दिल्लीवासियों को जल्द जाम से मिलेगी मुक्ति! 2047 के मास्टर प्लान में बड़ा बदलाव, 695 KM मेट्रो और 383 KM नमो भारत नेटवर्क का होगा विस्तार

Delhi Master Plan 2047: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर घंटों लगने वाला ट्रैफिक जाम, पार्किंग की परेशानी और घर से मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने की मुश्किलें आने वाले सालों में कम हो सकती हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ को लेकर ऐसी ही चुनौतियों से निपटने के लिए परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलावों की तैयारी की है। योजना में मेट्रो और ‘नमो भारत’ नेटवर्क का विस्तार, करीब 200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक, बेहतर पार्किंग मैनेजमेंट और आधुनिक ट्रैफिक टेक्नोलॉजी जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसका मकसद दिल्ली को अधिक कनेक्टेड, सुविधाजनक और टिकाऊ राजधानी बनाना है।

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 पर 11वां परामर्श सत्र आयोजित

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों के अनुसार, DDA ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047 (MPD-2047)’ पर स्टेकहोल्डर्स के साथ अपना 11वां कॉन्सुलेशन सेशन आयोजित किया। बैठक का मुख्य फोकस ट्रैफिक की भीड़ कम करने, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने और टिकाऊ शहरी आवागमन को बढ़ावा देने पर रहा।

इस बैठक में दिल्ली नगर निगम (MCD), एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली सरकार, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) समेत विभिन्न सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में DDA ने मास्टर प्लान के उन प्रस्तावों की जानकारी दी, जो परिवहन बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क, पैदल चलने और साइकिल चलाने की सुविधाओं तथा पार्किंग मैनेजमेंट से जुड़े हैं। शेयरहोल्डर्स ने भी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के सुझाव दिए।

416 से बढ़कर 695 किलोमीटर होगा मेट्रो नेटवर्क

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना ‘मास्टर प्लान-2047’ का प्रमुख लक्ष्य है। योजना में मेट्रो नेटवर्क को मौजूदा 416 किलोमीटर से बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने की परिकल्पना की गई है। इसी तरह, ‘नमो भारत’ नेटवर्क को 82 किलोमीटर से बढ़ाकर 383 किलोमीटर तक पहुंचाने का टारगेट रखा गया है। इससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

योजना में सराय काले खां, आनंद विहार और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों पर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मजबूत करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका उद्देश्य यात्रियों को मेट्रो, ‘नमो भारत’ और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के बीच आसानी से आवागमन की सुविधा देना है। अगर अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है, तो यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए निजी वाहन पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक, पैदल चलने वालों को भी मिलेगी राहत

दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या का समाधान केवल नई सड़कें और फ्लाईओवर बनाना नहीं है। ‘मास्टर प्लान-2047’ में पैदल चलने और साइकिल चलाने को भी शहरी परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। योजना में करीब 200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इनका उद्देश्य साइकिल को सुरक्षित और किफायती परिवहन विकल्प के रूप में बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही सड़क डिजाइन को बेहतर बनाने, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सार्वजनिक स्थानों को सभी के लिए अधिक सुलभ बनाने पर भी जोर दिया गया है। यदि इन सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाता है, तो कम दूरी की यात्राओं के लिए लोगों को कार या बाइक का इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे प्रदूषण घटाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है।

पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए बनेगा नया फ्रेमवर्क

दिल्ली में ट्रैफिक जाम की एक बड़ी वजह सड़कों के किनारे बेतरतीब पार्किंग और सीमित पार्किंग सुविधाएं भी हैं। ‘मास्टर प्लान-2047’ में इस समस्या से निपटने के लिए पार्किंग नियमों को आसान बनाने और उपलब्ध पार्किंग स्थलों का बेहतर इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। योजना के तहत अधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों की पहचान कर वहां पार्किंग प्रबंधन क्षेत्र विकसित करने की बात कही गई है।

