Gold Price Today: 5 महीने के हाई पर सोना, दिल्ली में ₹1.64 लाख के पार; चांदी ₹3500 उछली

Gold Price Today: दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 24 अगस्त को सोने की कीमत 5 महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹900 बढ़कर ₹1,64,400 प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,63,500 प्रति 10 ग्राम था।

5 महीने के हाई पर सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना आखिरी बार इस स्तर के आसपास 9 मार्च को था। उस समय इसका भाव ₹1,64,300 प्रति 10 ग्राम था।

सोने में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में मजबूत संकेत और सुरक्षित निवेश की मांग को अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

चांदी भी लगातार तीसरे दिन चढ़ी

चांदी की कीमत में भी सोमवार को तेजी रही। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब चांदी महंगी हुई। इसकी कीमत ₹3,500 बढ़कर ₹2,53,500 प्रति किलो हो गई।

पिछले सत्र में चांदी ₹2,50,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी। यह स्तर आखिरी बार 17 अप्रैल को देखा गया था, जब चांदी ₹2,53,000 प्रति किलो पर थी।

कमजोर डॉलर से मिला सोने को सहारा

Lemonn Markets Desk के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बड़ी वजह रही। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी। स्पॉट गोल्ड 42.45 डॉलर यानी करीब 1% बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।

अब महंगाई पर होगी नजर

विश्लेषकों के मुताबिक सोने की अगली चाल सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से तय नहीं होगी। अब महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Kotak Securities की AVP Commodity Research कायनात चेनवाला के मुताबिक, ईरान तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। बाजार यह देखेगा कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा होता है।

FD vs Lump Sum: ₹10 लाख की FD या ₹10 लाख का लंप सम, 10 साल बाद किसमें ज्यादा पैसा बनेगा?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Market Technicals : टेक्निकल एक्सपर्ट्स से जाने कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति, निफ्टी-बैंक निफ्टी में किन लेवल्स पर रहे नजर

Market Technicals : आज बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिखा। बाजार की चाल सुस्त रही। निफ्टी 0.13% की गिरावट के साथ 24,219.05 पर और सेंसेक्स 0.22% की गिरावट के साथ 77,369.11 पर बंद हुआ। सेक्टर नजरिए से देखें तो मेटल और रियल्टी सेक्टर में बढ़त रही,जबकि डिफेंस,बैंक,सीमेंट और ऑटो सेक्टर में गिरावट देखी गई। निफ्टी 50 में सबसे ज़्यादा बढ़त जेएसडब्ल्यूस्टील, हिंडाल्को और टाटास्टील में रही। वहीं,एसबीआईलाइफ,बजाज फाइनेंस और अदानीपोर्ट्स में गिरावट रही।

पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशन से मेटल शेयरों में तेजा देखने को मिल रही है। सप्लाई में दिक्कत,घटते स्टॉक और मज़बूत मांग के कारण स्टील,कॉपर,एल्युमीनियम और जिंक की ग्लोबल कीमतों में उछाल आया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में गिरावट से भी इस सेक्टर को सहारा मिला है। आज निफ्टी मेटल्स में 1.59% की तेजी आई।

आज हिंदुस्तान जिंक सुर्खियों में रहा क्योंकि सरकार अगले दो हफ्तो में इसमें ऑफर फ़ॉर सेल लाने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार 1.5-2% हिस्सेदारी बेचकर लगभग 4,000-5,000 करोड़ रुपये जुटाने की सोच रही है,जो ऑफर के फ़ाइनल साइज़ और कीमत पर निर्भर करेगा। आज हिंदुस्तान जिंक 2.2% बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, पिछले 3 ट्रेडिंग सेशन में इसमें लगभग 7% की तेजी आई है।

सोने की कीमतों में तेजी से मुथूट फाइनेंस और मन्नापुरम जैसी गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को भी फायदा हुआ है। इनके शेयरों में 5.72% और 2.21% से ज्यादा की तेजी आई है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से गोल्ड फ़ाइनेंस कंपनियों को फायदा हो सकता है। इससे गिरवी रखी गई संपत्ति (कोलेटरल) की वैल्यू बढ़ती है,लेंडर की सिक्योरिटी मजबूत होती है और लोन ग्रोथ को भी बढ़ावा मिल सकता है।

