FY27 में SBI में 12000 तक कर्मचारियों की हो सकती है ​हायरिंग, खुलेंगी 250 नई ब्रांच

सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती करने वाला है। साथ ही लगभग 250 नई ब्रांच खोलने का भी प्लान है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक बातचीत में SBI के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि बैंक चालू वित्त वर्ष में क्लर्क और अधिकारी स्तर पर करीब 11,000 से 12,000 नियुक्तियां करेगा। रिटायरमेंट और उभरती जरूरतों के आधार पर नियुक्तियों की संख्या कुछ कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक करीब 12,000 लोगों की भर्ती हो जाएगी।

पिछले साल बैंक ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की थीं, जिसमें 1,500 विशेषज्ञ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) अधिकारी भी शामिल हैं। इस साल आईटी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में भर्तियों की जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक SBI के कर्मचारियों की संख्या 2.45 लाख से अधिक थी। बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में SBI ने कुल 25,633 कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। अधिकारी स्तर पर 4,640, एसोसिएट लेवल पर 19,340 और कॉन्ट्रैक्चुअल स्टाफ के तौर पर 1,653 लोगों को हायर किया गया था।

शेट्टी ने कहा कि बड़ा ब्रांच नेटवर्क होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अब भी SBI के लिए विस्तार की गुंजाइश है। नई कॉलोनियों के विकसित होने के साथ-साथ व्यावसायिक रूप से सक्रिय जिलों में भी बैंक अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। मौजूदा वित्त वर्ष में 200 से 250 नई ब्रांच खोलने की योजना है।

NSE IPO में कितनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में शेयरों की बिक्री के बारे में शेट्टी ने कहा कि SBI और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स मिलकर NSE में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। NSE 0.65 प्रतिशत और NSE कैपिटल मार्केट्स 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। अन्य शेयरधारकों के भी हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में SBI समूह की ओर से बिक्री 1 प्रतिशत से कम भी रह सकती है। वर्तमान में SBI के पास NSE में 3.23 प्रतिशत और SBI कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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NSE 30,000 करोड़ रुपये का IPO ला रहा है। बीते सप्ताह इसे कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

8th Pay Commission Updates: 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर लेवल 7 एंप्लॉयीज का HRA कितना बढ़ जाएगा?

8th Pay Commission Updates: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर न सिर्फ केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी बढ़ जाएगी बल्कि एचआरए भी बढ़ेगा। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक पे में होने वाले बदलाव का सीधा असर हाउस रेंट अलाउन्स (एचआरए) पर पड़ेगा। खासकर बड़े शहरों में रहने वाले एंप्लॉयीज पर ज्यादा फर्क पड़ेगा।

केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का HRA बेसिक पे के हिसाब से तय होता है। इसमें एंप्लॉयीज की पोस्टिंग के शहर के हिसाब से बदलाव देखने को मिलता है। 2017 में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर ने शहरों को तीन कैटेगरी X, Y और Z में बांटा था। यह तय किया गया था कि एक्स शहरों में एचआरए रेट 24 फीसदी होगा। Y शहरों में 16 फीसदी और Z शहरों में 8 फीसदी होगा।

इस कैलकुलेशन के आधार पर एक्स, वाय और जेड शहरों में मिनिमम HRA क्रमश: 5,400 रुपये, 3,600 रुपये और 1,800 रुपये है। यह भी कहा गया था कि महंगाई भत्ता (DA) 25 फीसदी पार कर जाने पर एचआरए बढ़कर 27 फीसदी, 18 फीसदी और 9 फीसदी हो जाएगा। DA के 50 फीसदी के पार करने के बाद यह 30 फीसदी, 20 फीसदी और 10 फीसदी हो जाएगा।

चूंकि DA 2024 में 50 फीसदी के पार हो गया, जिससे X, Y और Z शहरों के लिए एचआरए बढ़कर क्रमश: 30 फीसदी, 20 फीसदी और 10 फीसदी हो गया। यह समझ लेना जरूरी है कि एक्स कैटेगरी के तहत मेट्रो शहर आते हैं। इनमें Delhi, Mumbai, Kolkata, Chennai, Bengaluru और Hyderabad शामिल हैं। Y कैटेगरी के तहत ऐसे शहर आते हैं, जहां की आबादी 5 लाख से 50 लाख के बीच होती है। Z कैटेगरी के तहत जो एक्स और वाय कैटेगरी से बाहर हैं।

