Kanpur Video: आधी रात में ₹16 में कपड़े खरीदने उमड़ी हजारों की भीड़! धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति, पुलिस ने लाठियां भांजकर संभाला मोर्चा

Kanpur ₹16 Shopping Offer: उत्तर प्रदेश के कानपुर में महज 16 रुपये में कपड़े खरीदने का ऑफर एक दुकान मालिक को भारी पड़ गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑफर के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोग दुकान के बाहर पहुंच गए कि सड़क पर भीड़ बेकाबू हो गई। धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसे हालात हो गए। इस दौरान भारी भीड़ के कारण कई लोग गिर पड़े। करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आईं। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ना पड़ा। यह घटना 15 अगस्त की रात कानपुर के व्यस्त आलम मार्केट इलाके में हुई। यह दुकान रईस आलम की है, जिनके बेटे का जन्मदिन था। इसी अवसर पर उन्होंने यह ऑफर दिया था।

16 मिनट में ₹16 में कोई भी कपड़ा!

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आलम मार्केट में ‘रायस आलम’ नाम की एक होजरी की दुकान है। उनके बेटे का जन्मदिन था। इसी मौके पर ग्राहकों के लिए सोशल मीडिया पर एक बेहद खास ऑफर का ऐलान किया गया। ऑफर के मुताबिक, रात 11:59 बजे से सिर्फ 16 मिनट तक ग्राहक कोई भी रेडीमेड कपड़ा महज ₹16 में खरीद सकते थे। इस ऑफर में सूट, जींस, शर्ट समेत कई तरह के कपड़े शामिल बताए गए थे।

11:30 बजे दुकान पर पहुंचे हजारों लोग

यह ऑफर तेज़ी से ऑनलाइन फैल गया। इससे आस-पास के इलाकों और कई किलोमीटर दूर से भी लोग दुकान पर आने लगे। रात करीब 11:30 बजे तक दुकान के बाहर हजारों लोग जमा हो गए। भीड़ सड़क तक फैल गई और लोग दुकान के करीब पहुंचने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, दुकान के बाहर अफरातफरी मच गई। भीड़ में आगे बढ़ने की कोशिश में कई लोग गिर पड़े। कुछ लोग भागने लगे। इससे उनके जूते-चप्पल सड़क पर बिखर गए। इस आपाधापी में करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आईं।

हंगामे की खबर मिलते ही अलग-अलग थानों की पुलिस को मौके पर भेजा गया। भीड़ के लगातार बढ़ने पर ACP मंजे सिंह भी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ दुकान पर पहुंचे। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने लोगों से हटने के लिए अनाउंसमेंट किया। साथ ही भीड़ को पीछे धकेलने के लिए लाठियों का इस्तेमाल किया। आखिरकार अधिकारियों ने इलाके को खाली कराया। पुलिस ने इलाके में मार्च करते हुए लोगों से घर लौटने की अपील की।

सड़क पर बिखरी चप्पलें

अधिकारियों ने बताया कि भीड़ के दबाव के बीच कई लोग आगे बढ़ने की कोशिश में गिर गए। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए भीड़ से बाहर भागने लगे। इस दौरान सड़क पर बड़ी संख्या में जूते-चप्पल बिखरे नजर आए। हंगामे में करीब एक दर्जन लोगों को मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। हालात बिगड़ते देख पुलिस को तुरंत सूचना दी गई।

कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग थानों से पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने लाउडस्पीकर और अन्य माध्यमों से लोगों से मौके से हटने और अपने घर लौटने की अपील की। लेकिन भीड़ लगातार बढ़ती रही। फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां चलाकर लोगों को पीछे हटाना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने सड़क और दुकान के आसपास का इलाका खाली कराया। इसके बाद पुलिस ने इलाके में पैदल मार्च भी किया और लोगों से घर लौटने की अपील की।

दुकान बंद कर भाग गया मालिक

हंगामा बढ़ने के बाद दुकान मालिक रायस आलम ने दुकान पर ताला लगा दिया और मौके से चला गया। पुलिस को दुकान के बाहर उसका भाई मिला, जिसे पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑफर का प्रचार किस तरह किया गया। साथ ही इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

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एक छोटे से जन्मदिन के ऑफर से शुरू हुई यह कहानी देखते ही देखते ऐसी भीड़ में बदल गई कि ₹16 की खरीदारी के लिए पहुंची भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सड़क पर उतरना पड़ा। अधिकारी अब भगदड़ जैसे हालात पैदा करने के लिए आलम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Stocks to Watch: सोमवार, 17 अगस्त को बाजार खुलते ही कई शेयरों में तगड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ कंपनियों ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं, तो कुछ पर बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील और रेगुलेटरी अपडेट का असर रह सकता है। डिफेंस, बैंकिंग, रियल एस्टेट, FMCG और इंजीनियरिंग समेत कई सेक्टर फोकस में रहेंगे। ऐसे में इन 20 शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

Cochin Shipyard

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Cochin Shipyard के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट 27.7% घटकर ₹135.8 करोड़ रह गया। रेवेन्यू और EBITDA में भी गिरावट दर्ज हुई। कमजोर प्रदर्शन का असर शेयर पर पड़ सकता है।

Reliance Industries

तेल-टेलीकॉम से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक कारोबार करने वाली Reliance Industries ने ब्रिटेन की एयरोस्पेस कंपनी Rolls-Royce के साथ बड़ा समझौता किया है। दोनों कंपनियां भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने पर काम करेंगी। इसके लिए भारत में एक एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स बनाने की भी योजना है, जो पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा।

Voltas

एयर कंडीशनर और होम एप्लायंसेस बनाने वाली टाटा ग्रुप की कंपनी Voltas ने मजबूत तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹140 करोड़ से बढ़कर ₹214 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 19% बढ़कर ₹4,674 करोड़ पहुंच गया। बेहतर नतीजों से शेयर में हलचल दिख सकती है।

Max Estates

रियल एस्टेट कंपनी Max Estates का पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट 30% घटकर ₹8.35 करोड़ रह गया। रेवेन्यू लगभग स्थिर रहा और 0.85% बढ़कर ₹51.91 करोड़ पहुंचा। वहीं, EBITDA 41.6% गिरकर ₹8.12 करोड़ रहा। हालांकि पिछली तिमाही के मुकाबले कंपनी ने घाटे से मुनाफे में वापसी की है।

Texmaco Rail & Engineering

रेलवे और इंजीनियरिंग कंपनी Texmaco Rail & Engineering ने अपनी डिफेंस सब्सिडियरी Texmaco Defence Technologies में ₹200 करोड़ तक के निवेश के लिए समझौता किया है। पहले चरण में ₹100 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करके लगाए जाएंगे। बाकी ₹100 करोड़ इक्विटी, डेट या अन्य वित्तीय साधनों के जरिए निवेश किए जाएंगे।

BEML

सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BEML को मॉरीशस से 6.65 मिलियन डॉलर (करीब ₹63.5 करोड़) का एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी BE220G हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर अफ्रीका के कई देशों में सप्लाई करेगी। ऑर्डर की शुरुआत सिएरा लियोन में पायलट डिप्लॉयमेंट से होगी।

Ather Energy

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy के शेयरधारकों ने ₹1,200 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दे दी है। इससे पहले कंपनी ₹1,300 करोड़ का QIP भी पूरा कर चुकी है। दोनों को मिलाकर कंपनी ने करीब ₹2,500 करोड़ जुटाए हैं।

NMDC Steel

सरकारी स्टील कंपनी NMDC Steel ने पहली तिमाही में मजबूत ग्रोथ दिखाई। नेट प्रॉफिट 97.6% बढ़कर ₹50.51 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 8.8% बढ़कर ₹3,661.84 करोड़ पहुंचा। बेहतर नतीजों से निवेशकों की नजर रहेगी।

Embassy Office Parks REIT

रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट Embassy Office Parks REIT में Bain Capital की इकाई APAC Company XXIII Limited ने ब्लॉक डील लॉन्च की है। बेस ऑफर के तहत 4.42% हिस्सेदारी वाले 4.19 करोड़ यूनिट करीब ₹1,802 करोड़ में बेचे जाएंगे। अपसाइज विकल्प जोड़ने पर डील का आकार करीब ₹2,298 करोड़ तक पहुंच सकता है।

Patanjali

FMCG कंपनी पंतजलि ने शानदार तिमाही प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा ₹180 करोड़ से बढ़कर ₹336 करोड़ हो गया। इसके साथ FY27 के लिए ₹0.80 और FY26 के लिए ₹1.50 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

IndusInd Bank

प्राइवेट सेक्टर के बैंक IndusInd Bank पर RBI ने ₹59.20 लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नियमों के पालन में कमी के चलते हुई है। बैंक पर ब्याज दर और सिक्योरिटाइजेशन नियमों के उल्लंघन का मामला है।

PhysicsWallah

एडटेक कंपनी PhysicsWallah का घाटा कम हुआ है। नेट लॉस ₹120.5 करोड़ से घटकर ₹77.6 करोड़ रह गया। यानी कंपनी ने घाटे में करीब ₹42.9 करोड़ की कमी दर्ज की है।

PB Fintech

इंश्योरेंस और फिनटेक कंपनी PB Fintech की सब्सिडियरी Policybazaar को IRDAI से शो-कॉज नोटिस मिला है। यह नोटिस पिछले निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणियों से जुड़ा है। कंपनी ने तय समय में जवाब देने की बात कही है।

Dr. Reddy’s Laboratories

फार्मा कंपनी Dr. Reddy’s Laboratories की हैदराबाद स्थित FTO-3 यूनिट का USFDA निरीक्षण पूरा हो गया है। निरीक्षण के बाद अमेरिकी नियामक ने Form 483 जारी किया है। इसमें चार ऑब्जर्वेशन दर्ज किए गए हैं।

BMW Industries

स्टील प्रोसेसिंग कंपनी BMW Industries ने बेहतर तिमाही नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 25.8% बढ़कर ₹19.04 करोड़ हो गया। कुल आय भी 15% बढ़कर ₹176.68 करोड़ पहुंच गई।

NMDC

सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2% बढ़कर ₹2,007 करोड़ हो गया। रेवेन्यू भी 2.4% बढ़कर ₹6,795 करोड़ रहा। मजबूत प्रदर्शन से शेयर पर नजर रहेगी।

Jupiter Wagons

रेलवे वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons का मुनाफा 13.6% घटकर ₹28.3 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू 46% बढ़कर ₹670.7 करोड़ पहुंचा। EBITDA में भी हल्की बढ़त दर्ज हुई।

Zaggle Prepaid

फिनटेक कंपनी Zaggle Prepaid का नेट प्रॉफिट 33% घटकर ₹17.5 करोड़ रह गया। इसके बावजूद रेवेन्यू 27.5% बढ़कर ₹423 करोड़ हो गया। मिले-जुले नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

Borosil

ग्लासवेयर और किचनवेयर कंपनी Borosil का नेट प्रॉफिट 26.4% घटकर ₹13 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 9% बढ़ा, लेकिन EBITDA में गिरावट दर्ज हुई। इससे शेयर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Schneider Electric

इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट कंपनी Schneider Electric के नतीजे कमजोर रहे। नेट प्रॉफिट करीब 70% घटकर ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू में हल्की बढ़त रही, लेकिन EBITDA और मार्जिन पर दबाव बना रहा।

Stocks to Buy: 5 शेयरों पर ब्रोकरेज बुलिश, 43% तक रिटर्न मिलने की उम्मीद

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

सुनील सिंघानिया ने इन 2 शेयरों से निकाला पूरा पैसा, इस नए स्टॉक में लगाई बड़ी बाजी; चेक करें पूरी लिस्ट

Sunil Singhania Abakkus MF Changes: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया के अबक्कस म्यूचुअल फंड ने जुलाई महीने में अपने पोर्टफोलियो में बड़ा फेरबदल किया है। फंड हाउस की दो प्रमुख इक्विटी स्कीम अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड और अबक्कस स्मॉल कैप फंड से सरकारी बैंक ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ को पूरी तरह बेच दिया है।

इसके अलावा, स्मॉल कैप फंड ने आईटी कंपनी Cyient से भी एग्जिट कर लिया है, जबकि आईजीआई (IGI) जैसे शेयरों में नई हिस्सेदारी खरीदी है। आइए जानते हैं जुलाई के महीने में सुनील सिंघानिया के फंड हाउस ने किन शेयरों में बिकवाली की और किन दिग्गजों पर भरोसा बढ़ाया है।

IGI में नई एंट्री, HDFC Bank और SBI पर बढ़ाया दांव

₹6,338 करोड़ के एसेट साइज वाले अबक्कस फ्लेक्सीकैप फंड ने जुलाई में अपने पोर्टफोलियो के 34 शेयरों में हिस्सेदारी बढ़ाई और 3 में घटाई। महीने के अंत तक इसके पोर्टफोलियो में कुल 45 शेयर थे।

फंड ने IGI में 0.6% हिस्सेदारी के साथ नई पोजीशन ली, जबकि जून में 2.7% वेटेज वाले Bank of Baroda को पूरी तरह से बेचकर एग्जिट कर लिया।

फंड ने HDFC Bank (4% से बढ़ाकर 4.72%), SBI (3.6% से 3.89%), L&T (1.5% से 3.2%), वेदांता एल्युमीनियम (2% से 2.65%) और M&M (2.6% से 2.84%) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।

टॉप-5 होल्डिंग्स: ICICI Bank (5.55%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग है। इसके बाद HDFC Bank (4.72%), SBI (3.89%), रिलायंस इंडस्ट्रीज (3.10%) और डिविस लैबोरेटरीज (2.95%) का नंबर आता है।

सेक्टर आवंटन: बैंकिंग सेक्टर 17% हिस्सेदारी के साथ सबसे ऊपर है, जिसके बाद फार्मा (7.7%) और कैपिटल मार्केट्स (5.2%) हैं।

अबक्कस स्मॉल कैप फंड: Cyient से एग्जिट, BEML और मिसेज बेक्टर्स की एंट्री

₹2,113 करोड़ के अवाकस स्मॉल कैप फंड में जुलाई में जबरदस्त हलचल देखी गई। फंड ने 56 शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और महीने के अंत में कुल 62 शेयरों का पोर्टफोलियो मेंटेन किया।

नए शेयर शामिल किए: फंड ने BEML (1.5%), मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज (1%) और इंडो-MIM (0.4%) को अपने पोर्टफोलियो में जगह दी।

इन दो शेयरों से पूरी तरह बाहर: स्मॉल कैप फंड ने Bank of Baroda (जून में 1.1% वेटेज) और Cyient (जून में 1.3% वेटेज) को पूरी तरह बेच दिया।

इनमें बढ़ाया निवेश: कॉनकॉर, किर्लोस्कर ऑयल इंजन, लीला पैलेसेस, एलेम्बिक फार्मा, पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट, तानला प्लेटफॉर्म्स और आईजीआई में एक्सपोजर बढ़ाया गया।

टॉप होल्डिंग्स: डॉ लाल पाथलैब्स (1.80%) और वेल्सपन कॉर्प (1.80%) फंड की सबसे बड़ी होल्डिंग्स हैं, जिसके बाद कैम्स (1.79%), आईजीआई (1.76%) और करूर वैश्य बैंक (1.74%) का स्थान है।

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

सुनील सिंघानिया के इन दोनों फंड्स ने जुलाई महीने और बीते कुछ महीनों में अपने संबंधित बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतरीन रिटर्न दिया है:

दोनों फंड्स का शानदार प्रदर्शन: बेंचमार्क इंडेक्स को पछाड़ा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अजय देवगन, शाहरुख, टाइगर पर लटकी FDA की तलवार, अक्षय कुमार का नाम नहीं शामिल, जानिए कानून क्या कहता है

फ़ूड सेफ़्टी चीफ़ और महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के प्रमुख तुकाराम मुंडे ने एक्टर्स शाहरुख़ खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ को उनके ‘विमल इलायची’ विज्ञापनों के सिलसिले में नौ पेज का विस्तृत ‘शो-कॉज़ नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) जारी किया है। उन्हें इस मामले में अपनी भूमिका के बारे में सफ़ाई देनी होगी और 15 दिनों के अंदर अपने सोशल मीडिया हैंडल से सभी प्रमोशनल कंटेंट को पूरी तरह हटाना होगा।

कानून क्या कहता है? सरोगेट एडवरटाइज़िंग मुख्य मुद्दा क्यों है? शाहरुख़ खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ पर क्या कार्रवाई हो सकती है? अक्षय कुमार ने इस मामले को कानूनी तौर पर कैसे संभाला?

विमल मामले में सरोगेट एडवरटाइज़िंग मुख्य मुद्दा क्यों है?

सरोगेट विज्ञापन एक विपणन रणनीति है जिसमें कोई कंपनी प्रतिबंधित या सीमित उत्पाद को किसी अन्य अनुमत उत्पाद के नाम पर, उसी ब्रांड पहचान का उपयोग करके प्रचारित करती है। यह विज्ञापन प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए एक कानूनी खामी के रूप में काम करता है। जब शराब या तंबाकू जैसे उत्पाद टेलीविजन और प्रिंट विज्ञापनों के लिए कानूनी रूप से प्रतिबंधित होते हैं, तो कंपनियां “ब्रांड स्ट्रेचिंग” का उपयोग करके समान लोगो, संगीत, रंग और नारों के साथ एक कानूनी उत्पाद का विपणन करती हैं।

विज्ञापित उत्पाद पूरी तरह से कानूनी है। उदाहरणों में इलायची, माउथ फ्रेशनर, क्लब सोडा, पैकेटबंद पानी या संगीत सीडी शामिल हैं। कंपनी वास्तव में जिस उत्पाद को बेचना चाहती है, वह कानूनी रूप से सार्वजनिक प्रचार के लिए प्रतिबंधित है (जैसे गुटखा, पान मसाला, व्हिस्की या बीयर)। कानूनी “सरोगेट” के लिए मशहूर हस्तियों के विज्ञापनों से दर्शकों को लुभाकर, ब्रांड अपनी मजबूत और लोगों के दिमाग में बनी रहने वाली पहचान बनाए रखता है। जब कोई उपभोक्ता किसी स्टोर पर जाता है, तो वह तुरंत ब्रांड नाम पहचान लेता है और प्रतिबंधित उत्पाद खरीद लेता है।

विमल केस

मुंधे की मुख्य कानूनी दलील यह है कि “विमल इलायची” का विज्ञापन एक प्रतिबंधित चीज़ के अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रमोशन (यानी किसी दूसरी चीज़ के बहाने असल चीज़ का प्रचार) के बराबर है। रेगुलेटर का कहना है कि माउथ फ्रेशनर (इलायची) के विज्ञापन में इस्तेमाल की गई ब्रांडिंग, रंगों का तालमेल और दिखाने का तरीका खास तौर पर इस तरह से डिज़ाइन किया गया है ताकि विमल पान मसाला की ब्रांड पहचान को और मज़बूत और बेहतर बनाया जा सके। चूँकि ग्राहक इस ब्रांड के नाम को प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद से बहुत ज़्यादा जोड़कर देखते हैं, इसलिए इलायची वाले विकल्प का प्रचार करना राज्य में विज्ञापन पर लगी रोक से बचने का एक गैर-कानूनी तरीका है।

कानून क्या कहता है

महाराष्ट्र FDA प्रमुख की कार्रवाई पूरी तरह से उन खाद्य सुरक्षा कानूनों पर आधारित है जो गुमराह करने वाले विज्ञापनों और प्रतिबंधित पदार्थों के अप्रत्यक्ष प्रचार को रोकते हैं। महाराष्ट्र में, सार्वजनिक स्वास्थ्य को होने वाले खतरों के कारण पान मसाला और तंबाकू से जुड़े उत्पादों की बिक्री, निर्माण, वितरण और विज्ञापन पर पूरी तरह से रोक है।

अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस में खास तौर पर उन कानूनी प्रावधानों का ज़िक्र किया गया है जो खाद्य मानकों और विज्ञापनों को नियंत्रित करते हैं:

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24: यह कानून किसी भी व्यक्ति को भोजन की बिक्री, आपूर्ति या सेवन को बढ़ावा देने के लिए अनुचित व्यापार प्रथाओं में शामिल होने, या किसी उत्पाद की गुणवत्ता या सामग्री के बारे में गलत या गुमराह करने वाली बातें कहने से सख्ती से रोकता है।

खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) नियम, 2018: ये नियम खाद्य विज्ञापनों में जवाबदेही तय करते हैं। इनके अनुसार, प्रचार के दौरान किया गया कोई भी दावा स्पष्ट, सच्चा और गुमराह न करने वाला होना चाहिए। नियमों का उल्लंघन होने पर, अधिकारियों के पास सुधारात्मक विज्ञापन जारी करने या पूरे अभियान को पूरी तरह से बंद करने का आदेश देने का अधिकार है।

नए हफ्ते में कैसी रहेगी निफ्टी की चाल, कौन से शेयरों में बन सकता है पैसा? एक्सपर्ट सुदीप शाह की ये है राय

भले ही मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक कोई नई नकारात्मक खबर नहीं आती, निफ्टी में 24,200-24,000 के सपोर्ट जोन से नीचे बड़ी गिरावट की संभावना कम है। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उन्होंने नए शुरू हो रहे हफ्ते के लिए निफ्टी और बैंक निफ्टी को लेकर क्या उम्मीद जताई, नए सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको लगता है कि धीरे-धीरे आ रही कमजोरी अगले हफ्ते निफ्टी 50 को 24,200–24,000 के जोन से नीचे ले जाएगी?

इस समय, जब तक कोई नई नकारात्मक खबर या ट्रिगर सामने नहीं आता, निफ्टी के 24,200-24,000 के सपोर्ट जोन से नीचे जाने की संभावना कम ही लगती है। हालांकि मोमेंटम धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है, लेकिन इस गिरावट में बड़ी गिरावट वाले लक्षण नहीं दिख रहे हैं। अगस्त की शुरुआत से ही निफ्टी 500 पॉइंट की एक सीमित ट्रेडिंग रेंज में फंसा हुआ है और उतार-चढ़ाव में भी काफी कमी आई है। डेली ATR (एवरेज ट्रू रेंज) गिरकर 192 पॉइंट पर आ गया है, जो जनवरी 2026 की शुरुआत के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। इंडेक्स में ज्यादातर सेशंस में एक जैसा पैटर्न देखा जा रहा है- शुरुआती घंटे में कुछ हलचल होती है और उसके बाद लंबे समय तक कंसोलिडेशन होता है। इससे पता चलता है कि किसी एक दिशा में लगातार मोमेंटम नहीं है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ्टी अपने 20-दिन और 200-दिन के EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) के आसपास घूम रहा है। लंबे समय तक कंसोलिडेशन के कारण ये दोनों ही फ्लैट हो गए हैं। डेली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) 52 के आसपास है और नीचे की ओर जा रहा है। यह अपसाइड मोमेंटम में कुछ कमी का संकेत देता है। हालांकि, यह अभी भी 50 के अहम स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो बताता है कि मंदी का मोमेंटम (बेयरिश मोमेंटम) पूरी तरह हावी नहीं हुआ है।

आगे 24,200-24,150 का जोन एक मजबूत सपोर्ट एरिया के तौर पर काम कर सकता है। जब तक निफ्टी इस जोन के नीचे साफ तौर पर बंद नहीं होता, तब तक निचले स्तरों की ओर तेज गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना ज्यादा है। ऊपर की ओर 24,550-24,600 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है।

इसलिए, मोमेंटम निश्चित रूप से कमजोर हुआ है, लेकिन मौजूदा टेक्निकल सेटअप 24,200-24,000 से नीचे बड़ी गिरावट के बजाय एक सीमित दायरे में घूमने वाले बाजार (रेंज-बाउंड मार्केट) का संकेत देता है। 24,150-24,600 की रेंज के किसी भी तरफ एक निर्णायक ब्रेक से निफ्टी की अगली अहम दिशा तय हो सकती है।

अगले हफ्ते के लिए आपके टॉप 2 स्टॉक आइडिया क्या हैं?

Hindustan Aeronautics: स्टॉक ने पिछले हफ्ते वीकली टाइमफ्रेम पर नीचे की ओर झुकी हुई ट्रेंडलाइन से ब्रेकआउट दिया, जिसके बाद इस हफ्ते एक मजबूत चाल देखने को मिली। वीकली RSI ने 4 मई के बाद पहली बार 60 के निशान को पार किया है, जो बुलिश मोमेंटम में अहम सुधार का संकेत है। डेली टाइमफ्रेम पर बढ़ता ADX, ट्रेंड की मजबूती और खरीदारी के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। स्टॉक वीकली टाइमफ्रेम पर ऊपरी बोलिंगर बैंड के ऊपर भी बंद हुआ है। ऐसा अक्सर मजबूत ट्रेंड वाले दौर की शुरुआत में देखा जाता है।

कुल मिलाकर टेक्निकल सेटअप मजबूती (बुलिश) वाला बना हुआ है। स्टॉक में आगे और बढ़त का संकेत है। इसलिए ₹4,990-5,045 के जोन में ₹4,840 के स्टॉप-लॉस के साथ शेयर जमा करने (एक्युमुलेशन) की सलाह है। ऊपर की तरफ, इसके शॉर्ट टर्म में ₹5,400 के लेवल तक पहुंचने की संभावना है।

Mazagon Dock Shipbuilders: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने 6 अगस्त को डेली टाइमफ्रेम पर नीचे की ओर झुकी हुई ट्रेंडलाइन से ब्रेकआउट दिया, जिसके बाद स्टॉक कंसोलिडेशन के दौर में चला गया। वीकली ADX पर DI+ ने DI- को पार कर लिया है, जो बताता है कि खरीदार धीरे-धीरे विक्रेताओं पर हावी हो रहे हैं। पिछले 6 ट्रेडिंग सेशंस में कंसोलिडेशन देखने के बावजूद, स्टॉक अहम शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेज के ऊपर ट्रेड कर रहा है। यह इसकी अंदरूनी मजबूती को दिखाता है।

कंसोलिडेशन रेंज से ब्रेकआउट बुलिश सेटअप को और मजबूत कर सकता है। इसलिए, ₹2,480 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹2,560-2,590 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह दी जाती है। ऊपर की ओर, यह शॉर्ट टर्म में ₹2,770 के लेवल को टेस्ट कर सकता है।

Bonus Share: हर शेयर पर 1 नया शेयर फ्री, 24 अगस्त से पहले बन जाएं शेयरहोल्डर; 6 महीनों में कीमत 40% मजबूत

क्या बैंक निफ्टी 24 जुलाई से 3 अगस्त तक की अपनी हालिया रैली के 50 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल को बचा पाएगा?

बैंक निफ्टी पिछले 9 हफ्तों से 58,706-56,023 की बड़ी रेंज में फंसा हुआ है, जिससे किसी साफ दिशा वाले ट्रेंड की कमी का पता चलता है। खास बात यह है कि पिछले तीन हफ्तों में ट्रेडिंग रेंज काफी कम हो गई है और इंडेक्स 1,576-पॉइंट के दायरे में सिमट गया है। कंसोलिडेशन के इस दौर में, इंडेक्स ने दोनों तरफ शैडो वाली छोटी बॉडी की कैंडल्स की एक सीरीज बनाई है। यह खरीदारों और विक्रेताओं के बीच लगातार बरकरार अनिश्चितता को दिखाती है।

लंबे समय तक एक ही रेंज में उतार-चढ़ाव के कारण मुख्य मूविंग एवरेज सपाट हो गए हैं। यह ट्रेंड की मजबूती की कमी का संकेत है। मोमेंटम इंडिकेटर भी सुस्त बने हुए हैं; डेली RSI पिछले 28 ट्रेडिंग सेशन से 60-44 जोन में घूम रहा है। डेली ADX गिरकर 8.99 पर आ गया है। यह मार्च 2019 के बाद से इसकी सबसे निचली रीडिंग है। इतनी कम ADX रीडिंग दिशात्मक मजबूती की भारी कमी की ओर इशारा करती है और बताती है कि इंडेक्स अभी गहरे कंसोलिडेशन के दौर में है।

आगे 58,000-58,100 का जोन बैंक निफ्टी के लिए एक अहम रुकावट का काम कर सकता है। नीचे की तरफ 57,200-57,100 का 50-दिन का EMA क्षेत्र एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने से अगले ट्रेंडिंग मूव के लिए रास्ता बन सकता है।

क्या आप Apollo Hospitals पर बुलिश नजरिया बनाए हुए हैं?

अपोलो हॉस्पिटल्स ने डेली चार्ट पर अपने 50-दिन के EMA से जबरदस्त रिकवरी देखी है। RSI 40 से तेजी से ऊपर आया है, जो फिर से बुलिश मोमेंटम का संकेत है। स्टॉक बोलिंगर बैंड की मिडलाइन के ऊपर भी बंद हुआ है, जो शॉर्ट-टर्म बुलिश फेज की ओर शिफ्ट का संकेत देता है। ₹8,650–8,600 का जोन अहम सपोर्ट बना हुआ है।

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क्या आप Bharti Airtel में नया निवेश करने की सलाह देंगे, जिसमें शुक्रवार को जबरदस्त तेजी आई थी?

भारती एयरटेल ने अपने 50-दिन के EMA से जबरदस्त रिकवरी देखी है। RSI ऊपर की ओर बढ़ा है, जो मजबूत बुलिश मोमेंटम का संकेत है। धीरे-धीरे बढ़ता ADX ट्रेंड की मजबूती में सुधार का संकेत देता है। MACD लाइन भी बुलिश क्रॉसओवर के करीब है। यह पॉजिटिव रुख को और मजबूत करता है। ₹1,940–1,930 का जोन अहम सपोर्ट बना हुआ है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

एक गलती…और टूट गया 10 साल पुराना रिश्ता, पत्नी से धोखा मिलने के बाद पति ने खत्म किया रिश्ता, वायरल हुई कहानी

सोशल मीडिया पर एक महिला का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में महिला ने बताया की एक गलती की वजह से उसके पति ने 10 साल पुरानी शादी तोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या एक बार किया गया धोखा इतने सालों के रिश्ते, प्यार और साथ को खत्म करने के लिए काफी है, या फिर टूटे भरोसे के बाद रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। जानें क्या है पूरा मामला

महिला ने पति को दिया धोखा

X यूजर SamSiff ने एक महिला से जुड़ी पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि, महिला ने अपने पति को धोखा दिया, जिसके बाद पति ने उसे तलाक दे दिया। बताया गया कि तलाक से पहले दोनों की शादी को 10 साल हो चुके थे। कहानी शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “उसने सिर्फ एक बार धोखा दिया, लेकिन पति ने 10 साल पुरानी शादी खत्म करने का फैसला कर लिया। अब लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सिर्फ एक गलती की वजह से किसी रिश्ते के 10 साल को खत्म कर देना सही है?”

नहीं दिया सफाई का मौका

पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई थी, जिसमें महिला ने पूरे मामले को लेकर अपनी बात रखी थी। महिला ने दावा किया कि 10 साल की शादी में उसने सिर्फ एक बार पति को धोखा दिया, लेकिन पति ने उसे सफाई या रिश्ता सुधारने का मौका दिए बिना तलाक ले लिया। महिला ने अपनी बात रखते हुए लिखा, “मैंने शादी के 10 साल में सिर्फ एक बार अपने पति को धोखा दिया। यह मेरी एक गलती थी, लेकिन इसके बाद वह मुझसे पूरी तरह दूर हो गया, जैसे मैं उसके लिए सबसे बुरी इंसान हूं। उसने न तो मुझसे बात करने की कोशिश की, न रिश्ते को बचाने का कोई मौका दिया और न ही मेरी बात सुनी। इसके बजाय उसने तलाक के कागज मेरे सामने रख दिए।”

2 साल से मांद रही मांफी

महिला ने आगे बताया, “यह घटना दो साल पहले हुई थी। तब से मैं लगातार माफी मांगती रही, रोती रही और रिश्ता बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हमने साथ मिलकर 10 साल की जिंदगी बिताई और कई यादें बनाई थीं। मुझे समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतने सालों के रिश्ते और साथ को इतनी आसानी से कैसे भुला सकता है।” महिला का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि, रिश्ते की लंबी अवधि से ज्यादा जरूरी भरोसा होता है और एक बार विश्वास टूट जाने के बाद शादी को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं होता।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने महिला की आलोचना करते हुए लिखा, “बड़ी मेट्रो की लड़कियां और महिलाएं आखिर क्या उम्मीद कर रही हैं? एक बार धोखा देना हो या 20 बार, इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर स्थिति उलट होती और पति ऐसा करता, तो शायद वह भी अपनी पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर देता। उसे इस बात की गंभीरता समझनी चाहिए।”

एक और कमेंट करने वाले ने महिला पर कहानी को मैनिपुलेट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा, “एलीट लेवल की गैसलाइटिंग। जो कोई भी उसके पक्ष में बात करता है या उसका सपोर्ट करता है, वह सबसे बुरे लोग हैं।” एक यूजर ने लिखा, “कितनी ऊपरी सोच है.. यह सिर्फ एक गलती नहीं है बल्कि भरोसा टूटना है.. धोखा तो धोखा है… बस। माफ नहीं किया जा सकता।”

Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी का मुनाफा 31% बढ़ा, तीन साल में ₹1000 करोड़ रेवेन्यू का टारगेट

Lincoln Pharmaceuticals Q1 Results: फार्मा कंपनी Lincoln Pharmaceuticals ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 30.9% बढ़कर ₹36.23 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹27.68 करोड़ था।

कंपनी की कुल आय भी 19% बढ़कर ₹201.55 करोड़ पहुंच गई। एक साल पहले यह ₹169.34 करोड़ थी। वहीं, प्रति शेयर आय (EPS) बढ़कर ₹18.09 हो गई।

EBITDA में भी मजबूत बढ़त

Lincoln Pharmaceuticals का EBITDA 32.3% बढ़कर ₹51.70 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹39.08 करोड़ था। इससे साफ है कि कंपनी की ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी पहले से बेहतर रही।

FY26 में डिविडेंड की सिफारिश

कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष 2026 में ₹87.89 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कुल आय ₹704.48 करोड़ रही और EBITDA ₹131.14 करोड़ पहुंच गया। बोर्ड ने FY26 के लिए 18% डिविडेंड यानी ₹10 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹1.80 डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, इसे AGM में शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है।

तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य

Lincoln Pharmaceuticals ने अगले तीन साल में ₹1,000 करोड़ रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वह 15-18% सालाना ग्रोथ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी को कार्डियक, डायबिटीज, डर्मेटोलॉजी और ENT सेगमेंट से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

90 देशों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी

Lincoln Pharmaceuticals अभी 60 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करती है। कंपनी का लक्ष्य अगले 2-3 साल में यह संख्या बढ़ाकर 90 देशों तक पहुंचाने का है।

हाल ही में कंपनी ने कनाडा के बाजार में एंट्री की है। साथ ही उसे ऑस्ट्रेलिया के TGA और यूरोप के EU GMP से मंजूरी भी मिली है। कंपनी का कहना है कि इससे उसके ग्लोबल विस्तार को और रफ्तार मिलेगी।

Lincoln के शेयरों का हाल

कंपनी के शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 1.19% की गिरावट के साथ 612.10 रुपये पर बंद हुए। इस साल अब तक स्टॉक 27.57% का रिटर्न दिया है। वहीं बीते 1 साल के दौरान इसमें करीब 12% की तेजी आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.22 हजार करोड़ रुपये है।

Lincoln Pharmaceuticals दवाइयां बनाने और बेचने वाली भारतीय फार्मा कंपनी है। यह कार्डियक, डायबिटीज, एंटीबायोटिक, डर्मेटोलॉजी, ENT और दर्द निवारक जैसी कई कैटेगरी में दवाइयां बनाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चेहरे पर अपना खून लगाना कितना फायदेमंद? जानें Vampire Facial का पूरा प्रोसेस और खर्च

एक्ट्रेस और ट्रैवल होस्ट Shenaz Treasury ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपने एक अनोखे ब्यूटी ट्रीटमेंट की झलक साझा की, जिसे देखकर कई लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई। उन्होंने ‘Vampire Facial’ कराया, जिसका नाम सुनकर ही यह किसी डरावनी प्रक्रिया जैसा लगता है। इस ट्रीटमेंट के दौरान पहले व्यक्ति के शरीर से थोड़ा खून लिया जाता है, फिर उसे प्रोसेस करके उसमें से खास प्लाज्मा अलग किया जाता है। इसके बाद चेहरे पर बेहद बारीक सुइयों से माइक्रो-नीडलिंग की जाती है और तैयार प्लाज्मा त्वचा पर लगाया जाता है। खास बात यह है कि इसमें किसी दूसरे व्यक्ति का खून इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि उसी व्यक्ति के अपने खून से Platelet-Rich Plasma यानी PRP तैयार किया जाता है।

इसे त्वचा की रंगत, टेक्सचर और उम्र के असर से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसके फायदे और परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं और वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं।

आखिर क्या होता है Vampire Facial?

Vampire Facial आमतौर पर PRP और Microneedling का कॉम्बिनेशन होता है। PRP बनाने के लिए व्यक्ति के शरीर से थोड़ा-सा खून लिया जाता है। इसे एक खास मशीन यानी Centrifuge में घुमाकर उसके अलग-अलग हिस्सों को अलग किया जाता है और प्लेटलेट्स से भरपूर प्लाज्मा निकाला जाता है।  इसके बाद चेहरे पर Microneedling की जाती है और तैयार PRP को त्वचा पर लगाया जाता है। कुछ मामलों में PRP को त्वचा के खास हिस्सों में इंजेक्ट भी किया जा सकता है।

चेहरे पर क्यों कराया जाता है ये ट्रीटमेंट?

इस ट्रीटमेंट को आमतौर पर Fine Lines, झुर्रियां, असमान Skin Texture, dullness और उम्र के असर को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Microneedling त्वचा में बेहद छोटे-छोटे छेद बनाकर उसकी Repair Process को सक्रिय करने की कोशिश करती है। वहीं PRP में मौजूद Platelets और Growth Factors को त्वचा की मरम्मत और Collagen बनने में मददगार माना जाता है। हालांकि, इसके फायदे को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीद रखना सही नहीं है। उपलब्ध वैज्ञानिक सबूत अभी इतने मजबूत नहीं हैं कि इसे जवां या बेदाग त्वचा पाने का पक्का तरीका कहा जा सके।

कैसे होता है पूरा प्रोसेस?

 सबसे पहले हाथ से थोड़ी मात्रा में खून लिया जाता है। फिर उसे Centrifuge मशीन में रखा जाता है, जिससे PRP अलग किया जा सके। इसके बाद चेहरे को अच्छी तरह साफ किया जाता है और जरूरत पड़ने पर सुन्न करने वाली क्रीम लगाई जाती है। फिर Microneedling Device से चेहरे पर छोटे-छोटे चैनल बनाए जाते हैं। अंत में PRP को त्वचा पर लगाया जाता है, ताकि वह इन छोटे चैनलों के जरिए अंदर तक पहुंच सके।

क्या Vampire Facial दर्दनाक होता है? 

दर्द या असहजता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। Microneedling से पहले आमतौर पर Numbing Cream लगाई जाती है, जिससे परेशानी कम हो सके। ट्रीटमेंट के बाद कुछ समय तक चेहरा लाल, संवेदनशील या थोड़ा सूजा हुआ दिखाई दे सकता है। हल्की सूजन, दर्द या नीले निशान भी कुछ दिनों तक रह सकते हैं। इसलिए ट्रीटमेंट के तुरंत बाद दिखने वाली लाल त्वचा को ही अंतिम परिणाम समझना सही नहीं है।

रिजल्ट कब दिखाई देता है?

Vampire Facial से तुरंत चमकदार या जवां त्वचा मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति पर इसका असर होता है, तो परिणाम सामने आने में कई हफ्ते से लेकर कुछ महीने लग सकते हैं। कुछ लोगों को बेहतर परिणाम के लिए एक से ज्यादा सेशन की जरूरत भी पड़ सकती है। कितने सेशन जरूरी होंगे, यह त्वचा और ट्रीटमेंट के तरीके पर निर्भर करता है।

भारत में कितना खर्च आता है?

Vampire Facial की कीमत हर शहर और क्लिनिक में अलग हो सकती है। उपलब्ध क्लिनिक कीमतों के मुताबिक, Full-Face Vampire Facial की लागत लगभग ₹6,000 से ₹15,000 प्रति सेशन हो सकती है। वहीं, PRP को Microneedling के साथ कराने पर करीब ₹8,000 से ₹18,000 प्रति सेशन तक खर्च आ सकता है। अगर कई सेशन कराने हों, तो कुल खर्च काफी बढ़ सकता है।

क्या इसमें कोई जोखिम भी है?

अपना ही खून इस्तेमाल होने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी तरह Risk-Free नहीं है। ट्रीटमेंट के बाद दर्द, सूजन, लालिमा और Bruising जैसी समस्या हो सकती है। सबसे जरूरी बात है साफ-सफाई और Sterile Equipment। खून निकालने और उसे दोबारा त्वचा पर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में लापरवाही से संक्रमण का खतरा हो सकता है। Microneedling त्वचा की ऊपरी परत को भी प्रभावित करती है, इसलिए Hygiene और बाद की देखभाल बेहद जरूरी है।

Salon Facial नहीं, Medical Procedure समझें

Vampire Facial को सामान्य Beauty Facial की तरह नहीं लेना चाहिए। यह एक Medical Cosmetic Procedure है। इसे कराने से पहले Qualified Dermatologist या प्रशिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल से सलाह लेना बेहतर है। खासकर अगर किसी व्यक्ति को पहले से त्वचा से जुड़ी समस्या है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह ट्रीटमेंट करवाने से बचना चाहिए।

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घर खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर: लोढ़ा डेवलपर्स ला रहा है 21 नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, दिल्ली-NCR में पहली बार एंट्री

Lodha Developers New Housing Projects: देश के रियल एस्टेट सेक्टर में इस समय मकानों की जबर्दस्त डिमांड देखने को मिल रही है, और इसी तेज मांग का फायदा उठाने के लिए मैक्रोटेक डेवलपर्स (लोढ़ा ग्रुप) ने एक बहुत बड़ा दांव खेला है। चालू वित्त वर्ष (2026-27) में अपने बिजनेस का दायरा तेजी से बढ़ाने के लिए कंपनी ने मार्च 2027 तक 21 नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और नए फेज पेश करने का मेगा प्लान तैयार किया है।

इस आक्रामक विस्तार से लोढ़ा डेवलपर्स की नजर ₹24,000 करोड़ का भारी-भरकम राजस्व हासिल करने पर है। सबसे खास बात यह है कि मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद कंपनी अब पहली बार दिल्ली-NCR के लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग मार्केट में कदम रखने जा रही है। आइए आपको बताते हैं लोढ़ा डेवलपर्स के इस 21-प्रोजेक्ट वाले मेगा प्लान के बारे में।

21 नए प्रोजेक्ट्स का पूरा ब्रेकअप: कहां और कितना होगा निर्माण?

लोढ़ा डेवलपर्स की इन्वेस्टर्स प्रेजेंटेशन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की बाकी तीन तिमाहियों के दौरान कुल 15.6 मिलियन स्क्वायर फीट क्षेत्र में नए घरों का निर्माण किया जाएगा:

7 पूरी तरह से नए प्रोजेक्ट्स: कंपनी MMR, दिल्ली-NCR, पुणे और बेंगलुरु में 5.9 मिलियन वर्ग फीट में फैला 7 नया हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्च करेगी, जिनसे ₹9,850 करोड़ के रेवेन्यू का अनुमान है।

14 मौजूदा प्रोजेक्ट्स के नए फेज: अपने 14 मौजूदा और लोकप्रिय प्रोजेक्ट्स के नए फेज पेश किए जाएंगे। 9.7 मिलियन वर्ग फीट के इस डेवलपमेंट से ₹14,210 करोड़ जुटाने की योजना है।

Q1 का प्रदर्शन: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान कंपनी पहले ही MMR में 4 लाख वर्ग फीट का एक प्रोजेक्ट उतार चुकी है, जिससे ₹330 करोड़ की आय होने की उम्मीद है।

पहली बार दिल्ली-NCR में एंट्री और पोर्टफोलियो का डाइवर्सिफिकेशन

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR), पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के रियल एस्टेट मार्केट में अपना परचम लहराने के बाद कंपनी पहली बार दिल्ली-NCR के बाजार में कदम रख रही है।

आवासीय परियोजनाओं के अलावा लोढ़ा डेवलपर्स अपने कमर्शियल पोर्टफोलियो का भी तेजी से विस्तार कर रहा है। इसके तहत ऑफिस स्पेस, रिटेल मॉल्स, वेयरहाउसिंग, इंडस्ट्रियल पार्क्स और डेटा सेंटर पार्क्स का निर्माण शामिल है।

पहली तिमाही के आंकड़े: मुनाफा दोगुना, 4% बढ़ी सेल्स बुकिंग

चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में लोढ़ा डेवलपर्स के वित्तीय आंकड़े काफी मजबूत रहे हैं। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल 100% से ज्यादा उछलकर ₹1,373.1 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में ₹675 करोड़ था।

पहली तिमाही में कंपनी की कुल इनकम ₹5,096.7 करोड़ रही, जो बीते साल की समान अवधि (₹3,624.7 करोड़) से काफी अधिक है। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान लोढ़ा डेवलपर्स की सेल्स बुकिंग्स 4% बढ़कर ₹4,630 करोड़ पर पहुंच गईं।

FY27 के लिए बड़ा लक्ष्य: ₹4,100 करोड़ नेट प्रॉफिट की उम्मीद

कंपनी ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए कुल ₹24,000 करोड़ की सेल्स बुकिंग हासिल करने का रोडमैप तैयार किया है। देश में प्रीमियम घरों की भारी मांग, समय पर प्रोजेक्ट डिलीवरी और डेटा सेंटर्स जैसे एसेट्स के मुद्रीकरण के बल पर लोढ़ा डेवलपर्स ने चालू वित्त वर्ष में अपने शुद्ध मुनाफे को 20% बढ़ाकर ₹4,100 करोड़ तक पहुंचाने का टारगेट तय किया है।

बता दें कि बीते वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने ₹17,119.5 करोड़ की कुल इनकम के साथ ₹3,430.7 करोड़ का नेट प्रॉफिट हासिल किया था और रिकॉर्ड ₹20,530 करोड़ की प्रॉपर्टीज बेची थीं।

होमबायर्स को मिलेंगे प्रीमियम विकल्प

देश के बड़े शहरों में बेहतर जीवनशैली और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। लोढ़ा डेवलपर्स के इस 21-प्रोजेक्ट वाले मेगा प्लान से न सिर्फ कंपनी को अपना रेवेन्यू टारगेट हासिल करने में मदद मिलेगी, बल्कि दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में घर खरीदारों के पास भरोसा और लग्जरी के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

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