Tata Sons: नोएल टाटा जल्द कर सकते हैं RBI अधिकारियों से मुलाकात, टाटा संस की लिस्टिंग पर हो सकता है अंतिम फैसला

Noel Tata RBI Meeting: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस महीने के अंत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा टाटा संस को अनलिस्टेड कंपनी के रूप में बनाए रखने और लिस्टिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं को खत्म करना है।

एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में चेयरमैन पद छोड़ने के ऐलान के बाद, अब नोएल टाटा खुद रेगुलेटरी के साथ बातचीत की कमान संभालने जा रहे हैं।

वार्ता की कमान अब नोएल टाटा के हाथों में

अब तक टाटा संस के अधिकारी और कुछ बोर्ड मेंबर्स आरबीआई के साथ लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे। लेकिन अब नोएल टाटा बोर्ड मेंबर और बहुसंख्यक शेयरधारक के प्रतिनिधि के रूप में सीधे आरबीआई से बात करेंगे। नोएल टाटा मई 2025 में ही आरबीआई को पत्र लिखकर टाटा संस को अनलिस्टेड रखने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। अब वे पिछले तीन साल से चले आ रहे इस मुद्दे का स्थाई समाधान चाहते हैं।

NBFC-CIC डी-रजिस्ट्रेशन और लिस्टिंग का पूरा गणित

साल 2022 में रिजर्व बैंक ने टाटा संस को ‘Upper Layer NBFC’ के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए 3 साल के भीतर (सितंबर 2025 तक) शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। हालांकि, टाटा संस ने लिस्टिंग से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं:

कर्ज मुक्त हुई कंपनी: टाटा संस ने बैंकिंग सेक्टर से लिया गया अपना पूरा बाहरी कर्ज चुका दिया है।

आरबीआई को आश्वासन: कंपनी ने गारंटी दी है कि वह समूह की अन्य कंपनियों को लोन देने के लिए कोई नया कर्ज नहीं लेगी और न ही फीस लेकर कोई कॉर्पोरेट गारंटी देगी।

NBFC दर्जा रद्द करने की अर्जी: टाटा संस ने दिसंबर 2024 में आरबीआई को आवेदन सौंपकर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (NBFC-CIC) का दर्जा रद्द करने की मांग की थी। यदि आरबीआई इस अर्जी को स्वीकार कर लेता है, तो टाटा संस पर अनिवार्य IPO/लिस्टिंग की शर्त अपने आप खत्म हो जाएगी।

SP ग्रुप की हिस्सेदारी का मुद्दा भी आ सकता है सामने

शापूरजी पालोनजी (SP Group) की टाटा संस में लगभग 18% हिस्सेदारी है। 31 मार्च 2026 तक एसपी ग्रुप पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था। अपने कर्ज से राहत पाने के लिए एसपी ग्रुप टाटा संस के आईपीओ या शेयर बाय-बैक के जरिए लिक्विडिटी हासिल करने की कोशिश में है। अगर बैठक के दौरान आरबीआई इस विषय को उठाता है, तो एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी से बाहर निकलने की योजना पर भी चर्चा की जा सकती है।

आरबीआई की यह शर्त रही है कि टाटा संस को अनलिस्टेड रखने के लिए टाटा ग्रुप के भीतर पूर्ण सहमति होनी चाहिए। नए नेतृत्व के गठन और एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बीच नोएल टाटा की यह बैठक टाटा संस के भविष्य के कॉर्पोरेट ढांचे के लिहाज से सबसे निर्णायक मानी जा रही है।

Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आया बड़ा उछाल! कमजोर डॉलर और US Fed के फैसले से रॉकेट बने दाम, देखें नया भाव!

Gold Price Today: कमजोर डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटने से सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 0.5% चढ़कर 4,398.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर 4,455.50 डॉलर प्रति औंस हो गया।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% गिरावट आई। इससे दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन का कहना है कि अमेरिका में महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता खर्च के नरम आंकड़ों से फेड की अगली बड़ी चाल अब ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कटौती की तरफ झुकती दिख रही है।

सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीद घटी

हाल में आए कमजोर पेरोल डेटा और नियंत्रित महंगाई के बाद बाजार की धारणा बदली है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब 31% रह गई है। एक महीने पहले यह 51% थी।

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर हैं। इससे अगले महंगाई आंकड़ों पर कुछ दबाव बना रह सकता है।

इस हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?

LKP Securities में VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, COMEX पर सोना 4,395 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके लिए 4,410-4,415 डॉलर का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है। 4,375 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं MCX Gold में ₹1,54,750 का स्तर अहम सपोर्ट और ₹1,55,500 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

दूसरे कीमती धातुओं का हाल

दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी दिखी। चांदी 1.5% बढ़कर 65.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। प्लैटिनम 0.7% चढ़कर 1,759.72 डॉलर और पैलेडियम 1.6% बढ़कर 1,333.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

निवेशक अब बुधवार को आने वाली फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

भारत के बैंकिंग सेक्टर में होगा बड़ा बदलाव! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिए हाई-पावर्ड कमेटी के संकेत, जानिए क्या है पूरा प्लान

High-Powered Committee on Banking: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र आने वाले समय में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 17 अगस्त को घोषणा की कि केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकिंग सेक्टर पर एक ‘हाई-पावर्ड कमेटी’ गठित करने की तैयारी में है।

दो दिवसीय ‘पीएसबी मंथन/संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और विचार इस उच्च स्तरीय समिति के लिए मुख्य आधार तैयार करेंगे। आइए जानते हैं कि भारतीय बैंकों के लिए क्या है सरकार का नया रोडमैप और बीते 10 सालों में बैंकिंग क्षेत्र की कितनी तस्वीर बदली है।

