Daily Voice: मौजूदा भाव पर नए न्यू एज स्टॉक्स लग रहे महंगे, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,रियल्टी और डिफेंस शेयरों को लेकर भी रहें सतर्क

Daily Voice : मार्केट कंसोलिडेशन के इस दौर में अनुशासित और लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के लिए निवेश का अच्छा मौका है। इस समय अच्छे भाव पर मिल रहे बेहतरीन ग्रोथ वाले शेयरों में पैसा लगाया जा सकता है। इस समय न्यू एज स्टाक्स काफी महंगे दिख रहे हैं। ऐसे में इनमें अभी पैसा डालना बेहतर विकल्प नहीं होगा। हालांकि,आगे कई सालों में इनमें अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। ये बातें ओमनीसाइंस कैपिटल (OmniScience Capital) के अश्विनी शामी ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं। यहां हम आपके लिए इसी बातचीत का संपादित अंश पेश कर रहे हैं।

उन्होंने बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए आगे कहा कि निवेशकों को इस सेक्टर में बहुत सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। रिस्क-रिवॉर्ड के नजरिए से न्यू एज कंपनियों में उन्हें प्योर-प्ले ई-कॉमर्स,क्विक कॉमर्स और हार्डवेयर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के बजाय चुनिंदा फिनटेक कंपनियां ज्यादा पसंद हैं।

अश्विनी शामी मौजूदा मार्केट कंसोलिडेशन के दौर को अनुशासित और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छे मौके के तौर पर देखते हैं। ऐसे निवेशकों के लिए इस समय अच्छे भाव पर उपलब्ध बेहतरीन ग्रोथ वाले शेयरों में निवेश का अच्छा मौका नजर आ रहा है।

उनका यह भी मानना ​​है कि साल की दूसरी छमाही (H2)में अर्निंग में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इसके साथ ही FPI निवेश भी बढ़ता दिखेगा। इससे मार्केट को अच्छा सपोर्ट मिल सकता है।

क्या आपको उम्मीद है कि सितंबर तिमाही के बाद से 15 प्रतिशत से ज्यादा अर्निंग ग्रोथ वाली निफ्टी 500 कंपनियों का संख्या और बढ़ेगी?

हालांकि कच्चे तेल और कमोडिटी की ऊंची कीमतें उन सेक्टर के मार्जिन पर दबाव डालती हैं जहां इनपुट लागत अधिक होती है,लेकिन BFSI,हेल्थकेयर,कंज्यूमर और बिनेस सर्विसे जैसे एसेट-लाइट सेक्टर में अर्निंग ग्रोथ मजबूत बनी रहने और उसमें सुधार होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कैपिटल गुड्स,इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सर्विस (जिसमें बड़े बैंक भी शामिल हैं) सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी,बढ़ती मांग और ऑपरेटिंग लेवरेज के मिले-जुले असर के चलते अर्निंग में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

क्या आपको लगता है कि बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने वाले मिड और स्मॉलकैप शेयरों का बढ़ा भाव अब सही लेवल पर आ गया है?

निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स लगभग 30 गुना और 34 गुना के ट्रेलिंग प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं, इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि छोटे-मझोले शेयरों के वैल्यूएशन काफी कम हुए है। इसके विपरीत 20 गुना P/E मल्टीपल के आसपास ट्रेड कर रहे निफ्टी 100 इंडेक्स में अच्छे भाव वाले शेयरों में निवेश के ज्यादा अच्छे मौके हैं।

हालांकि कुछ खास मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेक्टर में अर्निंग ग्रोथ, बेंचमार्क से ज्यादा बनी हुई है,लेकिन तेजी से बढ़ने वाले इन अधिकांश सेक्टर में वैल्यूएशन अभी भी बहुत ज्यादा हैं।

क्या आपको मौजूदा भाव पर नए जमाने के स्टॉक्स (new-age stocks) अच्छे लगते हैं?

कुल मिलाकर कहें तो मौजूदा स्तरों पर नए जमाने के स्टॉक्स निवेश के लिए बहुत अच्छे विकल्प नहीं है। अगले कई सालों के अच्छे ग्रोथ आउटलुक के बावजूद इनका वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है। निवेशकों को इस सेक्टर में बहुत सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। रिस्क-रिवॉर्ड के नजरिए से न्यू एज कंपनियों में उन्हें प्योर-प्ले ई-कॉमर्स,क्विक कॉमर्स और हार्डवेयर टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के बजाय चुनिंदा फिनटेक कंपनियां ज्यादा पसंद हैं।

क्या आपको लगता है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से होने वाले फायदे को देखते हुए ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयरों में और तेजी आ सकती है?

