वोटर लिस्ट पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-पंजाब समेत 17 राज्यों में होगा SSR

Voter List Revision: वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या उसमें किसी तरह का बदलाव कराने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अहम खबर है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को जारी नोटिस के मुताबिक, इन जगहों पर स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब देशभर में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद चल रहा है।

इस प्रक्रिया के दायरे में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा समेत 17 राज्य शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने इस प्रक्रिया के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय किया है।

इस पुनरीक्षण (रिवीजन) में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल होंगे।

यह अधिसूचना तब आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर एक याचिका पर ECI (चुनाव आयोग), CEC ज्ञानेश कुमार, और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को चुनौती दी गई है।

आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR (स्पेशल समरी रिवीजन) का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

बता दें कि यह याचिका 12 अक्टूबर को गांधी के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के बाद दायर की गई है, जो SIR (विशेष पुनरीक्षण) प्रक्रिया के खिलाफ था।

खड़गे, अखिलेश और तेजस्वी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिका

इस याचिका को गांधी के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता एम.ए. बेबी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता मोहम्मद बशीर, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने दायर किया है।

इसमें SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई है। साथ ही, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने, हटाए गए मतदाताओं का विवरण जारी करने, मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय करने और नाम वापस जोड़ने के लिए एक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।

नेताओं ने वोटर लिस्ट ने संशोधन प्रक्रिया के न्यायिक ऑडिट की भी मांग की और यह भी कहा कि जब तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक सभी राज्यों में यह प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए।

इससे पहले, विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जताने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने के लिए CJI सूर्य कांत से मिलने का समय मांगा था। लेकिन CJI ने इसे अस्वीकार कर दिया और कहा कि ये मुद्दे पहले से ही कोर्ट के सामने लंबित हैं, इसलिए नेता न्यायिक कार्यवाही के जरिए राहत मांग सकते हैं।

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कल का मौसम 16 अक्टूबर: उत्तर-पूर्वी मानसून का असर! इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, दिल्ली-यूपी में थंडरस्टॉर्म

IMD Mausam Update: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई के बाद अब उत्तर-पूर्वी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसके असर से दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक हो गया है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में भी मौसमी प्रणालियों का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक 16 अक्टूबर को दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर चलेगा जबकि दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश समेत कई मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।

आइए जानते हैं कल 16 अक्टूबर को देश के विभिन्न हिस्सों में कैसा रहेगा मौसम का हाल।

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दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून का प्रकोप, मूसलाधार बारिश का अलर्ट

दक्षिण प्रायद्वीप में उत्तर-पूर्वी मानसून के जोर पकड़ने की वजह से बड़े पैमाने पर बारिश की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 अक्टूबर को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल के अलग-अलग हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक और केरल व माहे के अलग अलग जिलों में भी भारी बारिश दर्ज की जाएगी। दक्षिण भारत के इन तटीय और अंदरूनी हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की गति से तेज तूफानी हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली कड़केगी। लक्षद्वीप और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी झमाझम बौछारें पड़ने का अनुमान है जबकि तटीय आंध्र प्रदेश में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गरज-चमक के साथ आंधी का दौर

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में भी मौसमी हलचल बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 16 अक्टूबर को दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बादलों की गरज और बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किमी/घंटे (झोंके 50 किमी/घंटे) की गति से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी कल 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिसा के कुछ हिस्सों में भी छिटपुट स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें गिरने का अनुमान जताया गया है।

मध्य, पूर्वी और पश्चिमी राज्यों का मौसम मिजाज

मध्य और पूर्वी भारत के छत्तीसगढ़, ओडिसा, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में कल बादलों की आवाजाही के साथ-साथ कुछ स्थानों पर गरज-चमक और हल्की बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं। पश्चिम भारत के तटीय इलाकों की बात करें तो कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में कल आकाशीय बिजली चमकने के साथ छिटपुट बौछारें गिरने की संभावना है।

वहीं, कोंकण और गोवा के तटीय क्षेत्रों में नमी और तापमान के बने रहने के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। राहत की बात यह है कि समुद्री इलाकों में स्थितियां नियंत्रण में हैं, जिसके चलते मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए समुद्र में जाने को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

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Weather Tomorrow: अगर आप अगले कुछ दिनों में मौसम में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं, तो देश के कई राज्यों में बारिश दस्तक दे सकती है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 16 से 19 अक्टूबर के बीच कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, मध्य, पूर्वी, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी बारिश देखने को मिल सकती है।

दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम?

दिल्ली-NCR में आने वाले दिनों में हल्की बारिश होने का अनुमान है। इससे मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 16 अक्टूबर को बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कुछ इलाकों में सप्ताह के बाकी दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

उत्तराखंड में कल कैसा रहेगा मौसम?

उत्तराखंड में 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश होने के आसार हैं। कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिर सकती है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

जम्मू-कश्मीर में कल कैसा रहेगा मौसम?

जम्मू-कश्मीर के साथ लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में भी मौसम बदल सकता है। इन इलाकों में कई जगहों पर बारिश होने का अनुमान है। यानी आने वाले दिनों में यहां के लोगों को बारिश का सामना करना पड़ सकता है।

हिमाचल प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम?

