15 साल की सिंचना के पास 13.9 लाख रुपये का पोर्टफोलियो, जानें गुल्लक के 10 हजार से कैसे शुरू हुआ निवेश का सफर?

आमतौर पर 15 साल की उम्र में बच्चे स्कूल, दोस्तों और अपनी पसंदीदा चीजों को करने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बेंगलुरु की सिंचना संतोष ने इसी उम्र में एक ऐसी राह चुनी, जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सिंचना की दिलचस्पी बचपन से ही पैसों की बचत और उसके सही इस्तेमाल को समझने में रही है। एक छोटी-सी गुल्लक से शुरू हुई उनकी बचत की आदत धीरे-धीरे वित्तीय समझ और निवेश की जिज्ञासा में बदल गई। आज वो करीब 13.9 लाख रुपये के निवेश पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं।

खास बात ये है कि उनके लिए पैसा सिर्फ बचाने या बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने का माध्यम है। पढ़ाई के साथ वित्तीय दुनिया को समझने और नई चीजें सीखने का उनका यह सफर दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और जिज्ञासा के साथ छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय किए जा सकते हैं।

गुल्लक में जमा किए 10 हजार रुपये

RR नगर स्थित स्वर्गरानी स्कूल की छात्रा सिंचना को बचपन से ही पैसे बचाने की आदत थी। 12 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी गुल्लक में करीब 10,000 रुपये जमा कर लिए थे। लगातार बढ़ती रकम को देखकर उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी बन सकती है। यही अनुभव उनके लिए वित्तीय समझ की पहली सीढ़ी बना।

टेलीस्कोप खरीदने के लिए खुद जुटाए पैसे

सिंचना की ‘मनी जर्नी’ को एक और अहम मोड़ तब मिला, जब उन्हें बचपन में टेलीस्कोप खरीदना था। उनके पिता संतोष कुमार ने उनसे इसकी कीमत का कुछ हिस्सा खुद जुटाने को कहा। सिंचना ने रिश्तेदारों से बात कर 10,000 रुपये जुटाए, जबकि बाकी 2,000 रुपये माता-पिता ने दिए। इस अनुभव से उन्हें पैसे की कीमत और लक्ष्य के लिए बचत करने की अहमियत समझ आई।

YouTube से सीखी निवेश की बारीकियां

निवेश शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को समझने की सलाह दी। इसके बाद सिंचना ने खुद सीखना शुरू किया। उन्होंने YouTube पर पर्सनल फाइनेंस और निवेश से जुड़े वीडियो देखे और Ankur Warikoo, Dave Ramsey, Power of Money, Mint Wealth और Sonia Shenoy जैसे क्रिएटर्स से सीखने की बात कही है। वह छुट्टियों और वीकेंड में इसके लिए समय निकालती थीं।

NISM और SEBI सर्टिफिकेशन भी किए

Moneycontrol से बात करते हुए  सिंचना ने बताया कि उन्होंने आपनी वित्तीय शिक्षा को ऑनलाइन वीडियो तक सीमित नहीं रखा। उनके पास दो NISM और एक SEBI सर्टिफिकेशन हैं। एक NISM परीक्षा में वह पहली कोशिश में सिर्फ एक अंक से चूक गई थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने उसे पास किया।

13.9 लाख का पोर्टफोलियो, माता-पिता की निगरानी

इस साल सिंचना ने निवेश को ज्यादा गंभीरता से शुरू किया। परिवार के अनुसार, कुछ ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों से पैसा निकाला गया, जिनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल रहा था। अब उनका निवेश इक्विटी और म्यूचुअल फंड में है और यह भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ है। करीब सात साल की निवेश अवधि के साथ उनका लक्ष्य भविष्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई का खर्च जुटाना है। निवेश में माता-पिता की निगरानी भी रहती है।

