HDFC Bank News: डिप्टी MD कैजाद भरूचा 31 दिसंबर को पद छोड़ेंगे, पहले CEO पद की रेस में थे शामिल

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के साथ HDFC बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा ने पद छोड़ने का फैसला किया है। वह 31 दिसंबर 2026 को बैंक से विदा लेंगे। भरूचा तीन दशक से ज्यादा समय से बैंक के साथ काम कर रहे हैं। बैंक ने शनिवार को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।

इसके साथ ही बैंक ने लिली वडेरा को फिर से स्वतंत्र निदेशक बनाने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 26 नवंबर 2026 से शुरू होगा और तीन साल तक चलेगा।

RBI की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा प्रस्ताव

HDFC बैंक के बोर्ड ने भरूचा के पद छोड़ने के अनुरोध को मंजूरी दे दी है। बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (GNRC) ने भी इस फैसले पर सहमति जताई थी। अब इस प्रस्ताव को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

भरूचा का पद छोड़ने का फैसला ऐसे समय आया है, जब बैंक में एक और बड़ा बदलाव होने वाला है। 27 अक्टूबर को अनूप बागची HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह इससे पहले ICICI ग्रुप से जुड़े रहे हैं।

CEO पद की दौड़ में थे भरूचा

कैजाद भरूचा का पद छोड़ने का फैसला HDFC Bank में नए CEO की नियुक्ति के बीच आया है। बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इससे पहले भरूचा को इस पद के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जा रहा था।

अगस्त और सितंबर में आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ने CEO पद के लिए भरूचा के साथ एक बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार किया था। भरूचा 2014 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे। बैंक ने भरूचा के पद छोड़ने की वजह नहीं बताई है।

बैंक के क्रेडिट सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका

HDFC बैंक के बोर्ड ने भरूचा के काम की तारीफ की है। बोर्ड के मुताबिक, उन्होंने बैंक की ग्रोथ और उसे एक मजबूत संस्था बनाने में अहम योगदान दिया है।

खास तौर पर बैंक के क्रेडिट सिस्टम को तैयार करने और मजबूत बनाने में उनकी भूमिका रही। क्रेडिट सिस्टम का मतलब है कि बैंक किसे कर्ज देगा, उसकी जांच कैसे होगी और कर्ज से जुड़े जोखिम को कैसे संभाला जाएगा। बोर्ड ने माना कि यह व्यवस्था बैंक की बड़ी ताकतों में से एक है।

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ICICI Bank Q2 Results: ₹14843 करोड़ का मुनाफा, NII में 17% का उछाल; उम्मीद से बेहतर रहे तिमाही नतीजे

ICICI Bank Q2 Results: प्राइवेट सेक्टर ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी यानी जुलाई-सितंबर तिमाही तिमाही के नतीजे शनिवार को जारी किए। बैंक का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 20.1% बढ़कर ₹14,843 करोड़ हो गया। यह बाजार के अनुमान से बेहतर रहा।

CNBC-TV18 के पोल में मुनाफा ₹14,280 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके मुकाबले वास्तविक मुनाफा करीब 3.9% ज्यादा रहा। बाजार को उम्मीद थी कि बैंक के मुनाफे में सालाना आधार पर करीब 16% की बढ़ोतरी होगी।

बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम भी बढ़ी

ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 17.7% बढ़कर ₹25,338.7 करोड़ हो गई। पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले बैंक ने ब्याज से होने वाली कमाई में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की।

CNBC-TV18 के पोल में बैंक की NII ₹24,811 करोड़ रहने का अनुमान था। यहां भी बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा।

ICICI Bank के शेयर का हाल

तिमाही नतीजों से पहले शुक्रवार को ICICI बैंक का शेयर बीएसई पर 0.55% की तेजी के साथ ₹1,397 पर बंद हुआ था।

साल 2026 में अब तक बैंक के शेयर में 4.4% की बढ़त दर्ज की गई है। इस दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 में 11.5% की गिरावट आई है। यानी इस अवधि में ICICI बैंक के शेयर ने निफ्टी 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। शुक्रवार के बंद भाव पर बैंक का मार्केट कैप करीब ₹10.03 लाख करोड़ था।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IDBI Bank Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 39% घटकर ₹2205 करोड़, NII में 29% का इजाफा

IDBI Bank ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। तिमाही के दौरान बैंक का शुद्ध स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 2205.45 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 3627.36 करोड़ रुपये था। कुल इनकम लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 9865.12 करोड़ रुपये हो गई। सितंबर 2025 तिमाही में यह 9593.64 करोड़ रुपये थी।

