रूस पर नए प्रतिबंधों वाले बिल पर ट्रंप जल्द लगाएंगे मुहर, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर?

Russia Sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल पर जल्द हस्ताक्षर करने वाले हैं। इस बिल के तहत ट्रंप को भारत समेत उन देशों पर 100% तक टैरिफ (शुल्क) लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं।

अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा इस कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने गुरुवार को ANI को बताया, “राष्ट्रपति इस बिल पर दस्तखत करने की योजना बना रहे हैं।”

बता दें कि Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस बिल को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 वोटों से पास कर दिया है। यह बिल पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूर हो चुका है और अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर का इंतजार है।

भारत ने द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ने की चेतावनी दी

यह घटनाक्रम तब हुआ जब विदेश मंत्रालय ने कहा कि वॉशिंगटन को बता दिया गया है कि रूसी तेल की खरीद से जुड़े टैरिफ का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली ने कहा कि वह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “पूरी तरह प्रतिबद्ध” है और बाजार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग विक्रेताओं से सप्लाई लेना जारी रखेगी।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “भारत ने भी अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना इरादा साफ कर दिया है।”

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा है।

बता दें कि प्रस्तावित बिल के तहत ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की बड़ी शक्ति मिल सकती है। भारत और चीन ऐसे देशों में शामिल हैं, जिन पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, इस बिल में भारत पर 100% टैरिफ अपने आप लगाने का प्रावधान नहीं है।

ट्रेड बातचीत पर नया दबाव

इस कदम से भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत भी मुश्किल में पड़ सकती है। अमेरिका, भारतीय सामान के एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी जगह है। अप्रैल-अगस्त के दौरान अमेरिका को होने वाला भारतीय सामान का एक्सपोर्ट बढ़कर 42.79 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 40.39 अरब डॉलर था।

रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने सितंबर और अक्टूबर के लिए रूसी क्रूड का इंतजाम पहले ही कर लिया है।

भारतीय रिफाइनरियां वॉशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहते हैं, जिसमें संभावित छूट या कोटा शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि रूसी सप्लाई में कटौती से लागत बढ़ सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ग्लोबल ऑयल मार्केट पहले से ही दबाव में है।

वहीं, भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता अभी भी बिना किसी नतीजे के चल रही है और दोनों पक्ष समझौते तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

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Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, $102 के नीचे आया; सऊदी अरब की पाइपलाइन से मिली राहत

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में 17 सितंबर को भी गिरावट जारी रही। संकेत हैं कि मध्य पूर्व में सप्लाई पर बना दबाव अब कुछ कम हो सकता है। इसकी बड़ी वजह सऊदी अरब की एक अहम पाइपलाइन का कुछ हिस्सा फिर से चालू होना है।

Brent crude $102 प्रति बैरल से नीचे आ गया। बुधवार को भी इसमें 2.7% की गिरावट आई थी। सऊदी अरब अगले कुछ दिनों में अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

ड्रोन हमलों के बाद पिछले हफ्ते इस पाइपलाइन को बंद कर दिया गया था। अब इसे धीरे-धीरे शुरू करने की तैयारी है। सऊदी अरब ने एशियाई रिफाइनरों को ज्यादा तेल भी बेचा है। इसकी डिलीवरी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ठीक बाहर की जगहों पर की जा रही है।

इस साल 70% से ज्यादा चढ़ा तेल

कच्चे तेल की कीमत इस साल 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है। इसी दबाव को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरें बढ़ाईं। फेड ने आगे भी सख्ती के संकेत दिए हैं।

हालांकि, गुरुवार को तस्वीर थोड़ी बदली। शेयर बाजार में तेजी आई। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और तेल की कीमतों में गिरावट रही।

मध्य पूर्व में खतरा अभी टला नहीं

तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है।

ट्रेडर्स की नजर हूती लड़ाकों पर भी है। वे लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में मौजूद Bab el-Mandeb Strait की ओर बढ़ रहे हैं। इस बीच सऊदी अरब के तेल और शिपिंग से जुड़े ठिकानों पर हमले भी बढ़े हैं।

