सबसे अहम सपोर्ट

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम है। अगर इंडेक्स इसके नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसे में 22,600 तक गिरावट का रास्ता खुल सकता है।

ऊपर की तरफ 23,350 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। यानी इस स्तर के ऊपर टिकना भी बाजार के लिए अहम होगा।

23,000 के नीचे और दबाव संभव

Angel One के ओशो कृष्णन भी 23,000 को अहम सपोर्ट मानते हैं। उनके मुताबिक, इसके नीचे तेज गिरावट आती है तो निफ्टी 22,800-22,700 के जोन तक जा सकता है।

ऊपर की तरफ 23,280-23,350 का स्तर शुरुआती रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,500-23,550 का जोन अहम रहेगा।

23,600 के ऊपर तस्वीर बदल सकती है

HDFC Securities के नंदीश शाह के मुताबिक, 23,300 और 23,600 निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस हैं। 23,600 का स्तर हाल के फ्लैग पैटर्न के ब्रेकडाउन लेवल से भी जुड़ा है।

नीचे की तरफ 23,000 के बाद 22,700 अगला सपोर्ट है। शाह के मुताबिक, 23,600 के ऊपर निफ्टी टिकता है तो शॉर्ट टर्म का रुझान बदलकर न्यूट्रल हो सकता है।

23,300 के ऊपर मजबूती के संकेत

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक, 23,000 तत्काल सपोर्ट है। इसके बाद 22,700 अगला अहम स्तर है।

ऊपर की तरफ 23,200-23,300 तत्काल रेजिस्टेंस है। निफ्टी 23,300 के ऊपर टिकता है तो टेक्निकल तस्वीर बेहतर हो सकती है। वहीं 23,000 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर कमजोरी फिर बढ़ सकती है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

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Nifty Outlook: 21 सितंबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन रिकवरी की। हालांकि, कारोबार में उतार-चढ़ाव काफी रहा। इसके बावजूद निफ्टी 75 अंक चढ़कर बंद हुआ। हफ्ते की शुरुआत बाजार ने अच्छी तेजी के साथ की थी। लेकिन ऊपर जाते ही बिकवाली शुरू हो गई। इससे निफ्टी फिर नीचे आ गया।

इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटी। इससे निफ्टी 23,000 के अहम स्तर के ऊपर बना रहा। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी कमजोर रही। निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट में बंद हुआ। इस हफ्ते इंडेक्स 0.22% नीचे रहा।

HDFC Bank और UltraTech में तेजी

निफ्टी के शेयरों में HDFC Bank और UltraTech Cement सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर TCS और TMPV सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे।

सेक्टरों की बात करें तो Cement और Metal शेयरों में खरीदारी दिखी। IT शेयरों पर दबाव बना रहा। बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 1.24% और Nifty Smallcap 100 में 1.74% की तेजी रही।

कच्चे तेल से बाजार को मिली राहत

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड अपने ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। सऊदी अरब की पाइपलाइनों की मरम्मत का काम आगे बढ़ा है। इसके अलावा तेल निर्यात के दूसरे रास्ते भी मिले हैं। इससे सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहने की चिंता कुछ कम हुई है।

अमेरिकी फेड के ब्याज दर के फैसले के बाद अब बाजार का ध्यान दूसरी चीजों पर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। कच्चा तेल भी ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। घरेलू बाजार में लिक्विडिटी भी मजबूत है। ऐसे में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता।

अभी भी कई बड़े जोखिम

बाजार के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। ब्रेंट क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। रुपया भी करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा जोखिम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी।

अगले हफ्ते घरेलू स्तर पर सितंबर का फ्लैश PMI डेटा आएगा। अगस्त के इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट के आंकड़े भी आएंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े भी बाजार को दिशा दे सकते हैं। अमेरिका से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े आएंगे। चीन के लोन प्राइम रेट पर भी बाजार की नजर रहेगी।

ईरान युद्ध से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट की यात्रा पर फिर से विचार करने को कहा है।

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध तेजी से बढ़ सकता है। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना सख्त रुख कायम रखा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है।

हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उन्होंने रियाद में कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे कुछ घंटे पहले शहर के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार देखा गया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने इसकी वजह की पुष्टि नहीं की है।