नीचे के इलेस्ट्रेशन में बताया गया है कि बेसिक पे बढ़ने पर अलग-अलग पे लेवल के एंप्लॉयीज के एचआरए पर किस तरह से असर पड़ेगा। इस कैलकुलेशन के लिए तीन फिटमेंट फैक्टर 2 गुना, 2.5 गुना और 3 गुना को ध्यान में रखा गया है। साथ ही एचआरए के लिए बेसिक पे के मौजूदा 30 फीसदी, 20 फीसदी और 10 फीसदी रेट को ध्यान में रखा गया है।

table 1

केंद्र सरकार के लेवल 7 के एंप्लॉयीज के मामले में टेबल में यह माना गया है कि 3 गुना फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक बे बढ़कर 1,34,700 रुपये हो जाएगी। इस नए बेसिक पे पर एंप्लॉयीज का एचआरए उसके शहर की कैटेगरी पर निर्भर करेगा।

30 फीसदी HRA (X cities): ₹40,410

20 फीसदी HRA (Y cities): ₹26,940

10 फीसदी HRA (Z cities): ₹13,470

table2

2.5 गुना फिटमेंट फैक्टर पर एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 1,40,250 रुपये हो जाएगा। इस बेसिक पे पर मंथली एचआरए इस तरह होगा:

30 फीसदी HRA (X cities): ₹33,675

20 फीसदी HRA (Y cities): ₹ 22,450

10 फीसदी HRA (Z cities): ₹ 11,225

table 3

इसी तरह अगर फिटमेंट फैक्टर 2 गुना रहता है तो लेवल 7 एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 89,800 रुपये हो जाएगा। इस बेसिक पे पर शहर के हिसाब से एंप्लॉयीज का मंथली एचआरए इस तरह होगा:

30 फीसदी HRA (X cities): ₹40,410

20 फीसदी HRA (Y cities): ₹26,940

10 फीसदी HRA (Z cities): ₹ 13,470

आठवें वेतन आयोग के अगले साल मई-जून तक अपनी सिफारिशें सौंप देने की उम्मीद है। उसके बाद सरकार उस पर विचार करेगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद उसे लागू कर दिया जाएगा। अनुमान है कि इसे अगले साल के आखिर तक लागू किया जा सकता है। हालांकि, एंप्लॉयीज को इस साल जनवरी से एरियर का पेमेंट भी होगा।

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LIC के लिए ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ, RBI से मिली हरी झंडी

एलआईसी के लिए आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। आरबीआई ने देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी को आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 फीसदी तक करने की इजाजत दे दी है। यह अप्रूवल आरबीआई के लेटर इश्यू होने के बाद के एक साल तक वैलिड होगा।

एक साल के लिए यह एप्रूवल वैलिड होगा

LIC अगर एक साल तक ICICI Bank में अपनी हिस्सेदारी इस लिमिट तक नहीं बढाती है तो यह एप्रूवल लैप्स कर जाएगा। इस बारे में आरबीआई का लेटर 4 सितंबर को आईसीआईसीआई बैंक को मिल गया। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने यह जानकारी दी है। हालांकि, शेयरों के प्रस्तावित अधिग्रहण के लिए एलआईसी को रेगुलेटर से जुड़े दूसरे नियमों का भी पालन करना होगा।

LIC को एचडीएफसी बैंक में भी हिस्सा बढ़ाने की मंजूरी मिली थी

इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कहा गया है, “इस एप्रूवल पर कुछ खास शर्तें लागू होंगी।” इससे पहले LIC को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी 9.99 फीसदी तक बढ़ाने के लिए आरबीआई से ऐसा ही एक लेटर मिला था। एचडीएफसी बैंक की 19 अगस्त की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, आरबीआई ने बैंक में 9.99 फीसदी तक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एप्रूवल दे दिया है।

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ICICI Bank के शेयर में 4 सितंबर को गिरावट 

