IREDA Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 37% बढ़ा, सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फंडिंग दी

IREDA Q1 Results: सरकारी नवरत्न कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 36.8% बढ़कर ₹337.5 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹246.7 करोड़ था।

NII में 24% की बढ़ोतरी

IREDA की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 24.1% बढ़कर ₹856.8 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹690.5 करोड़ थी। IREDA के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बिजय कुमार मोहंती ने कहा कि मजबूत कारोबारी बुनियाद और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए बढ़ती फाइनेंसिंग डिमांड का असर नतीजों में दिखा है।

लोन बुक में भी उछाल

30 जून 2026 तक IREDA की लोन बुक 19% बढ़कर ₹94,936 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹79,941 करोड़ थी। कंपनी ने तिमाही के दौरान ₹4,991 करोड़ उधार जुटाए, ₹6,556 करोड़ के लोन वितरित किए और ₹3,380 करोड़ के नए लोन मंजूर किए।

सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फंडिंग

IREDA की कुल लोन बुक में सोलर एनर्जी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 26% रही। इसके बाद राज्य बिजली कंपनियां (19%), विंड एनर्जी (11%) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (11%) का स्थान रहा।

NIM में सुधार, GNPA बढ़ा

IREDA का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बढ़कर 3.75% हो गया, जो पिछले साल 3.60% था। प्रोविजन कवरेज रेशियो बढ़कर 68.22% और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 20.30% रहा।

हालांकि, ग्रॉस एनपीए (GNPA) मार्च के अंत के 3.49% से बढ़कर 3.76% हो गया। वहीं, नेट एनपीए 1.29% से घटकर 1.23% पर आ गया। कंपनी के मुताबिक, यह बेहतर जोखिम प्रबंधन और मॉनिटरिंग सिस्टम का नतीजा है।

IREDA के शेयर

नतीजों से पहले सोमवार को IREDA का शेयर 2.83% की बढ़त के साथ ₹122.98 पर बंद हुआ। 1 साल में स्टॉक 16.92% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 33.03 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या होता है? जानें इसका मतलब और इसे कैसे बेहतर करें

अपने क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना खुद की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है. भारत में आपको लोन, क्रेडिट कार्ड्स या दूसरी क्रेडिट फैसिलिटीज आसानी से तभी मिल सकती हैं, जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो. ट्रांसयूनियन CIBIL की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 119 मिलियन भारतीयों ने अपना CIBIL स्कोर चेक किया था. ये पिछले साल के मुकाबले 51% ज्यादा है, यानी 43.6 मिलियन ज्यादा लोग अपने क्रेडिट स्टेटस को लेकर एक्टिव हुए हैं. खास बात ये कि Gen Z और मिलेनियल्स 77% हिस्सेदारी के साथ इसमें सबसे आगे हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 46% लोग, जो रेगुलर अपने CIBIL स्कोर और रिपोर्ट चेक करते हैं, 6 महीने में अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर कर लेते हैं. ये उन 41% लोगों से ज्यादा है, जो अपने स्कोर पर ध्यान नहीं देते. यानी क्रेडिट को एक्टिवली मैनेज करने से स्कोर बेहतर होता है, जिससे कम इंटरेस्ट रेट्स, अच्छे ऑफर्स और ज्यादा क्रेडिट लिमिट मिल सकती है. आइए, समझते हैं कि अच्छा क्रेडिट स्कोर क्या है और इसे कैसे बेहतर किया जा सकता है.

क्रेडिट स्कोर क्या है?

क्रेडिट स्कोर एक नंबर है, जो आपकी क्रेडिटवर्थिनेस दिखाता है, यानी आप उधार लिया पैसा चुकाने में कितने काबिल हैं. ये आपके क्रेडिट हिस्ट्री पर बेस्ड होता है. भारत में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 तक होता है. 750 से 900 का स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है.

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क्रेडिट स्कोर की रेंज को ऐसे समझें:

  • 750-900: ये शानदार स्कोर है. इस रेंज में आपको क्रेडिट आसानी से मिलेगा और अच्छे टर्म्स पर.
  • 650-749: ये अच्छी रेंज है. आपकी क्रेडिट हिस्ट्री ठीक है, लेकिन टॉप स्कोर जितनी मजबूत नहीं.
  • 550-649: ये एवरेज रेंज है. क्रेडिट मिल सकता है, लेकिन इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा हो सकते हैं और टर्म्स उतने अच्छे नहीं.
  • 550 से नीचे: ये कमजोर स्कोर है. इस रेंज में क्रेडिट पाना मुश्किल हो सकता है.

भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो हैं, इनमें ट्रांसयूनियन CIBIL, इक्विफैक्स, एक्सपेरियन और CRIF हाई मार्क शामिल हैं. हर ब्यूरो की रेंज और इंटरप्रिटेशन में थोड़ा अंतर हो सकता है.  

क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स

आपके क्रेडिट स्कोर को ये चीजें प्रभावित करती हैं:

  • पेमेंट हिस्ट्री: लोन और क्रेडिट कार्ड की EMI टाइम पर चुकाना बहुत जरूरी है. लेट पेमेंट्स या डिफॉल्ट आपके स्कोर को नीचे ला सकते हैं.
  • क्रेडिट यूसेज: अपनी क्रेडिट लिमिट का ज्यादा यूज करना स्कोर को नुकसान पहुंचाता है. कोशिश करें कि 30% से ज्यादा लिमिट इस्तेमाल न हो.
  • लेंथ ऑफ क्रेडिट हिस्ट्री: क्रेडिट का पुराना रिकॉर्ड आपके स्कोर को बेहतर करता है, क्योंकि इससे आपकी क्रेडिट बिहेवियर की ज्यादा जानकारी मिलती है.
  • क्रेडिट टाइप्स: क्रेडिट कार्ड्स और लोन जैसे अलग-अलग क्रेडिट का मिक्स होना अच्छा है, बशर्ते आप इन्हें जिम्मेदारी से मैनेज करें.
  • नए क्रेडिट एप्लिकेशंस: छोटे वक्त में कई क्रेडिट कार्ड्स या लोन के लिए अप्लाई करना स्कोर को नुकसान पहुंचा सकता है. हर एप्लिकेशन से हार्ड इन्क्वायरी होती है, जो स्कोर को थोड़ा कम करती है.

क्रेडिट स्कोर कैसे बेहतर करें?

क्रेडिट स्कोर को बेहतर करना आसान नहीं, लेकिन थोड़ी मेहनत से यह संभव है. ये रहे कुछ टिप्स:

  • टाइम पर बिल्स पे करें: क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और लोन EMI हमेशा टाइम पर चुकाएं. ऑटोमैटिक पेमेंट्स सेट करें ताकि ड्यू डेट मिस न हो.
  • क्रेडिट कम यूज करें: अपनी क्रेडिट लिमिट का 30% से ज्यादा यूज न करें. इससे लेंडर्स को लगता है कि आप क्रेडिट को जिम्मेदारी से हैंडल करते हैं.
  • क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट रेगुलर चेक करें और कोई गलती या फ्रॉड दिखे तो ठीक करवाएं. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री क्रेडिट स्कोर और डिटेल्ड रिपोर्ट चेक कर सकते हैं.
  • नए क्रेडिट के लिए ज्यादा जल्दबाज़ी न करें: हर एप्लिकेशन से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है. जरूरत पड़ने पर ही नए क्रेडिट के लिए अप्लाई करें.
  • हेल्दी क्रेडिट मिक्स रखें: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड क्रेडिट का बैलेंस आपके स्कोर को बेहतर कर सकता है.

क्रेडिट स्कोर को कैसे मैनेज करें?

क्रेडिट स्कोर को मैनेज करना तब आसान हो जाता है, जब आपके पास सही टूल्स हों. मनीकंट्रोल ऐप और वेबसाइट पर आप फ्री में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर सकते हैं. ये प्लेटफॉर्म आपको आपकी क्रेडिट हेल्थ की लेटेस्ट अपडेट देता है. चाहे आप अपना स्कोर जानना चाहें या उसे बेहतर करना चाहें, मनीकंट्रोल के टूल्स और इनसाइट्स आपकी मदद करेंगे.

कुल मिलाकर अच्छा क्रेडिट स्कोर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और मौकों को आसान बनाता है. भारत में 750 या उससे ज्यादा का स्कोर शानदार माना जाता है और लेंडर्स के लिए आपका फेवर बढ़ाता है. क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करने वाले फैक्टर्स को समझकर और उसे मैनेज करने के लिए सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ को बेहतर कर सकते हैं और अच्छे क्रेडिट टर्म्स पा सकते हैं.

