Share Market Rally: मार्केट में ताबड़तोड़ तेजी: सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 22,830 के पार; इन 3 वजहों से लौटी रौनक

Share Market Rally: आज, 15 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार रैली देखने को मिल रही है। सुबह के कारोबारी सत्र में प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 1 फीसदी तक की बढ़त दर्ज कर के कारोबर कर रहे है। आईटी इंडेक्स में 2% से ज्यादा की ताबड़तोड़ तेजी ने बाजार को ऊपर उठाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाई है।

मार्केट का ताजा हाल

सुबह के कारोबारी सत्र 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार, शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली, जिसमें प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 774.05 अंक (+1.06%) की शानदार छलांग के साथ 73,555.94 पर और निफ्टी 50, 215.40 अंक (+0.95%) की मजबूती के साथ 22,838.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि आईटी शेयरों में 2.29% की तूफानी तेजी के चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 30,862.65 पर पहुंच गया और बैंक निफ्टी (+0.49%) व बैंकैक्स (+0.40%) भी हरे निशान में रहे, हालांकि निफ्टी मिडकैप 100, 59,405.05 (-0.00%) पर लगभग सपाट नजर आया।

बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें:

1. IT शेयरों में तूफानी खरीदारी: HCLTech के शानदार नतीजों के बाद से ही आईटी शेयरों में खरीददारी का दौर जारी है। आईटी इंडेक्स अकेले 690 अंक से ज्यादा उछल चुका है, जिससे पूरे मार्केट का मूड पॉजिटिव हुआ है।

2. निचले स्तरों से वैल्यू बाइंग: बाजार पिछले छह महीने के निचले स्तरों के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर काफी आकर्षक वैल्युएशन पर उपलब्ध हो गए। निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाकर निचले स्तरों पर जोरदार खरीदारी की है।

3. टेक्निकल कारण: बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि जब तक निफ्टी 22,600 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है। 22,600 का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है और इसके टूटने पर ही मंदी का खतरा बनेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, राजेश एक्सपोर्ट्स से टाटा टेक्नोलॉजीज तक शामिल

Stocks to Watch: 15 अक्टूबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों से जुड़ी अहम खबरों के चलते निवेशकों की नजर कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर रहेगी। कहीं तिमाही नतीजों में मुनाफे की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, तो कहीं कमाई पर दबाव दिखा है। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, जबकि कुछ में बड़े कारोबारी फैसले हुए हैं। इन खबरों का असर गुरुवार को शेयरों की चाल पर पड़ सकता है।

HDB Financial Services

NBFC कंपनी HDB Financial Services का मुनाफा वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 34% बढ़कर 780 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 581 करोड़ रुपये था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 15.5% बढ़कर 2,534 करोड़ रुपये पहुंच गई। कंपनी के बोर्ड ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर 2 रुपये के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है।

CEAT

टायर कंपनी CEAT का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में 39.8% घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 26.2% बढ़कर 4,762 करोड़ रुपये पहुंच गया। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से मुनाफे पर दबाव पड़ा। EBITDA 9.1% गिरकर 457 करोड़ रुपये रहा और EBITDA मार्जिन 13.3% से घटकर 9.6% पर आ गया।

IDBI Bank

सरकारी बैंक IDBI Bank के रणनीतिक पुनर्गठन को कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने मंजूरी दे दी है। बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए Fairfax Financials को सफल बोलीदाता चुना गया है। पुनर्गठन के बाद सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी 34% रहेगी। शेयर के लिए 75.99 रुपये का बेंचमार्क प्राइस तय किया गया था, जबकि 81 रुपये की सबसे ऊंची बोली स्वीकार की गई।

CSB Bank

निजी क्षेत्र के CSB Bank के सामने अब मर्जर या हिस्सेदारी बेचने का विकल्प हो सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक, कोई प्रमोटर एक से ज्यादा बैंकों में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी नहीं रख सकता। IDBI Bank के पुनर्गठन की मंजूरी के बाद Fairfax को CSB Bank का मर्जर IDBI Bank में करना पड़ सकता है या अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ सकती है। प्रस्तावित ढांचे में दो साल के भीतर मर्जर का रास्ता शामिल है।