विकसित भारत का विजन: क्या करेगी यह हाई-पावर्ड कमेटी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कमेटी इस बात का गहन अध्ययन और आकलन करेगी कि ‘विकसित भारत’ के सफर में देश को किस दिशा में आगे बढ़ना है और इसमें बैंकिंग सेक्टर की क्या भूमिका होगी।

सम्मेलन में हो रही चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक, स्पष्ट और अमल में लाने योग्य विचार तैयार करना है, जिन्हें बैंकिंग क्षेत्र लागू कर सके। वित्त मंत्री के अनुसार, यह सुधार सही समय पर हो रहे हैं क्योंकि भारतीय बैंक आज अब तक की सबसे मजबूत वित्तीय स्थिति में खड़े हैं। दो दिवसीय सम्मेलन में बैंकिंग जगत के दिग्गज 7 प्रमुख विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, जो भविष्य के रोडमैप का आधार बनेंगे।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर NPA: ऐतिहासिक मजबूती में भारतीय बैंक

बैंकिंग क्षेत्र में इस नए सुधार पैकेज का सबसे मजबूत पहलू यह है कि बैंक अब अपने सबसे कम एनपीए (NPA) के स्तर पर हैं, जिससे उनकी कर्ज देने की क्षमता काफी बढ़ गई है। वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के सचिव संजय लोहिया ने बताया कि पिछले एक दशक में भारतीय बैंकों के पैमाने, स्थिरता और पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

मजबूत बैलेंस शीट के दम पर अब सरकारी बैंक (PSBs) देश की आर्थिक वृद्धि, कृषि सेक्टर, MSMEs और समाज के वंचित वर्गों को वित्तीय सहायता देने में कहीं ज्यादा सक्षम हैं।

10 साल में कितना बदला बैंकिंग सेक्टर? आंकड़े दे रहे गवाही

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2015 से मार्च 2026 के बीच भारतीय बैंकों के प्रदर्शन में जबरदस्त उछाल देखा गया है:

कुल कारोबार: मार्च 2015 के ₹128 लाख करोड़ से दोगुना से भी अधिक बढ़कर मार्च 2026 में करीब ₹283 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

जमा राशि: बैंकों में जमा राशि ₹72 लाख करोड़ से बढ़कर ₹156 लाख करोड़ हो गई।

कुल लोन: बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज ₹36 लाख करोड़ से बढ़कर ₹127 लाख करोड़ हो गया।

नेट प्रॉफिट: बैंकों का शुद्ध मुनाफा 4 गुना से अधिक बढ़ा है। FY15 के ₹45,000 करोड़ के मुकाबले FY26 में बैंकों ने ₹1.9 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया।

ग्रॉस एनपीए में भारी गिरावट: मार्च 2018 में ग्रॉस NPA 14.6% के शिखर पर था, जो मार्च 2026 में घटकर महज 1.93% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। वहीं नेट NPA भी 8% से घटकर 2.39% रह गया है।

आगे का लक्ष्य: गुणवत्तापूर्ण ग्रोथ और ग्राहकों की नई जरूरतें

वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया के अनुसार, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) की अगली प्राथमिकता इस तेजी को बनाए रखना है। बैंक अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का उपयोग करके क्वालिटी बिजनेस ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके अलावा, उभरती हुई नई वित्तीय जरूरतों और बदलते दौर में ग्राहकों की अपेक्षाओं के अनुसार बैंक अपनी सेवाओं में बदलाव करेंगे।

वित्तीय सेक्टर में पिछले एक दशक के ठोस सुधारों के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान बैंकों को 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मुख्य इंजन के रूप में ढालने पर है। जल्द ही गठित होने वाली हाई-पावर्ड कमेटी का रोडमैप आने वाले सालों में भारतीय बैंकिंग प्रणाली की नई दिशा तय करेगा।

HDFC Bank का शेयर कई साल के निचले स्तर पर, लेकिन लोन पर ट्रेडर्स का रिकॉर्ड निवेश

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं। जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद इसके शेयरों की हालिया तेजी पूरी गायब हो चुकी है। हालांकि दूसरी तरफ इस शेयर में लेवरेज लेकर किए जा रहे निवेश लगातार बढ़ रहे हैं। 13 अगस्त 2026 एनएसई के मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़ों के अनुसार एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन ₹3,000 करोड़ के पार पहुंच गई थी। एमटीएफ बुक में इतनी बड़ी एक्सपोजर वाला यह एकमात्र शेयर बन गया है।

13 अगस्त को इस पर लेवरेज्ड बेट ₹3,212 करोड़ पर पहुंच गया जबकि 31 जुलाई 2026 को यह ₹2,360 करोड़ पर था यानी कि कुछ ही दिनों में इस पर दांव 36% बढ़ गया। जून के आखिरी में यह आंकड़ा ₹1,790 करोड़ था यानी जून के आखिरी से अगस्त के मध्य तक एचडीएफसी बैंक में लेवरेज्ड पोजीशन लगभग 80% बढ़ गई।

क्या है Margin Trading Facility (MTF)?

