दिल्ली के पॉल्यूशन से लड़ने की नई पहल! मिरांडा हाउस में बना कार्बन गार्डन, जानिए कैसे काम करेगा यह ग्रीन मॉडल

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और तापमान के बीच, हरियाली बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में, दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज ने अपने कैंपस में एक ‘कार्बन गार्डन’ बनाया है। कॉलेज का कहना है कि कार्बन सोखने की क्षमता बढ़ाने और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के साथ-साथ, यह गार्डन छात्रों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की व्यावहारिक समझ हासिल करने में भी मदद करेगा।

50 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए

मिरांडा हाउस के इस कार्बन गार्डन में लगभग 50 अलग-अलग तरह के पौधे लगाए गए हैं। इनमें अलग-अलग तरह के जीवन वाले पौधे शामिल हैं, जैसे कि हाइड्रोफाइट्स (पानी में उगने वाले), जेरोफाइट्स (सूखी जगह पर उगने वाले) और मेसोफाइट्स (सामान्य नमी वाली जगह पर उगने वाले)। अमरूद और सहजन जैसी देसी प्रजातियों को भी इस गार्डन में शामिल किया गया है। कॉलेज के अनुसार, इतने तरह के पौधे लगाने का मकसद सिर्फ हरियाली बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक छोटा इकोसिस्टम बनाना है जहां छात्र पौधों, बायोडायवर्सिटी और पर्यावरण के आपसी संबंधों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

छात्रों के लिए बनेगा लिविंग लैब

मिरांडा हाउस का यह कार्बन गार्डन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक जीवंत प्रयोगशाला (living laboratory) के तौर पर काम करेगा। यहां छात्र कार्बन सोखने की प्रक्रिया (carbon sequestration), पौधों की विविधता, इकोसिस्टम और पर्यावरण के अनुकूल तौर-तरीकों जैसे विषयों की व्यावहारिक समझ हासिल कर सकेंगे।

कॉलेज का कहना है कि इस पहल से छात्रों को क्लासरूम से बाहर, प्रकृति के बीच सीखने और रिसर्च करने का मौका मिलेगा। साथ ही, इससे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

प्रो. दीनबंधु साहू ने किया उद्घाटन

कार्बन गार्डन का उद्घाटन दिल्ली यूनिवर्सिटी के बॉटनी डिपार्टमेंट के हेड और रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के चेयरपर्सन प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने किया। प्रोफेसर साहू भारत के पहले कार्बन गार्डन के संस्थापक भी हैं। प्रोफेसर साहू ने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण की समझ को जोड़कर इस जुड़ाव को और आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। दिल्ली जैसे शहरों में ग्रीन स्पेस की अहम भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया।

मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा है गार्डन

कार्बन गार्डन के फायदे सिर्फ पर्यावरण तक ही सीमित नहीं माने जाते हैं। प्रोफेसर साहू के अनुसार, ऐसी हरी-भरी जगहें छात्रों को प्रकृति के करीब ला सकती हैं और साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में भी योगदान दे सकती हैं। मिरांडा हाउस की प्रिंसिपल प्रोफेसर बिजयालक्ष्मी नंदा ने कहा कि कॉलेज अपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता है। उनका मानना है कि यह पहल छात्रों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

CUET UG 2027: एनटीए ने की सीयूईटी में बड़े बदलाव की तैयारी, ‘एक छात्र, एक दिन’ परीक्षा पैटर्न का प्रस्ताव

Daily Voice: बाजार में अभी डिफेंसिव नजरिया बनाए रखने की जरूरत, लंबी अवधि में इंश्योरेंस सेक्टर दिखाएगा कमाल

Daily Voice : कोर महंगाई की चाल को देखते हुए 2027 की शुरुआत में फेड फंड्स रेट में एक और बढ़ोतरी संभव है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% से 7% के बीच स्थिर रहेगी। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इंश्योरेंस सेक्टर में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना दिख रही है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन से इस सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। ये बातें वॉटरफ़ील्ड एडवाइज़र्स के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और इक्विटीज़ हेड विपुल भोवर ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।

क्या आप US ट्रेज़री मार्केट को ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा जोखिम मानते हैं?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यूएस का बॉन्ड मार्केट,ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की नींव है। इस मार्केट में होने वाले स्ट्रक्चरल बदलाव आज ग्लोबल मार्केट पर असर डालने वाले सबसे अहम मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर हैं। जब “रिस्क-फ्री” US सॉवरेन डेट से अच्छा रिटर्न मिलता है तो यह ग्लोबल एसेट एलोकेशन की रणनीतियों को पूरी तरह से बदल देता है।

ट्रेजरी यील्ड के बढ़ने से ग्लोबल इक्विटी मल्टीपल्स पर दबाव पड़ता है और दुनिया भर की कंपनियों के लिए कर्ज लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकते हैं,कैपिटल एक्सपेंडिचर में रुकावट आ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

क्या अमेरिका की वित्तीय स्थिति टिकाऊ नहीं लगती?

इस पर उन्होंने आगे कहा कि जरूरी खर्च और ब्याज पर होने वाले भारी खर्च(जो इस साल 1 ​​लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गए हैं) में लगातार बढ़ोतरी से एक ढांचागत असंतुलन पैदा हो रहा है। अगर बड़े नीतिगत सुधार नहीं किए गए तो कर्ज का यह बढ़ता बोझ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को घटा सकता है और भविष्य में आर्थिक मजबूती में बाधा डाल सकता है।

कांग्रेसनल बजट ऑफिस का अनुमान है कि 2026 में फ़ेडरल घाटा लगभग 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा,जो अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6 प्रतिशत है। इसके चलते अमेरिकी जनता पर मौजूद कर्ज GDP के 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

क्या आपको उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक US फ़ेडरल रिज़र्व दो और बार ब्याज दरें बढ़ाएगा और उसके बाद अगले साल की पहली तिमाही में एक और बढ़ोतरी करेगा?

सितंबर 2026 में चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की,जिससे ये दरें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत की रेंज में आ गईं। ‘डॉट प्लॉट’ से पता चला कि FOMC के 18 में से 16 सदस्यों को उम्मीद है कि इस साल कम से कम एक बार और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी,हालांकि सिर्फ़ चार सदस्यों को दो और बार बढ़ोतरी की उम्मीद है।

एनर्जी की बढ़ती लागत की वजह से आई महंगाई इस सख्ती को सही ठहराती है। कोर महंगाई के ट्रेंड को देखते हुए 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए,हालांकि इस साल एक और बढ़ोतरी की संभावना है,लेकिन दो और बार बढ़ोतरी होने की संभावना कम है।

क्या आपको लगता है कि भारत की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास स्टेबल हो जाएगी?

भारत की आर्थिक विकास दर के 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच स्टेबल होने की उम्मीद है। IMF ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत GDP विकास दर का अनुमान लगाया है। महामारी के बाद के असर, सरकारी खर्च और रुकी हुई मांग की वजह से भारत में विकास दर 7.8 प्रतिशत के करीब रही है, लेकिन बेस इफ़ेक्ट के कम होने और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व ऊंची ब्याज दरों जैसी ग्लोबल चुनौतियों के कारण इतनी ऊंची दरें शायद लंबे समय तक बनी न रह पाएं। हालांकि, 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

अमेरिकी डॉलर में बढ़ोतरी के अहम कारण क्या हैं?

अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर ज़्यादा यील्ड (रिटर्न) मुख्य रूप से महंगाई के दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होती है, जो ग्लोबल इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता बढ़ने से जोखिम से बचने वाले निवेशक अमेरिकी डॉलर से मिलने वाली सुरक्षा और लिक्विडिटी की ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा,अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी विदेशी निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला खर्च डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है। दूसरे G10 देशों की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मज़बूती, डॉलर की स्थिति को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी के तौर पर और मजबूत कर रही है।

क्या आप इक्विटी को लेकर इसलिए सतर्क हैं कि तेल की कीमतें ज़्यादा हैं और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं या आपकी इस सोच के पीछे कोई और भी वजह है?

तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई की चिंताएं भी हैं। ऐसे में,मौजूदा महंगे वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए बाजार में अभी तुरंत पॉजिटिव असर डालने वाली कोई वजह नहीं दिख रही है। ऐसे में जब तक अर्निंग्स की साफ तस्वीर नहीं दिखती या वैल्यूएशन में जरूरी टाइम करेक्शन नहीं होता,तब तक डिफेंसिव रुख अपनाना ही बेहतर है।

क्या आपको भारत में भी ब्याज दरें बढ़ाने का दौर शुरू होता दिख रहा है?

उम्मीद है कि भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का दौर अक्टूबर 2026 में मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक से शुरू होगा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है, लेकिन घरेलू और ग्लोबल स्तर पर बढ़ते दबावों के कारण इसमें बदलाव की जरूरत है।

कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कीमत घटने की वजह से खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात के खराब होने के साथ,अर्थशास्त्रियों को दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे दर बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी और सख्ती का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।

क्या आपको लगता है कि मौजूदा स्तरों पर इंश्योरेंस सेक्टर में खरीदारी का मौका है?

भारत में इंश्योरेंस मार्केट की पहुंच अभी भी काफी कम है और 2026 से 2030 के बीच सालाना प्रीमियम ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन की वजह से यह सेक्टर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना रखता है।

 

Market Next Week : मिड और स्मॉल कैप्स में लगातार चौथे हफ्ते दिखी गिरावट, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock To Buy: एक्सिस ने इन 7 लार्ज-कैप शेयरों पर दी खरीद की सलाह, मिल सकता है 44% का रिटर्न

Stock To Buy: भारतीय शेयर बाजार ने अभी एक रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन ऐसा रिकॉर्ड नहीं जिसकी निवेशकों को उम्मीद थी। दलाल स्ट्रीट में लगातार आठ हफ़्तों से गिरावट देखी गई है, जो 2020 के कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान देखी गई गिरावट से भी ज़्यादा है। बाजार की इस बढ़ी गिरावट में एक्सिस सिक्योरिटीज ने 7 लार्ज-कैप स्टॉक्स चुने हैं जिनमें भारी गिरावट के बाद भी मजबूत वैल्यू है। एक्सिस

बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance)

एक्सिस ने 1,305 रुपये का प्राइस टारगेट तय किया है, जो मौजूदा लेवल से 36% ज़्यादा है। यह कंपनी कंज्यूमर फाइनेंस के लिए भारत की सबसे बड़ी NBFCs में से एक है। इसके पास टू-व्हीलर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, हाउसिंग और छोटे व्यवसायों के लिए लोन जैसे कई तरह के प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है।

भारती एयरटेल (Bharti Airtel)

2,530 रुपये के प्राइस टारगेट के साथ, ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से 44% बढ़ने की संभावना जताई है। यह एक भारतीय मल्टीनेशनल टेलीकम्युनिकेशन कंपनी है जो दक्षिण एशिया, अफ्रीका और चैनल आइलैंड्स के 18 देशों में काम करती है। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है, जिसकी घरेलू बाज़ार में मज़बूत मौजूदगी है और इसके पास डिजिटल सेवाओं का एक व्यापक पोर्टफोलियो है, जिसमें फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, मोबाइल और डेस्कटॉप टेलीफोनी और अन्य डिजिटल समाधान शामिल हैं।

ICICI बैंक (ICICI Bank )

1,800 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ, ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से 36% बढ़ने की संभावना जताई है। इस लेंडर को मजबूत लायबिलिटी फ्रैंचाइज़ और अच्छे रिटेल-कॉर्पोरेट मिक्स का सहारा मिला हुआ है। बैंक की सब्सिडियरी कंपनियाँ, जैसे ICICI वेंचर फंड्स, ICICI प्रू AMC, ICICI सिक्योरिटीज, ICICI प्रूडेंशियल और ICICI लोम्बार्ड, अपने-अपने क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं।

एटरनल (Eternal)

एक्सिस बैंक ने 390 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ खरीदारी की राय दी है। ब्रोकरेज ने मौजूदा लेवल से इसमें 22% बढ़ने की संभावना जताई है। कंपनी का बिजनेस मॉडल ‘एसेट-लाइट’ है, जो डिमांड और सप्लाई को एक साथ लाने पर आधारित है। साथ ही, यह कुशल लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है, मज़बूत नेटवर्क प्रभाव पैदा करता है और यूज़र एंगेजमेंट को बढ़ाता है। इसमें चार मुख्य बिज़नेस शामिल हैं। ज़ोमैटो (Zomato), ब्लिंकिट (Blinkit), डिस्ट्रिक्ट (District) और हाइपरप्योर (Hyperpure)।

वरुण बेवरेजेज़ (Varun Beverages)

एक्सिस बैंक ने ₹530 के टारगेट प्राइस के साथ इस स्टॉक में खरीदारी की राय दी है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि पिछली क्लोजिंग के मुकाबले इसमें 23% की बढ़त हो सकती है। VBL ग्लोबल बेवरेज इंडस्ट्री में एक अहम कंपनी है और दुनिया भर में (US के बाहर) पेप्सिको (PepsiCo) की दूसरी सबसे बड़ी फ्रैंचाइज़ी है। इसके पास फ्रैंचाइज़ी अधिकारों के तहत 10 देशों में और डिस्ट्रीब्यूशन अधिकारों के तहत 4 और देशों में कामकाज करने की सुविधा है।

कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank)

₹500 के टारगेट प्राइस के साथ, एक्सिस (Axis) का अनुमान है कि मौजूदा स्तरों से इसमें 20% की बढ़त हो सकती है। यह भारत के प्रमुख डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप्स में से एक है, जो अलग-अलग कस्टमर सेगमेंट और इलाकों में कई तरह की सर्विस देता है। यह रिटेल कस्टमर्स (सैलरी पाने वाले और खुद का काम करने वाले दोनों), छोटे बिज़नेस, NRI, संस्थानों और सरकारी संस्थाओं को सर्विस देता है। इसकी सर्विस में सुविधा, इनोवेशन और डिजिटल-फर्स्ट ऑफरिंग पर खास ध्यान दिया जाता है।

नेस्ले इंडिया (Nestle India)

ब्रोकरेज ने इसका टारगेट प्राइस ₹1,765 तय किया है, जो मौजूदा स्तरों से 35% ज़्यादा है। नेस्ले इंडिया कई तरह के फूड और बेवरेज प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है, जिनमें दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स, कॉफी, चाय, नूडल्स, चॉकलेट, कन्फेक्शनरी और बच्चों के लिए न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स शामिल हैं। भारत में इसके कुछ पॉपुलर ब्रांड्स में मैगी (Maggi), नेस्कैफे (Nescafé), किटकैट (KitKat), मिल्कीबार (MilkyBar) और नेस्ले एवरीडे (Nestle Everyday) शामिल हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Molbio Diagnostics Share Price: इस नई लिस्ट कंपनी पर फिदा हुआ जेफरीज,अपसाइड सिनेरियो में लगाएगा 57% की छलांग

Molbio Diagnostics Share Price: मोलबायो डायग्नोस्टिक्स IPO उन चुनिंदा भारतीय IPOs में से एक है, जिन्होंने अपने शेयर पाने वालों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। अब इस स्टॉक पर ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने अपनी कवरेज शुरु की है और इस स्टॉक को अपने “हाई-कनविक्शन टॉप पिक” (पूरी तरह भरोसेमंद और सबसे अच्छी पसंद) बताया है। यहीं वजह है कि शेयर 4 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है।

बुधवार, 30 सितंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में, जेफरीज ने मोलबायो डायग्नोस्टिक्स पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,600 का प्राइस टारगेट तय किया , जो मौजूदा स्तर से 27% की बढ़त दिखाते है।