FTA और EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) की ओर होने वाले बदलाव से फायदा उठाने वाली ऑटो एंसिलरी कंपनियों के शेयर ज्यादातर अपने सही कीमत पर या कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा महंगे (overvalued) बिक रहे हैं,जिससे इनमें और तेजी की गुंजाइश कम है। EV पावरट्रेन,इलेक्ट्रिकल असेंबली और खास तरह कलपुर्जे (precision components) बनाने वाली और तेज ग्रोथ वाली सप्लायर कंपनियां 35x–70x P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रही हैं, जिनमें आने वाले कई सालों के कामकाज का असर पहले ही शामिल हो चुका है।

इस सेक्टर में निवेश करते समय ऑटो सेक्टर के उतार-चढ़ाव,पश्चिमी OEMs के वॉल्यूम ग्रोथ ट्रेंड्स और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना जरूरी है,क्योंकि इन सभी का असर इनकी अर्निंग ग्रोथ पर पड़ सकता है।

Market Technicals: 24400 के नीचे बने रहने तक निफ्टी में जारी रहेगा कंसोलीडेशन, 58000 के ऊपर जाने पर ही बैंक निफ्टी में आएगी तेजी

आप किन तीन सेक्टर को लेकर सबसे ज़्यादा सतर्क हैं?

इस समय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,रियल्टी और प्योर-प्ले डिफेंस(साथ ही कुछ खास हाई-मल्टीपल हेल्थकेयर सेगमेंट)को लेकर सतर्क हैं,क्योंकि इनमें कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा ओवरवैल्यूएशन है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन का क्या होता है, कौन भरता है? घर खरीदने से पहले बैंक लोन और EMI से जुड़े ये नियम जान लीजिए

तलाक के जरिए दो लोग कानूनी तौर पर अपनी शादी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन के साथ किया गया आपका जॉइंट फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट भी खुद ब खुद खत्म नहीं हो जाता। अक्सर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं। जब शादी टूटती है तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि संपत्ति का बंटवारा होते ही लोन की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बैंक के साथ साइन किए गए लोन एग्रीमेंट की शर्तें तब तक लागू रहती हैं जब तक कि बकाया कर्ज पूरी तरह चुकता न हो जाए या बैंक औपचारिक रूप से बदलाव के लिए सहमत न हो जाए। सिर्फ तलाक की डिग्री लोन कॉन्ट्रैक्ट को नहीं बदलती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बॉरोअर्स को सलाह देता है कि वे अपने होम लोन के नियमों और शर्तों को ध्यानपूर्वक समझें और उन्हें लिखित रूप में अपने पास रखें

क्या तलाक के बाद भी दोनों को भरनी होगी EMI?

जॉइंट होम लोन के मामले में दोनों कर्जदारों को कभी भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि जो जीवनसाथी घर में रह रहा है या जिसे संपत्ति मिल रही है, वह ऑटोमेटिकली पूरी ईएमआई के लिए जिम्मेदार हो जाएगा। अगर मूल एग्रीमेंट के तहत दोनों व्यक्ति को-बॉकोअर्स हैं तो बैंक दोनों को समान रूप से जिम्मेदार ठहरा सकता है।

अगर कोई एक पक्ष ईएमआई देना बंद कर देता है तो बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए दूसरे पक्ष पर दबाव बना सकता है। ऐसा वो तब भी कर सकता है चाहे उनके बीच तलाक के समझौते में कुछ भी तय हुआ हो। इसलिए सेपरेशन की स्थिति में भी जरूरी है कि आप कानून और बैंक एक्सपर्ट की मदद से इससे जुड़े नियमों को समझ लें।

संपत्ति का मालिकाना हक और लोन की जिम्मेदारी में अंतर

संपत्ति का मालिकाना हक और होम लोन का दायित्व दो अलग-अलग विषय हैं। सिर्फ इस बात से कि आपने को-बॉरोअर के रूप में साइन किए हैं, ये साबित नहीं होता कि प्रॉपर्टी में आपका आधा या बराबर का हिस्सा है। इसी तरह प्रॉपर्टी में स्वामित्व का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि आप ही एकमात्र मालिक हैं और लोन के लिए सिर्फ आप ही देनदार हैं। तलाक के निपटारे के दौरान इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग और गहराई से देखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई कानूनी या फाइनेंशियल डिस्प्यूट न पैदा हो।