HDFC Bank की फाइलिंग के मुताबिक, एलआईसी की बैंक में 4.11 फीसदी हिस्सेदारी है। एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है। HDFC Bank का शेयर 4 सितंबर को 1.16 फीसदी चढ़कर 714.85 रुपये पर बंद हुआ। LIC का शेयर 0.096 फीसदी गिरकर 416.50 रुपये पर बंद हुआ था। ICICI Bank का शेयर 0.44 फीसदी गिरकर 1,423.70 रुपये पर बंद हुआ था।

सुभाष चंद्रा की मुश्किल बढ़ी, अब CBI ने लोन फ्रॉड मामले में केस दर्ज किया

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब सीबीआई ने एक लोन फ्रॉड मामले में उनके और दूसरे लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। 31 अगस्त को फाइल एफआईआर के मुताबिक, यह लोन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था।

पहले LIC HF ने मामले में की थी शिकायत

इस मामले में पहले LIC Housing Finance ने शिकायत की थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि चंद्रा, लोन लेने वाली कंपनियों और उनके डायरेक्टर्स ने लोन लेने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसे डॉक्युमेंट्स पेश किए जिनमें चंद्रा का नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे। अब CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट सहित दूसरे आरोपों में मामला दर्ज किया है।

LIC HF ने चंद्रा की गारंटी पर दिए थे लोन

LIC Housing Finance ने मार्च 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को बिजनेस के विस्तार से लिए 500 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इस लोन के लिए चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। अगस्त 2018 में LICHF ने और 480 करोड़ रुपये का लोन Digital Subscriber Management and Consultancy Services और Spririt Infrapower and Multiventures को एक रेंटल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी के तहत दिया। इस लोन के लिए भी चंद्रा ने अपनी पर्सनल गारंटी दी थी।

नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स का इस्तेमाल

शिकायत में यह कहा गया है कि पहला लोन आंशिक रूप से नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। चंद्रा ने यह सर्टिफिकेट पेश किया था, जिसमें उनका नेटवर्थ 31 मार्च, 2017 को 59,113 करोड़ रुपये बताया गया था। दूसरा लोन आंशिक रूप से दूसरे सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। इस सर्टिफिकेट में नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।

LIC HF के दोनों लोन पर कंपनियों ने किए डिफॉल्ट

बाद में दोनों ही लोन पर कंपनियों ने डिफॉल्ट किया। वसंत सागर के लोन में 570.50 करोड़ रुपये आउटस्टैंडिंग अमाउंट (बकाया पैसा) है, जबकि दूसरे लोन में आउटस्टैंडिंग अमाउंट 507.25 करोड़ रुपये है। LIC Housing Finance ने अपनी शिकायत में यह कहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि चंद्रा ने बाद में पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स के दौरान सर्टिफिकेट में बताए गए अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया।

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चंद्रा ने खुद अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया

शिकायत के मुताबिक, चंद्रा ने कहा कि 2024 में उनका नेटवर्थ 31.79 करो़ड़ रुपये था और यहां तक कि 2017-18 में भी यह 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं था। LICHF ने कहा है कि चंद्रा ने लोन लेने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टर्स और अधिकारियों के साथ मिलकर यह फ्रॉड किया। नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए गए। बाद में लोन लेने वाली कंपनियों ने लोन के पैसे का दुरुपयोग किया।

Senior Citizen FD: 8.5% ब्याज देने वाले बैंक कौन से हैं? रिटायरमेंट के बाद 20 लाख फिक्स करने पर समझिए इंट्रेस्ट इनकम का पूरा कैलकुलेशन

Senior Citizen FD Calculator: अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रखने और रिटायरमेंट के बाद रेग्युलर इनकम के लिए वरिष्ठ नागरिकों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है। इस समय सीनियर सिटीजंस के लिए बैंकों में एफडी पर काफी आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं। खासकर स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8.50 फीसदी प्रति वर्ष तक का अधिकतम ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर में जरा सा भी अंतर कुल रिटर्न पर बड़ा असर डालता है। खासकर तब जब आप अपनी रिटायरमेंट की एक बड़ी राशि निवेश कर रहे हों। सही बैंक और सही मैच्योरिटी का चुनाव कर आप बिना बड़ा जोखिम उठाए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सा बैंक सीनियर सिटिजंस को FD पर कितना इंट्रेस्ट ऑफर कर रहा है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

जानिए प्राइवेट सेक्टर बैंक में क्या हैं दरें?