एंजेल वन के चीफ मैनेजर-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च,ओशो कृष्ण का कहना है कि ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों की वजह से भारतीय इक्विटी मार्केट में बढ़त के साथ शुरुआत हुई और बेंचमार्क इंडेक्स ने एक्सपायरी वाले हफ्ते की शुरुआत जोश के साथ की। हालांकि,बाद में फॉलोअप खरीदारी न होने से शुरुआती तेजी कमज़ोर पड़ गई और इंडेक्स नीचे आ गया,जिससे बुलिश गैप का दोबारा टेस्ट हुआ। इसके बाद, CAS सेशन के बाद निफ्टी ने नुकसान की कुछ भरपाई की और 24200 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा,जिससे सेशन का अंत 0.14% की मामूली गिरावट के साथ हुआ।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो पोजीशन अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। 20-DEMA एक बड़ी रुकावट के तौर पर सामने आ रहा है और लगातार रिजेक्शन का कारण बन रहा है। हालांकि,हाल ही में मंदी के कमजोर पड़ने के संकेतों ने रिवर्सल की उम्मीद जगाई है, लेकिन तेजी या गिरावट की रफ्तार (मोमेंटम)अभी भी धीमी है। बाजार की नजर किसी ऐसे अहम संकेत पर है जिससे खरीदारी में तेजी आए। अगर गिरावट आती है तो 24150-24100 का दायरा तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 24050-24000 का जोन एक मजबूत सपोर्ट जोन बना रहेगा।

ऊपर की तरफ,24300 के आसपास स्थित 20-DEMA का जोन रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। अगर इस स्तर के ऊपर बढ़त कायम रहती है तो टेक्निकल सेटअप मजबूत होगा और आने वाले समय में 24500 के स्तर तक की रिकवरी का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल,सतर्कता बरतना ही समझदारी होगी। ट्रेडरों को सलाह है कि जब तक बाजार रुझान साफ न हो जाए,तब तक आक्रामक रुख न अपनाएं। अगस्त माह की एक्सपायरी के दौरान वोलैटुलिटी बढ़ने की भी आशंका है। इसलिए,ट्रेडरों के अनुशासित तरीके से रिस्क मैनेज करते हुए सीमित निवेश करना चाहिए और बाजार के अहम संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।

SBI सिक्योरिटीज में हेड -टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी की गैप-अप ओपनिंग टिक नहीं पाई क्योंकि इंडेक्स पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव बना और दिन चढ़ने के साथ यह नीचे गिरकर 0.14% की गिरावट के साथ 24219 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर निफ्टी ने लोअर विक के साथ एक बेयरिश कैंडल बनाई। चार्ट पर यह लोअर विक मुख्य रूप से इसलिए बना क्योंकि इंडेक्स ने दूसरे हाफ के आखिर में अपने शुरुआती नुकसान का कुछ हिस्सा रिकवर कर लिया था। इंडेक्स को अपने 20-डे EMA के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और यह नीचे बंद हुआ। ADX इंडिकेटर पर DI-लगातार DI+ से ऊपर बना हुआ है,जो बुल्स पर बेयर्स के लगातार बने दबदबे को दिखाता है।

मिडकैप इंडेक्स ने एक पतली बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसके दोनों तरफ छोटी विक्स थीं। इससे पता चलता है कि इंट्राडे में कोई साफ दिशा नहीं थी। स्मॉलकैप इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई जिसमें ऊपर की तरफ एक छोटी विक थी,जो ऊपरी लेवल पर प्रॉफ़िट बुकिंग को दिखाती है। प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद, स्मॉलकैप इंडेक्स मिडकैप और लार्जकैप के मुकाबले बेहतर स्थिति में है,जैसा कि इसके संबंधित रेश्यो चार्ट में बढ़ती रेश्यो लाइन से पता चलता है।

आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24070-24050 के जोन में है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है तो इसमें और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23900 और फिर 23750 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24350-24370 के जोन में है।

