Dividend Stocks: बंपर डिविडेंड कमाने का आज आखिरी मौका, कल से इन शेयरों में निवेश पर नहीं मिलेगा डिविडेंड

Dividend Stocks: कई इनवेस्टर्स कमाई के लिए उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं, जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड अच्छा है। इससे उन्हें दो तरह से कमाई होती है। शेयरों की कीमतों में इजाफा होने पर उनके निवेश की वैल्यू बढ़ती है। साथ ही जब तक शेयर उनके पोर्टफोलियो में रहता है, उन्हें डिविडेंड मिलता रहता है। अगर आप भी डिविडेंड के लिए निवेश करना चाहते हैं तो आज बड़ा मौका है। करीब तीन दर्जन कंपनियों ने डिविडेंड के लिए 21 अगस्त को रिकॉर्ड डेट तय किया है।

डिविडेंड के लिए 21 अगस्त तक डीमैट अकाउंट में होने चाहिए शेयर

ये कंपनियां उन शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड देंगी, जिनके डीमैट अकाउंट में 21 अगस्त को शेयर होंगे। इसका मतलब है कि अगर आप इन कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं तो कल यानी 21 अगस्त (शुक्रवार) को आपके डीमैट अकाउंट में शेयर आ जाएंगे। इसका मतलब है कि डिविडेंड इनकम के लिए जा इन शेयरों को खरीदने का अंतिम मौका है। अगर कोई इनवेस्टर 21 अगस्त को इन शेयरों को खरीदता है तो वह डिविडेंड का हकदार नहीं होगा।

सबसे ज्यादा 22 रुपये का डिविडेंड एके कैपिटल दे रही है

AK Capital Services सबसे ज्यादा 22 रुपये का डिविडेंड दे रही है। इसका मतलब है कि 21 अगस्त को जिन इनवेस्टर्स के डीमैट अकाउंट में कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें प्रति शेयर 22 रुपये का डिविडेंड मिलेगा। अगर आपके पास एके कैपिटल सर्विसेज के 10 शेयर हैं तो आपको कंपनी की तरफ से कुल 220 रुपये का डिविडेंड मिलेगा। AK Capital Services का शेयर 20 अगस्त को 1:20 बजे 1.36 फीसदी चढ़कर 1,778 रुपये पर चल रहा था।

वाडीलाल इंडस्ट्रीज प्रति शेयर 17 रुपये का डिविडेंड देगी

Vadilal Industries ने भी बंपर डिविडेंड का ऐलान किया है। कंपनी हर एक शेयर पर 17 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देगी। वाडीलाल इंडस्ट्रीज का शेयर 20 अगस्त को 0.66 फीसदी चढ़कर 7,450 रुपये पर चल रहा था। इस साल इस शेयर में जबर्दस्त तेजी आई है। यह 2026 में 51 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इस कंपनी के शेयर पर डिविडेंड कमाने के लिए आपको आज ही इसके शेयर में निवेश करना होगा।

LICHF के शेयरों से भी डिविडेंड कमाने का यह बड़ा मौका

LIC Housing Finance (LICHF) ने भी प्रति शेयर 10 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। इसकी रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त है। इसका मतलब है कि प्रति शेयर 10 रुपये डिवलिडेंड कमाने के लिए आपको इस शेयर में आज ही निवेश करना होगा। यह देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी LIC की हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है। यह घर खरीदने के लिए लोन देती है। LICHF का शेयर 20 अगस्त को 2.09 फीसदी चढ़कर 508 रुपये पर चल रहा था। बीते एक साल में यह शेयर 12 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

हिताची एनर्जी प्रत्येक शेयर पर 8 रुपये का डिविडेंड देगी

Hitachi Energy ने प्रति शेयर 8 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। अगर आप इस डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं तो आज ही आपको इस शेयर में निवेश करना होगा। हिताची एनर्जी का शेयर 20 अगस्त को 0.67 फीसदी गिरकर 33,575 रुपये पर चल रहा था। हालांकि, बीते एक साल में इस शेयर ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस दौरान यह शेयर करीब 68 फीसदी उछला है।

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ये कंपनियां भी दे रही हैं शेयरों पर अट्रैक्टिव डिविडेंड 

पतंजिल फूड्स, जिंदल स्टेनलेस, जिंदल स्टील, GE Vernova T&D India, Veljan Denison, KSE, Mayur Uniquoters, Savita Oil Technologies, Patels Airtemp, Deep Industries के शेयरों पर भी डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त है। इसका मतलब है कि इन शेयरों से डिविडेंड इनकम के लिए आज ही इनमें निवेश करना पड़ेगा।