निजी क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को नीचे दी गईं ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

डीसीबी बैंक: 8.00 प्रतिशत तक ब्याज।

बंधन बैंक: 7.95 प्रतिशत तक ब्याज।

एसबीएम बैंक इंडिया: 7.80 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडसइंड बैंक: 7.75 प्रतिशत तक ब्याज।

एक्सिस बैंक: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

एचडीएफसी बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईसीआईसीआई बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईडीबीआई बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

पब्लिक सेक्टर बैंक: सरकारी बैंकों में कितना ब्याज?

देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली ब्याज दरों की जानकारी यहां नीचे दी गई है-

बैंक ऑफ इंडिया: 7.45 प्रतिशत तक ब्याज।

पंजाब एंड सिंध बैंक: 7.35 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडियन बैंक: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

विदेशी बैंक दे रहे इतना ब्याज

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

ड्यूश बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

एचएसबीसी बैंक: 6.00 प्रतिशत तक ब्याज।

8.5% ब्याज पर 20 लाख की FD से कितनी होगी कमाई?

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपने रिटायरमेंट फंड से 20 लाख रुपये की राशि 8.50% इंट्रेस्ट रेट पर FD में फिक्स करता है तो उसकी इंट्रेस्ट इनकम एक साल में 1 लाख 70 हजार रुपये होगी। यानी इसे मंथली देखें तो ये करीब 14 हजार रुपये के आसपास होगी। इसी कैलकुलेशन से 3 साल की कुल ब्याज आय 5 लाख 10 हजार और 5 साल की कुल ब्याज आए 8 लाख 50 हजार बैठती है। (नोट: अगर बैंक में ब्याज का रीइन्वेस्टमेंट या तिमाही आधार पर कम्पाउंडिंग होती है तो इंट्रेस्ट से कुल इनकम इससे भी अधिक हो सकती है।)

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे बनाएं सही रणनीति?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीनियर सिटिजंस को अपना पूरा डिपॉजिट एक ही बैंक में रखने के बजाय कई बैंकों में बांटकर रखना चाहिए ताकि 5 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर के दायरे में सुरक्षित रहा जा सके। इसके साथ ही, ज्यादा रिटर्न के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए और एफडी की अवधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

क्या आज बदल जाएगा पूरी दुनिया का नक्शा? UN में 450 साल पुरानी व्यवस्था पर बड़ी वोटिंग, जानिए मर्केटर मैप का पूरा विवाद

UN Map Voting Controversy: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दुनिया के नक्शे को हम बचपन से स्कूलों, किताबों और गूगल मैप्स पर देखते आ रहे हैं, वह असल में सही है ही नहीं? संयुक्त राष्ट्र महासभा में आज एक ऐसे मसौदे पर ऐतिहासिक वोटिंग होने जा रही है, जो 450 साल पुरानी नक्शा प्रणाली को बदलकर पूरी दुनिया का भूगोल देखने का जरिया ही बदल सकती है।

अफ्रीकी देश टोगो की अगुवाई में और 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ के समर्थन से यह प्रस्ताव लाया गया है। मांग यह है कि 1569 से चले आ रहे पारंपरिक मर्केटर मैप को हटाकर वास्तविक आकार दर्शाने वाले ‘इक्वल अर्थ मैप’ को वैश्विक रूप से अपनाया जाए।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सदियों पुराना नक्शा गलत क्यों माना जा रहा है और इसको लेकर UN में इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ है।

क्या है 450 साल पुराना मर्केटर मैप और विवाद की असली वजह?

सन 1569 में फ्लेमिश मानचित्रकार गेरार्डस मर्केटर ने एक नक्शा तैयार किया था। उस समय इसका मुख्य मकसद समुद्री नाविकों को सीधी रेखा में दिशा दिखाना था। लेकिन इस गोल पृथ्वी को चपटे कागज पर ढालने के चक्कर में एक बड़ी गड़बड़ी हो गई।

भूमध्य रेखा के पास के देश छोटे दिखने लगे: अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका जैसे भूमध्य रेखा के पास स्थित क्षेत्रों का आकार नक्शे में उनकी असली सीमा से काफी छोटा हो गया।

ध्रुवों के पास के देश बड़े दिखने लगे: यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे ध्रुवों के पास वाले देश अपनी असली सीमा से कई गुना ज्यादा विशाल दिखाई देने लगे।

