Petrol Diesel Price Today: क्रूड ऑयल 108 डॉलर पार, पेट्रोल-डीजल खरीदने से पहले चेक करें आज के नए भाव, अपने शहर की पूरी प्राइज लिस्ट देखें

Petrol Diesel Price Today: 11 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. मिडिल ईस्ट के प्रमुख के ट्रेड रूट्स खासकर समंदर से होने वाले कारोबार पर बढ़ते हमलों और सप्लाई में संभावित रुकावट की वजह से ग्लोबल बाजार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक करीब चार महीनों में पहली बार दोनों प्रमुख ग्लोबल बेंचमार्क हफ्ते का अंत 100 डॉलर से ऊपर रहकर करने की ओर बढ़ रहे हैं.

वैसे राहत की बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी करती हैं.

पहले जानिए क्रूड ऑयल में तेजी क्यों?

रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.05 या 1 फीसदी चढ़कर $108.68 प्रति बैरल पर पहुंच गया है. वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 95 सेंट यानी 1 फीसदी बढ़कर $103.45 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. साप्ताहिक आधार पर दोनों बेंचमार्क में लगभग 13 फीसदी की जोरदार बढ़त दर्ज की गई है। ये 17 जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से लाल सागर के रास्तों पर खतरा बढ़ गया है. यमन के मोचा बंदरगाह पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण होने और स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज में तेल टैंकरों पर हमले तेज होने से रीजनल ऑयल सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है. यमन से सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम चढ़ रहे हैं.

दिल्ली, नोएडा, मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज के पेट्रोल-डीजल के भाव

देश के अलग अलग शहरों में वैट और स्थानीय टैक्स की अलग-अलग दरों के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग अलग होती हैं. 11 सितंबर को प्रमुख शहरों में ताजा दरें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: दिल्ली में आज 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.12और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं, प्रीमियम XP95 ₹109.24 और हाई-ऑक्टेन XP100 ₹167.35 प्रति लीटर पर उपलब्ध है.

नोएडा: नोएडा में पेट्रोल ₹101.77  प्रति लीटर और डीजल ₹95.26 प्रति लीटर है.

गुरुग्राम: गुरुग्राम में पेट्रोल ₹102.97और डीजल ₹95.64 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद में आज पेट्रोल ₹103.28 और डीजल ₹95.94 प्रति लीटर दर्ज किया गया है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल ₹101.89 और डीजल ₹95.36 प्रति लीटर बिक रहा है.

पटना: बिहार के पटना में पेट्रोल ₹113.37 प्रति लीटर और डीजल ₹99.36 प्रति लीटर के स्तर पर है.

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में पेट्रोल ₹105.26 और डीजल ₹100.49 प्रति लीटर है.

भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल में पेट्रोल ₹114.57, डीजल ₹99.64, XP95 ₹123.88 और XG ₹104.90 प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध है.

जयपुर: राजस्थान के जयपुर में 1 लीटर पेट्रोल ₹112.69 और डीजल ₹97.78 में मिल रहा है.

देहरादून: उत्तराखंड के देहरादून में पेट्रोल ₹100.55 प्रति लीटर और डीजल ₹95.93 प्रति लीटर है.

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पेट्रोल ₹103.25, डीजल ₹95.21 और प्रीमियम XP95 ₹111.90 प्रति लीटर बिक रहा है.

भारत में कौन से फैक्टर तैय करते हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल वैल्यू को कई चीजें प्रभावित करती हैं. पहला है कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत. पेट्रोल और डीजल का उत्पादन कच्चे तेल से होता है. जब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो तेल रिफाइनरियों की लागत बढ़ जाती है. डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया की स्थिति का भी असर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो क्रूड आयात करना महंगा हो जाता है.

पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट (VAT) शामिल होता है, जिसके कारण हर राज्य में दरें अलग होती हैं. क्रूड ऑयल को पेट्रोल और डीजल में बदलने की रिफाइनिंग लागत और उसे देशभर के पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का मालभाड़ा भी अंतिम कीमत में जोड़ा जाता है. बाजार में ईंधन की खपत और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है. त्योहारों या मौसम के बदलाव के समय मांग बढ़ने पर भी इसका असर पड़ता है.