Yanbu से तेल की लोडिंग भी रुकी थी

इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमत करीब चार महीने के हाई पर पहुंच गई थी। शिपिंग इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के Red Sea एक्सपोर्ट हब Yanbu से कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी गई थी।

रियाद ने यूरोप के कुछ ग्राहकों की तेल डिलीवरी भी रद्द की थी। यह फैसला ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद लिया गया। यही पाइपलाइन Yanbu तक कच्चा तेल पहुंचाती है।

पाइपलाइन लंबे समय बंद रही तो बड़ा असर

ट्रेडर्स के मुताबिक, अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो दुनिया की करीब 4% तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

सऊदी अरब ने अभी यह नहीं बताया है कि पाइपलाइन पूरी तरह कब चालू होगी। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने मंगलवार को CNBC से कहा था कि अगले कुछ दिनों में इस पाइपलाइन से कच्चे तेल की सप्लाई फिर शुरू हो सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Petrol Diesel Price Hike: क्या ₹10-₹15 महंगा होगा पेट्रोल? 7 पॉइंट्स में समझिए ट्रंप के नए 100% टैरिफ प्लान का पूरा गणित

US Sanctions India Petrol Price: अमेरिकी संसद ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों वाले बिल को पास कर दिया है। यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। अब सबसे बड़ा सवाल आम आदमी के मन में यह है कि क्या इस फैसले के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे?

अगर भारत रूसी सस्ता क्रूड ऑयल खरीदना बंद करता है या अमेरिका बैन लगाता है, तो पेट्रोल की कीमतें अचानक किसी एक झटके में नहीं बढ़ेंगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत विकल्प के तौर पर कहां से तेल खरीदता है, ग्लोबल क्रूड के दाम क्या रहते हैं और सरकार-तेल कंपनियां टैक्स में कितनी राहत देती हैं। इन 7 पॉइंट्स में समझिए आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा।

1. भारत आखिर कितना रूसी तेल खरीदता है?

साल 2022 के बाद से रूस भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने $40.8 अरब डॉलर का रूसी तेल आयात किया, जो कुल कच्चे तेल आयात का 30.3% था। जुलाई 2026 तक भारत के कुल तेल आयात में अकेले रूस की हिस्सेदारी 51% पहुंच गई थी। भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर रूसी सप्लाई रुकती है, तो भारत को बहुत बड़े पैमाने पर नया सप्लायर ढूंढना होगा।

2. क्या रूसी तेल बंद होते ही तुरंत महंगा हो जाएगा पेट्रोल?

जरूरी नहीं कि तुरंत ऐसा हो, और न ही यह गणित सीधा काम करता है।अगर भारतीय रिफाइनरियां (IOC, BPCL, HPCL) रूस से तेल खरीदना बंद करती हैं, तो वे मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और अमेरिका से क्रूड खरीद सकती हैं। पहले रूस $10 प्रति बैरल से ज्यादा का डिस्काउंट दे रहा था। हालांकि, मिड-2026 में रूस के ‘उराल्स’ क्रूड पर डिस्काउंट घटकर सिर्फ $1 से $2 प्रति बैरल रह गया है। यानी डिस्काउंट पहले से ही काफी कम हो चुका है, इसलिए रूसी तेल बंद होने का झटका उतना भयानक नहीं होगा जितना साल-दो साल पहले होता।

3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें है सबसे बड़ा खतरा

असली चुनौती भारत के रिफाइनरों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगी। अगर अमेरिकी बैन के कारण रूसी क्रूड इंटरनेशनल मार्केट से बाहर हो जाता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत हो जाएगी। मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनावों और सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव $105 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है। जब दुनिया में तेल की सप्लाई घटेगी, तो कच्चे तेल के दाम सभी के लिए बढ़ जाएंगे।