ग्रीनलैंड बनाम अफ्रीका: असली सच चौंका देने वाला है

नक्शे की इस गड़बड़ी का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण ग्रीनलैंड और अफ्रीका का मुकाबला है। मर्केटर मैप पर ग्रीनलैंड और पूरा अफ्रीका महाद्वीप लगभग एक ही साइज के दिखाई देते हैं। जबकि कड़वी सच्चाई ये है कि अफ्रीका महाद्वीप असल में ग्रीनलैंड से 14 गुना ज्यादा बड़ा है।

अफ्रीका का क्षेत्रफल (3.03 करोड़ वर्ग किमी) इतना बड़ा है कि इसके भीतर अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको और लगभग पूरा यूरोप एक साथ समा सकते हैं। इसी गैर-बराबरी को लेकर अफ्रीकी संघ ने #CorrectTheMap अभियान शुरू किया है। टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा, ‘अफ्रीका कोई विशेषाधिकार या दया की भीख नहीं मांग रहा। हम बस दुनिया के भूगोल में अपनी असली जगह और सही आकार मांग रहे हैं।’

‘कार्टोग्राफिक उपनिवेशवाद’ और ‘इक्वल अर्थ मैप’ का विकल्प

आलोचकों और भूगोलवेत्ताओं का कहना है कि मर्केटर मैप का यह गलत फैलाव पश्चिमी देशों को ज्यादा शक्तिशाली और समृद्ध दिखाने का एक जरिया बना, जिसे ‘कार्टोग्राफिक कोलोनियलिज्म’ कहा जाता है। इससे दुनिया की सोच में ग्लोबल साउथ का दबदबा कम आंका गया।

क्या है ‘Equal Earth’ मैप?

संयुक्त राष्ट्र में जिस नए नक्शे को अपनाने की बात हो रही है, उसे 2018 में कार्टोग्राफर्स की टीम ने विकसित किया था। इसे ‘इक्वल अर्थ मैप’ कहा जाता है। यह नक्शा बिना किसी देश की आकृति को ज्यादा बिगाड़े, हर महाद्वीप और देश को उसके वास्तविक अनुपातिक आकार में दिखाता है।

अगर UN में प्रस्ताव पास हो गया तो क्या-क्या बदलेगा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी तो नहीं होगा, लेकिन यदि यह पास हो जाता है तो:

स्कूल और किताबें: दुनिया भर के स्कूलों, प्रकाशकों और शैक्षणिक संस्थानों में नए और सही आकार वाले नक्शे पढ़ाए जाने लगेंगे।

टेक कंपनियां: गूगल मैप्स और अन्य डिजिटल नेविगेशन कंपनियां अपनी वैश्विक मैपिंग में ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन को प्राथमिकता दे सकती हैं।

वैश्विक नजरिया: अफ्रीका और एशिया जैसे बड़े महाद्वीपों के असली आकार को देखकर दुनिया का उनके प्रति भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टिकोण बदलेगा।

Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Gold Jewellery Price: सोने का भाव लगातार ऊंचे स्तर पर बना है। ऐसे में जाहिर तौर पर नए गहने खरीदना काफी महंगा हो गया है। हालांकि, हर कैरेट के सोने की कीमत एक जैसी नहीं होती। सबसे महंगा 24 कैरेट का सोना होता है। लेकिन, इससे गहने नहीं बनते। गहने बनने की शुरुआत अधिकतम 22 कैरेट गोल्ड से होती है। महंगाई के चलते अब कम कैरेट गोल्ड की तरफ भी ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

खुराना ज्वैलरी हाउस की सौम्या खुराना के मुताबिक, अब ज्वेलर्स ग्राहकों के लिए हल्के आभूषण पेश कर रहे हैं, जो सस्ते होते हैं। 18 कैरेट, 14 कैरेट और यहां तक ​​कि 9 कैरेट की ज्वेलरी भी मार्केट में आ रही हैं। इन्हें लोग खूब पसंद भी कर रहे हैं।

आइए जानते हैं कि 18, 14 और 9 कैरेट की गोल्ड ज्वेलरी बनवाने पर कितना खर्च होगा। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, 3 सितंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹2,549 बढ़कर ₹1.54 लाख हो गई। इसी भाव के आधार पर 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का कैलकुलेशन किया गया है।

18K, 14K और 9K में कितना सोना

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 75% यानी 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। 14 कैरेट में यह मात्रा 58.5% यानी 5.85 ग्राम रहती है। वहीं 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 37.5% यानी 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है।

बची हुई मात्रा में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे ज्वेलरी मजबूत बनती है। कम कैरेट का मतलब है कि गहने में सोने की मात्रा कम है। यही वजह है कि उसकी कीमत भी कम पड़ती है।

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18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के भाव पर इस सोने की कीमत ₹1,15,500 बैठती है।

बाकी 2.5 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत जोड़ने पर ज्वेलरी की कुल धातु लागत ₹1,18,502 हो जाती है। 10% मेकिंग चार्ज और 3% GST के बाद कुल कीमत करीब ₹1,34,262 बैठती है।

14 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

14 कैरेट की ज्वेलरी में सोने की मात्रा घटकर 5.85 ग्राम रह जाती है। इसकी कीमत ₹90,090 होती है। हालांकि, बचे हुए 4.15 ग्राम में चांदी और तांबा मिलाया जाता है। इनकी कीमत भी ग्राहक को चुकानी होती है।

इन धातुओं की कीमत जोड़ने पर कुल धातु लागत ₹95,073 बैठती है। मेकिंग चार्ज और GST मिलाने के बाद 10 ग्राम 14 कैरेट ज्वेलरी की कीमत करीब ₹1,07,718 हो जाती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹26,500 की बचत।

9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

9 कैरेट में सिर्फ 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है। मौजूदा भाव पर इस सोने की कीमत ₹57,750 बैठती है। बाकी 6.25 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत मिलाकर कुल धातु लागत ₹65,254 हो जाती है।

इसके बाद ₹6,525 मेकिंग चार्ज और 3% GST जुड़ता है। इस तरह 10 ग्राम 9 कैरेट ज्वेलरी करीब ₹73,933 में तैयार होती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹60,000 कम खर्च आता है।

एक नजर में 10 ग्राम ज्वेलरी का पूरा हिसाब

खर्च का हिसाब18 कैरेट14 कैरेट9 कैरेट
शुद्ध सोना7.5 ग्राम5.85 ग्राम3.75 ग्राम
सोने की कीमत₹1,15,500₹90,090₹57,750
दूसरी धातुओं की कीमत₹3,002₹4,983₹7,504
कुल धातु लागत₹1,18,502₹95,073₹65,254
मेकिंग चार्ज₹11,850₹9,507₹6,525
GST₹3,910₹3,137₹2,153
कुल कीमत₹1,34,262₹1,07,718₹73,933

9 कैरेट ज्वेलरी का बढ़ता चलन

बाजार में 9 कैरेट ज्वेलरी का चलन बढ़ रहा है। खासकर युवा ग्राहक हल्के और रोज पहनने वाले गहनों के लिए इसे देख रहे हैं। 14 कैरेट और 18 कैरेट ज्वेलरी भी हीरे और दूसरे रत्नों वाले डिजाइन में खूब इस्तेमाल होती है।

हालांकि, शादी-ब्याह के पारंपरिक गहनों के लिए भारत में 22 कैरेट गोल्ड की मांग अभी भी सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन सोने के रिकॉर्ड भाव के बीच कम कैरेट की ज्वेलरी अब ग्राहकों के लिए सस्ता विकल्प बन रही है।

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जन्माष्टमी पर वृंदावन जाने से पहले पढ़ें यह गाइड! बांके बिहारी मंगला आरती का समय, रूट डायवर्जन और पार्किंग नियम

जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, ऐसे में शहर में जाम और भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने कई रास्तों पर वाहनों की एंट्री रोक दी है। 3 सितंबर की सुबह से 5 सितंबर की सुबह तक मथुरा और वृंदावन के कई प्रमुख रास्तों पर डायवर्जन और नो-एंट्री लागू रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। इसलिए सफर शुरू करने से पहले रूट और पार्किंग की जानकारी समझ लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।

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मंगला आरती का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि रात 1:45 बजे होगी। आरती के लिए सिर्फ 600 पासधारक भक्तों को मंदिर में प्रवेश मिलेगा। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंगला आरती का लाइव टेलीकास्ट भी किया जाएगा। इससे मंदिर में एंट्री न मिलने वाले भक्त भी घर बैठे इस खास आरती के दर्शन कर सकेंगे। भीड़ को कंट्रोल करने के साथ ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं तक आरती का दर्शन पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था की गई है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ये रूट बंद