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बैंक निफ्टी आउटलुक

 सुदीप शाह का कहना है कि  बैंक निफ्टी भी गैप-अप के साथ खुला,लेकिन ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया। दिन के दौरान इसमें तेज गिरावट आई,लेकिन बाद में,खासकर दूसरे हाफ के आखिर में इसमें कुछ रिकवरी हुई और इंडेक्स ने नुकसान की कुछ भरपाई की। आखिरकार,यह 0.41% गिरकर 57526 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर इंडेक्स ने एक बेयरिश कैंडल बनाई है,जिसमें नीचे की तरफ एक साफ लोअर विक दिख रही है। अगस्त की शुरुआत से ही बैंक निफ्टी 1246 अंकों की रेंज में ही घूम रहा है जो बाजार में अनिश्चितता और साइडवेज रहने के संकेत है। गिरता हुआ ADX भी इस बात की पुष्टि करता है कि बाजार में कोई मजबूत दिशा वाला ट्रेंड नहीं है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 57100-57000 जोन में है। अगर यह इस जोन के नीचे बना रहता है,तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56600 और फिर 56200 तक टूट सकता है। ऊपर की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57900-58000 जोन में है।

 

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₹4 लाख के एजुकेशन लोन पर बड़ा अपडेट! जानिए बिहार के छात्रों के लिए क्या बोले सीएम सम्राट चौधरी

Bihar Student Credit Card Scheme: बिहार में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देख रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। बीते कुछ दिनों से स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर चल रही तरह-तरह की अफवाहों और संशय की स्थिति पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दी जाने वाली ₹4 लाख तक की आर्थिक सहायता पहले की तरह ही जारी रहेगी। सीएम ने कहा है कि राज्य के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और पढ़ाई के रास्ते में पैसों की तंगी को कभी बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।

₹4 लाख तक का एजुकेशन लोन रहेगा बरकरार

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को ₹4 लाख तक का शिक्षा ऋण दिया जाता है। छात्र इस राशि का उपयोग अपनी फीस, किताबों और रहने-खाने से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए आसानी से कर सकते हैं।

पिछले कुछ समय से लोन की सीमा घटाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर विराम लगाते हुए सरकार ने अभिभावकों और छात्रों को चिंता न करने की सलाह दी है।

शिक्षा ऋण का दायरा घटा नहीं, बल्कि और बढ़ा

शिक्षा विभाग ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि योजना को सीमित करने की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। वास्तव में छात्रों के लिए उच्च शिक्षा पाना अब और भी आसान हो गया है।

अब स्टूडेंट अपनी जरूरत और पात्रता के आधार पर बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम, बैंकों और ‘पीएम विद्यालक्ष्मी योजना’ के जरिए भी लोन ले सकते हैं। सरकार का मकसद हर जरूरतमंद छात्र तक संस्थागत वित्तीय मदद पहुंचाना है, ताकि कोई भी प्रतिभाशाली युवा पैसों के अभाव में पढ़ाई न छोड़े।

बिहार सरकार के इस स्पष्टीकरण से हजारों छात्रों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। अगर आप भी बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत ₹4 लाख तक के लोन का लाभ उठाना चाहते हैं, तो बिना किसी हिचकिचाहट के आवेदन कर सकते हैं और अपने बेहतर करियर के सपने को पूरा कर सकते हैं।

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर करीब 50-55 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसके साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ सकता है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के आधार पर होती है।

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत HRA शहर की कैटेगरी के हिसाब से मिलता है। X कैटेगरी शहरों में सबसे ज्यादा HRA मिलता है। वहीं, Y और Z कैटेगरी में यह क्रमश: कम होता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के तहत अंतिम HRA कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

HRA कैसे बढ़ सकता है?

फिलहाल HRA की मौजूदा दरें इस तरह हैं।

  • X शहर: 30%
  • Y शहर: 20%
  • Z शहर: 10%

नीचे की गणना 2x, 2.5x और 3x फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर आधारित है। यह सिर्फ संभावित हिसाब है, अंतिम फैसला सरकार करेगी।

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लेवल-4 कर्मचारी का अनुमानित HRA

मान लीजिए किसी लेवल-4 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर के बाद ₹51,000 हो जाती है। ऐसे में HRA का अनुमान इस तरह बनता है।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹15,300
Y (20%)₹10,200
Z (10%)₹5,100

अगर यही कर्मचारी 2.5 फिटमेंट फैक्टर के दायरे में आता है और उसकी बेसिक पे ₹63,750 हो जाती है, तो HRA भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹19,125
Y (20%)₹12,750
Z (10%)₹6,375

यानी सिर्फ 2.0 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर ही X शहर में HRA करीब ₹3,825, Y शहर में ₹2,550 और Z शहर में ₹1,275 बढ़ सकता है।

HRA बढ़ने का सीधा मतलब क्या है?