23,500 के ऊपर जाना आसान नहीं

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में आगे तेजी आती है तो 23,500 से 23,600 का स्तर बड़ी चुनौती होगा। वहीं, गिरावट आने पर 23,100 से 23,000 के बीच सपोर्ट मिल सकता है।

SBI Securities के सुदीप शाह भी 23,150 के आसपास के स्तर को अहम मानते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी अगर लगातार 23,150 के नीचे जाता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स 23,000 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,500 से 23,520 का स्तर बड़ी रुकावट है। अगर निफ्टी 23,520 के ऊपर टिक गया तो शॉर्ट कवरिंग हो सकती है। इससे इंडेक्स 23,650 तक जा सकता है।

23,550 तक जा सकता है निफ्टी

LKP Securities के रुपक डे का कहना है कि कच्चा तेल अगर 96 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहता है तो बाजार में तेजी टिक सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का स्तर अहम सपोर्ट है। मौजूदा रिकवरी जारी रहती है तो इंडेक्स 23,550 तक जा सकता है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,100 से 23,000 का जोन अहम सपोर्ट है। वहीं, 23,250 से 23,200 के आसपास भी सहारा मिल सकता है। ऊपर की तरफ 23,450 से 23,500 का स्तर रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,600 अहम रहेगा। खास बात यह है कि 23,600 पहले सपोर्ट था। अब यह रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है।

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अगले हफ्ते इन दो शेयरों में कमाई का मौका, SBI सिक्योरिटीज ने दी दांव लगाने की सलाह

एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निक्ल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का मानना है कि बाजार में तेजी के लिए निफ्टी का 23,500-23,600 को क्रॉस करना और इस लेवल से ऊपर टिके रहना जरूरी है। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने शेयर बाजार के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताईं।

इन दो शेयरों में कमाई के बड़े मौके 

शाह का मानना है कि अगले हफ्ते Electronics Mart India (EMIL) और Lumax Auto Technologies (LAT) के शेयरों में कमाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि बीते 4 हफ्तों से EMIL के शेयर में 197-168 की रेंट में कंसॉलिडेशन दिख रहा है। इस स्टॉक को स्ट्रॉन्ग वॉल्यूम का सपोर्ट मिल रहा है। डेली और वीकली चार्ट आधार पर इसमें सभी महत्वपूर्ण मूविंग एवरेजेज से ऊपर ट्रेडिंग हो रही है। वीकली चार्ट पर बढ़ते ADX से बुलिश ट्रेंड का संकेत मिलता है।

इस वजह से शेयरों में दिख सकती है तेजी

Lumax Auto Technologies (LAT) के बारे में उन्होंने कहा कि इस शेयर में 11 अगस्त से ही 2,149-1,894 की रेंज में कंसॉलिडेशन दिख रहा है। हाल में 34-डे EMA ने स्टॉक के लिए डायनेमिक सपोर्ट के रूप में सामने आया है। 2,085-1,110 के जोन में इस शेयर में निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसमें 2,025 पर स्टॉपलॉस लगाना होगा। मोमेंटम इंडिकेटर्स और ओसिलेटर्स से इस शेयर के ब्रेकआउट के बाद तेजी दिखाने के संकेत हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों का आउटलुक पॉजिटिव

Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 सूचकांकों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। हालांकि, अभी सावधानी बरतनी होगी। इस हफ्तों दोनों ही सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। लेकिन, लोअर लेवल पर अच्छी खरीदारी भी दिखी। इससे यह संकेत मिलता है कि इनवेस्टर्स लो लेवल पर शेयरों में निवेश में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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लोअर लेवल पर दिख रही खरीदारी

शाह ने कहा कि लगातार तीन हफ्ते गिरने के बाद निफ्टी मिडकैप 100 में स्थिरता के संकेत दिखे हैं। खास बात यह है कि इंडेक्स ने फिर से 100-डे और 200-डे EMA को क्लेम किया है। RSI भी कमजोर लेवल से इम्प्रूवमेंट दिखा रहा है। उधर, Nifty Smallcap 100 में रिलेटिव स्ट्रेंथ दिख रहा है। वीकली चार्ट पर लोअल लॉन्ग शैडो बना है और यह अपने महत्वपूर्ण मूविंग एवरेजेज से ऊपर बना हुआ है। इससे लोअर, लेवल पर स्ट्रॉन्ग डिमांड का संकेत मिलता है।

