SEBI के नए CAS नियम! शेयरों की क्लोजिंग प्राइस और एक्सपायरी डे ट्रेडिंग में क्या बदलेगा? जानिए पूरी डिटेल

SEBI New CAS Rules: मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) का अंतिम फ्रेमवर्क जारी कर दिया। इसमें कैश मार्केट में CAS के समय और काम करने के तरीके में बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए 30 मिनट के VWAP तरीके को बरकरार रखा गया है।

7 दिसंबर से लागू होंगे नए नियम

नए फ्रेमवर्क के तहत सभी कारोबारी दिनों में CAS दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। हालांकि, लगातार ट्रेडिंग सेशन के बचे हुए लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को CAS में ले जाने से जुड़े नियम 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे।

कैसे चलेगा Closing Auction Session?

CAS की शुरुआत दोपहर 3:30 बजे से 3:31 बजे तक होगी। इस एक मिनट में रेफरेंस प्राइस की गणना और सेशन में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होगी।

इसके बाद 3:31 बजे से 3:36 बजे तक निवेशक लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दे सकेंगे। 3:36 बजे के बाद केवल लिमिट ऑर्डर की अनुमति होगी। इस दौरान मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द नहीं किया जा सकेगा।

सेशन 3:38 बजे से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय रैंडम तरीके से बंद होगा। इसके बाद ऑर्डर मैच किए जाएंगे।

क्लोजिंग प्राइस कैसे तय होगा?

CAS का रेफरेंस प्राइस लगातार ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 15 मिनट के कारोबार के VWAP के आधार पर तय होगा। VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस। इसमें शेयर की कीमत के साथ कारोबार की मात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है।

अगर इन 15 मिनट में कोई ट्रेड नहीं होता, तो उस दिन का आखिरी ट्रेडेड प्राइस इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, अगर पूरे दिन शेयर में कारोबार नहीं हुआ, तो पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग प्राइस लागू होगा। जरूरत पड़ने पर इसमें कॉरपोरेट एक्शन के हिसाब से बदलाव भी किया जाएगा।

डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय

सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी। लेकिन एक्सपायरी वाले दिन इंडेक्स डेरिवेटिव्स के कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग 3:30 बजे बंद हो जाएगी।

स्टॉक डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग एक्सपायरी वाले दिन भी दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी। वहीं, कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोज सेशन 3:50 बजे से 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान ट्रेड क्लोजिंग प्राइस पर होंगे।

एक्सपायरी सेटलमेंट के लिए 30 मिनट का VWAP

इंडेक्स डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी सेटलमेंट के लिए संबंधित इंडेक्स की वैल्यू कैश मार्केट के लगातार ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 30 मिनट में उसके घटक शेयरों के VWAP के आधार पर निकाली जाएगी।

स्टॉक डेरिवेटिव्स के मामले में संबंधित शेयर का VWAP इसी 30 मिनट की अवधि के दौरान सभी एक्सचेंजों पर हुए कारोबार के आधार पर तय होगा। एक्सचेंज इन संकेतक वैल्यू को रियल टाइम में जारी करेंगे।

लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर के नियम

लगातार ट्रेडिंग सेशन के बाद बचे हुए पात्र लिमिट ऑर्डर आम तौर पर CAS में आगे बढ़ा दिए जाएंगे। हालांकि, स्टॉप-लॉस ऑर्डर और लागू प्राइस बैंड से बाहर के ऑर्डर इसमें शामिल नहीं होंगे।

आइसबर्ग ऑर्डर को भी कुछ शर्तों के साथ CAS में ले जाया जाएगा। ऐसे ऑर्डर आम तौर पर पूरी मात्रा दिखाने वाले लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे। हालांकि, निवेशक ऑर्डर देते समय इस प्रक्रिया से बाहर रहने का विकल्प चुन सकेंगे।

पहले से आगे बढ़ाए गए पात्र लिमिट ऑर्डर को CAS में नए लिमिट ऑर्डर के मुकाबले प्राथमिकता मिलेगी। बदले गए आइसबर्ग ऑर्डर की प्राथमिकता पहले से आगे बढ़ाए गए दूसरे लिमिट ऑर्डर से नीचे रहेगी।

CAS के दौरान नए आइसबर्ग और स्टॉप-लॉस ऑर्डर नहीं दिए जा सकेंगे। आम तौर पर ऑर्डर पर लागू मार्जिन नियम भी लागू होंगे। हालांकि, लगातार ट्रेडिंग सेशन से आगे बढ़ाए गए पात्र ऑर्डर को छूट मिलेगी। CAS के दौरान ऐसे ऑर्डर में बदलाव करने पर मार्जिन की शर्त लागू होगी।

स्टॉक फ्यूचर्स के प्राइस बैंड में भी बदलाव

दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे तक स्टॉक फ्यूचर्स के प्राइस बैंड CAS के प्राइस बैंड के मुताबिक रहेंगे। इस अवधि में डायनेमिक प्राइस बैंड में बदलाव नहीं किया जाएगा।