बैंक ने शेयर बाजारों को बताया है कि सितंबर 2026 तिमाही में उसकी शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,227 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले यह 3,285 करोड़ रुपये थी। ऑपरेटिंग प्रॉफिट घटकर 2892.51 करोड़ रुपये रह गया, जो सितंबर 2025 तिमाही में 3,522.78 करोड़ रुपये था। शुद्ध ब्याज मार्जिन बढ़कर 4.11 प्रतिशत हो गया, जो एक एक साल पहले 3.71 प्रतिशत था।

NPA का हाल

सितंबर 2026 तिमाही में IDBI Bank का ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) रेशियो 2.12 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 2 65 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी सालाना आधार पर कम होकर 0.17 प्रतिशत पर आ गया। सितंबर 2025 तिमाही में यह 0.21 प्रतिशत था। एसेट्स पर रिटर्न घटकर 1.83 प्रतिशत रह गया, जो सितंबर 2025 तिमाही में 3.55 प्रतिशत था।

Axis Bank Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 38% बढ़ा, NII में 12% का इजाफा; NPA घटा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक का ​जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 7,003.28 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे 5,089.64 करोड़ रुपये से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। बैंक की कुल इनकम 14 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 42,949.32 करोड़ रुपये हो गई। सितंबर 2025 तिमाही में यह 37,594.81 करोड़ रुपये थी।

एक्सिस बैंक ने 17 अक्टूबर को तिमाही और छमाही (अप्रैल-सितंबर 2026) नतीजे जारी किए हैं। बैंक ने शेयर बाजारों को बताया कि सितंबर 2026 तिमाही में उसकी शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,371.4 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 11,083 करोड़ रुपये रहा, जो सितंबर 2025 तिमाही में 10,412.53 करोड़ रुपये रहा था।

एसेट क्वालिटी में सुधार

सितंबर 2026 तिमाही में एक्सिस बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखा गया। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, ग्रॉस NPA (Non-Performing Assets) रेशियो घटकर 1.16 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 1.46 प्रतिशत और एक तिमाही पहले 1.28 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.35 प्रतिशत हो गया, जो जून 2026 तिमाही में 0.39 प्रतिशत और सितंबर 2025 तिमाही में 0.44 प्रतिशत था।

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डिपॉजिट और एडवांसेज

सितंबर 2026 तिमाही में एक्सिस बैंक के कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 20.6 प्रतिशत बढ़कर 14.52 लाख करोड़ रुपये के रहे। एक साल पहले ये 12 करोड़ रुपये के थे। एडवांसेज 23 प्रतिशत बढ़कर 13.73 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए। सितंबर 2025 तिमाही में ये 11.16 करोड़ रुपये के थे।

Axis Bank शेयर में सोमवार को आ सकती है तेजी

तिमाही नतीजे सामने आने के बाद एक्सिस बैंक के शेयर में सोमवार, 19 अक्टूबर को तेजी देखने को मिल सकती है। शुक्रवार को BSE पर शेयर 1286.45 रुपये पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये है। शेयर 2 सप्ताह में 6 प्रतिशत चढ़ा है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,418.30 रुपये और एडजस्टेड लो 1,150.50 रुपये है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आईटी कंपनियों में लिवाली से बाजार में तेजी

आईटी कंपनियों में लिवाली के दम पर घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को एक बार फिर अच्छी तेजी देखी गई और टेक महिंद्रा का शेयर करीब साढ़े आठ प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 413.66 अंक (0.56 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 74,729.27 अंक पर पहुंच गया। हल्की बढ़त में खुलने के बाद कुछ देर के लिए यह लाल निशान में जरूर गया था, लेकिन एक बार वापसी करने के पूरे दिन तेजी बनी रही।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 148.80 अंक चढ़कर 23,146.15 अंक पर बंद हुआ। यह दोनों का 23 सितंबर के बाद का उच्चतम स्तर है।

अच्छे तिमाही परिणाम और बोनस शेयर की घोषणा के बाद टेक महिंद्रा के शेयर में आज उछाल देखा गया। कंपनी के गुरुवार को जारी वित्तीय परिणामों के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में उसका मुनाफा सालाना आधार पर 32.7 प्रतिशत बढ़कर 1,586 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। राजस्व में 15.6 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 16,180 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने प्रत्येक शेयर पर एक बोनस शेयर जारी करने की घोषणा की है। साथ ही प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 15 रुपये के अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की है।

वृहत बाजार में मझौली और छोटी कंपनियों के सूचकांक गिरावट में रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.06 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.01 प्रतिशत नीचे रहा।

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सेक्टर आधारित सूचकांकों में निफ्टी आईटी सूचकांक में 3.92 प्रतिशत का उछाल रहा। मीडिया समूह का सूचकांक 1.92 फीसदी, धातु का 0.95 प्रतिशत और ऑटो का 0.75 प्रतिशत मजबूत हुआ। एफएमसीजी, रियल्टी, फार्मा, स्वास्थ्य, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और तेल एवं गैस समूहों में गिरावट रही।

एनएसई में जिन 3,669 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 2,131 के शेयर ऊपर और 1,422 के नीचे बंद हुए। अन्य 116 कंपनियों के शेयर अंततः अपरिवर्तित बंद हुए।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 18 के शेयरों मजबूती में रहे। टेक महिंद्रा की 8.45 प्रतिशत क तेजी के बाद टीसीएस का शेयर 4.61 फीसदी और इंफोसिस का 4.55 फीसदी ऊपर रह। भारती एयरटेल में 2.86 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.38 फीसदी की बढ़त रही।

बजाज फाइनेंस का शेयर 1.38 प्रतिशत और एचसीएल टेक्नोलॉजीज का 1.08 प्रतिशत ऊपर रहा। एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, पावरग्रिड, बजाज फिनसर्व और ट्रेंट के शेयर भी हरे निशान में रहे।

विमान सेवा कंपनी इंडिगो में 2.23 फीसदी की गिरावट रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.09 प्रतिशत और एशियन पेंट्स का एक प्रतिशत टूट गया। बीईएल, आईटीसी, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स भी नुकसान में रहे।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 1.39 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.52 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.24 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 0.95 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 0.04 प्रतिशत ऊपर था।

Pic Credit : UNI

शेयर बाजार में हेरफेर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 6 शहरों में 29 ठिकानों पर की छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने शेयर बाजार में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र, गुजरात समेत 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में की गई।

ED के इस जांच का संबंध लिस्टेड कंपनियों M/s R M Drip and Sprinklers Systems Ltd और M/s R&B Denims Ltd के शेयरों में कथित हेरफेर से है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है।

शेयरों के आवंटन से लेकर कीमत बढ़ाने तक की जांच

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शेयरों के भुगतान में बड़ी रकम कुछ सीमित और आपस में जुड़े लोगों, कंपनियों और कर्जदाताओं के समूह से आई थी। इसके साथ ही आरोप है कि इसके बाद आने वाले महीनों में दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमत लगातार बढ़ाई गई, जबकि अधिकांश शेयर उन्हीं लोगों के पास बने रहे।

‘Multibagger Stocks’ जैसे व्हाट्सऐप ग्रुप से निवेशकों को लुभाया

ED की जांच में यह भी सामने आया कि दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच ‘Multibagger Stocks’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप कम्युनिटी ग्रुप के जरिए इन दोनों शेयरों को खरीदने के लिए रोजाना टिप्स भेजे जा रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इन ग्रुपों के जरिए छोटे और खुदरा निवेशकों को शेयर खरीदने के लिए आकर्षित किया गया। इन ग्रुपों को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया, जबकि इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था।

ED के मुताबिक, इन संदेशों के बाद दोनों शेयरों में खरीदारों की संख्या करीब 3,400 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई।

व्हाट्सऐप ग्रुप डिलीट होते ही शेयरों में भारी गिरावट

जांच के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को इन व्हाट्सऐप ग्रुपों को अचानक डिलीट कर दिया गया। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर आ गए और कुछ ही दिनों में उनकी कीमत करीब 70 प्रतिशत तक गिर गई। इस घटनाक्रम के कारण एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। कई निवेशक ऐसे शेयरों के साथ फंस गए, जिन्हें वे गिरती कीमतों के बीच बेच नहीं पा रहे थे।

कंपनियों के दफ्तर, प्रमोटरों के घर और ब्रोकिंग फर्मों पर छापे

ED ने जिन ठिकानों की तलाशी ली, उनमें दोनों कंपनियों के कार्यालय, उनके प्रमोटरों के आवास, कम कीमत पर शेयर पाने वाले लोगों के ठिकाने, स्टॉक-ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय तथा कथित तौर पर प्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए व्हाट्सऐप ग्रुपों के संचालन से जुड़े लोगों के परिसर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयर लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद कर जब्त किए हैं।

ED मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और शेयर बाजार में कथित हेरफेर से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

क्या बाजार मनाएगा आज गुड फ्राइडे का जश्न या मिलेगी निराशा, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद, GIFT निफ्टी एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। हाल ही में टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में सुधार, वॉल स्ट्रीट में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार में सुधार के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 84 अंक या 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 23,072 पर कारोबार कर रहा था। यह गुरुवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के करीब बंद होने के बाद एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक (2.11 प्रतिशत) उछलकर 74,315.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 374.65 अंक (1.66 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी रही