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Nifty Outlook: क्या 7 सितंबर को 24000 का लेवल टच कर पाएगा निफ्टी? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: निफ्टी शुक्रवार को चार दिन की लगातार गिरावट के बाद संभला। इंडेक्स 24 अंक चढ़कर 23,897 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर कमजोर रही। निफ्टी में 1.15% की गिरावट आई। यह लगातार चौथा हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ।

पूरे हफ्ते बिकवाली हावी रही

हफ्ते की शुरुआत ही कमजोर रही। ज्यादातर कारोबारी सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। हफ्ते के बीच में बाजार तेज गैप-डाउन के साथ खुला। इसके बाद खरीदारों ने गिरावट रोकने की कोशिश की। लेकिन ऊंचे स्तरों पर खरीदारी ज्यादा देर नहीं टिक पाई। नतीजा यह रहा कि मुनाफावसूली जारी रही और निफ्टी पूरे हफ्ते दबाव में रहा।

किन शेयरों में बड़ी हलचल दिखी

निफ्टी 50 में SBI Life, Tata Steel और HDFC Life सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी तरफ HCL Tech, Bharti Airtel और Maruti सबसे ज्यादा टूटे। सेक्टोरल प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा। Metals, Financial Services और Cement सेक्टर में तेजी रही। वहीं रियल्टी, हेल्थकेयर और केमिकल्स में दबाव देखने को मिला।

ब्रॉडर मार्केट में भी तस्वीर साफ नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.25% की गिरावट आई। Nifty Smallcap 100 में 0.22% की बढ़त रही।

रुपया भी मजबूत हुआ

डॉलर के मुकाबले रुपये में भी मजबूती रही। यह सिलसिला पूरे हफ्ते जारी रहा। हफ्ते के दौरान रुपया करीब 1% मजबूत हुआ। शुक्रवार को यह लगभग 94.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अब इन संकेतों पर रहेगी नजर

आने वाले दिनों में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिका में फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है। लेकिन बाजार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहला, ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल पर है। दूसरा, वेस्ट एशिया में तनाव बना हुआ है।

निवेशकों की नजर क्रूड की कीमतों पर रहेगी। वेस्ट एशिया के घटनाक्रम भी अहम होंगे। इसके अलावा ग्लोबल रेट आउटलुक और घरेलू लिक्विडिटी पर भी नजर रहेगी। शुक्रवार को जारी अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। इनसे फेड के अगले फैसले को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, अगले हफ्ते US ISM Services PMI, ECB की पॉलिसी, OPEC की मंथली ऑयल मार्केट रिपोर्ट और भारत के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़े बाजार के लिए अहम रहेंगे।

24,000 के ऊपर जाना जरूरी

HDFC Securities के विनय राजानी के मुताबिक, 24,000-24,200 का जोन निफ्टी के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है। 23,800 के नीचे जाने पर निफ्टी 23,600 तक गिर सकता है। वहीं, 23,800 के ऊपर टिकने पर कुछ समय के लिए बाजार दायरे में रह सकता है। हालांकि, बड़ी तस्वीर में ट्रेंड अभी कमजोर है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,750-23,600 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके नीचे डेली क्लोज मिलने पर निफ्टी 23,450-23,400 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 24,000-24,050 पहला रेजिस्टेंस है। इसके बाद 24,150-24,200 का स्तर आएगा।

50-EMA से नीचे निफ्टी

LKP Securities के रूपक डे ने कहा कि अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों से पहले ट्रेडर्स सतर्क रहे। इन आंकड़ों का असर फेड के ब्याज दर के फैसले पर पड़ सकता है।

उनके मुताबिक, निफ्टी प्रति घंटे के चार्ट पर 50-EMA से नीचे है। इससे शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर दिख रहा है। जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के नीचे है, तेजी पर बिकवाली की रणनीति काम कर सकती है। नीचे 23,830 और 23,700 पर सपोर्ट है।