‘GDP’ है सिंचना का निवेश मंत्र

म्यूचुअल फंड को समझने के लिए सिंचना ने ‘GDP’ नाम का अपना फ्रेमवर्क बनाया है Growth, Direct और Passive। वह ग्रोथ पर केंद्रित फंड, कम लागत वाले डायरेक्ट प्लान और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड को अपने निवेश नजरिए का हिस्सा मानती हैं।

अब बच्चों को सिखाएंगी Financial Literacy

सिंचना की रुचि केवल निवेश तक सीमित नहीं है। 14 साल की उम्र में उन्होंने NCERT के सिलेबस पर आधारित ‘ITIHASA – The Royal Game’ नाम का इतिहास कार्ड गेम बनाया और बेंगलुरु के 36 सरकारी हाई स्कूलों में 170 गेम सेट दान किए।

अब वह बच्चों के लिए एक रणनीति-आधारित वित्तीय कार्ड गेम तैयार कर रही हैं। इसमें बजटिंग, बैंकिंग, ब्याज, महंगाई, जोखिम, बीमा, क्रेडिट, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसी बातें खेल के जरिए सिखाई जाएंगी। उनका लक्ष्य भारत के 10 लाख छात्रों तक वित्तीय साक्षरता को अनुभव आधारित तरीके से पहुंचाना है। गुल्लक में जमा 10 हजार रुपये से शुरू हुआ सिंचना का सफर आज निवेश से आगे बढ़कर दूसरों को पैसों की समझ देने की दिशा में पहुंच चुका है।

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H-1B Visa पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, $1 लाख फीस का आदेश एक और साल के लिए बढ़ाया; भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले लाखों विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। इसके तहत H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने वाले आदेश की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि, इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अभी अदालत में जारी है, लेकिन ट्रंप के इस फैसले के बाद अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

बता दें की ट्रंप ने कुछ एम्प्लॉयर्स, थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट ग्रुप्स और आउटसोर्सिंग फर्मों पर आरोप लगाया है कि वे कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को बदलने के लिए इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने यह नया आदेश 18 सितंबर 2026 को जारी किया। इसका नाम “Enhancing Program Integrity and Interagency Coordination in the Administration of the H-1B Nonimmigrant Visa Program” है। इस आदेश का मकसद H-1B वीजा प्रोग्राम की निगरानी और नियमों को और सख्त करना है।

अमेरिका ने वेतन में अंतर और नौकरियों के नुकसान का हवाला दिया

आदेश के अनुसार, H-1B प्रोग्राम को खास हुनर ​​वाले और बहुत ज्यादा स्पेशलाइज्ड विदेशी अस्थायी कर्मचारियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बनाया गया था। हालांकि, इसमें कहा गया है कि इस प्रोग्राम का “बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल” किया गया है, जिससे कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखा गया और वेतन कम हुआ।

व्हाइट हाउस ने दावा किया कि सस्ते H-1B कर्मचारियों की वजह से घरेलू वेतन पर दबाव पड़ता है। उसने कहा कि H-1B वीजा धारक, H-1B पर निर्भर उद्योगों में उसी तरह के काम करने वाले अमेरिका में जन्मे कर्मचारियों की तुलना में $9,000 से $20,000 कम कमाते हैं, जबकि समान वेतन का कानूनी नियम है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों ने 2022 से 2026 के बीच 8 लाख से 13 लाख अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हुए भी लाखों कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा की मांग की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ कंपनियों ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से ही उनकी जगह लेने वाले विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दिलवाई।

आदेश में कहा गया, “सस्ते H-1B कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल घरेलू वेतन पर दबाव डालता है। कानून के तहत H-1B कर्मचारियों को उनके घरेलू कर्मियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए, फिर भी H-1B वीजा धारक अमेरिका में जन्मे समान स्तर के कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम कमाते हैं। वेतन में यह अंतर $9,000 से शुरू होकर H-1B पर निर्भर उद्योगों में $20,000 तक पहुंच जाता है।”