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी एक ऐसा तरीका है जिसमें ट्रेडर्स कुल कीमत का एक छोटा हिस्सा देकर शेयरों की डिलीवरी ले सकते हैं। बाकी पैसे ब्रोकर लोन के तौर पर देता है और शेयरों को गिरवी रखकर रोजाना के आधार पर ब्याज वसूलता है। जब स्टॉक की कीमत बढ़ती है, तो कम निवेश लागत के कारण मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है, लेकिन स्टॉक की कीमत गिरने पर नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है और ब्याज का खर्च और भी दबाव डालता है। हालांकि अगर स्टॉक की कीमत तेजी से गिरती है और ट्रेडर अतिरिक्त फंड नहीं डाल पाता है, तो ब्रोकर को स्टॉक बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

कैसी है एचडीएफसी बैंक के शेयरों की स्थिति

एचडीएफसी बैंक के शेयरों के लिए यह साल 2026 शेयरों की तेजी को लेकर अब तक के सबसे खराब वर्षों में से एक रहा है। इस साल इसमें अब तक 25% की गिरावट आ चुकी है। पिछले कम से कम 10 वर्षों से लगातार इस स्टॉक ने सालाना पॉजिटिव रिटर्न दिया है। अभी इसके शेयरों पर जून तिमाही के कमजोर नतीजों ने दबाव बनाया है। जून तिमाही में बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जिससे पिछले साल से चली आ रही लोन और डिपॉजिट में मजबूत बढ़ोतरी का असर खत्म हो गया। हालांकि एसेट क्वालिटी अपनी कैटेगरी में सबसे अच्छी बनी रही।

एचडीएफसी बैंक का परफॉरमेंस इतना खराब रहा है कि मार्केट कैप के मामले में आईसीआईसीआई बैंक ने तेजी से उसकी बराबरी कर ली है। जहां एक तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयर कई वर्षों के निचले स्तर पर हैं, तो आईसीआईसीआई बैंक के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं। मार्केट कैप के मामले में दोनों के बीच का अंतर अब दस साल में सबसे कम है। एचडीएफसी बैंक फिलहाल बीएसई पर 0.28% की गिरावट के साथ ₹725.30 पर है तो आईसीआईसीआई बैंक 0.05% की बढ़त के साथ ₹1418.65 पर। एचडीएफसी बैंक का एक साल का हाई ₹1020.35 और आईसीआईसीआई बैंक का 1,479.90 है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dividend Stocks: RVNL और HUDCO समेत 4 सरकारी कंपनियां दे रहीं डिविडेंड का तोहफा, जानिए रिकॉर्ड डेट समेत पूरी डिटेल

Dividend Stocks: अगले हफ्ते डिविडेंड पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। HUDCO, NBCC, RVNL और Mazagon Dock Shipbuilders समेत चार सरकारी कंपनियां 17 से 20 अगस्त के बीच एक्स-डिविडेंड होने जा रही हैं। इन चारों कंपनियों ने जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे भी जारी किए हैं। कहीं मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी हुई है तो कहीं रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

HUDCO

सरकारी हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी HUDCO 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है।

इस सरकारी कंपनी का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 35% बढ़कर ₹851 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 26.6% बढ़कर ₹3,717 करोड़ पहुंच गया। बेहतर लोन ग्रोथ और मजबूत एसेट क्वालिटी ने कंपनी के नतीजों को सहारा दिया।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) भी 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ₹0.15 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड दे रही है।

NBCC का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 17.2% बढ़कर ₹154.83 करोड़ रहा। हालांकि, रेवेन्यू 5.6% घटकर ₹2,259.53 करोड़ पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मजबूत ऑर्डर बुक आगे के कारोबार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL 18 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹0.71 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

इस सरकारी कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 18.5% बढ़कर ₹159 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 10.6% बढ़कर ₹4,321 करोड़ पहुंच गया। EBITDA में भी मजबूत बढ़त दर्ज हुई, जिससे ऑपरेटिंग प्रदर्शन बेहतर रहा।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी डिफेंस शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders 20 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹4.62 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड देगी।

जून तिमाही में मझगांव डॉक का नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.41 करोड़ रहा। वहीं, रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,942.70 करोड़ हो गया। EBITDA में करीब 48% की बढ़त और बेहतर मार्जिन ने तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाया।

एक नजर में पूरी लिस्ट

कंपनीडिविडेंडEx-Date
HUDCO₹1.5017 अगस्त
NBCC₹0.1517 अगस्त
RVNL₹0.7118 अगस्त
Mazagon Dock₹4.6220 अगस्त

डिविडेंड पाने के लिए क्या करना होगा?

डिविडेंड का फायदा लेने के लिए निवेशकों के पास Ex-Date से पहले संबंधित कंपनी के शेयर डीमैट खाते में होने चाहिए। भारत में T+1 सेटलमेंट नियम लागू है, इसलिए एक्स-डेट वाले दिन शेयर खरीदने पर डिविडेंड का लाभ नहीं मिलेगा। आपको एक दिन पहले ही शेयर खरीदना होगा।

Dividend Stock: हर शेयर पर ₹45 का डिविडेंड, 27 अगस्त रिकॉर्ड डेट; कीमत 6 महीनों में 20% चढ़ी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: ₹100 की SIP से कितने समय में ₹1 लाख बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

SIP Calculator: आज 100 रुपये में शायद परिवार के लिए पूरी सब्जी लाना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए अगर कोई कहे कि सिर्फ ₹100 महीने बचाकर 1 लाख रुपये बनाए जा सकते हैं, तो पहली बार में यकीन करना मुश्किल लगता है।

लेकिन SIP की खासियत ही यही है। यहां सिर्फ आपका पैसा काम नहीं करता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितने लंबे समय तक निवेश चलता है, कंपाउंडिंग उतना बड़ा असर दिखाती है। यही वजह है कि छोटी रकम भी धीरे-धीरे बड़ा फंड बन सकती है।