अपने मोबाइल पर SMS से ऐसे चेक करें अपने शहर के ताजा रेट

अगर आप अपने शहर में पेट्रोल और डीजल की नई दरें एसएमएस के जरिए जानना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बेहद आसान है-

Indian Oil (IOCL) ग्राहक: अपने मोबाइल से RSP <शहर का कोड> टाइप करें और इसे 9224992249 पर भेज दें.

Bharat Petroleum (BPCL) ग्राहक: मैसेज बॉक्स में RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें.

Hindustan Petroleum (HPCL) ग्राहक: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें.

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: तीन दिन की गिरावट के बाद सोना ₹600 चढ़ा, चांदी भी ₹1200 महंगी

Gold Silver Price: लगातार तीन दिन गिरने के बाद गुरुवार को सोने की कीमत में फिर तेजी आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना ₹600 बढ़कर ₹1,58,600 प्रति 10 ग्राम हो गया। रिटेलर्स और स्टॉकिस्ट्स की नई खरीदारी से सोने को सहारा मिला।

चांदी में भी तेजी जारी रही। इसकी कीमत लगातार तीसरे दिन बढ़ी। गुरुवार को चांदी ₹1,200 चढ़कर ₹2,44,600 प्रति किलोग्राम हो गई। बुधवार को इसका भाव ₹2,43,400 था।

महंगाई के आंकड़ों पर नजर

Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त दिख रही है। अब बाजार की नजर अमेरिका के CPI यानी महंगाई के आंकड़ों पर है। ये आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सितंबर के फैसले को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशक सतर्क दिखे। स्पॉट गोल्ड 1.4% गिरकर 4,340.71 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी करीब 6% गिरकर 64.54 डॉलर प्रति औंस रह गई।

फेड के फैसले का इंतजार

Kotak Securities की AVP कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, गुरुवार को सोना 4,400 डॉलर और चांदी 66 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई।

महंगाई के आंकड़ों से पहले निवेशक थोड़ा संभलकर चल रहे हैं। यही आंकड़े अमेरिकी फेड के 15-16 सितंबर के फैसले के लिए अहम होंगे।

कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी जारी रही। Brent क्रूड करीब 102.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। WTI क्रूड भी करीब 96.5 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

कायनात चेनवाला के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव में अभी कोई खास नरमी नहीं दिख रही है। इससे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इसका असर सोने और चांदी जैसी बुलियन कीमतों पर भी पड़ रहा है।

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोना-चांदी धड़ाम, इन तीन फैक्टर का दिखा असर

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल खरीदने से पहले जान लें आज के नए भाव, देखें आपके शहर की पूरी कीमत लिस्ट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 10 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी 90 अंक नीचे, क्रूड $102 के करीब, इन शेयरों पर करें आज फोकस

Stock Market Live Update: ग्लोबल बाजारों में आज भी कोहराम मचा है। ईरान-US के बीच बढ़ते टेंशन से कच्चा तेल 3 फीसदी उछलकर 102 के पार निकला है। गिफ्ट निफ्टी करीब 90 प्वाइंट नीचे फिसला है। एशिया बाजार भी 2% तक कमजोर हुआ है। कल अमेरिकी बाजारों में भी लगातार तीसरे दिन  गिरावट दिखी। डाओ 400 प्वाइंट टूटा है। US बॉन्ड यील्ड में उछाल भी सेंटिमेंट पर भारी पड़े। 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.85% पर पहुंची।  नवंबर 2023 के बाद सबसे ज्यादा, Treasury Department आज से  6 अरब डॉलर का लॉन्ग-टर्म डेट Buyback करेगा।  इधर डॉलर इंडेक्स में नरमी से सोना-चांदी चमके है।

निफ्टी के 10 बड़े शेयर औसतन 20% टूटे, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी अच्छे मौके

