SIP Calculator: ₹100 की SIP से कितने समय में ₹1 लाख बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

SIP Calculator: आज 100 रुपये में शायद परिवार के लिए पूरी सब्जी लाना भी मुश्किल हो सकता है। इसलिए अगर कोई कहे कि सिर्फ ₹100 महीने बचाकर 1 लाख रुपये बनाए जा सकते हैं, तो पहली बार में यकीन करना मुश्किल लगता है।

लेकिन SIP की खासियत ही यही है। यहां सिर्फ आपका पैसा काम नहीं करता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितने लंबे समय तक निवेश चलता है, कंपाउंडिंग उतना बड़ा असर दिखाती है। यही वजह है कि छोटी रकम भी धीरे-धीरे बड़ा फंड बन सकती है।

पहले सीधा जवाब जान लीजिए

अगर आप हर महीने ₹100 की SIP करते हैं, तो 1 लाख रुपये तक पहुंचने में अनुमानित समय कुछ ऐसा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
1 लाख बनने में अनुमानित समय

10%22 साल 5 महीने
12%20 साल
15%17 साल 5 महीने

नोट: यह अनुमान नियमित मासिक SIP और पूरे समय एक समान रिटर्न मानकर किया गया है। असली रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

10% रिटर्न मिले तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आपने 25 साल की उम्र में ₹100 की SIP शुरू की। अगर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 1 लाख रुपये बनने में करीब 22 साल 5 महीने लग सकते हैं।

इस दौरान आपका कुल निवेश सिर्फ करीब ₹26,900 होगा। यानी 1 लाख के फंड में करीब ₹73,100 सिर्फ कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यही वजह है कि शुरुआती सालों में लगातार निवेश करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

12% रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है

अब यही उदाहरण 12% रिटर्न के साथ देखिए। यहां लक्ष्य करीब 20 साल में पूरा हो सकता है।

इस दौरान कुल निवेश लगभग ₹24,100 रहेगा। बाकी करीब ₹75,900 रिटर्न से बन सकते हैं। सिर्फ 2% ज्यादा रिटर्न मिलने से करीब ढाई साल का समय बच जाता है।

15% रिटर्न मिले तो?

अगर लंबे समय में औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो यही 1 लाख रुपये करीब 17 साल 5 महीने में बन सकते हैं।

यहां कुल निवेश सिर्फ करीब ₹20,900 रहेगा। बाकी लगभग ₹79,100 कंपाउंडिंग से जुड़ सकते हैं। यानी जितना समय बढ़ता है, उतना ही रिटर्न का असर भी तेज होता जाता है।

तीनों स्थितियों का पूरा हिसाब

रिटर्नसमयकुल निवेश
संभावित बढ़ी हुई रकम

10%22 साल 5 महीने₹26,900₹73,100
12%20 साल₹24,100₹75,900
15%17 साल 5 महीने₹20,900₹79,100

अगर SIP बढ़ा दें तो खेल बदल जाता है

यहीं सबसे दिलचस्प बात है। 100 रुपये की SIP से 1 लाख बन सकते हैं, लेकिन अगर आमदनी बढ़ने के साथ SIP भी थोड़ी बढ़ा दें, तो मंजिल कहीं पहले मिल सकती है।

12% अनुमानित रिटर्न पर अगर SIP बढ़ाकर ₹500 कर दें, तो 1 लाख बनने में करीब 9 साल लग सकते हैं। वहीं ₹1,000 की SIP में यही लक्ष्य करीब 5 साल 9 महीने में पूरा हो सकता है।

असली सीख क्या है?

100 रुपये की SIP आपको रातों-रात अमीर नहीं बनाएगी। लेकिन यह एक अच्छी निवेश आदत जरूर बना सकती है। अगर छोटी रकम से शुरुआत करके हर साल SIP थोड़ी-थोड़ी बढ़ाते रहें, तो वही कंपाउंडिंग आगे चलकर आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

₹5 करोड़ vs ₹10 करोड़: रिटायरमेंट के बाद कितने फंड में मिलेगी असली आजादी? जानिए एक्सपर्ट्स का ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ब्रिटेन की हरी घास हुई पीली, 190 साल में सबसे सूखा जुलाई, जानें क्यों बदल गया पूरा नजारा

