Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक 40% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने दांव लगाने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई दिग्गज ब्रोकरेज हाउस चुनिंदा शेयरों को लेकर बुलिश हैं। Morgan Stanley, HSBC, Motilal Oswal, Nuvama और JM Financial ने पांच कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनके मुताबिक, अगले 12 महीनों में ये शेयर करीब 24% से 40% तक का रिटर्न दे सकते हैं। आइए जानते हैं किन शेयरों पर एक्सपर्ट्स सबसे ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।

PNB Housing Finance

हाउसिंग फाइनेंस कंपनी PNB Housing Finance पर Morgan Stanley ने ‘Overweight’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,420 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,143 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 24.2% की रिटर्न संभावित तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज के मुताबिक, मजबूत रिटेल लोन डिस्बर्समेंट और बेहतर लोन ग्रोथ कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

Britannia

FMCG कंपनी Britannia पर Nuvama ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 7,240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 5,508 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 31.4% उछाल की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव प्रमुख जोखिम हैं।

Hindalco Industries

मेटल कंपनी Hindalco Industries पर HSBC ने ‘Buy’ रेटिंग के साथ 1,430 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 1,053.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 35.7% की तेजी का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि एल्यूमिनियम की मजबूत वैश्विक मांग और चीन की उत्पादन सीमा कंपनी के लिए सकारात्मक रहेगी।

Time Technoplast

प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी Time Technoplast पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 280 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 205.50 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 36.3% रिटर्न की संभावना है। ब्रोकरेज का मानना है कि पैकेजिंग और कम्पोजिट सिलेंडर बिजनेस में विस्तार के दम पर लगातार मजबूत रेवेन्यू और मुनाफे की ग्रोथ दर्ज कर सकती है।

Ventive Hospitality

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Ventive Hospitality पर JM Financial ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 840 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा भाव 603.20 रुपये के मुकाबले इसमें करीब 40% की संभावित तेजी बनती है। ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया लागत का दबाव अस्थायी है और लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

बैंक ने अचानक क्यों रिजेक्ट कर दिया लोन? जानिए राजेश की इस एक भूल ने कैसे बिगाड़ा CIBIL का खेल!

Checking Credit Report Benefits: राजेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और सालों से अपनी हर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का बिल बिल्कुल समय पर भरते आए थे। उन्हें पूरा यकीन था कि उनका क्रेडिट स्कोर शानदार होगा। लेकिन जब वे अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन अप्लाई करने बैंक पहुंचे, तो बैंक अफसर ने उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया।

वजह थी उनकी क्रेडिट रिपोर्ट में एक ऐसा लोन ‘एक्टिव’ दिख रहा था, जिसे वे सालों पहले बंद कर चुके थे। साथ ही, एक ऐसे अनजान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज थी, जिसके लिए उन्होंने कभी अप्लाई ही नहीं किया था।

राजेश की तरह ज्यादातर लोग क्रेडिट रिपोर्ट को तभी याद करते हैं जब उन्हें किसी लोन या नए क्रेडिट कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच न करना आपको भारी मुसीबत और वित्तीय नुकसान में डाल सकता है।

साल में कम से कम एक बार जरूर करें ‘फाइनेंशियल चेकअप’

बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उन्होंने कोई ईएमआई मिस नहीं की है, तो रिपोर्ट देखने की क्या जरूरत? लेकिन जैसे हम अपनी सेहत के लिए रूटीन बॉडी चेकअप कराते हैं, वैसे ही साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना बेहद जरूरी है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी लोन हिस्ट्री और पर्सनल डिटेल्स सही तरीके से दर्ज हो रही हैं।

बड़ा लोन लेने से कुछ महीने पहले रिपोर्ट देखना क्यों है जरूरी?

