How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

‘3 से 4 साल में चाहिए 1 करोड़…’ जानिए अंकुर वारिकू ने किस ‘कॉस्टली मनी मिस्टेक’ से बचने की दी सलाह

हर कोई चाहता है कि उसकी बचत तेजी से बढ़े और वह जल्द से जल्द आर्थिक रूप से मजबूत बन जाए। कोई अपना घर खरीदने का सपना देखता है, तो कोई करोड़पति बनकर आरामदायक जिंदगी जीना चाहता है। लेकिन जब बड़े वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए समय बहुत कम तय कर लिया जाता है, तो यही उम्मीद चिंता का कारण बन सकती है। उद्यमी और कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू ने हाल ही में एक महिला का ईमेल साझा किया, जो अगले तीन से चार साल में ₹1 करोड़ का फंड तैयार करना चाहती थीं।

खास बात यह है कि महिला के पास पहले से ₹25 लाख की बचत थी और वह कई वर्षों से निवेश भी कर रही थीं। इसके बावजूद उनका लक्ष्य वारिकू को जल्द अमीर बनने की सोच का उदाहरण लगा।

₹25 लाख की बचत के बाद भी क्यों थी करोड़पति बनने की जल्दी?

अंकुर वारिकू ने अपने LinkedIn पोस्ट में बताया कि महिला की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। उनके पास स्थिर नौकरी, अच्छी कमाई और निवेश का अनुभव भी था। वह पहले ही ₹25 लाख का फंड बना चुकी थीं, जिसे वारिकू ने एक अच्छी उपलब्धि बताया।

इसके बाद भी महिला अगले तीन से चार वर्षों में ₹1 करोड़ तक पहुंचना चाहती थीं। वारिकू के मुताबिक, इस तरह की इच्छा काफी आम है, लेकिन कम समय में बहुत बड़ी रकम जुटाने की उम्मीद करना व्यावहारिक सोच नहीं है।

उनकी बात का मकसद बचत के लक्ष्य को गलत बताना नहीं, बल्कि यह समझाना था कि पैसे बढ़ाने की प्रक्रिया में जल्दबाजी करना कई बार निराशा पैदा कर सकता है।

निवेश में कंपाउंडिंग समझना काफी नहीं

वारिकू ने निवेश के एक अहम सिद्धांत कंपाउंडिंग पर भी जोर दिया। इसमें निवेश से मिलने वाला रिटर्न आगे चलकर खुद भी रिटर्न कमाने लगता है। समय के साथ यह प्रक्रिया बचत को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, शुरुआत में इसका असर बहुत धीमा दिखाई दे सकता है। निवेशक नियमित रूप से पैसा लगाते हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक तेजी से बढ़ोतरी नजर नहीं आती। ऐसे में कई लोग अधीर हो जाते हैं और अपने लक्ष्य या निवेश की रणनीति को लेकर परेशान होने लगते हैं।

वारिकू का कहना है कि कंपाउंडिंग को समझना और अपनी बचत पर उसका वास्तविक असर महसूस करना दो अलग-अलग बातें हैं।

युवाओं को क्यों रखना चाहिए लंबी अवधि का नजरिया?

वारिकू के मुताबिक, 20 या 30 की उम्र में निवेश शुरू करने वाले लोगों ने अक्सर अपनी रकम पर 15 से 20 वर्षों तक कंपाउंडिंग का असर नहीं देखा होता। इसलिए उन्हें शुरुआत में यह प्रक्रिया धीमी लग सकती है।

लेकिन लंबी अवधि में नियमित निवेश और समय का संयोजन धन जुटाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर निवेश से निश्चित रिटर्न मिलेगा। बाजार का प्रदर्शन, निवेश की राशि और जोखिम जैसे कारक भी परिणामों को प्रभावित करते हैं।

करोड़पति बनने के लिए सिर्फ बड़ा लक्ष्य नहीं, धैर्य भी जरूरी

इस पूरे मामले से एक अहम सीख मिलती है कि आर्थिक सफलता की योजना बनाते समय लक्ष्य के साथ उसकी समयसीमा भी वास्तविकता के आधार पर तय करनी चाहिए। ₹1 करोड़ का फंड बनाना एक अच्छा वित्तीय लक्ष्य हो सकता है, लेकिन उसे हासिल करने के लिए अपनी आय, मौजूदा बचत, निवेश और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।

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FD Interest Calculator: ₹1 लाख की FD 10 साल बाद कितनी होगी? समझिए ब्याज का पूरा हिसाब

