Market Insight :अगर शॉर्ट नहीं कर सकते तो ये बाजार आपके लिए नहीं, दोनों तरफ बनेंगे पैसे

Market Insight : खराब ओपनिंग के बाद बाजार में रिकवरी की कोशिश हो रही है। निफ्टी निचले स्तरों से 100 अंकों से ज्यादा सुधरकर 23980 के करीब आ गया है। बैंक निफ्टी भी नीचे से करीब 250 अंक सुधरा है। लेकिन मिड और स्मॉलकैप में दबाव देखने को मिल रहा है। उधर वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में भी गिरावट आई है। अब सवाल ये है कि क्या हम ब्रेकडाउन के करीब हैं? इस पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी पिछले 2 हफ्तों से एक रेंज में रहा है। 8 जुलाई की कैंडल को तोड़ने में 10 दिन से ज्यादा लगे। लेकिन पिछले शुक्रवार का वो ब्रेकआउट नकली निकला।

हमने बात की थी कि अब रेंज के निचले स्तरों पर जाने का रिस्क है। ये भी संभव है कि हम अब एक रेंज का ब्रेकडाउन दिखा दें। मगर जैसे ब्रेकआउट फेल हुआ था,क्या पता ब्रेकडाउन भी फेल हो। मगर इसमें कोई शक नहीं है कि बाजार में डर लौटा है। डर है कि US-ईरान लड़ाई फिर से लंबा न खींच जाए। यह भी डर है कि वापस कच्चे तेल की कीमत और सप्लाई पर असर न पड़े। कच्चा तेल अब वापस $100 पार करने की तैयारी कर रहा है। India VIX पर भी नजर रखें, 14.5 का मेक ऑर ब्रेक जोन है।

अच्छी बात यह है कि इस बार मार्च जैसी पेनिक सेलिंग नहीं है और कच्चे तेल से जुड़े शेयर भी टूट नहीं रहे हैं। उम्मीद होगी कि US चुनाव से पहले ये लड़ाई जल्दी खत्म हो, क्योंकि इस समय बाजार बाकी फैक्टर्स को नजरअंदाज कर रहा है।

बाजार: आखिर क्यों गिर रहे हैं हम?

कल भी हमने समझाया था कि बाजार क्यों गिरेगा। बाजार के सभी बड़े सेक्टर्स ने थकान दिखाई थी। एक-एक कर आज बड़े सेक्टर्स की दिक्कत दिखती है। बैंक सबसे बड़ा फैक्टर है। यह सबसे बड़ा सेक्टर है और सबसे ज्यादा दिक्कत भी यहीं है। HDFC बैंक खराब नतीजों के बाद 52-हफ्ते के निचले स्तर पर जाने को तैयार दिख रहा है। ICICI बैंक में अच्छे नतीजों पर भी बड़ा पॉजिटिव रिएक्शन नहीं देखने को मिला है। SBI में नतीजों से पहले का डर और SBI फंड्स की फीकी लिस्टिंग का असर दिख रहा है। इसके अलावा डॉलर-रुपया,बॉन्ड यील्ड और कच्चा तेल सब मैक्रो निगेटिव हैं।

IT की रैली फिर हुई फेल 

IT की रैली फिर फेल हो गई है। यह दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है जहां रैली फिर फेल होती दिख रही है। IT में रैली कोस्पी और चिप शेयरों में गिरावट से हुई थी। 2-3 दिनों से फिर AI रैली शुरू हुई है। मंगलवार को गैपअप पर हमने IT में मुनाफावसूली का नजरिया लिया था। फार्मा पर ट्रंप की नजर लग गई है।

यह बड़ा सेक्टर नहीं है लेकिन कम से कम चल तो रहा था। यहां डॉनल्ड ट्रंप की नजर लग गई और कल एक्सीडेंट हो गया। कल बहुत लोगों ने कहा ये न्यूट्रल है,इसका कोई असर नहीं होगा। सिर्फ CNBC-आवाज़ ने नजरिया लिया कि एक बार तो शेयर गिरेंगे। आज डॉ रेड्डीज के खराब नतीजों का भी असर दिखेगा। अब सिर्फ ऑटो,FMCG जैसे कुछ सेक्टर्स हैं जहां लोग चुप रहे हैं।

बाजार: आज के घरेलू संकेत

आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का दिन है। आमतौर पर वीकली एक्सपायरी ऑप्शन राइटर्स की रेंज में होती हैं। इसके अलावा आज नतीजों के लिहाज से काफी बड़ा दिन है। इनमें से इंफोसिस के नतीजे सबसे अहम होंगे। अगर इंफोसिस की कमेंट्री खराब हुई तो IT फिर टूटेगा। लेकिन अगर इंफोसिस ने पॉजिटिव बोला तो शायद रैली फिर शुरू हो जाए।

बाजार: क्या हो रणनीति?