कई कर्मचारी सिर्फ बेसिक सैलरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन HRA बढ़ने का असर हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ता है। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो उसी के साथ HRA की रकम भी ऊपर चली जाती है।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे HRA तय नहीं करता। यह सिर्फ बेसिक पे बढ़ाता है और HRA उसी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का तय प्रतिशत होता है। इसलिए अंतिम बढ़ोतरी का सही आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन नहीं मिल रहा है? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Personal Loan Rejection: पर्सनल लोन लेना पहले से काफी आसान हो गया है। कई बैंक और ऐप कुछ मिनटों में लोन देने का दावा करते हैं। लेकिन हर आवेदन मंजूर नहीं होता। कई बार अच्छी सैलरी होने के बाद भी लोन रिजेक्ट हो जाता है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर वजहें पहले से पता हों, तो उनसे बचा जा सकता है। आइए जानते हैं वो 5 कारण, जिनकी वजह से आपका पर्सनल लोन अटक सकता है।

1. क्रेडिट स्कोर खराब होना

यह सबसे बड़ी वजह होती है। बैंक सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि आपने पुराने लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया या नहीं।

अगर स्कोर 750 या उससे ज्यादा है, तो मंजूरी मिलने की संभावना बेहतर रहती है। वहीं कम स्कोर होने पर बैंक लोन देने से मना कर सकते हैं या ज्यादा ब्याज वसूल सकते हैं।

2. पहले से बहुत ज्यादा EMI चलना

बैंक सिर्फ आपकी सैलरी नहीं देखते। वे यह भी देखते हैं कि हर महीने आपकी कमाई का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है।

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी ₹60,000 है। अगर पहले से ₹30,000 EMI कट रही है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि कुल EMI आपकी कमाई का लगभग 40-50% से ज्यादा न हो।

3. नौकरी या आय स्थिर नहीं होना

अगर आपने हाल ही में नौकरी बदली है या आपकी आय नियमित नहीं है, तो बैंक सावधानी बरतते हैं।

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में सिर्फ एक-दो महीने पहले जॉइन किया है, तो बैंक थोड़ा इंतजार करने को कह सकते हैं। वहीं फ्रीलांसर और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों से अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाते हैं।

4. बार-बार लोन के लिए आवेदन करना

कई लोग एक साथ कई बैंकों में आवेदन कर देते हैं। यह उल्टा नुकसान कर सकता है।

हर आवेदन का रिकॉर्ड आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है। कम समय में बहुत ज्यादा आवेदन देखकर बैंक मान सकते हैं कि आपको पैसों की ज्यादा जरूरत है। इससे मंजूरी की संभावना घट सकती है।

5. दस्तावेजों में गलती

कई बार छोटी सी गलती भी बड़ी परेशानी बन जाती है।

नाम में अंतर, गलत पता, अधूरी बैंक स्टेटमेंट या आय का सही सबूत न देना आवेदन रोक सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज एक बार जरूर जांच लें।

लोन मंजूर होने की संभावना कैसे बढ़ाएं?

अगर आप पर्सनल लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ये बातें मदद कर सकती हैं।

  • क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ऊपर रखने की कोशिश करें।
  • पुरानी EMI कम रखें।
  • समय पर बिल और EMI भरें।
  • एक साथ कई जगह आवेदन न करें।
  • सभी दस्तावेज सही और अपडेटेड रखें।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

₹2.5 लाख महीना कमाता है ये 29 साल का युवक फिर भी कर्ज में डूबा! जानिए शादी-घर ने कैसे बिगाड़ा पूरा हिसाब