आउटसोर्सिंग’ करने वाली कंपनियां चर्चा में

आदेश में कहा गया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों का इस्तेमाल थर्ड-पार्टी क्लाइंट कंपनियों के अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए करती हैं। इसके बाद इन कंपनियों का काफी काम विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आदेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में इस तरह के आउटसोर्सिंग मॉडल पर काम करने वाली छह सबसे बड़ी H-1B इस्तेमाल करने वाली कंपनियों ने 25,000 से ज्यादा H-1B वीजा रजिस्ट्रेशन किए। आदेश में एक विदेशी मंत्री के बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया कि H-1B वीजा अब ‘आउटसोर्सिंग वीजा’ बन गया है।

वहीं, व्हाइट हाउस ने H-1B प्रोग्राम के इस कथित गलत इस्तेमाल को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता बताया है। उसके मुताबिक, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने H-1B पर निर्भर कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ वीजा धोखाधड़ी, पैसे की हेराफेरी की साजिश और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर जांच की है।

आदेश में आगे कहा गया है कि इस तरह के दुर्व्यवहार अमेरिकियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने से हतोत्साहित कर सकते हैं और इन क्षेत्रों में अमेरिका की लीडरशिप को खतरे में डाल सकते हैं।

एजेंसियां ​​एम्प्लॉयर द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जांच करेंगी

नए आदेश के तहत, विदेश, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के सचिवों को H-1B वीजा की अर्जियों, लेबर कंडीशन एप्लीकेशन और वीजा की प्रक्रिया के दौरान वाणिज्य और शिक्षा विभाग के सचिवों के साथ मिलकर काम करना होगा। इसमें स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के एडमिनिस्ट्रेटर भी शामिल होंगे।

ये सभी एजेंसियां कर्मचारियों की सैलरी, रोजगार, शिक्षा, इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अन्य जानकारी आपस में साझा करेंगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि H-1B वीजा से जुड़े नियम इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के मुताबिक लागू किए जा रहे हैं।

नए आदेश के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि H-1B वीजा के लिए स्पॉन्सर करने वाली किसी कंपनी ने पिछले एक साल में सीधे या किसी अन्य तरीके से कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि कंपनी भविष्य में ऐसी छंटनी करने की योजना तो नहीं बना रही है, जिससे समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों पर नकारात्मक असर पड़े।

आदेश के मुताबिक, 30 दिनों के भीतर, लेबर डिपार्टमेंट के ‘वेज एंड आवर डिवीजन’ को पहले जमा किए गए ‘लेबर कंडीशन एप्लीकेशन’ के डेटा की समीक्षा शुरू करनी होगी, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या स्पॉन्सर करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई करने की रूरत है।

अमेरिकी सरकार की जांच में क्या सामने आया?

आदेश के मुताबिक, अमेरिका के कई सरकारी विभागों और एजेंसियों ने H-1B वीजा का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी है। आरोप है कि कुछ कंपनियां कम वेतन और कम स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए H-1B प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।

जांच में जिन कथित नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है, उनमें अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखना, नौकरी की जिम्मेदारियों और काम की परिस्थितियों के बारे में गलत जानकारी देना, ऐसी नौकरियों को ‘स्पेशलिटी ऑक्युपेशन’ बताना जो इसके योग्य नहीं हैं, जरूरी वेतन को कम दिखाना और फर्जी या संदिग्ध डिग्री देने वाले संस्थानों (डिप्लोमा मिल) की डिग्री के आधार पर H-1B आवेदन जमा करना शामिल है।

वहीं, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वर्कफोर्स की सुरक्षा और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि H-1B प्रोग्राम राष्ट्रीय हित में काम करे।

इस आदेश के तहत विदेश, वाणिज्य, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों के सचिवों को इसे लागू करने के लिए जरूरी नियम, नीतियां और ऑपरेशनल गाइडेंस जारी करने या अपनाने का अधिकार दिया गया है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि इस आदेश को लागू करते समय मौजूदा कानूनों और उपलब्ध फंड का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, यह भी कहा गया कि इस आदेश से अमेरिकी सरकार या उसकी एजेंसियों के खिलाफ कोई ऐसा कानूनी अधिकार या लाभ नहीं बनता, जिसे अदालत में लागू कराया जा सके।

क्या है H-1B वीजा कार्यक्रम?