Rajesh Exports

SEBI ने Rajesh Exports और इसके चेयरमैन राजेश मेहता पर लगी अंतरिम पाबंदियां जारी रखने का फैसला किया है। कंपनी के वित्तीय खुलासों में गड़बड़ियों को लेकर रेगुलेटर की चिंताएं दूर नहीं हुई हैं। राजेश मेहता अगले आदेश तक कंपनी के शेयर खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का कारोबार करने से प्रतिबंधित रहेंगे।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सब्सिडियरी Jio Platforms के IPO के लिए अहम दस्तावेज यानी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जमा कर दिया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अक्टूबर को लगेगी। IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित होंगे।

Tata Technologies

टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग कंपनी Tata Technologies का मुनाफा सालाना आधार पर 5% घटकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 181 करोड़ रुपये था। हालांकि, डॉलर में रेवेन्यू कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर 22% बढ़ा। सर्विसेज सेगमेंट का रेवेन्यू भी 26% बढ़ा। कंपनी को पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

MRPL

ONGC की सब्सिडियरी तेल कंपनी MRPL का सितंबर तिमाही में नेट प्रॉफिट करीब 195% बढ़कर 1,881 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 639 करोड़ रुपये था। कंपनी का रेवेन्यू 37.1% बढ़कर 35,590 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, EBITDA दोगुने से ज्यादा बढ़कर 3,210 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रॉफिट बिफोर टैक्स 2,519 करोड़ रुपये रहा।

Enviro Infra

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Enviro Infra को Arie Energy से महाराष्ट्र में 100 मेगावाट के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए 228 करोड़ रुपये का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) मिला है। यह ऑर्डर कंपनी के रिन्यूएबल एनर्जी कारोबार को बढ़ाने से जुड़ा है।

Aeroflex Industries

औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी Aeroflex Industries मार्च 2028 तक 202 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस रकम से स्टेनलेस स्टील होज, होज असेंबली और लिक्विड कूलिंग सिस्टम बनाने की क्षमता बढ़ाई जाएगी। कंपनी को डेटा सेंटर और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ती मांग का फायदा मिलने की उम्मीद है।

Bajaj Consumer Care

FMCG कंपनी Bajaj Consumer Care का नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 67.1% बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 42 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू 25.7% बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गया।

Cemindia Projects

अदाणी ग्रुप की कंपनी Cemindia Projects ने संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए QIP लॉन्च किया है। कंपनी 90.3 लाख तक शेयर जारी करेगी। इश्यू का फ्लोर प्राइस 1,158.58 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। संकेतात्मक इश्यू प्राइस 1,108 रुपये है, जो बुधवार के 1,153.50 रुपये के बंद भाव से करीब 4% डिस्काउंट पर है।

Jio Platforms IPO: जियो आईपीओ का प्राइस बैंड तय, 21 अक्टूबर से लगा सकेंगे पैसा; जानिए 8 बड़ी बातें

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा आईपीओ, जानें प्राइस बैंड से लेकर कारोबारी सेहत तक 8 बड़ी बातें

Jio Platforms IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms ने IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार, 14 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास RHP दाखिल किया। इसमें आईपीओ की पूरी रूपरेखा, जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों की जानकारी दी गई है। आइए, आईपीओ से जुड़ी 8 बड़ी बातें जानते हैं।

1. 21 अक्टूबर को खुलेगा IPO

Jio Platforms का आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। निवेशक शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक इसमें बोली लगा सकेंगे। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है।

2. 27 करोड़ तक नए शेयर जारी होंगे

इस आईपीओ में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) नहीं होगा। यानी पुराने निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे, बल्कि कंपनी नए शेयर जारी करके पैसा जुटाएगी। हालांकि, कुल कितनी रकम जुटाई जाएगी, यह अंतिम इश्यू शर्तों पर निर्भर करेगा।

3. जुटाए गए पैसे से चुकाया जाएगा कर्ज

Jio Platforms आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपनी टेलीकॉम सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Ltd (RJIL) का कर्ज चुकाने में करेगी। इसके अलावा, कुछ रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी। इससे RJIL पर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

4. रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2500 करोड़ के शेयर

आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। इसमें तय शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) शामिल हो सकते हैं, जिनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर हैं।

5. कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर

Jio Platforms ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे हैं। कर्मचारी आईपीओ की शर्तों के मुताबिक इन शेयरों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह हिस्सा दूसरे निवेशक वर्गों के लिए उपलब्ध शेयरों से अलग होगा।