Bengaluru Viral News: हैंडसम सैलरी और अच्छा करियर होने के बावजूद खराब फाइनेंशियल मैनेजमेंट किसी को भी कर्ज के जाल में फंसा सकता है। बेंगलुरु के रहने वाले 29 वर्षीय एक शादीशुदा युवक की कहानी इसी बात का लेटेस्ट उदाहरण बनी है। टैक्स कटने के बाद हर महीने ₹2.5 लाख की कुल कमाई करने के बावजूद यह युवक शादी और घर के रिनोवेशन पर बड़ा खर्च करने की वजह से कई लोन और कर्ज के भारी बोझ तले दब गया है। युवक ने सोशल मीडिया पर अपने फाइनेंशियल स्टेटस को शेयर करते हुए लोगों से सलाह मांगी है।

95 फीसदी सेविंग्स खत्म, शादी और घर के रेनोवेशन ने बिगाड़ा बजट

युवक ने अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि ‘मैं हाल ही में एक ऐसे कर्ज के जाल में फंस गया, जिसमें मैं कभी नहीं फंसना चाहता था। मैंने हाल ही में दो बड़े खर्च किए एक मेरी शादी और दूसरा घर का रेनोवेशन, जिसने मेरी 95 प्रतिशत बचत को खत्म कर दिया।’

रेडिट पर की गई युवक की इस पोस्ट के मुताबिक उसके माता-पिता ने उसे अपने पैतृक घर पर एक और मंजिल बनाने के लिए जोर दिया ताकि उसे किराए पर दिया जा सके। इस घर के रेनोवेशन में कुल 35 लाख रुपये खर्च हुए। उसने अपनी सेविंग्स में से ₹15 लाख दिए और बाकी के ₹20 लाख लोन लिए। उसकी शादी का खर्च ₹30 लाख से अधिक हो गया। शादी के खर्चों के लिए उसने अपने स्टॉक्स (शेयर) बेचे लेकिन आखिरी समय में कैश की कमी होने की वजह से उसे 9.1 फीसदी के इंट्रेस्ट पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेना पड़ा। उसने बताया कि आखिरी समय में इस अमाउंट के कैश का बंदोबस्त करने के लिए उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था।

EMI और क्रेडिट कार्ड का भारी-भरकम बोझ

घर के रेनोवेशन और शादी के अलावा युवक पर कार लोन भी है। इसपर अभी 3 लाख रुपये बचे हुए हैं। उसके माता-पिता फाईनेंशियली से उसी पर निर्भर हैं और राशन-पानी व अन्य घरेलू खर्चों के लिए उसी के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। हर महीने युवक को होम लोन में 35000, पर्सनल लोन ईएमआई 16000, कार लोन पर 15000, किराए और बिल पर 37000, क्रेडिट कार्ड के बिल पर 70 हजार, राशन के मद में 15 हजार, आउटिंग और मूवी पर करीब 6000 खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 1500 रुपये SIP इन्वेंस्टमेंट में जाते हैं।

युवक के पास फिलहाल स्टॉक्स में 3 लाख रुपये और एफडी में 1 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा उसके पास 50 सॉवरेन सोना है, जिसे वह बेचना या इस्तेमाल करना नहीं चाहता। युवक ने बताया है कि ‘हम पार्टियां नहीं करते, न ही मैं अक्सर बाहर खाता हूं। मैं अपने कैश फ्लो को सुधारने के लिए नौकरी बदलने की योजना बना रहा हूं, लेकिन इसमें अभी समय लग रहा है।’ अब वह किसी भी तरह अपने कर्जों को जल्द चुकता करने, क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर लगाम लगाने और मासिक बचत बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है।

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इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, ‘यह पति-पत्नी दोनों की मिलाकर कमाई है। अगर पति अपनी पत्नी की कमाई का इस्तेमाल अपने माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए करेगा, तो नई-नवेली पत्नी नाराज हो सकती है और लड़ाई शुरू हो सकती है। इसके अलावा युवक ने पत्नी के पक्ष के खर्चों का जिक्र नहीं किया है, यकीनन पत्नी भी अपने माता-पिता को कुछ पैसे भेज रही होगी या शादी के लिए लिए गए किसी लोन की भरपाई कर रही होगी।’

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

FD vs SCSS: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसा कहां रखा जाए, जहां नियमित कमाई भी होती रहे और मूलधन भी सुरक्षित रहे। ऐसे में ज्यादातर लोग बैंक FD और सीनियर सिटिजंस रेविंग्स स्कीम (SCSS) के बीच उलझ जाते हैं।

