सरकार का बड़ा फैसला: गन्ने के रस और चीनी से एथेनॉल बनाने पर रोक, समझिए वजह

Sugarcane Ethanol Ban: केंद्र सरकार ने एथेनॉल खरीदने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं कर सकेंगी। सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल को शून्य करने का निर्देश दिया है। यह नियम 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए सप्लाई वर्ष में लागू होगा।

सरकार का मकसद देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। साथ ही, चीनी की कीमतों पर दबाव कम करना भी इस फैसले की वजह है। इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है।

1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदेंगी तेल कंपनियां

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने मिलकर यह टेंडर जारी किया है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक एथेनॉल की सप्लाई होनी है।

नए नियमों के मुताबिक, कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोली नहीं मांगेंगी। हालांकि, दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी।

मक्का और चावल से बने एथेनॉल की कीमत कितनी?

सरकार ने अलग-अलग कच्चे माल से बने एथेनॉल की बेस कीमत भी तय की है। मक्का से बने एथेनॉल की कीमत ₹66.07 प्रति लीटर रखी गई है। इसके अलावा ₹2.79 प्रति लीटर का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।

खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल की बेस कीमत ₹64 प्रति लीटर तय की गई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल के लिए ₹60.32 प्रति लीटर की दर रखी गई है। वहीं, सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की कीमत ₹57.97 प्रति लीटर होगी।

इन दरों में GST और परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। ये खर्च अलग से देना होगा। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत मंजूर दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद टेंडर में लागू सबसे कम दर पर होगी।

चार चरणों में होगी एथेनॉल की सप्लाई

एथेनॉल की सप्लाई को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक होगा। दूसरा फरवरी से अप्रैल 2027, तीसरा मई से जुलाई 2027 और चौथा अगस्त से अक्टूबर 2027 तक चलेगा।

हालांकि, चौथे चरण में FCI से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की सप्लाई के लिए दिए गए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

कोर्ट के फैसले के हिसाब से बदल सकता है आवंटन

टेंडर में एथेनॉल के आवंटन को लेकर एक शर्त भी रखी गई है। पहली तिमाही में होने वाला आवंटन कुछ लंबित कानूनी मामलों के फैसले पर निर्भर करेगा। ये मामले तेल कंपनियों के बीच एथेनॉल बांटने के तरीके से जुड़े हैं।

कंपनियों ने कहा है कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक आवंटन में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर आवंटन घटाया जा सकता है या पूरी तरह रद्द भी किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां सप्लायर को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होंगी।

दूसरी कंपनी से खरीदकर एथेनॉल नहीं बेच सकेंगे सप्लायर

टेंडर में सप्लायर के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें मंजूर कच्चे माल से एथेनॉल अपनी ही रजिस्टर्ड या स्वीकृत डिस्टिलरी में बनाना होगा।

कोई सप्लायर किसी तीसरे पक्ष से एथेनॉल खरीदकर सरकारी तेल कंपनियों को नहीं बेच सकेगा। ये सभी नियम 2026-27 के सप्लाई वर्ष के लिए जारी टेंडर पर लागू होंगे। नया सप्लाई वर्ष 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा।

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हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

हेल्थ पॉलिसी होने के बावजूद कई बार हॉस्पिटल के बिल का कुछ हिस्सा जेब से भरना पड़ता है। अगर हॉस्पिटल के बिल में से 3 लाख रुपये जेब से भरना हो तो फिर क्या करना चाहिए? क्या सेविंग्स के पैसा का इस्तेमाल करना चाहिए, बैंक एफडी को तोड़ देना चाहिए या पीएफ से पैसे निकालने चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा।

बीमारी को ध्यान में रखकर लेने होंगे फैसले

आरोग्य फाइनेंस के को-फाउंडर और सीईओ जोस पीटर ने कहा कि इस सवाल का जवाब कई बातों पर निर्भर है। इसमें बीमारी कौन सी है, बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा और कितने पैसे खर्च होंगे शामिल हैं। कई बार बीमारी का इलाज एक सर्जरी से हो जाता है, जबकि कुछ बीमारी में बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।

हॉस्पिटल बिल और इंश्योरेंस सेटलमेंट स्टेंटमेंट को चेक करें

उन्होंने कहा कि अगर हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी देखना होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से चार्ज इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ है।

कई हॉस्पिटल इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करते हैं

सबसे पहले हॉस्पिटल से यह पूछा जा सकता है कि क्या वह इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करता है। इसमें इंटरेस्ट का बोझ हॉस्पिटल उठाता है। अगर हॉस्पिटल यह सुविधा ऑफर करता है तो परिवार के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा। परिवार मंथली किस्त चुकाने के लिए अपने गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर सकता है। अगर यह सुविधा हॉस्पिटल ऑफर नहीं करता है तो ही बैंक एफडी तोड़ने या दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।

बैंक एफडी तोड़ने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें 

अगर बैंक एफडी तोड़ना जरूरी हो तो पहले यह देखना होगा कि इंटरेस्ट के मामले में कितना लॉस होगा और तय समय से पहले एफडी तोड़ने पर कितनी पेनाल्टी चुकानी होगी। एफडी पर लोन लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर एफडी अगर लंबी अवधि का है तो उसे तोड़ना सस्ता पड़ेगा। परिवार दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद फैसला ले सकता है।

ईपीएफ में जमा पैसा निकालने का भी विकल्प

तीसरा विकल्प ईपीएफ से पैसे निकालना है। लेकिन, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ईपीएफ से पैसे निकालने का असर आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ता है। इस प्रोसेस में समय भी लगता है। यह विकल्प तब काम नहीं करेगा, जब पेशेंट हॉस्पिटल में है और उसे हॉस्पिटल से घर लाने से पहले बिल चुकाना जरूरी हो। ऐसी स्थिति में ईपीएफ से पैसे निकलने का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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जरूरत के हिसाब से कुछ विकल्पों का किया जा सकता है इस्तेमाल

उपर्युक्त विकल्पों पर विचार करने के बाद सबसे अच्छा यह होगा कि हॉस्पिटल का बिल चुकाने के लिए सेविंग्स के कुछ पैसे का इस्तेमाल किया जाए और बाकी पैसा का इंतजाम दूसरे स्रोतों से किया जाए। इससे अचानक हाथ खाली नहीं होगा और हॉस्पिटल से पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद भी उसकी देखभाल के लिए पैसे बचे रहेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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पेशावर में विद्यालय की छत ढहने से 34 लोगों की मौत

पाकिस्तान के पेशावर शहर में गुरुवार को एक निजी विद्यालय की छत ढह जाने से 34 लोगों की मौत हो गयी जबकि 52 लोग घायल हो गये। मृतकों में ज्यादातर 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे और एक शिक्षिका शामिल हैं। घायलों में कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

सरकारी आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ के अनुसार, यह हादसा दीर कॉलोनी के कॉलेज रोड स्थित ‘अल-खैर’ नामक निजी विद्यालय में आज सुबह करीब 08:48 बजे हुआ। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिये गये। स्थानीय प्रशासन और चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के बाद राहत कर्मियों और स्थानीय लोगों ने घंटों मलबे की तलाशी ली, क्योंकि आशंका थी कि और भी बच्चे मलबे में दबे हो सकते हैं। राहत कार्यों में सहायता के लिए पाकिस्तानी सेना के जवान भी बचाव दलों के साथ जुट गये।

लेडी रीडिंग अस्पताल (एलआरएच) के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने बताया कि अस्पताल में आपातकाल घोषित कर डॉक्टर घायलों के इलाज में जुटे हैं।

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इस बीच, पेशावर पुलिस ने विद्यालय के मालिक खान मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि इमारत बेहद खतरनाक हालत में है और इसके और अधिक ढहने का जोखिम बना हुआ है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस भीषण गहरा दुख जताया है।

श्री शरीफ ने ‘एक्स’ पर दुख जताते हुए लिखा है, “विद्यालय की छत गिरने की दुखद और दिल दहला देने वाली घटना का गहरा दुख है, जिससे कई कीमती जानें चली गयी। जान गंवाने वाले बच्चों और शिक्षकों के दुखी परिवारों के साथ मेरी संवेदना है। मैं उन परिवारों के लिए सब्र और हिम्मत की दुआ करता हूं, जिन्होंने अपनी जान गंवायी।”

उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी से घटना की पूरी रिपोर्ट मांगी है। उन्हें यह भी निर्देश दिया है कि घटना में घायल हुए बच्चों और दूसरे लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं दी जायें और प्रभावित परिवारों को हर मुमकिन मदद दी जाये।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

Pic Credit : UNI

पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से 21 की मौत:20 बच्चे और महिला टीचर की जान गई, 40 से ज्यादा घायल

पाकिस्तान के पेशावर में गुरुवार को एक प्राइवेट स्कूल की छत गिरने से 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें 20 छात्र और एक महिला टीचर शामिल हैं। सभी बच्चों की उम्र 13 साल या उससे कम है। यह हादसा दीर कॉलोनी इलाके में हुआ। इसमें 40 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं। उनके इलाज के लिए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। हादसे से जुड़ी 3 फोटोज खबर लगातार अपडेट हो रही है…

IDBI Bank की 60% हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax, लेकिन डील का इस शेयर पर भी दिखेगा असर

CSB Bank Share Price: केरलम के थ्रिसूर की प्राइवेट लेंडर सीएसबी बैंक के शेयरों पर आज इसलिए नजर रहेगी क्योंकि इसके प्रमोटर ने एक और बैंक पर दांव लगाया है। एक कारोबारी दिन पहले सामने आया कि आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी फेयरफैक्स (Fairfax) खरीदने जा रही है, जोकि सीएसबी बैंक की प्रमोटर है। अभी सीएसबी बैंक के शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को बीएसई पर यह 4.07% की बढ़त के साथ ₹320.95 पर बंद हुआ था। आईडीबीआई बैंक का भी शेयर बीएसई पर 9.07% के उछाल के साथ ₹90.44 पर बंद हुआ।

IDBI Bank में कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी Fairfax और क्या है CSB Bank से कनेक्शन

केंद्रीय कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है। फेयरफैक्स सरकार और एलआईसी से आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में खरीदेगी। इसमें से 30.48% हिस्सेदारी सरकार और 30.24% हिस्सेदारी एलआईसी बेचेगी, जिसे कनाडा इंक खरीदेगी। इसकी पेरेंट कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स है। इस डील के पूरा होने के बाद यह फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अब तक की सबसे बड़ी एफडीआई डील होगी।

अब सवाल उठता है कि आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री का सीएसबी बैंक से क्या लेना-देना है। सितंबर तिमाही के आखिरी में एफआईएच मॉरीशस इंवेस्टमेंट्स की इसमें 40% हिस्सेदारी है, जोकि फेयरफैक्स की एक एंटिटी है।

क्या दो बैंक में हो सकती है होल्डिंग?

बैंक ओनरशिप और कंट्रोल को लेकर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कोई प्रमोटर एंटिटी एक समय में दो प्रतिस्पर्धी बैंक नहीं चला सकती है। ऐसे में अगर आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए फेयरफैक्स को मंजूरी मिलती है तो इसे या तो सीएसबी बैंक में हिस्सा बेचना होगा या आईडीबीआई बैंक के साथ विलय का रास्ता निकालना होगा यानी कि इंटीग्रेशन प्रोसेस और अधिक कॉम्प्लेक्स हो सकता है। सीएसबी बैंक बात करें तो इसमें फेयरफैक्स इकलौती प्रमोटर एंटिटी है और बाकी 60% पब्लिक शेयरहोल्डर्स हैं। सितंबर तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से इसमें म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 13.15% है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले करीब 63 हजार खुदरा निवेशकों की इसमें 12.56% हिस्सेदारी है।

कैसी है सेहत

सीएसबी बैंक ने हाल ही में सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है, जिसमें सामने आया कि बैंक का ग्रास एडवांसेज सालाना 22% और डिपॉजिट्स 18% की रफ्तार से बढ़ा। इस दौरान टर्म डिपॉजिट्स भी 22% बढ़ा तो गोल्ड लोन बिजनेस की ग्रोथ 36% रही। अब एक साल में शेयरों के चाल की बात करें इसने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। 5 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के रिकॉर्ड हाई लेवल ₹574.70 पर था, जिससे आठ महीने में यह 48.65% टूटकर 15 सितंबर 2026 को एक साल के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि अभी भी यह ₹197 के आईपीओ प्राइस से ऊपर है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रोबोट ने कर दिया ऐसा गंदा काम, करना पड़ा गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा मामला?

एक रोबोट ने ऐसा गंदा काम कर दिया है की उसे गिरफ्तार करना पड़ा गया। रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक इंसानों की मदद के लिए बनाई गई हैं। लेकिन अब एक रोबोट को लेकर जो खबर सामने आ रही है वो हैरान करनी वाली तो है ही और आपको ये सोचने पर मजबूर भी कर सकती है कि एक रोबोट आपकी मदद करने के अलावा आपके लिए और आपके परिवार के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है अगर वो आपके कंट्रोल से बाहर हो गया तो।

ये मामला जर्मनी के कोलोन शहर का है जहां एक रोबोट पर 16 साल की लड़की को गलत तरीके से छूने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा गया है। रोबोट की हरकत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और रोबोट को जब्त कर लिया है और उसे नियंत्रित करने वाले दो युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोनों युवकों पर फिलहाल कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन उन्हें संदिग्ध माना जा रहा है।

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रोबोट की इस हरकतो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि रोबोट को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा था या उसके प्रोग्रामिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी. इन सब सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस जांच में जुट गई है।

लड़की के पास कैसे पहुंचा रोबोट, फिर क्या हुआ?

पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना 10 अक्टूबर की देर रात कोलोन में एक फास्ट-फूड रेस्तरां के बाहर हुई। जहां 16 साल की एक लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ वहां मौजूद थी। इसी दौरान वहां करीब 120 सेंटीमीटर यानी 1.2 मीटर लंबा लाल और सुनहरे रंग का एक रोबोट उस 16 साल की लड़की के पास पहुंचा। रोबोट ने लड़की के पास जाकर उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ और उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें कीं इस घटना के दौरान रोबोट को कंट्रोल कर रहे दो युवकों पर वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर इस पूरी घचना को लाइव दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था या रोबोट ने ये हरकत खुद कर डाली। पुलिस का भी मुख्य सवाल यही है कि रोबोट की गतिविधियों को कौन नियंत्रित कर रहा था। कोलोन पुलिस के मुताबिक, रोबोट का मालिक 16 साल का है, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा युवक 19 साल का बताया जा रहा है। दोनों युवकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं।

पुलिस ने रोबोट को जब्त कर लिया है, लेकिन रोबोट को जब्त करना इस बात का सबूत नहीं है कि उसने खुद फैसले लेकर ये हरकतें कीं। जांच पूरी होने के बाद ही ये साफ होगा कि घटना के दौरान तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी।

जब सामने आई रोबोट की तस्वीर

रोबोट की तस्वीर को भी पुलिस ने साझा किया जिसमें देखा जा सकता है कि रोबोट सफेद टैंक टॉप, काले ट्रैक पैंट, चश्मा और गले में सोने जैसी चेन पहने हुई है। रोबोट की लांबई करीब 120 सेंटीमीटर बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि घटना के बाद रोबोट एक कार की डिक्की में मिला था। अधिकारियों ने उसे वहीं से जब्त किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए, ताकि घटना से संबंधित वीडियो और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच करने में मदद मिल सके।

क्या रोबोट खुद ले सकता है ऐसे फैसले?

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या रोबोट खुद ऐसी हरकत करने के बारे में खुद से फैसला ले सकता है? क्या मशीन अपने आप ऐसी हरकत कर सकती है या इसके पीछे किसी व्यक्ति का कंट्रोल हो सकता है?

आज कई तरह के रोबोट बनाए जा रहे हैं। कुछ रोबोट सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास की चीजों को पहचानकर काम कर सकते हैं। वहीं, कुछ को रिमोट से नियंत्रित किया जाता है और कुछ में पहले से तय गतिविधियां प्रोग्राम की जाती हैं। आज जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों से लैस रोबोट्स के इस्तेमाल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रोबोट द्वारा ऐसी हरकत ने दुनिया डरा दिया है। हालांकि, किसी रोबोट की क्षमताएं उसके डिजाइन, सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर निर्भर करती हैं। इसलिए बिना जांच के अभी से ये मान लेना ठीक नहीं होगा कि रोबोट ने अपनी मर्जी से ऐसी हरकत को अंजाम दिया।

रोबोट की इस हरकत पर चर्चा के दौरान सवाल तकनीकी खराबी का उठ रहा है। कई बार किसी मशीन या रोबोट में खराबी आने से वो उस तरह से काम नहीं करता है जिस तरह से उसको प्रोग्राम किया गया होता है। इस रोबोट में खराबी थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है इस पर भी पुलिस जांच कर रही है।

क्या एक रोबोट के खिलाफ अपराध का मामला बन सकता है? पुलिस ने जांच के लिए रोबोट को जब्त ज़रूर किया है, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घटना कैसे हुई और इसे नियंत्रित करने वाले लोगों की इसमें क्या भूमिका थी।

फिलहाल दोनों युवक जांच के दायरे में हैं और उन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इसे रोबोट द्वारा किया गया अपराध कहना गलत होगा। यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर AI और रोबोट्स के सुरक्षित उपयोग और उनकी जवाबदेही तय करने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।

रोबोट की इस हरकत की वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है । वायरल वीडियो में एक रोबोट लड़की की तरफ बढ़ता है, एक महिला को धक्का देता और दूसरों को गले लगाता दिख रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इसका मज़ाक उड़ाने और वीडियो शेयर करने वालों को चेतावनी दी है, क्योंकि इससे पीड़ितों पर बुरा असर पड़ सकता है।