6. पहली तिमाही में रेवेन्यू 11.8% बढ़ा

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में Jio Platforms का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.8% बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 35,032 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA भी 15.1% बढ़कर 20,865 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 18,141 करोड़ रुपये था।

इस दौरान EBITDA मार्जिन 51.78% से बढ़कर 53.26% हो गया। कंपनी का नेट प्रॉफिट भी बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7,110 करोड़ रुपये था।

7. 1,065 से 1,119 रुपये प्राइस बैंड

Jio Platforms ने आईपीओ के लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। लॉट साइज 13 शेयरों का रहेगा। रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी है। इसके लिए ₹14,534 लगेंगे। लिस्टिंग 28 अक्टूबर को BSE और NSE पर होने वाली है।

8. जियो 53.33 करोड़ ग्राहक

जियो के पास पहली तिमाही के अंत में 53.33 करोड़ ग्राहक थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 89 लाख नए ग्राहक जोड़े। वहीं, प्रति यूजर औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) 215.6 रुपये रहा।

Q2 Results: बजाज ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 67% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; फोकस में रहेगा स्टॉक

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Q2 Results: बजाज ग्रुप की कंपनी का मुनाफा 67% बढ़ा, रेवेन्यू में भी उछाल; फोकस में रहेगा स्टॉक

Q2 Results: बजाज ग्रुप की कंपनी Bajaj Consumer Care के लिए सितंबर तिमाही अच्छी रही। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 67% बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 42 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 25.7% बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले यह 265 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 71% बढ़कर 82 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 48 करोड़ रुपये था। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 18.1% से बढ़कर 24.7% हो गया। यानी कंपनी की कमाई और ऑपरेटिंग प्रदर्शन, दोनों में सुधार हुआ।

घरेलू कारोबार में 30% से ज्यादा ग्रोथ

बजाज कंज्यूमर केयर के घरेलू कारोबार ने अच्छी ग्रोथ दर्ज की। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही, दोनों में रेवेन्यू 30% से ज्यादा बढ़ा। इसमें प्रोडक्ट की बिक्री बढ़ने का बड़ा योगदान रहा। कम कीमत वाले पैक की मांग भी मजबूत बनी हुई है। ये कंपनी की ग्रोथ को सहारा दे रहे हैं। तिमाही के आखिर में कंपनी ने ब्रांड की नई पोजिशनिंग के साथ एक कैंपेन भी शुरू किया।

जनरल ट्रेड में दूसरी तिमाही के दौरान ग्रोथ 20% के मध्य स्तर पर रही। पहली छमाही में यह 20% के ऊपरी स्तर पर थी। ग्रामीण बाजारों की ग्रोथ शहरी बाजारों से थोड़ी आगे रही। हालांकि, दोनों जगह मांग मजबूत बनी हुई है। ऑर्गनाइज्ड ट्रेड में ग्रोथ 20% के ऊपरी स्तर पर रही। ई-कॉमर्स और मॉडर्न ट्रेड में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई। वहीं, क्विक कॉमर्स इस सेगमेंट का सबसे तेजी से बढ़ने वाला चैनल रहा।

विदेशी बाजारों में भी कारोबार मजबूत

बजाज कंज्यूमर केयर का विदेशी कारोबार कुल कारोबार के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ा। नेपाल, खाड़ी देशों और अफ्रीका में अच्छी ग्रोथ दर्ज हुई। दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कारोबार में सुधार जारी रहा।

बांग्लादेश में कारोबारी चुनौतियों के बावजूद ग्रोथ दोहरे अंकों में रही। इससे कंपनी को विदेशी बाजारों से भी अच्छा सहारा मिला।

कच्चे माल की बढ़ती कीमतें बनीं चिंता

बजाज कंज्यूमर केयर के सामने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की चुनौती है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और माल ढुलाई की ऊंची लागत के कारण लाइट लिक्विड पैराफिन महंगा बना हुआ है।

रिफाइंड सरसों तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं। संघर्ष से तिलहन की सप्लाई पर असर पड़ा है। इसके अलावा, तीसरी तिमाही में अल नीनो के असर की आशंका से कोपरा यानी सूखे नारियल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। खाद्य तेलों की महंगाई से भी लागत बढ़ रही है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में कंपनी के मुनाफे पर इन बढ़ती कीमतों के असर पर नजर रहेगी।