हिमाचल प्रदेश में 16 अक्टूबर को कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली भी गिर सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, 17 अक्टूबर को भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम?

राजस्थान के पूर्वी हिस्सों में 16 अक्टूबर को कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। हवा के झोंकों की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम?

मध्य प्रदेश में भी मौसम बदलने के आसार हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 16 अक्टूबर को बारिश हो सकती है। वहीं, पूर्वी मध्य प्रदेश में 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश होने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ में कल कैसा रहेगा मौसम?

छत्तीसगढ़ में 16 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान राज्य के अलग-अलग इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम?

महाराष्ट्र के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक मौसम बदल सकता है। विदर्भ में 17 और 18 अक्टूबर को कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। वहीं, मुंबई और ठाणे में 17 और 18 अक्टूबर को हल्की से मध्यम बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

रत्नागिरी में 16 अक्टूबर को गर्मी का असर देखने को मिल सकता है। कुछ इलाकों में लू जैसी स्थिति भी बन सकती है। हालांकि, दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। 17 अक्टूबर को भी बारिश हो सकती है। वहीं, 18 अक्टूबर को कुछ जगहों पर बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।

सिंधुदुर्ग में 16 अक्टूबर को गर्मी और उमस परेशान कर सकती है। दोपहर या शाम के समय हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। 17 और 18 अक्टूबर को कुछ जगहों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

ओडिशा में कल कैसा रहेगा मौसम?

ओडिशा में 16 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

पश्चिम बंगाल में कल कैसा रहेगा मौसम?

पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों में 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है। वहीं, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी इसी अवधि के दौरान बारिश होने का अनुमान है।

सिक्किम में कल कैसा रहेगा मौसम?

सिक्किम में 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश होने की संभावना है। ऐसे में राज्य के कुछ हिस्सों में मौसम बदल सकता है।

बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम?

बिहार में 16 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान राज्य के अलग-अलग इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कल कैसा रहेगा मौसम?

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में शुरुआत में कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है। इसके बाद 16 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

कल पूर्वोत्तर भारत का मौसम

16 से 18 अक्टूबर के बीच असम में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इसी दौरान मेघालय में भी कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है।

अरुणाचल प्रदेश में 16 से 17 अक्टूबर के बीच बारिश होने के आसार हैं।

16 अक्टूबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। पूरे हफ्ते पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है।

केरल में कल कैसा रहेगा मौसम?

केरल में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, 16 से 18 अक्टूबर के बीच केरल और माहे में कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में भारी बारिश भी हो सकती है।

16 अक्टूबर को गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। शुक्रवार को उत्तरी केरल में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इस दौरान कई इलाकों में तेज बारिश होने के आसार हैं।

केरल में दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व, दोनों मानसून के दौरान बारिश होती है। हालांकि, राज्य की सालाना बारिश में उत्तर-पूर्व मानसून का योगदान अपेक्षाकृत कम रहता है। उत्तर-पूर्व मानसून आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर तक सक्रिय रहता है। तमिलनाडु और दक्षिण भारत के आसपास के इलाकों के लिए यह मानसून काफी अहम है।

तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम?

तमिलनाडु के साथ पुडुचेरी और कराईकल में भी 16 से 18 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 16 अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई है। वहीं, 16 से 18 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।

कर्नाटक में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के बीच कई जगहों पर बारिश होने की संभावना है। वहीं, तटीय और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 16 अक्टूबर को कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 17 और 18 अक्टूबर को कई जगहों पर बारिश का दौर तेज होने का अनुमान है।

उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं, तटीय कर्नाटक में 17 और 18 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका है। राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।

दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के बीच हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। कुछ जगहों पर हवा के तेज झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

आंध्र प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम?

तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 16 अक्टूबर को कुछ जगहों पर बारिश होने की संभावना है। इस दौरान तेज सतही हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, 16 और 17 अक्टूबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश होने का अनुमान है।

कल तेलंगाना का मौसम

16 से 18 अक्टूबर के बीच तेलंगाना में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी गति 50 किमी प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है।

कल रायलसीमा का मौसम

16 अक्टूबर को रायलसीमा में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है।

अगले कुछ दिनों के लिए IMD का ताजा पूर्वानुमान

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, 16 से 19 अक्टूबर के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है, जबकि मध्य, पूर्वी, उत्तरी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश होने की संभावना है।

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IMD Weather Forecast: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 अक्टूबर को दिल्ली के कई इलाकों में बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश भी हो सकती है। बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने बताया है कि दिन के दौरान हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

जबकि झोंकों के साथ हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। दिल्ली में सुबह से दोपहर के बीच मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके बाद शाम से रात के दौरान भी कई स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक का एक और दौर आने की संभावना है।

‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी

राजधानी दिल्ली में गुरुवार सुबह हल्की बारिश हुई। इसके बाद आसमान में काले बादल छाए रहे। IMD ने दिन में हल्की से मध्यम बारिश होने, बादल गरजने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका के मद्देनजर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। आईएमडी ने कहा कि शहर के कई हिस्सों में दिन में बारिश होने की संभावना है और इस दौरान बिजली चमकने और रुक-रुककर तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। दिल्ली में न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के औसत तापमान से 3.7 डिग्री अधिक है। मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया है, जिससे दिन के तापमान में गिरावट आने की संभावना है।

आईएमडी ने ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए कहा कि गुरुवार दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक या आकाशीय बिजली गिरने तथा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दिन में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने का भी पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के मुताबिक, बारिश और तेज हवाओं का असर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग हो सकता है। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि राजधानी के सभी इलाकों में एक जैसी बारिश हो।

दिल्ली-NCR में तापमान का क्या है हाल?

दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। जबकि न्यूनतम तापमान में करीब 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सफदरजंग मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इससे साफ है कि रात के तापमान में अभी भी गर्माहट बनी हुई है। हालांकि, दिन के अधिकतम तापमान में कुछ स्थानों पर सामान्य से कम स्तर दर्ज किया गया।

दिल्ली में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश दर्ज नहीं की गई। मौसम केंद्र सफदरजंग के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 8:30 बजे तक 24 घंटे में बारिश शून्य मिलीमीटर रही। ऐसे में 15 अक्टूबर को होने वाली संभावित बारिश से मौसम में अस्थायी बदलाव देखने को मिल सकता है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार रहा। वहीं, आने वाले दिनों में बारिश की संभावना के बाद मौसम शुष्क होने और तापमान में फिर बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

16 अक्टूबर को भी बारिश के आसार

दिल्ली में 16 अक्टूबर को भी मौसम पूरी तरह साफ रहने की संभावना नहीं है। IMD के मुताबिक, आसमान में सामान्य तौर पर बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। सुबह जल्दी से दोपहर तक गरज-चमक और बिजली के साथ बारिश का एक दौर आने की संभावना है। इस दिन अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। इसका मतलब है कि 15 और 16 अक्टूबर को दिल्ली में बादल, बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। इसके बाद मौसम के शुष्क होने का अनुमान है।

17 अक्टूबर से साफ होने लगेगा मौसम

17 अक्टूबर को दिल्ली में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 18 अक्टूबर से मौसम मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है। इस दिन अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 19 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन भी आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और बारिश नहीं होने की संभावना है।

20 और 21 अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 20 अक्टूबर को भी दिल्ली में बारिश की संभावना नहीं है। आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। 21 अक्टूबर को भी मुख्य रूप से साफ आसमान रहने का अनुमान है।

इस दिन अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। इस तरह, 15 और 16 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की संभावना के बाद 17 से 21 अक्टूबर के बीच मौसम के अधिकतर शुष्क रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान भी धीरे-धीरे 32 से 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

तापमान को लेकर मौसम विभाग का क्या अनुमान?

IMD के मुताबिक, अगले दो दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। इसके बाद अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका अर्थ है कि बारिश के कारण शुरुआती दिनों में दिन के तापमान में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन सप्ताह के अगले हिस्से में धूप निकलने के साथ गर्मी फिर महसूस हो सकती है।

पश्चिमी विक्षोभ का मौसम पर असर

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ जम्मू-कश्मीर और उससे सटे उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर भी ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। एक अन्य ट्रफ उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश से पूर्व-मध्य अरब सागर तक फैला हुआ है, जो पूर्वी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ऊपर से गुजर रहा है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बादलों और बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

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रांची में 150 एकड़ में आकार ले रहा विशाल रिम्स-2, 2800 बेड और सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं से होगा लैस! पढ़ाई और इलाज दोनों मिलेगा

झारखंड की राजस्थानी रांची के नगरी स्थित 150 एकड़ जमीन में रिम्स 2 का निर्माण काफी तेजी से हो रहा है। रिम्स 2 एक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होगा, जिसमें 2800 से अधिक बेड होंगे। इसके निर्माण में 4186 करोड़ की लागत आएगी। रिम्स के पीआरओ राजीव रंजन बताते हैं, इसमें प्रत्येक वर्ष एमबीबीएस की 200 सीटों पर नामांकन होगा, जिसे 250 यूजी सीटों, 200 पीजी सीटों और 200 सुपर स्पेशलाइजेशन सीटों तक बढ़ाया जा सकेगा।

पढ़ाई के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं

राजीव रंजन बताते हैं, राज्य के छात्रों को अब मेडिकल की प्रैक्टिस या पढ़ाई के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। यह मेडिकल कॉलेज प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों और सर्जनों और मेडिकल साइंटिस्टों की शिक्षा, मेडिकल रिसर्च और मरीजों की देखभाल के लिए एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलाजी के इस्तेमाल में लीडरशिप देने का काम करेगी।

एशियन डेवलपमेंट बैंक करेगा सहयोग

रिम्स 2 के निर्माण के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक सहयोग करेगा। निर्माण प्रक्रिया पूरे तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में एशियन डेवलपमेंट बैंक के साथ राज्य सरकार के फंड का इस्तेमाल होगा। पहले चरण में डॉक्टर और छात्रों के रहने के लिए आवास, एकेडमिक बिल्डिंग व मुख्य अस्पताल परिसर का निर्माण होगा।

5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

इसे बनने में पूरे 5 साल का समय लगने वाला है। जमीन चिन्हित कर और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीसीएल) को सौंपी है, जिसके द्वारा इस संस्थान के डिजाइन तैयार करने व निर्माण सहित पांच वर्ष के इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर आमंत्रित जैसे अहम काम जल्द निपटे जाएंगे।

