SIP Calculator: हर महीने SIP से ₹5 हजार इनवेस्ट कर सकता हूं, 10 साल में कितना बड़ा फंड बन जाएगा?

पिछले कुछ सालों में सेविंग्स और निवेश को लेकर लोगों की सोच बदली है। खासकर युवा निवेश के पुराने तरीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। वे म्यूचुअल फंड जैसे निवेश के विकल्पों में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसमें सिप का बड़ा हाथ है। सिप के जरिए कोई व्यक्ति हर महीने अपनी क्षमता के हिसाब से म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश कर सकता है। जरूरत पड़ने पर वह अपना पैसा निकाल सकता है।

अच्छे रिटर्न की वजह से सिप में बढ़ रही दिलचस्पी

सिप से निवेश में दिलचस्पी बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इसका रिटर्न है। सिप से लंबी अवधि तक निवेश कर लोगों ने बड़े फंड बनाए हैं। अब तो लोग रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए भी सिप से म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश के बारे में सोचने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में सिप या एकमुश्त निवेश पर तभी अच्छा रिटर्न मिलता है, जब निवेश लंबी अवधि के लिए किया जाए।

हर महीने 5000 रुपये के सिप से तैयार हो सकता है बड़ा फंड

गाजियाबाद के रहने वाले मनोहर लाल एक जूता फैक्ट्री में काम करते हैं। उन्होंने बताया है कि वह हर महीने म्यूचुअल फंड में सिप के जरिए 5000 रुपये का निवेश कर सकते हैं। उनका सवाल है कि अगर वह यह निवेश लगातार 10 साल तक करते हैं तो इससे कितना बड़ा फंड वह बना सकते हैं?

लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड का सालान रिटर्न कम से कम 12%

मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा। एक्सपर्ट ने बताया कि सिप से 10 साल तक लगातार निवेश करने पर काफी बड़ा फंड तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड की स्कीम का सालाना रिटर्न लंबी अवधि में कम से कम 12 फीसदी रहता है। म्यूचुअल फंड की स्कीम के पिछले रिटर्न को देख यह अनुमान लगाया गया है।

5000 रुपये के मंथली सिप से 10 साल में तैयार होगा 11 लाख का फंड

अगर लाल हर महीने 5000 का निवेश सिप से करते हैं तो इसका मतलब है कि वह 10 साल में कुल 6,00,000 रुपये का निवेश करेंगे। अगर इस पर सालाना 12 फीसदी का रिटर्न मान लिया जाए तो उनका पैसा 10 साल में बढ़कर 11,20,179 रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि उनके कुल 6 लाख रुपये के निवेश पर 5,20,179 रुपये का रिटर्न मिलेगा।

सिप अमाउंट हर साल 10 फीसदी बढ़ाने पर तैयार होगा 16 लाख का फंड

अगर वह हर साल निवेश के अमाउंट में 10 फीसदी इजाफा करते हैं तो उनके लिए और बड़ा फंड तैयार हो जाएगा। चूंकि लाल नौकरी करते हैं, जिससे हर साल उनकी सैलरी कुछ-न-कुछ बढ़ती रहेगी। इसलिए हर साल सिप के अमाउंट को 10 फीसदी बढ़ाने में उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। अगर वह हर साल 10-10 फीसदी सिप अमाउंट बढ़ाते हैं तो 10 साल में उनके लिए 16,34,449 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

# यह कैलकुलेशन ऑनलाइन उपलब्ध सिप कैलकुलेटर पर आधारित है।

अमीर बनने का सीक्रेट फॉर्मूला! आज ही अपनाएं ये 5 मनी हैबिट्स, तेजी से बढ़ेगी आपकी वेल्थ

फाइनेंशियल सिक्योरिटी हासिल करना और प्रॉपर्टी या वेल्थ क्रिएट करने के लिए जरूरी नहीं कि सिर्फ आपकी कमाई ज्यादा हो। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि आप अपने कमाए हुए पैसे को कितने बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं, बचाते हैं और इन्वेस्ट करते हैं। लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन करने और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सही फाइनेंशियल हैबिट्स को अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं पैसे की बचत और निवेश से जुड़े उन व्यावहारिक नियमों के बारे में जो आपकी वित्तीय स्थिति को एक मजबूत रास्ते पर ला सकते हैं।

इमरजेंसी फंड बनाएं

नौकरी छूटने, मेडिकल बिल या अचानक आए किसी भी खर्च जैसी स्थिति में इमरजेंसी फंड वित्तीय सपोर्ट देता है। फाइनेंशियल प्लानर आमतौर पर सलाह देते हैं कि आपको बेसिक खर्चों के करीब तीन से छह महीने के बराबर की राशि किसी ऐसे खाते में रखनी चाहिए जहां से उसे आसानी से निकाला जा सके।

बचत को प्राथमिकता दें

सैलरी आते ही सबसे पहले बचत की आदत डालें। इसके लिए अपने वेतन में से एक निश्चित राशि को बचत या निवेश खातों में तुरंत ऑटोमैटिक ट्रांसफर करने की व्यवस्था करें। नियमित रूप से पैसे को सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर करने से बचत में निरंतरता बनी रहती है और पैसे खर्च करने का ऑप्शन भी कम होता है।