SIP vs Lumpsum: ₹2000 की SIP या ₹2 लाख का लंपसम? आपके बच्चे के लिए कौन-सा निवेश बेस्ट रहेगा, पूरा कैलकुलेशन समझिए

SIP vs Lumpsum: बच्चा जब छोटा होता है, तब उसकी पढ़ाई, कॉलेज या करियर की चिंता दूर की बात लगती है। लेकिन समय बहुत तेजी से निकलता है। आज जो बच्चा गोद में है, वही 15-20 साल बाद इंजीनियरिंग, मेडिकल, MBA या विदेश में पढ़ाई का सपना देख सकता है। ऐसे में अगर आपने समय रहते निवेश शुरू नहीं किया, तो एक साथ बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं होगा।

यहीं से एक सवाल शुरू होता है। अगर आपके पास आज ₹2 लाख हैं, तो क्या उन्हें एक साथ निवेश कर देना चाहिए? या हर महीने ₹2,000 की SIP शुरू करना ज्यादा समझदारी होगी? दोनों के अपने फायदे हैं। आइए आसान भाषा और कैलकुलेशन से समझते हैं।

SIP और लंपसम में क्या अंतर है?

SIP यानी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान में आप हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं। इससे निवेश की आदत बनती है और बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी कुछ हद तक संतुलित हो जाता है।

वहीं लंपसम में पूरी रकम एक साथ निवेश की जाती है। अगर निवेश लंबी अवधि का हो, तो पूरी रकम पहले दिन से ही कंपाउंडिंग का फायदा उठाने लगती है।

इसे उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए आपका बच्चा अभी छोटा है और आप उसके भविष्य के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं। दो विकल्प हैं। हर महीने ₹2,000 की SIP करें या आज ही ₹2 लाख का लंपसम निवेश कर दें। मान लेते हैं कि दोनों निवेशों पर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

15, 20 और 25 साल में कितना बनेगा पैसा?

निवेश का तरीका15 साल20 साल25 साल
₹2,000 की SIP का अनुमानित फंड₹10.09 लाख₹19.98 लाख₹37.95 लाख
आपका कुल SIP निवेश₹3.60 लाख₹4.80 लाख₹6.00 लाख
₹2 लाख का लंपसम निवेश₹10.95 लाख₹19.29 लाख₹34.00 लाख
लंपसम में अनुमानित मुनाफा₹8.95 लाख₹17.29 लाख₹32.00 लाख

नोट: यह कैलकुलेशन 12% सालाना अनुमानित रिटर्न पर आधारित है। म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं। इसलिए वास्तविक रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है।

दोनों रिटर्न में अंतर क्यों दिखता है?

15 साल में ₹2 लाख का लंपसम, ₹2,000 की SIP से थोड़ा आगे दिखता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता है, SIP का फंड बड़ा होता जाता है। इसकी वजह यह नहीं है कि SIP का रिटर्न ज्यादा है, बल्कि इसलिए क्योंकि SIP में हर महीने नया पैसा भी जुड़ता रहता है।

उदाहरण के लिए, 25 साल में SIP के जरिए आपने कुल ₹6 लाख निवेश किए हैं। वहीं, लंपसम में सिर्फ ₹2 लाख लगाए हैं। इसलिए दोनों की तुलना करते समय सिर्फ अंतिम रकम नहीं, बल्कि कुल निवेश को भी ध्यान में रखना चाहिए।

अगर आज ₹2 लाख पड़े हैं…

अब मान लीजिए आपको बोनस मिला है। कोई जमीन बिकी है। या FD मैच्योर हुई है। अगर इस पैसे की अगले 20-25 साल तक जरूरत नहीं है, तो उसे बैंक खाते में पड़ा रहने देने से बेहतर है कि लंबी अवधि के लिए निवेश कर दिया जाए। इससे पूरा पैसा पहले दिन से ही आपके लिए काम करना शुरू कर देगा।

अगर हर महीने बचत करना आसान है…

हर परिवार के पास ₹2 लाख एक साथ नहीं होते। लेकिन ₹2,000 महीने निकालना कई लोगों के लिए मुमकिन होता है। ऐसे में SIP बेहतर विकल्प है। इससे घर का बजट भी नहीं बिगड़ता और धीरे-धीरे अच्छा फंड तैयार हो जाता है।

अगर दोनों कर सकते हैं तो?