बजाज कंज्यूमर केयर के शेयरों का हाल

बजाज कंज्यूमर केयर का स्टॉक बुधवार को रिजल्ट से पहले 2.69% की तेजी के साथ 521.90 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने के दौरान इसमें 18.17% की तेजी आई है। वहीं, 1 साल में इसने 101% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 6.82 हजार करोड़ रुपये है।

SME IPO पर सख्ती की तैयारी! SEBI का मुनाफे से लेकर ऑफर फॉर सेल तक के नियम बदलने का प्रस्ताव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा घटा, शेयरों पर रहेगी नजर

Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कपंनी Tata Technologies के लिए सितंबर तिमाही में तस्वीर मिली-जुली रही। कंपनी का मुनाफा घटा, लेकिन रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। बुधवार 14 अक्टूबर को जारी नतीजों के मुताबिक, कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.2% गिरकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 180.8 करोड़ रुपये था।

दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू 28.4% बढ़कर 1,698.8 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल यह 1,323.3 करोड़ रुपये था। ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर रही। EBIT 25.3% बढ़कर 238.7 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBIT मार्जिन 14.4% से घटकर 14.1% रह गया।

EBITDA बढ़ा, लेकिन मुनाफा अनुमान से कम

टाटा टेक्नोलॉजीज का EBITDA सालाना आधार पर 31.5% बढ़कर 273.3 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 15.7% से बढ़कर 16.1% पहुंच गया। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस तीन ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर रहे। हालांकि, नेट प्रॉफिट 200 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम रहा।

कंपनी के सर्विस सेगमेंट का रेवेन्यू 33.9% बढ़कर 1,355.7 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस से रेवेन्यू 10.5% बढ़कर 343.1 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के CEO वॉरेन हैरिस ने कहा कि मजबूत मांग और नए प्रोग्राम शुरू होने से पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

टाटा टेक्नोलॉजीज को नए ऑटोमोटिव प्रोजेक्ट

तिमाही के दौरान Tata Technologies को एक बड़ी यूरोपीय लग्जरी कार कंपनी से 138 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट मिला। इसके तहत कंपनी दो व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग से जुड़े काम करेगी।

इसके अलावा, उत्तर अमेरिका की एक कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी ने नए व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी दी है। कंपनी को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट भी मिले।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी, शेयर में तेजी

सितंबर के अंत में Tata Technologies में 12,895 कर्मचारी थे। एक साल पहले इनकी संख्या 12,402 थी। तिमाही में कंपनी का फ्री कैश फ्लो 223.5 करोड़ रुपये रहा। सितंबर के अंत में कंपनी के पास 107.8 मिलियन डॉलर का कैश और कैश इक्विवेलेंट्स था।

नतीजों से पहले बुधवार को कंपनी का शेयर 0.5% बढ़कर 747.25 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक शेयर करीब 16% चढ़ चुका है।

HDB Financial Q2 Results: मुनाफा 34% बढ़ा, NPA में भी सुधार; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SME IPO पर सख्ती की तैयारी! SEBI का मुनाफे से लेकर ऑफर फॉर सेल तक के नियम बदलने का प्रस्ताव

SME IPO लाने वाली कंपनियों के लिए नियम सख्त हो सकते हैं। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इसके लिए कई बदलावों का प्रस्ताव दिया है। सबसे बड़ा बदलाव मुनाफे की शर्त को लेकर है। प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 3 करोड़ रुपये का सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होगा।

SEBI ने 14 अक्टूबर 2026 को इस बारे में कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें SME IPO के नियमों में बदलाव की बात कही गई है। आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से 4 नवंबर तक सुझाव मांगे गए हैं। अभी ये प्रस्ताव हैं, लागू नियम नहीं।

SME IPO के लिए मुनाफे की नई शर्त

अभी कंपनी को पिछले तीन वित्त वर्षों में से कम से कम दो साल में 1 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होता है। SEBI अब इसकी जगह नई शर्त लाना चाहता है। इसके तहत पिछले तीन साल का औसत सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम से कम 3 करोड़ रुपये होना चाहिए।