सारी हाईटेक सुविधाओं से लैस होगा अस्पताल

राजीव रंजन बताते हैं, अस्पताल पूरा हाईटेक सुविधाओं के साथ लैस होगा। लोगों की सुविधा व सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। खासतौर पर भवन में लिफ्ट्स फायर फाइटिंग सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, न्यूमेटिक ट्यूब सिस्टम, न्यूमेटिक वेस्ट और लांड्री कलेक्शन सिस्टम, आटोमेटेड फार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, आटोमेटेड वर्टिकल स्टोरेज रिट्रीवल सिस्टम, नर्स कॉल सिस्टम, हैंगर सिस्टम और भी कई सारे सुविधाएं देखने को मिलेगी।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

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कल का मौसम 15 अक्टूबर: दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा में मूसलाधार बारिश संग ओलावृष्टि का अलर्ट! उत्तर से दक्षिण तक बिगड़ेगा मौसम

IMD Weather Update: देश भर के मौसम में एक साथ कई मौसमी प्रणालियों के बेहद सक्रिय होने से बड़ा और उग्र बदलाव आने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा गुरुवार 15 अक्टूबर के लिए जारी किए गए मौसम बुलेटिन के मुताबिक 15 अक्टूबर को देश के उत्तरी मैदानी इलाकों से लेकर सुदूर दक्षिणी राज्यों तक मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु और केरल में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

इसके अलावा, उत्तर भारत के छह बड़े राज्यों में गर्जना के साथ ओलावृष्टि होने की गंभीर आशंका जताई गई है। उत्तर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण में दस्तक दे रहे उत्तर-पूर्वी मानसून के एक साथ असर में आने से देश के बड़े हिस्से में मौसमी तबाही का खतरा बन रहा है।

दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और यूपी में ओलावृष्टि व भारी बारिश का अलर्ट

उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी राज्यों में सक्रिय मौसमी सिस्टम अपने चरम पर रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में पृथक स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर तेज बादलों की गड़गड़ाहट के साथ ओलावृष्टि होने की भी पूरी संभावना है।

इन मैदानी और पहाड़ी राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (झोंके 60 किमी/घंटे) की स्पीड से विनाशकारी तूफानी हवाएं चलेंगी। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी आकाशीय बिजली चमकने और बारिश का सिलसिला बना रहेगा।

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक, तमिलनाडु और केरल में बहुत भारी बारिश

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून का औपचारिक आगमन हो चुका है। इसके चलते दक्षिणी राज्यों में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है। मौसम विभाग ने 15 अक्टूबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी एवं कराइकल और केरल एवं माहे के अलग अलग जिलों में भारी से बहुत भारी मूसलाधार बारिश होने की बड़ी चेतावनी जारी की है।

इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश होगी। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और तटीय इलाकों में 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली कड़ेगी। आंध्र प्रदेश के मैदानी इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी, जबकि तेलंगाना और कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में भी झोंकेदार हवाओं के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।

मध्य और पूर्वी भारत का मौसम हाल

मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में भी चक्रवाती परिसंचरण का असर दिखाई देगा। छत्तीसगढ़, ओडिशा, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग अलग इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और बादलों की गर्जना के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। दूसरी ओर पश्चिम भारत के कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में आकाशीय बिजली चमकने के साथ छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं।

तटीय इलाकों में उमस भरी गर्मी का अहसास

पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ तटीय इलाकों में नमी और तापमान के बने रहने से लोगों को चिपचिपी गर्मी परेशान करेगी। मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक तटीय कर्नाटक और कोंकण, गोवा के तटीय क्षेत्रों में मौसम काफी गर्म और उमस भरा बना रहेगा। हालांकि तटीय क्षेत्रों में तूफानी हवाओं के बावजूद समुद्र के भीतर स्थितियां फिलहाल नियंत्रण में हैं। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए समुद्र में न जाने संबंधी कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, “यह चुप रहने का समय नहीं है।” मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि कुछ US डोनर्स दुनियाभर के रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘वे उस देश से अमेरिका में पढ़े किसी व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली उन ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने 2023 में मोदी के दौरे पर राष्ट्रगान गाया था मैरी मिलबेन अमेरिकी सिंगर और एक्ट्रेस हैं। भारत में उन्हें 2022 में देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर पहचान मिली थी। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया था। इस दौरान उन्होंने मोदी के पैर भी छुए थे, जिसके बाद भारत में उनकी काफी चर्चा हुई। अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2023 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की जीत को मोदी की लोकप्रियता से जोड़ा। मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी।

इंतजार की नसीहत, पर कीमत किसे चुकानी?

मजूदूर, नौजवान, वोट अधिकार के लिए लडता व्यक्ति तीनों नागरिक हैं। तीनों व्यवस्था से जवाब मांग रहे हैं। मगर व्यवस्था के पास समय ही समय है। वह विचार करती रह सकती है, फाइल चला सकती है, समिति बना सकती है, जांच बैठा सकती है। तब तक नागरिक के हाथ से अवसर निकल चुका होता है। एक तरफ प्रक्रिया पर अधिकार रखने वाली सत्ता है। दूसरी तरफ इंतजार की कीमत चुकाता नागरिक।… सड़क सत्ता को सुनने के लिए मजबूर कर सकती है। मगर सुनना, मानना और लागू करना तीन अलग-अलग बातें हैं।

जिस मजदूर की मजदूरी रोक दी गई है, उसे मस्टर रोल चाहिए। जिस नौजवान की परीक्षा रद्द हो गई है, उसे न्याय चाहिए, वह भी इससे पहले कि उसकी जिंदगी का एक और साल बर्बाद हो जाए। जिस मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है, उसे मतदान से पहले अपना नाम वापस चाहिए। जाहिर है 2014, 2019 और 2024 चुनाव हो जाने के बाद मिला आश्वासन फिर उसके किस काम का?