बता दें कि 17 अगस्त को लिस्टिंग के बाद, मोलबायो डायग्नोस्टिक्स के शेयर 20 दिनों के भीतर ही अपने इश्यू प्राइस से दोगुने हो गए। 11 सितंबर को शेयर ने ₹1,686 का हाई (सबसे ऊंचा स्तर) छुआ, और उसके बाद 11 ट्रेडिंग सेशन में ही उस स्तर से 25% तक गिर गए।

जेफ़रीज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मोलबायो डायग्नोस्टिक्स ने एक अलग तरह का ‘पॉइंट-ऑफ-केयर मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म’ सफलतापूर्वक कमर्शियलाइज किया है। साथ ही, कंपनी के पास दो नए प्लेटफॉर्म और भविष्य के लिए मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन है, जिससे कंपनी आगे जबरदस्त ग्रोथ के लिए अच्छी स्थिति में है।

TrueNat प्लेटफॉर्म, जिसने मोलबायो की फाइनेंशियल ईयर 2026 की बिक्री में 86% का योगदान दिया। एक अल्ट्रा-पोर्टेबल, बैटरी से चलने वाला मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म है जो पॉइंट-ऑफ-केयर पर हाई-क्वालिटी टेस्टिंग की सुविधा देता है। जेफरीज का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म के लिए ग्रोथ की काफी गुंजाइश है। इसकी तुलना में, इसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी GeneXpert का रेवेन्यू स्केल $3 बिलियन है, जबकि TrueNat का रेवेन्यू $130 मिलियन है।

जेफरीज ने अपने नोट में कहा है कि TrueNat मोलबायो के लिए कई मौकों में से सिर्फ पहला मौका है। कंपनी पहले ही Prorad (पोर्टेबल X-रे पोर्टफोलियो) और Optrascan (डिजिटल पैथोलॉजी पोर्टफोलियो) के क्षेत्र में विस्तार कर चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है, “कई अन्य प्रोडक्ट्स के डेवलपमेंट के साथ, हमारा मानना ​​है कि मोलबायो की इनोवेशन पाइपलाइन उसके मुख्य प्रोडक्ट TrueNat से कहीं आगे तक फैली हुई है।”

जेफरीज का अनुमान है कि मोलबायो का रेवेन्यू 22% की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। इसकी वजह भारत और विदेशों में TrueNat का लगातार विस्तार, Prorad के पोर्टेबल X-रे पोर्टफोलियो का तेज़ी से विस्तार और अमेरिका में Optrascan का कमर्शियल रोलआउट होगी। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक को उम्मीद है कि मॉलबियो के मार्जिन में 830 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी। इसकी वजह टेस्ट-किट कैपेसिटी का इस्तेमाल फाइनेंशियल ईयर 2026 में 58% से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2029 तक 77% होना, ऑप्ट्रास्कैन का कुल रेवेन्यू में हिस्सा फाइनेंशियल ईयर 2029 तक 11% तक पहुंचना और कर्मचारियों की लागत का सेल्स के 10% से घटकर 8% होना है।

जेफरीज का अनुमान है कि इसके नतीजे में, कंपनी की अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमॉर्टाइजेशन (EBITDA) 36% CAGR से बढ़ सकती है, जबकि इसका प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 के दौरान 47% CAGR से बढ़ सकता है। हालांकि जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में रेवेन्यू कंसंट्रेशन को एक मुख्य जोखिम बताया है, क्योंकि फाइनेंशियल ईयर 2026 में इसका 80% रेवेन्यू B2G सेगमेंट से आया था, जबकि 70% TB टेस्टिंग से आया था।

अपसाइड सिनेरियो में, जेफरीज ने मॉलबियो का प्राइस टारगेट ₹1,970 तय किया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से इसमें 57% की बढ़ोतरी की संभावना है। इस मामले में, कंपनी की सेल्स 25% CAGR से बढ़ती है, जबकि EBITDA फाइनेंशियल ईयर 2026-2029 के दौरान 45% CAGR से बढ़ता है।

बुधवार को मॉलबियो डायग्नोस्टिक्स के शेयर 4% बढ़कर ₹1,305.1 पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले एक महीने में स्टॉक 20% चढ़ा है।

शराब बनाने वाली इस कंपनी के शेयरों को लग सकते हैं पंख, ब्रोकरेज फर्म ने दी खरीदने की सलाह

रेडिको खेतान के शेयरों में 25 सितंबर को तेजी दिखी। इसकी वजह ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट है। ब्रोकरेज फर्म ने रेडिको खेतान के शेयरों पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बनाए रखी है। इससे शुक्रवार को शेयरों में तेजी दिखी। यह शेयर 1.20 फीसदी चढ़कर 4,535 रुपये पर बंद हुआ।

कंपनी की ग्रोथ प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से ज्यादा रह सकती है

जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में रेडिको खेतान के शेयरों में 16 फीसदी तक तेजी की उम्मीद जताई है। उसने कहा है कि कंपनी के लिए FY27 की शुरुआत अच्छी रही है। प्रीमियम और इससे ऊपर के सेगमेंट में कंपनी की ग्रोथ प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से ज्यादा रह सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने FY26 से FY29 के बीच कंपनी के वोदका बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा CAGR रहने की उम्मीद जताई है।

इन प्रोडक्ट्स की अच्छी बिक्री से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट स्पिरिट्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। साथ ही इनोवेशन और फ्लेवर-आधारित लॉन्चेज से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण बाजारों में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, जिससे कुल ग्रोथ को मजबूती मिलेगी। 8पीएम प्रीमियम ब्लैक की सेल्स में रिकवरी है। आफ्टर डार्क की सेल्स अच्छी बनी हुई है। कंपनी के लग्जरी पोर्टफोलियो की डिमांड भी बढ़ी है।

कॉस्ट में इजाफा का कंपनी पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर

जेएम फाइनेंशियल को उम्मीद है कि नए पैकेजिंग में लॉन्च होने के बाद 8PM Premium Black की ग्रोथ 20-25 फीसदी रह सकती है। After Dark को तेलंगाना में एंट्री का फायदा मिलेगा। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) और पैकेजिंग पर आने वाला खर्च बढ़ा है। लेकिन, कंपनी बेहतर प्रोडक्ट मिक्स से बढ़े खर्च को संभाल सकती है।

जेएम फाइनेंशियल ने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाया

जेएम फाइनेंशियल ने इन वजहों से रेडिको खेतान के शेयरों के टारगेट प्राइस को 4,955 रुपये से बढ़ाकर 5,190 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी के लग्जरी पोर्टफोलियो वॉल्यूम ग्रोथ 25 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। इसमें इनोवेशन और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क के विस्तार का हाथ होगा। कंपनी को रॉयल रणथम्बोर, रामपुर सिंगल माल्ट और जैसलमेर जिन का सपोर्ट मिलेगा।

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कमजोर बाजार में भी शेयरों का प्रदर्शन शानदार 

रेडिको खेतान का शेयर उन शेयरों में शामिल है, जिनका कमजोर बाजार में भी शानदार प्रदर्शन रहा है। यह शेयर बीते छह महीनों में 65 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान निफ्टी में 0.71 फीसदी गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 1.83 फीसदी कमजोर हुआ है। इससे रेडिको खेतान के शेयरों के स्ट्रेंथ के बारे में पता चलता है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के उत्पादों पर बढ़ा दुनिया का भरोसा, निर्यात दो लाख करोड़ के पार: योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता, मजबूत सप्लाई चेन और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर आज पूरी दुनिया को भरोसा है।

प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। योगी ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। इस बार 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदार और 2400 से अधिक एग्जीबिटर्स हिस्सा ले रहे हैं।

दोनों नेताओं ने एक ही ई-कार्ट से ट्रेड शो का अवलोकन किया और उद्यमियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़कर दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है, दुनिया उसे फॉलो करती है। यूपी ट्रेड शो ट्रेडिशन और टेक्नोलॉजी, हेरिटेज और इनोवेशन के संगम का उदाहरण है।