कच्चे तेल के उबाल और ईरान-US टेंशन से बाजार पस्त नजर आ रहा है। आज लगातार तीसरे दिन गिरावट है। निफ्टी ने इंट्रा डे में 23500 का लेवल तोड़ा है। बैंक निफ्टी भी 56500 के करीब है। मिडकैप-स्मॉलकैप में भी बिकवाली है। कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब पहुंच गया है। बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार इस समय मंदड़ियों के कंट्रोल में है। लगातार हमारा नजरिया रहा है,बाजार में शॉर्ट रहें। कल भी 3:30 पर शॉर्ट कैरी करने का नजरिया लिया था। निफ्टी साफ दिखा रहा है कि 23,500 खतरे में है और 23,100-23,300 की भी संभावना ज्यादा है।

कच्चा तेल $100 के करीब है, लेकिन भारतीय बास्केट $106 पर है। अब भारतीय क्रूड बास्केट जुलाई के निचले स्तर से 30% ऊपर है। एक अच्छी बात ये है कि इंडेक्स खराब है,शेयर नहीं। मिडकैप इंडेक्स ऑल टाइम हाई से सिर्फ 2% नीचे है और स्मॉलकैप इंडेक्स तो लाइफ टाइम हाई पर है। इसलिए ये कहना कि बाजार खराब है, ठीक नहीं है। लार्जकैप इंडेक्स में दबाव है और इसी वजह से निफ्टी नीचे है। निफ्टी के 10 सबसे बड़े शेयरों में 1 भी तेजी में नहीं है।

बाजार: क्यों गिर रहे हैं हम?

बाजार की दिक्कत ये है कि सभी बड़े शेयर गिरावट में हैं। निफ्टी,भारत के सबसे बड़े शेयरों का सिर्फ एक झांकी भर है। सबसे बड़े 10% शेयर औसतन 20% नीचे हैं। सबसे बड़े शेयरों की जोरदार पिटाई हुई है। रिलायंस अपने हाई से 20 फीसदी नीचे है। इसी तरह HDFC बैंक 31 फीसदी, ICICI बैंक 5.5 फीसदी, SBI 18 फीसदी, TCS 33 फीसदी, L&T में 11 फीसदी और इंफोसिस में 37 फीसदी की गिरावट आई है। यही कारण है कि निफ्टी अपने हाई से 10% से ज्यादा नीचे है। इन 10 बड़े शेयरों को छोड़ दें तो बाजार खराब नहीं है।

बाजार: आज के संकेत

कच्चा तेल $100 के करीब है, लेकिन भारतीय क्रूड बास्केट $106 पर है। अब भारतीय क्रूड बास्केट जुलाई के निचले स्तर से 30% ऊपर है। US बाजार में गिरावट को हम जितना पचाकर गए थे उससे ज्यादा गिरे हैं। सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी ने नैस्डेक की गिरावट को सीमित रखा। आज फिर IT शेयरों में दबाव रह सकता है।

बाजार: कहां तक गिर सकता है निफ्टी?

निफ्टी में इस साल 2 बड़े बॉटम बने थे। युद्ध के तुरंत बाद 22,331 और मई में 23,123 (क्लोजिंग लेवल)। क्लोजिंग के हिसाब से हम 24,774 तक चले थे। मई के स्तर से जो रैली हुई उसका हम 60% गिर चुके हैं। अगर 23,750 के नीचे बंद हुए तो 61.8% रिट्रेसमेंट होगी। ऐसे में वापस 23,100-23,200 जाने का रिस्क होगा। युद्ध के बाद वाले लो की रैली का भी हम 41% रिट्रेस हो चुके हैं और उसका 50% retracement लेवल आएगा करीब 23,550 पर। यानी कि कुल मिला कर 23,200-23,500 का रास्ता अब शायद खुल चुका है।

बाजार: आज कहां हो नजर?

कल हमने हिंद जिंक, हिंद कॉपर पर पॉजिटिव नजरिया लिया। वो ट्रेड आज भी थोड़ा और चल सकती है। कॉपर और जिंक की कीमतों में आज भी तेजी है। हालांकि चांदी में गिरावट से हिंद जिंक में मुनाफावसूली संभव है। एल्यूमीनियम कीमतें भी 4 हफ्ते के उच्च स्तर पर। हैरानी की बात ये कि दरों में बढ़ोतरी की 65% संभावना पर भी मेटल शेयर चल रहे हैं। इसका मतलब है कि मेटल शायद अब एक Structural Bull Market में आ रहे हैं। IT वापस बाजार की सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। अपने हालिया उच्च स्तर से IT इंडेक्स 2000 अंक गिर चुका है। कैपिटल गुड्स से जुड़े कुछ शेयर आज भी चल सकते हैं। बैंक निफ्टी ने भी कल 56,800 का अहम लेवल तोड़ा है।

एक साथ 6 IPOs खुले हैं, जो 1996 के बाद पहली बार हुआ है। IPOs में जबरदस्त पैसा बन रहा है। इसलिए सेंकडरी मार्केट की काफी लिक्विडिटी वहां जा रही है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी अच्छे मौके हैं।

 

Trading Ideas : शुरुआती नुकसान की कुछ भरपाई के बावजूद निफ्टी 23550 के नीचे , जानिए किन शेयरों में हो सकती है कमाई

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रूस ने आर्कटिक में तेल निकालना शुरू किया:पुतिन ने पहली खेप भरने को हरी झंडी दिखाई; सालाना 3 करोड़ टन तेल उत्पादन का टारगेट

अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने आर्कटिक इलाके में अपने बड़े ‘वोस्तोक ऑयल’ प्रोजेक्ट से तेल निकालना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पहली खेप की लोडिंग को हरी झंडी दिखाई। रूस का लक्ष्य 2027 की दूसरी छमाही तक इस प्रोजेक्ट से सालाना 3 करोड़ टन कच्चा तेल निकालना है। पुतिन का यह महाप्रोजेक्ट उत्तरी साइबेरिया के तैमिर इलाके में है। इसमें वानकोर व पायाखा सहित कई तेल इलाके जुड़े हैं। प्रोजेक्ट से जुड़ी वानकोरनेफ्ट कंपनी में चार भारतीय सरकारी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 49.9% है। इनमें ओएनजीसी विदेश, इंडियन ऑयल, ऑयल इंडिया और भारत पेट्रो रिसोर्सेज शामिल हैं। भारत की होर्मुज पर निर्भरता कम होगी इस प्रोजेक्ट से निकला तेल 790 किमी लंबी पाइपलाइन से कारा सागर के बुख्ता सेवेर टर्मिनल तक पहुंचाया जाएगा। वहां तेल को टैंकरों में भरकर दूसरे देशों को भेजा जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इस इलाके में करीब 700 करोड़ टन तेल का भंडार हो सकता है। रूस से भारत आने वाले तेल के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इसलिए इस प्रोजेक्ट को भारत के लिए खाड़ी देशों से तेल का एक नया विकल्प माना जा रहा है। प्रोजेक्ट में 4.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ परियोजना से जुड़े हवाई परिवहन के लिए एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है। इसका रनवे 3,500 मीटर लंबा होगा। इस प्रोजेक्ट में अब तक करीब 4.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। वोस्तोक प्रोजेक्ट बर्फीले इलाके में है। अभी यहां 50 हजार से अधिक लोग काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में 16,280 मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं। तेल में सल्फर कम, रिफाइनिंग का बोझ घटेगा वोस्तोक के तेल में सल्फर की मात्रा 0.01% से 0.1% है। यानी प्रति किलो तेल में 0.1 से एक ग्राम। सल्फर की मात्रा कच्चे तेल की गुणवत्ता का अहम पैमाना है। पेट्रोल-डीजल बनाते समय इसे तय सीमा तक घटाना पड़ता है। कम सल्फर होने से इसे हटाने में खर्च घट सकता है। इसलिए रिफाइनरी के लिए यह फायदे का सौदा साबित हो सकता है। एक्सपर्ट बोले- संकट में भारत के लिए लाइफलाइन बनेगा यह प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ निनाद शेठ ने भास्कर को बताया कि यह प्रोजेक्ट संकट के समय भारत के लिए लाइफलाइन साबित होगा। भारत को प्रोजेक्ट से क्या फायदा? वोस्तोक हमारी ऊर्जा सुरक्षा का सहारा बनेगा। यहां से आने वाले जहाजों को होर्मुज से नहीं गुजरना होगा। इसलिए खाड़ी में तनाव व अन्य संकट में यह भारत के लिए लाइफलाइन होगा। प्रोजेक्ट कितना बड़ा, असर क्या होगा? वोस्तोक का शुरुआती सालाना लक्ष्य 3 करोड़ टन है। यह भारत के 2024-25 के घरेलू कच्चा तेल उत्पादन से ज्यादा है। तब भारत ने 2.87 करोड़ टन तेल उत्पादन किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों का कितना असर? भारत-रूस में ज्यादातर ट्रेड स्थानीय मुद्राओं में होता ​है। इससे प्रतिबंधों का ज्यादा असर नहीं। हालांकि, यदि बैंकिंग सिस्टम निशाना बने तो संकट पैदा होंगे, पर संभावना कम है। रूस से कितना सस्ता मिलता है तेल? भारत जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से खरीद रहा है। अनुमान है कि रूसी कच्चे तेल पर करीब 30% तक की बचत मिलती है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