अगर आप आने वाले कुछ महीनों में होम लोन, कार लोन या कोई बड़ा पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से ठीक पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर खंगालें। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी या गलत एंट्री पाई जाती है, तो उसे ठीक कराने में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लगता है। लोन रिजेक्ट होने के बाद दौड़-भाग करने से बेहतर है कि आप पहले ही सतर्क रहें।

क्रेडिट रिपोर्ट में हो सकती हैं मानवीय और तकनीकी गलतियां

क्रेडिट रिपोर्ट पूरी तरह से गलतियों से मुक्त नहीं होती। कई बार बंद किए जा चुके लोन अकाउंट भी सिस्टम में ‘एक्टिव’ दिखाई देते हैं। समय पर चुकाई गई ईएमआई ‘डिलीटेड’ या ‘लेट पेमेंट’ के रूप में दर्ज हो जाती है। नाम या पैन कार्ड की स्पेलिंग मिस्टेक या आइडेंटिफिकेशन एरर की वजह से किसी और का लोन आपके नाम पर लिंक हो जाता है।

अनजान लोन या क्रेडिट कार्ड: कैसे करें फ्रॉड की पहचान

अगर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते समय आपको कोई ऐसा क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट दिखाई दे जिसके लिए आपने कभी अप्लाई ही नहीं किया था, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह आइडेंटिटी थेफ्ट या जालसाजी का संकेत हो सकता है। समय रहते शिकायत करने से आप किसी बड़े फ्रॉड का शिकार होने से बच सकते हैं।

सिर्फ 3 अंकों के क्रेडिट स्कोर पर न अटके रहें

ज्यादातर लोग सिर्फ अपना 3-अंकों का CIBIL/क्रेडिट स्कोर देखकर खुश या दुखी हो जाते हैं। लेकिन बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ स्कोर ही नहीं, बल्कि पूरी रिपोर्ट की बारीकियों को देखते हैं:

  • आपके नाम पर कितने एक्टिव लोन चल रहे हैं?
  • आपने हाल में कितनी बार लोन के लिए इन्क्वायरी की है?
  • आपकी पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री कैसी रही है?

केवल रिपोर्ट देखने से नहीं सुधरेगा स्कोर, करने होंगे ये बदलाव

क्रेडिट रिपोर्ट सिर्फ एक आईना है। सिर्फ रिपोर्ट चेक करने से आपका क्रेडिट स्कोर नहीं बढ़ेगा। स्कोर बढ़ाने और बनाए रखने का असली तरीका आपकी वित्तीय आदतें हैं यानी समय पर ईएमआई भरना, क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल करना और गैर-जरूरी लोन लेने से बचना। नियमित रिपोर्ट चेक करने का काम सिर्फ इतना है कि यह आपकी अच्छी आदतों पर कोई गलत दाग नहीं लगने देती।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kisan Credit Card: किसानों को सस्ता लोन पाना हुआ आसान! जानें KCC के लिए कौन कर सकता है अप्लाई और क्या लगेंगे कागजात

Kisan Credit Card Scheme: भारतीय किसानों को खेती और उससे जुड़ी जरूरतों के लिए समय पर और किफायती ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना बेहद कारगर साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को महाजनों या साहूकारों के भारी-भरकम ब्याज के जाल से बचाना और उन्हें बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है।

शुरुआत में केसीसी का फोकस मुख्य रूप से फसल उगाने के मौसमी खर्चों तक सीमित था, लेकिन अब इसका विस्तार पशुपालन, डेयरी फॉर्मिंग, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों तक कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि इस कार्ड को पाने के लिए कौन-कौन पात्र है, क्या-क्या दस्तावेज चाहिए और इसका आवेदन कैसे होता है।

कौन-कौन ले सकता है किसान क्रेडिट कार्ड?

केसीसी योजना का फायदा उठाने के लिए पात्रता के नियम काफी आसान बनाए गए हैं:

खुद की जमीन वाले किसान: व्यक्तिगत या संयुक्त रूप से खेती करने वाले जमीन के मालिक किसान।

बटाईदार व किरायेदार किसान: पट्टेदार, बटाईदार और किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान।

किसान समूह: स्वयं सहायता समूह (SHGs) या संयुक्त देयता समूह (JLGs)।

संबद्ध क्षेत्रों के किसान: पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, झींगा और मत्स्य पालन से जुड़े किसान।

केसीसी के मुख्य लाभ और ब्याज दर

सस्ता ब्याज दर: केसीसी पर सामान्य ब्याज दर 7% होती है। लेकिन समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को सरकार 3% की अतिरिक्त छूट देती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4% प्रति वर्ष रह जाती है।

बिना गारंटी लोन: बिना किसी जमीन या संपत्ति को गिरवी रखे ₹2 लाख तक का लोन आसानी से मिल जाता है।