अगर शॉर्ट नहीं कर सकते तो ये बाजार आपके लिए नहीं है। इस बाजार में परमा बुल (Perma Bull)पैसा नहीं बना पाएगा। बाजार में दोनों तरफ के मौके हैं। लेकिन रेंज के सिरे में जब खड़े हों तो सावधान होना होगा, जैसे अब आज शायद शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की हो। मोटा-मोटी हम 23,800-24,300 की रेंज में रहे हैं। अभी कुछ समय हमें शायद इसी रेंज में ऑपरेट करना हो। लेकिन स्टॉक स्पेसिफिक मौके अभी भी हैं और ये बाजार अच्छे नतीजों को रिवॉर्ड कर रहा है। सबसे बड़ा उदाहरण था बजाज ऑटो। अगर आपने मंगलवार को टॉप पर भी लिया,तब भी कल बड़ा पैसा बना। मगर बाजार में निराश करने की जगह नहीं है। कल इसका सबसे बड़ा उदाहरण था बंधन बैंक। बाजार में नतीजों पर रिएक्शन बड़े खतरनाक आ रहे हैं। आज का सबसे मजेदार शेयर होगा OFSS। कल शेयर औंधे मुंह गिरा लेकिन नतीजे शानदार हैं। मगर साथ ही OFSS के MD & CEO का इस्तीफा निगेटिव भी है।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए सबसे अहम सपोर्ट जोन 23,800-23,850 है। स्क्रीन बता रही है कि एक ना एक बार तो ये सपोर्ट जोन टेस्ट होगा। अगर ये लेवल बचा तो रिकवरी आ सकती है। मगर ये टूटा तो 23,600-23,700 का रिस्क होगा। पहला रजिस्टेंस 24,000-24,050 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,150-24,250 पर है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी के लिए अब 56,600-56,800 मेक ऑर ब्रेक जोन है। 56,800 पर 50 DEMA और 56,600 पर 100 DEMA है। अगर ये लेवल्स टूटे तो 56,000 भी टूटने का रिस्क रहेगा। बैंक निफ्टी में किसी भी रैली में भरोसा नहीं है क्योंकि सबसे बड़े शेयर चलने को तैयार नहीं हैं। ICICI बैंक,HDFC बैंक या SBI में से किसी को बड़ी लीडरशिप लेनी पड़ेगी। बैंक निफ्टी में जहां रिकवरी फेल हो,वहां बेचने पर पैसा बन रहा है।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US-Iran war: 6 हफ्ते के हाई पर कच्चा तेल, $95 पार निकला भाव, एक्सपर्ट से जानें क्या है नियर-टर्म आउटलुक

US-Iran war: कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार 23 जुलाई को 1.5 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया। भाव 95 डॉलर के पार निकलकर 6 हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया है। तेल में यह तेजी अमेरिका के ईरान पर नए हमले किए जाने और यमन के हूथी विद्रोहियों के लाल सागर में तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद देखा गया है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $1.93, यानी 2% बढ़कर $96 प्रति बैरल हो गया, जो 8 जून के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। पिछले सेशन में बेंचमार्क $94.07 पर बंद हुआ था, जो $3 से ज़्यादा और छह हफ़्ते के सबसे ऊंचे लेवल से थोड़ा नीचे था।

इस बीच, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $1.44, या 1.7% बढ़कर $88.27 प्रति बैरल हो गया, जिससे बुधवार की लगभग 3% की तेज़ी और बढ़ गई।

अमेरिका की सेना ने कहा कि उसने ईरान पर लगातार 12वीं रात हमला किया। यह तब हुआ जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कसम खाई थी कि जब भी तेहरान होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ पर हमला करेगा, तो वे ईरानी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएंगे, जिससे लड़ाई और बढ़ गई।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में एक माइन वाले रास्ते से गुज़रने की कोशिश करते समय एक तेल टैंकर में धमाका होने के बाद आग लग गई। उन्होंने यह भी कहा कि दो और टैंकरों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। गार्ड्स ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उनके कंट्रोल में है और जब तक इस इलाके में US मिलिट्री ऑपरेशन जारी रहेंगे, यह “पूरी तरह से बंद” है, उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के साथ कोऑर्डिनेशन के बिना किसी भी जहाज़ को अंदर आने या बाहर निकलने की इजाज़त नहीं दी जाएगी।

यह लड़ाई होर्मुज स्ट्रेट से भी आगे बढ़ गई है, ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के ज़रिए सऊदी तेल ले जाने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी है और सऊदी अरब की नेवल नाकाबंदी की घोषणा की है।

हूतियों ने कहा कि उन्होंने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए हैं, जबकि समुद्री सुरक्षा रिपोर्टों से पता चला है कि ग्रुप द्वारा पहचाने गए जहाजों में से एक, सऊदी झंडे वाला टैंकर एनसेलिया, लाल सागर में टकरा गया था।