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1990 में शुरू किया गया यह वीजा कार्यक्रम विशेष रूप से उन प्रौद्योगिकी (टेक) कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत और चीन से प्रतिभाशाली पेशेवरों की भर्ती करना चाहती हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। तकनीकी, इंजीनियरिंग, आईटी, वित्तीय सेवाओं और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों पेशेवर हर साल इस वीजा के माध्यम से अमेरिका जाते हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से भारतीय और चीनी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन लोगों पर लागू नहीं होगा आदेश

यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में मौजूद हैं और बाद में H-1B वीजा प्राप्त करते हैं। इसके अलावा मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण पर भी यह नियम लागू नहीं किया गया है.।इसी कारण नए आवेदकों और पहली बार वीजा प्रायोजन कराने वाली कंपनियों पर इसका प्रभाव अधिक माना जा रहा है।

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UPI MDR Charge: क्या आप एमडीआर चार्ज को लेकर चिंतित हैं? 42 FAQ से समझें कि क्यों चिंता करने की जरूरत नहीं है

UPI MDR Charge: यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज के ऐलान के बाद कई लोग चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। यूपीआई पर एमडीआर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। सच यह है कि इसके लागू होने के बाद भी यूजर्स को यूपीआई से पेमेंट पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी। एमडीआर चार्ज मर्चेंट यानी दुकानदार को देना होगा। इस पूरे मामले को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने 42 FAQ तैयार किए हैं। इसकी मदद से आपकी पूरी उलझन दूर हो जाएगी।

 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अभी क्यों लागू किया जा रहा है?

यूपीआई के जरिए हर महीने अरबों रुपये के ट्रांजेक्शन होते हैं। एमडीआर चार्ज से वसूला गया पैसा सिर्फ यूपीआई इकोसिस्टम में डिस्ट्रिब्यूट होता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा (बैंकों और नॉन-बैंकों के साथ यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा) और सर्विस बेहतर बनाने में मदद मिलती है। यूपीआई का शुल्क (एमडीआर) क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, वॉलेट आदि जैसे अन्य भुगतान साधनों के मुकाबले काफी कम हैं। शुल्क बहुत ही उचित रखे गए हैं और केवल ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ही लागू होंगे, जिससे यूपीआई भुगतान स्वीकार करने हेतु सबसे किफायती जरिया बना रहे।

क्या कम राशि वाले यूपीआई लेनदेन प्रभावित होंगे?

₹2,000 तक की राशि वाले यूपीआई लेनदेन पर MDR का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई (पी2एम) लेनदेन के 95% से अधिक हैं। उचित एमडीआर लगाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई रोजमर्रा के लेनदेन के लिए सुलभ और सुविधाजनक बना रहे, साथ ही दीर्घकालिक इकोसिस्टम की स्थिरता को भी मजबूती मिले।

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों के लिए कितना एमडीआर लागू किया जा रहा है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर 0.4% लागू होगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेनदेन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित होगा।

यूपीआई एमडीआर की तुलना पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड एमडीआर से कैसे की जा सकती है?

यूपीआई एमडीआर सभी पारंपरिक कार्ड-आधारित लेनदेन शुल्कों की तुलना में काफी कम है। सामान्य क्रेडिट कार्ड एमडीआर आमतौर पर प्रति लेनदेन 1.5% से 2.5% तक होता है, जबकि डेबिट कार्ड एमडीआर 0.90% तक सीमित होता है। ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यूपीआई एमडीआर को 0.4% और उच्च राशि की खरीदारी पर इसे ₹300 तक सीमित किया गया है।

अपडेटेड एमडीआर संबंधी प्रावधान कब से प्रभावी होंगे?