अपनी हरी-भरी घास और खूबसूरत पार्कों के लिए मशहूर ब्रिटेन का नजारा इस बार बदला हुआ है। ब्रिटेन में पड़ी भीषण गर्मी और सूखे ने इसकी मनमोहक हरियाली पर काफी असर डाला है और यहां की घास हरी से पीली, भूरी और सुनहरी रंग की दिखने लगी हैं। इंग्लैंड में इस बार 190 वर्षों में सबसे सूखा जुलाई देखने को मिला है जबकि वेल्स ने भी अपने इतिहास का सबसे सूखा जुलाई देखा। इस वजह से देश के लॉन, पार्क और खेत सूख रहे हैं।

यूके सरकार के मुताबिक महीनों तक बेहद कम बारिश और हाई टेंप्रेचर के बाद 10 अगस्त तक इंग्लैंड का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा आधिकारिक तौर पर सूखे की चपेट में आ चुका था। इस जल संकट ने नदियों, जलाशयों, कृषि योग्य भूमि और वन्यजीवों पर काफी असर डाला है।

क्यों पीली पड़ रही है हरी घास?

घास के रंग में आया यह बदलाव मुख्य रूप से पौधों का सर्वाइवल रिस्पॉन्स है। जब मिट्टी काफी सूख जाती है तो घास का बढ़ना रुक जाता है और वो डॉर्मेंट स्टेट में चली जाती है। जब घास पानी और एनर्जी बचाने की कोशिश करती है तो उसकी पत्तियां अपना स्वस्थ हरा रूप खो देती हैं और पीली, भूरी या पुआल के रंग की हो जाती हैं। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी के मुताबिक स्थापित लॉन अक्सर सूखे के लंबे दौर में भी जीवित रह सकते हैं क्योंकि सतह के नीचे उनकी जड़ें जीवित रहती हैं। जैसे ही बारिश लौटती है, उनमें फिर से नई हरी पत्तियां निकल आती हैं। फिर भी मौजूदा स्थितिइतनी गंभीर है कि कुछ क्षेत्रों में स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर सूखा जारी रहता है तो घास कमजोर हो सकती है और जड़ें खराब हो सकती हैं।

किसानों, जलाशयों और जल आपूर्ति पर पड़ा भारी असर

इस सूखे मौसम का सीधा असर ब्रिटेन के किसानों पर भी पड़ रहा है। इंग्लैंड की पर्यावरण एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि घास की पैदावार घटने के कारण पशुपालक किसानों को समय से पहले ही सर्दियों के लिए रखा गया चारा इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को समय से पहले फसलों की कटाई करनी पड़ रही है, फसल की पैदावार कम हो रही है और खेतों में आग लगने का खतरा काफी बढ़ गया है।

बारिश की कमी का आंकड़ा बेहद हैरान करने वाला है

जुलाई महीने में इंग्लैंड में केवल 6।5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि उसके दीर्घकालिक औसत का मात्र 10 प्रतिशत है। दक्षिणी इंग्लैंड के कुछ हिस्सों में पूरे महीने लगभग न के बराबर बारिश हुई। देश में जलाशयों का जलस्तर काफी गिर गया है, नदियों का प्रवाह असामान्य रूप से कम है और लाखों लोग पानी के उपयोग पर लगी पाबंदियों से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। सूखे के हालातों को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए अतिरिक्त सहायता की घोषणा की है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपने घर के लॉन में हर कीमत पर घास को हरा रखने की जिद न करें। रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी का कहना है कि भूरी हुई घास बारिश लौटने पर प्राकृतिक रूप से ठीक हो सकती है जबकि सूखे के दौरान ज्यादा सिंचाई करने से सीमित जल आपूर्ति पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ेगा।

LPG Supply Plan: गैस संकट से बचने की तैयारी, सरकार ने हर रिफाइनरी के लिए तय की LPG प्रोडक्शन लिमिट

LPG Supply Plan: भारत सरकार ने पहली बार हर रिफाइनरी और कंपनी के लिए LPG प्रोडक्शन की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसका मकसद है कि अगर भविष्य में गैस सप्लाई पर संकट आए, तो देश में रसोई गैस की कमी न हो।

यह फैसला पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के बाद लिया गया है। उस दौरान आयात प्रभावित हुआ था और सरकार को आपातकालीन कदम उठाने पड़े थे।

13 अगस्त को पेट्रोलियम मंत्रालय ने 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन क्षमता तय की। यह देश की मौजूदा रोजाना खपत का करीब 70% है। तुलना करें तो FY26 में भारत का घरेलू उत्पादन सिर्फ 35,900 टन प्रतिदिन था।

रिलायंस को मिली सबसे बड़ी क्षमता

सरकार ने गुजरात के जामनगर स्थित Reliance Industries की घरेलू बाजार वाली रिफाइनरी के लिए सबसे ज्यादा 18,000 टन प्रतिदिन की क्षमता तय की है।