रिवाल्विंग क्रेडिट लिमिट: केसीसी एक क्रेडिट कार्ड की तरह काम करता है, जिसमें एक तय क्रेडिट लिमिट मिलती है और किसान जरूरत के हिसाब से पैसे निकाल और जमा कर सकते हैं।

इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत

केसीसी के लिए आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित मूलभूत दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:

  • पहचान पत्र: आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, या ड्राइविंग लाइसेंस।
  • पते का प्रमाण: आधार कार्ड, राशन कार्ड या बिजली का बिल।
  • जमीन के दस्तावेज: जमीन की खतौनी/खसरा/7/12 एक्सट्रैक्ट या पट्टेदारी/किरायेदारी का प्रमाण पत्र।
  • फसल की जानकारी: खेत में बोई जाने वाली फसल और रकबे की स्व-घोषणा।
  • पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदक के 2 पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए कैसे करें अप्लाई?

किसान क्रेडिट कार्ड आप वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों या सहकारी बैंकों के जरिए बनवा सकते हैं:

1. बैंक शाखा के जरिए

अपने नजदीकी बैंक शाखा या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं।

वहां से KCC का आवेदन फॉर्म प्राप्त कर भरें।

फॉर्म के साथ सभी जरूरी आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ और जमीन के कागजात संलग्न कर जमा करें।

बैंक द्वारा आपके दस्तावेजों के सत्यापन और लोन अप्रूवल के बाद आपको केसीसी जारी कर दिया जाएगा।

2. ऑनलाइन प्रक्रिया

स्टेप 1- जिस बैंक में आपका खाता है, उसकी आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल बैंकिंग ऐप पर जाएं।

स्टेप 2- ‘Kisan Credit Card’ सेक्शन में जाकर एप्लीकेशन फॉर्म भरें।

स्टेप 3- मांगे गए दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी अपलोड करें और फॉर्म सबमिट करें।

स्टेप 4- अगर आप PM-Kisan योजना के लाभार्थी हैं, तो आपकी ई-केवाईसी और लैंड डिटेल्स पहले से वेरीफाइड होने के कारण एक पन्ने के आसान फॉर्म के जरिए तुरंत मंजूरी मिल जाती है।

Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF vs PPF: रिटायरमेंट फंड के लिए कौन सा ऑप्शन है नंबर-1? जानिए किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा

EPF vs PPF Retirement Planning: जब भी नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो दो नाम सबसे पहले सामने आते हैं एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)। दोनों ही योजनाएं सरकार द्वारा समर्थित हैं, लंबी अवधि की बचत के लिए हैं और टैक्स छूट का फायदा भी देती हैं। यही वजह है कि इन दोनों में से किसी एक को चुनना काफी उलझन भरा काम लगता है।

हालांकि, वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि यह ‘EPF बनाम PPF’ की जंग नहीं है। दोनों स्कीम्स के अपने अलग-अलग फायदे और उद्देश्य हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एक सैलरीड कर्मचारी को किसे पहले चुनना चाहिए।

EPF: ऑटोमैटिक बचत और एंप्लॉयर का योगदान

अगर आप किसी ऐसी कंपनी या संस्थान में काम करते हैं जो EPF के तहत कवर है, तो आपके वेतन से हर महीने अपने आप ईपीएफ में कटौती होती है। ईपीएफ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जितना योगदान आपकी बेसिक सैलरी से कटता है, उतना ही हिस्सा आपकी कंपनी भी जमा करती है। यह एक ऐसा एक्स्ट्रा फायदा है जो आपको PPF में नहीं मिलता।

बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के आपकी सैलरी से हर महीने पैसे कटकर जमा होते रहते हैं, जिससे करियर के अंत तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इसीलिए ज्यादातर फाइनेंशियल प्लानर्स सुझाव देते हैं कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए EPF को हमेशा पहली प्राथमिकता बनाना चाहिए।

PPF: फ्लेक्सिबिलिटी और अतिरिक्त बचत का जरिया

पीपीएफ किसी कंपनी या नौकरी से बंधा हुआ नहीं होता। इसे कोई भी नागरिक अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर खुलवा सकता है। इसमें आप अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से न्यूनतम और अधिकतम सीमा के दायरे में सालाना निवेश कर सकते हैं।