अगर सिर्फ सुरक्षा देखें, तो SCSS आगे निकलती है। लेकिन कुछ बैंक ऐसी FD भी दे रहे हैं, जिनका ब्याज SCSS के बराबर या उससे थोड़ा ज्यादा है। ऐसे में फैसला सिर्फ ब्याज देखकर नहीं करना चाहिए।

एक नजर में FD vs SCSS

पैमानाSenior Citizen FDSCSS
ब्याज दरबड़े बैंकों में 7%-8%+, कुछ SFB में 8.3% तक8.20%
सुरक्षाDICGC बीमा ₹5 लाख तक
भारत सरकार की गारंटी

अवधिबैंक के हिसाब से
5 साल (3 साल बढ़ा सकते हैं)

अधिकतम निवेशकोई सीमा नहीं₹30 लाख
ब्याज भुगतानमासिक, तिमाही या मैच्योरिटी परहर तिमाही
टैक्स लाभ5 साल की टैक्स-सेविंग FD परधारा 80C के तहत पात्र

₹10 लाख पर किसमें कितना मिलेगा?

अब मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। सवाल यह है कि साल भर में जेब में कितना पैसा आएगा। यही तुलना सबसे साफ तस्वीर देती है।

विकल्पब्याज दरसालाना ब्याजहर तिमाही
SCSS8.20%₹82,000₹20,500
FD (7.5%)7.50%₹75,000₹18,750
FD (8%)8%₹80,000₹20,000
FD (8.3%)8.30%₹83,000₹20,750

यहां एक बात साफ दिखती है। अगर किसी छोटे फाइनेंस बैंक में 8.3% की FD मिल जाए, तो कमाई SCSS से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। लेकिन बड़े सरकारी और निजी बैंकों की ज्यादातर FD पर SCSS अब भी आगे है।

₹30 लाख पर कितनी होगी कमाई?

SCSS में एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है। अगर कोई पूरी रकम निवेश करता है, तो हर साल ₹2,46,000 ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में ₹61,500 खाते में आएंगे। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग इसे नियमित आय के लिए चुनते हैं।

सुरक्षा में कौन आगे?

यहीं सबसे बड़ा फर्क आता है। SCSS पूरी तरह भारत सरकार की गारंटी वाली योजना है। दूसरी तरफ बैंक FD में DICGC का बीमा सिर्फ ₹5 लाख तक मिलता है। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। अगर आपके पास बड़ी रकम है, तो सुरक्षा के लिहाज से SCSS ज्यादा मजबूत विकल्प माना जाता है।

टैक्स का क्या होगा?

दोनों में मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो दोनों योजनाएं धारा 80C के तहत टैक्स लाभ के लिए पात्र हो सकती हैं। हालांकि 80C की कुल सीमा अलग से लागू होती है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है, तो SCSS बेहतर विकल्प है। अगर आपको हर तीन महीने में तय आय चाहिए, तब भी SCSS मजबूत साबित होती है। वहीं ₹30 लाख से ज्यादा रकम निवेश करनी है, तो FD का सहारा लेना पड़ेगा। अगर किसी भरोसेमंद बैंक में SCSS से ज्यादा ब्याज वाली FD मिल रही है, तो उस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

आखिरी फैसला कैसे करें

अगर सवाल है कि सीनियर सिटिजन के लिए सबसे सुरक्षित और नियमित आय वाला विकल्प कौन सा है, तो SCSS बढ़त ले जाती है। इसमें 8.2% की सरकारी गारंटी वाली ब्याज दर मिलती है। हर तिमाही पैसा खाते में आता है। वहीं अगर लक्ष्य सिर्फ ज्यादा ब्याज पाना है, तो कुछ छोटे फाइनेंस बैंकों की FD थोड़ा बेहतर रिटर्न दे सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF vs NSC: ₹10 लाख के निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? समझिए 5 साल का पूरा गणित और टैक्स कैलकुलेशन

PPF vs NSC Investment Return Comparison: अगर आपके पास ₹10 लाख हैं और आप उसे अगले 5 सालों के लिए सरकारी गारंटी वाली स्कीम में बिना किसी रिस्क के जमा करना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे बेहतरीन जरिया हैं।