जो कंपनियां यह शर्त पूरी नहीं कर पाएंगी, उनके लिए भी IPO लाने का रास्ता खुला रह सकता है। हालांकि, उन्हें दूसरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ऐसी कंपनियों को बुक बिल्डिंग प्रक्रिया अपनानी होगी। साथ ही, IPO के नेट इश्यू का कम से कम 75% हिस्सा बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIBs को देना होगा। अगर इतना आवंटन नहीं हो पाता है, तो निवेशकों की पूरी रकम लौटानी होगी।

मार्केट कैप से तय होगी लिस्टिंग की पात्रता

SEBI कंपनियों की पात्रता तय करने का तरीका भी बदलना चाहता है। अभी इसके लिए पेड-अप कैपिटल को आधार बनाया जाता है। नए प्रस्ताव में कंपनी के मार्केट कैप को आधार बनाने की बात है।

इसके मुताबिक, IPO के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां सिर्फ SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकेंगी। 1,000 करोड़ से ज्यादा और 4,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां भी तय शर्तों के साथ SME प्लेटफॉर्म चुन सकेंगी। इनके वित्तीय दस्तावेज Ind AS के नियमों के मुताबिक होने चाहिए।

अगर ऑफर डॉक्यूमेंट के तय चरण में कंपनी का मार्केट कैप 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो उसे मेनबोर्ड के नियमों के तहत दोबारा दस्तावेज जमा करने होंगे।

IPO में आवेदन की रकम घटेगी

SEBI SME IPO में आवेदन की न्यूनतम रकम घटाने का प्रस्ताव भी लाया है। अभी न्यूनतम आवेदन की रकम 2 लाख रुपये से ज्यादा है। इसे घटाकर 1 लाख रुपये करने की तैयारी है। हालांकि, निवेशकों को कम से कम चार लॉट के लिए आवेदन करना होगा। हर लॉट की कीमत कम से कम 25,000 रुपये होगी।

इसके अलावा, IPO में कम से कम 200 निवेशकों को शेयर देने की शर्त बढ़ाकर 500 करने का प्रस्ताव है। रिटेल निवेशकों को शेयर देने के तरीके में भी बदलाव हो सकता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, शेयरों का आवंटन न्यूनतम लॉट के गुणकों से बंधा नहीं रहेगा। यह उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा।

कंपनियों को IPO से जुटाई गई रकम में से जनरल कॉरपोरेट कामों पर खर्च करने की 10 करोड़ रुपये की सीमा से भी राहत मिल सकती है। हालांकि, कुल जुटाई गई रकम के 15% तक खर्च करने की मौजूदा सीमा बनी रहेगी।

शेयर बेचने और लॉक-इन के नियम बदलेंगे

SEBI ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए अलग नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कुछ छूटों को छोड़कर बिक्री के लिए रखे जाने वाले शेयर कम से कम एक साल से शेयरधारक के पास होने चाहिए।

अभी OFS में कुल इश्यू साइज का अधिकतम 20% हिस्सा बेचा जा सकता है। शेयरधारक अपनी पहले से मौजूद हिस्सेदारी का अधिकतम 50% हिस्सा भी बेच सकते हैं। SEBI ने बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIB शेयरधारकों को इन सीमाओं से छूट देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, मुनाफे की शर्त पूरी नहीं करने वाली कंपनियों के लिए यह छूट नहीं होगी।

SEBI ने शेयरों के लॉक-इन नियम बदलने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत, प्रमोटरों के न्यूनतम जरूरी शेयर IPO में आवंटन की तारीख से तीन साल तक लॉक रहेंगे। अतिरिक्त प्रमोटर शेयरों पर एक साल की रोक होगी। वहीं, पुराने गैर-प्रमोटर निवेशकों के शेयरों का लॉक-इन एक साल से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव है। प्रमोटर ग्रुप की कुछ हिस्सेदारी पर भी एक साल का लॉक-इन लागू हो सकता है।

SME IPO से अब तक जुटाए गए 40,222 करोड़ रुपये

SEBI के मुताबिक, SME प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से अब तक 1,496 कंपनियां इस पर लिस्ट हो चुकी हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं, जो बाद में मेनबोर्ड पर चली गईं। कुल 365 कंपनियां मेनबोर्ड में माइग्रेट कर चुकी हैं।