जन्माष्टमी के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ को देखते हुए कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। भूतेश्वर तिराहा, मसानी चौराहा, डीग गेट, गोकरण तिराहा, चौक बाजार, भरतपुर गेट, कृष्णापुरी, स्टेट बैंक चौराहा और महाविद्या कॉलोनी जैसे रास्तों से वाहनों को आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। मसानी चौराहा से जन्मभूमि और चौक बाजार की तरफ भी वाहनों की एंट्री बंद रहेगी। डीग गेट से जन्मभूमि की ओर भी वाहन नहीं जा सकेंगे। वहीं गोवर्धन चौराहा और मंडी चौराहा से भूतेश्वर की तरफ भारी वाहन, रोडवेज बस और ट्रैक्टर नहीं जा पाएंगे।

मथुरा आने वालों के लिए पार्किंग व्यवस्था

शहर में वाहन लेकर जाने की बजाय श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर गाड़ी खड़ी करनी होगी। यमुना एक्सप्रेसवे और वृंदावन की तरफ से आने वालों के लिए पीएमबी पॉलीटेक्निक स्कूल, जयसिंहपुरा, अनुज चौधरी के खाली प्लॉट और आरके ज्वैलर्स के सामने पार्किंग की व्यवस्था की गई है। गोकुल रेस्टोरेंट और हाईवे की तरफ से आने वाले वाहनों को आरएसएस संस्था के सामने, आईएसबीटी बस अड्डे और रामलीला मैदान में पार्क कराया जाएगा। वहीं धौलीप्याऊ की तरफ से आने वाले श्रद्धालु रेलवे ग्राउंड में वाहन खड़ा कर सकेंगे।

वृंदावन में इन रास्तों पर नो-एंट्री

जन्माष्टमी पर वृंदावन में भी ट्रैफिक रेगुलेशन काफी सख्त रहेगी। छटीकरा, रुक्मिणी विहार, पानीगांव, वृंदावन कट और सौ-शय्या जैसे रास्तों से भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। छटीकरा-वृंदावन रोड पर मल्टीलेवल पार्किंग से आगे वाहन नहीं जा सकेंगे। इसी तरह मथुरा-वृंदावन मार्ग पर सौ-शय्या से आगे भारी और चार पहिया वाहनों को रोक दिया जाएगा। वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आईटीआई, दारुक, मंडी, पवनहंस हेलीपैड, एमवीडीए, पशुपैठ, पैराग्लाइडिंग और शिवा ढाबा समेत कई जगहों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

यात्रा से पहले रखें ये सावधानी

जन्माष्टमी में भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह से कई जगहों पर पार्किंग से मंदिर तक पैदल जाना पड़ सकता है। इसलिए बुजुर्गों और बच्चों के साथ जर्नी कर रहे हैं तो पहले से इसकी तैयारी रखें। अपना फोन, पर्स, चश्मा और जरूरी सामान सेफ रखें, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामान संभालकर रखना जरूरी है।

इससे आप जाम और रास्ता बंद होने जैसी परेशानी से काफी हद तक बच सकते हैं। इस तरह आप जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन की ट्रिप को आसान और परेशानी-फ्री बना सकते हैं।

लागत जीरो मुनाफा 100%, ऐसे 6 बिजनेस आईडिया जो कभी फेल नहीं होते!

आज के समय में अपना काम शुरू करने के लिए बड़ी दुकान, हैवी इन्वेस्टमेंट या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं है। यदि आपके पास कोई हुनर है और आप लोगों की जरूरत को समझकर काम शुरू करते हैं, तो छोटे लावेल से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। शुरुआत में खर्च कम होने की वजह से नुकसान का रिस्क भी ज्यादा नहीं रहता और काम चलने पर इसे धीरे-धीरे बड़ा किया जा सकता है।

किसी भी बिजनेस को शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके आसपास के लोगों को किस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है। इसके लिए आप अपने आसपास के 10-15 लोगों से बात करके उनकी पसंद, जरूरत और बजट के बारे में जान सकते हैं। अपनी पसंद और हुनर के हिसाब से सही बिजनेस चुनकर आप धीरे-धीरे कस्टमर बना सकते हैं।