FD Interest Calculator: अगर आपके पास ₹1 लाख की एकमुश्त रकम है और आप इसे 10 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो FD एक विकल्प हो सकता है। खासकर, शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए। हालांकि, FD में सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि ब्याज कैसे जुड़ता है और 10 साल में आपकी रकम कितनी हो सकती है।

मान लीजिए आपको 10 साल की FD पर 7% सालाना ब्याज मिलता है। अगर यह क्युमुलेटिव FD है और ब्याज को FD में ही जुड़ने दिया जाता है, तो कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। इस स्थिति में ₹1 लाख की रकम 10 साल बाद करीब ₹2 लाख हो सकती है।

अलग-अलग ब्याज दर पर कितना पैसा बनेगा?

10 साल की अवधि और तिमाही कंपाउंडिंग मानें, तो अलग-अलग ब्याज दर पर ₹1 लाख की रकम लगभग इतनी हो सकती है:

सालाना ब्याज10 साल बाद रकमकुल ब्याज
6%₹1.81 लाख₹81,400
7%₹1.91 लाख₹90,600
7%₹2.00 लाख₹1.00 लाख
7.50%₹2.10 लाख₹1.10 लाख
8%₹2.21 लाख₹1.21 लाख

इस कैलकुलेशन से पता चलता है कि लंबी अवधि में ब्याज दर का छोटा अंतर भी रकम पर असर डालता है। उदाहरण के लिए, 6% की जगह 8% ब्याज मिलने पर 10 साल बाद रकम करीब ₹39,400 ज्यादा हो सकती है।

कंपाउंडिंग का क्या फायदा है?

क्युमुलेटिव FD में ब्याज नियमित तौर पर आपके खाते में नहीं आता। वह FD में जुड़ता रहता है। इसके बाद अगले चक्र का ब्याज मूल रकम के साथ जुड़ी ब्याज की रकम पर भी मिलता है।

यही कंपाउंडिंग है। लंबी अवधि में इसका असर ज्यादा साफ दिखाई देता है। इसलिए FD चुनते समय सिर्फ शुरुआती ब्याज दर नहीं, बल्कि ब्याज के भुगतान और कंपाउंडिंग के तरीके को भी देखना चाहिए।

हर महीने ब्याज चाहिए तो?

अगर आपका मकसद हर महीने इनकम लेना है, तो मंथली इंटरेस्ट पेआउट वाली FD अलग विकल्प है। इसमें ब्याज नियमित तौर पर आपके बैंक खाते में आ सकता है।

इस स्थिति में ब्याज FD में वापस नहीं जुड़ता। इसलिए 10 साल बाद मिलने वाली मैच्योरिटी रकम क्युमुलेटिव FD से अलग होगी। बदले में आपको निवेश के दौरान नियमित ब्याज मिलता रहेगा।

10 साल की FD करने से पहले ये बातें देखें

लंबी अवधि की FD करते समय ब्याज दर के साथ कुछ दूसरी शर्तें भी देखनी चाहिए। FD क्युमुलेटिव है या मंथली पेआउट वाली, समय से पहले निकालने पर क्या नियम हैं और प्रीमैच्योर क्लोजर पर कितना ब्याज मिलेगा, इन बातों का असर आपके रिटर्न पर पड़ सकता है।

FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। इस पर आपके इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लग सकता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन जल्दी खत्म करके ब्याज का पैसा बचाना चाहते हैं? ये 5 तरीके करेंगे आपकी मदद

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेते समय EMI देखकर लगता है कि हर महीने एक तय रकम जाती रहेगी। और कुछ साल बाद लोन खत्म हो जाएगा। लेकिन अगर ब्याज का बोझ कम करना है और कर्ज जल्दी खत्म करना है, तो छोटी-छोटी प्लानिंग काफी फर्क डाल सकती है।

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 5 साल के लिए लिया है। इस लोन की EMI करीब ₹11,122 होगी। 60 महीने तक यही EMI देने पर कुल भुगतान करीब ₹6.67 लाख होगा। यानी करीब ₹1.67 लाख ब्याज में जाएगा।

1. पार्ट-पेमेंट करके मूलधन घटाएं

पर्सनल लोन जल्दी खत्म करने का सबसे सीधा तरीका पार्ट-पेमेंट है। इसमें आप अपनी नियमित EMI के अलावा एकमुश्त रकम देकर लोन का मूलधन कम करते हैं। मूलधन जितना कम होगा, आगे लगने वाला ब्याज भी उतना ही कम होगा।