अगर आप जॉब बदलते हैं या कुछ समय का ब्रेक लेते हैं, तब भी आपका PPF अकाउंट बिना किसी रुकावट के चलता रहता है क्योंकि यह पूरी तरह आपका पर्सनल अकाउंट है। साथ ही आप EPF के अलावा अपनी रिटायरमेंट या किसी अन्य लंबे लक्ष्य के लिए अतिरिक्त बचत करना चाहते हैं, तो पीपीएफ सबसे सुरक्षित विकल्प बनता है।

लिक्विडिटी और निकासी

दोनों ही योजनाएं रोजमर्रा के खर्चों या बार-बार पैसे निकालने के लिए नहीं बनाई गई हैं।

EPF निकासी: ईपीएफ से पैसे निकालने के नियम आपकी नौकरी की स्थिति और विशिष्ट जरूरतों जैसे- घर खरीदना, बीमारी, शादी से जुड़े होते हैं।

PPF लॉक-इन: पीपीएफ का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है, हालांकि कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी और लोन की सुविधा मिलती है।

दोनों में से किसे चुनें?

एक वेतनभोगी कर्मचारी के लिए सही रणनीति यह है कि दोनों को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी मानने के बजाय पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जाए:

ईपीएफ को बनने दें बुनियाद: चूंकि ईपीएफ में कंपनी का भी योगदान मिलता है, इसलिए अपनी नौकरी के दौरान ईपीएफ अंशदान को बिना किसी रुकावट के जारी रहने दें यह आपकी रिटायरमेंट की मुख्य नींव है।

पीपीएफ को बनाएं बैकअप शील्ड: अगर ईपीएफ में कटौती के बाद भी आपके बजट में और बचत की गुंजाइश है, तो अतिरिक्त सरप्लस पैसे को पीपीएफ में निवेश करें। इससे आपका एसेट एलोकेशन मजबूत होगा और पोर्टफोलियो सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

KCC: किसान क्रेडिट कार्ड में किसानों को कैसे मिलता है सस्ता लोन? कौन कर सकता है अप्लाई, जानें पूरा प्रोसेस

भारत में खेती और उससे जुड़ी एक्टिविटीज को आर्थिक मजबूती देने के लिए बैंक और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूतम तमाम स्कीम चलाते हैं। इनमें सबसे अहम और और पॉपुलर स्कीम है किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना। अगस्त 1998 में पब्लिक सेक्टर्स के बैंकों द्वारा शुरू की गई यह योजना किसानों को खेती-किसानी की जरूरतों के लिए समय पर और कम दरों पर क्रेडिट यानी कि लोन उपलब्ध कराती है। शुरुआत में इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ मौसमी फसलों के खर्चों को पूरा करना था, लेकिन समय के साथ इसका दायरा बढ़ाकर डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और मधुमक्खी पालन जैसी एक्टिविटीज तक इसका विस्तार किया गया।

किसान क्रेडिट कार्ड से कैसे मिलता है बेहद सस्ता लोन?

किसान क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी खासियत इस पर मिलने वाली बेहद कम ब्याज दरें और सरकारी छूट हैं। भारत सरकार की संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत बैंकों को KCC पर अधिकतम 3.00 लाख रुपये तक के कुल लोन पर 7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से लोन उपलब्ध कराने के लिए सहायता दी जाती है। जो किसान अपने लोन का भुगतान समय पर करते हैं, उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 3 प्रतिशत की अतिरिक्त ब्याज छूट दी जाती है। इस तरह देखें तो समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से सस्ता लोन मिल जाता है। इस ब्याज छूट का कैलकुलेशन लोन मिलने या पैसे विड्रॉल करने की तारीख से से लेकर लोन चुकाने की असल तारीख या बैंक द्वारा तय की गई तारीख (जो भी पहले हो) तक अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

कौन-कौन कर सकता है अप्लाई?