सप्ताह की शुरुआत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी, जिसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी की। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें गिरने वाले शेयरों की तुलना में बढ़ने वाले शेयरों की संख्या लगभग तीन गुना अधिक रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2.5 प्रतिशत चढ़ा। इसने गुरुवार की उस गिरावट से उबरने में मदद की, जिसने सूचकांक को अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

जापान का टॉपिक्स (Topix) 1.7 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.4 ​​प्रतिशत ऊपर रहे। इसके विपरीत, इंडोनेशिया के बाजार में 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसका कारण यह चिंता है कि इंडोनेशिया को वैश्विक स्टॉक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा; S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

निवेशकों के AI शेयरों से हटने के बीच वॉल स्ट्रीट में तेजी

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए, निवेशकों ने अपना ध्यान हेल्थकेयर और कंज्यूमर शेयरों की ओर मोड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन और कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत बढ़कर 52,177.69 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,744.06 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत बढ़कर 26,713.03 पर पहुंच गया।

हेल्थकेयर शेयरों (जैसे एली लिली और यूनाइटेडहेल्थ) में खरीदारी देखने को मिली, जबकि कई टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक बढ़ती उधारी लागत (borrowing costs) के बीच अपने निवेश पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे थे।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, लेकिन अभी भी $105 के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। निवेशक एक तरफ मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई के जोखिमों पर विचार कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी नजर रखे हुए थे कि क्या अमेरिका वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ (अघोषित टैंकर बेड़े) पर लगी पाबंदियों को कम करने के लिए कोई कदम उठा सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.39 प्रतिशत गिरकर $105.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $97.43 प्रति बैरल पर आ गया।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के लिए निकट भविष्य का नजरिया ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को ऐसे महत्वपूर्ण कारक बताया, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

पोनमुडी के अनुसार, निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) में कोई टिकाऊ सुधार हो रहा है या नहीं। वहीं, बाजार में आई यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

आईडीबीआईः नायाब नमूना

आईडीबीआई की कहानी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। अब ऐसा कोई बैंक मौजूद नहीं है।

भारत में औद्योगिक विकास के सामने मौजूद पूंजी की समस्या को समझना हो, तो आईडीबीआई बैंक खास उदाहरण बन सकता है। अब इसे कनाडा की फैयरफैक्स कंपनी को बेचा जा रहा है। भारत सरकार ने इसकी 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी को देने का फैसला किया है। बेशक इस बिक्री से सरकार को बड़ी रकम हासिल होगी, जिससे वर्तमान वित्तीय संकट का सामना करने में मदद मिलेगी। मगर गौरतलब है कि एक अन्य भारतीय बैंक- सीबीएस में फेयरफैक्स की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक एक ही समूह दो बैंकों में इतना बड़ा हिस्सा नहीं रख सकता। लेकिन इसका रास्ता शायद निकाल लिया जाएगा।

खबरों के मुताबिक रिजर्व बैंक फेयरफैक्स को सीबीएस का विलय करने या उसमें अपना हिस्सा बेचने के लिए दो साल का समय दे सकता है। कुछ हलकों से बैंकों के विदेशी स्वामित्व पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसे देश के रणनीतिक हितों के खिलाफ बताया गया है। बिक्री की इजाजत में कुछ प्रक्रियागत खामियों की तरफ भी इशारा किया गया है। ये सभी वाजिब एतराज हैं, लेकिन आईडीबीआई की कहानी उससे भी कहीं अधिक गंभीर समस्या का उदाहरण है। आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंकों को दीर्घकालिक औद्योगिक एवं ढांचागत विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया था। ऐसी फाइनेंशिंग में जोखिम भी ज्यादा रहता है। इसलिए आम बैंक इससे बचते हैं। इसीलिए “डेवलपमेंट बैंकिंग” सिस्टम का होना जरूरी समझा जाता है। लेकिन उदारीकरण के दौर में आत्म-निर्भर विकास को पिछड़ी धारणा माना जाने लगा।

नतीजतन, 2002 और 2004 में इन दोनों को कॉमर्शियल बैंक बना दिया गया। उसके बाद भारत में कोई डेवलपमेंट बैंक नहीं है। नतीजतन लघु एवं मझौले कारोबारियों के लिए वित्त का टोटा है। ये वो कारोबार हैं, जो शेयर बाजार से पूंजी नहीं उठा सकते। नतीजतन, नए निजी निगमों के उदय का रास्ता बंद है। अब आईडीबीआई का स्वामित्व विदेशी हाथ में दिया जा रहा है। यानी उसे पुराने रूप लाना असंभव हो जाएगा। जिस समय दुनिया में रुझान भूमंडलीकरण से निकल कर आत्म-निर्भरता की ओर लौटने का है, ये फैसला भारत की उलटी दिशा का नायाब नमूना है।