अपडेटेड एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह समयसीमा अधिग्रहण करने वाले बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों, फिनटेक अनुप्रयोगों और कॉरपोरेट लेखा प्लेटफॉर्मों को अपने सॉफ्टवेयर इंजन और बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है।

इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों से किस प्रकार की जा सकती है?

दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे आर्थिक मॉडल हैं जो इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार को सहयोग करते हैं। भारत का दृष्टिकोण सुगमता, विस्तार और समावेशन को प्राथमिकता देता है।

एमडीआर की लिमिट के अंतिम कार्यान्वयन और प्रवर्तन का निर्णय कौन करता है?

परिचालन संबंधी मापदंड, शुल्क वितरण मॉडल और श्रेणी सीमाएं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति की ओर से तय किए जाते हैं।

एमडीआर के अंतर्गत प्रस्तावित छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित निधि क्या है?

टियर-3 में पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को मिलाकर कुल 6 केंद्रों और टियर-1 व 2 केंद्रों, जिनमें केंद्र सरकार की ओर से किसी अधिसूचित योजना (जैसे कि पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा इत्यादि) भी शामिल हैं, में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी बनाए रखने और सब्सिडी दिए जाने हेतु एक समर्पित कोष का निर्माण किया जाएगा। इस कोष का इस्तेमाल व्यापारियों को जोड़ने के लिए इकोसिस्टम के सदस्यों को वित्तीय मदद प्रदान करने और मौजूदा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए भी किया जाएगा।

प्रस्तावित समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों को किस प्रकार मदद मिलेगी?

प्रस्तावित किया गया समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके लिए अधिग्रहण बैंकों/ भुगतान एग्रीगेटरों को व्यापारी जुड़ाव पहलों के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी और छोटे व्यापारियों की ओर से, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, टियर-III केंद्रों और उससे आगे के क्षेत्रों में, किए गए यूपीआई लेन-देन हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे निरंतर इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा, डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। विस्तृत रूपरेखा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह से अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।

यूपीआई के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना पर्याप्त क्यों नहीं है?

वार्षिक सरकारी प्रोत्साहन/ सब्सिडी, हालांकि शुरुआती समय में डिजिटल को अपनाने में तेजी लाने में मददगार है, लेकिन इसे भुगतान इंडस्ट्री की ओर से किए गए खर्चों की भरपाई के लिए स्थायी उपाय के बजाय अल्पकालिक मदद के तौर पर तैयार किया गया था। इंडस्ट्री के अनुमानों के आधार पर, यूपीआई भुगतान के संचालन, सर्वर बैंडविथ, धोखाधड़ी रोकथाम प्रणालियों और बैंक तकनीकी सहायता को बनाए रखने में सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल राजकोषीय बजट आवंटन पर निर्भर रहने से वित्तपोषण में अनिश्चितता पैदा होती है और बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ओर से दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी निवेश सीमित हो जाते हैं। एक वाणिज्यिक, सीमा-आधारित मॉडल में बदलाव निरंतर तकनीकी नवाचार के लिए विश्वसनीय पूंजी प्रदान करता है।

यह कदम पेमेंट ऐप ऑपरेटरों के बीच बाजार प्रतिस्पर्धा को कैसे प्रोत्साहन देगा?

एक संपोषित व्यावसायिक फ्रेमवर्क स्थापित करने से नए फिनटेक स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी कंपनियों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। जब भुगतान प्रोसेसिंग शून्य-एमडीआर (डिजिटल डिलीवरी रेट) शर्तों के अंतर्गत संचालित होती है, तो केवल उच्च पूंजी वाली तकनीकी कंपनियां ही दीर्घकालिक परिचालन घाटे को वहन कर सकती हैं। एक पूर्वानुमानित व्यावसायिक राजस्व मॉडल सभी के लिए समान अवसर प्रदान करता है, जिससे छोटे, नवोन्मेषी स्टार्टअप प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, विशेषीकृत भुगतान सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं और वित्तीय पहुंच का विस्तार कर सकते हैं। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा आखिरकार बेहतर सेवाओं, ऐप की बेहतर विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्पों की ओर ले जाती है।

यह नीति उभरते खतरों के खिलाफ साइबर सुरक्षा लचीलापन कैसे सुनिश्चित करती है?