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1. पौधों से कमाई

पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का शौक को छोटे बिजनेस में बदला जा सकता है। इसके लिए किसी छोटी नर्सरी से कम कीमत पर मनी प्लांट, एलोवेरा, स्नेक प्लांट, तुलसी और छोटे सजावटी पौधे खरीदें। शुरुआत में ज्यादा स्टॉक रखने की जरूरत नहीं है, 10-20 पौधों से भी काम शुरू किया जा सकता है। पौधों की अच्छी फोटो खींचकर WhatsApp और सोशल मीडिया पर डालें और आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दें। कस्टमर खुद पौधे लेने आ सकते हैं या आसपास डिलीवरी की फैसिलिटी भी दी जा सकती है।

2. क्लाउड किचन

खाना बनाने का शौक है, तो बिना रेस्टोरेंट खोले घर से क्लाउड किचन शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में कुछ चुनिंदा डिश जैसे पराठे, थाली, स्नैक्स या घर का खाना रखें और आसपास के इलाके में डिलीवरी की फैसिलिटी दें। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया से ऑर्डर लिए जा सकते हैं। अच्छा टेस्ट, साफ-सफाई और समय पर डिलीवरी मिलने पर धीरे-धीरे कस्टमर बढ़ाए जा सकते हैं।

3. कार-बाइक क्लीनिंग

कार और बाइक रखने वाले कई लोगों के पास रोज सफाई करने का समय नहीं होता, ऐसे में घर जाकर सफाई की सर्विस देना कमाई का अच्छा तरीका बन सकता है। शुरुआत में बाल्टी, माइक्रोफाइबर कपड़े, कार शैम्पू, ब्रश और सफाई का जरूरी सामान खरीदकर करीब 1 हजार रुपये के आसपास से काम शुरू किया जा सकता है। इसके लिए दुकान किराए पर लेने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि आसपास की सोसाइटी, कॉलोनी और मोहल्लों में जाकर ग्राहकों के घर पर ही सर्विस दे सकते हैं।

4. डिजिटल मार्केटिंग

छोटे दुकानदारों और लोकल बिजनेस को सोशल मीडिया पर प्रमोट करने की जरूरत होती है। आपको Instagram, Facebook, पोस्ट डिजाइन, रील या ऑनलाइन प्रमोशन की जानकारी है, तो आप उनके लिए डिजिटल मार्केटिंग की सर्विस दे सकते हैं। शुरुआत में 2-3 लोकल बिजनेस को सैंपल काम दिखाकर क्लाइंट बनाया जा सकता है और बाद में हर महीने के पैकेज के हिसाब से कमाई की जा सकती है।

5. स्किल से कमाई

किसी सब्जेक्ट में आपकी अच्छी पकड़ है या आपको ड्राइंग, म्यूजिक, कंप्यूटर या इंग्लिश जैसी कोई स्किल आती है, तो इसे कमाई का जरिया बनाया जा सकता है। इस काम के लिए दुकान या महंगे सेटअप की जरूरत नहीं होती और घर के एक कमरे से ही शुरुआत की जा सकती है। करीब 1 हजार रुपये में व्हाइटबोर्ड, मार्कर और जरूरी स्टेशनरी खरीदकर मोहल्ले के 4-5 बच्चों को छोटे बैच में पढ़ाना शुरू करें। कम बच्चों से शुरुआत करने पर हर बच्चे पर अच्छी तरह ध्यान दिया जा सकेगा।

6. शेयर मार्केट फाइनेंस कवर पेज

आपको फाइनेंस और शेयर मार्केट की अच्छी जानकारी है, तो इस विषय पर कंटेंट बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम शुरू किया जा सकता है। शेयर मार्केट की बेसिक जानकारी, बजटिंग, सेविंग और पर्सनल फाइनेंस जैसे सब्जेक्ट पर वीडियो, पोस्ट या ब्लॉग तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआत में लगातार उपयोगी और आसान भाषा में कंटेंट बनाकर ऑडियंस तैयार करें और आगे चलकर ब्रांड सहयोग या डिजिटल प्रोडक्ट्स से कमाई के रास्ते बनाए जा सकते हैं।