खर्चों पर नजर रखें

अपने रोजाना के खर्चों को ट्रैक करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आपका पैसा वास्तव में कहां जा रहा है। गैर-जरूरी सब्सक्रिप्शन, बार-बार किए जाने वाले छोटे-छोटे खर्चों और दूसरे ऐसे पैटर्न की पहचान करने के लिए बजटिंग ऐप, स्प्रेडशीट या सिंपल एक्सपेंस ट्रैकर का इस्तेमाल करें।

क्रेडिट कार्ड का समझदारी से इस्तेमाल करें

सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड काफी मददगार साबित हो सकते हैं। अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने से बचें और ड्यू डेट तक पूरे बिल का भुगतान करने का लक्ष्य रखें। जिम्मेदारी से क्रेडिट का इस्तेमाल करने से एक स्वस्थ क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखने में मदद मिलती है और भारी लेट फीस या इंटरेस्ट से बचा जा सकता है।

जल्दी निवेश शुरू करें

कम उम्र में या जल्दी निवेश शुरू करने से आपके पैसे को कम्पाउंडिंग के जरिए बढ़ने का अधिक समय मिलता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेशक जिन विकल्पों पर विचार करते हैं उनमें कम लागत वाले इंडेक्स फंड भी शामिल हैं। हालांकि निवेश के विकल्पों का चयन हमेशा पर्सनल फाइनेंस टारगेट, जोखिम लेने की क्षमता और समय अवधि के अनुसार ही होना चाहिए।

स्किल्स बढ़ाएं और सैलरी नेगोशिएट करें

अपनी व्यावसायिक योग्यताओं और स्किल्स को सुधारने से समय के साथ आपकी कमाने की क्षमता बढ़ सकती है। सर्टिफिकेट्स, स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग और वर्कशॉप आपको बेहतर अवसरों के काबिल बनाने में मदद करते हैं।

इसके अलावा आपकी सैलरी आपके भविष्य के बोनस, बचत और रिटायरमेंट योगदान को प्रभावित करती है। इसलिए जॉब ऑफर या अप्रेजल के दौरान अपनी इंडस्ट्री के सैलरी लेबल का रिसर्च करें। अपने लिए उचित सैलरी को मैनेजमेंट के साथ हमेशा कॉन्फिडेंस से डिस्कस करें।

यह भी पढ़ें: Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में तेजी, चांदी सिर्फ दो दिन में 15000 रुपये चढ़ गई

बच्चों को वसीयत में देनी चाहिए प्रॉपर्टी या जीवनकाल में कर देना चाहिए गिफ्ट? एक्सपर्ट से जानिए किसमें है ज्यादा फायदा

अपनी जीवनभर की कमाई और संपत्ति को बच्चों के नाम ट्रांसफर करना हर माता-पिता का एक बड़ा फैसला होता है। अक्सर विरासत या वसीयत से जुड़े फैसले माता-पिता के न रहने के बाद ही परिवार में चर्चा का विषय बनते हैं। लेकिन ऐसे में अक्सर प्रॉपर्टी को लेकर इसके दावेदारों, भाई-बहनों में विवाद और मतभेद पैदा होते भी हम देखते हैं। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या बच्चों को संपत्ति वसीयत के जरिए देनी चाहिए या अपने जीवनकाल में ही गिफ्ट (कर देनी चाहिए?

कानूनी और फाइनेंस एक्सपर्ट के मुताबिक अपने जीवनकाल में ही सरप्लस प्रॉपर्टी को गिफ्ट कर देना एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है। इससे माता-पिता अपने जीवनकाल में ही अपने इरादों को स्पष्ट कर सकते हैं, बच्चों की आशंकाओं को दूर कर सकते हैं और किसी भी मतभेद को समय रहते सुलझा सकते हैं।

…लेकिन सबसे पहले अपनी फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी सुनिश्चित करें

अपने जीवनकाल में बच्चों को प्रॉपर्टी या धन गिफ्ट करने की योजना बनाते समय वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले ये बुनियादी बात समझनी चाहिए कि देने से ज्यादा जरूरी उनके लिए ये सवाल है कि वो खुद के लिए कितना बचाकर रखें। एक्सपर्ट्स की साफ राय है कि माता-पिता को सबसे पहले अपना जीवनस्तर बनाए रखने, नियमित खर्चों को पूरा करने,भविष्य के स्वास्थ्य और इलाज संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त फंड और प्रॉपर्टी अलग रख लेनी चाहिए। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ होने वाले अचानक के खर्चों और इमर्जेंसी के लिए एक बफर रखना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए ताकि संपत्ति गिफ्ट करने के बाद उन्हें फाइनेंशियली अपने बच्चों पर निर्भर न होना पड़े।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील विनीता सेजवाल का कहना है कि लाइफटाइम गिफ्टिंग प्लान की नींव गिफ्ट देने वाले के अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने पर टिकी होती है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनस्तर को बनाए रखने,नियमित खर्चों को पूरा करने और भविष्य की चिकित्सीय व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त धनराशि अलग रखनी चाहिए। साथ ही अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए पर्याप्त रिजर्व भी रखना चाहिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके लिए कोई तय मानक फॉर्मूला नहीं हो सकता। यह कैलकुलेशन वरिष्ठ नागरिक की आय, कुल संपत्ति, उनकी देनदारियों और वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करती है। सिर्फ वही संपत्ति या धन बच्चों को गिफ्ट करने के लिए माना जाना चाहिए जो इन सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद वास्तव में सरप्लस हो।

जीवनकाल में गिफ्ट देने से उत्तराधिकार क्यों आसान हो जाता है?