SME IPO के जरिए कंपनियों ने अब तक 40,222 करोड़ रुपये जुटाए हैं। 31 जुलाई 2026 तक SME प्लेटफॉर्म की कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,70,984 करोड़ रुपये था। इस आंकड़े में मेनबोर्ड पर जा चुकी कंपनियां भी शामिल हैं।

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रूस के प्रति ट्रंप की नरमी से रिपब्लिकन पर बढ़ा दबाव

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ संपर्क बढ़ाते हुए रूस को कई रियायतें दी हैं। उनके इन कदमों की अमेरिका में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की है, जिससे मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

मतदान में करीब तीन सप्ताह शेष रहने के बीच ट्रंप के हाल के फैसलों ने पुतिन के साथ उनके एक दशक पुराने संबंधों को फिर चर्चा में ला दिया है। शुक्रवार को पुतिन से बातचीत के बाद ट्रंप ने ऐसे कई कदम उठाए, जिनकी आलोचकों के अनुसार रूस को बिना किसी ठोस रियायत के फायदा हुआ है।

श्री ट्रंप ने शुक्रवार को वैश्विक बाजार में लाखों टन रूसी डीजल की आपूर्ति की अनुमति देने संबंधी समझौते की घोषणा की। आलोचकों का कहना है कि इससे रूस के युद्ध से होने वाली आय सीमित करने के उद्देश्य से लगाए गए प्रतिबंधों में ढील मिली है। उन्होंने शनिवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के लिए आलोचना की और यूक्रेन से अपना नेता बदलने की मांग की।

इसके अगले दिन श्री ट्रंप ने तत्काल ‘ऊर्जा संघर्षविराम’ की घोषणा की। रूस ने हालांकि यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना पर हमले जारी रखे और अमेरिका की ओर से इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।

श्री ट्रंप ने सोमवार को उन खुफिया आकलनों पर आधारित खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी देकर उसके युद्ध प्रयासों में मदद कर रहा है।

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उन्होंने मंगलवार को डीजल समझौते का बचाव करते हुए इस आशंका को भी खारिज किया कि इससे होने वाली आय रूस के युद्ध को वित्तपोषित करने में मदद कर सकती है। रिपब्लिकन सांसदों ने हालांकि इस समझौते को ‘विश्वासघात’ और ‘दुश्मन को दिया गया उपहार’ बताया।

ऊर्जा विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि क्या डीजल समझौते से ईरान से जुड़े युद्ध के कारण बढ़ी ईंधन कीमतों में उल्लेखनीय कमी आएगी। यूरोप में अमेरिकी रुख को लेकर नाटो के भीतर मतभेद बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रूस पर तोड़फोड़, साइबर हमलों और ड्रोन घुसपैठ की घटनाओं को तेज करने के आरोप भी हैं।

राजनीतिक रूप से श्री ट्रंप ऐसे रूसी नेता के साथ नजदीकी बढ़ा रहे हैं, जो अमेरिकी मतदाताओं के बीच अलोकप्रिय हैं। जनवरी में यूगोव के एक सर्वेक्षण में श्री ट्रंप को 2024 में वोट देने वाले 81 प्रतिशत लोगों ने श्री पुतिन के प्रति प्रतिकूल राय व्यक्त की थी।

रूसी राष्ट्रपति के साथ श्री ट्रंप के संबंध 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद से विवादों में रहे हैं। श्री ट्रंप ने सोमवार को फिर कहा कि श्री पुतिन, श्री जेलेंस्की की तुलना में युद्ध समाप्त करने के लिए अधिक इच्छुक हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मुझे वास्तव में लगता है कि पुतिन, जेलेंस्की से अधिक समझौता करना चाहते हैं।

मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस में अपना नियंत्रण खोने की आशंका है। ऐसा होने पर श्री ट्रंप का विधायी एजेंडा प्रभावित हो सकता है और उनके प्रशासन को कांग्रेस की बढ़ती जांच तथा समन का सामना करना पड़ सकता है।

श्री ट्रंप ने चुनावी नतीजों से अपने संबंध को अलग रखने की कोशिश की है। उन्होंने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं, मैं पहले ही भारी बहुमत से जीत चुका हूं।

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शेयर बाजारों में गिरावट, सेंसेक्स 252 अंक फिसला