पहले सीधा जवाब जान लीजिए

अगर आप हर महीने ₹100 की SIP करते हैं, तो 1 लाख रुपये तक पहुंचने में अनुमानित समय कुछ ऐसा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
1 लाख बनने में अनुमानित समय

10%22 साल 5 महीने
12%20 साल
15%17 साल 5 महीने

नोट: यह अनुमान नियमित मासिक SIP और पूरे समय एक समान रिटर्न मानकर किया गया है। असली रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

10% रिटर्न मिले तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में ₹100 की SIP शुरू की। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 1 लाख रुपये बनने में करीब 22 साल 5 महीने लग सकते हैं।

इस दौरान आपका कुल निवेश सिर्फ करीब ₹26,900 होगा। यानी 1 लाख के फंड में करीब ₹73,100 सिर्फ कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यही वजह है कि शुरुआती सालों में लगातार निवेश करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

12% रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है

अब यही उदाहरण 12% रिटर्न के साथ देखिए। यहां लक्ष्य करीब 20 साल में पूरा हो सकता है।

इस दौरान कुल निवेश लगभग ₹24,100 रहेगा। बाकी करीब ₹75,900 रिटर्न से बन सकते हैं। सिर्फ 2% ज्यादा रिटर्न मिलने से करीब ढाई साल का समय बच जाता है।

15% रिटर्न मिले तो?

अगर लंबे समय में औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो यही 1 लाख रुपये करीब 17 साल 5 महीने में बन सकते हैं।

यहां कुल निवेश सिर्फ करीब ₹20,900 रहेगा। बाकी लगभग ₹79,100 कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यानी जितना समय बढ़ता है, उतना ही रिटर्न का असर भी तेज होता जाता है।

तीनों स्थितियों का पूरा हिसाब

रिटर्नसमयकुल निवेश
संभावित बढ़ी हुई रकम

10%22 साल 5 महीने₹26,900₹73,100
12%20 साल₹24,100₹75,900
15%17 साल 5 महीने₹20,900₹79,100

अगर SIP बढ़ा दें तो खेल बदल जाता है

यहीं सबसे दिलचस्प बात है। 100 रुपये की SIP से 1 लाख बन सकते हैं, लेकिन अगर आमदनी बढ़ने के साथ SIP भी थोड़ी बढ़ा दें, तो मंजिल कहीं पहले मिल सकती है।

12% अनुमानित रिटर्न पर अगर SIP बढ़ाकर ₹500 कर दें, तो 1 लाख बनने में करीब 9 साल लग सकते हैं। वहीं ₹1,000 की SIP में यही लक्ष्य करीब 5 साल 9 महीने में पूरा हो सकता है।

असली सीख क्या है?

100 रुपये की SIP आपको रातों-रात अमीर नहीं बनाएगी। लेकिन यह एक अच्छी निवेश आदत जरूर बना सकती है। अगर छोटी रकम से शुरुआत करके हर साल SIP थोड़ी-थोड़ी बढ़ाते रहें, तो वही कंपाउंडिंग आगे चलकर आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

How to read Company Result: मुनाफा बढ़ना रिजल्ट अच्छा होने की गारंटी नहीं, शेयर खरीदने से पहले ये बातें भी करें चेक

How to read Company Result: किसी कंपनी या बैंक के शेयरों की चाल पर कई बातों का फर्क पड़ता है जैसे कि उनके प्रोडक्ट की डिमांड कैसी है, वैश्विक मार्केट का हाल कैसा है, कच्चे तेल की धार कितनी तेज है या मौद्रिक नीतियां कैसी हैं इत्यादि। इसके अलावा वैल्यूएशन कैसा है, क्योंकि अच्छी कंपनी भी बहुत महंगे भाव पर खराब निवेश बन सकती है। इन सबके अलावा एक और अहम बात कंपनी के तिमाही रिजल्ट का ऐलान है। कंपनी जब कारोबारी नतीजे पेश करती है तो इसके शेयरों पर इसका पॉजिटिव या निगेटिव असर दिखता है।

कई बार ऐसा होता है कि कंपनी का मुनाफा रॉकेट की स्पीड से बढ़ा लेकिन शेयर फुस्स तो दूसरी तरफ कंपनी घाटे में रहती है लेकिन शेयर तूफानी स्पीड से ऊपर चढ़ते हैं। इससे समझ सकते हैं कि शेयरों की चाल सिर्फ मुनाफे से नहीं तय होती बल्कि कई और बातों का भी इसमें रोल होता है। यहां कंपनियों और बैंकों के रिजल्ट में क्या देखें, इसके बारे में बताया जा रहा है।

कंपनी के रिजल्ट में क्या देखें

कंपनी की सेल्स/रेवेन्यू कितनी बढ़ी या घटी। इसे सिर्फ सालाना नहीं बल्कि तिमाही आधार पर भी देखना चाहिए। हालांकि ध्यान दें कि बिक्री बढ़ रही है लेकिन मुनाफा नहीं तो इसकी वजह क्या है, इसे समझना जरूरी है।

मुनाफे की बात करें तो टैक्स काटकर यानी शुद्ध मुनाफा तिमाही और सालाना आधार पर कितना बढ़ा या घटा। मुनाफा लगातार बढ़ रहा है या सिर्फ एक तिमाही। इन सब बातों पर गौर करें। अगर कंपनी के मुनाफे में रेवेन्यू के हिसाब से बहुत अधिक उछाल है तो इसमें एक्सेप्श्नल गेन या टैक्स बेनेफिट की कितनी भूमिका है, यह देखना जरूरी है। अगर कंपनी घाटे में है तो इसकी वजह क्या है, कहीं एक्सेप्शनल लॉस तो नहीं। ये सब चेक करना जरूरी है।