रूस ने आर्कटिक में तेल निकालना शुरू किया:पुतिन ने पहली खेप भरने को हरी झंडी दिखाई; सालाना 3 करोड़ टन तेल उत्पादन का टारगेट

अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने आर्कटिक इलाके में अपने बड़े ‘वोस्तोक ऑयल’ प्रोजेक्ट से तेल निकालना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पहली खेप की लोडिंग को हरी झंडी दिखाई। रूस का लक्ष्य 2027 की दूसरी छमाही तक इस प्रोजेक्ट से सालाना 3 करोड़ टन कच्चा तेल निकालना है। पुतिन का यह प्रोजेक्ट उत्तरी साइबेरिया के तैमिर इलाके में है। इसमें वानकोर व पायाखा सहित कई तेल इलाके जुड़े हैं। प्रोजेक्ट से जुड़ी वानकोरनेफ्ट कंपनी में चार भारतीय सरकारी कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी 49.9% है। इनमें ओएनजीसी विदेश, इंडियन ऑयल, ऑयल इंडिया और भारत पेट्रो रिसोर्सेज शामिल हैं। भारत की होर्मुज पर निर्भरता कम होगी इस प्रोजेक्ट से निकला तेल 790 किमी लंबी पाइपलाइन से कारा सागर के बुख्ता सेवेर टर्मिनल तक पहुंचाया जाएगा। वहां तेल को टैंकरों में भरकर दूसरे देशों को भेजा जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इस इलाके में करीब 700 करोड़ टन तेल का भंडार हो सकता है। रूस से भारत आने वाले तेल के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इसलिए इस प्रोजेक्ट को भारत के लिए खाड़ी देशों से तेल का एक नया विकल्प माना जा रहा है। प्रोजेक्ट में 4.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ परियोजना से जुड़े हवाई परिवहन के लिए एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है। इसका रनवे 3,500 मीटर लंबा होगा। इस प्रोजेक्ट में अब तक करीब 4.4 लाख करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। वोस्तोक प्रोजेक्ट बर्फीले इलाके में है। अभी यहां 50 हजार से अधिक लोग काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में 16,280 मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं। तेल में सल्फर कम, रिफाइनिंग का बोझ घटेगा वोस्तोक के तेल में सल्फर की मात्रा 0.01% से 0.1% है। यानी प्रति किलो तेल में 0.1 से एक ग्राम। सल्फर की मात्रा कच्चे तेल की गुणवत्ता का अहम पैमाना है। पेट्रोल-डीजल बनाते समय इसे तय सीमा तक घटाना पड़ता है। कम सल्फर होने से इसे हटाने में खर्च घट सकता है। इसलिए रिफाइनरी के लिए यह फायदे का सौदा साबित हो सकता है। एक्सपर्ट बोले- संकट में भारत के लिए लाइफलाइन बनेगा यह प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ निनाद शेठ ने भास्कर को बताया कि यह प्रोजेक्ट संकट के समय भारत के लिए लाइफलाइन साबित होगा। भारत को प्रोजेक्ट से क्या फायदा? वोस्तोक हमारी ऊर्जा सुरक्षा का सहारा बनेगा। यहां से आने वाले जहाजों को होर्मुज से नहीं गुजरना होगा। इसलिए खाड़ी में तनाव व अन्य संकट में यह भारत के लिए लाइफलाइन होगा। प्रोजेक्ट कितना बड़ा, असर क्या होगा? वोस्तोक का शुरुआती सालाना लक्ष्य 3 करोड़ टन है। यह भारत के 2024-25 के घरेलू कच्चा तेल उत्पादन से ज्यादा है। तब भारत ने 2.87 करोड़ टन तेल उत्पादन किया था। अमेरिकी प्रतिबंधों का कितना असर? भारत-रूस में ज्यादातर ट्रेड स्थानीय मुद्राओं में होता ​है। इससे प्रतिबंधों का ज्यादा असर नहीं। हालांकि, यदि बैंकिंग सिस्टम निशाना बने तो संकट पैदा होंगे, पर संभावना कम है। रूस से कितना सस्ता मिलता है तेल? भारत जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से खरीद रहा है। अनुमान है कि रूसी कच्चे तेल पर करीब 30% तक की बचत मिलती है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