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ समाज के हर वर्ग के किसान और पशुपालक उठा सकते हैं। योजना के तहत पात्र आवेदकों की श्रेणियां नीचे दी गई हैं-

व्यक्तिगत/संयुक्त भू-स्वामी: ऐसे किसान जो स्वयं की भूमि पर खेती करते हैं।

पट्टेदार व बटाईदार: पट्टेदार किसान , मौखिक पट्टेदार और साझा कृषक या बटाईदार।

समूह और संस्थाएं: किसानों, पट्टेदारों या बटाईदारों के स्वयं सहायता समूह (SHG) या संयुक्त देयता समूह (JLG)।

दूसरी गतिविधियों से जुड़े किसान: पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, मशरूम खेती और अन्य गतिविधियों में लगे व्यक्ति।

सरकार के नियमों के अनुसार, KCC योजना के तहत संशोधित ब्याज सबवेंशन का लाभ उठाने के लिए बैंक खातों को आधार से लिंक करना अनिवार्य है।

KCC लोन की सीमा और उपलब्ध फंड की राशि

KCC के तहत लोन की सीमा किसान की भूमि, फसल के प्रकार और गतिविधियों के आधार पर तय की जाती है। योजना में फंड की सीमा को भी तय किया गया है। फसलों की खेती और कटाई के बाद के खर्चों के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये तक की क्रेडिट सीमा तय की गई है। पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, रेशम पालन, मधुमक्खी पालन आदि के लिए वर्किंग कैपिटल के रूप में अधिकतम 2 लाख रुपये तक की सीमा मिलती है। 1 हेक्टेयर तक की जोत वाले सीमांत किसानों के लिए 10000 रुपये से लेकर 50000 रुपये तक की फ्लेक्सी केसीसी दी जाती है। इसमें जमीन के मूल्य से जोड़े बिना खेती के खर्च, घरेलू जरूरतों और छोटे उपकरणों की खरीद के लिए 5 साल की अवधि के लिए लिमिट तय की जाती है।

क्रेडिट लिमिट और लोन की राशि का आकलन कैसे होता है?

KCC लोन की सीमा 5 वर्षों की अवधि के लिए तय की जाती है और यह एक रिवॉल्विंग क्रेडिट लिमिट के रूप में काम करती है। पहले वर्ष की लोन सीमा का निर्धारण इस फॉर्मूले से होता है:

पहले वर्ष की सीमा = (जिला स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा तय फसल का पैमाना × खेती का क्षेत्रफल) + (कटाई बाद/घरेलू जरूरतों के लिए सीमा का 10%) + (फार्म परिसंपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए सीमा का 20%) + फसल/दुर्घटना बीमा प्रीमियम।

दूसरे से पांचवें साल की सीमा: अगले प्रत्येक वर्ष (2nd, 3rd, 4th और 5th ईयर) के लिए लागत वृद्धि के रूप में सीमा में 10% की बढ़ोतरी की जाती है।

टर्म लोन: भूमि विकास, सिंचाई, कृषि उपकरण खरीदने आदि के लिए 5 साल के समय के लिए टर्म लोन घटक भी इसमें जोड़ा जाता है। 5वें वर्ष की तय अल्पकालिक सीमा और टर्म लोन की कुल राशि मिलाकर कार्ड की मैक्सिमम पर्मिसेबल लिमिट तय होती है।

KCC क्रेडिट की प्रमुख विशेषताएं और इस्तेमाल

किसान क्रेडिट कार्ड योजना सिंगल के तहत किसानों की तमाम जरूरतों को पूरा करती है। अल्पकालिक फसल जरूरतों के तहत इसका फायदा मौसमी फसलों, सब्जियों, फल-फूलों, वृक्षारोपण, मसालों और औषधीय पौधों की खेती के लिए उठाया जा सकता है। उपज की कटाई के बाद के खर्चों और e-NWR (इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद) के एवज में लोन लेने के लिए। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए फसल ऋण के पुनर्गठन पर पहले वर्ष के लिए ब्याज सबवेंशन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

इसके अलावा केसीसी में छोटे और सीमांत किसानों को फसल कटाई के तुरंत बाद मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचने से रोकने के लिए वेयरहाउसिंग अथॉरिटी से पंजीकृत गोदामों में रखी उपज की रसीद पर 6 महीने तक ब्याज सबवेंशन मिलता है।

कहां से मिलेगा KCC और आवेदन की प्रक्रिया

किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने के लिए किसान अलग अलग फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन में आवेदन कर सकते हैं। KCC जारी करने के लिए अधिकृत संस्थानों की बात करें तो इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, ग्रामीण सहकारी बैंक, लघु वित्त बैंक, कंप्यूटरीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियां शामिल हैं।