अपने जीवनकाल में संपत्ति ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि माता-पिता अपनी उपस्थिति में ही अपने फैसलों की वजह बता सकते हैं। यह बात तब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब बच्चों को अलग-अलग मूल्य या अलग-अलग प्रकार की संपत्तियां दी जा रही हों।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील गुडीपति गायत्री कश्यप के मुताबिक,’मौत के बाद पूरी संपत्ति को बंटवारे के लिए छोड़ने की तुलना में जीवनकाल में गिफ्ट देना उत्तराधिकार का एक बहुत अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह माता-पिता को अपने इरादों को स्पष्ट करने, बच्चों के बीच की चिंताओं को दूर करने और अपनी मौजूदगी में मतभेदों को सुलझाने का मौका देता है।”

अक्सर माता-पिता के निधन के बाद विवाद सिर्फ कानूनी हक तक सीमित नहीं रहते बल्कि इस बात पर भी बहस होती है कि माता-पिता की सेवा किसने ज्यादा की, उन्हें किसने पैसा ज्यादा दिया, या किसी एक बच्चे को ज्यादा तरजीह दी गई या नहीं। इसीलिए ट्रांसपेरेंसी बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता असमान रूप से गिफ्ट दे रहे हैं तो उन्हें इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह गिफ्टिंग प्लान वसीयत सहित अन्य व्यापक उत्तराधिकार योजनाओं से मेल खाता होना चाहिए।

कैश, शेयर्स या प्रॉपर्टी: क्या गिफ्ट करना ज्यादा बेहतर?

जीवनकाल में संपत्ति देने के लिए कोई एक एसेट क्लास सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। यह फैसला लिक्विडिटी की जरूरत, टैक्स के नियमों और इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वरिष्ठ नागरिक को खुद उस संपत्ति से आय या व्यक्तिगत उपयोग की जरूरत है या नहीं। कैश ट्रांसफर करने में सबसे आसान है और जिसे मिलता है उसे तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है। लिस्टेड शेयर्स और म्यूचुअल फंड को भी ट्रांसफर करना और इनके डॉक्युमंट्स तैयार करना आसान होता है। प्रॉपर्टी, जमीन और सोना की बात करें तो अगर आपका उद्देश्य ऐसी संपत्तियों को पास ऑन करना है जिनका मूल्य समय के साथ बढ़ता है तो इन्हें चुना जा सकता है।

हालांकि, अचल संपत्ति मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि यह लिक्विड नहीं होती और न ही इसे आसानी से बांटा जा सकता है। इसके अलावा अचल संपत्ति के ट्रांसफर में वैल्युएशन, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च आता है।

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहिल पटेल कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनकाल में धन या संपत्ति तभी ट्रांसफर करनी चाहिए जब वे अपने अपेक्षित रहने के खर्चों, स्वास्थ्य सेवा, आपात स्थितियों और दीर्घायु जोखिमों को आराम से पूरा करने के लिए पर्याप्त संपत्तियों को सुरक्षित कर लें। प्राथमिकता वित्तीय स्वतंत्रता होनी चाहिए, न कि संपत्ति देने के बाद बच्चों पर निर्भर हो जाना।

सही कानूनी डॉक्युमेंटेशन है बेहद जरूरी

जीवनकाल में दिए जाने वाले किसी भी गिफ्ट को महज एक अनौपचारिक पारिवारिक समझ नहीं मानना चाहिए। खासकर जब बड़ी संपत्ति शामिल हो, तो उसका सही डॉक्युमेंटेशन होना जरूरी है। राहिल पटेल के अनुसार, अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) के मामले में एक रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड की जरूरत होती है। इसके लिए राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है।

दस्तावेजीकरण तब और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब बच्चों के बीच संपत्ति का असमान रूप से बांटी जा रही हो। सही लिखापढ़ी न होने पर भविष्य में जबरदस्ती संपत्ति लेने, दबाव डालकर प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराने जैसे आरोप लग सकते हैं और मामला विवादित हो सकता है।

जीवनकाल में संपत्ति गिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी धन-दौलत बांट दें। इसका सही उद्देश्य यह है कि जब माता-पिता खुद वित्तीय रूप से सुरक्षित हों और अपने इरादों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम हों तब वे अपनी सरप्लस प्रॉपर्टी को प्लान बनाकर ट्रांसफर कर दें। जरूरत के हिसाब से फाइनेंशियल रिजर्व, ट्रांसपेरेंसी और सही लीगल डॉक्यूमेंटेशन के साथ किया गया ट्रांसफर अगली पीढ़ी को बिना किसी पारिवारिक कलह के प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एक सुरक्षित रास्ता बनाता है।