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उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए अमित शाह ने ही परंपरागत उद्यमों की ताकत को पहचाना था और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की सोच दी थी। टैलेंट और ट्रेडिशन को टेक्नोलॉजी से जोड़कर स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 79 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है और 75 नये उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है।

भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, कन्नौज के इत्र और बनारस की सिल्क साड़ियां अब करोड़ों के कारोबार वाले ब्रांड बन चुकी हैं। एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट और फ्रेट कॉरिडोर ने बाजार तक पहुंच आसान की है। ट्रेड शो में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस पार्टनर कंट्री हैं। उनके विशेष पवेलियन लगे हैं। कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि के बाद सीएम ने अमित शाह को फिरोजाबाद के ओपल ग्लास से बनी राधा-कृष्ण प्रतिमा भेंट की और ‘एक जनपद एक व्यंजन’ पोर्टल का शुभारंभ किया।

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सेना के लिए अत्याधुनिक ड्रोन बनाएगा पॉलीटैक्निक का छात्र, रक्षा मंत्रालय ने मंजूर किए 3.50 करोड़

लोकल 18 के रिपोर्टर जसबीर कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, हमीरपुर के एक पॉलीटेक्निक छात्र ने अपनी तकनीकी सोच और मेहनत से ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है। साधारण परिवार से आने वाले सर्वेश शर्मा ने भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ड्रोन बनाने पर काम किया। तैयार किए गए उनके इस प्रोटोटाइप के बाद अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय से बड़ी ग्रांट मिली है।

ऐसे मिला प्रोजेक्ट का आइडिया

सर्वेश शर्मा राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। सर्वेश ने IIT जोधपुर और कोनार्क कोर की नेशनल लेवल की ओपन कार्डबोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में देशभर की करीब 50 टीमों ने अपने आइडिया पेश किए थे। सर्वेश की टीम ने इसमें चौथा पुरस्कार हासिल किया।

शुरुआती प्रोटोटाइप की लागत

सर्वेश ने अपने प्रोजेक्ट पर आगे काम शुरू किया और प्रोटोटाइप तैयार करने में उन्हें करीब 87 हजार रुपये का खर्च आया। इसके बाद उन्होंने डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस यानी iDEX से जुड़े प्रोजेक्ट के तहत स्टार्टअप के लिए आवेदन किया। अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने की जानकारी सामने आई है।

सेना के लिए ऐसे काम करेगा सर्वेश का ड्रोन प्रोजेक्ट

सर्वेश अब रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। इसे भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। ड्रोन को दुश्मन के रडार से बचने और जैमिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक रुकावटों के असर को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।

IIT रुड़की में होगा आगे का काम

इस प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर IIT रुड़की में बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय से जुड़ी मंजूरी के बाद सर्वेश अब वहां की लैब में प्रोजेक्ट पर आगे काम करेंगे। प्रोजेक्ट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है और इसे करीब 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

साधारण परिवार से निकला हुनरमंद छात्र

सर्वेश शर्मा हमीरपुर के बाहनवीं गांव के रहने वाले हैं और उनका परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता संजीव शर्मा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सर्वेश ने अपनी शुरुआती और स्कूली पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ उनके कॉलेज में भी खुशी का माहौल है। कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, विभागाध्यक्ष समीर भारती और दूसरे शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी है।

सर्वेश की कहानी दिखाती है कि किसी तकनीकी आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ बड़े संसाधन ही जरूरी नहीं होते, बल्कि सही सोच और लगातार मेहनत भी अहम भूमिका निभाती है। एक कॉलेज प्रतियोगिता से शुरू हुआ उनका काम अब रक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट तक पहुंच चुका है।

असीम मुनीर की अमेरिका के साथ सीक्रेट डील! पाक सेना खरीदेगी घातक ड्रोन, जानिए इस डील में क्या-क्या छिपा है

Pakistan News: अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर इस बात पर चर्चा शुरु हो गई है कि भविष्य में इन बिना पायलट वाले सिस्टम (Unmanned Systems) का इस्तेमाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर किस तरह किया जा सकता है। बुधवार 16 सितंबर को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बैठक में उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इसी बीच न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या है POWERUS की सीक्रेट डील?

Reuters के मुताबिक, POWERUS के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने पाकिस्तान आर्मी असीम मुनीर के साथ MoU और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने ऑर्डर की कीमत या इसमें शामिल ड्रोन सिस्टम के बारे में जानकारी देने से इनकार किया। इसकी वजह सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता और गोपनीयता बताई गई।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सेना की ओर से GHQ बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इस MoU या शुरुआती ऑर्डर का उल्लेख नहीं किया गया। सेना ने केवल इतना कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। असीम मुनीर ने बैठक में टेक्नोलॉजी इनोवेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया।

क्या ईरान सीमा पर हो सकता है इस्तेमाल?

इस डील के बाद पाकिस्तान की ईरान से लगी सीमा को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। यह इलाका सीमा पार आतंकवाद, तस्करी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हाइटेक ड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम पाकिस्तान को निगरानी और सीमा पर स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।

CNN-News18 के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने संभावना जताई है कि POWERUS की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में ईरान सीमा के आसपास गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी यह सिर्फ दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सेना या POWERUS ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि इस समझौते के तहत मिलने वाली तकनीक को ईरान सीमा या बलूचिस्तान में तैनात किया जाएगा। GHQ की आधिकारिक बैठक के विवरण में भी ईरान, बलूचिस्तान या पश्चिमी सीमा की निगरानी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए POWERUS समझौते को सीधे ईरान की निगरानी की रणनीति से जोड़ना फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी।

POWERUS की $22.3 मिलियन वाली मिडिल ईस्ट डील क्या है?

पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले POWERUS ने करीब 22.3 मिलियन डॉलर के एक अन्य डिफेंस डील की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनी को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नेटवर्क आधारित काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) क्षमता उपलब्ध करानी है।

यह सिस्टम ड्रोन खतरों को डिटेक्ट, ट्रैक और क्लासिफाई करने के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए शुरुआती चेतावनी देने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसमें इंटरसेप्टर तकनीक को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस 22.3 मिलियन डॉलर के मध्य-पूर्वी अनुबंध की तकनीक पाकिस्तान को दी जाएगी या नहीं।

अमेरिका-पाकिस्तान डिफेंस डील और चीन फैक्टर

POWERUS के साथ यह डील अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीकी सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। Reuters के अनुसार, कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।

POWERUS के संस्थापक और CEO एंड्रयू फॉक्स ने पाकिस्तान के निजी रक्षा क्षेत्र को उभरता हुआ बताया है, हालांकि उनके मुताबिक यह क्षेत्र अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है। वेलिकोविच ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा संयुक्त तकनीकी संबंध विकसित करना है जिसमें अमेरिकी और पाकिस्तानी क्षमताओं को साथ लाया जा सके।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को तकनीक के एक अतिरिक्त स्रोत तक पहुंच दे सकता है। साथ ही, संवेदनशील रक्षा तकनीक की खरीद में पारदर्शिता, संचालन संबंधी नियंत्रण और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

ट्रंप परिवार से जुड़ा नया कनेक्शन?

POWERUS के कॉरपोरेट ढांचे में भी जल्द बदलाव होने की उम्मीद है। कंपनी का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। यह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसे एक ऐसे निवेश फंड का समर्थन प्राप्त है। इसका संबंध डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ा बताया गया है। Reuters के अनुसार, दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि यह विलय अक्टूबर की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।

अब तक क्या पता है और क्या छिपा है?

POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए समझौते से फिलहाल तीन बातें सामने आती हैं। पहली, दोनों पक्षों ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी, पाकिस्तान आर्मी ने अनमॅन्ड एरियल सिस्टिम्स से जुड़ा एक शुरुआती लेकिन अघोषित मूल्य वाला ऑर्डर दिया है। और तीसरी, दोनों पक्ष रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

समझौते का उद्देश्य क्या है?