तीनों नागरिक हैं। तीनों व्यवस्था से जवाब मांग रहे हैं। मगर व्यवस्था के पास समय ही समय है। वह विचार करती रह सकती है, फाइल चला सकती है, समिति बना सकती है, जांच बैठा सकती है। तब तक नागरिक के हाथ से अवसर निकल चुका होता है। एक तरफ प्रक्रिया पर अधिकार रखने वाली सत्ता है। दूसरी तरफ इंतजार की कीमत चुकाता नागरिक।

नागरिक का समय घंटों में खर्च होता है। पढ़ाई के घंटे, कमाई के घंटे, परिवार की जिम्मेदारियों के घंटे। जबकि संस्थाओं का समय वर्षों में चलता है। उनके बजट सालाना हैं, नियुक्तियां वर्षों की हैं और जवाबदेही की कोई निश्चित घड़ी नहीं है। समय की यह असमानता ही सत्ता का ऐसा अवरोध है जिसे खड़ा करने के लिए पुलिस को बैरिकेड लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।

सत्ता और नागरिक के बीच शिकायत की राजनीति का यह सबसे पुराना सच है। दिल्ली के जंतर मंतर पर 10 अक्टूबर की लामबंदी ने इसी सच को फिर सामने ला दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांग रही है। इससे पहले इसी संगठन के आंदोलन के बाद एक केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। सरकार से समझौता भी हुआ था। मगर उस समझौते की शर्तें कितनी पूरी हुईं, यह सवाल अभी समाप्त नहीं हुआ है।

अब सवाल है कि इस नए आंदोलन की सफलता किससे मापी जाएगी? जंतर मंतर पर कितनी भीड़ जुटी, कितने नारे लगे, किसने इस्तीफा दिया? या इससे कि भीड़ के घर लौट जाने के बाद नागरिकों को वास्तव में क्या अधिकार मिले और उनके इस्तेमाल की क्या गारंटी बनी?

यहीं लोकतंत्र की एक पुरानी पहेली सामने आती है।

फ्रांसीसी विचारक एलेक्सिस द तोकविल ने अपने जीवन के अंतिम सक्रिय वर्षों में फ्रांसीसी क्रांति के इसी विरोधाभास को समझने की कोशिश की थी। जिस क्रांति ने पुरानी राजसत्ता को ध्वस्त करने का संकल्प लिया, उसने उसी सत्ता की प्रशासनिक मशीनरी को क्यों बचाए रखा? कई मामलों में तो उसे और मजबूत क्यों बनाया?

राजा चला गया। मगर राजा के प्रशासन की आदतें नहीं गईं। नए शासकों को नागरिकों पर शासन करने की बनी-बनाई मशीन मिली। वह सुविधाजनक थी। इसलिए उन्होंने उसे बनाए रखा। शासन बदलते हैं, मगर शासन करने का ढंग आसानी से नहीं बदलता। सरकारें मौसम की तरह आती-जाती हैं। प्रशासन जलवायु की तरह बना रहता है।

लोग उस सत्ता के खिलाफ उठ खड़े होते हैं जिसका चेहरा उन्हें दिखाई देता है। मगर जिस व्यवस्था का चेहरा नहीं होता, वह अक्सर आंदोलन के बाद भी बची रहती है। सड़क पर आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ खड़ा होता है। मंत्री, मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयुक्त या प्रधानमंत्री। मगर संस्था अपनी प्रक्रियाओं के सहारे चलती है। प्रक्रिया का कोई चेहरा नहीं होता जिससे इस्तीफा मांगा जा सके।

एक इस्तीफा कुछ सप्ताह या महीनों में हासिल हो सकता है। लेकिन उस अधिकारी के जाने के बाद उसका उत्तराधिकारी भी उसी तरह काम करेगा या नहीं, यह तय करने वाली चीजें दूसरी हैं। सरकारी अनुबंध, रिकॉर्ड, रजिस्टर, अभिरक्षा के दस्तावेज, अपील की व्यवस्था और जवाबदेही के नियम।

इन्हें बदलने में साल लग सकते हैं। और इस काम को आगे बढ़ाने वाले लोग अक्सर वे होते हैं जिनका नाम कभी अखबारों की सुर्खियों में नहीं आता। तोकविल को लोकतंत्र में एक और खतरा दिखाई देता था। बराबरी का अधिकार पा चुके नागरिक अपने निजी जीवन में इतने व्यस्त हो सकते हैं कि सार्वजनिक मामलों की जिम्मेदारी धीरे-धीरे एक विशाल, सुविधाजनक और अभिभावक जैसी सत्ता को सौंप दें। वह सत्ता नागरिकों को सार्वजनिक जीवन की परेशानियों से मुक्त करने का दावा करती है। बदले में नागरिकों को उसके फैसलों पर निर्भर रहना पड़ता है। तोकविल के लिए लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान में नहीं थी। वह नागरिकों की आदतों में थी। खासकर मिलकर संगठन बनाने, हिसाब रखने, सार्वजनिक मामलों में भाग लेने और एक-दूसरे से जवाब मांगने की आदत में।