सरकारी तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन की क्षमता मिली है। वहीं Nayara Energy की वाडिनार रिफाइनरी को 4,480 टन प्रतिदिन और ONGC व GAIL जैसी कंपनियों को मिलाकर 6,460 टन प्रतिदिन की क्षमता दी गई है।

सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

FY26 में भारत ने 3.32 करोड़ टन LPG की खपत की। इसमें घरेलू उत्पादन सिर्फ 1.31 करोड़ टन रहा। बाकी 2.13 करोड़ टन गैस बाहर से मंगानी पड़ी। यानी देश की 60% से ज्यादा जरूरत आयात पर टिकी रही।

ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित हुई थी। तब सरकार ने रिफाइनरियों से कहा था कि पेट्रोकेमिकल की बजाय ज्यादा LPG बनाएं। इससे उत्पादन बढ़कर करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था।

अब हर संकट के लिए पहले से प्लान तैयार

नई व्यवस्था में सरकार जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों और तेल कंपनियों को तय समय के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकेगी। कंपनियों को स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई की तैयारी भी पहले से रखनी होगी।

सरकार चाहती है कि रिफाइनरियां नई तकनीक अपनाकर और ज्यादा LPG निकालने के तरीके भी खोजें। इसके लिए नैफ्था को LPG में बदलने और रिफाइनरी यूनिट अपग्रेड करने जैसे विकल्पों पर काम करने को कहा गया है।

हर छह महीने में होगी समीक्षा

यह व्यवस्था एक बार बनाकर छोड़ नहीं दी जाएगी। सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इस सूची की समीक्षा करेगी। नई रिफाइनरियां, गैस प्रोजेक्ट और बढ़ी हुई क्षमता इसमें जोड़ी जाएगी। इससे भविष्य में विदेशों से सप्लाई रुकने पर भी घरेलू गैस व्यवस्था संभालना आसान होगा।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इंडियन प्लेयर को लगातार लग रही चोट पर गावस्कर ने किया CoE का बचाव, बोले- ट्रेनिंग में हो सकती है कमी

भारतीय टीम इस समय चोटों की समस्या से जूझ रही है। जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन और हार्दिक पांड्या जैसे कई बड़े भारतीय खिलाड़ी इस समय चोट की वजह से टीम से बाहर हैं। इन खिलाड़ियों की चोट को लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ एक्सपर्ट और फैंस के मुताबिक, खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट होने से पहले ही CoE से रिलीज कर दिया गया, जिससे उनकी चोट दोबारा सामने आई या बढ़ गई। वहीं इस पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने खिलाड़ियों की चोटों को लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर सवाल उठाने को सही नहीं माना है।

उन्होंने कहा कि कई खिलाड़ियों को हैमस्ट्रिंग की चोट हो रही है, जिसकी वजह उनकी ट्रेनिंग भी हो सकती है। इसलिए इस मामले में केवल CoE के फिजियो पर सवाल उठाना ठीक नहीं होगा।

सुनील गावस्कर ने COE का किया बचाव

सुनील गावस्कर ने मिड-डे के अपने कॉलम में लिखा, “बुमराह को भले ही घुटने की चोट लगी है, लेकिन ज्यादातर भारतीय खिलाड़ियों को हैमस्ट्रिंग की समस्या होती है। इससे साफ लगता है कि उनकी ट्रेनिंग में कुछ कमी है, जिसकी वजह से बार-बार हैमस्ट्रिंग की चोटें सामने आ रही हैं।” गावस्कर ने कहा, “इन खिलाड़ियों को चोटें तब लगती हैं जब वे भारत के लिए मैच खेल रहे होते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इसका जिम्मेदार BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो को ठहरा दिया जाता है। उन्होंने तथाकथित बायोमैकेनिक्स पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत गेंदबाज को प्रैक्टिस नेट्स में सिर्फ कुछ ही गेंदें डालने की अनुमति होती है। गावस्कर के मुताबिक, ऐसी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”

क्यों लग रही चोटें

पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए लंबे समय तक जिम करने से ज्यादा मैच फिट रहना जरूरी है। उन्होंने बार-बार हो रही चोटों की वजह की गंभीरता से जांच करने की बात कही। गावस्कर ने कहा, “यह समझने की जरूरत है कि खिलाड़ियों को बार-बार चोटें क्यों लग रही हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। सिर्फ जिम में फिट रहना काफी नहीं है, बल्कि मैच के लिए पूरी तरह फिट होना ज्यादा जरूरी है। हालांकि, हो सकता है कि फिटनेस को लेकर मेरी सोच मेरी पीढ़ी के खिलाड़ियों से जुड़ी हो।”