केसीसी के लिए आवेदन की प्रक्रिया

किसान अपने नजदीकी बैंक शाखा में जाकर या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट/पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज (या पट्टेदारी का प्रमाण) और आधार कार्ड लगाना होता है। बैंक द्वारा एलिजिबिलिटी और डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद KCC जारी कर दिया जाता है।

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Agra : बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा, सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता, वीडियो वायरल

आगरा में हुई तेज बारिश के बाद सड़क धंसने से एक बड़ा गड्ढा बन गया। इस गड्ढे में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता नितिन कोहली लकड़ी की सीढ़ी के सहारे नीचे उतर गए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नितिन कोहली ने इस मौके का इस्तेमाल करते हुए खुद को ‘स्मार्ट सिटी’ कहे जाने वाले आगरा में विकास को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाए।

यह घटना आगरा के कमला नगर क्षेत्र की कर्मयोगी कॉलोनी की है। लगातार हुई भारी बारिश के बाद सड़क अचानक धंस गई, जिससे गहरा गड्ढा बन गया। इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

बीच सड़क इतना बड़ा गड्ढा

सपा नेता नितिन कोहली का यह अनोखा विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में वह लकड़ी की सीढ़ी के सहारे गड्ढे में उतरते नजर आ रहे हैं, जबकि उनके समर्थक सीढ़ी को पकड़े हुए हैं। गड्ढे के अंदर खड़े होकर कोहली ने बीजेपी सरकार के विकास के दावों पर सवाल उठाए और आगरा की सड़कों की हालत पर तंज कसा। वीडियो में नितिन कोहली कहते सुनाई दे रहे हैं, “हम एक बार फिर विकास की तलाश में निकले हैं। पूरे आगरा की यही हालत हो गई है। मैं विधायक से पूछना चाहता हूं कि क्या यही विकास है? जहां भी सड़क बनती है, वहां कुछ ही समय बाद इतने गहरे गड्ढे हो जाते हैं कि लगता है जैसे पाताल लोक में नया शहर बसाया जा रहा हो। आगरा को स्मार्ट सिटी कहने के बजाय अब ऐसा लग रहा है कि पाताल लोक में नया स्मार्ट सिटी बन रहा है।”

सीढ़ी डालकर गहराई नापने उतरे सपा नेता

गनीमत रही कि इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ, क्योंकि जिस समय सड़क धंसी उस वक्त वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे, हालात का जायजा लिया और सुरक्षा के लिए धंसी हुई जगह के आसपास बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद सड़क की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश में सड़कों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर भी विवाद हुआ था। उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों बाद सड़क पर दरारें पड़ने और कुछ जगहों पर धंसने की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे।

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। लेकिन ट्रैफिक के लिए खोले जाने के एक महीने के भीतर ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में दरारें, सड़क धंसने और सतह खराब होने की शिकायतें सामने आने लगीं। इन शिकायतों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त कदम उठाए। प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़े तीन इंजीनियरों को हटा दिया और निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ भी कार्रवाई की। साथ ही मरम्मत का काम पूरा होने तक पूरे एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई।

क्या मौजूदा EMIs से आपको पर्सनल लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है?

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी मौजूदा EMIs काफी मायने रखती है, जो आपके फाइनैंशियल प्रोफाइल का सबसे अहम हिस्सा है। इनसे पता चलता है कि आपकी हर महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही लोन चुकाने में जा रहा है, जिससे लोन देने वाले संस्थान यह तय करते हैं कि आप एक नई EMI आसानी से चुका पाएँगे या नहीं। पुरानी EMI का बोझ ज़्यादा होने से आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कम हो सकती है, मिलने वाले लोन की रकम घट सकती है, या लोन चुकाने की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि, पहले से लोन होने का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन मिल ही नहीं सकता। लोन लेने वाले संस्थान फैसला लेने से पहले कई बातों पर गौर करते हैं, जिनमें आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, लोन चुकाने का पिछला रिकॉर्ड और आपकी बाकी की देनदारियां शामिल हैं।

अगर आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि मौजूदा EMI आपकी एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं, जिससे आपको ज़िम्मेदारी से लोन लेने और आपके लिए सही लोन मिलने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मौजूदा EMI आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं?

आपकी हर महीने की EMI से आपकी मौजूदा आर्थिक देनदारियों का पता चलता है। जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो लोन देने वाले संस्थान आपकी इनकम के साथ-साथ इन देनदारियों को भी देखते हैं, उसके आधार पर तय करते हैं कि आप एक और लोन आसानी से चुका पाएंगे या नहीं।

वे आमतौर पर नीचे दी गई बातों पर गौर करते हैं:

  • महीने की इनकम
  • महीने का खर्च
  • शहर
  • जन्म तिथि

अगर आपके महीने की इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा EMI चुकाने में खर्च हो जाता है, तो इसकी वजह से लोन चुकाने की आपकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में, लोन देने वाले संस्थान आपकी फाइनैंशियल प्रोफाइल के आधार पर आपको कम लोन दे सकते हैं या लोन चुकाने की समय-सीमा बदल सकते हैं।

लोन देने वाले संस्थान मौजूदा EMI पर क्यों गौर करते हैं?

लोन देने वाले संस्थान यह पक्का करना चाहते हैं कि ग्राहक किसी आर्थिक दबाव के बिना आसानी से लोन चुका सकें। मौजूदा EMI से उन्हें आपके मौजूदा लोन की जानकारी मिलती है और वे यह तय कर पाते हैं कि आपके लिए एक और लोन लेना सही रहेगा या नहीं।

लोन चुकाने से जुड़ी अपनी देनदारियों पर अच्छी तरह गौर करने से ज़िम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और समय पर भुगतान न हो पाने का जोखिम भी कम होता है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे मदद कर सकता है?

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में दी गई आर्थिक जानकारी के आधार पर आप मिलने वाले लोन की रकम का अंदाजा लगा सकते हैं।

आमतौर पर, इसमें आपको कुछ जानकारी भरनी होती है जैसे कि:

• महीने की इनकम

• मौजूदा EMIs

• रोज़गार का प्रकार

• लोन की पसंदीदा समय-सीमा

यह कैलकुलेटर कुछ ही सेकंड में बता देता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है। हालाँकि यह नतीजा सिर्फ़ एक अंदाज़ा होता है, लेकिन लोन के लिए आवेदन करने से पहले पैसों का हिसाब-किताब लगाने में इससे काफी मदद मिलती है।

कौन-सी बातें आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर डालती हैं?

मौजूदा EMI तो बस मूल्यांकन का एक हिस्सा हैं। लोन देने वाले संस्थान पर्सनल लोन को मंजूरी देने से पहले दूसरी कई बातों पर भी गौर करते हैं।

महीने की इनकम

आम तौर पर, ज़्यादा और स्थिर इनकम से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी भी बढ़ सकती है।

क्रेडिट स्कोर

अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के संबंध में आपके ज़िम्मेदारी भरे रवैये को दिखाता है। अगर आप अपने EMI और बिल का समय पर भुगतान करते हैं तो आपको अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नौकरी में स्थिरता

नौकरीपेशा या अपना रोजगार करने वाले जिन लोगों की इनकम में स्थिरता है और लगातार नौकरी का रिकॉर्ड भी बेहतर है तो ऐसे लोगों को लोन मिलने की संभावना थोड़ी ज्यादा होती है।

लोन की समय-सीमा

लोन चुकाने के लिए लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी महीने की EMI कम हो सकती है, हालाँकि इससे पूरे लोन के दौरान कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

मौजूदा आर्थिक देनदारियाँ

लोन की EMI के अलावा, लोन देने वाले संस्थान आपके लोन चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाते समय आपकी कुल आर्थिक देनदारियों पर भी गौर कर सकते हैं।

क्या आप अपनी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं?