आज की युवा पीढ़ी रातोंरात लाखों लोगों को एक मंच पर जुटा सकती है। उसने लोकतंत्र का आधा सबक सीख लिया है। बाकी आधा सबक कहीं अधिक कठिन है। वह है आंदोलन के बाद भी संगठित रहना। सरकार के वादों का हिसाब रखना। कानून के मसौदे पढ़ना। संस्थाओं को जवाब देने के लिए बाध्य करना। और ऐसा तंत्र बनाना जिसमें नागरिक को अपने अधिकार के लिए हर बार सड़क पर उतरना न पड़े।

क्या यह संभव है?

भारत के अपने इतिहास में इसके दो उदाहरण हैं। दोनों आंदोलनों ने लंबा संघर्ष किया। दोनों ने सरकारों को अपनी मांग सुनने के लिए मजबूर किया। मगर दोनों के परिणाम एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रहे। पहला उदाहरण राजस्थान का है।

राजस्थान के गांवों में मजदूरों को संदेह था कि उनके नाम पर सरकारी धन निकाला जा रहा है, जबकि उन्हें पूरी मजदूरी नहीं मिल रही। उन्हें जानना था कि सरकारी रिकॉर्ड में किसके नाम कितनी मजदूरी दर्ज है, किस काम पर कितना खर्च हुआ और पैसा किसे मिला। मजदूर किसान शक्ति संगठन, यानी एमकेएसएस, ने मस्टर रोल, बिल और भुगतान के वाउचर सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

फिर जनसुनवाई का तरीका अपनाया गया। सरकारी कागजों में दर्ज हिसाब गांववालों के सामने पढ़ा जाता। लोग बताते कि वास्तव में किसने काम किया था, कितना काम हुआ था और किसे मजदूरी मिली थी। एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड था। दूसरी तरफ गांववालों का अपना अनुभव।

कागज पहली बार प्रशासन की शक्ति के बजाय नागरिक के हाथ में सबूत बनने लगा। यही उस आंदोलन की असली उपलब्धि थी। मजदूर केवल मजदूरी नहीं मांग रहा था। वह सरकार के अपने रिकॉर्ड के आधार पर सरकार को गलत साबित करने का अधिकार मांग रहा था।

अप्रैल 1995 में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने स्थानीय विकास कार्यों के रिकॉर्ड तक पहुंच देने की घोषणा की। मगर घोषणा और अधिकार में फर्क था। एक साल बाद मजदूर किसान शक्ति संगठन ने सरकार पर वादा तोड़ने का आरोप लगाते हुए ब्यावर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। धरना लगभग चालीस दिन चला।

मई में आंदोलन जयपुर पहुंचा तो सरकार ने एक समिति बना दी। दो महीने में निर्णय का आश्वासन भी दिया। समिति बन गई। मांग स्वीकार कर ली गई। मगर अधिकार फिर भी सुनिश्चित नहीं हुआ।

सरकारी समिति आखिर क्या है? इंतजार कराने का एक ऐसा कमरा जिसके दरवाजे पर पीतल की नामपट्टी लगी होती है। राजस्थान का आंदोलन इस कमरे में बंद होकर समाप्त हो सकता था। मगर ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि आंदोलन ने सड़क से आगे जाने का रास्ता खोज लिया था।

ब्यावर के धरने से सूचना के अधिकार के लिए राष्ट्रीय अभियान का विस्तार हुआ। स्थानीय मजदूरों की लड़ाई कानून बनाने की राष्ट्रीय लड़ाई से जुड़ गई। 1996 के अंत तक इस अभियान और न्यायमूर्ति पी. बी. सावंत की अध्यक्षता वाली भारतीय प्रेस परिषद ने सूचना के अधिकार का एक आदर्श विधेयक तैयार कर लिया था।

दिसंबर 2002 में संसद ने सूचना की स्वतंत्रता का कानून पारित किया। मगर उसे लागू ही नहीं किया गया। फिर जुलाई 2004 में राष्ट्रीय अभियान ने नवगठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सामने अपनी सिफारिशें रखीं। लंबी बहस चली। इस पर विवाद हुआ कि नागरिक वास्तव में कौन से दस्तावेज मांग सकेंगे, अधिकारी किस आधार पर जानकारी रोक सकेंगे और सूचना न देने पर क्या कार्रवाई होगी।

आखिर 15 जून 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। ध्यान देने की बात है कि ब्यावर के मूल आंदोलनकारियों को इस पूरे समय सड़क पर बैठे रहने की जरूरत नहीं पड़ी। उनकी मांग अब एक ऐसी प्रक्रिया में बदल चुकी थी जिसे देश का कोई भी नागरिक इस्तेमाल कर सकता था।