Banking Index में भी लंबे समय से ठहराव

बैंकिंग इंडेक्स करीब 24 सत्रों से एक दायरे में घूम रहा है। यानी इसमें भी कोई साफ दिशा नहीं दिख रही। शुक्रवार को इंडेक्स 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, 56,900-56,800 का जोन अहम सपोर्ट है। इसके ऊपर टिके रहने पर कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। ऊपर 57,800-57,900 का स्तर रेजिस्टेंस है।

अगर इंडेक्स 57,900 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट देता है या 56,800 के नीचे टूटता है, तो कंसोलिडेशन खत्म हो सकता है। इसके बाद बाजार में किसी एक दिशा में बड़ी चाल देखने को मिल सकती है।

अगले हफ्ते IPO की भी धूम

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज हैं। अगले हफ्ते 11 मेनबोर्ड IPO खुलने वाले हैं। ये कंपनियां मिलकर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने की तैयारी में हैं। कई कंपनियों की लिस्टिंग भी अगले हफ्ते होगी। यानी शेयर बाजार के मुख्य इंडेक्स में भले ही सावधानी है, लेकिन IPO बाजार में हलचल बनी हुई है।

नए हफ्ते में निफ्टी 50 के 23600-23500 के नीचे जाने की संभावना ज्यादा, ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: 31 अगस्त को निफ्टी किस तरफ जाएगा? HDFC Bank समेत इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Nifty Outlook: निफ्टी में अगस्त की शुरुआत से ही खास हलचल नहीं दिखी है। पूरे महीने इंडेक्स सीमित दायरे में फंसा रहा। न नीचे की तरफ कोई बड़ा ब्रेकडाउन हुआ और न ऊपर की तरफ ब्रेकआउट मिला। महीने के आखिरी कारोबारी दिन से पहले Nifty, 31 जुलाई के मुकाबले करीब 200 अंक नीचे था।

लेकिन महीने का आखिरी कारोबारी दिन काफी अहम रहने वाला है। बाजार के सामने कई बड़े ट्रिगर हैं। इनमें सबसे ज्यादा नजर HDFC Bank पर रहेगी। बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन ने अक्टूबर में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है।

HDFC Bank बाजार की दिशा तय कर सकता है?

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि निवेशक इस खबर को कैसे लेते हैं। इसे नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होने के तौर पर देखा जाएगा या फिर नया CEO चुने जाने तक एक और अनिश्चितता बनी रहेगी।

इसका असर सिर्फ HDFC Bank पर नहीं, बल्कि Nifty की चाल पर भी पड़ सकता है। भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक का शेयर इस साल दबाव में रहा है। ऐसे में सोमवार को यह शेयर एक बार फिर फोकस में रहेगा।

Nifty सुस्त, लेकिन स्मॉलकैप में तगड़ी तेजी

Nifty भले ही पूरे महीने सीमित दायरे में रहा, लेकिन छोटे शेयरों में जोरदार हलचल दिखी। पिछले हफ्ते BSE Smallcap Index के 13 शेयर 20% या उससे ज्यादा चढ़े। वहीं 58 शेयरों में 10% से 20% तक की तेजी रही।

Nifty 500 के भी 10 शेयरों ने पिछले हफ्ते 10% से 25% तक का रिटर्न दिया। शुक्रवार को BSE Smallcap Index के 29 शेयरों ने नया ऑल टाइम हाई बनाया।

IPO में भी जमकर दिखा जोश

प्राइमरी मार्केट में भी जबरदस्त हलचल रही। अगस्त में 14 कंपनियों ने शेयर बाजार में डेब्यू किया। इन कंपनियों को औसतन 30% से ज्यादा का लिस्टिंग प्रीमियम मिला।

शुक्रवार को लिस्ट हुई Tempsens Instruments ने निवेशकों को चौंका दिया। कंपनी का शेयर अपने इश्यू प्राइस से 111% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ। यह 2026 का पहला IPO बन गया, जिसने लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से 100% से ज्यादा की छलांग लगाई। इससे पहले साल की शुरुआत में Bharat Coking Coal ने 96% प्रीमियम पर लिस्टिंग की थी।