मान लीजिए आपके पास ₹2 लाख भी हैं और हर महीने ₹2,000 बचाने की क्षमता भी है। ऐसे में दोनों का फायदा उठाया जा सकता है।

आज ₹2 लाख निवेश कर दीजिए। फिर अगले महीने से ₹2,000 की SIP भी शुरू कर दीजिए। इससे एक तरफ बड़ी रकम लंबे समय तक कंपाउंड होगी और दूसरी तरफ हर महीने नया निवेश भी जुड़ता रहेगा।

सबसे बड़ा रोल समय निभाता है

अक्सर लोग सही म्यूचुअल फंड ढूंढने में महीनों लगा देते हैं, लेकिन निवेश शुरू नहीं करते। जबकि सच यह है कि अच्छे फंड से भी ज्यादा ताकत समय में होती है।

अगर बच्चा अभी 3 साल का है और आपने आज निवेश शुरू कर दिया, तो आपके पास 15 से 20 साल का समय है। यही समय छोटी-छोटी रकम को बड़े फंड में बदल देता है।

इसलिए अगर आज आप सोच रहे हैं कि अगले साल से शुरू करेंगे, तो शायद वही सबसे महंगी गलती होगी। चाहे शुरुआत ₹2,000 महीने से करें या ₹2 लाख एक साथ लगाएं, सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत जितनी जल्दी होगी, भविष्य उतना ही आसान हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

BASIC Home Loan: 2029 तक 500 नए फाइनेंस सेंटर खोलेगी, हर साल ₹60,000 करोड़ तक होम लोन का टारगेट

BASIC Home Loan: फिनटेक कंपनी BASIC Home Loan ने 2029 तक देशभर में 500 BASIC Finance Centres खोलने की योजना बनाई है। कंपनी का मकसद होम लोन को ज्यादा आसान और तेज बनाना है। इसके लिए टेक्नोलॉजी के साथ स्थानीय एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी। कंपनी का लक्ष्य इन सेंटरों के जरिए हर साल ₹50,000-60,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करना है।

पहले इन राज्यों पर रहेगा फोकस

बेसिक होम लोन के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में विस्तार करेगी। इसके बाद पूरे देश में नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। खास फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर रहेगा। कंपनी अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

क्यों जरूरी हैं नए फाइनेंस सेंटर?

कंपनी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद भी लोग होम लोन लेते समय सलाह चाहते हैं। उन्हें सही बैंक चुनने, पात्रता समझने और दस्तावेज तैयार करने में मदद की जरूरत पड़ती है। नए BASIC Finance Centres यही काम करेंगे। यहां AI टेक्नोलॉजी और स्थानीय सलाहकार मिलकर ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवा देंगे।

2027 तक 200 सेंटर खोलने का लक्ष्य

BASIC Home Loan के को-फाउंडर और CEO अतुल मोंगा ने कहा कि टेक्नोलॉजी ने होम लोन आसान बनाया है, लेकिन भरोसा और सही सलाह आज भी उतनी ही जरूरी है। वहीं, कंपनी के सीनियर डायरेक्टर अमरदीप शर्मा ने बताया कि 2027 के आखिर तक 200 फाइनेंस सेंटर शुरू करने का लक्ष्य है। इनके जरिए हर साल ₹15,000-20,000 करोड़ के होम लोन डिस्बर्स करने की योजना है।

स्थानीय कारोबारियों को भी मिलेगा मौका

बेसिक होम लोन का इस विस्तार के साथ 400-500 नए फाइनेंस सेंटर पार्टनर्स भी जोड़ेगी। इसमें स्थानीय उद्यमियों और फाइनेंशियल एडवाइजर्स को शामिल किया जाएगा। उन्हें कंपनी का टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, लेंडर्स का नेटवर्क और ऑपरेशनल सपोर्ट मिलेगा। साथ ही लगातार ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

अब तक कैसा रहा सफर?

BASIC Home Loan अब तक 4 लाख से ज्यादा परिवारों को होम लोन दिलाने में मदद कर चुकी है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी ₹50,000 करोड़ से ज्यादा के होम लोन डिस्बर्स करा चुकी है। उसके पास 30,000 से ज्यादा एजेंट्स का नेटवर्क और देशभर में 120 से ज्यादा BASIC Finance Centres हैं।

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Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