Share Market Crash: 5 सेकंड में ₹3 लाख करोड़ साफ, Sensex 600 प्वाइंट्स कमजोर, 4 वजहों से Nifty आया 23500 के नीचे

Share Market Crash: अमेरिका ने ईरान के तेल टैंकरों पर हमला किया तो ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर 20 मिसाइलें दागी तो खलबली मच गई। इसकी आंच में घरेलू मार्केट भी झुलस गया और आज शुरुआती कारोबार में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹3 लाख करोड़ गिर गया यानी निवेशकों की दौलत इतनी कम हो गई। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव पर सेंसेक्स 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का तगड़ा दबाव है लेकिन स्मॉलकैप स्पेस में थोड़ी कम। निफ्टी मिडकैप 100 में फिलहाल करीब आधे फीसदी की गिरावट है तो दूसरी तरफ निफ्टी स्मॉलकैप 100 में गिरावट थोड़ी कम है।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:38 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 461.33 प्वाइंट्स यानी 0.61% की गिरावट के साथ 75,116.25 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 109.40 प्वाइंट्स यानी 0.46% की फिसलन के साथ 23,525.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 608.59 प्वाइंट्स टूटकर 74,968.99 और निफ्टी 157.55 प्वाइंट्स गिरकर 23,477.55 तक आ गया था।

Share Market Crash: ये है वजह

Iran-US War

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने जॉर्डन में मौजूद एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। ईरान की IRGC ने इसे अमेरिकी हमलों के जवाब में ‘सजा देने वाला ऑपरेशन’ बताया। इसने दुनिया भर में फिर जियो-पॉलिटिकल टेंशन को और बढ़ा दिया।

कच्चे तेल में उछाल

पश्चिची एशिया में बढ़ते तनाव पर कच्चा तेल उबल गया, जिसकी आंच में मार्केट झुलस रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2% उछलकर प्रति बैरल $100 के करीब पहुंच गया।

आईटी सेक्टर ने बनाया भारी दबाव

मार्केट पर आज आईटी सेक्टर ने भारी दबाव बनाया है। मेटल और फार्मा में हल्की-फुल्की रौनक को छोड़ लगभग हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव है लेकिन किसी भी अहम सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1% या इससे अधिक की गिरावट नहीं है लेकिन निफ्टी आईटी 3% से अधिक टूट गया है।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में उछाल से मार्केट पर दबाव पड़ा। फिलहाल यह 3.31% की बढ़त के साथ 11.61 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

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ईरान का अमेरिका पर बड़ा पलटवार! 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GIFT निफ्टी में गिरावट, ब्रेंट क्रूड में उबाल, सेंसेक्स और निफ्टी में हो सकती है सुस्त शुरुआत