ग्रुप ने यह भी दावा किया कि उसने जहाजों को सऊदी पोर्ट्स पर जाने से रोकने की चेतावनी देने के बाद लगभग 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर किया था। हालांकि, रॉयटर्स इस दावे को अलग से वेरिफ़ाई नहीं कर सका।

लाल सागर में हूथी ब्लॉकेड और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते में माइनिंग की गई है, ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच, एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, पिछले हफ़्ते अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 2 मिलियन बैरल बढ़ गया। यह बढ़ोतरी तब हुई जब रिफाइनरी एक्टिविटी धीमी हो गई, कच्चे तेल का एक्सपोर्ट कम हो गया और इंपोर्ट बढ़ गया, जो रॉयटर्स पोल में एनालिस्ट्स की 1.1 मिलियन बैरल की कमी की उम्मीदों के उलट था।

आगे कहां तक जाएगी कीमतें

कोटक सिक्योरिटीज की AVP कमोडिटी रिसर्च, कायनात चैनवाला के अनुसार, बैकवर्डेशन भी गहरा गया है, जिसमें प्रॉम्प्ट-टू-सेकंड-महीने का स्प्रेड $3 तक बढ़ गया है, जो दिखाता है कि शॉर्ट-टर्म अवेलेबिलिटी की चिंताएं लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स से ज़्यादा हैं।

चैनवाला ने कहा, “होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी सभी एक साथ रुकावट के सिग्नल दे रहे हैं, फिजिकल सप्लाई में अभी तक कोई खास कमी नहीं आई है, लेकिन रिस्क प्रीमियम तेज़ी से बढ़ रहा है। इन चोकपॉइंट्स पर कोई भी नई बढ़ोतरी आने वाले सेशन में $100 ब्रेंट का रास्ता बना सकती है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ऑयल $85 के निशान से ऊपर पॉजिटिव बायस के साथ ट्रेड कर रहा है, जिसे चल रहे जियोपॉलिटिकल टेंशन का सपोर्ट है।

पोनमुडी ने कहा, “तुरंत रेजिस्टेंस $86.5–$87 पर है, उसके बाद $88–$88.5 ज़ोन है। नीचे की तरफ, तुरंत सपोर्ट $84.5–$84 पर दिख रहा है, और इस लेवल से नीचे जाने पर कीमतें $82 के निशान तक जा सकती हैं। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स से अगला डायरेक्शनल मूव तय होने की संभावना है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

 Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार हुआ बेहाल, जानिए आगे क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार हुआ बेहाल, जानिए आगे क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Markets crash: ट्रंप टैरिफ और क्रूड की मार से बाजार बीमार नजर आ रहा है। कच्चा तेल 94 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। निफ्टी 200 अंक टूटकर 24000 के नीचे आ गया है। बैंक निफ्टी में 800 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई है। बैंक निफ्टी 200 DEMA के नीचे फिसल गया है। ICICI, SBI और HDFC बैंक मेन विलेन रहे हैं। मिडकैप-स्मॉलकैप का हाल भी बेहाल है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX उछलकर 13 के पार चला गया है।

FMCG, ऑटो को छोड़कर सभी सेक्टर लाल निशान में दिख रहे हैं। रियल्टी शेयरों में आज सबसे ज्यादा बिकवाली आई है। रियल्टी इंडेक्स करीब तीन फीसदी फिसला है। साथ ही सरकारी बैंक, IT और फाइनेंशियल इंडेक्स भी करीब 1.5 फीसदी गिरे हैं। वहीं चुनिंदा ऑटो शेयरों में अच्छी खरीदारी दिखी है। दमदार नतीजों के बाद Bajaj Auto और TVS Motor में जोरदार रफ्तार देखने को मिली है।

ट्रंप टैरिफ के डर से अब तक मजबूती दिखा रहे फार्मा सेक्टर के भी सेंटीमेंट खराब हुए हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। ऑरो फार्मा, जायडस लाइफ और ल्यूपिन में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

नतीजों के लिहाज से कल बेहद अहम दिन है। निफ्टी की तीन कंपनियां इंफोसिस, इंडिगो और सिप्ला Q1 रिजल्ट्स पेश करेंगी। इंफोसिस का Constant Currency रेवेन्यू 1.8% बढ़ सकता है। मार्जिन में भी हल्का सुधार संभव है। साथ ही एम्फैसिस, सोना BLW समेत वायदा के 5 कंपनियों के नतीजों का भी इंतजार रहेगा।

ऐसे में बाजार की चाल पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार के लिए आज बेहद खराब दिन रहा। निफ्टी,बैंक निफ्टी, IT, फार्मा सभी नीचे हैं। मिड और स्मॉल कैप में भी गिरावट है। बैंक निफ्टी ने 57,500 तोड़ते ही बड़ी गिरावट दी है। सुबह 57500 टूटने पर शॉर्ट करने का हमारा नजरिया भी था। अब 57,000 पर आखिरी बड़ा सपोर्ट है। निफ्टी भी इंट्रा डे में 24,000 के नीचे आया। अगर यहां टिका तो वापस 23,800 तक फिसलने का रिस्क खुलेगा। कच्चे तेल में उबाल सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है। सुबह हमने बात की थी कि सभी बड़े सेक्टर्स अब थक रहे हैं।

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बाजार: अब क्या?