Risks of MTF: मान लीजिए कि स्टॉक मार्केट में MTF (मार्जिन ट्रे़डिंग फैसिलिटी) चुनने वाले हर 30 में से एक को एक ही हफ्ते में मैसेज आए, ‘मार्जिन काल, फंड डालिए, नहीं तो हम बेच देंगे’, तो क्या होगा, हड़कंप मच जाएगा न। वैसे यह कल्पना नहीं रह गई और पिछले महीने जुलाई में दक्षिण कोरिया में ऐसा ही हुआ। अब सवाल ये है कि क्या भारत में भी ऐसा कुछ हो सकता है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का मानना है कि रिस्क तो बढ़ा है। उनका कहना है कि एनालिसिस में गलती हुई तो मार्केट माफ कर सकता है लेकिन अत्यधिक लेवरेज की गलती शायद माफ न हो। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया के निवेशकों ने यह सबक सीखने के लिए सिर्फ चार हफ्ते में करीब ₹12,000 करोड़ गंवा दिए और भारतीय निवेशकों के पास अभी भी यह मौका है कि वे बिना नुकसान उठाए इस अनुभव से सीख लें।

क्या है मामला

शुरुआत में सब शानदार चल रहा था। चिप से जुड़े स्टॉक में तेजी के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स उछलकर जून में रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। साथ ही कोरिया का एमटीएफ यानी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी का लोन बुक रिकॉर्ड 38.6 ट्रिलियन वान (KRW) यानी ₹2.56 लाख करोड़ पर पहुंच गया जोकि एक साल में करीब डबल हो गया। खास बात ये है कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो शेयरों, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix), में लगाया गया था जिनका कोस्पी इंडेक्स में आधे से अधिक हिस्सा है।

फिर बाजार ने गोता लगाया और गिरावट इतनी तेज रही कि कोस्पी जून महीने के रिकॉर्ड हाई से करीब 40% टूट गया। इसके बाद करीब 12 लाख रिटेल अकाउंट्स को मार्जिन कॉल मिले और इनमें से 3.20 लाख-3.60 लाख निवेशकों के शेयर जबरन बेच दिए गए। जबरन बिकवाली से शेयरों की कीमतें और नीचे आईं, जिससे और अधिक निवेशकों को मार्जिन कॉल मिले। इससे खुदरा निवेशकों को करीब 2.15 ट्रिलियन वान (KRW) यानी करीब ₹12 हजार करोड़ की दौलत सिर्फ एक महीने में खत्म हो गई। सबसे अधिक नुकसान 20 से 30 साल की उम्र के निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी इस पूरे नुकसान में 62% रही।

भारत के लिए क्या है चेतावनी

भारतीय मार्केट में एमटीएफ बुक FY23 में लगभग ₹25,000 करोड़ से बढ़कर अब ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो गया है यानी तीन साल में लगभग छह गुना बढ़ोतरी। इस पर सेबी की नजर तो है और सेबी ने एमटीएफ पर एक्सपोजर लिमिट और रिस्क से जुड़े नियम का प्रस्ताव पेश किया है, जिन्होंने हमें कोरिया जैसी बुरी स्थितियों से पहले ही बचा लिया है। हालांकि ध्यान दें कि रेगुलेशन सिर्फ नियम बनाता है, सही फैसला लेने की समझ नहीं देता और वह जिम्मेदारी निवेशकों की खुद की है। यहां ऐसे ही कुछ रिस्क के बारे में बताया जा रहा है, जिन पर ध्यान देना चाहिए-

कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के लिए भी लेवरेज: ब्रोकर करीब 1,500 शेयरों पर एमटीएफ की फैसिलिटी दे रहे हैं। फिलहाल इंडस्ट्री के एमटीएफ बुक का एक बड़ा हिस्सा एफएंडओ सेगमेंट से बाहर के ऐसे स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में है जो लगातार लोअर सर्किट में जा सकते हैं, जिससे अचानक मुश्किल आने पर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता। कोरिया के निवेशकों के शेयर कम से कम किसी कीमत पर तो बिके थे, लोअर सर्किट पर तो शेयर बिकेगा भी नहीं।

नया सिस्टम: एटीएफ का चलन सिर्फ 3-4 साल में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद अभी यहां कोस्पी जैसी स्थिति आई नहीं है जिसका मतलब है कि ₹1.44 लाख करोड़ के लेवरेज ने असली आंधी का सामना नहीं किया है।

युवाओं की अधिक संख्या: एटीएफ का इस्तेमाल कोरियाई मार्केट की तरह अधिकतर युवा ही कर रहे हैं जिन्होंने अधिकतर सिर्फ चढ़ता हुआ मार्केट ही देखा है।

पांच बातों का रखें ख्याल

लेवरेज लोन है, स्ट्रैटेजी नहीं: शेयर परफॉर्म करे या नहीं, सालाना 10-15% की दर से ब्याज देना पड़ता है। 50% मार्जिन पर खरीदे गए स्टॉक से फंडिंग कॉस्ट निकालने के लिए ही सालाना 5% से ज़्यादा रिटर्न मिलना ज़रूरी है। उधार के पैसे से कोई खराब निवेश नहीं बन जाता, बल्कि और खराब हो जाता है।