इसे ₹5 लाख के उदाहरण से समझें। अगर 12 EMI चुकाने के बाद आप ₹1 लाख का पार्ट-पेमेंट करते हैं, तो उस समय करीब ₹4.22 लाख का मूलधन बाकी रहेगा। ₹1 लाख जमा करने के बाद यह घटकर करीब ₹3.22 लाख रह जाएगा।

2. पार्ट-पेमेंट के बाद EMI समान रखें

पार्ट-पेमेंट के बाद बैंक से यह समझना जरूरी है कि नई EMI और टेन्योर क्या होगा। अगर बैंक आपकी EMI करीब ₹11,122 ही रखता है और टेन्योर कम करता है, तो लोन जल्दी खत्म होगा।

ऊपर के उदाहरण में ₹1 लाख पार्ट-पेमेंट के बाद बाकी रकम करीब 35 महीने में चुक सकती है। यानी 5 साल का पूरा लोन करीब 47 महीने में खत्म हो सकता है। इस स्थिति में कुल ब्याज करीब ₹1.22 लाख रह सकता है, यानी करीब ₹45,000 की ब्याज बचत हो सकती है।

3. बोनस और इंसेंटिव से कर्ज घटाएं

बोनस, इंसेंटिव या किसी दूसरी जगह से मिली एकमुश्त रकम को पूरा खर्च करने के बजाय उसका कुछ हिस्सा लोन के मूलधन में लगाया जा सकता है। इससे लोन की बकाया रकम सीधे कम होती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपको ₹50,000 का बोनस मिलता है और बैंक पार्ट-पेमेंट की अनुमति देता है, तो यह रकम मूलधन घटाने में इस्तेमाल की जा सकती है। लोन जितना शुरुआती दौर में कम होगा, आगे के ब्याज पर उतना ज्यादा असर पड़ सकता है।

4. साल में एक बार अतिरिक्त रकम जमा करें

हर किसी के पास ₹1 लाख जैसी बड़ी रकम एक साथ नहीं होती। ऐसे में साल में एक बार अपनी क्षमता के मुताबिक अतिरिक्त रकम लोन में जमा की जा सकती है।

मान लीजिए ₹5 लाख के लोन की EMI ₹11,122 है। अगर आप साल में एक बार करीब एक EMI जितनी अतिरिक्त रकम पार्ट-पेमेंट के तौर पर जमा करते हैं, तो मूलधन सामान्य EMI की तुलना में तेजी से घटेगा। इससे लोन की अवधि और कुल ब्याज दोनों कम हो सकते हैं।

5. फोरक्लोजर से पहले चार्ज जरूर देखें

लोन जल्दी खत्म करने का मतलब हमेशा यह नहीं है कि तुरंत पूरा बकाया चुकाकर फोरक्लोजर कर दिया जाए। पहले बैंक की शर्तें देखना जरूरी है। कुछ पर्सनल लोन में समय से पहले भुगतान पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज लग सकता है।

मान लीजिए आपके लोन पर ₹40,000 का ब्याज बचना है, लेकिन फोरक्लोजर के लिए बड़ा चार्ज देना पड़ रहा है। ऐसे में पहले दोनों रकम की तुलना करनी चाहिए। साथ ही लोन चुकाने के बाद आपके पास इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है।

ब्याज पर कितनी बचत होगी?

अगर आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 12% ब्याज पर 5 साल के लिए लिया है, तो इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी। पूरा लोन 5 साल तक चलने पर करीब ₹1.67 लाख ब्याज देना पड़ेगा।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने तक EMI चुकाने के बाद ₹1 लाख का पार्ट-पेमेंट कर दिया। इससे आपका बकाया मूलधन करीब ₹4.22 लाख से घटकर ₹3.22 लाख रह जाएगा।

अगर इसके बाद भी आपकी EMI करीब ₹11,122 रहती है, तो लोन करीब 35 महीने में खत्म हो सकता है। यानी पूरा लोन करीब 47 महीने में खत्म हो जाएगा। इस तरह करीब ₹45,000 ब्याज बच सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

FD Monthly Income: ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी कमाई होगी? समझिए ब्याज का पूरा कैलकुलेशन

FD Monthly Income: अगर आपके पास ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है और आप इससे हर महीने एक तय इनकम चाहते हैं, तो FD एक विकल्प हो सकती है। इसमें आपकी मूल रकम बैंक में जमा रहती है और उस पर ब्याज मिलता है।

लेकिन सवाल है कि ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी इनकम होगी? इसका जवाब ब्याज दर पर निर्भर करता है। दर जितनी ज्यादा होगी, हर महीने मिलने वाला ब्याज भी उतना ही ज्यादा होगा।

बैंक FD की ब्याज दरें किस रेंज में हैं?