नए सड़क नेटवर्क, अंडरपास और एलिवेटेड कॉरिडोर पर जोर

मास्टर प्लान में दिल्ली के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए सड़क नेटवर्क में सुधार के कई प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें नए सड़क मार्ग, अंडरपास, एलिवेटेड कॉरिडोर और क्रॉस-कॉरिडोर विकसित करना शामिल है। इसके अलावा, सड़क नेटवर्क में मौजूद मिसिंग लिंक को जोड़ने, जंक्शनों में सुधार करने और ट्रैफिक में बाधा डालने वाले पॉइंट को दूर करने पर जोर दिया गया है। योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नए विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके लिए भूमि उपयोग और परिवहन व्यवस्था के बीच तालमेल बढ़ाने का प्रस्ताव है, ताकि आवासीय, व्यावसायिक और अन्य क्षेत्रों को सार्वजनिक परिवहन से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।

ट्रैफिक मैनेजमेंट में AI और स्वच्छ तकनीक का इस्तेमाल

‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में स्मार्ट और टिकाऊ मोबिलिटी समाधानों को भी जगह दी गई है। इसके तहत ट्रैफिक और पार्किंग मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की परिकल्पना की गई है। हाईटेक टेक्नोलॉजी के जरिए ट्रैफिक की स्थिति का बेहतर आकलन करने, पार्किंग मैनेजमेंट सुधारने और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं तलाशने पर जोर है। योजना में क्लीन फ्यूल और तकनीकी रूप से हाईटेक ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है।

इसके साथ ही दिल्ली के लिए एक यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (UMTA) गठित करने का प्रस्ताव है। यह संस्था राष्ट्रीय राजधानी के लिए व्यापक मोबिलिटी योजना तैयार करने, उसकी निगरानी करने और उसे लागू करने में समन्वय की भूमिका निभाएगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य परिवहन से जुड़ी अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। ताकि सड़क, मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की योजना एक-दूसरे से जुड़कर बनाई जा सके।

2047 तक बदलेगी दिल्ली की तस्वीर?

‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से लेकर पैदल यात्रियों की सुरक्षा, पार्किंग मैनेजमेंट और स्मार्ट ट्रैफिक टेक्नोलॉजी तक कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं। मेट्रो नेटवर्क को 695 किलोमीटर और ‘नमो भारत’ नेटवर्क को 383 किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी है। साथ ही 200 किलोमीटर साइकिल ट्रैक का लक्ष्य राजधानी की परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा दिखाते हैं।

हालांकि, दिल्लीवासियों समेत पूरे NCR के लिए सबसे अहम सवाल यह होगा कि इन योजनाओं का लाभ उन्हें जमीन पर कब और किस रूप में मिलेगा। नई परियोजनाओं के साथ मौजूदा बस सेवाओं, फुटपाथों, सड़क सुरक्षा और अंतिम छोर तक पहुंचने की सुविधाओं में सुधार भी जरूरी होगा।

EAAA India Alternatives IPO: 26 अक्टूबर को खुलेगा ₹1200 करोड़ का आईपीओ, ग्रे मार्केट में ऐसी है हालत

EAAA India Alternatives IPO: अगले हफ्ते के पहले कारोबारी दिन 26 अक्टूबर को अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स का ₹1,200 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाला है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है और ग्रे मार्केट में इसकी सेहत मजबूत दिख रही है। ग्रे मार्केट में बात करें तो इसके शेयर ₹121 यानी 7.27% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

EAAA India Alternatives IPO की डिटेल्स

ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स का ₹1,200 करोड़ का आईपीओ 26-28 अक्टूबर के बीच पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इश्यू खुलने पर इसमें ₹1585-₹1665 के प्राइस बैंड और 9 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे। इश्यू का 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित है जबकि 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35% खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 29 अक्टूबर को फाइनल होगा। फिर बीएसई और एनएसई पर 2 नवंबर को एंट्री होगी। इश्यू का रजिस्ट्रार एमयूएफजी इनटाइम इंडिया है।

अब आईपीओ के पैसों के इस्तेमाल की बात करें तो चूंकि यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है तो इसका पैसा कंपनी की बजाय शेयर बेचने वाले प्रमोटर एडलवाइज सिक्योरिटीज एंड इंवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को मिलेगा। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक प्रमोटर को इसके शेयर ₹54.45 के औसतन वेटेज कॉस्ट पर मिला था।

EAAA India Alternatives के बारे में

ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स एक अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जिसका फोकस देश के रियल एसेट्स और प्राइवेट क्रेडिट मार्केट्स पर है। यह इंवेस्टमेंट फंड्स मैनेज करती है और देशी-विदेशी संस्थागत निवेशकों, HNIs (हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स), uHNIs (अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स) और फैमिली ऑफिसेज को अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट सॉल्यूशंस मुहैया कराती है।

जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी ₹95,344.88 करोड़ का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) और ₹486,23.18 करोड़ का FPAUM (फी-पेईंग एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) मैनेज कर रही है। इसके पोर्टफोलियो में दो InvITs (इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट्स ट्रस्ट्स) समेत 10 एक्टिव रियल एसेट्स फंड और 16 एक्टिव प्राइवेट क्रेडिट फंड्स हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 23% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹265.20 करोड़ और टोटल इनकम 28% से अधिक के सीएजीआर से ₹963.76 करोड़ पर पहुंच गया। अब चालू वित्त वर्ष 2027 की बात करें तो पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में कंपनी को ₹80.71 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹336.13 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹399.20 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹1,128.24 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रक्षा निर्यात में भारत ने बनाया नया रिकॉर्ड, यूरोप में भारतीय गोला-बारूद की मांग में 1,600% की उछाल, 28वें से दूसरे नंबर पर पहुंचा India

India arms exports to Europe: यूरोप के रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती मौजूदगी देश के उभरते डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नई तस्वीर पेश कर रही है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में शुरू हुए घातक युद्ध के बाद पूर्वी और मध्य यूरोप के कई देशों में गोला-बारूद की मांग तेजी से बढ़ी है। इस मांग के बीच भारतीय डिफेंस कंपनियों ने भी अपनी पहुंच का विस्तार किया है। लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय देशों को भारत से होने वाले चुनिंदा गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों के निर्यात में चार साल के भीतर 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान भारत इन उत्पादों के आपूर्तिकर्ताओं की लिस्ट में 28वें स्थान से दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

4 साल में 49.2 मिलियन डॉलर से बढ़कर 872 मिलियन डॉलर हुआ निर्यात

ब्लूमबर्ग न्यूज (Bloomberg) की रिपोर्ट में ट्रेड डेटा मॉनिटर के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद के चार वर्षों में भारतीय कंपनियों ने यूरोपीय देशों को कम से कम 872 मिलियन डॉलर यानी लगभग 87.2 करोड़ डॉलर के संबंधित उत्पादों का निर्यात किया। इससे पहले के चार वर्षों में यह आंकड़ा 49.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4.92 करोड़ डॉलर था।

इस तरह दोनों अवधियों के बीच निर्यात मूल्य में 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह आंकड़ा भारत के संपूर्ण रक्षा निर्यात का नहीं। बल्कि चुनिंदा कैटेगरी के गोला-बारूद और उनसे जुड़े उत्पादों के व्यापार का है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब पूर्वी और मध्य यूरोप के 13 देशों को इन उत्पादों की आपूर्ति करने वाले देशों में दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। इस ग्रुप में पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य और बाल्टिक क्षेत्र के देश शामिल हैं।

किन रक्षा उत्पादों की बढ़ी मांग?

भारत से यूरोप जाने वाले उत्पादों में मुख्य रूप से तोपों के गोले, मोर्टार गोला-बारूद और विस्फोटक शामिल हैं। ये सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी लेकिन महत्वपूर्ण आपूर्तियां हैं। युद्ध के लंबे खिंचने के कारण यूरोप के कई देशों को अपने सैन्य भंडार की भरपाई करनी पड़ रही है। यूक्रेन को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराने में भी इस क्षेत्र के कुछ देशों की भूमिका रही है। ऐसे में उनकी अपनी घटती आपूर्ति को दोबारा बढ़ाने की जरूरत ने यूरोप के बाहर के निर्माताओं के लिए भी अवसर पैदा किए हैं।

भारत के रक्षा उद्योग के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत लंबे समय से अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अब घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों में बढ़ते अवसर भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए अतिरिक्त कारोबार का रास्ता खोल रहे हैं।

यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी के कई संभावित आर्थिक प्रभाव हैं। इनमें रक्षा कारखानों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के अवसर, सप्लाई चैन का विस्तार और भारतीय कंपनियों को इंटरनेशनल ग्राहकों के साथ काम करने का अनुभव मिलना शामिल है।