जॉइंट होम लोन से बाहर निकलने के तीन मुख्य विकल्प

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन को निपटाने के लिए आमतौर पर तीन तरह के व्यावहारिक रास्ते अपनाए जाते हैं-

एक जीवनसाथी द्वारा लोन का पूरा टेकओवर: एक आम समाधान यह है कि एक पक्ष संपत्ति अपने पास रखे और पूरी EMI भरे। इसके लिए बैंक की औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है। बैंक दूसरे कर्जदार का नाम हटाने या लोन को रीस्ट्रक्चर करने से पहले बाकी जीवनसाथी की आय, क्रेडिट प्रोफाइल और पुनर्भुगतान क्षमता का रीवैल्यूएशन करता है। जब तक यह औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक निजी समझौते से कोई भी पक्ष लोन से मुक्त नहीं होता।

संपत्ति बेचकर लोन चुकता करना: दूसरा विकल्प यह है कि संपत्ति को बेच दिया जाए और मिलने वाले पैसे से बैंक का पूरा बकाया लोन चुकता कर दिया जाए। अगर घर लोन की राशि से अधिक कीमत पर बिकता है तो बची हुई शेष रकम को दोनों पक्ष अपने मालिकाना हक और आपसी समझौते के आधार पर बांट सकते हैं। लेकिन अगर बिक्री मूल्य लोन राशि से कम है, तो पहले उस घाटे की भरपाई दोनों को मिलकर करनी होगी।

संयुक्त स्वामित्व जारी रखना: कुछ मामलों में विशेष रूप से जहां बच्चों का भविष्य जुड़ा होता है, पूर्व पति-पत्नी कुछ समय के लिए संपत्ति को संयुक्त रूप से बनाए रखने का निर्णय ले सकते हैं। यह व्यवस्था तभी काम कर सकती है जब ईएमआई भुगतान, घर का रखरखाव, प्रॉपर्टी टैक्स, रहने का अधिकार और भविष्य में बिक्री या हस्तांतरण से जुड़े नियम लिखित में स्पष्ट हों।

तलाक के सेटलमेंट में इन बातों का रखें ध्यान

तलाक के समझौते में सिर्फ प्रॉपर्टी का उल्लेख करने के बजाय होम लोन का स्पष्ट और खास रूप से विवरण होना चाहिए। दस्तावेज में यह साफ लिखा होना चाहिए कि घर में कौन रहेगा, ईएमआई का भुगतान कौन करेगा, संपत्ति में किसका कितना हिस्सा है और भविष्य में घर बेचने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

व्यावहारिक तरीका यह है कि सबसे पहले बैंक से नवीनतम लोन स्टेटमेंट लें, संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेजों की जांच करें, बैंक के साथ अपनी योजना पर चर्चा करें और फिर सहमति से बने फैसले को अपने तलाक के कानूनी समझौते में शामिल करें। जब भी किसी सह-कर्जदार का नाम लोन से हटाया जाए या लोन बंद किया जाए, तो बैंक से इसका लिखित प्रमाण पत्र जरूर ले लें।

Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 31 अगस्त को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट और अच्छे ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। सेंसेक्स आज 331 अंक या 0.43 फीसदी बढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 85 अंक या 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ। चौतरफा खरीदारी के दम पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में भी तेजी आई। BSE 150 मिडकैप 0.16% चढ़ा,जबकि 250 स्मॉलकैप में 0.33% की बढ़त हुई।

बाजार की इस तेजी की मुख्य वजह चुनिंदा IT और बैंकिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में आई जोरदार खरीदारी रही। सेंसेक्स की बढ़त में इन्फोसिस और HDFC बैंक का सबसे बड़ा योगदान रहा। हालांकि,ICICI बैंक ने इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव डाला।

TCS,इन्फोसिस,टेक महिंद्रा,HCL टेक और टाइटन सेंसेक्स की सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं। दूसरी ओर ICICI बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट,एशियन पेंट्स और ITC इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कंपनियां रहीं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि IT शेयरों में जबरदस्त तेजी की वजह से आज भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। इस सेक्टर को Nvidia की शानदार कमाई और बेहतर आउटलुक से सहारा मिला। इससे AI से जुड़े निवेश के जारी रहने को लेकर भरोसा बढ़ा और एंटरप्राइज़ AI डिप्लॉयमेंट और वर्कफ़्लो इंटीग्रेशन से जुड़ी कंपनियों को फायदा हुआ। हालांकि,निवेशकों की भागीदारी चुनिंदा शेयरों में रही क्योंकि बाजार जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेड चेयर की टिप्पणियों पर नजरें बनाए हुए हैं। इससे US में ब्याज दरों के आउटलुक और ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति के बारे में ज्यादा साफ जानकारी मिल सकती है।