ऑपरेटिंग लेवल पर ईबीआईटीडीए और मार्जिन की क्या स्थिति है, यह बहुत अहम है क्योंकि यह बताता है कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार से कितना अच्छा कमा रही है।

कैश फ्लो भी चेक करना चाहिए। मान लीजिए कि कंपनी ने ₹100 करोड़ मुनाफा कमाया, लेकिन कारोबार से सिर्फ ₹30 करोड़ नकद आया तो सवाल उठता है कि बाकी मुनाफा वास्तव में नकदी में क्यों नहीं बदला।

कंपनी का कर्ज कितना घटा या बढ़ा, इसे चेक कर लें और इस पर ब्याज का खर्च कितना है। कर्ज लगातार बढ़ रहा हो और कैश फ्लो कमजोर हो रहा हो तो इसे अलर्ट सिग्नल समझें।

एक और अहम फैक्टर RoCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड) और RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) देखना है जिससे पता चलता है कि कंपनी अपने लगाए हुए पैसे से कितना अच्छा रिटर्न कमा रही है। सिर्फ कंपनी का मुनाफा देखना पर्याप्त नहीं है।

इन सबके अलावा मैनेजमेंट कमेंटरी को ध्यान से पढ़ें क्योंकि आगे बिक्री, मार्जिन, डिमांड की स्थिति, नए निवेश या कैपिटल एक्सपेंडिचर और बडे़ रिस्क का संकेत मिलता है।

बैंक के नतीजे पढ़ने का तरीका

कंपनी के विपरीत बैंक के रिजल्ट में रेवेन्यू और ईबीआईटीडीए की भूमिका नहीं होती है। इसकी बजाय लोन ग्रोथ देखें कि बैंक ने कितना नया कर्ज दिया और सिर्फ यही नहीं, इसकी क्वालिटी भी देखनी होगी।

बैंक के पास जमा पैसा कितनी तेजी से बढ़ रहा है, यह भी अहम है। डिपॉजिट की ग्रोथ और लोन की ग्रोथ में तुलना करनी होगी। इसमें सीएएसए (करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट) भी देखना होता है क्योंकि ये बैंक के लिए कम लागत में लोन के लिए पैसों का इंतजाम हैं।

नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) से यह पता चलता है कि बैंक अपने दिए हुए कर्ज और जुटाए हुए पैसे के बीच कितना ब्याज मार्जिन कमा रहा है। इसका बढ़ना आमतौर पर अच्छा माना जाता है और लगातार गिरना चिंता की विषय है।

बैंक के नतीजे में एक अहम बात है एसेट क्वालिटी चेक करना। इसके तहत ग्रास एनपीए, नेट एनपीए, नए खराब लोन यानी स्लिपेज, क्रेडिट कॉस्ट और प्रोविजनिंग को देखना है। अगर एनपीए कम हो रहा है और नए खराब लोन भी नियंत्रण में हैं, तो बैंक की एसेट क्वालिटी अच्छी मानी जाती है।

बैंक के प्रोविजनिंग की क्या स्थिति है यानी खराब कर्ज के लिए बैंक को कितना पैसा अलग रखना पड़ रहा है और इसकी ग्रोथ क्या है।

RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) और RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) यानी बैंक अपने एसेट्स और शेयरहोल्डर्स के पैसे पर कितना रिटर्न कमा रहा है।

एक और अहम प्वाइंट कैपिटल एडेकेसी/सीईटी1 है जिससे पता चलता है कि बैंक के पास भविष्य में बढ़ने और नुकसान झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी है या नहीं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI का लोन प्राइसिंग प्रपोजल: कर्ज लेने वालों पर इसका क्या हो सकता है असर?

RBI loan pricing proposal: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन प्राइसिंग के लिए एक नया फ़्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका मकसद छोटे लोन के लिए फ़्लोटिंग इंटरेस्ट रेट, स्प्रेड और कुल लागत में बदलाव को उधार लेने वालों के लिए ज़्यादा पारदर्शी बनाना है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (लोन और एडवांस पर इंटरेस्ट रेट) निर्देश, 2026 का ड्राफ़्ट कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों, ऑल-इंडिया फ़ाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) – जिनमें हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनियां भी शामिल हैं उनपर लागू होगा। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल, 2027 से लागू होने वाले हैं।

यहां वे मुख्य प्रस्ताव दिए गए हैं जिनके बारे में कर्ज लेने वालों को पता होना चाहिए।

फ़्लोटिंग लोन रेट के लिए साफ रीसेट फ़्रेमवर्क

प्रस्तावित फ़्रेमवर्क के तहत, लेंडर को फ़िक्स्ड और फ़्लोटिंग-रेट लोन की कीमत तय करने के लिए इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क के साथ रिस्क-बेस्ड स्प्रेड का इस्तेमाल करना होगा। बेंचमार्क, रीसेट फ़्रीक्वेंसी और रीसेट की तारीख लोन एग्रीमेंट में बताई जानी चाहिए।

फ़्लोटिंग-रेट लोन के लिए, बेंचमार्क रीसेट की अवधि तीन महीने से ज़्यादा नहीं हो सकती। हालांकि, यह जरूरत कुछ छोटी रेगुलेटेड संस्थाओं(जिनमें बेस लेयर की NBFCs शामिल हैं) के लिए अनिवार्य नहीं होगी।