4. भारत दूसरा तेल ढूंढ तो लेगा, लेकिन ‘कीमत’ चुकानी होगी

भारत के पास सऊदी अरब, यूएई, इराक और अफ्रीकी देशों से तेल खरीदने का पुराना अनुभव है। लेकिन सप्लायर बदलना सिर्फ एक नया टैंकर भेजने जितना आसान नहीं होता। हर रिफाइनरी का स्ट्रक्चर खास तरह के कच्चे तेल के लिए डिजाइन होता है।साथ ही अचानक जब भारत और अन्य देश नए विकल्पों की ओर भागेंगे, तो बाजार में प्रीमियम और माल भाड़ा काफी बढ़ जाएगा, जिससे क्रूड एक्विजिशन कॉस्ट महंगी हो जाएगी जिसका सीधा असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

5. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें कई लेयर शामिल होती हैं।

पेट्रोल पंप की अंतिम कीमत = कच्चे तेल की लागत + रिफाइनिंग खर्च + भाड़ा + डीलर कमीशन + केंद्र की एक्साइज ड्यूटी + राज्यों का वैट (VAT)

पेट्रोल-डीजल जीएसटी से बाहर हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेकाबू होता है, केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर और तेल कंपनियां अपने मार्जिन को एडजस्ट करके आम जनता को सीधी महंगाई से बचाती हैं। जैसा मार्च 2026 में क्रूड $122 पहुंचने पर ₹10/लीटर एक्साइज घटाकर किया गया था।

6. तो आखिर कितने रुपये बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम?

इसका कोई एक तय आंकड़ा जैसे ₹10 या ₹20 नहीं दिया जा सकता। यह इन 3 संभावित स्थितियों पर निर्भर करेगा:

सिचुएशन 1 (सामान्य हालात): भारत रूस के बजाय दूसरे देशों से तेल खरीदता है और ग्लोबल सप्लाई सामान्य रहती है। इसका असर ये होगा कि तेल कंपनियों की लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम पर इसका असर ना के बराबर या बहुत मामूली होगा।

सिचुएशन 2 (रूस की सप्लाई पूरी ठप): अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल रुकने से ब्रेंट क्रूड तेजी से महंगा होता है। इससे रिफाइनरियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल ₹2 से ₹5 तक महंगे हो सकते हैं।

सिचुएशन 3 (रूस बैन + मिडिल ईस्ट संकट): अगर रूस के तेल पर रोक के साथ-साथ खाड़ी देशों में युद्ध/तनाव से सप्लाई ठप हो जाए। यह सबसे चिंताजनक स्थिति होगी। सरकार के लिए पुरानी दरों पर पेट्रोल बेचना मुश्किल हो जाएगा और कीमतों में बड़ा इजाफा देखना पड़ सकता है।

7. अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर पेट्रोल पर नहीं, एक्सपोर्ट पर होगा

यह बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को शक्ति देता है, यह अपने आप भारत पर 100% ड्यूटी लागू नहीं करता। वैसे अगर अमेरिका 100% टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत के पेट्रोल पंप पर नहीं, बल्कि अमेरिका जाने वाले भारतीय एक्सपोर्ट्स (कपड़ा, आईटी, जेम्स, दवाइयां) पर पड़ेगा। इससे भारतीय रुपया कमजोर होगा और घूम-फिरकर भारत के आयात बिल पर दबाव बनाएगा।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

भारत के सामने इस समय दो बड़े जोखिम ऑयल शॉक और ट्रेड शॉक खड़े हैं। सस्ता रूसी तेल छोड़ें, महंगा विकल्प चुनें और पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा झेलें। या फिर रूस से तेल खरीदना जारी रखें, अमेरिका के 100% टैरिफ का सामना करें और अपने एक्सपोर्ट सेक्टर को नुकसान पहुंचाएं।

