यूपी रेरा ने 5 जिलों की 11 रियल एस्टेट परियोजनाओं को दी हरी झंडी, नोएडा-गाजियाबाद से लखनऊ तक इतने प्रोजेक्ट

उत्तर प्रदेश में अपना खुद का घर खरीदने और दुकान का सपना देखने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर को गति देने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के मकसद से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने प्रदेश के 5 प्रमुख जिलों की 11 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन सभी प्रोजेक्ट्स के जरिए कुल ₹2086.06 करोड़ का भारी-भरकम निवेश होगा। इसके तहत 1873 नए मकान और व्यावसायिक दुकानें बनाई जाएंगी। इन नई परियोजनाओं को हरी झंडी मिलने से न केवल घर खरीदारों का इंतजार खत्म होगा बल्कि निर्माण क्षेत्र से जुड़ी तमाम आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

यूपी रेरा की 215वीं बैठक में हुआ बड़ा फैसला

यह बड़ा फैसला लखनऊ स्थित यूपी रेरा मुख्यालय में आयोजित प्राधिकरण की 215वीं अथॉरिटी बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान बिल्डरों द्वारा सौंपे गए तमाम प्रोजेक्ट प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा और जांच-पड़ताल की गई। सभी कायदे-कानून और मानकों पर खरे उतरने के बाद ही इन 11 परियोजनाओं के पंजीकरण और निर्माण को अंतिम स्वीकृति दी गई। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि इन प्रोजेक्ट्स के निर्माण में रेरा कानून के हर एक नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा ताकि काम तय समय पर पूरा हो सके।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सबसे बड़ा दांव: लगेगा ₹1800 करोड़ से अधिक का फंड

निवेश के आंकड़े के मामले में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) जिला सबसे आगे रहा। इस जिले में कुल 2 बड़ी आवासीय परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। अकेले गौतमबुद्ध नगर जिले में ही करीब ₹1800.36 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के तहत 1398 नए और आधुनिक आवासीय फ्लैट्स बनाए जाएंगे। इससे एनसीआर में घर की तलाश कर रहे लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा।

सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स लखनऊ को मिले, जानें गाजियाबाद और बाकी जिलों का हाल

अगर बात मंजूर की गई परियोजनाओं की कुल संख्या की करें, तो इस सूची में राजधानी लखनऊ सबसे ऊपर है। राजधानी में कुल 5 नई परियोजनाओं पर मुहर लगी है। इनमें 2 आवासीय और 3 कॉमर्शियल प्रोजेक्ट शामिल हैं। लखनऊ के इन प्रोजेक्ट्स में लगभग ₹169.53 करोड़ का खर्च आएगा और 198 नई इकाइयां (घर और दुकानें) बनकर तैयार होंगी। दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में 2 आवासीय प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें करीब ₹106.84 करोड़ का निवेश किया जाएगा और 211 नए मकान तैयार किए जाएंगे। लखनऊ के नजदीकी जिले बाराबंकी में 1 आवासीय परियोजना को हरी झंडी दी गई है। ₹5.78 करोड़ के बजट वाली इस परियोजना के तहत 53 नए घर बनाए जाएंगे। पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद में 1 व्यावसायिक परियोजना पास की गई है। ₹3.55 करोड़ के अनुमानित निवेश से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में 13 दुकानें और व्यावसायिक दुकानें तैयार होंगी।

रोजगार के बढ़ेंगे अवसर, ईंट-सीमेंट से लेकर ट्रांसपोर्ट तक को मिलेगी रफ्तार

इन 11 प्रोजेक्ट्स के शुरू होने का असर सिर्फ रियल एस्टेट और मकानों के निर्माण तक ही सीमित नहीं रहेगा। जब ₹2000 करोड़ से अधिक की राशि बाजार में लगेगी, तो ईंट, सीमेंट, सरिया, ट्रांसपोर्ट, इंजीनियरिंग और मजदूरी से जुड़े तमाम सेक्टरों में काम की रफ्तार अचानक बढ़ जाएगी। इससे न सिर्फ स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि राजमिस्त्री, मजदूर, इंजीनियर और टेक एक्सपर्ट्स के लिए रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर बनेंगे।

तय समय पर मिलेगा घर, खरीदारों के हितों की होगी पूरी सुरक्षा

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्रदेश में रियल एस्टेट बाजार को पारदर्शी, भरोसेमंद और जिम्मेदार बनाना प्राधिकरण की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने के साथ-साथ अब उन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि बिल्डर समय पर काम पूरा करके दें। उन्होंने घर खरीदारों को भरोसा दिलाया कि रेरा कानून के तहत प्रमोटरों और ग्राहकों दोनों के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। किसी भी खरीदार के साथ धोखाधड़ी नहीं होने दी जाएगी और ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हुए समय सीमा के भीतर प्रोजेक्ट्स का कब्जा दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।

(नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

नई GDP सीरीज ने बदली अर्थव्यवस्था की तस्वीर, निर्माण में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी दोगुने से ज्यादा

भारत की नई GDP सीरीज ने अर्थव्यवस्था के कई बड़े सेक्टरों की तस्वीर बदल दी है। खासकर निर्माण क्षेत्र के GVA (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में बड़ा बदलाव दिखा है। GVA का मतलब किसी सेक्टर ने अर्थव्यवस्था में कितनी नई वैल्यू जोड़ी। नई सीरीज के मुताबिक, यहां निजी कंपनियों की हिस्सेदारी पहले के अनुमान से दोगुने से भी ज्यादा हो गई है।

वहीं, होटल और रेस्तरां सेक्टर में तस्वीर उलट है। यहां घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी बढ़ी है। सड़क परिवहन और कुछ दूसरे सेक्टरों में भी नए आंकड़ों ने पुराने अनुमानों को बदला है।

निर्माण में निजी कंपनियों का GVA बढ़ा

नई 2022-23 बेस सीरीज में निर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों का GVA ₹7.46 लाख करोड़ आंका गया है। पुरानी 2011-12 बेस सीरीज में यह सिर्फ ₹3.53 लाख करोड़ था। यानी नए आंकड़ों में इसमें 111% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

दूसरी ओर, घरेलू क्षेत्र से जुड़े निर्माण GVA को घटाया गया है। यह ₹17.12 लाख करोड़ से घटकर ₹12.37 लाख करोड़ रह गया है। यानी इसमें 27.8% की कमी हुई है।

सरकारी क्षेत्र के निर्माण GVA में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 23.3% बढ़कर ₹1.30 लाख करोड़ हो गया है। हालांकि, पूरे निर्माण क्षेत्र का GVA बहुत ज्यादा नहीं बदला है। नई सीरीज में यह ₹21.13 लाख करोड़ है, जबकि पुरानी सीरीज में ₹21.71 लाख करोड़ था।

इस बदलाव से निर्माण क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 35.3% हो गई है। पुरानी सीरीज में यह सिर्फ 16.3% थी। वहीं, घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 79% से घटकर 58.5% रह गई है।

सीधे शब्दों में कहें तो नई GDP सीरीज निर्माण क्षेत्र को पहले के मुकाबले ज्यादा संगठित और कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़ा हुआ दिखाती है।

होटल और रेस्तरां में उलटी तस्वीर

होटल और रेस्तरां सेक्टर में कहानी अलग है। यहां घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी बढ़ी है। नई सीरीज में घरेलू क्षेत्र का GVA ₹1.45 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ हो गया है।

इसके उलट, निजी कंपनियों का GVA ₹1.19 लाख करोड़ से घटकर ₹1.09 लाख करोड़ रह गया है। इस सेक्टर का कुल GVA भी बढ़ा है। यह 5.7% बढ़कर ₹2.80 लाख करोड़ हो गया है।

अब होटल और रेस्तरां के GVA में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60.6% है। पुरानी सीरीज में यह 54.6% थी। वहीं, निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 44.9% से घटकर 39.1% रह गई है।

MoSPI निजी कंपनियों के आंकड़ों के लिए MCA-21 की कंपनी फाइलिंग का इस्तेमाल करता है। घरेलू कारोबार का अनुमान लगाने के लिए अब वर्कफोर्स से जुड़े सर्वे और प्रति कर्मचारी वैल्यू एडेड के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सड़क परिवहन में भी बड़ा बदलाव

सड़क परिवहन में निजी कंपनियों का GVA काफी कम कर दिया गया है। नई सीरीज में यह ₹54,788 करोड़ है। पुरानी सीरीज में यह आंकड़ा ₹1.25 लाख करोड़ था। यानी इसमें 56.1% की कमी की गई है।

घरेलू क्षेत्र का GVA भी घटा है। लेकिन यहां गिरावट सिर्फ 9.2% रही। नई सीरीज में घरेलू क्षेत्र का GVA ₹5.15 लाख करोड़ है।

मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव इतना बड़ा नहीं है। घरेलू क्षेत्र का GVA करीब 10% बढ़ा है। दूसरी ओर, निजी कंपनियों का GVA 3.7% घटा है।

इससे मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी 13.3% से बढ़कर 14.8% हो गई है। निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 80.6% से घटकर करीब 78.8% रह गई है।

रियल एस्टेट में भी घरेलू कारोबार का हिस्सा बढ़ा

रियल एस्टेट, मकानों के मालिकाना हक और प्रोफेशनल सर्विसेज में भी घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ी है। नई सीरीज में घरेलू GVA 21.3% बढ़ा है।

वहीं, निजी कंपनियों के GVA में सिर्फ 2.7% की बढ़ोतरी हुई है। इस पूरी कैटेगरी का GVA 10.1% बढ़ा है।

कृषि में घरेलू क्षेत्र का दबदबा कायम

कृषि, वानिकी और मछली पालन में तस्वीर ज्यादा नहीं बदली है। इस सेक्टर के GVA में 96% से ज्यादा हिस्सा घरेलू क्षेत्र का है।

2022-23 के लिए घरेलू GVA को ₹42.73 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹45.80 लाख करोड़ किया गया है। यानी नई सीरीज में भी कृषि का बड़ा हिस्सा छोटे और घरेलू कारोबार से ही जुड़ा माना गया है।

नई सीरीज में पुराने आंकड़े भी

नई GDP सीरीज में पहले के मुकाबले ज्यादा सर्वे और सरकारी डेटा का इस्तेमाल किया गया है। फिर भी कुछ जगह पुराने आंकड़ों पर निर्भरता बनी हुई है।

उदाहरण के लिए, खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल इंजनों की संख्या का अनुमान 1997 और 2003 की Livestock Census के आंकड़ों से लगाया गया है। नई जानकारी नहीं मिलने के कारण 2015-16 के बाद भी इसी अनुमान को आगे बढ़ाया गया है।

कृषि की मार्केटिंग लागत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। पहले 2004-05 की एक स्टडी के आधार पर इसे फसल उत्पादन का 3.22% माना गया था।

नई सीरीज में जिन राज्यों ने अपनी जानकारी दी है, वहां नए और राज्यवार आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन जहां जानकारी नहीं मिली, वहां अब भी 3.22% वाला पुराना अनुपात ही लागू है।

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