ईरान सीमा और बलूचिस्तान में संभावित इस्तेमाल की चर्चा इसलिए सामने आई है क्योंकि POWERUS काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करती है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि POWERUS समझौते का उद्देश्य ईरान सीमा की निगरानी है।

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फिलहाल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान आर्मी और POWERUS के बीच सहयोग का वास्तविक दायरा सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी तक ही सामने आया है। शुरुआती ड्रोन ऑर्डर की कीमत, सिस्टम की प्रकृति और संभावित ऑपरेशनल इस्तेमाल को लेकर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।

वायुसेना को मिलेगा तेजस ट्विन सीटर और HTT-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में HAL करने जा रही बड़ा धमाका

Aatmanirbhar Bharat: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कल यानी 18 सितंबर 2026 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय वायुसेना (IAF) को LCA तेजस FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट सौंपेगा। इसके अलावा ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड (PHL) को सौंपे जाएंगे। यह कार्यक्रम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू की मौजूदगी में होगा।

HAL के अनुसार, यह हैंडओवर भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में HAL और उसके उद्योग साझेदारों की भूमिका को दिखाया किया जाएगा। इन्होंने देश में सैन्य और नागरिक, दोनों क्षेत्रों के लिए उन्नत एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म के डिजाइन, विकास और निर्माण की क्षमता को मजबूत किया है।

वायुसेना और पवन हंस के लिए अहम सौंपे जाएंगे प्लेटफॉर्म

इस अवसर पर भारतीय वायुसेना को LCA तेजस के FOC ट्विन-सीटर ट्रेनर और HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट मिलेंगे। वहीं, ध्रुव NG हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी पवन हंस लिमिटेड को की जाएगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, HAL के CMD रवि के. सहित रक्षा और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों, वायुसेना, पवन हंस, नियामक एजेंसियों तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर सरकार का जोर

सरकार ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा देने को उच्च प्राथमिकता दी है। इन प्लेटफॉर्म्स को शामिल करना स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

‘भारत के विजन की आधारशिला है रक्षा क्षेत्र’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कहा कि भविष्य की लड़ाई में रणनीतिक बढ़त तकनीकी नेतृत्व से तय होगी। उन्होंने कहा कि आज हम जो कल्पना करते हैं। वही कल की सैन्य क्षमता बनेगी। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का विजन सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने के बारे में नहीं है। बल्कि ऐसा भारत बनाने के बारे में है जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो।

सिंह ने रक्षा क्षेत्र को इस विज़न की नींव बताया। उन्होंने कहा, “2047 तक हमें अहम तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी। स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल काफी बढ़ाना होगा। रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ाना होगा और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।” रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि सहयोग के बिना इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच मजबूत साझेदारी होनी चाहिए।

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सिंह ने कहा कि DRDO और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी सिर्फ प्रोडक्शन तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। बल्कि इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन तक फैलाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि नई टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन, भविष्य की लड़ाई में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी इनोवेशन करने का आग्रह किया।

UPI MDR Charge: क्या आप एमडीआर चार्ज को लेकर चिंतित हैं? 42 FAQ से समझें कि क्यों चिंता करने की जरूरत नहीं है

UPI MDR Charge: यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज के ऐलान के बाद कई लोग चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। यूपीआई पर एमडीआर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। सच यह है कि इसके लागू होने के बाद भी यूजर्स को यूपीआई से पेमेंट पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी। एमडीआर चार्ज मर्चेंट यानी दुकानदार को देना होगा। इस पूरे मामले को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने 42 FAQ तैयार किए हैं। इसकी मदद से आपकी पूरी उलझन दूर हो जाएगी।

 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अभी क्यों लागू किया जा रहा है?

यूपीआई के जरिए हर महीने अरबों रुपये के ट्रांजेक्शन होते हैं। एमडीआर चार्ज से वसूला गया पैसा सिर्फ यूपीआई इकोसिस्टम में डिस्ट्रिब्यूट होता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा (बैंकों और नॉन-बैंकों के साथ यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा) और सर्विस बेहतर बनाने में मदद मिलती है। यूपीआई का शुल्क (एमडीआर) क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, वॉलेट आदि जैसे अन्य भुगतान साधनों के मुकाबले काफी कम हैं। शुल्क बहुत ही उचित रखे गए हैं और केवल ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ही लागू होंगे, जिससे यूपीआई भुगतान स्वीकार करने हेतु सबसे किफायती जरिया बना रहे।

क्या कम राशि वाले यूपीआई लेनदेन प्रभावित होंगे?

₹2,000 तक की राशि वाले यूपीआई लेनदेन पर MDR का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई (पी2एम) लेनदेन के 95% से अधिक हैं। उचित एमडीआर लगाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई रोजमर्रा के लेनदेन के लिए सुलभ और सुविधाजनक बना रहे, साथ ही दीर्घकालिक इकोसिस्टम की स्थिरता को भी मजबूती मिले।

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों के लिए कितना एमडीआर लागू किया जा रहा है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर 0.4% लागू होगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेनदेन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित होगा।

यूपीआई एमडीआर की तुलना पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड एमडीआर से कैसे की जा सकती है?

यूपीआई एमडीआर सभी पारंपरिक कार्ड-आधारित लेनदेन शुल्कों की तुलना में काफी कम है। सामान्य क्रेडिट कार्ड एमडीआर आमतौर पर प्रति लेनदेन 1.5% से 2.5% तक होता है, जबकि डेबिट कार्ड एमडीआर 0.90% तक सीमित होता है। ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यूपीआई एमडीआर को 0.4% और उच्च राशि की खरीदारी पर इसे ₹300 तक सीमित किया गया है।

अपडेटेड एमडीआर संबंधी प्रावधान कब से प्रभावी होंगे?

अपडेटेड एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह समयसीमा अधिग्रहण करने वाले बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों, फिनटेक अनुप्रयोगों और कॉरपोरेट लेखा प्लेटफॉर्मों को अपने सॉफ्टवेयर इंजन और बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है।

इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों से किस प्रकार की जा सकती है?

दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे आर्थिक मॉडल हैं जो इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार को सहयोग करते हैं। भारत का दृष्टिकोण सुगमता, विस्तार और समावेशन को प्राथमिकता देता है।

एमडीआर की लिमिट के अंतिम कार्यान्वयन और प्रवर्तन का निर्णय कौन करता है?

परिचालन संबंधी मापदंड, शुल्क वितरण मॉडल और श्रेणी सीमाएं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति की ओर से तय किए जाते हैं।

एमडीआर के अंतर्गत प्रस्तावित छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित निधि क्या है?

टियर-3 में पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को मिलाकर कुल 6 केंद्रों और टियर-1 व 2 केंद्रों, जिनमें केंद्र सरकार की ओर से किसी अधिसूचित योजना (जैसे कि पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा इत्यादि) भी शामिल हैं, में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी बनाए रखने और सब्सिडी दिए जाने हेतु एक समर्पित कोष का निर्माण किया जाएगा। इस कोष का इस्तेमाल व्यापारियों को जोड़ने के लिए इकोसिस्टम के सदस्यों को वित्तीय मदद प्रदान करने और मौजूदा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए भी किया जाएगा।

प्रस्तावित समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों को किस प्रकार मदद मिलेगी?

प्रस्तावित किया गया समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके लिए अधिग्रहण बैंकों/ भुगतान एग्रीगेटरों को व्यापारी जुड़ाव पहलों के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी और छोटे व्यापारियों की ओर से, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, टियर-III केंद्रों और उससे आगे के क्षेत्रों में, किए गए यूपीआई लेन-देन हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे निरंतर इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा, डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। विस्तृत रूपरेखा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह से अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।

यूपीआई के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना पर्याप्त क्यों नहीं है?

वार्षिक सरकारी प्रोत्साहन/ सब्सिडी, हालांकि शुरुआती समय में डिजिटल को अपनाने में तेजी लाने में मददगार है, लेकिन इसे भुगतान इंडस्ट्री की ओर से किए गए खर्चों की भरपाई के लिए स्थायी उपाय के बजाय अल्पकालिक मदद के तौर पर तैयार किया गया था। इंडस्ट्री के अनुमानों के आधार पर, यूपीआई भुगतान के संचालन, सर्वर बैंडविथ, धोखाधड़ी रोकथाम प्रणालियों और बैंक तकनीकी सहायता को बनाए रखने में सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल राजकोषीय बजट आवंटन पर निर्भर रहने से वित्तपोषण में अनिश्चितता पैदा होती है और बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ओर से दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी निवेश सीमित हो जाते हैं। एक वाणिज्यिक, सीमा-आधारित मॉडल में बदलाव निरंतर तकनीकी नवाचार के लिए विश्वसनीय पूंजी प्रदान करता है।

यह कदम पेमेंट ऐप ऑपरेटरों के बीच बाजार प्रतिस्पर्धा को कैसे प्रोत्साहन देगा?

एक संपोषित व्यावसायिक फ्रेमवर्क स्थापित करने से नए फिनटेक स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी कंपनियों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। जब भुगतान प्रोसेसिंग शून्य-एमडीआर (डिजिटल डिलीवरी रेट) शर्तों के अंतर्गत संचालित होती है, तो केवल उच्च पूंजी वाली तकनीकी कंपनियां ही दीर्घकालिक परिचालन घाटे को वहन कर सकती हैं। एक पूर्वानुमानित व्यावसायिक राजस्व मॉडल सभी के लिए समान अवसर प्रदान करता है, जिससे छोटे, नवोन्मेषी स्टार्टअप प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, विशेषीकृत भुगतान सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं और वित्तीय पहुंच का विस्तार कर सकते हैं। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा आखिरकार बेहतर सेवाओं, ऐप की बेहतर विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्पों की ओर ले जाती है।

यह नीति उभरते खतरों के खिलाफ साइबर सुरक्षा लचीलापन कैसे सुनिश्चित करती है?

एमडीआर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने, एन्क्रिप्शन अपग्रेड आदि में निवेश हेतु किया जा सकता है।

2026 तक यूपीआई का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार हो चुका है?

2026 तक, यूपीआई का वैश्विक विस्तार काफी बढ़ चुका है और दुनिया के 11 देशों में इसकी भुगतान सेवाएं सक्रिय हैं। एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर घरेलू आधार का निर्माण भारत को डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक नेतृत्व के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने में मददगार होगा।

वर्तमान में यूपीआई का लेन-देन की मात्रा और मूल्य का स्तर क्या है और इसे आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता क्यों है?

अभूतपूर्व जन स्वीकृति का प्रदर्शन करते हुए, यूपीआई ने अकेले अगस्त 2026 में कुल ₹29.9 लाख करोड़ राशि के 2,451 करोड़ लेन-देन संसाधित किए। यह भारी मात्रा भारतीय अर्थव्यवस्था के प्राथमिक वित्तीय इंजन के रूप में यूपीआई की भूमिका को उजागर करती है, जो प्रतिदिन करोड़ों भुगतानों का प्रबंधन करता है। इस पैमाने को संभालने के लिए भारी संख्या में सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज गति वाली दूरसंचार लाइनें, बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा निगरानी और विशेष बैंकिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। लेन-देन के ये आंकड़े इस बात को पुष्ट करते हैं कि प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आत्मनिर्भर वित्तपोषण फ्रेमवर्क स्थापित करना क्यों जरूरी था।

क्या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर सामान्य उपभोक्ताओं से शुल्क लिया जाएगा?

नहीं, यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क जारी रहेंगी। उपभोक्ता अब तक की तरह ही यूपीआई का इस्तेमाल करके निःशुल्क लेन-देन कर सकते हैं। यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्तिगत खाताधारक बिना किसी शुल्क की चिंता किए अपने सभी नियमित दैनिक खर्चों के लिए यूपीआई एप्लिकेशन का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। एमडीआर नीति यह सुनिश्चित करती है कि यूपीआई पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क और सुलभ बनी रहे।

क्या यूपीआई के पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन जैसे दोस्तों, परिवार या व्यक्तिगत संपर्कों को पैसे भेजने पर कोई शुल्क लगता है?

नहीं, पी2पी लेन-देन भुगतानकर्ता और प्राप्तकर्ता दोनों के लिए निःशुल्क रहेंगे। यूपीआई का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति को कोई भी राशि हस्तांतरित करने या प्राप्त करने (या स्वयं को हस्तांतरित करने) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। फिर चाहे आप परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज रहे हों, दोस्तों के साथ बिल बांट रहे हों, या अपने लिंक किए गए बैंक खातों में स्वयं को हस्तांतरित कर रहे हों, इन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा। नागरिक बिना किसी लेन-देन शुल्क के यूपीआई पर किसी भी स्वीकृत राशि का हस्तांतरण कर सकते हैं।

क्या यूपीआई ऐप यूपीआई भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क लेना शुरू कर देंगे?

नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाता यूपीआई के माध्यम से किए गए किसी भी भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क नहीं लेंगे। यूपीआई एप्लिकेशन को यूपीआई लेन-देन पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

क्या व्यापारियों की ओर से नाममात्र शुल्क का भुगतान शुरू करने पर दुकानों में उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी होगी?

नहीं, बाजार की गतिशीलता और ऐतिहासिक भुगतान रुझान दर्शाते हैं कि व्यापारी अधिक कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रोसेसिंग की मामूली लागत वहन करते हैं। भुगतान स्वीकार करने की लागत को मानक परिचालन खर्च माना जाता है, जिसकी भरपाई ग्राहकों की बढ़ती संख्या, उच्च औसत टिकट मूल्य और नकदी प्रबंधन के कम जोखिम से हो जाती है। चूंकि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर क्रेडिट कार्ड शुल्क से काफी कम है और केवल विशिष्ट लेन-देन सीमा से ऊपर ही लागू होता है, इसलिए दुकानदारों के पास खुदरा कीमतों को बढ़ाने का कोई आर्थिक प्रोत्साहन नहीं है। उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के लिए निश्चित मूल्य का ही भुगतान करते रहेंगे।

क्या मुझे स्थानीय विक्रेता पर क्यूआर कोड स्कैन करते समय शुल्क देना होगा?

नहीं, स्थानीय बाजारों, स्ट्रीट वेंडरों या छोटी खुदरा दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। क्यूआर लेन-देन के ग्राहक के सामने वाले हिस्से में कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे खरीदारी की राशि कितनी भी हो। यह नीति चाय की दुकानों और स्थानीय परिवहन जैसी दैनिक छोटी-मोटी खरीदारी को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क से बचाने के लिए बनाई गई है। उपभोक्ता पूरी तरह से आश्वस्त होकर क्यूआर कोड स्कैन करना जारी रख सकते हैं कि उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

क्या उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन के लिए कोई मासिक सीमा है?

नहीं, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्तरित सीमा नहीं है। यूजर्स पूरे महीने में बिना किसी शुल्क सीमा तक पहुंचे, जितने चाहें उतने वैध पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) या पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि निजी बैंक और एनपीसीआई कुल लेन-देन राशि पर मानक दैनिक सुरक्षा सीमाएं लागू करते हैं (आमतौर पर लेनदेन श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक), ये जोखिम प्रबंधन मापदंड हैं, न कि व्यावसायिक शुल्क स्तर पर। किसी भी स्थिति में, उपभोक्ता यूपीआई का कितनी भी बार इस्तेमाल करें, उन्हें कोई लेन-देन शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

सामान्य यूजर्स यूपीआई शुल्क के संबंध में आधिकारिक अपडेट कहां से सत्यापित कर सकते हैं?