फिलहाल, ग्राहकों को तुरंत पैनिक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार और तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वैश्विक उथल-पुथल के बीच कीमतों को स्थिर रखने का पूरा प्रयास करेंगी।

डे-लो से 500 प्वाइंट्स ऊपर भागा Sensex, चार वजहों से Nifty फिर 23350 के पार

Share Market Rally: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें महंगी की लेकिन चूंकि घरेलू मार्केट को पहले से ही इसकी उम्मीद थी तो इसका कोई खास असर नहीं दिखा। कच्चे तेल की नरमी पर सेंसेक्स और निफ्टी ने रेड जोन से शानदार वापसी की और सेंसेक्स इंट्रा-डे के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवरी को तो निफ्टी भी 23200 के नीचे से रिकवर होकर 23350 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की बढ़त है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 12:46 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 280.73 प्वाइंट्स यानी 0.38% की बढ़त के साथ 74,617.18 और निफ्टी 130.35 प्वाइंट्स यानी 0.56% के उछाल के साथ 23,347.95 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 172.50 प्वाइंट्स टूटकर 74,163.95 तक आया था जिससे यह 513.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,677.56 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 23.95 प्वाइंट्स गिरकर 23,193.65 तक आया था जिससे यह 169.90 प्वाइंट्स चढ़कर 23,363.55 तक पहुंचा था।

Stock Market Rally: ये है वजह

कच्चे तेल में नरमी

सऊदी अरब ने ओमान के जरिए अतिरिक्त कार्गो की पेशकश की, जिससे सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कुछ कम हुईं। इससे कच्चा तेल नरम पड़ा और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल 2% से अधिक टूटकर $104 के नीचे आ गया। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

ऑटो-फार्मा सेक्टर से शानदार सपोर्ट

सेक्टरवाइज मार्केट को आज आईटी, फार्मा और रियल्टी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला है। इनके निफ्टी इंडेक्स में डेढ़-डेढ़ फीसदी की मजबूती आई है। निफ्टी मेटल भी करीब 1% ऊपर चढ़ा है तो निफ्टी एफएमसीजी में आधे फीसदी की तेजी है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 6.47% की गिरावट के साथ 12.32 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

वैल्यू बाइंग

हाल-फिलहाल मार्केट की तेज गिरावट के चलते कई स्टॉक्स आकर्षक वैल्यूएशन पर आ गए तो निवेशक ताबड़तोड़ खरीदारी करने लगे जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। एलकेपी सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स ओवरसोल्ड जोन में आ चुके हैं तो मौजूदा लेवल पर टेक्निकल बाउंस दिख सकता है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Petrol Diesel Price Today: 17 सितंबर को पेट्रोल-डीजल का क्या है रेट? जानें अपने शहर की कीमत

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 17 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Market Insight : बाजार में आज फैसले का दिन, आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे

Market Insight : बाजार की आगे की दशा और दिशा पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में आज फैसले का दिन है। ग्लोबल बाजारों के लिए आज की रात फैसले की घड़ी है। आज रात को US फेड का फैसला आएगा। US में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब 94% पर है। इसका मतलब बाजार में दरों में बढ़ोतरी 94% भाव में शामिल है। अगर दरों में बढ़ोतरी हुई तो शायद कल एक बॉटम भी बने। लेकिन अगर दरों में बढ़ोतरी नहीं आई तो काफी दिलचस्प होगा। निफ्टी हमारे सारे टार्गेट हासिल कर चुका है। जैक्सन होल के बाद हमने CNBC-आवाज़ पर एक शॉर्ट का नजरिया लिया था। 23,100-23,300 के हमारे सारे टार्गेट स्क्रीन पर हासिल हुए। कल सुबह भी खुलते ही 23,650 के SL के साथ शॉर्ट का नजरिया था। कल क्लोजिंग में फिर शॉर्ट में मुनाफावसूली का नजरिया रहा। आज भी वही नजरिया है, इंट्राडे भले शॉर्ट करें, लेकिन निपटा कर जाएं। आज कुछ हिम्मत दिखाने वाले लोग शायद लॉन्ग भी लेकर जाएंगे।

फेड के फैसले से पहले ग्लोबल बाजार में घबराहट

अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 5.041% के इंट्राडे हाई पर है। 2007 के बाद 10-साल की यील्ड सबसे ऊंचे स्तर पर है। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के ऊपर है। आज रात फेड के दरों में बढ़ोतरी की 94% संभावना है।

क्यों उबल रहा है कच्चा तेल?

रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब ने सितंबर की कुछ डिलीवरी रद्द की है। यूरोपीय ग्राहकों की सितंबर की डिलीवरी रद्द की गई है। सऊदी ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद की है। सऊदी ने एहतियातन पाइपलाइन बंद की है। हूतियों के हमले में पाइपलाइन को नुकसान हुआ है। पाइपलाइन की मरम्मत कबतक होगी ये साफ नहीं है।

ईरान युद्ध की कीमत

अमेरिकी कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में कहा गया है कि ईरान युद्ध से अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ बढ़ा है। पहले 5 महीनों में टैक्सपेयर्स पर 38 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। अगले साल की शुरुआत तक महंगाई 0.5% बढ़ सकती है। युद्ध का हर अतिरिक्त महीना 2-3 अरब डॉलर महंगा पड़ रहा है। तनाव बढ़ने पर युद्ध की लागत और बढ़ सकती है। कोर महंगाई पुराने अनुमान से 0.3% ज्यादा रह सकती है।

US डिफेंस सिस्टम पर असर

कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में आगे कहा गया है कि इस युद्ध में US बेस पर सैकड़ों इमारतें और स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं।कुवैत, बहरीन, कतर में US बेस स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं। UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान, जॉर्डन में भी स्ट्रक्चर तबाह हुए हैं।’Operation Epic Fury’ में विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान आया है। इसमें कहा गया है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है।

फेड का फैसला: हमारे लिए क्यों अहम?

पुरी दुनिया की नजर इस समय यूएस फेड पर है। बाजार के मुताबिक 25 Bps दरें बढ़ेंगी। एनालिस्ट का कहना है कि होल्ड या dovish hike के लिए बाजार तैयार नहीं है। BoA का कहना है कि इस स्तर पर रेट होल्ड करना “अभूतपूर्व” होगा। केविन वॉर्श की कोई भी टिप्पणी अहम होगी।

फेड की दर बढ़ोतरी का असर?

इससे इमर्जिंग मार्केट्स में आने वाले निवेश फ्लो पर सीधा असर पड़ता है। सोने और चांदी में रेट हाइक से गिरावट आती है। डॉलर की मांग बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। बेस मेटल्स पर भी दबाव आ सकता है। लोग खर्च कम करते हैं, जिससे मंदी का खतरा बढ़ता है। FCNR डिपॉजिट्स जो हमने जुटाए हैं,उनकी देनदारी भी बढ़ेगी। दर बढ़ोतरी किस मैक्रो हालात में होती है,ये सबसे अहम होता है। अगर इकोनॉमी मजबूत हो तो दर बढ़ोतरी हमेशा निगेटिव नहीं होती। पिछले 2-3 साल में भारत में ETF निवेश नहीं हुआ बल्कि पैसा बाहर ही गया है। ऐसे में काफी लोग कहेंगे कि हमें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन अगर ग्लोबल बाजार में मंदी का खतरा बढ़े तो फर्क पड़ता है।

बाजार: आज का दांव

ब्रेंट $108/बैरल के ऊपर है। इसमें 4 महीने के शिखर के करीब कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में एक्शन जारी रह सकता है। ONGC, OIL इंडिया के लिए पॉजिटिव है। वहीं, OMCs, एशियन पेंट्स और इंडिगो के लिए निगेटिव है। फेड के फैसले से पहले सोने-चांदी की कीमती में कमजोरी है। सोना 6 हफ्तों के और चांदी 5 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह टाइटन और कल्याण के लिए पॉजिटिव है। वहीं, मणप्पुरम, मुथूट फाइनेंस और हिंद जिंक के लिए निगेटिव है। डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। यह फार्मा और IT के लिए पॉजिटिव है लेकिन बैंकों के लिए निगेटिव है।