सेबी ने एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन को निर्देश दिया है कि वे इस सर्कुलर के सात दिनों के भीतर रेगुलेटर से सलाह लेकर अपनी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में जरूरी बदलाव करें।

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Q2 Results: घाटे से ₹19 करोड़ के मुनाफे में लौटी सोलर कंपनी, ऑर्डर बुक ₹12000 करोड़ के पार

Q2 Results: सोलर एनर्जी से जुड़ी कंपनी Sterling and Wilson Renewable Energy (SWREL) के लिए सितंबर तिमाही अच्छी रही। कंपनी घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी ने 19.2 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। पिछले साल इसी तिमाही में उसे 473.2 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू घट गया। सितंबर तिमाही में यह 12.6% गिरकर 1,527.5 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 1,748.6 करोड़ रुपये था।

ऑपरेटिंग मुनाफे में सुधार

कंपनी के कारोबार से होने वाली कमाई में सुधार दिखा। सितंबर तिमाही में EBITDA बढ़कर 56 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह सिर्फ 4 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी 0.2% से बढ़कर 3.7% हो गया।

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी ने 70 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। पिछले साल इसी अवधि में उसे 439 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

ऑर्डर बुक 12,480 करोड़ रुपये पहुंची

SWREL के पास फिलहाल 12,480 करोड़ रुपये के ऐसे ऑर्डर हैं, जिन पर काम पूरा होना बाकी है। इससे आने वाले समय में कमाई की उम्मीद का अंदाजा मिलता है।

कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में उसकी ऑर्डर बुक सालाना आधार पर 34% बढ़ी है।

985 करोड़ रुपये से ज्यादा के नए ऑर्डर

Sterling and Wilson को हाल ही में भारत और विदेशों में 985 करोड़ रुपये से ज्यादा के नए ऑर्डर मिले हैं। इनमें राजस्थान में 534.3 मेगावाट-पीक क्षमता का सोलर प्रोजेक्ट शामिल है।

इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में बैटरी स्टोरेज के दो प्रोजेक्ट मिले हैं। इनकी कुल क्षमता 616 मेगावाट-घंटे है। कंपनी को मिस्र में वेस्ट मिन्या सोलर पावर प्रोजेक्ट भी मिला है। इसे कंपनी ने Hassan Allam Construction के साथ जॉइंट वेंचर के जरिए हासिल किया है।

शेयर 3% से ज्यादा चढ़ा

गुरुवार को NSE पर Sterling and Wilson का शेयर 3.06% बढ़कर 177 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 27.31% गिरा है। कंपनी का मार्केट कैप 4.09 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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Angel One Q2 Results: स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी Angel One का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 58.2% बढ़कर 334.9 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 211.7 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू भी 17.8% बढ़कर 1,426.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 1,211.7 करोड़ रुपये था।

कंपनी का EBITDA बढ़कर 493.3 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 485.4 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन पिछली तिमाही के 34.5% से बढ़कर 45.1% पहुंच गया। इसमें 10.64 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।

क्लाइंट फंडिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

कंपनी की औसत क्लाइंट फंडिंग बुक वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड 7,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इसमें सालाना आधार पर 40.5% की बढ़ोतरी हुई। सितंबर में रोजाना औसत ऑर्डर बढ़कर 58 लाख हो गए। यह Closing Auction Session (CAS) लागू होने से पहले के स्तर के करीब है। CAS के कारण कुछ समय तक ब्रोकिंग कारोबार प्रभावित हुआ था।

Angel One के ग्रुप CEO अंबरिश खेंगे ने कहा कि बाजार के नियमों में बदलाव के बावजूद कंपनी के ग्राहकों की भागीदारी में सुधार हुआ है। इनमें बैंक फंडिंग के बदले नियम और कैश इक्विटी में CAS की शुरुआत शामिल हैं।

डेरिवेटिव्स और क्रेडिट कारोबार में बढ़त

रिटेल इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर में Angel One की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 0.43 प्रतिशत अंक बढ़कर 22.1% हो गई। वहीं, कमोडिटी टर्नओवर दोगुने से ज्यादा बढ़ा।

कंपनी का क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन भी 51.8% बढ़कर 690 करोड़ रुपये हो गया। सितंबर में ही करीब 280 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मासिक क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन हुआ। हालांकि, नए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर 19% घटकर 19 लाख रह गए।

वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का विस्तार

Angel One के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का AUM सालाना आधार पर 160.5% बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये पहुंच गया। सितंबर 2026 तक इस कारोबार के ग्राहकों की संख्या 2,975 से ज्यादा हो गई। कंपनी के एसेट मैनेजमेंट कारोबार का AUM भी 41.3% बढ़कर 570 करोड़ रुपये रहा।

Angel One का डिविडेंड

एंजल वन ने 1.40 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। इसके लिए रिकॉर्ड 22 अक्टूबर 2026 तय की है।