इंग्लैंड के खिलाफ गिल ने जताई थी चिंता

हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत को मिली हार के बाद कप्तान शुभमन गिल ने खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार खिलाड़ियों के चोटिल होने से टीम का संतुलन बिगड़ता है और बार-बार प्लेइंग इलेवन में बदलाव करना टीम के लिए अच्छा नहीं है।

WTC Points Table: ऑस्ट्रेलिया की हार के बाद बदली WTC की तस्वीर, बांग्लादेश को हुआ बड़ा फायदा, जानें भारत का कैसा हाल

कल का मौसम: 17 अगस्त दिल्ली-एनसीआर, UP और उत्तराखंड समेत 8 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, 2 राज्यों में रेड वॉर्निंग

Weather Alert: देश भर में मानसून का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और 17 अगस्त को मौसम का रुख कई राज्यों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 17 अगस्त को देश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश, अंधड़ और आकाशीय बिजली गिरने का बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। विशेष रूप से ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल के लिए मौसम विभाग ने अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए रेड अलर्ट जैसी स्थिति बताई है। वहीं दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई मैदानी व पहाड़ी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

मौसम प्रणालियों के मजबूत होने की वजह से पूर्व से लेकर उत्तर-पश्चिम भारत तक बारिश की गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं। तटीय और समुद्री क्षेत्रों में तूफानी हवाओं के चलने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आम लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में आफत की बारिश, इन 2 राज्यों में रेड कलर वॉर्निंग

मौसम विभाग के अनुसार 17 अगस्त को ओडिशा और गांगेय पश्चिम बंगाल में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इन दोनों राज्यों में मौसम का सबसे उग्र रूप देखने को मिलेगा, जिससे तटीय व निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा देश के 8 प्रमुख राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की ऑरेंज कलर वॉर्निंग जारी की गई है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 17 अगस्त को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की प्रबल संभावना है।

imd

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा समेत इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी मानसूनी बारिश का दौर तेज रहेगा। 17 अगस्त को हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के अलावा पंजाब, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की संभावना है। मैदानी इलाकों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन कई जगहों पर जलभराव की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदी-नालों के उफान पर रहने का खतरा बना हुआ है।

50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बिजली कड़कने की आशंका

बारिश के साथ-साथ 17 अगस्त को कई राज्यों में मेघगर्जन, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली का प्रकोप देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंध्र प्रदेश, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर बिजली गिरने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

इसके अलावा बिहार, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम और तेलंगाना में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अनुमान है। वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, विदर्भ, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

गुजरात, सोमालिया और ओमान तटों पर 65 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों में 17 अगस्त को मौसम काफी खतरनाक बना रहेगा। अरब सागर में गुजरात, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास तथा मध्य-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और दक्षिण-पश्चिम, उत्तर व मध्य-पूर्व अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्रवाती हवाएं चलने के आसार हैं। इनकी गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों को देखते हुए मछुआरों को तटीय क्षेत्रों और गहरे समुद्र में न जाने की हिदायत दी है।

Awarapan 2: ‘इमरान हाशमी को बिना किस करते देखना गैरकानूनी सा लगता है…’, ‘आवारापन 2’ में किसिंग सीन न होने पर फैंस ने दिए मजेदार रिएक्शन

Awarapan 2: इमरान हाशमी इन दिनों बहुत खुश हैं, क्योंकि उनकी 2007 की फ़िल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल बॉक्स ऑफ़िस पर हिट साबित हो रहा है। एक्टर की इस नई फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों, दोनों से ही काफी अच्छे रिव्यूज मिले हैं और कई दर्शक तो ओरिजिनल फ़िल्म से जुड़ी पुरानी यादों को भी पसंद कर रहे हैं। हालांकि, फैन्स ने ‘आवारापन 2’ में एक बात पर ध्यान दिया कि इसमें इमरान का कोई किसिंग सीन नहीं है।

‘सब लोग मर्डर वाले इमरान हाशमी को ढूंढ रहे थे’

अपने करियर के शुरुआती सालों में ‘सीरियल किसर’ के रूप में मशहूर इमरान फिल्मों में इंटीमेट सीन और जोशीले रोमांस के लिए जाने जाते थे। हालांकि, प्रशंसकों ने गौर किया कि इमरान की नई फिल्म में कोई किसिंग सीन नहीं है और इस पर कई लोगों ने मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ प्रशंसकों ने तो मजाक में यह भी कहा कि वे फिल्म में ‘पुराने’ इमरान हाशमी को ढूंढ रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा था, “उम्र हो गई है वो वाला इमरान हाशमी अब नहीं रहा।” एक अन्य दर्शक ने लिखा, “सब यहां इस सीन में मर्डर वाले इमरान हाशमी को ढूंढ रहे हैं।” एक और कमेंट में लिखा था, “इमरान हाशमी को बिना किसिंग सीन के देखना गैरकानूनी सा लगता है।” एक और कमेंट में लिखा था, “इमरान भाई, दिशा को किस कर लो ना, आलिया देख तो नहीं रही है ना। Awarapan2।”

एक और कमेंट में लिखा था, “मैंने अपनी मम्मी से कहा था कि हमें कुछ और देखना चाहिए क्योंकि इमरान हाशमी इस फिल्म में हैं। पता चला कि इसमें एक भी नॉर्मल किस सीन नहीं था, और कहानी तो वाकई बहुत अच्छी थी।”

‘उन्होंने खुद इसे कम किया और इससे दूर हो गए’

हालांकि, हर किसी ने किसिंग सीन न होने को नकारात्मक रूप से नहीं देखा। कुछ फैंस ने इस बात की सराहना की कि इमरान अपने करियर की शुरुआत में बनी अपनी छवि से आगे बढ़ चुके हैं। एक सोशल मीडिया यूज़र ने कमेंट कहा, “वह शादीशुदा हैं। उन्होंने खुद इसे कम किया और कामुक फिल्मों से दूर हो गए। कम से कम इसकी तो सराहना करें।” एक अन्य दर्शक ने बस इतना लिखा, “अच्छा है कि कोई किसिंग सीन नहीं है।”

अपनी इमेज बदलने पर इमरान हाशमी

एक पुरानी बातचीत में, इमरान ने ‘सीरियल किसर’ वाली इमेज से बाहर निकलने और इस बात पर चर्चा की कि कैसे यह आज भी उनके करियर से जुड़ी एक अहम बात बनी हुई है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “होता यह है कि जब आपकी इमेज इतनी मज़बूत हो जाती है – खासकर भारत जैसे बहुत रूढ़िवादी समाज में – तो लोग उसे ही पकड़े रहते हैं। जैसे, अगर आप कुछ दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोगों को देखें, तो वहां भी किस (kiss) को लेकर सवाल उठ ही गया। लेकिन भारत ऐसा ही है। लोग अभी भी उसी चीज़ में उलझे रहते हैं। आपको बस आगे बढ़कर खेलना होगा और अपनी वर्सटैलिटी (अलग-अलग तरह के रोल करने की काबिलियत) दिखाने के लिए कुछ करना होगा। बस बाहर निकलिए और जो काम आप कर रहे हैं, उसमें हिम्मत दिखाइए।”

पिछले कुछ सालों में, इमरान ने सोच-समझकर अलग-अलग तरह की फ़िल्मों और किरदारों में काम किया है, जिनमें ‘हक़’, ‘ग्राउंड ज़ीरो’, ‘चेहरे’, ‘सेल्फ़ी’ और दूसरी फ़िल्में शामिल हैं। ‘आवारापन 2’, 2007 की फ़िल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल है। इसमें इमरान हाशमी, दिशा पाटनी और शबाना आज़मी हैं और इसे नितिन कक्कड़ ने डायरेक्ट किया है। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर हिट रही है। अब तक भारत में इसकी कुल नेट कमाई ₹67.46 करोड़ रही है।

Q1 Results: डिफेंस कंपनी का मुनाफा 466% उछला, रेवेन्यू भी लगभग दोगुना; शेयरों पर रहेगी नजर

PTC Industries Q1 Results: लखनऊ की डिफेंस और इंजीनियरिंग कंपनी PTC Industries ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर पांच गुने से ज्यादा बढ़कर ₹29.19 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹5.16 करोड़ था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी 97.4% बढ़कर ₹191.80 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹97.15 करोड़ था।

EBITDA में 180% की छलांग

PTC Industries का EBITDA 180% बढ़कर ₹54.21 करोड़ हो गया। पिछले साल जून तिमाही में यह ₹19.35 करोड़ था। हालांकि, कंपनी के कुल खर्च भी 62.6% बढ़कर ₹160.37 करोड़ हो गए।

मार्च तिमाही की तुलना में कंपनी का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा। नेट प्रॉफिट 51.3% घटा, जबकि रेवेन्यू में करीब 15% की गिरावट आई। हालांकि, कुल खर्च पिछली तिमाही के मुकाबले 2.8% कम रहे।

डिफेंस ऑर्डर से मिला सहारा

Q1 नतीजों से पहले कंपनी को जुलाई में कानपुर की गन फैक्ट्री से दो बड़े आर्टिलरी गन कंपोनेंट्स के डेवलपमेंट ऑर्डर मिले थे। इससे डिफेंस कारोबार में कंपनी की पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है।

PTC Industries का कारोबार

PTC Industries डिफेंस, ऑयल एंड गैस, LNG, शिपिंग और एयरोस्पेस जैसे अहम सेक्टरों के लिए हाई-परफॉर्मेंस मेटल कास्टिंग और इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स बनाती है। कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल क्रिटिकल और सुपर-क्रिटिकल एप्लिकेशन में होता है।

शेयरों का हाल

नतीजों से पहले शुक्रवार को PTC Industries का शेयर 0.35% की गिरावट के साथ ₹19,100 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में स्टॉक 8.66% चढ़ा है। वहीं, एक साल में इसने करीब 39% और तीन साल में करीब 247% का रिटर्न दिया है।

Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Yash: ‘मेरी वाइफ भी बोल्ड सीन से खुश नहीं पर उन्हें मुझ पर भरोसा…,’ पत्नि राधिका पंडित को लेकर बोले यश

Yash: यश ने अपनी आने वाली फिल्म ‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups’ में इंटीमेट सीन पर अपनी पत्नी, एक्ट्रेस राधिका पंडित के रिएक्शन के बारे में बात की। एक्टर ने माना कि ऐसे सीन किसी भी पार्टनर को असहज कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि राधिका समझती हैं कि वह एक एक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं और उन पर भरोसा करती हैं।

यह बात तब सामने आई जब ‘Toxic’ के ट्रेलर में यश और दूसरे एक्टर्स के बोल्ड और इंटीमेट सीन ने लोगों का ध्यान खींचा। ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा से बात करते हुए, यश ने बताया कि स्क्रीन पर उन सीन को देखकर उनकी पत्नी को कैसा लग सकता है।

‘टॉक्सिक’ के इंटीमेट सीन पर राधिका पंडित के रिएक्शन के बारे में यश ने कहा कि वह यह दिखावा नहीं करेंगे कि उनकी पत्नी उन्हें बोल्ड सीन में देखकर पूरी तरह सहज होंगी। “मुझे लगता है कि कोई भी पार्टनर असहज महसूस करेगा। मैं झूठ नहीं बोलना चाहता। हर पार्टनर को ऐसा लगता है, लेकिन आखिर में हमें यह समझना होगा कि यह एक कला है, एक क्राफ्ट है, और इसके ज़रिए हम जो हासिल करना चाहते हैं, वह बहुत ज़रूरी है।

कुछ चीज़ें लोग इसलिए करते हैं क्योंकि वे उनमें विश्वास करते हैं, कुछ चीज़ें इसलिए करते हैं क्योंकि वे उनके बारे में जानते हैं, और कुछ चीज़ें इसलिए करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे सीख सके और उन्हें रेफरेंस के तौर पर इस्तेमाल कर सके। इसलिए, कुछ चीज़ों को रिकॉर्ड करना ज़रूरी होता है और मुझे लगता है कि यह कहानी महत्वपूर्ण है।”

‘वह खुश नहीं होंगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह नाराज हैं’

यश ने यह भी बताया कि इंटीमेट सीन और रोमांटिक पलों को करने के लिए उन्हें अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना पड़ा। उन्होंने कहा कि ये सीन ज़रूरी थे क्योंकि ये कहानी का अहम हिस्सा थे। “मैं भी अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकला हूं। मेरे लिए ये चीज़ें करना आसान नहीं है। लेकिन कहानी की यही मांग है और यह कहानी का एक अहम पहलू है, इसलिए ज़ाहिर है कि वह खुश नहीं होंगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह नाराज़ हैं या कुछ और, क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि वह भी एक एक्टर हैं, वह समझती हैं कि यह एक काम है। जब मैं वहां परफॉर्म कर रहा होता हूं, तो एक एक्टर के तौर पर कर रहा होता हूं, न कि उनके पति के तौर पर।”

‘Toxic’ के इंटीमेट सीन की चर्चा क्यों हो रही है?

‘Toxic’ के ट्रेलर ने अपने मैच्योर और इंटीमेट सीन की वजह से लोगों का ध्यान खींचा है, और फ़ैन्स फ़िल्म में यश की फीमेल एक्टर्स के साथ केमिस्ट्री पर बात कर रहे हैं। फ़िल्म में कई फीमेल एक्टर्स हैं, जिनमें कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत शामिल हैं। रिलीज़ से पहले ही ये इंटीमेट सीन फ़िल्म के बारे में चर्चा का विषय बन गए हैं।

Sunny Deol: ‘मेरा जमीर नहीं मानता…’, पान-मसाला के एड ठुकराने पर बोले सनी देओल

Sunny Deol: सनी देओल ने साफ कर दिया है कि पान मसाला के विज्ञापन करना एक ऐसी कैटेगरी है जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है। एक्टर का कहना है कि उन्हें ऐसे ऑफर मिले हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा उन्हें ठुकरा दिया है क्योंकि इस तरह के प्रोडक्ट का प्रमोशन करना उनकी अपनी सोच और मान्यताओं के खिलाफ है।

शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट पर बात करते हुए, सनी ने ब्रांड एंडोर्समेंट को लेकर अपने नजरिए के बारे में बताया और यह भी बताया कि क्यों कुछ बहुत फ़ायदेमंद ऑफ़र भी उन्हें पसंद नहीं आते। सनी देओल का कहना है कि वह कभी भी पान मसाला का विज्ञापन नहीं करेंगे।

जब उनसे खास तौर पर पान मसाला के विज्ञापनों से दूर रहने के बारे में पूछा गया, तो सनी ने कहा कि भविष्य में भी उनके इस रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, “मैं पान मसाला के विज्ञापन नहीं करता और न ही कभी करूंगा। मैं ऐसी कोई चीज़ नहीं करूंगा। ऑफ़र तो आते हैं, लेकिन मैं नहीं करूंगा। मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता जिसमें मेरा विश्वास न हो।”

एक्टर ने आगे कहा कि वह पान मसाला को प्रमोट करने लायक चीज़ नहीं मानते, जिससे ऐसे विज्ञापनों को लेकर उनका रुख बिल्कुल साफ़ हो गया है। सनी ने कहा, “मैं इन सब चीज़ों को नहीं मानता। मुझे नहीं लगता कि इसे बढ़ावा देना कोई अच्छी बात है।” एक्टर के मुताबिक, इसी सोच ने उनके कई दूसरे प्रोफेशनल फैसलों पर भी असर डाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई काम हैं जिन्हें उन्होंने सिर्फ़ इसलिए करने से मना कर दिया क्योंकि उनका ज़मीर उन्हें इसकी इजाजत नहीं देता था।

उन्होंने आगे कहा, “मैं कई काम इसलिए नहीं करता क्योंकि मेरा ज़मीर उन्हें मंज़ूरी नहीं देता, और जो काम करने होते हैं, उन्हें मैं कर लेता हूं।”बातचीत इस बात पर भी हुई कि एडवरटाइज़िंग की दुनिया में सनी कम ही नज़र आते हैं। जहां उनके साथ के कई कलाकार बड़े ब्रांड कैंपेन में लगातार दिखते हैं, वहीं सनी ने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि एडवरटाइज़र्स ने उनसे उतनी बार संपर्क क्यों नहीं किया।

उन्होंने कहा, “अगर मैं भारत का प्रतिनिधित्व करता हूं और बाकी चीज़ों का भी प्रतिनिधित्व करता हूं, तो भी किसी तरह ऐड मेरे पास नहीं आते। वे मेरे पास क्यों नहीं आते? मुझे कोई अंदाज़ा नहीं है।”सनी ने इस स्थिति की तुलना उस दौर से की जब उन्हें फ़िल्मों के ऑफ़र नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा, “जैसे पहले फ़िल्में नहीं मिल रही थीं, वैसे ही विज्ञापनों के मामले में मुझे कुछ पता नहीं है।”

उनकी यह बात ऐसे समय में आई है जब बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ के पान मसाला से जुड़े ब्रांड्स का प्रचार करने को लेकर फिर से चर्चा हो रही है। महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल ही में शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ को ‘विमल इलायची’ के विज्ञापन में दिखने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

फ़िल्मों की बात करें तो सनी अभी ‘बंटवारा 1947’ में नज़र आ रहे हैं। इसके अलावा, एक्टर नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में भी काम करने वाले हैं, जिसमें वे भगवान हनुमान का किरदार निभाएंगे।

VIDEO: ओडिशा के अस्पताल में फ्री इलाज कराकर गदगद हुआ अमेरिकी पर्यटक फिर बताया कि US में कितने होते खर्च

भारत में सस्ता और आसानी से मिलने वाला इलाज एक विदेशी नागरिक को काफी पसंद आया। ओडिशा के एक गांव में बीमार पड़ने पर एक विदेशी को सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज मिला। इस अनुभव से वह काफी प्रभावित हुआ। उसने बताया कि अमेरिका में इसी इलाज के लिए उसे हजारों डॉलर खर्च करने पड़ सकते थे, जबकि भारत में उसका इलाज बिना किसी फीस के हो गया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में माइक ने भारत यात्रा के दौरान अपने अनुभव के बारे में बताया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि, ओडिशा से गुजरते समय ट्रिप के पांचवें दिन उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। वीडियो में उन्होंने बताया कि ज्यादा खाना खाने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें गांव के एक अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ा। वीडियो पर लिखा था, “ग्रामीण भारत में अमेरिकन हॉस्पिटलाइज्ड।”

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो की शुरुआत में माइक ने उस गांव के सरकारी अस्पताल के अंदर के दृश्य दिखाए, जहां उन्हें भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा, “हां, मैं एक गांव के सरकारी अस्पताल में भर्ती था, जहां मुझे सुइयां लगाई जा रही थीं और दीवारों पर लिखी भाषा भी मैं समझ नहीं पा रहा था।” उन्होंने आगे कहा, “अब आप सोच रहे होंगे कि मैं आखिर यहां कैसे पहुंच गया?” इसके बाद माइक ने बताया कि अस्पताल ले जाने से पहले करीब 12 घंटे तक उन्हें हर 15 मिनट में उल्टी हो रही थी।

क्यों खराब हुई तबीयत

माइक ने स्थानीय खाने के कुछ वीडियो भी दिखाए और स्पष्ट किया कि उनकी तबीयत फूड पॉइजनिंग की वजह से खराब नहीं हुई थी, बल्कि उन्होंने जरूरत से ज्यादा खाना खा लिया था। उन्होंने कहा, “रुको, रुको, रुको, मैं समझ सकता हूं कि आप क्या सोच रहे हैं। नहीं, यह फूड पॉइजनिंग नहीं थी। खाना इतना स्वादिष्ट था कि मैंने जरूरत से ज्यादा खा लिया और फिर मुझे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।”

अस्पताल ने नहीं लिया कोई पैसा

माइक ने मजाकिया अंदाज में बताया कि इलाज के दौरान उन्हें एक नहीं, बल्कि दो इंजेक्शन तक लगवाने पड़े। उन्होंने कहा कि अब उनकी तबीयत पहले से बेहतर है, लेकिन इलाज के बाद आने वाले मेडिकल बिल को लेकर उन्हें चिंता होने लगी थी। माइक ने कहा, “हालात जितने भी खराब थे, लेकिन मेडिकल बिल के बारे में सोचकर ही मैं डर गया था।” लेकिन उनको हैरानी तब हुई जब अस्पताल ने इलाज के लिए उनसे कोई पैसा नहीं लिया।

अमेरिका हेल्थकेयर से की तुलना

भारत और अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना करते हुए माइक ने मजाकिया अंदाज में कहा, “अमेरिका में एक IV बैग, उल्टी रोकने की दवा और दो इंजेक्शन का खर्च आसानी से हजारों डॉलर तक पहुंच सकता है। लेकिन यहां मुझे इलाज के लिए एक भी पैसा नहीं देना पड़ा। यह देखकर मैं हैरान रह गया।” माइक के गांव के सरकारी अस्पताल में हुए इलाज के अनुभव की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हुई।

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कहा, “यहां इलाज मुफ्त है। हां, दवाइयों के लिए थोड़ा खर्च करना पड़ सकता है, लेकिन यह रकम ज्यादा से ज्यादा 2 से 3 डॉलर के आसपास होगी।”एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यह गर्व की बात है कि कोई विदेशी ओडिशा के सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा की तारीफ कर रहा है। अमेरिका में इसी तरह के इलाज के लिए हजारों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं और कई बार अपॉइंटमेंट के लिए भी कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।” एक अन्य यूजर ने कहा, “पहले अपने शरीर को यहां के मसालों और खाने का आदी बनाइए, उसके बाद ही ज्यादा खाना खाइए। उम्मीद है कि आप जल्द ही पूरी तरह ठीक महसूस करेंगे।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)