इजी होम फाइनेंस के चीफ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर विकास कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रस्तावित फ़्रेमवर्क से फ़्लोटिंग-रेट पर लोन लेना ज़्यादा अनुमान लगाने लायक हो सकता है। मिश्रा ने कहा, “हर फ़्लोटिंग रेट को ज़्यादा से ज़्यादा तीन महीने के रीसेट साइकल वाले साफ़ बेंचमार्क से जोड़ने से उन उधार लेने वालों के लिए ज़रूरी अनुमान लगाने की सुविधा मिलती है जिन्होंने पहले असमान ट्रांसमिशन देखा है।”

कर्ज लेने वालों के लिए, इसका मतलब यह नहीं है कि EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। फ़्लोटिंग-रेट लोन तब भी महंगा हो सकता है जब बेस बेंचमार्क बढ़ता है। इसके बजाय, प्रस्तावित नियमों का मकसद बेंचमार्क और रीसेट मैकेनिज़्म को ज़्यादा साफ़ बनाना है।

लेंडर के लिए लोन स्प्रेड बदलने पर सीमाएं

RBI ने इस बात पर पाबंदियां प्रस्तावित की हैं कि लेंडर बेंचमार्क पर लिए जाने वाले स्प्रेड में कैसे बदलाव कर सकते हैं।

स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिज़नेस स्ट्रैटेजी से जुड़ी बातें शामिल हो सकती हैं। क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में तब बदलाव किया जा सकता है जब उधार लेने वाले का क्रेडिट प्रोफाइ बदलता है, बशर्ते उसकी समीक्षा की जाए। हालांकि, फ़्लोटिंग-रेट लोन पर स्प्रेड के अन्य हिस्सों में तीन साल तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। तीन साल की अवधि की गिनती पहली बार लोन की रकम मिलने या पिछली बार स्प्रेड में बदलाव होने (जो भी बाद में हुआ हो)से की जाएगी। मिश्रा ने कहा कि ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स में तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता से कर्जदाता के लिए EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो सकता है।

उन्होंने कहा, “लोन स्प्रेड पर तीन साल की प्रस्तावित स्थिरता एक अहम बदलाव है।” “लोन मिलने या उसमें बदलाव के बाद ज़्यादातर स्प्रेड कंपोनेंट्स को तीन साल के लिए फिक्स करने से अनिश्चितता कम होनी चाहिए और EMI में होने वाले बदलावों को समझना आसान हो जाना चाहिए।”

JSA एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर सिद्धार्थ मनचंदा ने भी ‘स्प्रेड’ से जुड़े प्रावधान को ड्राफ्ट के अहम हिस्सों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि तीन साल की अवधि के दौरान स्प्रेड के नॉन-क्रेडिट-रिस्क वाले हिस्से को बढ़ाने की इजाज़त नहीं होगी, जबकि इसमें कटौती बिना किसी भेदभाव के करनी होगी।

₹50,000 तक के लोन के लिए APR की एक तय सीमा (सीलिंग) हो सकती है

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में छोटे लोन (स्मॉल-टिकट बॉरोइंग) के लिए भी एक खास प्रावधान है। RBI चाहता है कि लेंडर माइक्रोफाइनेंस लोन और कम रकम वाले लोन के लिए सालाना ब्याज दर (APR) की एक तय सीमा (सीलिंग) लागू करें। APR में ब्याज दर के साथ-साथ बाकी सभी चार्ज और फीस भी शामिल होंगे। कम रकम वाले लोन का मतलब ₹50,000 तक का पर्सनल लोन है।

इससे लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना आसान हो सकता है, खासकर तब जब फीस और दूसरे चार्ज लागत का एक बड़ा हिस्सा हों। मनचंदा ने कहा कि छोटे लोन के मामले में, बताई गई ब्याज दर (हेडलाइन इंटरेस्ट रेट) से हमेशा उधार लेने वाले की कुल लागत का पता नहीं चलता।

उन्होंने कहा, “उस सेगमेंट में हेडलाइन रेट कभी भी असल बात नहीं होती थी। असल बात फीस का पूरा ढांचा होती थी। सब कुछ एक ही नंबर में समेटना ही वह बदलाव है जिसे असल में महसूस किया जाएगा।”

ब्याज की गणना का तरीका होगा एक जैसा

RBI ने ब्याज की गणना के लिए एक कॉमन तरीका भी सुझाया है। ज़्यादातर लोन के लिए, ब्याज हर महीने के आधार पर लिया जाएगा और इसकी गणना ‘एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन’ का इस्तेमाल करके रोजाना कम होते बैलेंस पर की जाएगी। खेती से जुड़े लोन के लिए कुछ खास छूट होंगी। इस कदम से रेगुलेटेड लेंडर्स (कर्ज़ देने वाली संस्थाओं) के बीच ब्याज की गणना का तरीका एक जैसा हो जाएगा।

मौजूदा लोन 2029 तक नए फ्रेमवर्क में आ जाएंगे

सुझाए गए बदलावों का असर आखिरकार मौजूदा बेंचमार्क-लिंक्ड लोन पर भी पड़ेगा। RBI ने सुझाव दिया है कि इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े सभी मौजूदा लोन को 1 अप्रैल 2029 तक एक बार की मैपिंग प्रक्रिया के ज़रिए नए फ्रेमवर्क में बदल दिया जाए। इस बदलाव के लिए उधार लेने वाले की मंज़ूरी ज़रूरी होगी।