 

 

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

निलेश शाह ने दी घरों में रखे सोना और कैश के इस्तेमाल की सलाह, कहा-इससे बदल जाएगी निवेश की तस्वीर

कोटक एएमसी के एमडी और सीईओ निलेश शाह ने सेबी को एक खास सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि परिवारों को सेविंग्स का पैसा फाइनेंशियल एसेट्स में लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसके लिए सेबी को नए प्रोडक्ट स्ट्रक्चर पर विचार करना चाहिए। इनमें गोल्ड लिंक्ड प्रोडक्ट, चेक राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड्स और रीट्स के लिए डेडिकेटेड म्यूचुअल फंड हो सकते हैं।

बड़ी संख्या में लोग घरों में सोना और कैश रखते हैं

शाह ने FICCI के 23वें एनुअल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में इनवेस्टमेंट के बारे में कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग गोल्ड और कैश में पैसा रखते हैं। फाइनेंशियल इंडस्ट्री को ऐसे प्रोडक्ट्स लाने की जरूरत है, जिनमें लोग सेविंग्स का अपना पैसा लगा सकें।

शाह ने सेबी के होल-टाइम मेंबर के सवाल के दिए जवाब

कोटक एएमसी के प्रमुख ने सेबी के होल-टाइम मेंबर अमरजीत सिंह के उस सवाल का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या मौजूदा नियम म्यूचुअल फंड्स को घरेलू सेविंग्स को अट्रैक्ट करने की पूरी छूट नहीं देते और क्या इंडियन मार्केट में प्रोडक्ट स्ट्रक्चर्स मौजूद नहीं हैं।

2005 में गोल्ड-लिंक्ड प्रोडक्ट शुरू करने पर हुआ था विचार

शाह ने एक प्रोडक्ट के बारे में बताया, जिसका प्रस्ताव 2005 में आया था। इस प्रोडक्ट में रिटेल इनवेस्टर के 100 रुपये के निवेश को गोल्ड-लिंक्ड ऑप्शन और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में बांटने का प्रस्ताव था। उन्होंने कहा, “हम रिटेल इनवेस्टर से 100 रुपये लेते और 7 रुपये गोल्ड ऑप्शन में लगाते। बाकी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में इनवेस्ट करते।”

रेगुलेशन से जुड़ी चिंता की वजह से बाजार में नहीं आ सका प्रोडक्ट

उन्होंने कहा, “हम ऐसे प्रोडक्ट पर विचार कर रहे थे, जिसमें गोल्ड की कीमतें गिरने पर निवेशकों का पैसा नहीं डूबता। लेकिन, गोल्ड की कीमतें बढ़ने पर उन्हें फायदा होता। इसके अलावा उन्हें अपने पैसे पर सुरक्षा मिलती। इतना ही नहीं, उन्हें कुछ रिटर्न भी मिलता।” लेकिन, रेगुलेटर से जुड़ी चिंता की वजह से यह प्रोडक्ट नहीं आ सका।

चेक-राइटिंग फैसिलिटी वाले मनी मार्केट प्रोडक्ट पर भी होना चाहिए विचार

शाह ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट पर हम फिर से विचार कर सकते है, क्योंकि अब देश के फाइनेंशियल मार्केट्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क विकसित हो चुके हैं। उन्होंने एक मनी मार्केट फंड का भी प्रस्ताव दिया, जिसमें चेक-राइटिंग फैसिलिटी शामिल हो सकती है।

दुनियाभर में चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड का होता है इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट में बैंक अकाउंट जैसी लिक्विडिटी मिलेगी। साथ ही उतना रिटर्न मिलेगा जितना शॉर्ट टर्म मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश पर मिलता है। उन्होंने कहा, “दुनियाभर में इनवेस्टर्स चेक-इन फैसिलिटी वाले मनी मार्केट फंड में निवेश करते हैं और उसका इस्तेमाल पेमेंट के लिए करते हैं।”

यह भी पढ़ें: ₹5 लाख बने ₹2.3 करोड़! 22 साल में इन 2 म्यूचुअल फंड्स ने किया कमाल, निवेशकों की खुली किस्मत

सिर्फ REITs में निवेश करना वाला फंड शुरू करने की सलाह

शाह ने कहा, “सेबी ने रिटेल इनवेस्टर्स को REIT में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए काफी कोशिश की है। हमने रिटेल REIT में निवेश की इजाजत दी। क्या हम अब ऐसा फंड बना सकते हैं, जो सिर्फ रिटेल REIT में निवेश करेगा?” उन्होंने यह माना कि REIT की पर्याप्त लिस्टिंग, ट्रेड़िंग और सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी के बाद यह प्रोडक्ट अट्रैक्टिव बन सकता है।

PPF vs SIP: 15 साल बाद कौन ज्यादा पैसा देगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs SIP: हर साल अगर आपके पास निवेश के लिए ₹1.5 लाख हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है। पैसा PPF में डालें या SIP करें? दोनों 15 साल के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। लेकिन दोनों का खेल अलग है। PPF में सरकार की गारंटी मिलती है। SIP में शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा मिलता है।

यही वजह है कि 15 साल बाद दोनों का रिजल्ट भी अलग निकलता है। अगर सिर्फ कमाई देखें तो SIP आगे निकल सकती है। लेकिन सुरक्षा और टैक्स के मामले में PPF की अपनी ताकत है।

PPF और SIP में सबसे बड़ा फर्क

PPF एक सरकारी बचत योजना है। इसमें ब्याज तय होता है और फिलहाल यह 7.1% है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स-फ्री होती है।

दूसरी तरफ SIP, म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका है। इसमें कोई तय रिटर्न नहीं होता। बाजार अच्छा चला तो कमाई ज्यादा हो सकती है। बाजार कमजोर रहा तो रिटर्न भी कम हो सकता है।

15 साल का हिसाब

मान लेते हैं कि आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। यानी SIP में हर महीने ₹12,500 डालते हैं। तुलना के लिए SIP में 12% सालाना औसत रिटर्न का उदाहरण लिया गया है। यह इक्विटी म्यूचुअल फंड अमूमन लॉन्ग टर्म में देते हैं।

पैमानाPPF
SIP (12% उदाहरण)

हर साल निवेश₹1.5 लाख₹1.5 लाख
कुल निवेश₹22.5 लाख₹22.5 लाख
अनुमानित रिटर्न7.10%12.00%
15 साल बाद रकम₹40.7 लाख₹63.1 लाख
कुल मुनाफा₹18.2 लाख₹40.6 लाख

यानी इस मामले में SIP, PPF से करीब ₹22 लाख ज्यादा पैसा बना सकती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए राहुल और अमित दोनों हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। राहुल PPF चुनता है। अमित हर महीने ₹12,500 की SIP करता है।

15 साल बाद राहुल के पास करीब ₹40.7 लाख होंगे। वहीं अमित के पास करीब ₹63.1 लाख हो सकते हैं। दोनों ने बराबर पैसा लगाया, लेकिन रिटर्न का फर्क करीब ₹22 लाख तक पहुंच गया।

अगर SIP का रिटर्न बदल जाए तो?

यहीं असली बात है। SIP में कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए अलग-अलग रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है।

SIP का औसत रिटर्न15 साल बाद रकम
8%₹43 लाख
10%₹52 लाख
12%₹63 लाख
15%₹84 लाख

यानी 8% पर SIP और PPF का फर्क बहुत कम रह जाता है। लेकिन 12-15% रिटर्न मिलने पर अंतर तेजी से बढ़ जाता है।

टैक्स में कौन आगे है?

PPF का सबसे बड़ा फायदा टैक्स है। इसमें जमा किया गया पैसा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स-फ्री रहती हैं।

SIP में टैक्स देना पड़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और कितने समय बाद पैसा निकाला है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपको बिना जोखिम वाला विकल्प चाहिए, तो PPF ज्यादा सुकून देता है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी तय रहता है। अगर आपका लक्ष्य ज्यादा पैसा बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो SIP बेहतर विकल्प बन सकती है।

दोनों में निवेश ज्यादा बेहतर

मान लीजिए आपके पास हर साल ₹1.5 लाख हैं। ऐसे में पूरा पैसा सिर्फ एक जगह लगाने की जरूरत नहीं है। आप ₹75,000 PPF में और ₹75,000 SIP में लगा सकते हैं।

इससे एक तरफ सरकारी सुरक्षा मिलती है। दूसरी तरफ बाजार की ग्रोथ का फायदा भी मिलता है। यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार लंबी अवधि के लिए इस तरह का संतुलन बेहतर मानते हैं।

8th Pay Commission: अगस्त-सितंबर में इन शहरों का दौरा करेगा 8वां वेतन आयोग

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।

बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

यह भी पढ़ें: मुसीबत में कौन सा फंड देगा आपका साथ? जानिए EPF, NPS, PPF और म्यूचुअल फंड्स से निकासी की पूरी टाइमलाइन

व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

Gold Silver price: फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद हुई कम, फिर भी सोने-चांदी की कीमतें स्थिर, आखिर क्या है इसकी वजह

Gold Silver price: इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। दरअसल, सितंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं और निवेशक केंद्रीय बैंक की पॉलिसी की दिशा के बारे में संकेत पाने के लिए फेडरल रिजर्व की हालिया बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे थे।

COMEX पर, सोना $4,467.70 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से $6 या 0.13% कम था। धातु की कीमत $4,493.10 प्रति औंस के उच्चतम और $4,466 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच रही।

चांदी $66.07 प्रति औंस पर थी, जो पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से 0.161 या 0.24% कम थी। इसने दिन के दौरान $66.685 प्रति औंस का उच्चतम और $65.760 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।स्पॉट मार्केट में, सोना 0.2% बढ़कर $4,424.28 प्रति औंस हो गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $4,480.90 प्रति औंस हो गए। स्पॉट सिल्वर 0.9% बढ़कर $66.40 प्रति औंस हो गई।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों के बारे में बदलता नजरिया है।हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम कर दिया है। जुलाई में अप्रत्याशित रूप से नौकरियों का नुकसान, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजारों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना का फिर से आकलन करने के लिए प्रेरित किया है।

यह सोने और चांदी के लिए मायने रखता है क्योंकि दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली एसेट्स से अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न कमा सकते हैं। अगर दर-वृद्धि की उम्मीदें कम हो जाती हैं, तो कीमती धातुओं को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट (अवसर लागत) कम हो जाती है।इससे बुलियन (सोना-चांदी) अधिक आकर्षक हो सकता है।

कमजोर डॉलर बुलियन करता है सपोर्ट

अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कई महीनों के निचले स्तर के करीब बना हुआ है।कमजोर डॉलर आम तौर पर सोने को सपोर्ट करता है क्योंकि धातु की कीमत डॉलर में तय होती है। इससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे संभावित रूप से मांग को सपोर्ट मिलता है।

डॉलर का यही असर चांदी की कीमतों को भी सपोर्ट कर सकता है। सोने और चांदी के लिए फेड (Fed) क्यों अहम है?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का नजरिया बाजार के लिए एक अहम ट्रिगर बन गया है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के एक सर्वे में पाया गया कि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि फेड 2026 के आखिर तक अपनी मुख्य ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं करेगा।

बाजार अब फेड की हालिया बैठक के मिनट्स (बैठक का ब्योरा) का इंतजार कर रहा है, जो बुधवार (19 अगस्त) को आने वाले हैं। इन मिनट्स से इस बात का अंदाजा लग सकता है कि पॉलिसी बनाने वाले महंगाई, रोजगार और ब्याज दरें और बढ़ाने की जरूरत के बारे में क्या सोचते हैं। अगर फेड कम सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने और चांदी को और सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर रुख सख्त (हॉकिश) रहता है, तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है।

चांदी के लिए एक और वजह

चांदी की चाल सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदों पर निर्भर नहीं करती।इस धातु की औद्योगिक मांग भी काफी है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर से जुड़े इस्तेमाल शामिल हैं। इससे सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर असर डालने वाला एक और कारक जुड़ जाता है।हालांकि, अभी के लिए मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर और निवेशकों की आम धारणा दोनों धातुओं के लिए अहम कारक बने हुए हैं।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

फेड की बैठक के मिनट्स तुरंत असर डालने वाली घटना हैं। इसके अलावा, बाजार सितंबर में होने वाले पॉलिसी फैसले के संकेतों के लिए अमेरिका में महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नजर रखेगा।बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोना अभी $4,450-$4,460 प्रति औंस के दायरे में रेजिस्टेंस (बाधा) का सामना कर रहा है, जबकि चांदी $63 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल कीमतें समीकरण का सिर्फ एक हिस्सा हैं। घरेलू स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स और स्थानीय बाजार की स्थितियों पर भी निर्भर करती हैं।इसलिए, भले ही इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें बढ़ें, भारतीय कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव न हो।

फिलहाल, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों में कमी, डॉलर का कमजोर होना और लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल रहा है।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: इमरजेंसी में पैसों की जरूरत? जानिए किस निवेश से पैसा सबसे जल्दी निकलता है

Mutual Fund vs EPF vs PPF vs NPS: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो सिर्फ रिटर्न मायने नहीं रखता। यह भी उतना ही जरूरी है कि पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी पहुंचे। किसी निवेश में रकम अगले कारोबारी दिन मिल सकती है। कुछ योजनाओं में कई दिन या हफ्ते भी लग सकते हैं। ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं, तो हर स्कीम का विड्रॉल टाइमलाइन जानना जरूरी है।

आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जसमीत सिंह के मुताबिक, हर निवेश का मकसद अलग होता है। लिक्विड और शॉर्ट ड्यूरेशन डेट म्यूचुअल फंड सबसे ज्यादा लिक्विड माने जाते हैं, जबकि EPF, PPF और NPS को लंबे समय के निवेश के लिए बनाया गया है।

सबसे पहले एक नजर में विड्रॉल टाइमलाइन

निवेश विकल्प
पैसा मिलने का समय

लिक्विड/ओवरनाइट म्यूचुअल फंड
अगले कारोबारी दिन

इक्विटी म्यूचुअल फंड1-3 कारोबारी दिन
NPST+2
EPF3-5 दिन (ऑनलाइन), अधिकतम 20 दिन
PPFआमतौर पर कुछ कारोबारी दिन

NPS में T+2 में प्रोसेस हो सकता है विड्रॉल

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का विड्रॉल टाइमलाइन सबसे साफ माना जाता है। PFRDA ने सितंबर 2022 में एग्जिट विड्रॉल का समय T+4 से घटाकर T+2 कर दिया था। इसका मतलब है कि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद विड्रॉल दो कारोबारी दिनों के भीतर प्रोसेस हो सकता है। हालांकि, रिटायरमेंट पर एन्युटी खरीदने जैसी प्रक्रिया होने पर पूरा पैसा तुरंत खाते में नहीं आता।

आंशिक निकासी के लिए भी नियम तय हैं। NPS में अपनी जमा राशि का अधिकतम 25% तक आंशिक विड्रॉल किया जा सकता है। इसके लिए तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।

PPF में तय T+1 या T+2 नियम नहीं

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में कोई तय T+1 या T+2 भुगतान नियम नहीं है। निकासी की अनुमति मिलने के बाद बैंक या पोस्ट ऑफिस में आवेदन देना होता है। इसके बाद रकम संबंधित संस्था की प्रोसेसिंग के अनुसार खाते में आती है।

बैंक वाले PPF खातों में आमतौर पर कुछ कारोबारी दिनों में पैसा मिल जाता है। हालांकि, समय बैंक, ब्रांच और ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन पर निर्भर करता है। जसमीत सिंह के मुताबिक, PPF में पांच वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में एक बार आंशिक निकासी की जा सकती है।

EPF में 3-5 दिन में भी मिल सकता है पैसा

EPF में 2026 के बाद प्रक्रिया पहले से तेज हुई है। नए Employees’ Provident Funds Scheme, 2026 के तहत पूरी तरह सही क्लेम का निपटारा 20 दिनों के भीतर करना होगा। अगर बिना वजह देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी पर 12% सालाना पेनल ब्याज भी लगाया जा सकता है।

साथ ही, ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग के तहत कई ऑनलाइन क्लेम लगभग 3 दिन में भी निपटाए जा रहे हैं। हालांकि, आधार-UAN लिंकिंग, नियोक्ता की जानकारी या दूसरे वेरिफिकेशन की वजह से समय 2-3 हफ्ते तक भी जा सकता है।

म्यूचुअल फंड सबसे तेज विकल्पों में शामिल

अगर सिर्फ जल्दी पैसा निकालना प्राथमिकता है, तो ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड सबसे आसान विकल्पों में गिने जाते हैं। AMFI के मुताबिक, कारोबारी दिनों में रिडेम्प्शन करने पर आमतौर पर पैसा 1 से 3 कारोबारी दिनों में मिल जाता है। लिक्विड और ओवरनाइट फंड में यह अगले कारोबारी दिन भी आ सकता है।

इक्विटी फंड में आमतौर पर लिक्विड फंड की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लगता है।

किस स्कीम में सबसे ज्यादा पाबंदियां हैं?

स्कीमनिकासी की स्थिति
म्यूचुअल फंडसबसे आसान
EPFतय उद्देश्यों के लिए
PPFसीमित निकासी
NPS Tier-1सबसे ज्यादा नियम

NPS Tier-1 में निकासी सिर्फ तय परिस्थितियों में होती है। वहीं PPF और EPF में भी आंशिक निकासी के अपने नियम हैं।

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सीख

सबसे जल्दी पैसा देने वाला विकल्प हमेशा सबसे अच्छा रिटायरमेंट निवेश नहीं होता। म्यूचुअल फंड लिक्विड हैं, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव से जुड़े रहते हैं। PPF सरकार की गारंटी वाली सुरक्षा देता है, जबकि NPS पूरी तरह रिटायरमेंट को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

जसमीत सिंह की सलाह है कि कम से कम 6 महीने के खर्च ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा मिल सके। इससे PPF, EPF या NPS जैसे लंबे समय के निवेश को बीच में तोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

मिडिल क्लास को अमीर बनने से रोकती हैं 5 आदतें, कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

Gold Silver price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड था, जिसमें कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹676 या 0.44% बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,270 या 0.96% बढ़कर ₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

ग्लोबल स्तर पर, सोने के वायदा भाव लगभग 0.40% बढ़कर $4,394.01 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 1.64% बढ़कर $65.74 प्रति औंस हो गए।

क्यों बढ़ रही कीमतें हैं?

इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर बदलता नज़रिया है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई, रोजगार और कंज्यूमर एक्टिविटी के आंकड़े कमज़ोर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा और सख्ती बरतने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है और सोने को इससे सहारा मिला है।

आमतौर पर डॉलर के कमज़ोर होने से सोने को फायदा होता है क्योंकि दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए यह धातु सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने को सहारा दे सकती हैं, क्योंकि सोने जैसी ऐसी एसेट (संपत्ति) को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है जिससे कोई रेगुलर इनकम नहीं होती।

भारत के लिए खास वजह क्या है?

घरेलू कीमतें करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी दिखाती हैं। सोमवार (17 अगस्त) को शुरुआती कारोबार में रुपया कमज़ोर होकर लगभग ₹95.59 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया कमज़ोर होने से सोने और चांदी जैसी इंटरनेशनल कीमत वाली कमोडिटीज़ की ‘लैंडेड कॉस्ट’ (आयात लागत) बढ़ सकती है, जिससे घरेलू कीमतों को और सहारा मिलता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी रुपये पर दबाव रहा है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, WTI क्रूड लगभग $82.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ब्रेंट $89 के आसपास बना हुआ था। गर्ग ने कहा कि डॉलर के कमज़ोर होने और आर्थिक आंकड़े कमज़ोर रहने से फेड द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने US-ईरान शांति वार्ता के रुकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर भी इशारा किया।

बता दें कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक और वजह है जो बुलियन (सोना-चांदी) को सहारा दे रही है। US-ईरान शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी अनिश्चितता सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा सकती है।

अब आगे क्या करें निवेशक

सोने के लिए, फेडरल रिजर्व का रेट आउटलुक, US डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने रहेंगे। अगर फेड का रुख नरम (dovish) होता है तो कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि महंगाई का नया झटका या सख्त (hawkish) पॉलिसी रुख बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

VT मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल ने कहा कि $4,400-$4,450 प्रति औंस सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर कीमत $4,500 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है तो तेजी का रुझान (bullish trend) मजबूत हो सकता है, जबकि उन्होंने $4,150-$4,200 प्रति औंस को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया बताया।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल सोना और चांदी की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंटरनेशनल कीमतें और घरेलू बाजार की स्थितियां मिलकर MCX कीमतों की दिशा तय करती हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर लगातार बनी मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतें नए हफ़्ते में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं।”

देसाई ने कहा, “भू-राजनीतिक जोखिम और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंताएं बुलियन को और सहारा दे रही हैं।” हालांकि, एनालिस्ट कीमतों में सीधी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हालिया बढ़त के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में कुछ ठहराव (कंसोलिडेशन) या मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखी जा सकती है।

Silver Price Today: चांदी की बढ़ी चमक, देश-विदेश में महंगे हुए दाम, चेक करें अपने शहर का ताजा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

कमाई अच्छी फिर भी सेविंग नहीं! इन मूलांक वालों की ये आदत पड़ती है भारी

पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसे संभालकर रखना भी है। कई बार अच्छी कमाई होने के बावजूद महीने के आखिर में सेविंग नहीं हो पाती और पता ही नहीं चलता कि पैसा कहां खर्च हो गया। अंक ज्योतिष के अनुसार, जन्म तारीख से निकलने वाला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव और पैसों से जुड़ी आदतों के बारे में भी कुछ संकेत दे सकता है। कुछ मूलांक वाले लोग कमाई अच्छी होने के बाद भी ज्यादा खर्च करने, शौक पूरे करने या बिना सोचे पैसे लगाने की वजह से आर्थिक परेशानी में पड़ सकते हैं।

 

मूलांक 3

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 3, 12 या 21 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 3 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इसके स्वामी ग्रह गुरु माने जाते हैं।

ये लोग लोग आमतौर पर आगे बढ़ने और पैसा कमाने की सोच रखते हैं। इन्हें नई चीजें सीखना और खुद को बेहतर बनाना पसंद होता है। इसी वजह से कई बार ये अपनी पढ़ाई, ग्रूमिंग, शौक और पसंद की चीजों पर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं। कभी-कभी भावनाओं में आकर भी पैसा खर्च करने की आदत बन सकती है, जिससे अच्छी कमाई के बावजूद बचत कम रह जाती है।

 

मूलांक 5

5, 14 या 23 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 5 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी बुध ग्रह माना जाता है।

ये लोग लोग तेज दिमाग और नई चीजें आजमाने वाले माने जाते हैं। इन्हें एक ही तरह की जिंदगी या काम ज्यादा समय तक पसंद नहीं आता। इसी वजह से ये कई बार नौकरी, काम या अपनी पसंद की चीजें जल्दी-जल्दी बदल लेते हैं। नई चीजों और अनुभवों पर खर्च करने की आदत भी इनके लिए परेशानी बन सकती है। कमाई अच्छी होने के बावजूद अगर खर्च पर ध्यान न दिया जाए, तो भविष्य के लिए पैसा बचाना मुश्किल हो सकता है।

मूलांक 6

जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 6 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस मूलांक का स्वामी शुक्र ग्रह माना जाता है।

इन लोगों को आराम, खूबसूरत चीजें और अच्छी लाइफस्टाइल पसंद मानी जाती है। ये अपने कपड़े, लुक, ग्रूमिंग और घर की सजावट पर दिल खोलकर खर्च कर सकते हैं। कई बार दूसरों को प्रभावित करने के लिए भी ज्यादा खर्च हो जाता है। यही आदत अगर कंट्रोल में न रहे, तो अच्छी आमदनी के बाद भी सेविंग कम हो सकती है और आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।

 

बचत जरूरी

इन मूलांकों से जुड़ी बातें अंक ज्योतिष की मान्यताओं पर आधारित हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि इन तारीखों को जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को आर्थिक परेशानी हो। असल जिंदगी में पैसे की स्थिति कमाई, खर्च करने की आदत, बचत और सही वित्तीय योजना पर भी निर्भर करती है। इसलिए कमाई अच्छी हो तो खर्च के साथ भविष्य के लिए बचत पर भी ध्यान देना जरूरी है।