मेटल्स पर रखें नजर

डॉलर की मजबूती से मेटल्स में गिरावट आ सकती है। Nickel 10 हफ्तों के निचले स्तर पर है। कॉपर फ्यूचर्स 7 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह मेटल शेयरों के लिए निगेटिव है। खास तौर पर हिंद कॉपर,नाल्को और हिंडाल्को पर खराब असर पड़ सकता है।

रबर पर रखें नजर

रबर की कीमतें 1 हफ्ते के निचले स्तर पर हैं। यह अपोलो टायर्स,सिएट और MRF जैसे टायर शेयरों के लिए पॉजिटिव है।

AI और IT: अब आगे क्या?

एंथ्रोपिक के सीईओ अमोदेई (Amodei) ने कहा है कि AI डेवलपमेंट की रफ्तार धीमा करना जरूरी है। यही इंडस्ट्री को आगे लेकर जाने का सबसे अच्छा तरीका है। वहीं, एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने कहा है कि बाजार की ताकतें पहले से मौजूद हैं, नए रेगुलेशन की जरूरत नहीं है। जब तक वो ऐसी चीज जारी ना करें जो बाजार पसंद करेगा,कंपनियों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।

इस बीच खबर आई है कि OpenAI नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी $1.2 ट्रिलियन वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। अनुज सिंघल ने कहा कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगा कि AI ट्रेड खत्म हो गई है। किसी भी बड़ी बुल मार्केट में बड़े करेक्शन सामान्य होते हैं। पहले भी हमने AI के टॉप की बात की है और हर बार AI शेयरों ने नया हाई लगाया। AI अब यहां रहने और आगे बढ़ने के लिए आया है। हर गिरावट में पावर और डाटा सेंटर शेयर खरीदें। IT में अब आपको सावधान और स्टॉक स्पेसिफिक रहना होगा।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए आखिरी सपोर्ट 23,000-23,100 पर है। इसके नीचे बंद हुए तो 200 WMA यानी 22,500 का रास्ता खुलेगा। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,300-23,350 पर है और बड़ा रजिस्टेंस 23,400-23,500 पर है। आज हम निफ्टी पर न्यूट्रल रहेंगे और कल नया नजरिया लेंगे। कल सारे शॉर्ट्स क्लोजिंग में निपटाने का नजरिया था। आज शायद आपको 1 शॉर्ट और 1 लॉन्ग ट्रेड दोनों मिलेंगे।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी का मेक ऑर ब्रेक जोन 55,100-55,500 है। अगर 55,100 के नीचे बंद हुए तो 53,500-54,000 का रिस्क है। लेकिन अगर 55,100-55,500 बचा रहा तो शॉर्ट कवरिंग संभव है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 56,000-56,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 56,500-56,700 पर है। आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे।

 

Trading Ideas :उतार-चढ़ाव भरे सेशन में बेंचमार्क इंडेक्स में तेजी, जानिए आज किन शेयरों में हो सकती है कमाई

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trump Tariff: ट्रंप भारत पर लगा सकते हैं 100% टैरिफ! अगर ये बिल पास हुआ तो हो जाएगी बड़ी मुश्किल

US Russia Sanctions Bill 2026: अमेरिका से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वहां के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक ऐसा विधेयक प्रक्रियात्मक वोट पास हो गया है जो भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। इस बिल का नाम है ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’।

अगर यह विधेयक पूरी तरह पास होकर कानून बन जाता है, तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों (जैसे- भारत और चीन) से आने वाले सामान पर 100% तक का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।