बदली हुई ब्याज दर, बदलाव से ठीक पहले लागू दर से ज़्यादा नहीं हो सकती, और लेंडर्स बदलाव के लिए कोई फ़ीस नहीं ले सकते।

मिश्रा ने कहा कि नए लोन के लिए प्रस्तावित लागू होने की तारीख और मौजूदा लोन के लिए बदलाव की समय-सीमा के बीच दो साल का समय लेंडर्स को अपने सिस्टम और कम्युनिकेशन प्रोसेस को अपडेट करने का मौका देता है। उन्होंने कहा, “समय-सीमा भी महत्वपूर्ण है। नए नियम 1 अप्रैल 2027 से नए लोन पर लागू करने का प्रस्ताव है, जबकि सभी मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन के 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में बदलने की उम्मीद है।”

NBFC लोन अपने-आप रेपो-लिंक्ड नहीं होंगे

ड्राफ़्ट में सभी लेंडर्स के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क का इस्तेमाल करना ज़रूरी नहीं है।

कमर्शियल बैंकों को फ्लोटिंग-रेट पर्सनल लोन और फ्लोटिंग-रेट MSME लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना होगा। NBFC, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, को-ऑपरेटिव बैंकों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए, एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ना वैकल्पिक रहेगा।

इसलिए, NBFC से फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वालों को यह नहीं सोचना चाहिए कि लोन अपने-आप RBI रेपो रेट से जुड़ जाएगा। ड्राफ़्ट अभी फ़ाइनल नहीं है। प्रस्तावित निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होने हैं, बशर्ते RBI फ्रेमवर्क को फ़ाइनल कर ले।

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51 साल पहले भारत ने जीता था हॉकी विश्वकप, 1971 से 2023 तक ऐसा रहा है सफर

भारत को हॉकी विश्वकप जीते हुए 51 साल हो गए हैं। पिछले संस्करण में भारत मेजबान था और आशा थी कि वह इंतजार खत्म होगा लेकिन न्यूजीलैंड की टीम ने पेनल्टी शूटआउट में हराकर भारत को विश्वकप से बाहर कर दिया था। ओलंपिक में भारत ने सबसे ज्यादा मेडल इस खेल में जीते हों लेकिन विश्वकप में संघर्ष करना पड़ा है क्योंकि जब विश्वकप शुरु हुआ तब भारतीय हॉकी का स्तर ढलान पर था और एस्टरो टर्फ के आने के बाद भारतीय टीम कभी खड़ी ही नहीं हो पाई। जान लेते हैं कि भारतीय हॉकी टीम का सफर कैसा रहा-  

1971 बार्सीलोना

भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में FIH परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली। पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ।

पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने FIH के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया।ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा। सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2-1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता। भारत ने कीनिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता।

1973 एम्सटर्डम :

एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4-2 से हराकर खिताब जीता ।भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा।सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया। फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2-2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया।

1975 कुआलालम्पुर :

भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से हराया।फाइनल में पाकिस्तान ने बढत बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया। पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी। तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था।

1978 ब्यूनस आयर्स :

गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा। पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7.0 से मिली हार शामिल थी। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3-2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला।

1982 मुंबई :

अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा। पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम पर फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3-1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता। भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे।

1986 लंदन :

इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया। ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा । तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा।

1990 लाहौर :

राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला। भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण FIH ‘फेयरप्ले’ पुरस्कार भारतीय टीम को मिला।नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1994 सिडनी:

जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा। मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही।

2002 कुआलालम्पुर :

पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा। भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा।

2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :

दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2010 दिल्ली :

दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4-1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया। आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

 2014 द हेग :

पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये । आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6-1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 भुवनेश्वर :

हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा। मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

2023 भुवनेश्वर और राउरकेला:

लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा। क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

Delhi Traffic Advisory 15 August: 15 अगस्त को लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद, निकलने से पहले देखें पूरी एडवाइजरी

Delhi Traffic Advisory 15 August: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। वहीं, समारोह स्थल के आस-पास की कई सड़कें सुबह 4 बजे से 10 बजे तक आम ट्रैफिक के लिए बंद रहेंगी और प्रभावित रास्तों पर सिर्फ खास पहचान वाले वाहनों को ही आने-जाने की इजाजत होगी।

एडवाइजरी में यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते, मालवाहक वाहनों और बसों पर पाबंदियां, और शहर के मुख्य इलाकों की ओर जाने वाली सेवाओं के लिए डायवर्जन की जानकारी भी दी गई है। इसके अलावा, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और ISBT कश्मीरी गेट जाने वाले यात्रियों से अपील की गई है कि वे पहले से अपने सफर का प्लान बना लें और तय किए गए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

बंद रहेंगी ये सड़कें

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 15 अगस्त को सुबह 4 बजे से 10 बजे तक कई प्रमुख सड़कें आम लोगों के लिए बंद रहेंगी। इनमें शामिल हैं:

  • नेताजी सुभाष मार्ग — दिल्ली गेट से चट्टा रेल चौक तक
  • लोथियन रोड — GPO दिल्ली से चट्टा रेल चौक तक
  • एसपी मुखर्जी मार्ग — एचसी सेन मार्ग से यमुना बाजार चौक तक
  • चांदनी चौक रोड — फाउंटेन चौक से लाल किले तक
  • निषाद राज मार्ग — रिंग रोड से नेताजी सुभाष मार्ग तक
  • एस्प्लेनेड रोड और नेताजी सुभाष मार्ग से जुड़ी इसकी लिंक रोड
  • रिंग रोड — राजघाट से ISBT तक