बैंकिंग, वित्त और ऑटो कंपनियों में बिकवाली के दबाव में घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट रही। बीएसई का सेंसेक्स 251.89 अंक (0.34 प्रतिशत) टूटकर 72,781.89 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। सेंसेक्स ऊपर 73,195 अंक और नीचे 72,579 अंक तक गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 99.25 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 22,622.70 अंक पर रहा। पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांकों में डेढ़ फीसदी से अधिक की जबरदस्त तेजी रही थी।

वृहत बाजार में अधिकतर सूचकांक लाल निशान में रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.05 प्रतिशत ऊपर रहा। स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.29 प्रतिशत फिसल गया।

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बैंकिंग, वित्त, फार्मा, ऑटो, स्वास्थ्य, रियल्टी और सीमेंट समूहों में बिकवाली हावी रही। आईटी, एफएमसीजी, तेल एवं गैस और मीडिया समूहों में लिवाली का जोर रहा।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस का शेयर ढाई प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा का सवा दो प्रतिशत गिर गया। बजाज फिनसर्व, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, सन फार्मा और एलएंडटी के शेयर एक से दो प्रतिशत तक टूट गए। अडानी पोर्ट्स, टाइटन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड के शेयर भी लाल निशान में रहे।

इंफोसिस का शेयर ढाई प्रतिशत और टेक महिंद्रा का करीब सवा प्रतिशत चढ़ा। टीसीएस, हिंदुस्तान यूनीलिवर, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, बीईएल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर भी हरे निशान में रहे।

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RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कहा-जरूरत पड़ी तो रुपये में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग रोकने के लिए और कदम उठाएंगे

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय बैंक कुछ और उपायों पर विचार करेगा। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) और इंटरेस्ट रेट सहित कई मसलों पर अपनी राय बताई। गौरतबल है कि पिछले हफ्ते रुपये पर दबाव घटाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई बड़े कदम उठाए थे।

मल्होत्रा ने एक्सटर्नल सेक्टर यानी वैश्विक स्थितियों को भारत के लिए मुख्य चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अच्छी है। बैंकों की बैलेंसशीट मजबूत है। कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार और आरबीआई बैलेंस ऑफ पेमेंट्स की मजबूती के लिए और कदम उठाएंगे।

स्पेकुलेटिव फॉरेक्स ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लागने के लिए हाल में उठाए गए कदमों के बारे में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। उदाहरण के लिए कैंसिल किए गए फॉरेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर रोक लगा दी गई है। इससे गैरजरूरी स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि हमारे फॉरेक्स मार्केट का मुख्य मकसद अंडरलाइंग फॉरेन एक्सचेंज की जरूरत को पूरा करना या हेज करना है। यह शेयर बाजार जैसा नहीं है, जहां पार्टिसिपेंट्स शेयरों की कीमतों की दिशा पर दांव लगा सकते हैं। फॉरेक्स मार्केट मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें वास्तविक हेजिंग की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि एक ही दिन में बड़ी संख्या में ट्रेड्स कैंसिल किए जा रहे हैं और रीबुक किए जा रहे हैं। कुछ मामलों में तो करीब एक-तिहाई ट्रेड्स जिस दिन किए गए उसी दिन क्लोज्ड या कैंसिल कर दिए गए। अगर किसी पार्टिसिपेंट को सच में हेजिंग की जरूरत है तो वह उस ट्रेड को तब तक बनाए रखेगा, जब तक उसकी जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। एक दिन कैंसिलेशंस और रीबुकिंग से पता चलता है कि फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी स्पेकुलेटिव ट्रेड्स हो रहे हैं।

क्या आरबीआई रुपये के सहारा देने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा? इस सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने कहा कि मैं फिर से उस सिद्धांत को दोहराउंगा जिसके बारे में मैंने कुछ दिन पहले कौटिल्य इकोनॉमिक कॉनक्लेव में बताया था। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के बगैर कीमतों में स्थिरता नहीं आ सकती। मॉनेटरी पॉलिसी में उठाए गए कदमों का सही असर तभी दिखता है जब फाइनेंशियल सिस्टम में स्टैबिलिटी होती है।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क को कम करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल नहीं करते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल प्राइस स्टैबिलिटी के लिए होता है। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए रेगुलेटरी, सुपरवायजरी और मैक्रोप्रूडेंशियल टूल्स का इस्तेमाल होता है। हालांकि, दोनों को पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर फाइनेंशियल स्टैबिलिटी पर पड़ सकता है।