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात का नया रिकॉर्ड

यूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती मांग के बीच भारत के समग्र रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 23,622 करोड़ रुपये था। इस प्रकार सालाना आधार पर रक्षा निर्यात में 62.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी डिफेंस पीएसयू का निर्यात 21,071 करोड़ रुपये रहा। जबकि प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों ने 17,353 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के निर्यात में 151 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि प्राइवेट क्षेत्र की वृद्धि दर 14 प्रतिशत रही। इसी अवधि में भारत ने 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात किया।

सरकारी कंपनियों की बढ़ी भूमिका, प्राइवेट सेक्टर के लिए भी अवसर

भारत के रक्षा निर्यात विस्तार में सरकारी रक्षा कंपनियों की अहम भूमिका रही है। गोला-बारूद के उत्पादन में म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इसका गठन 2021 में तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड के पुनर्गठन के बाद हुआ था। इस सुधार के तहत बोर्ड के 41 कारखानों के नेटवर्क को अलग-अलग रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विभाजित किया गया। इसका उद्देश्य उत्पादन व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाना और प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना था।

इसके बाद म्यूनिशन्स इंडिया जैसी कंपनियों ने घरेलू सैन्य जरूरतों के अलावा विदेशी बाजारों में भी ग्राहकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर, निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी भी भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक बना रही है। सरकारी और निजी कंपनियों की संयुक्त क्षमता भारत को रक्षा उत्पादन के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर देती है।

‘मेक इन इंडिया’ से ग्लोबल डिफेंस मार्केट तक

भारत सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य घरेलू सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश के भीतर पूरा करने की क्षमता विकसित करना और विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।

रक्षा निर्यात में वृद्धि से कंपनियों को घरेलू ऑर्डर के अलावा नए बाजारों से भी मांग मिल सकती है। इससे उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने और उद्योग के विस्तार में मदद मिल सकती है। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप के कई देशों ने अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत किया है। उन्होंने यूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। ऐसे में इन देशों को भारतीय गोला-बारूद की आपूर्ति और रूस के साथ भारत के पारंपरिक संबंधों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इन लेनदेन को व्यावसायिक पहलुओं से प्रेरित बताया। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने रक्षा निर्यात बाजार का विस्तार करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों, अंतिम उपयोगकर्ता संबंधी प्रतिबद्धताओं और प्रमुख रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंधों का संतुलन बनाए रखे।

Peak XV की 30वीं लिस्टिंग, Zetwerk IPO में शेयरों की बिक्री से दिग्गजों को मिला 38 गुना तक रिटर्न

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेसेज (Zetwerk Manufacturing Businesses) के शुरुआती निवेशकों ने कंपनी के आईपीओ के जरिए बड़ा मुनाफा कमाया। इसके आईपीओ के तहत काई कैपिटल (Kae Capital), एस्सेल (Accel), पीक XV पार्टनर्स (Peak XV Partners) और लाइटस्पीड वेंचर्स पार्टनर्स (Lightspeed Venture Partners) समेत कई निवेशकों ने ₹₹2,182 करोड़ के शेयर बेचे हैं। ₹5012 करोड़ के आईपीओ के तहत इन निवेशकों ने प्रति शेयर ₹151 के भाव पर लगभग ₹1,215 करोड़ जुटाए हैं। जेटवर्क के को-फाउंडर्स अमित प्रतीक आचार्य और श्रीनाथ रामकृष्णन ने भी आईपीओ के जरिए अपने 1.42-1.42 करोड़ शेयर बेचे हैं लेकिन उनके शेयरों की औसत खरीद लागत बहुत कम है तो उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उनके रिटर्न का सटीक गुणक निकालना मुश्किल है।

ऐसा नहीं है कि आईपीओ में शेयर बेचने वाले सभी को फायदा ही हुआ। प्रमोटर ग्रुप एंटिटी क्रेवोवेट इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड (Creovate Innovation Private Limited) को कंपनी के शेयर ₹178.58 के औसतन वेटेज कॉस्ट पर मिले थे यानी कि लगभग 2.30 करोड़ शेयरों को ₹151 के आईपीओ प्राइस से बेचने पर घाटा हुआ।

किसे मिला सबसे अधिक फायदा?