FD की दरें बैंक और अवधि के हिसाब से बदलती हैं। बड़े बैंकों में कई अवधियों पर ब्याज दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। वहीं कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधि में इससे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं।

उदाहरण के लिए, SBI और HDFC Bank की कुछ FD अवधियों में दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। दूसरी तरफ AU Small Finance Bank और Jana Small Finance Bank जैसी संस्थाओं की कुछ अवधियों में दर 7% से 8% तक पहुंच रही है।

₹10 लाख की FD पर कितनी इनकम?

मान लीजिए आपको 6% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में ₹10 लाख पर सालाना करीब ₹60,000 ब्याज बनेगा। यानी मासिक भुगतान के हिसाब से करीब ₹5,000 की इनकम होगी।

अगर ब्याज दर 7% है, तो सालाना ब्याज ₹70,000 होगा। इस हिसाब से हर महीने करीब ₹5,833 मिलेंगे। वहीं 8% ब्याज पर सालाना ₹80,000 और करीब ₹6,667 महीने की इनकम बनेगी।

FD पर ब्याजसालाना ब्याज
मंथली इनकम

6%₹60,000₹5,000
6.50%₹65,000₹5,417
7%₹70,000₹5,833
7.50%₹75,000₹6,250
8%₹80,000₹6,667

ये आंकड़े ₹10 लाख की रकम पर साधारण सालाना ब्याज के आधार पर हैं। वास्तविक भुगतान बैंक की FD स्कीम और ब्याज भुगतान के विकल्प के मुताबिक अलग हो सकता है।

हर महीने ब्याज चाहिए तो ऐसी FD चुनें

अगर आपका मकसद हर महीने खर्च के लिए रकम लेना है, तो ऐसी FD देखनी होगी जिसमें ब्याज का नियमित भुगतान मिलता हो। बैंक के विकल्प के हिसाब से ब्याज मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना लिया जा सकता है।

वहीं क्युमुलेटिव FD में ब्याज बीच में नहीं मिलता। वह FD की मूल रकम के साथ जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर मिलता है। इसलिए मंथली इनकम के लिए नियमित ब्याज भुगतान वाली FD ज्यादा सही है।

₹10 लाख की मूल रकम का क्या होगा?

अगर आप सिर्फ FD का ब्याज निकालते हैं, तो मूल ₹10 लाख FD में बना रह सकता है। यानी ब्याज को हर महीने इनकम के तौर पर लिया जा सकता है और मूल रकम को मैच्योरिटी तक रखा जा सकता है।

हालांकि, FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक के नियम लागू होते हैं। ऐसे में ब्याज की रकम पर असर पड़ सकता है। इसलिए FD करने से पहले प्रीमैच्योर विड्रॉल की शर्त देखना जरूरी है।

FD के ब्याज पर टैक्स भी लगेगा

FD से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है। इसलिए ₹5,833 या ₹6,667 महीने की रकम को टैक्स के बाद मिलने वाली इनकम नहीं माना जा सकता।

आपकी कुल आय और लागू इनकम टैक्स नियमों के हिसाब से टैक्स देनदारी तय होगी। इसलिए FD चुनते समय ब्याज दर के साथ टैक्स के बाद बचने वाली रकम भी देखनी चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पैसों की जरूरत होने पर FD तोड़ें या FD पर लोन लें? समझिए पूरा कैलकुलेशन

कई बार हमें अचानक से पैसों की जरूरत पड़ जाती है और उस वक्त हमारे पास विकल्प काफी सीमित होते हैं। अब मान लीजिए कि आपको 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई। आपके पास 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। FD पर आपको 7% सालाना ब्याज मिल रहा है। अब आपके सामने दो रास्ते हैं। पहला, FD तोड़कर पैसा निकाल लें। दूसरा, FD को जारी रखते हुए उसके बदले लोन ले लें।

दोनों विकल्पों में पैसा आपके काम आ जाएगा। लेकिन दोनों की लागत अलग होगी। इसलिए फैसला करने से पहले पूरा हिसाब समझना जरूरी है।

FD तोड़ने पर क्या होगा?

अब मान लेते हैं कि आपकी 5 लाख रुपये की FD एक साल की है और ब्याज दर 7% है। अगर FD पूरी अवधि तक चलती है तो एक साल में करीब 35,000 रुपये का ब्याज मिलेगा।

लेकिन आपको 6 महीने बाद 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई और आपने FD तोड़ दी। ऐसी स्थिति में बैंक आम तौर पर FD की मूल ब्याज दर के बजाय उस अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से ब्याज देता है। इसके अलावा बैंक की पॉलिसी के मुताबिक प्रीमैच्योर क्लोजर चार्ज भी लग सकता है।

कितनी पेनल्टी और कितना ब्याज

मिसाल के लिए, एफडी पर 6 महीने की लागू दर 6% है। और बैंक 1% की पेनल्टी लगाता है। ऐसे में प्रभावी ब्याज दर 5% रह जाती है।

5 लाख रुपये पर 6 महीने के लिए 5% की दर से करीब 12,500 रुपये ब्याज मिलेगा। यानी पूरी अवधि की FD से मिलने वाले करीब 35,000 रुपये के मुकाबले ब्याज में करीब 22,500 रुपये का अंतर आ सकता है।

FD पर लोन लेने पर कितना खर्च?

अब दूसरा विकल्प देखते हैं। आपने FD नहीं तोड़ी और बैंक से उसके बदले 3 लाख रुपये का लोन ले लिया। उदाहरण के लिए, बैंक FD की ब्याज दर से 1.5% ज्यादा ब्याज पर लोन देता है। यानी 7% की FD पर लोन की ब्याज दर करीब 8.5% हुई।

अगर 3 लाख रुपये का लोन 6 महीने के लिए लिया जाता है, तो ब्याज करीब 12,750 रुपये बैठेगा। इस दौरान आपकी 5 लाख रुपये की FD चलती रहेगी। यानी उस पर FD का ब्याज भी मिलता रहेगा।

दोनों विकल्पों का हिसाब

FD तोड़ेंFD पर लोन
आपकी जरूरत₹3 लाख₹3 लाख
FD₹5 लाख बंद₹5 लाख जारी
FD ब्याजकरीब ₹12,500करीब ₹17,500
लोन ब्याज—करीब ₹12,750
6 महीने बादFD नहीं रहेगीFD जारी रहेगी
अतिरिक्त फायदा—FD का ब्याज मिलता रहेगा

3 लाख की जरूरत 6 महीने के लिए है तो इस उदाहरण में FD पर लोन लेना सस्ता पड़ रहा है। लेकिन ₹3 लाख का लोन बाद में चुकाना होगा।

FD पर लोन कब बेहतर हो सकता है?

अगर आपको थोड़े समय के लिए पैसों की जरूरत है और कुछ महीनों में रकम वापस आने की उम्मीद है, तो FD पर लोन एक विकल्प हो सकता है।

इसमें आपकी FD बनी रहती है। जरूरत पूरी होने के बाद लोन चुका सकते हैं। FD को समय से पहले तोड़ने से मिलने वाले कम ब्याज का नुकसान भी बच सकता है।

FD कब तोड़ना समझदारी हो सकती है?

अगर आपको लंबे समय के लिए पैसे चाहिए और लोन चुकाने की स्थिति साफ नहीं है, तो सिर्फ FD बचाए रखने के लिए लोन लेना महंगा पड़ सकता है।

ऐसे में FD तोड़ने और लोन की कुल लागत की तुलना करनी चाहिए। खासकर तब, जब लोन की ब्याज दर काफी ज्यादा हो।

फैसला लेने से पहले ये 3 चीजें देखें

सबसे पहले बैंक से पूछें कि आज FD तोड़ने पर आपको हाथ में कितनी रकम मिलेगी। इसके बाद FD पर लोन की ब्याज दर और सभी चार्ज पता करें।

फिर दोनों का कुल खर्च निकालें। अगर कुछ महीनों की जरूरत है और जल्द पैसा वापस आने वाला है, तो FD पर लोन का विकल्प देखा जा सकता है। अगर लंबी अवधि के लिए रकम चाहिए, तो FD तोड़ना और लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना ज्यादा जरूरी है।

EPF Contribution: अक्टूबर से PF के लिए सैलरी कितना ज्यादा पैसा कटेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Salary Management: सैलरी आते ही पैसा खत्म हो जाता है? ये 5 खास फॉर्मूले करेंगे आपकी मदद

Salary Management: हर महीने सैलरी आती है और कुछ ही दिनों में अकाउंट खाली होने लगता है। EMI, किराया, राशन, बच्चों के खर्च, शॉपिंग और बाहर खाने जैसे खर्च मिलकर बजट बिगाड़ देते हैं। महीने के आखिर में बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता।

इससे बचने का एक आसान तरीका है सैलरी को मिलते ही 5 अलग-अलग हिस्सों में बांटना। हर हिस्से का एक तय काम होता है। इससे आपको पहले से पता रहता है कि कितना पैसा खर्च करना है और कितना बचाना है।

सैलरी को 5 हिस्सों में कैसे बांटें

इस फॉर्मूले में सैलरी का 50% जरूरी खर्च के लिए रखा जाता है। 20% निवेश, 10% इमरजेंसी फंड, 10% निजी खर्च और 10% बड़े लक्ष्यों के लिए रखा जा सकता है। इसे तीन 30, 50 और 60 हजार अलग-अलग सैलरी के उदाहरण से समझिए।

खर्च का हिस्सा₹30,000 सैलरी₹50,000 सैलरी₹60,000 सैलरी
जरूरी खर्च के लिए 50%₹15,000₹25,000₹30,000
निवेश के लिए 20%₹6,000₹10,000₹12,000
इमरजेंसी फंड 10%₹3,000₹5,000₹6,000
निजी खर्च 10%₹3,000₹5,000₹6,000
बड़े लक्ष्य के लिए 10%₹3,000₹5,000₹6,000
कुल₹30,000₹50,000₹60,000

यह कोई सख्त नियम नहीं है। आप अपनी सैलरी, EMI और परिवार की जरूरत के हिसाब से इन हिस्सों में बदलाव कर सकते हैं।

1. जरूरी खर्च के लिए 50%

सबसे पहले जरूरी खर्च का हिस्सा अलग करना चाहिए। इसमें घर का किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस और रोजमर्रा की जरूरी चीजें शामिल हो सकती हैं।

अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है तो इस हिस्से में करीब ₹25,000 रखे जा सकते हैं। कोशिश करें कि जरूरी खर्च लगातार इससे ऊपर न जाएं। अगर ऐसा हो रहा है तो बजट में कटौती की गुंजाइश तलाशनी चाहिए।

2. निवेश के लिए 20%

दूसरा हिस्सा भविष्य के लिए है। ₹50,000 की सैलरी में इसका मतलब ₹10,000 हर महीने निवेश करना है।

इस पैसे को आपके लक्ष्य और जोखिम के हिसाब से अलग-अलग निवेश विकल्पों में लगाया जा सकता है। मसलन, लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए SIP, जबकि PPF या VPF जैसे विकल्प भी आपकी जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश सैलरी आने के बाद हो। महीने के आखिर में जो पैसा बचे, उससे निवेश करने की आदत अक्सर काम नहीं करती।

3. इमरजेंसी के लिए 10%

अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग पैसा होना बहुत जरूरी है। इसके लिए सैलरी का 10% अलग रखा जा सकता है। ₹50,000 की सैलरी में यह रकम ₹5,000 महीने होगी। मेडिकल इमरजेंसी, नौकरी जाने या अचानक किसी बड़े जरूरी खर्च के समय ये पैसा काम आ सकता है।

जब तक पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार न हो जाए, इस रकम को दूसरे खर्चों में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

4. निजी खर्च के लिए 10%

बजट बनाने का मतलब यह नहीं है कि हर महीने सिर्फ बिल और निवेश ही किया जाए। घूमने-फिरने, मनोरंजन और अपनी पसंद के खर्च के लिए भी पैसा अलग रखना जरूरी है।

₹50,000 की सैलरी में ₹5,000 इस हिस्से में रखे जा सकते हैं। इससे बाहर खाना, फिल्म, छोटी-मोटी शॉपिंग या घूमने जैसे खर्च किए जा सकते हैं।

इसका फायदा यह है कि आपको हर छोटे खर्च के बाद यह नहीं सोचना पड़ेगा कि बजट बिगड़ गया। बस तय सीमा के अंदर खर्च करना होगा।

5. बड़े लक्ष्यों के लिए 10%

पांचवां हिस्सा उन लक्ष्यों के लिए रखें जिन्हें आप आने वाले कुछ सालों में पूरा करना चाहते हैं। इसमें गाड़ी खरीदना, घर का डाउन पेमेंट, बच्चों की पढ़ाई, शादी या कोई बड़ा पर्सनल गोल शामिल हो सकता है।

₹50,000 की सैलरी में इसके लिए ₹5,000 महीने अलग किए जा सकते हैं। जैसे-जैसे सैलरी बढ़े, इस हिस्से को भी बढ़ाया जा सकता है। इमरजेंसी फंड बनने के बाद उस हिस्से को भी निवेश किया जा सकता है।

फॉर्मूले में अपने हिसाब से करें बदलाव

50:20:10:10:10 का यह फॉर्मूला हर व्यक्ति के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं हो सकता। अगर आपकी EMI ज्यादा है तो जरूरी खर्च का हिस्सा बढ़ सकता है। वहीं, कर्ज कम है और आय ज्यादा है तो निवेश का हिस्सा 20% से ऊपर भी रखा जा सकता है।

आखिर में मकसद सिर्फ सैलरी को 5 हिस्सों में बांटना नहीं है। मकसद यह है कि सैलरी आते ही हर रुपये को एक काम दे दिया जाए, ताकि महीने के अंत में यह सवाल न उठे कि पैसा आखिर गया कहां।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

तेजी से बदल रही है इनवेस्टमेंट की दुनिया, 2034 तक 436 अरब डॉलर का होगा वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट

इंडिया का वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 2034 तक बढ़कर दोगुना तक हो जाने की उम्मीद है। 2025 में यह मार्केट करीब 171 अरब डॉलर का था। इसका मतलब कि इसका आकार 2034 तक 436 अरब डॉलर तक का हो जाएगा। इसकी वजह लोगों की बढ़ती इनकम, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में सेविंग्स का शिफ्ट होना और कैपिटल मार्केट में बढ़ता पार्टिसिपेशन है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।

वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 10% सीएजीआर से बढ़ेगा

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट की ग्रोथ अगले 8 साल में 10.6 फीसदी सीएजीआर रहेगी। इस दौरान इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इंडिविजुअल इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स से हटकर एसेट ऐलोकेशन, डायवर्सिफिकेशन, टैक्सेशन और सक्सेशन प्लानिंग में बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश में परिवारों की दिलचस्पी बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का एयूएम 80 लाख करोड़ पहुंचा

कैपिटल मार्केट्स में लोगों का निवेश बढ़ने में SIP जैसे प्रोडक्ट्स का भी बड़ा हाथ है। बाजार में उपलब्ध कुल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में म्यूचुअल फंड्स की ज्यादा हिस्सेदारी है। एमके वेल्थ के मुताबिक, FY26 में म्यूचुअल फंड्स का तिमाही एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 77.98 लाख करोड़ रुपये रहा। वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के अलावा अब दूसरे लोग भी निवेश कर रहे हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 63 फीसदी

एक अनुमान के मुताबिक, अभी वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी है। एमके वेल्थ का कहना है कि अब अमीर लोगों, फैमिली ऑफिस और इंस्टीट्यूशनल से भी डिमांड आ रही है। इनवेस्टर बेस बढ़ने से बाजार में ज्यादा कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के आने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स पीएमएस, AIF सहित कई प्रोडक्ट्स पर विचार कर रहे हैं। वे डायवर्सिफिकेशन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं लोग

एमके वेल्थ को उम्मीद है कि इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड बढ़ेगा और वेल्थ मैनेजमेंट का जरूरी हिस्सा बन जाएगा। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट्स तक इंडियन इनवेस्टर्स की पहुंच बढ़ रही है। खासकर एचएनआई और फैमिली ऑफिसेज विदेश में निवेश के मौके तलाश रहे हैं। गिफ्ट आईएफएससी विदेश में निवेश के बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है।

15 साल की सिंचना के पास 13.9 लाख रुपये का पोर्टफोलियो, जानें गुल्लक के 10 हजार से कैसे शुरू हुआ निवेश का सफर?

आमतौर पर 15 साल की उम्र में बच्चे स्कूल, दोस्तों और अपनी पसंदीदा चीजों को करने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बेंगलुरु की सिंचना संतोष ने इसी उम्र में एक ऐसी राह चुनी, जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सिंचना की दिलचस्पी बचपन से ही पैसों की बचत और उसके सही इस्तेमाल को समझने में रही है। एक छोटी-सी गुल्लक से शुरू हुई उनकी बचत की आदत धीरे-धीरे वित्तीय समझ और निवेश की जिज्ञासा में बदल गई। आज वो करीब 13.9 लाख रुपये के निवेश पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं।