कानून ने सूचना मांगने, इनकार के खिलाफ अपील करने और दोषी सूचना अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था दी। केंद्रीय सूचना आयोग के अनुसार अपील में सूचना देने से इनकार का औचित्य साबित करने की जिम्मेदारी अधिकारी की होती है और आयोग के निर्णय बाध्यकारी होते हैं। यानी नागरिक को ऐसा अधिकार मिला जिसे इस्तेमाल करने के लिए हर बार भीड़ जुटाने की जरूरत नहीं थी।

किसी आंदोलन की स्थायी सफलता इसी क्षण शुरू होती है। जब उसकी मांग एक ऐसी व्यवस्था बन जाए जिसका लाभ वे लोग भी उठा सकें जिन्होंने आंदोलन में कभी हिस्सा नहीं लिया। मगर यह सफलता भी पूरी नहीं थी।

सूचना का अधिकार कानून के बीस वर्ष पूरे होने के समय जारी 2024-25 की रिपोर्ट में बताया गया कि देशभर के सूचना आयोगों में लगभग 4.3 लाख अपीलें और शिकायतें लंबित थीं। केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली था और केवल दो आयुक्त काम कर रहे थे।

अधिकार बीस वर्ष तक बचा रहा। मगर समय पर न्याय मिलने की गारंटी आज भी सभी नागरिकों के लिए सुनिश्चित नहीं हो सकी। यानी कानून बन जाने के बाद भी लड़ाई समाप्त नहीं होती। अब दूसरा उदाहरण देखिए।

मणिपुर की इरोम शर्मिला ने सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, यानी अफस्पा, के खिलाफ वर्ष 2000 में अनशन शुरू किया। उनका अनशन अगस्त 2016 तक चला। लगभग सोलह वर्ष। उनका आंदोलन अकेला नहीं था। मणिपुर में 2004 के विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में समिति बनाई। समिति ने 2005 में अफस्पा को समाप्त करने की सिफारिश की। उसका सुझाव था कि कुछ आवश्यक प्रावधान गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम में शामिल किए जा सकते हैं।

समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। 2008 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने दर्ज किया कि सरकार ने उसकी सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं की थी। 2013 में पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सेना इस कानून में किसी भी संशोधन का बहुत कड़ा विरोध कर रही थी। इस कारण सरकार के लिए आगे बढ़ना कठिन था।

एक विश्लेषक के अनुसार समिति की रिपोर्ट आने के बाद पूर्वोत्तर में आंदोलन की तीव्रता भी कम हुई। जब इरोम शर्मिला ने अपना अनशन समाप्त किया, तब भी उनकी मूल मांग पूरी नहीं हुई थी।

यह राजस्थान के सूचना अधिकार आंदोलन जैसी परिस्थितियों वाला संघर्ष नहीं था। यहां सवाल राज्य की सुरक्षा शक्तियों का था। उस संस्था का था जिसके अधिकार स्वयं विवाद का विषय थे और जो उन्हें छोड़ना नहीं चाहती थी। आंदोलन सरकार को सुनने के लिए मजबूर कर सकता था। समिति बनवा सकता था। अपने पक्ष में सरकारी सिफारिश भी हासिल कर सकता था।

मगर कानून नहीं बदलवा सका। यानी लगातार संघर्ष अपने आप सफलता की गारंटी नहीं है। आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में रास्ता भी होना चाहिए। जहां निर्णायक संस्थाएं परिवर्तन रोकने पर अड़ी हों, वहां केवल नैतिक शक्ति और जनसमर्थन पर्याप्त नहीं होते।

राजस्थान में मजदूरों ने सरकारी रिकॉर्ड तक पहुंच हासिल की। मणिपुर में सोलह वर्ष का अनशन भी कानून को नहीं बदल सका। दोनों अनुभव लोकतंत्र की एक कठिन सच्चाई बताते हैं।

सड़क सत्ता को सुनने के लिए मजबूर कर सकती है। मगर सुनना, मानना और लागू करना तीन अलग-अलग बातें हैं।

अब फिर जंतर मंतर पर लौटिए। कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांग रही है। मगर पिछले चार वर्षों में भारत के तीन पड़ोसी देशों में सड़कों ने इससे कहीं अधिक हासिल किया है। एक देश में राष्ट्रपति को भागना पड़ा। दूसरे में प्रधानमंत्री की सत्ता समाप्त हुई। तीसरे में सरकार एक दिन के भीतर गिर गई।

श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल। तीनों देशों में जनता ने सत्ता के शिखर को हिला दिया।

मगर असली सवाल वही है। जिस दिन शासक चला जाता है, उस दिन आंदोलन को वास्तव में क्या हासिल होता है? क्या शासन बदलता है? क्या शासन करने का तरीका बदलता है? क्या प्रशासन बदलता है? क्या नागरिक के अधिकार बदलते हैं? या केवल सत्ता की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति बदल जाता है?