कुछ ही स्टॉक्स में न लें लवरेज: दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती केवल लीवरेज लेना नहीं था, बल्कि सिर्फ दो शेयरों में भारी निवेश करना था। अगर आपके भी एमटीएफ वाले अधिकतर निवेश सिर्फ दो-तीन स्टॉक्स में हैं, जिनमें बाकी लोग भी पैसे डाल रहे हैं तो गिरावट आने पर सभी लोग एक साथ बेचने की कोशिश करेंगे और ऐसी स्थिति में नुकसान अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

मार्जिन कॉल आ सकती है खराब समय में: अच्छी कंपनी में भी एमटीएफ निवेश से घाटा हो सकता है। इसकी वजह ये है कि मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय में आती है। लोअर सर्किट में ब्रोकर को भी खरीदार नहीं मिलेगा और मार्केट अगर अनुमान से अधिक समय तक नीचे आया और गिरवी रखा पैसा यानी कोलैटरल उतने समय के लिए पर्याप्त न हो तो दिक्कत हो सकती है।

अधिकतम मुनाफा नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिके रहने की योजना: हर मार्केट में कभी न कभी 25% से 30% की गिरावट आती ही है। दक्षिण कोरिया में यह गिरावट सिर्फ चार सप्ताह में आ गई। ऐसे में एमटीएफ का इस्तेमाल से पहले खुद से एक प्रश्न पूछे कि क्या अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए, तो क्या मैं बिना किसी अन्य निवेश को बेचे इस स्थिति से निकल सकता हूं? अगर इसका जवाब ना में है तो आपका निवेश बहुत बड़ा है।

खुद से जरूर पूछें एक सवाल: अगर आप किसी शेयर को बिना उधार लिए हुए पैसे के साथ लॉन्ग टर्म तक नहीं रख सकते, तो इसे उधार लेकर भी नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि लेवरेज सिर्फ उस भरोसे को बढ़ाना चाहिए जो आपके पास पहले से है। यह उस भरोसे की जगह नहीं ले सकता जो आपके पास है ही नहीं।

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भोपाल में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्ती, नगर निगम ने शुरू की सीलिंग कार्रवाई, व्यापरियों में हड़कंप

भोपाल। राजधानी भोपाल के रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में भोपाल नगर निगम ने अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 सेक्टर सहित विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

इसी के तहत भोपाल नगर निगम ने अरेरा कॉलोनी के ई-1 से ई-5 क्षेत्रों में करीब 20 प्रतिष्ठानों के विरुद्ध सीलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर निगम के अनुसार, अब तक शहर में अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर समेत विभिन्न इलाकों के 1,018 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नगर निगम भोपाल द्वारा कार्रवाई लगातार जारी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम ऐसे भवनों पर कार्रवाई कर रहा है, जहां आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

शनिवार को  शाहपुरा थाना क्षेत्र के रघुनाथ नगर, शाहपुरा थाना के पास स्थित एसके प्लाजा को नगर निगम भोपाल ने सील कर दिया है। नगर निगम द्वारा भवन पर चस्पा किए गए आदेश में उल्लेख है कि नगर निगम भोपाल के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं।  इसके साथ ही भवन को सील कर दिया गया है। इस आवासीय भवन में शर्मा विष्णु फास्ट फूड सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों का संचालन बंद करा दिया गया।

भोपाल में नगर निगम के अधिकारियों का  कहना है कि आवासीय क्षेत्रों में नियमों के विपरीत संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहरी नियोजन एवं भवन उपयोग संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को तमिलनाडु से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक उपयोग के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने राज्य सरकारों से 4 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) प्रस्तुत करने को कहा है।

 

दूसरी ओर, व्यापारिक संगठनों ने इस कार्रवाई पर चिंता जताई है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रवक्ता अजय देवनानी का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद से भोपाल का नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है, जिससे कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। उनका सुझाव है कि प्रशासन को गुजरात की तर्ज पर ऐसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, जिसमें आवासीय क्षेत्रों में सीमित और नियमनबद्ध व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सके। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, सीलिंग अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। कार्रवाई के दायरे में मुख्य रूप से छोटी दुकानें, होटल, अस्पताल, बैंक तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं।