दुनिया में बजेगा भारत के UPI का डंका, GFF 2026 में PM Modi ने बताया अगला बड़ा मिशन

दुनिया में बजेगा भारत के UPI का डंका, GFF 2026 में PM Modi ने बताया अगला बड़ा मिशन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest (GFF) 2026 के 7वें संस्करण को संबोधित करते हुए भारत के UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और दूसरे देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे देशों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हैं या जो अपने पेमेंट सिस्टम को भारत के सिस्टम से जोड़ने के लिए तैयार हैं।

 

रेमिटेंस लागत घटाने में UPI की बड़ी भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय विदेशों में काम करते हैं और भारत दुनिया में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है। विदेशों से भारत भेजे जाने वाले पैसे का एक हिस्सा ट्रांजैक्शन फीस में चला जाता है। उन्होंने कहा कि UPI इस लागत को कम करने में मदद कर सकता है और विदेश से भेजा गया पैसा परिवारों तक पहले से ज्यादा तेजी से पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री ने फिनटेक इंडस्ट्री से दूसरे देशों के स्थानीय पेमेंट सिस्टम के साथ UPI को जोड़ने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

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11 देशों में UPI की पहुंच

 

पीएम मोदी ने UPI की 10 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की सीमाओं से आगे बढ़ चुका है। UPI की मौजूदगी 11 देशों तक पहुंच चुकी है और सिंगापुर के साथ इसका डायरेक्ट क्रॉस-बॉर्डर लिंक भी है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य सिर्फ अपने पेमेंट सिस्टम को दूसरे देशों में ले जाना नहीं होना चाहिए, बल्कि अलग-अलग देशों के पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने के लिए एक मजबूत ग्लोबल नेटवर्क तैयार करना भी होना चाहिए।

 

'दूसरे देशों के सिस्टम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं'

प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल कार्ड पेमेंट सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्तमान में कार्ड पेमेंट का बड़ा हिस्सा ऐसे सिस्टम पर चलता है जिन्हें दूसरे देशों में विकसित किया गया है। हालांकि, भारत के पास अब इसका अपना विकल्प मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नियम और मानक खुद तय कर सकता है और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकता है।

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UPI सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, सभ्यता की कहानी भी

 

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें UPI को केवल टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं बल्कि एक सभ्यतागत बदलाव के रूप में देखा गया था। पीएम मोदी ने कहा कि पेमेंट के क्षेत्र में भारत ने पिछले वर्षों में बड़ी सफलता हासिल की है। अब भारतीय फिनटेक इंडस्ट्री के लिए अगला अध्याय पेमेंट से आगे बढ़कर नॉन-पेमेंट ट्रांजैक्शन पर काम करना होना चाहिए।

 

क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश तक डिजिटल पहुंच

 

प्रधानमंत्री ने फिनटेक सेक्टर से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश जैसी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फिनटेक का अगला चरण केवल डिजिटल पेमेंट को बढ़ाना नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पारदर्शी और आसान तरीके से पहुंचाना होना चाहिए।

 

साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन पर जोर

 

पीएम मोदी ने फिनटेक कंपनियों से उच्च स्तर के साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशन विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने नैतिक डेटा सुरक्षा मानकों की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने एक मजबूत फिनटेक रेगुलेटरी इकोसिस्टम और Fintech Consumer Protection Index विकसित करने की बात कही। उनका कहना था कि इससे कंपनियों की पारदर्शिता को रेट करने और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा में मदद मिल सकती है।

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पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें

  • UPI को ग्लोबल स्तर पर और विस्तार देने पर जोर।
  • UPI को दूसरे देशों के लोकल पेमेंट सिस्टम से जोड़ने की अपील।
  • क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस की लागत घटाने की कोशिश।
  • विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए तेज और सस्ता मनी ट्रांसफर।
  • पेमेंट के बाद फिनटेक का अगला फोकस क्रेडिट, इंश्योरेंस और निवेश पर।
  • साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन को मजबूत करने की जरूरत।
  • पारदर्शिता के लिए Fintech Consumer Protection Index बनाने पर जोर।
  • भारत के अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम और मानकों को दुनिया से जोड़ने का लक्ष्य।

PM मोदी की मुंबई रैली से पहले 2 संदिग्ध हिरासत में, PMO अधिकारी बनकर पहुंचा था युवक, हथियार लिए गार्ड भी साथ था

PM मोदी की मुंबई रैली से पहले 2 संदिग्ध हिरासत में, PMO अधिकारी बनकर पहुंचा था युवक, हथियार लिए गार्ड भी साथ था

FIR on Meta chief on morfed video against PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुंबई में होने वाली रैली से करीब दो घंटे पहले पुलिस ने 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। खबरों के मुताबिक इनमें 24 वर्षीय एक युवक पर आरोप है कि वह PMO अधिकारी बनकर बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में पहुंचा था।

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उसके साथ एक गार्ड भी था। इसके पास रिवॉल्वर होने की बात सामने आई है। मुंबई क्राइम ब्रांच दोनों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को युवक के पास से एक फर्जी पहचान पत्र (Fake ID Card) भी मिलने की जानकारी सामने आई है।

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PM मोदी आज ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का करेंगे उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब शाम 5.45 बजे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 का उद्घाटन करेंगे। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का सातवां संस्करण मुंबई में 8 से 11 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले 2 संदिग्धों के हिरासत में लिए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी जांच तेज हो गई है। क्राइम ब्रांच दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे किस उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे और उनके पास फर्जी पहचान पत्र और हथियारबंद गार्ड क्यों था।

JLR Layoffs: टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर में जाएंगी 4000 नौकरियां

टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर ऑटोमोटिव पीएलसी (JLR) अगले दो सालों में 4,000 नौकरियां कम करने जा रही है। कंपनी बढ़ती लागत, गिरती बिक्री और अमेरिकी टैरिफ के असर जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। JLR ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार कंपनी है। ‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार देर रात कर्मचारियों को चेतावनी दी गई कि सोमवार को रिडंडेंसी प्रोग्राम (छंटनी) की घोषणा हो सकती है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एक बयान में कंपनी ने कहा है कि वह एक स्वैच्छिक छंटनी कार्यक्रम (वॉलंटरी रिडंडेंसी प्रोग्राम) शुरू कर रही है। कंपनी दो सालों में लगभग 2.3 अरब डॉलर की बचत करना चाहती है। बयान के अनुसार, JLR वैश्विक बाजार की स्थितियों को देखते हुए अपने ब्रेक-ईवन पॉइंट को घटाकर 300,000 गाड़ियां करना चाहती है। साथ ही अपने कारोबार को आसान बनाना चाहती है।

JLR दिए हुए है 33000 लोगों को रोजगार

JLR ब्रिटेन में लगभग 33,000 लोगों को रोजगार दिए हुए है। कंपनी की मालिक भारत की टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड है। हाल की तिमाही में JLR का रेवेन्यू लगभग 10 प्रतिशत गिर गया। प्रॉफिट बिफोर टैक्स 69 प्रतिशत घटकर 10.9 करोड़ पाउंड रह गया। कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक रेंज रोवर इस महीने की शुरुआत में बिक्री के लिए आई। यह बाजार की सबसे महंगी इलेक्ट्रिक SUV में से एक है।

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Volkswagen में और 50000 लोगों की छंटनी को मंजूरी

जर्मनी की फॉक्सवैगन में जल्द ही और 50000 नौकरियां जा सकती हैं। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने एक बदलाव योजना ‘फ्यूचर प्लान 2030’ को मंजूरी दी है। इसमें 50,000 और नौकरियां खत्म करना, 2035 तक अपने व्हीकल मॉडल लाइनअप को आधा करना और 2027-2031 के दौरान कैपिटल खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करना जैसी 12 पहलें शामिल हैं। 50,000 नौकरियां कम करने पर सहमति पहले ही बन चुकी थी और प्रक्रिया चल रही है। अब दुनियाभर में लगभग और 50,000 नौकरियां कम करने के प्लान को मंजूरी मिल गई है।

इसके अलावा फॉक्सवैगन ग्रुप की भारतीय यूनिट अपने 3 साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। इसके कारण कंपनी की लगभग 12 प्रतिशत वर्कफोर्स कम हो जाएगी। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब 2027 तक तेजी से छंटनी करने की तैयारी है।

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जर्मनी की फॉक्सवैगन में जल्द ही और 50000 नौकरियां जा सकती हैं। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने एक बदलाव योजना ‘फ्यूचर प्लान 2030’ को मंजूरी दी है। इसमें 50,000 और नौकरियां खत्म करना, 2035 तक अपने व्हीकल मॉडल लाइनअप को आधा करना और 2027-2031 के दौरान कैपिटल खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करना जैसी 12 पहलें शामिल हैं। कंपनी ने इसके पीछे ग्लोबल कॉम्पिटीशन, बदलती मांगों और टेक्नोलॉजी में बदलाव का हवाला दिया है।

फॉक्सवैगन यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर है। यह AG, Porsche और Audi की भी मालिक है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फॉक्सवैगन के 89 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान है। इसमें जर्मनी के उन 4 प्लांट के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करना भी शामिल है, जिनके मॉडल अगले दशक में खत्म हो जाएंगे। कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक बयान में कहा, “यह फॉक्सवैगन ग्रुप के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है। हम अपने सभी कर्मचारियों, अपने पार्टनर्स और दुनिया भर में इंडस्ट्रियल जॉब्स के लिए जिम्मेदारी ले रहे हैं।”

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सवैगन के मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच इस दशक के आखिर तक कुल 1,00,000 नौकरियां कम करने पर सहमति बन गई है। 50,000 नौकरियां कम करने पर सहमति पहले ही बन चुकी थी और प्रक्रिया चल रही है। अब दुनियाभर में लगभग और 50,000 नौकरियां कम करने के प्लान को मंजूरी मिल गई है।

तगड़ा दबाव झेल रही है Volkswagen

यह फ्यूचर प्लान ऐसे समय में आया है, जब फॉक्सवैगन पर हर तरफ से दबाव है। कंपनी एक ओर अमेरिका के इंपोर्ट टैरिफ और दूसरी तरफ कमजोर चीनी बाजार के बीच फंसी हुई है। फॉक्सवैगन का कहना है कि ग्लोबल वर्कफोर्स क्षमता में और बुनियादी बदलाव की जरूरत है।

Volkswagen India 12% जॉब करने वाली है कट

ब्लूमबर्ग की एक दूसरी रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि फॉक्सवैगन ग्रुप की भारतीय यूनिट अपने 3 साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। इसके कारण कंपनी की लगभग 12 प्रतिशत वर्कफोर्स कम हो जाएगी। कंपनी भारत में अपने अगले इन्वेस्टमेंट साइकिल से पहले लागत कम करना चाहती है। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब 2027 तक तेजी से छंटनी करने की तैयारी है। इसके तहत कुछ सौ व्हाइट-कॉलर और शॉप-फ्लोर नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

PayPal Layoffs: फिनटेक कंपनी में छंटनी, भारत में निकाले 600 कर्मचारी

कहा जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद फॉक्सवैगन के भारत में नेक्स्ट जनरेशन गाड़ियां लॉन्च करने से पहले कामकाज में करोड़ों डॉलर बचाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पीयूष अरोड़ा का कहना है, “वैसे तो हम अपनी वर्कफोर्स के बारे में अनुमानित आंकड़ों पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं, लेकिन अपनी भारतीय बिजनेस यूनिट्स में कामकाज को बेहतर बनाने की हमारी कोशिशें तेज हो रही हैं।”

यह भी कहा कि आगे चलकर कंपनी अपनी लोकल इंजीनियरिंग टीम को बढ़ा सकती है। साथ ही ग्रुप के लिए एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और एक्सपोर्ट हब के तौर पर भारत में निवेश भी बढ़ा सकती है। भारत में दो दशक यानि कि 20 साल से ज्यादा समय बिताने के बाद भी फॉक्सवैगन की मौजूदगी अपेक्षाकृत कम है।

ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना हुआ आसान, यहां जानिए थोड़ी-थोड़ी सेविंग्स से कैसे कर सकते हैं सोने में बड़ा निवेश

ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना पहले कभी इतना आसान नहीं था। आप थोड़ी-थोड़ी बचत से भी गोल्ड में अब बड़ा निवेश कर सकते हैं। कई बड़ी गोल्ड ज्वेलरी कंपनियों ने फिनटेक से समझौते किए हैं। इससे कम इनकम वाले परिवारों के लिए भी ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना आसान हो गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

पेटीएम ने कैरेटलेन से मिलाया है हाथ

कैरेटलेन ने Paytm से हाथ मिलाया है। इससे पेटीएम के यूजर्स डिजिटल गोल्ड में अपने छोटे-छोटे निवेश का इस्तेमाल कैरेटलेन से ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपने पेटीएम के जरिए डिजिटल गोल्ड में धीरे-धीरे करके कुल 6,000 रुपये का निवेश किया है। आपको कैरेटलेन की कोई 8,000 रुपये की ज्वेलरी पसंद है तो 6,000 रुपये का पेमेंट आपके डिजिटल गोल्ड में निवेश से हो जाएगा। बाकी 2,000 रुपये का पेमेंट आप यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए कर सकते हैं।

कैरेटलोन गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी भी करेगी

अगर आप कैरेटलेन से गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी चाहते हैं तो यह सुविधा भी उपलब्ध है। कई शहरों में कैरेटलेन की यह सुविधा उपलब्ध है। कंपनी आपकी गोल्ड ज्वेलरी की पैकिंग और शिपमेंट करेगी। आप पेटीएम ऐप पर ऑर्डर कनफर्मेशन, ट्रैकिंग और पर्चेज डिटेल्स देख सकते हैं। इसका मतलब है कि यह पूरा प्रोसेस ट्रांसपेरेंट है। पेटीएम के यूजर्स इस तरह अपनी छोटी-छोटी सेविंग्स का इस्तेमाल अपनी पसंद की ब्रांडेड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं।

जेन डायमंड की यह स्कीम सोने में निवेश को आसान बनाती है

Zen Diamond India ने My Gold Multiplier Plan शुरू किया है। इसके जरिए ग्राहक हर महीने के कंट्रिब्यूशन से 999 फाइन हॉलमार्किंग गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं। कंपनी के एमडी नील सोनावाला ने बताया कि इस स्कीम की मैच्योरिटी पर ग्राहक अपने निवेश का इस्तेमाल गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। कंपनी की तरफ से उन्हें सोने का 30 फीसदी रिवॉर्ड के रूप में भी मिलेगा। इतना ही नहीं ग्राहक अपने खुद के 24-कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल भी रिडेम्प्शन के समय कर सकते हैं।

इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम का भी उठा सकते हैं फायदा

जेन डायमंड ने इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम भी शुरू किया है। कंपनी का कहना है कि यह जीरो-कॉस्ट, जीरो-डाउनपेमेंट और जीरो इंटरेस्ट ईएमआई ऑप्शन है। ग्राहक को कंपनी के स्टोर पर हर 90,000 के खर् पर 1 ग्राम गोल्ड कॉइन भी मिलता है। कैरेटलेन और जेन डायमंड की ईजी गोल्ड ज्वेलरी पर्चेज स्कीम ग्राहक को छोटी सेविंग्स से ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी में निवेश का मौका देती हैं।

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स्कीम का फायदा उठाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

एक बात ग्राहक को ध्यान में रखने की जरूरत है कि ऐसी स्कीमें आरबीआई के रेगुलेशन के तहत नहीं आती हैं। इसका मतलब है कि अगर कंपनी से आपका किसी तरह का विवाद होता है तो आप उसकी शिकायत आरबीआई में नहीं कर सकते। हालांकि, आम तौर पर ऐसा नहीं होता है।

Daily Voice: मौजूदा भाव पर नए न्यू एज स्टॉक्स लग रहे महंगे, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,रियल्टी और डिफेंस शेयरों को लेकर भी रहें सतर्क

Daily Voice : मार्केट कंसोलिडेशन के इस दौर में अनुशासित और लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के लिए निवेश का अच्छा मौका है। इस समय अच्छे भाव पर मिल रहे बेहतरीन ग्रोथ वाले शेयरों में पैसा लगाया जा सकता है। इस समय न्यू एज स्टाक्स काफी महंगे दिख रहे हैं। ऐसे में इनमें अभी पैसा डालना बेहतर विकल्प नहीं होगा। हालांकि,आगे कई सालों में इनमें अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। ये बातें ओमनीसाइंस कैपिटल (OmniScience Capital) के अश्विनी शामी ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं। यहां हम आपके लिए इसी बातचीत का संपादित अंश पेश कर रहे हैं।

उन्होंने बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए आगे कहा कि निवेशकों को इस सेक्टर में बहुत सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। रिस्क-रिवॉर्ड के नजरिए से न्यू एज कंपनियों में उन्हें प्योर-प्ले ई-कॉमर्स,क्विक कॉमर्स और हार्डवेयर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के बजाय चुनिंदा फिनटेक कंपनियां ज्यादा पसंद हैं।

अश्विनी शामी मौजूदा मार्केट कंसोलिडेशन के दौर को अनुशासित और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छे मौके के तौर पर देखते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए इस समय अच्छे भाव पर उपलब्ध बेहतरीन ग्रोथ वाले शेयरों में निवेश का अच्छा मौका नजर आ रहा है।

उनका यह भी मानना ​​है कि साल की दूसरी छमाही (H2)में अर्निंग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इसके साथ ही FPI निवेश भी बढ़ता दिखेगा। इससे मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिल सकता है।

क्या आपको उम्मीद है कि सितंबर तिमाही के बाद से 15 प्रतिशत से ज्यादा अर्निंग ग्रोथ वाली निफ्टी 500 कंपनियों का संख्या और बढ़ेगी?

हालांकि कच्चे तेल और कमोडिटी की ऊंची कीमतें उन सेक्टर के मार्जिन पर दबाव डालती हैं जहां इनपुट लागत अधिक होती है,लेकिन BFSI,हेल्थकेयर,कंज्यूमर और बिनेस सर्विसे जैसे एसेट-लाइट सेक्टर में अर्निंग ग्रोथ मजबूत बनी रहने और उसमें सुधार होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कैपिटल गुड्स,इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सर्विस (जिसमें बड़े बैंक भी शामिल हैं) सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी,बढ़ती मांग और ऑपरेटिंग लेवरेज के मिले-जुले असर के चलते अर्निंग में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

क्या आपको लगता है कि बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने वाले मिड और स्मॉलकैप शेयरों का बढ़ा भाव अब सही लेवल पर आ गया है?

निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स लगभग 30 गुना और 34 गुना के ट्रेलिंग प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं, इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि छोटे-मझोले शेयरों के वैल्यूएशन काफी कम हुए है। इसके विपरीत 20 गुना P/E मल्टीपल के आसपास ट्रेड कर रहे निफ्टी 100 इंडेक्स में अच्छे भाव वाले शेयरों में निवेश के ज्यादा अच्छे मौके हैं।

हालांकि कुछ खास मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेक्टर में अर्निंग ग्रोथ, बेंचमार्क से ज्यादा बनी हुई है,लेकिन तेजी से बढ़ने वाले इन अधिकांश सेक्टर में वैल्यूएशन अभी भी बहुत ज्यादा हैं।

क्या आपको मौजूदा भाव पर नए जमाने के स्टॉक्स (new-age stocks) अच्छे लगते हैं?

कुल मिलाकर कहें तो मौजूदा स्तरों पर नए जमाने के स्टॉक्स निवेश के लिए बहुत अच्छे विकल्प नहीं है। अगले कई सालों के अच्छे ग्रोथ आउटलुक के बावजूद इनका वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है। निवेशकों को इस सेक्टर में बहुत सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। रिस्क-रिवॉर्ड के नजरिए से न्यू एज कंपनियों में उन्हें प्योर-प्ले ई-कॉमर्स,क्विक कॉमर्स और हार्डवेयर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के बजाय चुनिंदा फिनटेक कंपनियां ज्यादा पसंद हैं।

क्या आपको लगता है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से होने वाले फायदे को देखते हुए ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयरों में और तेजी आ सकती है?

FTA और EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की ओर होने वाले बदलाव से फायदा उठाने वाली ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयर ज्यादातर अपने सही कीमत पर या कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा महंगे (overvalued) बिक रहे हैं,जिससे इनमें और तेजी की गुंजाइश कम है। EV पावरट्रेन,इलेक्ट्रिकल असेंबली और खास तरह कलपुर्जे (precision components) बनाने वाली और तेज ग्रोथ वाली सप्लायर कंपनियां 35x–70x P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रही हैं, जिनमें आने वाले कई सालों के कामकाज का असर पहले ही शामिल हो चुका है।

इस सेक्टर में निवेश करते समय ऑटो सेक्टर के उतार-चढ़ाव,पश्चिमी OEMs के वॉल्यूम ग्रोथ ट्रेंड्स और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना जरूरी है,क्योंकि इन सभी का असर इनकी अर्निंग ग्रोथ पर पड़ सकता है।

Market Technicals: 24400 के नीचे बने रहने तक निफ्टी में जारी रहेगा कंसोलीडेशन, 58000 के ऊपर जाने पर ही बैंक निफ्टी में आएगी तेजी

आप किन तीन सेक्टर को लेकर सबसे ज़्यादा सतर्क हैं?

इस समय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,रियल्टी और प्योर-प्ले डिफेंस(साथ ही कुछ खास हाई-मल्टीपल हेल्थकेयर सेगमेंट)को लेकर सतर्क हैं,क्योंकि इनमें कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा ओवरवैल्यूएशन है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Lenskart Block Deal: लेंसकार्ट में ₹1313 करोड़ के शेयर बिक सकते हैं, ₹630 के भाव पर होगी ब्लॉक डील

Lenskart Block Deal:आईवियर रिटेल कंपनी Lenskart Solutions में बड़ी ब्लॉक डील होने वाली है। कंपनी के शेयरधारक Alpha Wave Ventures II LP करीब 2.08 करोड़ शेयर बेच सकता है। यह कंपनी की करीब 1.2% हिस्सेदारी के बराबर है।

डील के लिए ₹630 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस रखा गया है। यह 27 अगस्त के ₹642 के क्लोजिंग भाव से करीब 1.7% कम है। इस डील से सेलर को करीब ₹1,313 करोड़ मिल सकते हैं।

पूरी डील सेकेंडरी सेल

यह पूरी तरह सेकेंडरी शेयर सेल है। यानी Lenskart नए शेयर नहीं बेच रही है। मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेच रहा है। इसलिए डील का पैसा कंपनी के खाते में नहीं जाएगा।

डील भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर होगी। इसे एक या उससे ज्यादा ऑन-स्क्रीन ट्रांजैक्शन के जरिए किया जाएगा। डील के बाद सेलर पर 45 दिन का लॉक-अप रहेगा।

डील कौन संभालेगा?

इस ब्लॉक डील के लिए Spark Institutional Equities और Kotak Securities को जॉइंट बुक रनर और ब्रोकर बनाया गया है। Spark Institutional Equities, Avendus Capital की सब्सिडियरी है।

कौन है Alpha Wave Ventures?