ये बाजार थकाने वाला है। ना ये चल रहा है और ना ही तेजी से टूट रहा है। एक ही रेंज में बार-बार दोनों तरफ के लेवल टेस्ट हो रहे हैं। बाजार में बड़ी रैली के लिए कच्चे तेल की तेजी थमनी जरूरी है। अगर कच्चे तेल में ऐसे ही तेजी रही तो 23,800 पर भी रिस्क रहेगा। बैंक निफ्टी में सबसे ज्यादा दिक्कत है। HDFC बैंक सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। बंधन बैंक के एक्सीडेंट से भी सेंटीमेंट खराब हुआ है।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,850-23,950 पर सपोर्ट और 24,150-24,200 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 56,800-57,000 पर सपोर्ट और 57,500-57,800 पर रेजिस्टेंस है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या फिर महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल? हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद पलटे भारत आ रहे 2 तेल टैंकर, लाल सागर में भी बढ़ा संकट!

Houthi Warning Saudi Arabia Red Sea: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के बीच लाल सागर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Militia) द्वारा सऊदी अरब को दी गई ‘आंख के बदले आंख’ की खुली चेतावनी के बाद भारत और चीन आ रहे तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को अपना रास्ता बदलकर यू-टर्न लेना पड़ा है।

पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉक के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित है। ऐसे में लाल सागर के इस अहम समुद्री मार्ग पर नया संकट गहराने से दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें फिर भड़क सकती हैं। जानिए लाल सागर में क्या हुआ और इसका क्या असर हो सकता है।

किन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न?

रॉयटर्स के शिपिंग डेटा के मुताबिक, जिन तीन तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदला है, उनमें से दो सीधे भारत आ रहे थे:

Rodos (रोडोस): लगभग 7 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह टैंकर मंगलवार को लाल सागर में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की तरफ मुड़ गया।

Amazon (अमेजन): भारत की ओर आ रहा यह स्वेजमैक्स टैंकर भी हुथियों की धमकी के बाद वापस स्वेज की ओर लौट गया।

Xin Long Yang (सिन लोंग यांग): चीन जा रहे इस बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) ने सऊदी अरब के यानबू पोर्ट से 20 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन इसने भी आगे बढ़ने के बजाय स्वेज का रास्ता चुन लिया।

हूती विद्रोहियों की ‘आंख के बदले आंख’ वाली चेतावनी क्या है?

यमन के हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है।विद्रोहियों का दावा है कि सऊदी अरब ने यमन पर ‘अन्यायपूर्ण और दमनकारी’ घेराबंदी की है, जिसके जवाब में उन्होंने ‘आंख के बदले आंख’ के सिद्धांत के तहत सऊदी दुश्मन के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी तुरंत लागू कर दी है।

हूती समूह ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी है कि वे सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह से सामान लोड या अनलोड न करें। अगर कोई जहाज ऐसा करता है, तो उसे किसी भी स्थान पर निशाना बनाया जाएगा।

जहाजों ने ट्रांसपोंडर बंद किए, बढ़ी हलचल

हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद लाल सागर और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण यानबू पोर्ट के आसपास नौवहन काफी जोखिम भरा हो गया है। मंगलवार से लाल सागर में तैर रहे और यानबू पोर्ट पर लोडिंग कर रहे कई तेल टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने और हुथी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं।

वैश्विक शिपब्रोकर क्लार्कसन्स (Clarksons) के अनुसार, अगर हूती विद्रोहियों की धमकियों का असर लाल सागर के ट्रैफिक पर पड़ता है, तो कच्चे तेल के जहाजों के रास्तों में बड़ा फेरबदल होगा और यानबू से निकलने वाले तेल को यूरोप की तरफ डायवर्ट करना पड़ सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और सऊदी अरब से आता है। भारत आ रहे दो टैंकरों (Rodos और Amazon) के रास्ता बदलने से रिफाइनरियों तक क्रूड पहुंचने में देरी हो सकती है। लाल सागर में तनाव बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल भाड़ा काफी बढ़ सकता है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा हो सकता है।

Petrol Diesel Price Today: आज के पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव जारी, जानें आपके शहर का रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 22 जुलाई 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट —

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.20

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 | डीजल ₹97.83

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 | डीजल ₹99.82

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 | डीजल ₹99.55

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 | डीजल ₹95.44

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 | डीजल ₹95.56

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 | डीजल ₹98.80

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 | डीजल ₹100.92

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 | डीजल ₹86.09

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 | डीजल ₹103.82

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 | डीजल ₹97.78

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 | डीजल ₹95.55

पटना: पेट्रोल ₹113.35 | डीजल ₹99.36

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 | डीजल ₹104.40

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Crude Oil Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचा कच्चा तेल, ब्रेंट क्रूड $92 के पार, जानें वो वजह जिनके कारण बढ़ रही है कीमतें

Crude Oil Price: वेस्ट एशिया में मीडिएशन बातचीत में कोई खास प्रोग्रेस नहीं होने और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के भी इसकी उम्मीदों को कम आंकने और साथ ही और हमलों की धमकी देने के बाद, क्रूड ऑयल की कीमतों में रात भर और बुधवार, 22 जुलाई को एशिया के शुरुआती ट्रेडिंग में भी बढ़त जारी रही।

ब्रेंट क्रूड की कीमतें $92 प्रति बैरल के लेवल को पार कर गईं, जो जून की शुरुआत में देखे गए लेवल तक पहुंच गईं। US क्रूड, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI), अब $85 प्रति बैरल के लेवल के पास ट्रेड कर रहा है, जो लगातार चौथे सेशन में चढ़ रहा है।

यमन में हूतियों की इस धमकी के बाद कि अगर और हमले हुए तो वे रेड सी और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में शिपिंग को रोक देंगे, तेल की कीमतों में बढ़त जारी रही। उन्होंने सऊदी अरब पर मैरीटाइम बैन भी लगा दिया है, और शिप मालिकों को सऊदी पोर्ट्स पर न आने के लिए ईमेल भेजे हैं।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि अगर यमन रेड सी में ट्रैफिक को रोकने की कोशिश करता है तो US जवाब देगा। उन्होंने जल्द ही पिकैक्स माउंटेन पर हमला करने की अपनी धमकी भी दोहराई, जिस पर US को शक है कि वह ईरान की न्यूक्लियर साइट है।

सालों में अपनी सबसे खराब तिमाही के बाद तेल की कीमतों में तेज़ी आई है, क्योंकि US और ईरान के बीच सीज़फ़ायर और होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफ़िक बढ़ाने के लिए MoU साइन करने के बाद ईरान युद्ध से हुई सारी कमाई खत्म हो गई थी। हालांकि, हाल के दिनों में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमलों और US सेना की लगातार 10 रातों तक बमबारी ने रिस्क प्रीमियम को वापस ला दिया है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूथी धमकियों के बाद मंगलवार को लाल सागर में तीन तेल टैंकरों ने यू-टर्न ले लिया। एक चीन के लिए दो मिलियन बैरल सऊदी क्रूड ले जा रहा था, दूसरा मैंगलोर के लिए 7,00,000 बैरल ले जा रहा था और फिर स्वेज़ नहर की ओर मुड़ गया, जबकि तीसरा पाकिस्तान जा रहा था और उसने भी अपनी यात्रा छोड़ दी।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान US से मिलने के लिए बेताब है, लेकिन जब तक वे बात करने के लिए सही मायने में तैयार नहीं हो जाते, तब तक वे ऐसा करने में दिलचस्पी नहीं रखते। तेल की कीमतें और किस वजह से बढ़ रही हैं।

कीमतों में उछाल की ओर क्या है वजह

वेस्ट एशिया के अलावा, तेल की कीमतें और बढ़ने की एक और वजह यह है कि कज़ाकिस्तान को रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर अपने मेन एक्सपोर्ट टर्मिनल पर क्रूड भेजना बंद करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां कई हमले हुए हैं।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल सप्लाई लेना बंद करने वाला था क्योंकि कंपनियां अपने जहाज इस जगह पर भेजने से कतरा रही थीं।

कज़ाकिस्तान का लगभग 80% क्रूड एक्सपोर्ट इसी टर्मिनल से होता है। यह देश यूरोप को दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी है। यूक्रेन ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है।

क्रूड पर गोल्डमैन सैक्स की चेतावनी

एनालिस्ट का मानना ​​है कि रेड सी के बंद होने से तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, क्योंकि होर्मुज की गैर-मौजूदगी में यह सऊदी अरब के लिए एक ज़रूरी एक्सपोर्ट रूट बन गया था और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन इसके लिए एक ज़रूरी सोर्स के तौर पर काम करती थी।

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर ये रुकावटें जारी रहीं, तो कच्चे तेल की कीमतें साल की चौथी तिमाही तक वापस $120 प्रति बैरल पर आ सकती हैं, लेकिन उनका बेस केस अभी इसी समय के दौरान कच्चे तेल के $80 पर रहने को ही मान रहा है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका ने ईरान के 5 शहरों पर बम बरसाए:लगातार 11वीं रात हमला; जंग में US 3 लाख करोड़ खर्च कर चुका

अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान के पांच शहरों में एक साथ एयर और मिसाइल स्ट्राइक की। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक चाबहार, कोनारक, तबरीज, बेहबहान और ओमीदियेह को निशाना बनाया गया। सीजफायर टूटने के बाद यह लगातार 11वीं रात है, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान के संदिग्ध परमाणु ठिकाने पिकएक्स माउंटेन पर ‘बहुत जल्द और बहुत भारी’ हमला कर सकता है। ट्रम्प की इस चेतावनी के जवाब में ईरान ने कहा कि यदि हमले जारी रहे तो वह क्षेत्र में युद्ध का दायरा और बढ़ा सकता है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया है कि अब तक इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। अमेरिकी स्ट्राइक का वीडियो… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… भारत-चीन के टैंकरों ने रास्ता बदला: सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो टैंकर हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद रेड सी में यू-टर्न लेकर स्वेज नहर की ओर लौट गए। अमेरिका ने माना- ईरानी हमलों में 100 सैनिक घायल: पेंटागन ने स्वीकार किया कि 7 जुलाई के बाद ईरानी हमलों में करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए। इनमें से 96% सैनिक इलाज के बाद ड्यूटी पर लौट चुके हैं। कतर ने ईरान से मुआवजा मांगा: कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरान को हालिया हमलों और उनसे हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और पूरा मुआवजा देने की मांग की। ट्रम्प ने माना- जॉर्डन में एक ईरानी हमला सफल रहा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने माना कि जॉर्डन में ईरान का एक हमला सफल रहा। हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई थी। ईरानी गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी पाकिस्तान पहुंचे और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी बातचीत की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Market Insight : आज इंडेक्स पर रखनी होगी लेवल बेस्ड रणनीति, चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके,वहीं करें फोकस

Market Insight :आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी का दिन है। कल निफ्टी और बैंक निफ्टी ने अहम स्तरों को डिफेंड किया। निफ्टी पर 24,150-24,180 का जोन सबसे अहम है। वहीं, बैंक निफ्टी में 57,500 का ऑल इम्पॉर्टेंट लेवल है। ऐसे में अगर गिफ्ट निफ्टी सही हुआ तो वो लेवल्स वापस टेस्ट होंगे। हालांकि ऐसा कोई कारण नहीं दिख रहा जिससे ये टूटें। ये कहना है सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का।

उन्होंने आगे कहा कि कच्चा तेल वहीं है जहां हम कल छोड़कर गए थे और एशियाई बाजारों में भी कोई गिरावट नहीं है। कल HDFC बैंक ने बैंक निफ्टी का सेंटीमेंट खराब किया। आज शायद IT शेयरों में थोड़ी मुनाफावसूली आ जाए। US में सेमिकंडक्टर शेयर भागे हैं। कोरिया भी ऊपर है। आज MNC पावर से जुड़े शेयर जैसे GE Vernova और Hitachi फोकस में होंगे।

बाजार: आज के संकेत

आज का सबसे बड़ा संकेत है निफ्टी की वीकली एक्सपायरी। ऑप्शन राइटर्स की बेसिक रेंज 24,050-24,350 है। आज इसी रेंज को स्मार्ट तरीके से ट्रेड करने की जरूरत है। FIIs की कल कैश और इंडेक्स फ्यूचर्स में छोटी बिकवाली रही। कच्चा तेल अभी भी $88-89 के बीच बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स 101 के आसपास बना हुआ है। कुल मिलाकर संकेत वहीं हैं जहां हम कल छोड़ कर गए थे। ऐसे में आज इंडेक्स पर लेवल बेस्ड रणनीति रखनी होगी। चुनिंदा शेयरों में शानदार मौके हैं,वहीं फोकस करें।

आज SBI फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग भी है। अगर अच्छे प्रीमियम पर लिस्ट हो तो मुनाफावसूली करें। RBI स्वाप विंडो के तहत भारत में $17.4 Bn के FCNR(B) डिपॉजिट आए हैं। डिपॉजिट उम्मीद से ज्यादा रहा है,कुल राशि $50-55 Bn से भी ज्यादा हो सकती है। डॉलर-रुपया पर नजर रखें,रिकॉर्ड निचले स्तर के हम काफी करीब हैं।

ट्रंप की टैरिफ धमकियां फिर लौटीं

ट्रंप की कनाडा को टैरिफ लगाने की चेतावनी आई है। कनाडा के कुछ सामानों पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी आई है। US अल्कोहल,गाड़ियों,डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ कनाडा के भेदभाव के जवाब में यह कदम उठाने की बात कही गई है। 50% टैरिफ की लिस्ट में दूध,क्रीम,ऑटो इक्विपमेंट और हॉकी के उपकरण शामिल हैं। एनर्जी,पोटाश,मछली और क्रिटिकल मिनरल्स लिस्ट से बाहर हैं। US-कनाडा-मेक्सिको समझौते के तहत आने वाले प्रोडक्ट्स पर छूट नहीं होगी।