जेटवर्क के आईपीओ में ऑफर सेल विंडो के जरिए अपने निवेश पर सबसे अधिक फायदा काई कैपिटल फंड II और काल्यस्ता कैपिट फंड II (Kalysta Capital Fund II) ने पाया। काई को अपने शेयरों की बिक्री से करीब ₹190 करोड़ और काल्यस्ता को करीब ₹63 करोड़ मिले हैं, जबकि इन दोनों को ये शेयर ₹3.94 के औसत भाव पर मिले थे यानी कि इन्हें अपने निवेश पर करीब 38.3 गुना रिटर्न मिला। एस्सेल इंडिया V को कंपनी के शेयर ₹7.84 के औसतन वेटेज कॉस्ट पर मिला था यानी कि आईपीओ के जरिए करीब ₹172 करोड़ के शेयरों की बिक्री से इसे 19.3 गुना रिटर्न मिला।

Peak XV की 30वीं लिस्टिंग

जेटवर्क की लिस्टिंग Peak XV Partners के लिए काफी खास है क्योंकि आईपीओ के जरिए इसके पोर्टफोलियो की यह 30वीं लिस्टिंग रही। इससे पहले यह जोमैटो (Zomato), नायका (Nykaa), होनासा कंज्यूमर (Honasa Consumer), गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस (Go Digit General Insurance) और इक्सिगो (Ixigo) जैसी कंपनियों से अपना निवेश निकाल चुकी है। हाल की ग्रो (Groww), पाइन लैब्स (Pine Labs) और मीशो (Meesho) जैसी लिस्टिंग ने भी भारतीय शेयर बाजार में इसकी मौजूदगी बढ़ाई है।

अब बात करतें है Peak XV Partners को जेटवर्क में निवेश पर कितना रिटर्न मिला। Peak XV Partners Investments V (पूर्व नाम SCI Investments V) ने औसतन प्रति शेयर ₹6.31 वेटेज कॉस्ट पर शेयर खरीदा था और अब लगभग 1.76 करोड़ शेयरों की बिक्री से आईपीओ प्राइस के आधार पर इसे करीब ₹266 करोड़ मिले और निवेश पर लगभग 23.9 गुना रिटर्न हासिल किया।

इसके अलावा Peak XV Partners Growth Investments III (पूर्व नाम SCI Growth Investments III) ने ₹46.30 के भाव पर शेयर हासिल किए थे। अब आईपीओ के जरिए करीब 58 लाख शेयरों की ₹151 के भाव पर बिक्री से इसे करीब ₹88 करोड़ मिले यानी कि निवेश पर करीब 3.3 गुना रिटर्न।

Lightspeed ने बेची कुछ हिस्सेदारी

लाइटस्पीज वेंचर पार्टनर्स ने आईपीओ के जरिए अपनी कुछ हिस्सेदारी हल्की की है। मनीकंट्रोल की एनालिसिस के मुताबिक लाइटस्पीड वेंचर पार्टनर्स सेलेक्ट IV मॉरीशस ने प्रति शेयर औसतन ₹54.66 के वेटेज कॉस्ट पर शेयर खरीदे थे और आईपीओ भाव के हिसाब से शेयरों की बिक्री से इसे करीब ₹204 करोड़ मिले। वहीं लाइटस्पीड इंडिया पार्टनर्स II ने ₹13.97 के भाव पर शेयर खरीदे थे और आईपीओ के जरिए शेयरों की बिक्री से करीब ₹175 करोड़ मिले। इस बिक्री से सेलेक्ट IV मॉरीशस को करीब ₹130 करोड़ और लाइटस्पीड इंडिया पार्टनर्स II को लगभग ₹159 करोड़ का ग्रास प्रॉफिट हुआ। इसके अलावा ऑफर फॉर सेल में लाइटस्पीड इंडिया पार्टनर्स III ने भी हिस्सा लिया। तीनों फंडों की कुल बिक्री को मिलाकर लाइटस्पीड को लगभग ₹427 करोड़ मिले। हालांकि तीसरे फंड की वेटेड एवरेज कॉस्ट के बारे में जानकारी नहीं है, तो कुल गेन कैलकुलेट नहीं किया जा सकता।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड पर ईडी की छापेमारी, दिल्ली, मुंबई और करजत में पड़ी रेड