बुधवार सुबह GIFT निफ्टी में गिरावट आई है। इससे संकेत मिलता है कि सेंसेक्स और निफ्टी हल्की गिरावट के साथ खुल सकते हैं। एशियाई बाजारों में तेजी रुख के बावजूद,अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई है,जो बाजार पर दबाव डाल रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है,जो भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। इसके अलावा,वॉल स्ट्रीट में कल हुई गिरावट और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना भी बाजार के मूड को सतर्क बनाए रख सकती हैं।

फिलहाल GIFT निफ्टी 23,655 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यह पिछले दिन की क्लोजिंग से 0.25 प्रतिशत नीचे दिख रहा है। इससे पहले,मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखी गई थी। निफ्टी लगभग तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद 144.05 अंक या 0.61 प्रतिशत गिरकर 23,635.10 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 555.23 अंक या 0.73 प्रतिशत गिरकर 75,577.58 पर आ गया।

पिछले सेशन में संस्थागत निवेशकों का रुझान मिला-जुला रहा। 8 सितंबर को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) नेट सेलर बन गए और उन्होंने 123 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने सपोर्ट जारी रखा और सेशन के दौरान 566 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

Market Trend : मार्केट का ट्रेंड निगेटिव, कमजोर बाजार में भी ये डिफेंस और बैंकिंग शेयर दिखा सकते हैं दम

AI और चिप शेयरों में तेज़ी से एशियाई बाजारों में तेजी

आज बुधवार को एशियाई शेयर बाजारो में तेजी दिख रही है। इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लगातार बने उत्साह के कारण टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों में हुई बढ़त है।

MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.6 प्रतिशत बढ़ा है। इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर का रहा। चिप बनाने वाली कंपनियों SK Hynix और Samsung Electronics के शेयरों में बढ़त के कारण दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स 1.4 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। मंगलवार को वॉल स्ट्रीट पर फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की बढ़त के बाद एशियन टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी आई है।

जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है,जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स में 0.8 प्रतिशत की बढ़त हुई है। Shanghai Composite में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई है,जबकि हांगकांग के Hang Seng में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.1 प्रतिशत गिर गया है। एशियाई कारोबार में S&P 500 फ्यूचर्स में भी कोई खास बदलाव नहीं हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चा तेल है। ईरान द्वारा खाड़ी में US की सैन्य ठिकानों पर नए हमले करने के बाद लगातार चौथे सेशन में इसकी कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड फ़्यूचर्स $1.57 यानी 1.6% बढ़कर $99.49 प्रति बैरल पर आ गया है। जिससे क्रूड $100 के स्तर के बहुत करीब पहुंच गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड की कीमत $1.60 या 1.72 प्रतिशत बढ़कर $94.63 प्रति बैरल हो गई। अगस्त की शुरुआत से अब तक ब्रेंट की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

अमेरिकी बाजार

मंगलवार को S&P 500 गिरावट के साथ बंद हुआ। सेल्सफोर्स और सॉफ्टवेयर बनाने वाली दूसरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। वहीं,मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ गईं और निवेशक महंगाई के आंकड़ों पर नजरे बनाए रहे,जिनका असर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना पर पड़ सकता है। S&P 500 में 0.58% की गिरावट आई और यह 7,673.52 अंक पर बंद हुआ। नैस्डैक 0.32% गिरकर 26,421.41 अंक पर आ गया, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.18% गिरकर 52,786.07 अंक पर बंद हुआ।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि निफ़्टी के लिए 23,700-23,800 का स्तर तुरंत रेजिस्टेंस का काम करेगा,जबकि 23,600 का स्तर अहम सपोर्ट बना रहेगा। अगर निफ़्टी 23,600 के नीचे टूटता है तो गिरावट 23,400 तक बढ़ सकती है। वहीं, 23,800 के ऊपर रिकवरी से कुछ समय के लिए स्थिरता आ सकती है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, दिल्ली समेत प्रमुख शहरों के रेट यहां देखें

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 09 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।