नागरिकों को वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से सीधे प्रकाशित आधिकारिक सूचनाओं को देखने की सलाह दी जाती है। भुगतान शुल्कों के संबंध में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और भ्रामक रिपोर्टों के कारण, सरकार ने जनता से असत्यापित संदेशों को आगे न भेजने का आग्रह किया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), आरबीआई या एनपीसीआई की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां प्रामाणिक नियामक नीति का प्राथमिक स्रोत हैं। यूजर्स अपने प्राथमिक बैंकिंग एप्लिकेशन में भी सत्यापित सूचनाओं की जांच कर सकते हैं।

क्या एमडीआर की शुरुआत से ऑटो-डेबिट रिकरिंग पेमेंट जैसे यूटिलिटी बिल या ओटीटी/ म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन पर असर पड़ता है?

नहीं, स्वचालित रिकरिंग स्थायी निर्देश, जिन्हें यूपीआई मैंडेट या ऑटोपे के नाम से जाना जाता है, पर निर्धारित एमडीआर लेन-देन शुल्क नहीं लगता है। मासिक उपयोगिता बिल, ओटीटी स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन, सभी रिकरिंग निवेश आदि के लिए स्वचालित रिकरिंग हस्तांतरण का इस्तेमाल किए गए भुगतानों पर कोई निर्धारित एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।

क्या छोटे स्थानीय विक्रेताओं (पी2पीएम) से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लिया जाएगा?

नहीं। पी2पीएम फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर (एमडीआर) लागू रहेगा। ये वे छोटे विक्रेता हैं जिन्हें यूपीआई क्यूआर के माध्यम से सीधे उनके खातों में प्रति माह 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती है। पी2पीएम श्रेणी असंगठित खुदरा क्षेत्र में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता को प्रोत्साहन देती है। इसके साथ ही, छोटे विक्रेता विशेष सूक्ष्म व्यापारी खाता वर्गीकरण (पी2पीएम) के अंतर्गत काम करते हैं, जो उन्हें वाणिज्यिक शुल्कों से सुरक्षा प्रदान करता है। एमडीआर फ्रेमवर्क विशेष रूप से इस तरह से तैयार किया गया है कि असंगठित खुदरा क्षेत्र के छोटे व्यवसाय बिना किसी मार्जिन कटौती के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकें।

पी2पीएम फ्रेमवर्क क्या है और यह छोटे व्यापारियों की सुरक्षा कैसे करता है?

पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) फ्रेमवर्क एनपीसीआई की ओर से तैयार की गई एक विशेष खाता श्रेणी है, जिसका उद्देश्य छोटे विक्रेताओं को सीधे उनके निजी बैंक खातों में भुगतान प्राप्त करने में मदद करना है। पी2पीएम दिशानिर्देशों के अंतर्गत, यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर का लाभ मिलता है। यह वर्गीकरण अनौपचारिक स्ट्रीट वेंडर सेटअप और औपचारिक वाणिज्यिक मर्चेंट एक्वायरिंग खातों के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे सूक्ष्म व्यवसायों के लिए कोई लागत नहीं आती है। यह असंगठित क्षेत्र में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देता है।

क्या छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर कोड को अपग्रेड करने या बदलने की जरूरत है?

नहीं। मौजूदा क्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर सामान्य तरीके से काम करता रहेगा। व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर स्टैंड या साउंडबॉक्स को बदलने, पुनः पंजीकृत करने या उनमें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। दुकानों में लगे हुए सभी यूपीआई क्यूआर कोड बिना किसी रुकावट के भुगतान प्रक्रिया जारी रखेंगे। व्यापारी बैंक शाखा में जाए बिना या सॉफ्टवेयर अपडेट किए बिना अपने मौजूदा सेटअप के माध्यम से ग्राहकों से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी छोटे व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त होता है तो क्या होता है?

एमडीआर की प्रयोज्यता समग्र व्यापारी खाता वर्गीकरण के माध्यम से निर्धारित की जाती है। ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त करने पर पी2पीएम जैसे छूट प्राप्त श्रेणियों के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा।

समर्पित लघु व्यापारी कोष के लिए विस्तृत रूपरेखा को कब अंतिम रूप दिया जाएगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ सलाह मशविरा करके लघु व्यापारी निधि के लिए विस्तृत परिचालन फ्रेमवर्क को अगले तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। इस सहयोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से पूंजी आवंटन के सटीक मानदंड, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और व्यापारी प्रोत्साहन संरचनाएं निर्धारित की जाएंगी। हितधारकों के साथ परामर्श से यह सुनिश्चित होगा कि योजना जमीनी स्तर पर वितरण संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करे।

क्या शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारी को जीएसटी के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है?

नहीं, यूपीआई लेन-देन पर शून्य एमडीआर सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत शून्य-रेटेड प्रोसेसिंग की पात्रता मासिक संग्रहण सीमा (प्रति माह ₹1 लाख तक) और बैंक खाता वर्गीकरण की ओर से निर्धारित की जाती है, चाहे कर पंजीकरण की स्थिति कुछ भी हो। अनिवार्य वैधानिक कर सीमा से नीचे काम करने वाले सूक्ष्म उद्यम जीएसटी दस्तावेज प्रदान किए बिना डिजिटल भुगतान संसाधित कर सकते हैं। इससे अनौपचारिक सूक्ष्म व्यवसायों को डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ने में आने वाली नियामक अनुपालन संबंधी बाधाओं से छूट मिलती है।

अधिग्रहण करने वाले बैंक शून्य एमडीआर के लिए पात्र छोटे व्यापारियों (पी2पीएम) की पहचान कैसे करेंगे?

अधिग्रहण करने वाले बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता, पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यापारियों के लिए प्रति माह ₹1 लाख की आने वाले लेन-देन सीमा की निगरानी के लिए लेन-देन गति जांच का इस्तेमाल करते हैं। लगातार 3 महीने तक प्रति माह ₹1 लाख से अधिक यूपीआई भुगतान का आने वाला क्रेडिट प्राप्त करने वाले व्यापारियों को औपचारिक रूप से पी2एम श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है?

हां, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पी2पीएम व्यापारियों की ओर से स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है। ग्रामीण भारत में डिजिटल तकनीक को प्रोत्साहन देना एक प्रमुख नीतिगत उद्देश्य बना हुआ है। सभी ग्रामीण दुकानदारों को सीमा छूट (₹2,000 से कम के भुगतान पर शून्य एमडीआर) का लाभ मिलेगा और प्रस्तावित समर्पित भुगतान प्रोत्साहन कोष के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त मदद भी मिलेगी। इसके साथ ही, अधिग्रहण करने वाले बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय दुकानदारों पर लागत का बोझ काफी कम हो जाएगा।

बड़े वाणिज्यिक लेन-देन के लिए कौन सा एमडीआर लागू होता है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का मामूली एमडीआर लागू किया जाएगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। यह 0.4% की दर क्रेडिट कार्ड या पेमेंट गेटवे जैसे वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तुलना में काफी कम है। इसके साथ ही, ₹2,000 की सीमा से कम के लेन-देन स्थापित व्यावसायिक संस्थाओं के लिए भी निःशुल्क रहेंगे। यह संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि उद्यम व्यापारी सिस्टम के रखरखाव में उचित योगदान दें, साथ ही दैनिक लेन-देन लागत को भी बेहद कम रखें।

क्या बहुत अधिक राशि वाले यूपीआई भुगतान पर अधिकतम शुल्क की कोई सीमा है?