प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। 23 अक्तूबर को ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ मुंबई और दिल्ली में रेड की है। इस दौरान करोड़ों रुपये की विदेशी और भारतीय करेंसी बरामद की गई है। कंपनी के दफ्तर और निदेशकों के घरों पर तलाशी अभियान जारी है। शुक्रवार को ED ने मुंबई और दिल्ली में कंपनी के करीब आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ रेड की है।

कई ठिकानों पर एक साथ हुई रेड

जानकारी के मुताबिक ED की टीमें 23 अक्टूबर की सुबह से दिल्ली, मुंबई और महाराष्ट्र के करजत में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कंपनी के ऑफिस, उसके एक डॉयरेक्टर के घर और करजत स्थित एक फार्महाउस की तलाशी ली जा रही है। ED ने इस कार्रवाई के लिए करीब छह ठिकानों को जांच के दायरे में लिया है। तलाशी अभियान देर शाम तक जारी रहने और जरूरत पड़ने पर अगले दिन तक चलने की संभावना है।

जांच के घेरे में जुड़ी ये कंपनियां

ED के मुताबिक, इस मामले में मुंबई के कारोबारी और सलाहकार हरीश देढिया की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों, जिनमें हरीश देढिया और उनकी पत्नी धारा देढिया शामिल हैं। वहीं दुबई और सिंगापुर में मौजूद कुछ संदिग्ध कंपनियों से विदेशी मुद्रा के रूप में बड़ी रकम मिली थी। जांच के दौरान ऐसे सबूत मिलने का दावा किया गया है, जिनसे पता चलता है कि हरीश देढिया ने अपने कर्मचारियों और दूसरे लोगों को नाम के लिए निदेशक बनाकर कई कंपनियां बनाई थीं। अब ईडी इन कंपनियों के कामकाज और उनमें हुए पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।

शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों के लेनदेन का आरोप

जांच एजेंसी को शक है कि इन कंपनियों के बनने के एक साल के भीतर ही इनके बैंक खातों में सैकड़ों करोड़ रुपये जमा हुए। इसके बाद इस रकम को कई दूसरी कंपनियों के खातों में अलग-अलग चरणों में भेजा गया। ED को शक है कि इस पूरे मामले में कई ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जो केवल पैसों के लेनदेन के लिए बनाई गई थीं।

फॉरेन करेंसी, कैश और कीमती सामान मिलने की जानकारी

ED के इस रेड के दौरान फॉरेन करेंसी, कैश और कई करोड़ रुपये की कीमती सामान मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बरामद की गई फॉरेन करेंसी, कैश और कीमती सामान की कुल कीमत को लेकर अभी जानकारी सामने आना बाकी है। इसके अलावा, वित्तीय लेनदेन से जुड़े पूरे मामले में ईडी की जांच जारी है।

IndusInd Bank Q2 Results: मुनाफे में लौटा बैंक, ग्रॉस NPA घटकर 3% पर आया

IndusInd Bank Q2 Results:  निजी क्षेत्र के बैंक, इंडसइंड बैंक लिमिटेड ने शुक्रवार (23 अक्टूबर) को सितंबर तिमाही के लिए 1,242 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। पिछले साल की इसी अवधि में बैंक को 437 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। यह आंकड़ा CNBC-TV18 के 1,066 करोड़ रुपये के अनुमान से बेहतर रहा।

शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 3.6% बढ़कर 4,569 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल 4,409 करोड़ रुपये थी। हालांकि, यह आंकड़ा CNBC-TV18 के 4,710 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा।

ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 40.4% बढ़कर 2,875 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 2,047 करोड़ रुपये था। यह CNBC-TV18 के 2,687 करोड़ रुपये के अनुमान से अधिक है।

एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर, बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) अनुपात पिछली तिमाही के 3.25% से सुधरकर सितंबर तिमाही में 2.73% हो गया। नेट NPA अनुपात भी पिछली तिमाही के 0.95% से घटकर 0.83% पर आ गया।

30 सितंबर 2026 तक, इंडसइंड बैंक के पास लोन से जुड़े कुल 9,012 करोड़ रुपये के प्रोविजन्स थे, जो इसके कुल लोन का 2.48% है।