Alpha Wave Ventures II LP केमैन आइलैंड्स का प्राइवेट ग्रोथ और वेंचर फंड है। इसे सितंबर 2021 में शुरू किया गया था। यह Chimera और Alpha Wave Global के साथ मिलकर मैनेज होता है।

फंड ग्रोथ स्टेज की कंपनियों में निवेश करता है। इसका फोकस फिनटेक, AI, लाइफ साइंसेज, कंज्यूमर इंटरनेट और B2B जैसे सेक्टर पर है।

लेंसकार्ट के शेयरों का हाल

लेंसकार्ट का शेयर गुरुवार को 0.80% की गिरावट के साथ 642 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में यह 12.25% बढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 59.19% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 1.12 लाख करोड़ रुपये है।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत की डिजिटल ताकत का नया मुकाम! इन 11 देशों में पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट

भारत का UPI पिछले कुछ सालों में लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। चाय की दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, कुछ सेकंड में पेमेंट करने की सुविधा ने डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बना दिया है। अब इसकी पहुंच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। ऐसे में विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भी UPI एक सुविधाजनक पेमेंट ऑप्शन बनता जा रहा है।

UPI की बढ़ती पॉपुलैरिटी का अंदाजा इसके बढ़ते इस्तेमाल से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में इसके जरिए बड़े लेवल पर ट्रांजैक्शन हुए और अब इसकी इंटरनेशनल पहुंच 11 देशों तक हो गई है। ग्रीस और मालदीव के जुड़ने के बाद यह विस्तार और खास हो गया है।

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1. दुनियाभर में बढ़ी UPI की पहचान

पिछले करीब एक दशक में UPI का इस्तेमाल लगभग 12,000 गुना बढ़ा है। अब यह भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक जरुरी भाग बन चुका है। इसकी पॉपुलैरिटी सिर्फ भारत तक नहीं है, बल्कि दूसरे देशों में भी लोग इसे पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में हुए रियल-टाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 49% थी।

2. 11 देशों तक पहुंचा UPI

UPI अब भारत के अलावा 11 देशों में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट की फैसिलिटी दे रहा है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, UAE और फ्रांस के साथ श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव भी इस लिस्ट में शामिल हैं। ग्रीस और मालदीव UPI से जुड़ने वाले सबसे नए देश हैं। इससे विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए डिजिटल पेमेंट का एक आसान ऑप्शन बढ़ा है।

3. UPI में जुड़े नए फीचर्स

2020 से 2022 के बीच UPI में कई नए बदलाव किए गए। UPI AutoPay की मदद से EMI और दूसरे नियमित पेमेंट आसान हुए, जबकि UPI 123PAY से फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा मिली। इसी दौरान UPI Lite आया और बाद में क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने का ऑप्शन भी दिया गया। इस दौरान भूटान में UPI की इंटरनेशनल शुरुआत भी हुई।

4. इजी और सिक्योर पेमेंट

2024 में UPI Circle जैसे फीचर की शुरुआत हुई, जिससे कोई भी लिमिट के अंदर दूसरे व्यक्ति को अपने UPI अकाउंट से पेमेंट करने की परमिशन दे सकता है। टैक्स पेमेंट और UPI से जुड़े दूसरे ट्रांजैक्शन की लिमिट में भी बदलाव किए गए। इसके बाद 2025 में ऑन-डिवाइस बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और फेस बेस्ड फेस ऑथेंटिकेशन जैसे ऑप्शन जोड़े गए। इन चेंज का मकसद UPI को लोगों के लिए ज्यादा आसान, सुविधाजनक और सिक्योर बनाना है।

UPI की बढ़ती पहुंच से साफ है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की बॉर्डर से आगे भी पहचान बना रहा है। नए देशों और नए फीचर्स के जुड़ने से लोगों के लिए पेमेंट करना आसान और कनविनिएंट हो रहा है। आने वाले समय में UPI की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

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