भले ही एलिजिबिलिटी कई बातों पर निर्भर करती है, पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप अपने फाइनैंशियल प्रोफाइल को और बेहतर बना सकते हैं।

आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

•अपने मौजूदा EMIs का समय पर भुगतान करना

• जहां तक हो सके, बकाया लोन कम करना

• थोड़े समय के भीतर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से बचना

• अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना।

• लोन चुकाने के लिए सही समय-सीमा चुनना

• सिर्फ़ उतनी ही रक़म के लिए आवेदन करना जिसकी आपको असल में ज़रूरत हो

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से न सिर्फ़ आपकी एलिजिबिलिटी बेहतर होती है, बल्कि आपको लोन चुकाने में भी आसानी होती है।

पर्सनल लोन फाइनेंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन बेहद सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसके लिए कोलेटरल की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग पहले से तय या अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों के लिए किया जा सकता है।

आप निम्नलिखित कामों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं:

• मेडिकल इमरजेंसी

• आगे की पढ़ाई

• शादी का खर्च

• घर की मरम्मत

• ट्रैवल का खर्च

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसे चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा मिलती है। आपकी एलिजिबिलिटी और क्रेडिट प्रोफ़ाइल के आधार पर ब्याज़ दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच हो सकती हैं। इस लोन के लिए किसी कोलेटरल की जरूरत नहीं पड़ती है, तुरंत मंजूरी मिल जाती है, कागजी कार्रवाई कम होती है और लोन की शर्तों को पूरा करने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर पैसे मिल जाते हैं।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकते हैं?

आपकी एलिजिबिलिटी लोन देने वाले संस्थान के नियमों और आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर, लोगों की एलिजिबिलिटी जांचने के लिए इन बातों को देखा जाता है:

 

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल तक
नौकरीपब्लिक, प्राइवेट या MNC
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार या नौकरीपेशा

लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए

लोन पाने की शर्तें पूरी करने से लोन मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।

आमतौर पर किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए बहुत कम दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। यहाँ उन दस्तावेज़ों की सूची दी गई है जिनकी आवेदन के समय ज़रूरत होती है:

दस्तावेज़ों की श्रेणीमान्य विकल्प
KYC संबंधी दस्तावेज आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र/ NREGA जॉब कार्ड
पहचान संबंधी दस्तावेजPAN कार्ड, वास्तविक समय की तस्वीर/फोटो
रोज़गार संबंधी दस्तावेज कर्मचारी पहचान पत्र, नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
इनकम प्रूफ  पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
अन्य पेंशन ऑर्डर, आवश्यक सेवाओं के बिल, फ़ोन बिल, पाइप्ड गैस बिल, प्रॉपर्टी या नगरपालिका की टैक्स रसीद

लोन चुकाने के विकल्प बेहतर फाइनैंशियल प्लानिंग में कैसे मदद करते हैं?

  • लोन चुकाने की सही समय-सीमा चुनना आपके महीने के बजट को अच्छी तरह संभालने में अहम भूमिका निभाता है।
  • लोन चुकाने की समय सीमा काम हो ने से कुल ब्याज़ तो कम हो सकता है, लेकिन आपकी मासिक EMI बढ़ सकती है। वहीं, लोन चुकाने की लंबी समय-सीमा से आपके महीने की EMI कम हो सकती है, क्योंकि इसमें लोन चुकाने का समय बढ़ जाता है।
  • पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, अपनी महीने की इनकम, मौजूदा EMI और अपने आर्थिक लक्ष्यों पर जरूर गौर करें ताकि आप अपने बजट के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकें।
  • ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • पर्सनल लोन लेने से आपको अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलनी चाहिए, न कि आप पर बेवजह का आर्थिक दबाव पड़ना चाहिए।

लोन लेने से पहले:

• अपनी हर महीने की लोन चुकाने की क्षमता का सही अंदाज़ा लगाएं

• सिर्फ़ उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको ज़रूरत हो

• सभी EMI का भुगतान समय पर करते रहें

• अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिए पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

• ऑफ़र मान लेने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आपको अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ एक अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

मौजूदा EMIs आपके पर्सनल लोन की एलिजिबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये आपकी हर महीने लोन चुकाने की क्षमता पर असर डालती हैं। आपकी इनकम, क्रेडिट प्रोफ़ाइल, नौकरी की स्थिरता और लोन चुकाने के पिछले रिकॉर्ड के साथ-साथ, ये लोन देने वाले संस्थानों को यह समझने में मदद करती हैं कि आप ज़िम्मेदारी से कितना लोन ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से आपको एक अंदाज़ा मिलता है और आप भरोसे के साथ अपने फ़ाइनेंस की योजना बना पाते हैं।

नियम व शर्तें लागू