Nifty के लिए 24,400 बड़ा स्तर

पिछले हफ्ते Nifty ने 24,400 के स्तर को पार करने की कोशिश की थी। हालांकि, यह सफल नहीं हो सका। पिछले हफ्ते Nifty का हाई 24,378 रहा। इसलिए 24,400 का स्तर अब काफी अहम हो गया है।

नीचे की तरफ 24,100 से नीचे का दायरा बाजार के लिए अहम सपोर्ट रहेगा। शुक्रवार का इंट्राडे लो 24,077 था। गुरुवार को Nifty 24,090 तक गिरा था।

24,200 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है

LKP Securities के रुपक डे के मुताबिक हाल की चाल को देखते हुए Nifty का ट्रेंड फिलहाल बहुत बुलिश नहीं है। 24,200 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस दिख रहा है।

उनका मानना है कि 24,200 के नीचे रहने पर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रह सकता है। इससे Nifty में 23,900 तक गिरावट की गुंजाइश बन सकती है। अगर 23,900 का सपोर्ट भी टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है। हालांकि, Nifty अगर 24,200 के ऊपर टिकता है तो शॉर्ट टर्म ट्रेंड मजबूत हो सकता है।

24,000-24,400 के बीच फंसा Nifty

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का कहना है कि Nifty फिलहाल 24,000 से 24,400 के दायरे में बना हुआ है। हालांकि, इस रेंज में तेजी का हल्का रुझान है।

अगर निचले स्तरों से मजबूत रिकवरी आती है तो Nifty जल्द ही 24,300 से 24,400 के स्तर की तरफ जा सकता है। ट्रेंड में बदलाव के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम है।

Bank Nifty में भी ब्रेकआउट का इंतजार

Nifty के मुकाबले Bank Nifty ने अगस्त में कुछ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह 31 जुलाई के मुकाबले 200 अंक से ज्यादा चढ़ा है। हालांकि, बैंकिंग इंडेक्स भी अपने रेंज से बाहर नहीं निकल पाया।

Bank Nifty फिलहाल 57,000 से 58,000 के दायरे में फंसा हुआ है। SAMCO Securities के ओम मेहरा के मुताबिक 57,200 इसका पहला अहम सपोर्ट है। इसके बाद 57,100 का स्तर महत्वपूर्ण होगा ऊपर की तरफ 57,800 पहला बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके बाद 57,900 का स्तर अहम होगा। अगर Bank Nifty इस जोन के ऊपर मजबूती से बंद होता है, तो तेजी का रुझान फिर मजबूत हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty Outlook: दो हफ्तों की गिरावट के बाद क्या अब आएगी रिकवरी? एक्सपर्ट्स ने बताएं अहम लेवल्स

Nifty Outlook: शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद रखने वालों के लिए पिछला हफ्ता भी खास नहीं रहा। निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि शुक्रवार को हल्की बढ़त मिली, लेकिन पूरे हफ्ते में इंडेक्स 0.47% टूटकर 24,252 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को क्या हुआ?

निफ्टी 53 अंकों की बढ़त के साथ खुला। लेकिन पूरे दिन बाजार छोटी रेंज में ही घूमता रहा। आखिर में इंडेक्स 20 अंक यानी 0.08% चढ़कर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन में भी 19 अंकों का सहारा मिला।

निफ्टी में Power Grid, HDFC Life और Nestlé सबसे ज्यादा चढ़े। वहीं Trent, Maruti Suzuki और IndiGo सबसे ज्यादा गिरे।

कौन से सेक्टर चमके?

इस बार तस्वीर मिली-जुली रही। मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी में खरीदारी दिखी। वहीं ऑटो, मीडिया और आईटी सेक्टर दबाव में रहे।

अच्छी बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 0.10% और Nifty Smallcap 100 में 0.69% की बढ़त रही।

अगले हफ्ते क्या रहेगा फोकस?