इन रास्तों से भी बचने की सलाह

जिन गाड़ियों पर पार्किंग लेबल नहीं हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे पाबंदी वाले समय के दौरान C-हेक्सागन इंडिया गेट, कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस, सिकंदरा रोड, तिलक मार्ग, मथुरा रोड, BSZ मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, J L नेहरू मार्ग, और निज़ामुद्दीन खट्टा व ISBT कश्मीरी गेट के बीच रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के हिस्सों पर जाने से बचें।

उत्तर-दक्षिण दिशा में जाने के लिए ये रास्ते अपनाएं

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर जाने वाले लोगों के लिए कई वैकल्पिक रास्ते बताए हैं। इनमें अरविंदो मार्ग, सफदरजंग रोड, कमाल अतातुर्क मार्ग, कौटिल्य मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, पार्क स्ट्रीट, मंदिर मार्ग, पंचकुइयां रोड और रानी झांसी रोड शामिल हैं।

इसके अलावा लोग कनॉट प्लेस, मिंटो रोड, भवभूति मार्ग, अजमेरी गेट, श्रद्धानंद मार्ग, लाहौरी गेट चौक, नया बाजार, पीली कोठी और एसपी मुखर्जी मार्ग के रास्ते भी आ-जा सकते हैं।

यमुना पार करने के लिए निजामुद्दीन ब्रिज, पुस्ता रोड, जीटी रोड और युधिष्ठिर सेतु का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूर्व-पश्चिम दिशा में जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते

पूर्व से पश्चिम और पश्चिम से पूर्व जाने वाले लोगों के लिए NH-24/NH-9, निजामुद्दीन खट्टा, बारापुल्ला रोड, DND, रिंग रोड, भैरों रोड और मथुरा रोड समेत अन्य जुड़े हुए रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा विकास मार्ग, आईपी मार्ग, डीडीयू मार्ग और मिंटो रोड भी वैकल्पिक रास्ते के तौर पर उपलब्ध रहेंगे।

DND-NH-24-युधिष्ठिर सेतु-सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद ब्रिज वाला कॉरिडोर भी खुला रहेगा।

हालांकि, ओल्ड आयरन ब्रिज और गीता कॉलोनी ब्रिज से शांति वन की तरफ जाने वाला रास्ता बंद रहेगा।

मालवाहक वाहनों और बसों पर भी रहेगी रोक

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 14 अगस्त की आधी रात से 15 अगस्त की सुबह 11 बजे तक निजामुद्दीन खट्टा और वजीराबाद ब्रिज के बीच माल ढोने वाले वाहनों को चलने की इजाजत नहीं होगी। इस दौरान महाराणा प्रताप ISBT और सराय काले खां ISBT के बीच दूसरे राज्यों से आने-जाने वाली बसों को भी चलने की इजाजत नहीं होगी।

साथ ही, 14 अगस्त की आधी रात से 15 अगस्त की सुबह 11 बजे तक ISBT कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन खट्टा के बीच रिंग रोड पर लोकल सिटी बसें (DTC बसों सहित) नहीं चलेंगी।

इसके अलावा, लोथियन रोड, नेताजी सुभाष मार्ग, एस पी मुखर्जी मार्ग, विकास मार्ग, मथुरा रोड और C-हेक्सागन व सेंट्रल दिल्ली के आस-पास की सड़कों समेत कई सड़कों पर दूसरे शहरों से आने वाली बसों और DTC बसों के लिए पाबंदियां होंगी।

इन रास्तों से डायवर्ट होंगी बसें

गाजियाबाद से दिल्ली आने वाली दूसरे राज्यों की बसें ISBT कश्मीरी गेट में घुसने से पहले भोपुरा चुंगी रोड और वजीराबाद रोड का इस्तेमाल करेंगी। धौला कुआं से आने वाली बसों का रूट रिंग रोड, पंजाबी बाग, आजादपुर और चांदनी राम अखाड़ा की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। वहीं, फरीदाबाद से आने वाली बसें सराय काले खां पर अपनी यात्रा खत्म कर सकती हैं या ISBT कश्मीरी गेट की तरफ जाने के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं। पुलिस ने कहा कि JPN हॉस्पिटल जाने-आने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे आखिरी समय में होने वाली परेशानी से बचने के लिए जल्दी निकलें और कहा है कि जरूरी जगहों पर जानकारी देने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। 15 अगस्त को सुबह 5 बजे से लेकर ट्रैफिक डायवर्जन हटने तक, गोखले मार्ग, घाटा मस्जिद, यमुना बाजार, दिल्ली गेट और छट्टा रेल चौक पर DTC की रिकवरी वैन तैनात रहेंगी। वहीं, आजादी के दिन कार्यक्रम स्थल पर जाने वाले लोगों से यह भी कहा गया है कि वे कैमरा, दूरबीन, रिमोट-कंट्रोल कार की चाबियां, छाता, हैंडबैग, ब्रीफकेस, ट्रांजिस्टर, सिगरेट लाइटर, टिफिन बॉक्स और पानी की बोतलें साथ न लाएं।

कुल मिलाकर, 15 अगस्त को दिल्ली के कई हिस्सों में सड़कें बंद रहेंगी, रूट डायवर्ट किए जाएंगे और बसों की आवाजाही पर भी रोक रहेगी। इसका सबसे ज्यादा असर लाल किले और सेंट्रल दिल्ली के आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा। हालांकि, यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध रहेंगे और सुबह 11 बजे के बाद ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है।

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