एमडीआर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने, एन्क्रिप्शन अपग्रेड आदि में निवेश हेतु किया जा सकता है।

2026 तक यूपीआई का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार हो चुका है?

2026 तक, यूपीआई का वैश्विक विस्तार काफी बढ़ चुका है और दुनिया के 11 देशों में इसकी भुगतान सेवाएं सक्रिय हैं। एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर घरेलू आधार का निर्माण भारत को डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक नेतृत्व के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने में मददगार होगा।

वर्तमान में यूपीआई का लेन-देन की मात्रा और मूल्य का स्तर क्या है और इसे आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता क्यों है?

अभूतपूर्व जन स्वीकृति का प्रदर्शन करते हुए, यूपीआई ने अकेले अगस्त 2026 में कुल ₹29.9 लाख करोड़ राशि के 2,451 करोड़ लेन-देन संसाधित किए। यह भारी मात्रा भारतीय अर्थव्यवस्था के प्राथमिक वित्तीय इंजन के रूप में यूपीआई की भूमिका को उजागर करती है, जो प्रतिदिन करोड़ों भुगतानों का प्रबंधन करता है। इस पैमाने को संभालने के लिए भारी संख्या में सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज गति वाली दूरसंचार लाइनें, बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा निगरानी और विशेष बैंकिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। लेन-देन के ये आंकड़े इस बात को पुष्ट करते हैं कि प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आत्मनिर्भर वित्तपोषण फ्रेमवर्क स्थापित करना क्यों जरूरी था।

क्या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर सामान्य उपभोक्ताओं से शुल्क लिया जाएगा?

नहीं, यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क जारी रहेंगी। उपभोक्ता अब तक की तरह ही यूपीआई का इस्तेमाल करके निःशुल्क लेन-देन कर सकते हैं। यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्तिगत खाताधारक बिना किसी शुल्क की चिंता किए अपने सभी नियमित दैनिक खर्चों के लिए यूपीआई एप्लिकेशन का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। एमडीआर नीति यह सुनिश्चित करती है कि यूपीआई पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क और सुलभ बनी रहे।

क्या यूपीआई के पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन जैसे दोस्तों, परिवार या व्यक्तिगत संपर्कों को पैसे भेजने पर कोई शुल्क लगता है?

नहीं, पी2पी लेन-देन भुगतानकर्ता और प्राप्तकर्ता दोनों के लिए निःशुल्क रहेंगे। यूपीआई का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति को कोई भी राशि हस्तांतरित करने या प्राप्त करने (या स्वयं को हस्तांतरित करने) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। फिर चाहे आप परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज रहे हों, दोस्तों के साथ बिल बांट रहे हों, या अपने लिंक किए गए बैंक खातों में स्वयं को हस्तांतरित कर रहे हों, इन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा। नागरिक बिना किसी लेन-देन शुल्क के यूपीआई पर किसी भी स्वीकृत राशि का हस्तांतरण कर सकते हैं।

क्या यूपीआई ऐप यूपीआई भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क लेना शुरू कर देंगे?

नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाता यूपीआई के माध्यम से किए गए किसी भी भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क नहीं लेंगे। यूपीआई एप्लिकेशन को यूपीआई लेन-देन पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

क्या व्यापारियों की ओर से नाममात्र शुल्क का भुगतान शुरू करने पर दुकानों में उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी होगी?