आइए आपको बताते हैं कि इस बिल में भारत के लिए क्या खतरे हैं, अमेरिकी संसद में इस पर क्या खींचतान चल रही है और भारत सरकार का इस पर क्या रुख है।

क्या है 100% टैरिफ वाला नियम? (Section 113)

इस बिल की सबसे अहम और विवादास्पद पहलू सेक्शन 113 है। इसके कानून बनने से पिछले 12 महीनों के दौरान रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 देशों पर यह नियम लागू होगा। सीनेट के मुताबिक, इन 5 बड़े खरीदारों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।

यह टैरिफ केवल तेल के सौदों पर नहीं, बल्कि उस देश (जैसे भारत) से अमरीका में इंपोर्ट होने वाले सभी सामानों पर 0% से लेकर 100% तक लगाया जा सकता है। वैसे बिल में राष्ट्रपति को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रीय हित में जरूरी हो, तो वे किसी देश को इस टैरिफ से छूट दे सकते हैं।

अमेरिकी संसद में क्या हुआ?

US प्रतिनिधि सभा में H. Res. 1530 नाम के एक रूल को 214-211 के बेहद मामूली अंतर से मंजूरी मिली। 211 रिपब्लिकन और 2 डेमोक्रेट्स ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 209 डेमोक्रेट्स और 2 रिपब्लिकन इसके खिलाफ रहे।

वैसे यह प्रक्रियात्मक वोट था। बिल पर अंतिम वोट के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास दस्तखत के लिए भेजा जाएगा। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि वे इस बिल का समर्थन करते हैं।

बिल को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोध क्यों?

अमरीकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेताओं ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य ग्रेगोरी मीक्स ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रम्प को बिना किसी रोक-टोक के टैरिफ लगाने का एकतरफा अधिकार दे देगा। उन्होंने सेक्शन 113 को हटाने की मांग की थी।

कई सांसदों का मानना है कि भारत और चीन जैसे व्यापारिक साझेदारों पर 100% टैरिफ लगाने से अमरीका में ही महंगाई और चीजों के दाम बढ़ जाएंगे।

भारत का क्या रुख है?

भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर अपना रुख बिल्कुल साफ रखा है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत के ऊर्जा खरीद के फैसले पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हित और 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतों से तय होते हैं। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग द्विपक्षीय साझेदारी का एक मजबूत और पुराना स्तंभ है।

Petrol Diesel Price Today: 16 सितंबर को पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा या सस्ता? जानें नए रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 16 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

RBI Repo Rate Hike: आपकी लोन EMI बढ़ सकती है, इकोनॉमिस्ट बोले- अब ब्याज दर बढ़ाएगा RBI

RBI Repo Rate Hike: पिछले कुछ हफ्तों से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में लोन लेना महंगा हो सकता है और पुराने लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है।

RBI कब बढ़ा सकता है ब्याज दर?

Moneycontrol ने 9 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच रायशुमारी कराई। ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान जताया है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अक्टूबर की पॉलिसी समीक्षा में ही पहली 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद फरवरी 2027 में 25 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो जाएगा।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘अगर अगली MPC बैठक तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही हो सकता है।’

महंगा हो सकता है आपका लोन

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि फ्लोटिंग रेट पर चल रहे होम लोन जैसे कर्ज की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

नए होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आप आने वाले महीनों में घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, EMI में कितना बदलाव होगा, यह बैंक की ब्याज दर, आपके बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

महंगाई ने बढ़ाई चिंता

महंगाई भी RBI के लिए चिंता का विषय बन रही है। अगस्त में CPI महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई रही।

अभी महंगाई RBI की 2 से 6 प्रतिशत की तय सीमा में है। लेकिन चिंता यह है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसका असर बाकी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

SBI के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि CPI महंगाई 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में इसके 6 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें निकट भविष्य में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: आज के पेट्रोल-डीजल के दाम जारी, जानें दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 15 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।