Stocks to Watch: BSE, HDFC Life और Hyundai समेत 21 स्टॉक्स; Sensex की वीकली एक्सपायरी पर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 144.00 प्वाइंट्स यानी 0.60% की बढ़त के साथ 24,234.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 19 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 325.78 प्वाइंट्स यानी 0.42% की गिरावट के साथ 76,909.68 और निफ्टी 76.60 प्वाइंट्स यानी 0.32% की फिसलन के साथ 24,078.30 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

XtraNet Technologies Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एक्स्ट्रानेट टेक्नोलॉजीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 77.9% बढ़कर ₹6.04 करोड़ और रेवेन्यू 10.5% उछलकर ₹50.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Lohia Corp Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर लोहिया कॉर्प का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 4 गुना बढ़कर ₹16.9 करोड़ से ₹66.3 करोड़ और रेवेन्यू 59.5% उछलकर ₹503 करोड़ पर पहुंच गया।

EMS

ईएमस ने राजस्थान सरकार के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से कोटा में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और उससे जुड़े दूसरे कामों के लिए सबसे कम बोली लगाई है। यह ऑर्डर ₹190.86 करोड़ का है।

Ramco Systems

एंटरप्राइज एविएशन सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली रामको सिस्टम्स की सब्सिडरी रामको सिस्टम्स कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इंजन एमआरओ सर्विसेज और एक्सेसरी रिपेयर मुहैया कराने वाली पेम-एयर (Pem-Air) ने अपने इंजन एमआरओ ऑपरेशंस के लिए तकनीकी आधार के रूप में रामको एविएशन सॉफ्टवेयर को चुना है।

Dr Lal PathLabs

डॉ लाल पैथलैब्स की दुबई की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी डॉ लाल पैथलैब्स एफजेडसीओ ने 19 अगस्त को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में डॉ लाल पैथलैब्स इंडोमेड नाम से एक कंपनी बनाई है और इसकी 70% शेयर कैपिटल लेने पर सहमति जताई है।

Autoline Industries

ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज को टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स से हैचबैक गाड़ियों के लिए चार जरूरी पार्ट्स की सप्लाई का नया बिजनेस मिला है। इस बिज़नेस से कंपनी को सालाना लगभग ₹80 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जबकि इससे जुड़े टूलिंग से लगभग ₹30 करोड़ का एक बार का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

HDFC Life Insurance Company

बीमा नियामक इरडा ने एचडीएफसी लाइफ की एमडी और सीईओ के तौर पर विभा पाडलकर की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनका अगला कार्यकाल 5 साल के लिए 12 सितंबर, 2026 से शुरू होगा। साथ ही 26 अप्रैल 2026 से पांच साल के लिए इरडा ने नीरज शाह की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के तौर पर दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी दी है।

Hyundai Motor India

हुंडई मोटर इंडिया ने सितंबर 2026 से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में 1% तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।

Kolte-Patil Developers

कोल्टे-पाटिल डेवलपर्स ने 24 अगस्त से ऋषिकेश परांडेकर को सीईओ बनाने का ऐलान किया है।

Aditya Infotech

आदित्य इन्फोटेक के बोर्ड ने पब्लिक इश्यू, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) या किसी अन्य तरीके से सिक्योरिटीज जारी करके ₹1,500 करोड़ तक का फंड जुटाने को मंजूरी दे दी है।

United Spirits

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती यूनिट में बनने वाले एक प्रोडक्ट की बिक्री से जुड़े 29 जून 2026 के अपने आदेश को वापस ले लिया है।

BSE

बीएसई ने अपने कई इंडेक्स के लिए MSCI के साथ एक एग्रीमेंट किया है। एक्सचेंज रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर इन इंडेक्स से जुड़े F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को भारत में लॉन्च करने पर विचार करेगा।

Dhenu Buildcon Infra

सेबी ने धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा के छह प्रेफरेंशियल अलॉटीज यानी शेयर पाने वालों को कंपनी के शेयर बेचने से रोक दिया है। यह कार्रवाई ₹1,000 करोड़ के कथित लोन से जुड़े फंड की राउंड-ट्रिपिंग के शुरुआती सबूत मिलने के बाद की गई है।

Aster DM Quality Care

TPG के निवेश वाली सेंटेला मॉरीशस होल्डिंग्स ने एस्टर डीएम क्वालिटी केयर में 6.66% हिस्सेदारी वाले 5.81 करोड़ इक्विटी शेयर ₹4,451.45 करोड़ में प्रति शेयर ₹766.17 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक कंपनी में सेंटेला की हिस्सेदारी 9.9% थी, जो हिस्सेदारी बेचने के बाद घटकर 3.24% रह गई है। वहीं चार घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स-HDFC म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, इंटीग्रेटेड कोर स्ट्रैटेजीज़ एशिया और सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स सिंगापुर ने कुल मिलाकर ₹2,287.6 करोड़ में कंपनी के 2.98 करोड़ शेयर खरीदे।

Shiprocket

गोल्डमैन सैक्स फंड्स-गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने लिस्टिंग के दिन शिपरॉकेट में 0.55% हिस्सेदारी वाले 40.24 लाख शेयर ₹52.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹131 के भाव पर खरीदे।

Behari Lal Engineering

360 वन म्यूचुअल फंड ने लिस्टिंग के दिन बेहारी लाल इंजीनियरिंग में 1.19% हिस्सेदारी वाले अतिरिक्त 5.05 लाख शेयर ₹23.74 करोड़ में प्रति शेयर ₹470.13 के भाव और संजय पोपटलाल जैन ने ₹14.35 करोड़ में 3 लाख शेयर ₹478.55 के भाव पर खरीदे। लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार 360 वन एसेट मैनेजमेंट के पास 360 वन इक्विटी अपॉर्चुनिटी फंड-सीरीज 2 के जरिए पहले से ही कंपनी में 1.08% हिस्सेदारी थी।

Updater Services

एसआईएस लिमिटेड ने प्रति शेयर ₹216.37 के भाव पर ₹113.5 करोड़ में अपडेटर सर्विसेज के अतिरिक्त 5.25 लाख शेयर (0.78% हिस्सेदारी) खरीदे। जून 2026 तक एसआईएस के पास कंपनी में 4.88% हिस्सेदारी थी।

Welspun Investments and Commercials

लॉयड्स एंटरप्राइजेज ने प्रति शेयर ₹1,797.12 के भाव पर वेलस्पन इंवेस्टमेंट्स एंड कमर्शियल्स के अतिरिक्त 29,960 शेयर म(0.81% हिस्सेदारी) ₹5.38 करोड़ में खरीदे। इससे पिछले सेशन में लॉयड्स ने कंपनी के 97,622 शेयर (2.67% हिस्सेदारी) खरीदे थे।

Waterways Leisure Tourism

बेल्ग्रेव इन्वेस्टमेंट फंड ने कॉर्डेलिया क्रूज की ऑपरेटर कंपनी वॉटरवेज लेजर टूरिज्म के 6.98 लाख शेयर (0.96% हिस्सेदारी) ₹57.65 करोड़ में प्रति शेयर ₹825.11 के भाव पर बेच दिए।

Tipco Engineering India

360 वन प्राइम ने टिप्को इंजीनियरिंग इंडिया के 1.56 लाख शेयर (0.75% हिस्सेदारी) ₹3.01 करोड़ में प्रति शेयर ₹192.28 के भाव पर खरीदे। वहीं इंटी कैपिटल वीसीसी-इंटी कैपिटल I ने कंपनी के 1.45 लाख शेयर (0.7% हिस्सेदारी) ₹2.79 करोड़ में प्रति शेयर ₹192 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक इसकी कंपनी में 1.63% हिस्सेदारी थी।

Credent Connect N Care

आईपीओ को 153 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद क्रीडेंट कनेक्ट एन केयर के शेयरों की आज एनएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

इन स्टॉक्स पर भी फोकस

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज, एसपीईएल सेमीकंडक्टर, स्टैंडर्ड सरफैक्टेंट्स

एक्स-डिविडेंड: मजझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, बीआर गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोस्टल कॉर्पोरेशन, डाई-इची करकारिया (Dai-Ichi Karkaria), गोलकुंडा डायमंड्स एंड ज्वैलरी, कामा होल्डिंग्स, क्वांटम पेपर्स, ला ओपाला आरजी, मार्कसन्स फार्मा, मुंजाल ऑटो इंडस्ट्रीज, नैटको फार्मा, एनआईआईटी, एनआईआईटी लर्निंग सिस्टम्स, ओसीसीएल, शिवा टेक्सयार्न, सुखजीत स्टार्च एंड केमिकल्स

राइट्स की एक्स-डेट: वायसराय होटल्स

बोनस की एक्स-डेट: कहान पैकेजिंग, ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स

F&O Ban: बंधन बैंक, एलआईसी, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI Minutes: अब लोन महंगा होने का खतरा, महंगाई बढ़ी तो बढ़ सकता है रेपो रेट

RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।

गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।

उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।

डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त

RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।

उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।

दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।

RBI किन बातों से चिंतित है?

बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।

  • मानसून का असमान रहना
  • एल नीनो का असर
  • पश्चिम एशिया में तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम

MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

SBI खाताधारकों को बड़ा झटका! 1 अक्टूबर से बैंक से कैश निकालना होगा महंगा, जानें ये नया नियम

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

IDL टोकन के लिए $1 अरब तक का इंश्योरेंस कवर की तैयारी, Infinity DAO का दावा

AI से जुड़े DeFi प्लेटफॉर्म Infinity DAO ने अपने IDL टोकन और पूरे इकोसिस्टम के लिए करीब 1 अरब डॉलर का इंश्योरेंस कवर लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि अगर यह बीमा कार्यक्रम मंजूर होकर लागू हो जाता है, तो यह डिजिटल एसेट सेक्टर में रिस्क मैनेजमेंट और संस्थागत भरोसे के लिहाज से बड़ा कदम हो सकता है।

कंपनी के मुताबिक, इस बीमा व्यवस्था की पॉलिसी, अंडरराइटिंग शर्तें और कवरेज लिमिट ब्रिटेन के एक एक्सपर्ट्स क्रिप्टो इंश्योरेंस सिंडिकेट के साथ तैयार की जा रही हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

किन जोखिमों को मिलेगा कवर?

Infinity DAO के मुताबिक प्रस्तावित बीमा योजना पांच बड़े जोखिमों को कवर करेगी। इसमें खास परिस्थितियों में IDL टोकन डिफॉल्ट प्रोटेक्शन, प्लेटफॉर्म या इकोसिस्टम में बीमित डिफॉल्ट की स्थिति में सुरक्षा, साइबर अपराध और डिजिटल एसेट चोरी से बचाव शामिल है।

इसके अलावा डायरेक्टर्स एंड ऑफिसर्स (D&O) से जुड़े कानूनी दावों का कवर और यूजर्स, स्टेकहोल्डर्स व प्लेटफॉर्म के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर के लिए अतिरिक्त सुरक्षा देने की भी योजना है।

Polygon पर चलता है IDL टोकन

IDL, Infinity DAO का यूटिलिटी टोकन है, जो Polygon ब्लॉकचेन पर काम करता है। कंपनी का कहना है कि उसका सिस्टम ड्यूल-टोकन स्ट्रक्चर और AI आधारित इकोनॉमिक मॉडल पर बना है। इसका मकसद टोकन इमिशन, लिक्विडिटी और सिस्टम की लंबी अवधि की स्थिरता को संभालना है।

कंपनी के प्रोटोकॉल वर्जन 1.2 में Quantum Emission Matrix, Flux Liquidity Shield, Velocity Recycle Core, HyperGuard Lock और Infinity Sustainability Protocol जैसे मॉड्यूल शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि ये सिस्टम लिक्विडिटी मैनेजमेंट, स्टेकिंग और रिवॉर्ड मैकेनिज्म को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करते हैं।

क्रिप्टो में इंश्योरेंस क्यों अहम है?

क्रिप्टो बाजार में निवेशकों के सामने साइबर अटैक, ऑपरेशनल गड़बड़ी और डिजिटल एसेट चोरी जैसे जोखिम बने रहते हैं। ऐसे में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कुछ तय परिस्थितियों में इन जोखिमों को कम करने का काम कर सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ऐसा बीमा टोकन की कीमत गिरने या निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। कवरेज सिर्फ पॉलिसी में तय शर्तों के दायरे तक ही सीमित होता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF vs SIP: 15 साल बाद कौन ज्यादा पैसा देगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs SIP: हर साल अगर आपके पास निवेश के लिए ₹1.5 लाख हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है। पैसा PPF में डालें या SIP करें? दोनों 15 साल के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। लेकिन दोनों का खेल अलग है। PPF में सरकार की गारंटी मिलती है। SIP में शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा मिलता है।

यही वजह है कि 15 साल बाद दोनों का रिजल्ट भी अलग निकलता है। अगर सिर्फ कमाई देखें तो SIP आगे निकल सकती है। लेकिन सुरक्षा और टैक्स के मामले में PPF की अपनी ताकत है।

PPF और SIP में सबसे बड़ा फर्क

PPF एक सरकारी बचत योजना है। इसमें ब्याज तय होता है और फिलहाल यह 7.1% है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स-फ्री होती है।

दूसरी तरफ SIP, म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका है। इसमें कोई तय रिटर्न नहीं होता। बाजार अच्छा चला तो कमाई ज्यादा हो सकती है। बाजार कमजोर रहा तो रिटर्न भी कम हो सकता है।

15 साल का हिसाब

मान लेते हैं कि आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। यानी SIP में हर महीने ₹12,500 डालते हैं। तुलना के लिए SIP में 12% सालाना औसत रिटर्न का उदाहरण लिया गया है। यह इक्विटी म्यूचुअल फंड अमूमन लॉन्ग टर्म में देते हैं।

पैमानाPPF
SIP (12% उदाहरण)

हर साल निवेश₹1.5 लाख₹1.5 लाख
कुल निवेश₹22.5 लाख₹22.5 लाख
अनुमानित रिटर्न7.10%12.00%
15 साल बाद रकम₹40.7 लाख₹63.1 लाख
कुल मुनाफा₹18.2 लाख₹40.6 लाख

यानी इस मामले में SIP, PPF से करीब ₹22 लाख ज्यादा पैसा बना सकती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए राहुल और अमित दोनों हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। राहुल PPF चुनता है। अमित हर महीने ₹12,500 की SIP करता है।

15 साल बाद राहुल के पास करीब ₹40.7 लाख होंगे। वहीं अमित के पास करीब ₹63.1 लाख हो सकते हैं। दोनों ने बराबर पैसा लगाया, लेकिन रिटर्न का फर्क करीब ₹22 लाख तक पहुंच गया।

अगर SIP का रिटर्न बदल जाए तो?

यहीं असली बात है। SIP में कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए अलग-अलग रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है।

SIP का औसत रिटर्न15 साल बाद रकम
8%₹43 लाख
10%₹52 लाख
12%₹63 लाख
15%₹84 लाख

यानी 8% पर SIP और PPF का फर्क बहुत कम रह जाता है। लेकिन 12-15% रिटर्न मिलने पर अंतर तेजी से बढ़ जाता है।

टैक्स में कौन आगे है?

PPF का सबसे बड़ा फायदा टैक्स है। इसमें जमा किया गया पैसा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स-फ्री रहती हैं।

SIP में टैक्स देना पड़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और कितने समय बाद पैसा निकाला है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपको बिना जोखिम वाला विकल्प चाहिए, तो PPF ज्यादा सुकून देता है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी तय रहता है। अगर आपका लक्ष्य ज्यादा पैसा बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो SIP बेहतर विकल्प बन सकती है।

दोनों में निवेश ज्यादा बेहतर

मान लीजिए आपके पास हर साल ₹1.5 लाख हैं। ऐसे में पूरा पैसा सिर्फ एक जगह लगाने की जरूरत नहीं है। आप ₹75,000 PPF में और ₹75,000 SIP में लगा सकते हैं।

इससे एक तरफ सरकारी सुरक्षा मिलती है। दूसरी तरफ बाजार की ग्रोथ का फायदा भी मिलता है। यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार लंबी अवधि के लिए इस तरह का संतुलन बेहतर मानते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना ₹2000 चढ़ा, चांदी में भी तेजी

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 18 अगस्त को सोने और चांदी में तेजी दिखी। सोना 2,000 रुपये चढ़कर 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी रही। इसकी वजह रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की अच्छी मांग बताई जा रही है। लगातार दो सत्रों में अपरिवर्तित रहने के बाद चांदी में भी तेजी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

चांदी का भाव 730 रुपये चढ़कर 2,40,730 रुपये प्रति किलो ग्राम पर पहुंच गया। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.51 फीसदी गिरकर 4,393 डॉलर प्रति औंस था। चांदी 1.41 फीसदी गिरकर 64.82 डॉलर प्रति औंस थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट की वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है।

क्रूड ऑयल में उछाल का असर सोने पर पड़ा है

मिरै एसेट शेयरखान में कमोडिटीज के हेचड प्रवीण सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम 17 अगस्त को खत्म हो गया। इसके बाद क्रूड में तेजी आई है। 18 अगस्त को एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल पार कर गया था।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल का भी बुलियन पर असर

कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की एवीबी कायनात चेनवाला ने कहा कि स्पॉट सिल्वर 65 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है। इसकी वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल है। उन्होंने कहा कि चांदी में मुनाफावसूली का भी कुछ असर इसकी कीमतों पर पड़ा है। इससे पहले बुलियन में अच्छी तेजी दिखी थी।

बुलियन के लिए फिलहाल स्थितियां अनुकूल 

चेनवाला ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में नरमी के बावजूद बुलियन के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद कम हुई है। चीन सहित दुनिया के दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं। साथ ही इनवेस्टर्स की डिमांड भी स्ट्रॉन्ग बनी हुई है।

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क्रूड में तेजी जारी रहने पर बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान में से कोई झुकने को तैयार नहीं है। मध्यपूर्व में तनाव घटने की जगह बढ़ता दिखता रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की सप्लाई पर पड़ रहा है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द नहीं खुलता है तो सप्लाई कम होने से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी, जिसे काबू में करने के लिए फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर होगा। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।

बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

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व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

दिल्ली की इन 3 सरकारी कॉलोनियों में टूटेंगे पुराने फ्लैट्स, PWD बनाने जा रहा है चमचमाती बहुमंजिला इमारतें, जानिए पूरा प्लान

Plans to redevelop three colonies in Delhi: दिल्ली सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी कॉलोनियों को फिर से रीडेवलप कर वहां अधिकारियों के लिए शानदार बहुमंजिला इमारतें (हाई-राइज टावर्स) बनाने की बड़ी योजना का ऐलान किया है। यह पुनर्विकास परियोजना गुलाबी बाग, बहापुर और कल्याणवास इलाकों में लागू की जाएगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार इन क्षेत्रों में मौजूद पुराने और जर्जर हो चुके फ्लैटों को ढहाकर उनकी जगह मॉर्डन बहुमंजिला फ्लैट्स बनाने जा रही है।

इसे दिल्ली सरकार की ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत बनाया जाएगा। इस नीति के तहत रेल और मेट्रो लाइनों के आसपास हाई डेंसिटी वाले कॉरिडोर डेवलप किए जाएंगे। इससे आवासीय इलाकों के ठीक पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी हासिल की जा सकेगी।

पुराने और खस्ताहाल फ्लैट्स की जगह बनेंगे हाई-राइज टावर्स

लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को नए और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस घर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में अभी फ्लैट्स की स्थिति बेहद खराब है। योजना के तहत इन सभी जगहों पर सिर्फ हाई-राइज टावर्स ही बनाए जाएंगे। इसके लिए बहुत जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इसे सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। ये केंद्र सरकार की जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) योजना जैसी होगी।

कॉमर्शियल इस्तेमाल से निकलेगा खर्च, नए सचिवालय के लिए भी जुटेगा फंड

सरकार ने इस पुनर्विकास परियोजना का खर्च निकालने के लिए भी एक विशेष रणनीति बनाई है। यहां बनने वाले फ्लैट्स का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा कमर्शियल उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे जो रेवेन्यू मिलेगा उससे न सिर्फ रीडेवलपमेंट का कॉस्ट निकलेगा बल्कि इस कमाई का इस्तेमाल आईटीओ पर बनने वाले दिल्ली सरकार के नए सचिवालय कॉन्प्लेक्स पर भी किया जाएगा।

गुलाबी बाग, कल्याणवास और बहापुर का ऐसा है मास्टर प्लान

सरकार ने इस परियोजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन कर लिया है। कल्याणवास में 32 एकड़ जमीन और गुलाबी बाग में लगभग 70 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। यहां टाइप II, टाइप III और टाइप IV कैटिगरी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

दक्षिण दिल्ली के बहापुर इलाके में सबसे पहले हाई राइज बनेगा। यहां नए आवासों की जरूरत तत्काल है। बहापुर आवासीय परिसर परियोजना पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

PSUs और केंद्र सरकार को भी दिए जा सकेंगे फ्लैट्स

बहापुर परियोजना का डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यहां अधिकारियों के लिए लगभग 160 टाइप V और टाइप VI श्रेणी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे। गुलाबी बाग और कल्याणवास के अन्य दो क्षेत्रों में बनने वाले फ्लैटों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की कंपनियों और केंद्र सरकार को आमंत्रित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर वे अपने कर्मचारियों के लिए इन फ्लैटों को ले सकें।

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