1930 के टैरिफ अधिनियम की धारा 338 के तहत टैरिफ लगेंगे। धारा 338 US प्रेसिडेंट को 50% तक ड्यूटी लगाने का अधिकार देता है। इसके तहत अमेरिकी प्रोडक्ट्स के साथ भेदभाव करने वाले देशों पर टैरिफ का अधिकार है। कनाडा के ऊर्जा मंत्री के बयान में कहा गया है “कोई प्रतिक्रिया नहीं देने जा रहे हैं,हम यह सब पहले भी देख चुके हैं”।

US-ईरान युद्ध: ताजा हालात

US ने ईरान पर हमलों का एक और दिन शुरू किया। सोमवार को 4 PM ET से हमलों का 10वां दिन शुरू हुआ। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि हर बार जब ईरान किसी US सैनिक को मारेगा,उसे उसकी कई गुना कीमत चुकानी होगी

कल दोपहर को ईरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि US के साथ युद्ध को लेकर मध्यस्थों की तरफ से प्रस्ताव मिले हैं। MoU तभी मायने रखता है जब सभी पक्ष उसके लिए प्रतिबद्ध हों। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर ईरान के संप्रभु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मौमनी (Eskandar Momeni) सोमवार को पाकिस्तान का दौरा करेंगे। दोरे या किसी प्रस्ताव को लेकर अब तक कोई नई जानकारी नहीं मिली है।

10 दिन का सीजफायर?

रॉयटर्स के मुताबिक कतर और अन्य मध्यस्थों ने 10 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिया था। एक यूएस अधिकारी ने कहा है कि ट्रंप इस समय जहाजों पर हमले के लिए ईरान को सजा देने पर फोकस कर रहे हैं। US हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक राष्ट्रपति कोई दूसरा रास्ता नहीं चुनते। युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं।

सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी

ईरान समर्थित हूती ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। ये नाकेबंदी यमन की राजधानी सना पर सऊदी हमलों के जवाब में की गई है। हूती प्रवक्ता याह्या सारी (Yahya Saree) ने कहा है कि सऊदी जहाजों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू है। सऊदी अरब फिलहाल अपने तेल एक्सपोर्ट के बड़े हिस्से के लिए इसी रेड सी रूट का इस्तेमाल करता है। पिछले महीने सऊदी अरब ने 4.19 Mn बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का एक्सपोर्ट किया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने Bab el-Mandeb स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने शुरू किए हैं। सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1982 UN Convention on Law of Sea के तहत कदम उठाएंगे।

बैंक: प्राइवेट Vs PSU बैंक

कल निफ्टी PSU बैंक ने 200 DMA से शानदार ब्रेकआउट दिया और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स कल 200 DMA के नीचे आया। निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स अपने हाई से 13% नीचे है। कल HDFC बैंक में 2800 करोड़ रुपए की डिलिवरी सेलिंग हुई है। SBI में कल करीब 900-1000 करोड़ रुपए की डिलिवरी उठी है। ICICI बैंक भी कल शानदार नंबरों पर नहीं चल पाया। ऐसे में बाजार में एक रिस्क ओपन हुआ है। बैंक निफ्टी में एक डबल टॉप का रिस्क ओपन हुआ है। अब शुक्रवार का हाई पार करना बैंक निफ्टी के लिए बहुत मुश्किल है। SBI में मजबूती है मगर इस बार के नतीजे अहम होंगे।

बाजार: क्या हो रणनीति?

एक बात साफ है बाजार अभी भी रेंज में है। शुक्रवार को लगा कि रेंज टूट गई लेकिन वो रिजेक्ट हुआ और अब एक रिस्क रहेगा वापस रेंज में फंसने का है। अगर ब्रेकआउट फेल हो तो लोअर रेंज टेस्ट होने का रिस्क होता है। अगर निफ्टी 24,150 के नीचे सेटल हुआ तो ब्रेकआउट फेल कन्फर्म होगा। ऐसे में वापस 23,800-23,850 जाने का रिस्क रहेगा। लेकिन अगर निफ्टी ने 24,350 फिर पार किया तो ये बड़ा पॉजिटिव होगा। इंडेक्स से बेहतर है इस समय स्टॉक स्पेसिफिक रहना। फार्मा अभी भी बाजार की सबसे मजबूत कड़ी है। IT काफी चल चुका है और अब इस रैली का टेस्ट है। IT में पिछली दो रैलियां इतनी रिकवरी के बाद ही फेल हुई थीं। FMCG में धीरे-धीरे Accumulation हो रहा है। ऑटो और ऑटो एंसिलरी शेयरों में भी निचले स्तरों पर खरीदारी है।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,100-24,150 (कल का low, 10 DEMA) पर है। इसके लिए अगला बड़ा सपोर्ट 24,000-24,050 (20 DEMA,ऑप्शंस जोन) पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 24,250-24,300 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,350-24,400 पर है। खरीदारी का सबसे अच्छा जोन 24,100-24,150 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,025 पर रखें। बिकवाली का सबसे अच्छा जोन 24,300-24,350 है। इसके लिए स्टॉप लॉस 24,425 पर होना चाहिए।

बैंक निफ्टी पर स्ट्रैटेजी

बैंक निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट जोन 57,750-57,850 (10 DEMA)है। वहीं, अगला बड़ा सपोर्ट 57,500-57,600 (20 DEMA, कल का low) पर है। अगर 57,500 टूटा तो बड़ी गिरावट के लिए तैयार रहें। अगर बैंक निफ्टी 57,500 होल्ड करे तो 57,400 के स्टॉपलॉस के साथ खरीदें। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 58,100-58,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58,300-58,500 पर है।

 

Trading Plan : 24000 के ऊपर टिके रहने तक शॉर्ट-टर्म का रुझान पॉजिटिव, निफ्टी में जल्द ही 24500 का टारगेट मुमकिन

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

US Iran War: ईरान युद्ध पर ट्रंप ने दे दिया एक बड़ा अपडेट! क्या अब थम जाएगा युद्ध, समझें अमेरिका का पूरा प्लान

US Iran War Ceasefire Update: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहे भीषण संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जद्दोजहद जारी हैं। कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देश वाशिंगटन और तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। यहां तक कि 10 दिनों के एक अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव भी तैयार है।

लेकिन इन सब के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल युद्ध पर ‘पॉज’ बटन दबाने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अभी युद्ध उस मोड़ पर नहीं पहुंचा है जहां कूटनीति सैन्य दबाव से बेहतर डील दे सके। आइए समझते हैं कि अमेरिका सीजफायर के प्रस्ताव पर कदम पीछे क्यों खींच रहा है और इसके पीछे की असली वजह क्या है।

10 दिनों का सीजफायर प्रस्ताव क्या है और किसने तैयार किया?

क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए मध्य पूर्व के 4 प्रमुख देश कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्ताव के ये है मुख्य बिंदु:

  • अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल 10 दिनों का अस्थायी सीजफायर लागू हो।
  • इस विराम के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सीधी बातचीत हो।
  • यदि 10 दिनों का विराम सफल रहता है, तो एक व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे पर आगे की चर्चा की जाए।
  • कतर, ओमान, मिस्र और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत जारी रखेंगे।

ईरान ने इस बात को स्वीकार किया है कि उसे सीजफायर का प्रस्ताव मिला है और वह इस पर विचार कर रहा है, हालांकि उसने अभी तक कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।

सीजफायर के प्रस्ताव को क्यों टाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप?

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस प्रस्ताव पर तुरंत मुहर न लगाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े रणनीतिक कारण हैं:

A. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बार्गेनिंग पावर: अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने अभी तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। वाशिंगटन का मानना है कि ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने से अमेरिका को बातचीत की मेज पर ज्यादा बढ़त मिलेगी।

B. अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला: हाल ही में जोर्डन में हुए एक ईरानी मिसाइल हमले में 2 अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए थे। इस घटना ने वाशिंगटन के रुख को और सख्त कर दिया है। अब अमेरिका का ध्यान युद्ध रोकने से हटकर जवाबी कार्रवाई पर केंद्रित हो गया है। अमेरिका किसी भी स्थिति में खुद को कमजोर दिखाकर बातचीत में शामिल नहीं होना चाहता।

ये 4 देश ही क्यों कर रहे हैं मध्यस्थता?

इन चारों देशों के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं:

ओमान: ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक गुप्त बैकचैनल के रूप में काम करता आया है।

कतर: कतर में मध्य पूर्व का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है, और साथ ही ईरान के साथ भी इसके कामकाजी संबंध हैं।

मिस्र: मिस्र अरब जगत का एक प्रमुख देश है, जो क्षेत्रीय युद्ध को फैलने से रोकने के लिए लगातार सक्रिय रहता है।

पाकिस्तान: पाकिस्तान की सीमाएं ईरान से लगती हैं और खाड़ी देशों व अमेरिका दोनों के साथ उसके करीबी संबंध हैं। वह इस डर से मध्यस्थता में जुटा है ताकि युद्ध से उसका अपना क्षेत्र अस्थिर न हो।

इस युद्ध से दांव पर क्या लगा है?

यह सीजफायर सिर्फ लड़ाई रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अगर यह समुद्री मार्ग जल्द नहीं खुलता है, तो भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों के लिए क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ना और आर्थिक दबाव महसूस होना तय है।