राजस्थान और मणिपुर के अनुभवों के बाद दक्षिण एशिया के इन तीन आंदोलनों को समझना इसलिए जरूरी है।क्योंकि सत्ता गिरा देना और सत्ता को जवाबदेह बना देना एक ही बात नहीं है। (जारी)

भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर केरल के राज्यपाल नियुक्त

राज्यपालों के फेरबदल के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य ओम प्रकाश माथुर को केरल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की जगह लेंगे।

केरल में नियुक्ति से पहले सिक्किम के राज्यपाल रह चुके श्री माथुर का भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लंबा करियर रहा है और उन्होंने राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर कई अहम पदों पर काम किया है। उनके राजनीतिक अनुभव में कई राज्यों में चुनाव प्रबंधन, राज्यसभा में दो कार्यकाल और पार्टी के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष के तौर पर काम करना शामिल है। दो जनवरी 1952 को राजस्थान के पाली जिले के बेडल गांव में जन्मे माथुर ने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक किया।

उन्होंने 1972 में प्रचारक के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) के साथ अपना सफर शुरू किया और 1979 तक राजस्थान के विभिन्न जिलों में काम किया। 1979 से 1989 तक उन्होंने किसान संघ के ‘संगठन मंत्री’ के तौर पर काम किया।

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उनके आधिकारिक प्रोफाइल में यह भी दर्ज है कि आपातकाल के दौरान उन्हें 11 महीने जेल में रहना पड़ा था। इसके बाद श्री माथुर राजस्थान में भाजपा के संगठनात्मक पदों पर आगे बढ़े और 1989 से 2002 तक महासचिव (संगठन) रहे। उन्होंने अखिल भारतीय सचिव और महासचिव समेत राष्ट्रीय स्तर की कई जिम्मेदारियां संभालीं और 1989 से 2024 तक पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में काम किया। उन्हें 2008 में भाजपा राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया और उसी साल वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर संसद पहुंचे। उन्होंने 2008 से 2014 तक अपना पहला कार्यकाल पूरा किया और 2016 से 2022 तक दूसरे कार्यकाल के लिए उच्च सदन में लौटे; इस दौरान वे सदन की समिति के अध्यक्ष भी रहे।

श्री माथुर ने 2015 से 2022 तक भाजपा के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया। वे 2022 से 2024 तक पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी रहे। उनके संगठनात्मक कार्यों में अपने करियर के अलग-अलग समय पर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भाजपा की गतिविधियों और चुनाव अभियानों की देखरेख करना शामिल था। इन जिम्मेदारियों से उन्हें अलग-अलग राज्यों में पार्टी संगठन और चुनावी प्रबंधन का व्यापक अनुभव मिला। उनकी नियुक्ति से केरल लोक भवन में बदलाव हुआ है, क्योंकि राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि दुष्यंत गौतम सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर माथुर की जगह लेंगे।

Pic Credit : UNI

IMD Weather Update: दक्षिण भारत में दस्तक दे रहा पूर्वोत्तर मानसून, 14 से 19 अक्टूबर तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

North-East Monsoon 2026: देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा और मौसमी बदलाव दर्ज किया जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक देश के शेष हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अगले दो दिनों के दौरान इसके पूरी तरह पीछे हटने के साथ ही दक्षिण प्रायद्वीप में पूर्वोत्तर मानसून की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पूर्वोत्तर मानसून के आगमन के साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश का एक लंबा और व्यापक दौर शुरू होने वाला है।

पिछले 24 घंटों के मौसम की बात करें तो तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों में 7 से 11 सेमी तक भारी बारिश हुई है जबकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट जगहों पर ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं।

दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

दक्षिण प्रायद्वीप में मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का जोर काफी बढ़ गया है। श्रीलंका तट के पास दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है जिससे जुड़ी एक ट्रफ रेखा मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैली है। इसके अलावा दक्षिण अंडमान सागर पर भी एक चक्रवाती सिस्टम मौजूद है। इन प्रणालियों के असर से दक्षिण भारत के अलग अलग राज्यों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी बारिश का कड़ा पहरा रहेगाय़ तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान व्यापक बारिश होगी और कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जाएगी।

केरल और माहे में 15 से 19 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 15 से 18 अक्टूबर के दौरान और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 16 से 18 अक्टूबर के बीच भारी बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा रायलसीमा के कुछ हिस्सों में 14 से 18 अक्टूबर तक भारी बारिश का दौर चलेगा। तेलंगाना में भी 17 अक्टूबर को भारी वर्षा का अनुमान है। तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के तटीय इलाकों में 15 से 17 अक्टूबर के दौरान 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और आकाशीय बिजली चमकने की गतिविधियां देखने को मिलेंगी।

उत्तर-पश्चिम भारत और पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ का असर

उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम पर नजर डालें तो उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर पर तथा उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हैं। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान पर भी चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन प्रणालियों के असर से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 13 से 15 अक्टूबर के दौरान व्यापक रूप से बारिश और बर्फबारी होगी।

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 14 और 15 अक्टूबर को झमाझम बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किमी/घंटे की गति से तेज आंधी और ओलावृष्टि होने की चेतावनी जारी की गई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी 13 से 19 अक्टूबर के बीच रुक-रुक कर बारिश और 15 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि व आंधी का दौर रहेगा। राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 14 से 16 अक्टूबर के दौरान छिटपुट बौछारें और तेज हवाएं चल सकती हैं।

मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत का मौसम हाल

मध्य भारत के छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में 13 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जाएगी। पूर्वी भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 13 और 14 अक्टूबर को व्यापक बारिश होगी, जबकि ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के बीच छिटपुट बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 13 से 17 अक्टूबर के दौरान हल्की से मध्यम छिटपुट बारिश का दौर जारी रहेगा। पश्चिम भारत के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 14 से 19 अक्टूबर के दौरान हल्की बारिश के साथ-साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

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