हां, बड़े लेन-देन करने वाले उद्यमों की सुरक्षा के लिए, ₹75,000 और उससे अधिक के भुगतानों पर प्रति लेन-देन पर ₹300 की अधिकतम शुल्क सीमा निर्धारित की गई है। उदाहरण के लिए, ₹1,00,000 के लेन-देन पर ₹400 का प्रतिशत-आधारित शुल्क नहीं लगेगा; बल्कि, शुल्क ₹300 की निर्धारित सीमा पर ही समाप्त हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च मूल्य के लेन-देन की लागत पूर्वानुमानित और प्रतिस्पर्धी बनी रहे।

प्रतिशत दर के बजाय निश्चित एमडीआर के लिए कौन सी विशिष्ट श्रेणियां पात्र हैं?

रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन जैसी विशिष्ट व्यापारी श्रेणियों के लिए, 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेन-देन 5 रुपये का एक समान मासिक दर (एमडीआर) लागू होगा। 0.4% की परिवर्तनीय दर लागू करने के बजाय, ये विशिष्ट क्षेत्र लेन-देन राशि की परवाह किए बिना 5 रुपये का निश्चित शुल्क अदा करेंगे। यह एक समान दर मॉडल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं, उपयोगिता बिल संग्रह और ईंधन खुदरा जैसे कम लाभ वाले क्षेत्रों में लागत बढ़ोतरी को रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यक उपभोक्ता सेवाएं कम लागत वाली और डिजिटल रूप से कुशल बनी रहें।

क्या एंटरप्राइज मर्चेंट एमडीआर का बोझ खरीददार पर डाल सकते हैं?

नहीं, यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते समय पंजीकृत व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ता केवल निर्धारित मूल्य का ही भुगतान करें।

सटीक लेन-देन (जैसे, ₹5,000 बनाम ₹1,00,000) पर एमडीआर की गणना कैसे की जाती है?

एमडीआर की गणना लेन-देन मूल्य सीमा के आधार पर एक स्पष्ट और अनुमानित सूत्र का पालन करती है। ₹3,000 की खरीदारी पर, 0.4% की दर लागू करने पर व्यापारी की ओर से अपने अधिग्रहण बैंक को ₹12 का एमडीआर शुल्क देना होता है। ₹50,000 की खरीदारी पर, 0.4% शुल्क ₹200 के बराबर होता है। हालांकि, ₹1,00,000 की उच्च-मूल्य वाली खरीदारी के लिए, 0.4% की गणना (जो ₹400 के बराबर है) ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा से अधिक हो जाती है (₹75,000 और उससे अधिक के भुगतान के लिए प्रति लेन-देन ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा है। ₹2,000 से कम के किसी भी लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगता है)।

मर्चेंट को भुगतान की गई राशिलागू एमडीआरमर्चेंट की ओर से भुगतान किया गया एमडीआर
₹ 2,000₹ 0
₹ 3,0000.40% ₹ 12
₹ 50,000 0.40% ₹ 200
₹ 75,000 और उससे अधिकनिश्चित ₹ 300 ₹ 300

क्या एमडीआर यूपीआई या क्रेडिट लाइन से जुड़े क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए लेन-देन पर लागू होता है?

क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान, जैसे कि यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड या पूर्व-स्वीकृत बैंक क्रेडिट लाइनें, अलग क्रेडिट उत्पाद नियमों के अंतर्गत संचालित होते हैं। चूंकि क्रेडिट-लिंक्ड लेन-देन में जारीकर्ता बैंकों की ओर से वित्तपोषित अल्पकालिक लोन शामिल होते हैं, इसलिए वे मानक क्रेडिट कार्ड दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। इस संशोधन में चर्चा की गई एमडीआर विशेष रूप से यूजर्स खाते से व्यापारी खाते में सीधे किए जाने वाले यूपीआई लेन-देन पर लागू होती है।

यूपीआई के माध्यम से पूंजी बाजार लेन-देन पर कौन सी विशिष्ट एमडीआर दरें और सीमाएं लागू होती हैं?

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों को किए जाने वाले भुगतानों सहित पूंजी बाजार लेन-देन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लेन-देन मूल्य का नाममात्र 0.02% निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है। औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह शुल्क मानक वाणिज्यिक लेन-देन दरों से कम है।

इस पूंजी बाजार एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत कौन सी संस्थाएं और लेन-देन के प्रकार शामिल हैं?

यह विशिष्ट एमडीआर श्रेणी पूंजी बाजारों में कार्यरत सभी विनियमित संस्थाओं को स्पष्ट रूप से कवर करती है, जिनमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (म्यूचुअल फंड), एसईबीआई-पंजीकृत स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और निवेश प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह इक्विटी खरीद, डेट बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड खरीद और ब्रोकर वॉलेट टॉप-अप के लिए यूपीआई के माध्यम से किए गए फंड ट्रांसफर पर लागू होता है। इस श्रेणी को अलग से परिभाषित करके, यह सुनिश्चित किया जाता है कि पूंजी बाजार ट्रांसफर नियमित खुदरा खरीदारी या सामान्य सेवा भुगतानों से अलग हों।

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क्या बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष एमडीआर रियायतों के लिए पात्र हैं?

हां, यूपीआई के माध्यम से स्वीकार किए गए बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष निश्चित-दर की छूट के पात्र हैं। ₹2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम भुगतान पर, प्रतिशत-आधारित शुल्क के बजाय प्रति लेन-देन ₹5 का निश्चित एमडीआर लागू होता है। यह रियायती मॉडल सुनिश्चित करता है कि उच्च मूल्य के वार्षिक या अर्ध-वार्षिक बीमा भुगतान करने वाले पॉलिसीधारकों को भारी बैकएंड शुल्क का सामना न करना पड़े। बीमा कंपनियों को कम लागत वाले डिजिटल संग्रह से लाभ होता है, जिससे पूरे भारत में बीमा कवरेज का विस्तार करने में मदद मिलती है।

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खरीद के लिए एमडीआर कैसे काम करता है?

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर की गई ईंधन खरीद पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 की एक समान रियायती दर लागू होती है। यह ₹5 की एक समान फीस पेट्रोल पंप संचालकों को टैंक रिफिल पर लगने वाले उच्च प्रोसेसिंग शुल्क से बचाती है। ₹2,000 से कम के सभी ईंधन भुगतानों पर एमडीआर 0% रहता है, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों के लिए ईंधन भरना पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हो जाता है, जबकि ईंधन स्टेशन संचालकों को ऐसे लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं देना पड़ता है।

क्या सरकारी उपयोगिता बिल संग्रह (बिजली, पानी) पर प्रतिशत एमडीआर लागू होगा?

बिजली वितरण, नगरपालिका जल शुल्क और पाइपलाइन की ओर से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस जैसे सार्वजनिक उपयोगिता भुगतान निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के उपयोगिता बिल भुगतानों पर 0.4% बदलाव दर के बजाय ₹5 का एक समान रियायती मासिक दर एमडीआर लागू होता है। ₹2,000 से कम के उपयोगिता लेन-देन पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता है। यह फ्रेमवर्क सुनिश्चित करता है कि राज्य उपयोगिता बोर्ड और नगर निगम उच्च प्रसंस्करण शुल्क लगाए बिना बिल संग्रह को डिजिटल बना सकें, जिससे सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं सस्ती बनी रहें।

क्या शैक्षणिक संस्थान मानक एमडीआर प्रतिशत शुल्क से मुक्त हैं?

स्कूल ट्यूशन, विश्वविद्यालय सत्र शुल्क और संस्थागत प्रवेश परीक्षाओं सहित शैक्षणिक शुल्क संग्रह, निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर निश्चित-फीस संरचना या सीमित प्रोसेसिंग दरें लागू होती हैं, जिससे बड़ी राशि पर लगने वाले उच्च प्रतिशत-आधारित शुल्कों से बचा जा सकता है। ₹2,000 तक के शैक्षणिक लेन-देन पूरी तरह से एमडीआर से मुक्त हैं। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि स्कूल, कॉलेज और छात्र भारी प्रशासनिक शुल्कों के बिना डिजिटल रूप से ट्यूशन फीस का भुगतान कर सकें।