स्मॉल सेविंग्स में दो सबसे पसंदीदा विकल्प पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) हैं। चालू वित्त वर्ष (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) के लिए सरकार ने पीपीएफ की ब्याज दर 7.1% और एनएससी की ब्याज दर 7.7% पर बरकरार रखी है।

अगर आप ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो 5 साल में कहां ज्यादा फायदा मिलेगा? जानिए पूरी कैलकुलेशन।

₹10 लाख के निवेश पर 5 साल की कैलकुलेशन

अगर हम दोनों स्कीम्स में ₹10 लाख के कॉर्पस पर 5 साल के ग्रोथ की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:

PPF कैलकुलेशन (7.1% ब्याज): ₹10 लाख की जमा राशि 5 साल में 7.1% सालाना ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर लगभग ₹14,09,120 हो जाएगी। इसमें आपको 5 साल में करीब ₹4,09,120 का प्री-टैक्स ब्याज मिलेगा।

NSC कैलकुलेशन (7.7% ब्याज): ₹10 लाख का निवेश 5 साल में 7.7% की चक्रवृद्वि ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर ₹14,49,030 हो जाएगा। यानी 5 साल में करीब ₹4,49,030 का प्री-टैक्स मुनाफा होगा।

ध्यान रहे कि पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा करने की इजाजत है। इसलिए ₹10 लाख का यह आंकड़ा तुलनात्मक गणना के लिए 7.1% ब्याज के आधार पर दर्शाया गया है। NSC में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।

प्री-टैक्स रिटर्न में NSC आगे, लेकिन टैक्स का पेंच समझें

कागजों पर 5 साल में NSC, PPF की तुलना में सीधे तौर पर ₹39,910 का ज्यादा रिटर्न देता दिख रहा है। लेकिन असली गणित टैक्स Slab के बाद बदलता है:

PPF पर EEE स्टेटस: पीपीएफ पूरी तरह से ‘EEE’ कैटगरी में आता है। यानी जमा राशि, मिला हुआ ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पूरी तरह से टैक्स-फ्री होते हैं।

NSC पर टैक्स नियम: एनएससी से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। हालांकि, पहले 4 सालों के री-इन्वेस्टेड इंटरेस्ट पर सेक्शन 80C के तहत छूट क्लेम की जा सकती है, लेकिन आखिरी साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल रहता है। Higher Tax Slab वाले निवेशकों के लिए NSC का नेट रिटर्न कम हो सकता है।

मैच्योरिटी और लिक्विडिटी में कौन सा बेहतर?

NSC (5 साल का लॉक-इन): एनएससी की मैच्योरिटी ठीक 5 साल में पूरी हो जाती है। इसके अलावा, इसमें निवेश करते ही ब्याज दर पूरे 5 साल के लिए लॉक हो जाती है, जो मार्केट में ब्याज दरें घटने पर भी नहीं बदलती।

PPF (15 साल का लॉक-इन): पीपीएफ मूल रूप से 15 साल की लंबी अवधि की स्कीम है। हालांकि, इसमें 7वें साल से आंशिक निकासी और तीसरे साल से लोन की सुविधा मिलती है। पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है।

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?

अगर आपकी प्राथमिकता 5 साल की फिक्स्ड अवधि, गारंटीड रिटर्न और ज्यादा ब्याज दर है और आप लोअर टैक्स स्लैब में आते हैं तो NSC आपके लिए बेस्ट है। दूसरी ओर, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से टैक्स-फ्री फंड बनाना है, तो PPF से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करके दोनों स्कीम्स का सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता रोका; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप

पाकिस्तान के कराची में लंबे समय से जारी बिजली कटौती के खिलाफ शनिवार को कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने कई घंटे तक सड़कें जाम रखीं बिजली तुरंत बहाल करने की मांग की। इससे शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया और हजारों लोग जाम में फंस गए। डॉन के मुताबिक, कराची की पाक कॉलोनी में स्थानीय यूनियन कमेटियों के सदस्यों के साथ लोगों ने रैली निकाली। उन्होंने रोज 12-12 घंटे बिजली कटने और इससे पानी की सप्लाई प्रभावित होने पर नाराजगी जताई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…