घरेलू स्तर पर, Q1FY27 के नतीजों का दौर काफी हद तक अच्छे नतीजों के साथ खत्म हो रहा है,इसलिए अब बाजार का फोकस धीरे-धीरे बदलती ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों के बीच अर्निंग ग्रोथ पर रहेगा।

हालांकि घरेलू लिक्विडिटी की अच्छी स्थिति बाजार को स्थिरता दे रही है,लेकिन वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता के विषय हैं,जिससे निवेशक ग्रोथ और कॉर्पोरेट मुनाफे से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क हैं।

ओमनीसाइंस कैपिटल के प्रेसिडेंट और चीफ पोर्टफोलियो मैनेजर,अश्विनी शमी ने कहा कि अमेरिका में 10 ईयर ट्रेजरी यील्ड के 4.6%–4.7% के 1-साल के हाई के करीब रहने के बावजूद,हाल के हफ्तों में FII का निवेश थोड़ा पॉजिटिव रहा है। हालांकि US में रिस्क-फ्री रेट्स बढ़ने से आमतौर पर उभरते बाजारों में निवेश पर असर पड़ता है। लेकिन निवेश में यह बढ़ोतरी 2 साल से ज्यादा समय तक बाजार के कंसोलिडेशन के बाद भारतीय इक्विटी की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाती है। घरेलू रिटेल और DII का मजबूत निवेश बाजार में गिरावट को संभालने में मदद कर रहा है।

बेंचमार्क इंडेक्स एक दायरे में बने हुए हैं। लार्ज-कैप निफ्टी 100 (~20x P/E) की तुलना में स्मॉल और मिड-कैप इंडेक्स (~34x और 30x P/E) का वैल्यूएशन प्रीमियम काफी ज्यादा है,जो अच्छे बॉटम-अप मौके देता है। निकट भविष्य में बाजार का फोकस दूसरी छमाही (H2) की अर्निंग, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और RBI के लिक्विडिटी रुख पर रहने की उम्मीद है। अच्छे वैल्यूएशन के कारण BFSI और फाइनेंशियल सर्विसेज के चुनिंदा शेयरों निवेश के मौके हैं। साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर,पावर और बिजनेस सर्विसेज में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं, जिन्हें कैपेक्स (capex) में सुधार और ऑपरेटिंग लेवरेज से फायदा मिल रहा है।

PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि लगातार दो सेशन में गिरावट के बाद आज भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। IT शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले लेकिन पॉजिटिव संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर करते दिखे। हालांकि,कच्चे तेल की ऊंची कीमतों,US बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के पॉलिसी आउटलुक को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड सतर्क बना हुआ है।

कल मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान दिखी भारी उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल को लेकर और सतर्क कर दिया।

आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP,रिसर्च,अजीत मिश्रा ने कहा कि आज शुक्रवार को बाजार में सुस्ती रही और मिले-जुले संकेतों के बीच मामूली बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ। सपाट शुरुआत के बाद,निफ्टी पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में घूमता रहा और आखिर में 0.35% की बढ़त के साथ 24,175.65 पर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स 0.43% ऊपर 77,264.51 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nvidia के शानदार तिमाही नतीजों और रेवेन्यू के अच्छे आउटलुक के बाद ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी के दम पर IT सेक्टर सबसे आगे रहा। फार्मा और मेटल सेक्टर भी बढ़त के साथ बंद हुए,जबकि FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी सुस्ती रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है।

ग्लोबल बाजार से मिले-जुले संकेतों और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। अब सबकी नजरें जैक्सन होल सिम्पोजियम में फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के बयान पर टिकी हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ्टी के लिए 24,100-24,000 के जोन के आसपास की खींचतान बनी हुई है। अगर यह लेवल टूटता है और गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स 23,800–23,650 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 24,200 का लेवल तत्काल रुकावट का काम कर सकता है और उसके बाद 24,300–24,400 का जोन अहम रेजिस्टेंस लेवल होगा।

मौजूदा अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ट्रेडरों को सलाह है कि इंडेक्स को लेकर सतर्क रुख अपनाएं और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करें। निवेशकों को मज़बूत शेयरों और सेक्टर को प्राथमिकता देनी चाहिए और साथ ही रिस्क और पोजीशन मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

 

 

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सेंसेक्स की मंथली एक्सपायरी के दिन कैसी होगी बाजार की चाल, जानें ग्लोबल बाजार और गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है संकेत

Gift Nifty Indicator: गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सुस्त शुरुआत करने की संभावना है, क्योंकि GIFT Nifty फ्लैट या नेगेटिव शुरुआत का संकेत दे रहा है। Nvidia के अच्छे आउटलुक ने पूरे एशिया में टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर शेयरों को बढ़ावा दिया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट से भारतीय शेयरों को सहारा मिल रहा है। हालांकि, उम्मीद से ज़्यादा US महंगाई के आंकड़ों और जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क रह सकते हैं।

सुबह करीब 7:40 बजे GIFT Nifty 30 अंक या 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,366 पर ट्रेड कर रहा था। बुधवार को भारतीय शेयर पिछले सेशन की बढ़त को बनाए नहीं रख पाए और Nifty दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुआ। Sensex 183.15 अंक या 0.24 प्रतिशत गिरकर 77,472.94 पर आ गया, जबकि Nifty 126.80 अंक या 0.52 प्रतिशत गिरकर 24,207.75 पर बंद हुआ।

Nvidia के आउटलुक से एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों में उछाल

Nvidia द्वारा बिक्री का अच्छा आउटलुक जारी करने के बाद एशियाई शेयरों में बढ़त हुई। इससे उन चिंताओं में कमी आई कि AI से जुड़े कैपिटल खर्च में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है। हाल के हफ़्तों में AI पर खर्च के पैमाने और उससे मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंताओं के कारण इस सेक्टर में ज़बरदस्त बिकवाली हुई थी, ऐसे में यह अच्छा आउटलुक वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकता है।

MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें सेमीकंडक्टर शेयरों ने बढ़त का नेतृत्व किया। दक्षिण कोरिया के Kospi में 1.1 प्रतिशत की बढ़त हुई, जिसे SK Hynix और Samsung Electronics जैसे शेयरों का सहारा मिला, जबकि जापान के Topix में 0.9 प्रतिशत की बढ़त हुई। Nvidia के शेयरों में US में एक्सटेंडेड ट्रेडिंग के दौरान 4.7 प्रतिशत का उछाल आया, क्योंकि इसके आउटलुक ने बिक्री में लगातार मज़बूत बढ़ोतरी का संकेत दिया। इस घोषणा के बाद Nasdaq 100 फ्यूचर्स में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़त हुई, हालांकि बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई, जबकि S&P 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत ऊपर थे।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट

Nvidia पर सकारात्मक प्रतिक्रिया तब आई जब बुधवार को रेगुलर ट्रेडिंग में अमेरिकी शेयर मामूली गिरावट के साथ बंद हुए थे, क्योंकि उम्मीद से ज़्यादा महंगाई के आंकड़ों ने सेंटीमेंट पर असर डाला था। Dow Jones Industrial Average 0.21 प्रतिशत गिरकर 53,463.88 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.02 प्रतिशत गिरकर 7,675.70 पर और Nasdaq Composite 0.08 प्रतिशत गिरकर 26,130.20 पर बंद हुआ।

महंगाई के आंकड़े अमेरिकी ब्याज दरों और ट्रेजरी यील्ड के आउटलुक पर फोकस बनाए रख सकते हैं। हाल के हफ्तों में, लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें और ज़्यादा बॉन्ड यील्ड ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए, खासकर ज़्यादा वैल्यूएशन वाले टेक्नोलॉजी शेयरों और उभरते बाजारों की एसेट्स के लिए, एक बड़ी चिंता का विषय बन गए हैं।

ब्रेंट में लगातार चौथे दिन गिरावट

कच्चे तेल की गिरती कीमतें भारतीय बाजारों के लिए एक अच्छा संकेत हैं। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.7 प्रतिशत गिरकर $87.24 प्रति बैरल पर आ गए, जिससे लगातार चौथे सेशन में इसमें गिरावट जारी रही। US West Texas Intermediate क्रूड 0.7 प्रतिशत गिरकर $81.67 प्रति बैरल पर आ गया, जो लगातार पांचवां सेशन था जब इसमें गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

Bajaj Broking ने कहा कि निफ्टी 24,000-24,350 की रेंज में रह सकता है, जब तक कि यह 24,360 के ऊपर बंद न हो जाए; इस स्तर के ऊपर जाने (ब्रेकआउट) से रिकवरी 24,550-24,700 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 पर देखा जा रहा है।

बुधवार को बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद इंस्टीट्यूशनल फ्लो सपोर्टिव रहा। विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार दूसरे सेशन में नेट बायर रहे और उन्होंने 26 अगस्त को 502 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर खरीदे। घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने कहीं ज़्यादा खरीदारी की और शेयरों में 6,425 करोड़ रुपये का निवेश किया।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

जेपी मॉर्गन ने Nifty 50 के लिए 27000 का टारेगट दिया, भारतीय शेयर बाजार के बुरे दिन खत्म

शेयर बाजार में आने वाली तेजी को लेकर क्या आपके मन में संदेह है? अगर हां तो आपको जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट पर गौर करने की जरूरत है। जेपी मॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का टारगेट बताया है। उसका मानना है कि वैल्यूएशन में इम्प्रूवमेंट है। साध ही घरेलू इकोनॉमी से जु़ड़े बेहतर डेटा की वजह से भारतीय शेयर बाजार फिर से अट्रैक्टिव हो गया है।

भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल रिस्क बरकरार

जेपी मॉर्गन में इंडिया इक्विटी रिसर्च के हेड संजय मोकिम ने ग्लोबल स्थितियों खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि इससे भारतीय शेयर बाजार में तेजी पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारत में विदेशी निवेशकों के निवेश पर भी पड़ सकता है।

घरेलू स्थितियां बाजार में तेजी के लिए अनुकूल

मोकिम ने कहा कि इंडिया की इकोनॉमी की स्थितियां शेयर बाजार के लिए अनुकूल हैं। अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। वैल्यूएशंस खासकर लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। उन्होंने कहा, “भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन सालों के मुकाबले अब बेहतर हैं।” उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भी स्थिति अनुकूल हुई है।

निवेशक फिर से भारतीय बाजार को लेकर उत्साहित

उन्होंने कहा कि नॉर्थ एशियन टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और भारत में लार्जकैप शेयरों की सही वैल्यूएशंस से इनवेस्टर्स एक बार फिर भारत में निवेश को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश तुरंत बढ़ने नहीं जा रहा है। उनका मानना है कि वैश्विक स्थितियों को लेकर ज्यादा चिंता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से डॉलर का विकल्प मिला

मोकिम ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बारे में कहा कि इसके बढ़ने से निवेशकों के पास अपेक्षाकृत सुरक्षित डॉलर एसेट्स का एक विकल्प मिल गया है। उन्होंने कहा, “जब 10 साल के बॉन्ड्स की यील्ड इस लेवल पर हैं तो आपको इमर्जिंग मार्केट्स एसेट्स में निवेश करने की क्या जरूरत है।” उन्होंने भारत में आईपीओ, क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIP) और ब्लॉक डील्स का भी जिक्र किया।

आआईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा

उन्होंने कहा कि आईपीओ, क्यूआईपी और ब्लॉक डील में काफी पैसा जा रहा है। अभी बाजार में नए शेयरों की सप्लाई म्यूचुअल फंड्स में हर महीने होने वाले निवेश के मुकाबले ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इसका असर छोटी अवधि में लिक्विडिटी पर पड़ेगा। लेकिन, मीडियम टर्म में यह अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए मौके बनेंगे।

Cyient Share Price: इन्वेस्टर डे के बाद शेयर 4% उछला, जेपी मॉर्गन ने दिया ₹1,050 का टारगेट

Cyient Share Price: IT सर्विस कंपनी Cyient के शेयरों में 26 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयर में तेजी कंपनी द्वारा’इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के ग्रोथ और मार्जिन से जुड़ी जानकारी और ब्रोकरेज फर्मों ने रिकवरी की रफ्तार को लेकर मिक्स राय के बाद आई है।

Cyient ने कहा कि ग्रोथ को फिर से तेज करना उसकी शॉर्ट टर्म की प्राथमिकता है। कंपनी का लक्ष्य FY28-29 तक सालाना आधार पर डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ और तिमाही-दर-तिमाही स्थिर ग्रोथ हासिल करना है।

शॉर्ट टर्म में, कंपनी का लक्ष्य 15% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है, जबकि मध्यम से लंबी अवधि में उसका लक्ष्य इंडस्ट्री में सबसे अच्छी ग्रोथ के साथ-साथ 16% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है।

कंपनी ने कहा कि उसकी ‘गो-टू-मार्केट’ (GTM) टीम अब बड़े सौदे करने और बिजनेस को प्रोजेक्ट-आधारित काम से हटाकर एन्युइटी-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स की ओर ले जाने के लिए तैयार है, जिनसे रेवेन्यू का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। अभी प्रोजेक्ट-आधारित काम कंपनी के कुल बिजनेस का लगभग 40% है।

मैनेजमेंट ने बताया कि Cyient की ‘लार्ज-डील पाइपलाइन’ (बड़े सौदों की संभावित सूची) अभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। इसमें 9 ऐसे सौदे शामिल हैं जिनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू लगभग 300 मिलियन डॉलर है।कंपनी ने FY26 को कई रणनीतिक बदलावों के बाद स्थिरता का साल बताया है और उम्मीद है कि FY27 और FY28 में उसकी नई रणनीति से रिकवरी शुरू होगी।

मार्जिन के मामले में Cyient ने पहले ही प्रगति की है; Q1 FY27 में EBIT मार्जिन बढ़कर 13.2% हो गया, जो पहले लगभग 12.2% था। मैनेजमेंट का लक्ष्य AI-आधारित रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेटिंग कॉस्ट में दक्षता के जरिए मध्यम अवधि में 15% का लक्ष्य हासिल करना है।

JPMorgan के अनुसार, मैनेजमेंट जिन मुख्य पैमानों पर नजर रखेगा, उनमें खास तौर पर बड़े सौदों से ऑर्डर आने में डबल-डिजिट ग्रोथ और मार्जिन का 15% तक बढ़ना शामिल है।

शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय

JPMorgan ने Cyient के लिए ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,050 प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि Cyient की नई रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन स्टॉक की री-रेटिंग के लिए इसे सही ढंग से लागू करना अहम होगा। JPMorgan ने ‘इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के बड़े सौदों पर फोकस, एन्युइटी-आधारित रेवेन्यू की ओर बदलाव और मार्जिन बढ़ाने की योजनाओं को मुख्य सकारात्मक बातें बताया।

इस बीच, मोतीलाल ओसवाल ने Cyient पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग को दोहराया है और इसका प्राइस टारगेट ₹740 रखा है। इसका मतलब है कि मंगलवार की क्लोजिंग कीमत से इसमें लगभग 24% की गिरावट आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वह कंपनी के काम करने के तरीके (एग्जीक्यूशन) के बारे में बेहतर सबूत मिलने का इंतज़ार करेगा, क्योंकि रिकवरी में अभी समय लगेगा और FY27 में ऑर्गेनिक ग्रोथ के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल Cyient के सेमीकंडक्टर से जुड़े मौकों को लेकर पॉजिटिव है, लेकिन उसका कहना है कि इस बिज़नेस को बड़ी वैल्यूएशन देने से पहले वह ‘प्रूफ ऑफ़ कॉन्सेप्ट’ का इंतज़ार करेगा।

इधर Emkay Global ने Cyient पर अपनी ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹900 तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि ऐसा लगता है कि मैनेजमेंट ने कंपनी की ग्रोथ में आने वाली मुख्य रुकावटों को दूर कर लिया है और अब उनके पास सही स्ट्रैटेजी और ज़रूरी साधन मौजूद हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि उसकी राय और रेटिंग में बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपनी योजनाओं को कितनी अच्छी तरह लागू करती है।

Cyient पारंपरिक इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) सर्विसेज़ से हटकर ज़्यादा बड़े ‘लाइफसाइकिल इंजीनियरिंग सर्विसेज़’ मॉडल की ओर बढ़ रही है। कंपनी का अनुमान है कि उसका एड्रेसेबल मार्केट पारंपरिक ER&D के लगभग $80-100 बिलियन के मौके से बढ़कर $2.4-3.2 ट्रिलियन के पूरे इंजीनियरिंग लाइफसाइकिल मौके तक फैल सकता है।

मंगलवार को Cyient के शेयर 4.54% बढ़कर ₹1022.15 पर बंद हुए और पिछले एक महीने में इस स्टॉक में 18% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Indicator: क्रूड में नरमी क्या भारतीय बाजार पर दिखाएगी अपना असर, इंडेक्स में आज किन लेवल पर दें ध्यान

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी गैप-अप शुरुआत का संकेत दे रहा है, कच्चे तेल की गिरती कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर हुई बढ़त ने ग्लोबल माहौल को बेहतर बनाया है। ज़्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी और घरेलू स्तर पर इंस्टीट्यूशनल बाइंग से और सपोर्ट मिल सकता है। लेकिन निवेशक Nvidia की तिमाही नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं, इसलिए वे सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8.10 बजे GIFT निफ्टी 75.00 अंक या 0.31 फीसदी बढ़कर 24,555 पर ट्रेड कर रहा था। घरेलू इक्विटीज़ पॉज़िटिव मोमेंटम के साथ सेशन की शुरुआत कर रही हैं, क्योंकि मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के दिन आखिरी घंटे में हुई खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को रिकवर करने में मदद मिली थी। मंगलवार को सेंसेक्स 286.98 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 115.50 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 24,334.55 पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में ज़्यादातर तेजी

बुधवार को एशियाई इक्विटीज़ में ज़्यादातर तेज़ी देखी गई, जिसे टेक्नोलॉजी स्टॉक्स और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी से सपोर्ट मिला। MSCI के एशिया-पैसिफिक इक्विटीज़ गेज में 0.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। हांगकांग का हैंग सेंग 1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.4 प्रतिशत की बढ़त हुई। जापान का टोपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 भी मामूली रूप से ऊपर थे, हालांकि निक्केई 225 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

बुधवार को भारतीय इक्विटीज़ के लिए कच्चे तेल की कीमतों में और तेज़ गिरावट सबसे अच्छे संकेतों में से एक है, जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट को बेहतर बनाने में मदद की है। शुरुआती एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले सेशन की भारी गिरावट को और बढ़ा रही है। ईरान ने कहा है कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत फिर से शुरू कर दी है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 प्रतिशत गिरकर $86.80 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1.8 प्रतिशत गिरकर $80.87 प्रति बैरल पर आ गया। मंगलवार को दोनों बेंचमार्क में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई थी।

टेक शेयरों में रिकवरी और बॉन्ड यील्ड में कमी से वॉल स्ट्रीट में बढ़त

मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाज़ार बढ़त के साथ बंद हुए। Nvidia के नतीजों से पहले टेक्नोलॉजी शेयरों में रिकवरी देखी गई, जबकि हाल ही में बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के बाद कच्चे तेल और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली। Nasdaq Composite 0.66 प्रतिशत बढ़कर 26,151.30 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और यह 7,677.24 पर बंद हुआ। Dow Jones Industrial Average 0.30 प्रतिशत बढ़कर 53,577.40 पर पहुंच गया।

बॉन्ड यील्ड में कमी ग्लोबल इक्विटी के लिए एक और सकारात्मक संकेत है। इससे पहले, कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी ने वैल्यूएशन पर दबाव डाला था और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह को लेकर चिंताएं पैदा की थीं।

FII और DII की खरीदारी

मंगलवार को इंस्टीट्यूशनल फ्लो (संस्थागत निवेश प्रवाह) सकारात्मक रहा, जिसमें विदेशी और घरेलू दोनों तरह के निवेशक नेट बायर (शुद्ध खरीदार) के तौर पर उभरे। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे सत्र में भी खरीदारी जारी रखी और 1,593 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी नेट बायर रहे और उन्होंने भारतीय शेयरों में 230 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी घरेलू इक्विटी के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बुधवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में तेज़ी के साथ शुरुआत होने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी से रिस्क एसेट्स के लिए माहौल बेहतर हुआ है। ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में नरमी और वॉल स्ट्रीट में रात भर आई रिकवरी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बेहतर माहौल को देखते हुए, GIFT निफ्टी फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में 24,500 के स्तर से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि निफ्टी की पिछली क्लोजिंग 24,334 थी; इससे घरेलू इक्विटी में गैप-अप ओपनिंग का संकेत मिलता है।

बजाज ब्रोकिंग ने कहा कि अगर निफ्टी 24,360 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो यह 24,550-24,700 के स्तर तक जा सकता है, जबकि शॉर्ट-टर्म सपोर्ट 24,000-23,800 के आसपास दिख रहा है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा पॉजिटिव शुरुआत के संकेत, क्रूड में नरमी 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।