नतीजों से पहले BSE पर कंपनी का शेयर 2.13% बढ़कर 312.10 रुपये पर बंद हुआ। इस साल स्टॉक 32.04% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.82 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Yes Bank News: प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक के शेयरों में गुरुवार, 15 अक्टूबर को भारी गिरावट आई। कारोबार के दौरान स्टॉक करीब 14% तक टूट गया। मामला 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का फैसला रद्द कर दिया है। इसके बाद बैंक ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले और उसके असर की जांच कर रहा है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी शेयर में गिरावट को लेकर बैंक से जवाब मांगा था। इसके बाद यस बैंक ने कहा कि वह फैसले की पूरी कॉपी हासिल कर रहा है। उसे पढ़ने और उसके असर को समझने के बाद बैंक जरूरत के मुताबिक आगे जानकारी देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के फैसले को बरकरार रखा। यस बैंक और दूसरे पक्षों की अपील भी खारिज कर दी गई।

कोर्ट के मुताबिक, बैंक के पुनर्गठन की अंतिम योजना में इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का साफ प्रावधान नहीं था। इसलिए बैंक के एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

AT-1 बॉन्ड क्या होते हैं?

AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं। बैंक इनसे निवेशकों से पैसा जुटाते हैं और बदले में ब्याज देते हैं। लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब होने पर नियमों और शर्तों के तहत इन बॉन्ड की रकम घटाई या पूरी तरह खत्म की जा सकती है।

यस बैंक ने दिसंबर 2016 में 3,000 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड जारी किए थे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में 5,415 करोड़ रुपये के और बॉन्ड जारी किए गए। इस तरह कुल रकम 8,415 करोड़ रुपये थी।

2020 में क्या हुआ था?

मार्च 2020 में यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया था। उस समय केंद्र सरकार ने बैंक पर करीब एक महीने के लिए मोरेटोरियम लगाया था। यानी बैंक से पैसे निकालने पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। इसके बाद बैंक के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान नियुक्त एडमिनिस्ट्रेशन ने AT-1 बॉन्ड को राइट ऑफ कर दिया। इसका मतलब था कि बॉन्डधारकों की निवेश रकम खत्म कर दी गई। बॉन्डधारकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी।

बॉन्डधारक कोर्ट क्यों पहुंचे?

मई 2020 में Axis Trustee Services ने बॉन्डधारकों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को चुनौती दी गई। वहां बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला आया। मार्च 2023 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक इसके कानूनी और वित्तीय असर की समीक्षा कर रहा है। बैंक ने कहा है कि फैसले के अलावा उसके पास ऐसी कोई दूसरी जानकारी नहीं है, जिसका खुलासा करना जरूरी हो।

यस बैंक का स्टॉक 14% क्रैश

यस बैंक का शेयर 14.53% गिरकर 18.12 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 20% के लोअर सर्किट के साथ 16.96 रुपये तक फिसला था। हालांकि, बाद में थोड़ी रिकवरी हुई।

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Jio IPO: ‘जियो ने फाइल किए 7220 पेटेंट एप्लिकेशन’, आकाश अंबानी ने कहा- ग्लोबल टॉप 20 में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन आकाश अंबानी का कहना है कि ने 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। ये दुनिया की उन टॉप 20 कंपनियों में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी है, जिन्होंने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में जगह बनाई है।

Jio Platforms की ओर से IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करने के एक दिन बाद आकाश अंबानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने बताया कि कंपनी की टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में 12,000 से ज्यादा इंजीनियरों की टीम लगी हुई है।

अपनी टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही है Jio

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने अपनी टेक्नोलॉजी खुद डेवलप करने पर जोर दिया है। इससे कंपनी को बाहरी टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

उन्होंने कहा, ;हमने अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए अपना टेक्नोलॉजी स्टैक बनाया है।’ टेक्नोलॉजी स्टैक का मतलब उन तकनीकों, सॉफ्टवेयर और सिस्टम से है, जिनकी मदद से कंपनी अपनी सेवाएं चलाती है।

इन कारोबारों पर रहेगा कंपनी का फोकस

आकाश अंबानी के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनी का जोर मोबाइल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर रहेगा।

उन्होंने बताया कि Jio फिलहाल भारत के कुल डेटा ट्रैफिक का करीब 60% हिस्सा संभालती है। इससे देश में कंपनी के टेलीकॉम कारोबार के बड़े पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दुनिया में सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने करीब तीन साल पहले 5G नेटवर्क का विस्तार शुरू किया था। अब चीन को छोड़कर दुनिया में उसके पास सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस है।

कंपनी के ग्राहकों में डेटा की खपत भी तेजी से बढ़ी है। आकाश अंबानी के मुताबिक, Jio का हर ग्राहक औसतन हर महीने 43.7 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने बताया कि डेटा की कीमत भी काफी कम हुई है। पहले एक GB डेटा के लिए करीब 228 रुपये खर्च करने पड़ते थे। वित्त वर्ष 2026 तक यह कीमत घटकर 7.5 रुपये प्रति GB रह गई।

21 अक्टूबर को खुलेगा Jio Platforms IPO

यह जानकारी ऐसे समय आई है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है।

कंपनी ने 14 अक्टूबर को IPO के लिए RHP दाखिल किया था। इसके तहत शेयर का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया गया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा।

इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी इस IPO के जरिए अधिकतम 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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