खास बात ये है कि उनके लिए पैसा सिर्फ बचाने या बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने का माध्यम है। पढ़ाई के साथ वित्तीय दुनिया को समझने और नई चीजें सीखने का उनका यह सफर दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और जिज्ञासा के साथ छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय किए जा सकते हैं।

गुल्लक में जमा किए 10 हजार रुपये

RR नगर स्थित स्वर्गरानी स्कूल की छात्रा सिंचना को बचपन से ही पैसे बचाने की आदत थी। 12 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी गुल्लक में करीब 10,000 रुपये जमा कर लिए थे। लगातार बढ़ती रकम को देखकर उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी बन सकती है। यही अनुभव उनके लिए वित्तीय समझ की पहली सीढ़ी बना।

टेलीस्कोप खरीदने के लिए खुद जुटाए पैसे

सिंचना की ‘मनी जर्नी’ को एक और अहम मोड़ तब मिला, जब उन्हें बचपन में टेलीस्कोप खरीदना था। उनके पिता संतोष कुमार ने उनसे इसकी कीमत का कुछ हिस्सा खुद जुटाने को कहा। सिंचना ने रिश्तेदारों से बात कर 10,000 रुपये जुटाए, जबकि बाकी 2,000 रुपये माता-पिता ने दिए। इस अनुभव से उन्हें पैसे की कीमत और लक्ष्य के लिए बचत करने की अहमियत समझ आई।

YouTube से सीखी निवेश की बारीकियां

निवेश शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को समझने की सलाह दी। इसके बाद सिंचना ने खुद सीखना शुरू किया। उन्होंने YouTube पर पर्सनल फाइनेंस और निवेश से जुड़े वीडियो देखे और Ankur Warikoo, Dave Ramsey, Power of Money, Mint Wealth और Sonia Shenoy जैसे क्रिएटर्स से सीखने की बात कही है। वह छुट्टियों और वीकेंड में इसके लिए समय निकालती थीं।

NISM और SEBI सर्टिफिकेशन भी किए

Moneycontrol से बात करते हुए  सिंचना ने बताया कि उन्होंने आपनी वित्तीय शिक्षा को ऑनलाइन वीडियो तक सीमित नहीं रखा। उनके पास दो NISM और एक SEBI सर्टिफिकेशन हैं। एक NISM परीक्षा में वह पहली कोशिश में सिर्फ एक अंक से चूक गई थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने उसे पास किया।

13.9 लाख का पोर्टफोलियो, माता-पिता की निगरानी

इस साल सिंचना ने निवेश को ज्यादा गंभीरता से शुरू किया। परिवार के अनुसार, कुछ ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों से पैसा निकाला गया, जिनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल रहा था। अब उनका निवेश इक्विटी और म्यूचुअल फंड में है और यह भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ है। करीब सात साल की निवेश अवधि के साथ उनका लक्ष्य भविष्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई का खर्च जुटाना है। निवेश में माता-पिता की निगरानी भी रहती है।

‘GDP’ है सिंचना का निवेश मंत्र

म्यूचुअल फंड को समझने के लिए सिंचना ने ‘GDP’ नाम का अपना फ्रेमवर्क बनाया है Growth, Direct और Passive। वह ग्रोथ पर केंद्रित फंड, कम लागत वाले डायरेक्ट प्लान और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड को अपने निवेश नजरिए का हिस्सा मानती हैं।

अब बच्चों को सिखाएंगी Financial Literacy

सिंचना की रुचि केवल निवेश तक सीमित नहीं है। 14 साल की उम्र में उन्होंने NCERT के सिलेबस पर आधारित ‘ITIHASA – The Royal Game’ नाम का इतिहास कार्ड गेम बनाया और बेंगलुरु के 36 सरकारी हाई स्कूलों में 170 गेम सेट दान किए।

अब वह बच्चों के लिए एक रणनीति-आधारित वित्तीय कार्ड गेम तैयार कर रही हैं। इसमें बजटिंग, बैंकिंग, ब्याज, महंगाई, जोखिम, बीमा, क्रेडिट, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसी बातें खेल के जरिए सिखाई जाएंगी। उनका लक्ष्य भारत के 10 लाख छात्रों तक वित्तीय साक्षरता को अनुभव आधारित तरीके से पहुंचाना है। गुल्लक में जमा 10 हजार रुपये से शुरू हुआ सिंचना का सफर आज निवेश से आगे बढ़कर दूसरों को पैसों की समझ देने की दिशा में पहुंच चुका है।

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