इन प्रोविजन्स में नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट्स के लिए 7,023 करोड़ रुपये के विशिष्ट प्रोविजन्स (प्रोविजन कवरेज रेशियो या PCR के तहत), PCR के लिए ही 70 करोड़ रुपये के फ्लोटिंग प्रोविजन्स, और स्टैंडर्ड एसेट्स के लिए 1,919 करोड़ रुपये के प्रोविजन्स (जिसमें restructured खातों के लिए किए गए प्रावधान भी शामिल हैं) शामिल हैं।

बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो 70% रहा, जबकि लोन से जुड़े कुल प्रोविजन्स, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) के 89% के बराबर थे। इंडसइंड बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में सभी सेगमेंट में बिज़नेस की गति में तेज़ी दर्ज की है। इसमें औसत कुल जमा राशि (total deposits) में तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर 7% की वृद्धि हुई, जबकि औसत खुदरा जमा राशि (retail deposits) में 5% का इजाफा हुआ। औसत कुल लोन में 9% की तिमाही वृद्धि देखी गई, जिसमें औसत खुदरा लोन और औसत थोक लोन (wholesale loans) दोनों में 9-9% की बढ़ोतरी हुई। कुल जमा राशि में खुदरा जमा का हिस्सा 49% रहा, जो पिछली तिमाही में 49.5% था।

प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) 70% रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 71% था। नेट सिक्योरिटी रिसीट्स 0.07% से घटकर 0.03% रह गईं, रीस्ट्रक्चर्ड बुक 0.05% से गिरकर 0.04% पर आ गई, और स्पेशल मेंशन अकाउंट्स (SMA) 1 तथा SMA 2 का स्तर 0.12% से घटकर 0.05% रह गया।

नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) तिमाही आधार पर 2% घटकर ₹4,569 करोड़ रह गई। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.23% रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 3.57% था। बैंक ने बताया कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) जमा राशि जुटाने से NIM पर जो असर पड़ा, उसकी भरपाई लाभ-हानि (P&L) खाते के अन्य मदों से हो गई।

प्री-प्रोविज़न ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) तिमाही आधार पर 4% बढ़कर ₹2,874 करोड़ हो गया। एनुअलाइज्ड रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) 0.78% से सुधरकर 0.87% हो गया, जबकि रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) पिछली तिमाही के 6.26% से बढ़कर 7.37% हो गया।

इंडसइंड बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) 16.59% रहा, जिसमें टियर I कैपिटल 15.55% और टियर II कैपिटल 1.04% शामिल है। औसत लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 127% रहा। बैंक का एनुअलाइज्ड रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) 0.87% रहा। इंडसइंड बैंक ने ₹4,28,832 करोड़ की जमा राशि दर्ज की और इसके ग्राहकों की संख्या 4.2 करोड़ थी।

BSE पर इंडसइंड बैंक लिमिटेड के शेयर ₹15.00 या 1.76% की गिरावट के साथ ₹835.00 पर बंद हुए।

 

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Jio Platforms IPO: शानदार रिस्पॉन्स, इश्यू अब तक 11.5 गुना भरा, आईं 1 करोड़ से ज्यादा एप्लीकेशन

जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के 30,213 करोड़ रुपये के IPO में पैसे लगाने का आज, 23 अक्टूबर को आखिरी दिन है। यह इश्यू दोपहर 3 बजे तक 11.58 गुना भर चुका है। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 29.11 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 13.20 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 2.48 गुना, एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 2.74 गुना और शेयरहोल्डर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 7 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इश्यू के लिए अब तक 1 करोड़ से ज्यादा एप्लीकेशन आई हैं।

इश्यू की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर बुक में 212 एंकर निवेशकों से 8,109.85 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस ऑफर के लिए संस्थागत निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जो एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों की कुल कीमत से 30 गुना से भी ज्यादा है। कंपनी ने एंकर निवेशकों को प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर 7.24 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए।

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

IPO के लिए कितना है प्राइस बैंड

जियो IPO 23 अक्टूबर को बंद होगा। यह साइज के मामले में देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। प्राइस बैंड ₹1065-₹1119 प्रति शेयर है। लॉट साइज 12 शेयर है। IPO में 27 करोड़ नए शेयर हैं। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 28 अक्टूबर को हो सकती है। इस पब्लिक इश्यू में Jio Platforms के कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर और इसकी पेरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे गए हैं।

कंपनी पात्र कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट (डिस्काउंट) के साथ शेयर ऑफर कर रही है। बचे हुए नेट इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।