बाजार जानकारों का कहना है कि अगले हफ्ते निफ्टी एक सीमित दायरे में रह सकता है। दो हफ्तों की गिरावट के बाद हल्की रिकवरी की उम्मीद भी बनी हुई है। इन बातों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • मानसून की रफ्तार
  • FII की खरीद-बिक्री
  • कच्चे तेल की कीमत
  • बड़े आर्थिक घटनाक्रम

ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का मानना है कि निफ्टी का ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। उनके मुताबिक इंडेक्स अगले हफ्ते 24,500 से 24,600 तक जा सकता है। उन्होंने 24,100 को अहम सपोर्ट बताया है।

HDFC Securities के विनय राजानी का कहना है कि निफ्टी अभी 50 और 100 दिन के EMA के ऊपर टिका हुआ है। ये दोनों करीब 24,200 के आसपास हैं। लेकिन इंडेक्स अभी भी 20 दिन के EMA यानी 24,300 और 200 दिन के EMA यानी 24,376 से नीचे है। इसलिए फिलहाल बाजार में साफ दिशा नहीं दिख रही।

उनके मुताबिक अगर निफ्टी 24,000 से नीचे बंद होता है, तो गिरावट बढ़ सकती है। वहीं 24,400 के ऊपर टिकने पर शॉर्ट टर्म में तेजी लौट सकती है।

LKP Securities के रूपक डे भी बाजार को फिलहाल साइडवेज से हल्का पॉजिटिव मानते हैं। उनके मुताबिक 24,200 पहला सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर निफ्टी 24,000 तक जा सकता है। वहीं 24,350 पहला रेजिस्टेंस है। इसे पार करने पर 24,500 का रास्ता खुल सकता है।

Bank Nifty के अहम स्तर

Bank Nifty शुक्रवार को करीब 290 अंकों की रेंज में रहा। SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 58,200 से 58,300 बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर इंडेक्स 58,700 और फिर 59,000 तक जा सकता है। नीचे की तरफ 57,300 से 57,200 मजबूत सपोर्ट है।

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Small Cap Stocks: क्या अब स्मॉलकैप स्टॉक्स में निवेश का सही मौका है? Ambit ने बताए अच्छे रिटर्न के 5 बड़े संकेत

Small Cap Stocks: साल 2025 की शुरुआत से आई गिरावट के बाद अब स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम और रिटर्न का संतुलन पहले से बेहतर दिख रहा है। Ambit Asset Management का कहना है कि अब कमाई, वैल्यूएशन, कैपेक्स, घरेलू निवेश और ग्लोबल माहौल जैसे कई बड़े फैक्टर स्मॉलकैप शेयरों के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

कंपनी का मानना है कि इस बार की गिरावट पहले जैसी नहीं थी। यह ज्यादातर वैल्यूएशन करेक्शन था, न कि क्रेडिट संकट या अर्थव्यवस्था में बड़ी कमजोरी की वजह से। आइए जानते हैं कि Ambit किन 5 कारणों से स्मॉल कैप स्टॉक्स पर दांव लगाने का सुझाव दे रहा है।

1. कमाई में फिर आई तेजी

Ambit के मुताबिक, जून 2026 तक Nifty Smallcap 250 कंपनियों का PAT सालाना आधार पर करीब 27% बढ़ा है। यह ग्रोथ लार्जकैप कंपनियों से भी बेहतर रही।

पिछली दो तिमाहियों में रेवेन्यू और EBITDA दोनों में सुधार आया है। साथ ही FY27 के लिए कमाई के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं।

2. वैल्यूएशन पहले से ज्यादा आकर्षक

स्मॉलकैप शेयरों में सबसे बड़ा वैल्यूएशन रीसेट देखने को मिला है। जुलाई 2026 तक करीब 47% स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे थे।

तुलना करें तो मिडकैप में यह आंकड़ा 31% और लार्जकैप में 27% था। 18 में से 12 स्मॉलकैप सेक्टर अब अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से नीचे आ चुके हैं।

3. कैपेक्स मजबूत बना हुआ है

FY26 में लिस्टेड कंपनियों का कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर 9% बढ़कर ₹11.5 लाख करोड़ पहुंच गया। इसमें मिडकैप कंपनियों का कैपेक्स 16% और स्मॉलकैप कंपनियों का 13% बढ़ा।

Ambit का अनुमान है कि अगले चार साल में पावर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में ₹20-25 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश हो सकता है।

4. घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा

स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा है। FY22 में जहां नेट इनफ्लो ₹10,145 करोड़ था, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹51,872 करोड़ पहुंच गया।

साथ ही Nifty Smallcap 250 में ट्रेडिंग एक्टिविटी भी फरवरी 2025 के मुकाबले जून 2026 तक काफी बढ़ गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हुई है।

5. ट्रेड डील से मिल सकता है फायदा

Ambit का कहना है कि भारत के नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे ज्यादा फायदा स्मॉलकैप कंपनियों को मिल सकता है। खासकर कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, टेक्सटाइल, पावर और मेटल सेक्टर की कंपनियां इससे लाभ उठा सकती हैं।

इसके अलावा अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बने सीजफायर माहौल और भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता में प्रगति से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

Ambit Asset Management का मानना है कि स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी के लिए जरूरी कई हालात बनते दिख रहे हैं। हालांकि, हर स्मॉलकैप शेयर एक जैसा नहीं होता। इसलिए मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर कमाई और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों का चयन करना ज्यादा अहम रहेगा।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty Outlook: बाजार का रुख कमजोर, 24000 तक फिसल सकता है निफ्टी? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार में पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। पूरे दिन बाजार सीमित दायरे में रहा और आखिर में निफ्टी 29 अंक टूटकर 24,366 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में इंडेक्स 0.83% गिरा।

अब सोमवार, 17 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल रही?

निफ्टी 50 में Apollo Hospitals, Bharti Airtel और Adani Enterprises सबसे बड़े गेनर रहे। वहीं Tata Motors Passenger Vehicles, Jio Financial Services और ONGC सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयर रहे।

सेक्टोरल इंडेक्स में मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा कमजोरी फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा और मेटल शेयरों में रही।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी दबाव

ब्रॉडर मार्केट भी कमजोर रहा। Nifty Midcap 100 में 0.53% और Nifty Smallcap 100 में 0.69% की गिरावट आई। BSE पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो घटकर 0.84 पर आ गया, जो मुनाफावसूली बढ़ने का संकेत देता है।

डॉलर के मुकाबले रुपया भी दबाव में रहा। USD/INR 95.40-95.45 के दायरे में कारोबार करता रहा और रुपया करीब ₹95.43 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अगले हफ्ते निफ्टी का आउटलुक

अब पहली तिमाही के नतीजों का सीजन लगभग खत्म हो चुका है। ऐसे में अगले हफ्ते बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों और मैक्रो इकोनॉमिक घटनाक्रम पर रहेगी।

Motilal Oswal के सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, आगे बाजार में अहम खबरों के हिसाब से स्टॉक में मूवमेंट ज्यादा देखने को मिल सकती है। निवेशक कंपनियों की कमाई और घरेलू आर्थिक मजबूती का आकलन करेंगे।

पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक जोखिम की धारणा बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

एक्सपर्ट्स ने बताए अहम स्तर

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में फिलहाल कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। अगर गिरावट बढ़ती है, तो इंडेक्स 24,200-24,000 तक जा सकता है। वहीं 24,500 पहला बड़ा रेजिस्टेंस रहेगा।

SBI Securities के सुदीप शाह का मानना है कि 24,500-24,550 का स्तर पार होने पर निफ्टी 24,700 और फिर 24,850 तक जा सकता है। नीचे की ओर 24,230-24,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट है।

LKP Securities के रूपक डे के अनुसार, बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट अभी कमजोर है और निफ्टी 24,180 तक फिसल सकता है। उनके मुताबिक 24,400 निकट अवधि का अहम रेजिस्टेंस रहेगा।

HDFC Securities के विनय राजानी ने कहा कि निफ्टी फिलहाल 20-डे DEMA (24,363) और 200-डे DEMA (24,385) के आसपास बंद हुआ है। ऐसे में 24,360-24,385 का जोन अगले कुछ सत्रों के लिए सबसे अहम रहेगा। उनके मुताबिक नीचे की ओर 24,265 और फिर 24,000 सपोर्ट है, जबकि ऊपर 24,630 और 24,750 अगले रेजिस्टेंस स्तर हो सकते हैं।

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