नहीं, बाजार की गतिशीलता और ऐतिहासिक भुगतान रुझान दर्शाते हैं कि व्यापारी अधिक कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रोसेसिंग की मामूली लागत वहन करते हैं। भुगतान स्वीकार करने की लागत को मानक परिचालन खर्च माना जाता है, जिसकी भरपाई ग्राहकों की बढ़ती संख्या, उच्च औसत टिकट मूल्य और नकदी प्रबंधन के कम जोखिम से हो जाती है। चूंकि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर क्रेडिट कार्ड शुल्क से काफी कम है और केवल विशिष्ट लेन-देन सीमा से ऊपर ही लागू होता है, इसलिए दुकानदारों के पास खुदरा कीमतों को बढ़ाने का कोई आर्थिक प्रोत्साहन नहीं है। उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के लिए निश्चित मूल्य का ही भुगतान करते रहेंगे।

क्या मुझे स्थानीय विक्रेता पर क्यूआर कोड स्कैन करते समय शुल्क देना होगा?

नहीं, स्थानीय बाजारों, स्ट्रीट वेंडरों या छोटी खुदरा दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। क्यूआर लेन-देन के ग्राहक के सामने वाले हिस्से में कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे खरीदारी की राशि कितनी भी हो। यह नीति चाय की दुकानों और स्थानीय परिवहन जैसी दैनिक छोटी-मोटी खरीदारी को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क से बचाने के लिए बनाई गई है। उपभोक्ता पूरी तरह से आश्वस्त होकर क्यूआर कोड स्कैन करना जारी रख सकते हैं कि उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

क्या उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन के लिए कोई मासिक सीमा है?

नहीं, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्तरित सीमा नहीं है। यूजर्स पूरे महीने में बिना किसी शुल्क सीमा तक पहुंचे, जितने चाहें उतने वैध पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) या पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि निजी बैंक और एनपीसीआई कुल लेन-देन राशि पर मानक दैनिक सुरक्षा सीमाएं लागू करते हैं (आमतौर पर लेनदेन श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक), ये जोखिम प्रबंधन मापदंड हैं, न कि व्यावसायिक शुल्क स्तर पर। किसी भी स्थिति में, उपभोक्ता यूपीआई का कितनी भी बार इस्तेमाल करें, उन्हें कोई लेन-देन शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

सामान्य यूजर्स यूपीआई शुल्क के संबंध में आधिकारिक अपडेट कहां से सत्यापित कर सकते हैं?

नागरिकों को वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से सीधे प्रकाशित आधिकारिक सूचनाओं को देखने की सलाह दी जाती है। भुगतान शुल्कों के संबंध में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और भ्रामक रिपोर्टों के कारण, सरकार ने जनता से असत्यापित संदेशों को आगे न भेजने का आग्रह किया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), आरबीआई या एनपीसीआई की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां प्रामाणिक नियामक नीति का प्राथमिक स्रोत हैं। यूजर्स अपने प्राथमिक बैंकिंग एप्लिकेशन में भी सत्यापित सूचनाओं की जांच कर सकते हैं।

क्या एमडीआर की शुरुआत से ऑटो-डेबिट रिकरिंग पेमेंट जैसे यूटिलिटी बिल या ओटीटी/ म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन पर असर पड़ता है?

नहीं, स्वचालित रिकरिंग स्थायी निर्देश, जिन्हें यूपीआई मैंडेट या ऑटोपे के नाम से जाना जाता है, पर निर्धारित एमडीआर लेन-देन शुल्क नहीं लगता है। मासिक उपयोगिता बिल, ओटीटी स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन, सभी रिकरिंग निवेश आदि के लिए स्वचालित रिकरिंग हस्तांतरण का इस्तेमाल किए गए भुगतानों पर कोई निर्धारित एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।

क्या छोटे स्थानीय विक्रेताओं (पी2पीएम) से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लिया जाएगा?

नहीं। पी2पीएम फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर (एमडीआर) लागू रहेगा। ये वे छोटे विक्रेता हैं जिन्हें यूपीआई क्यूआर के माध्यम से सीधे उनके खातों में प्रति माह 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती है। पी2पीएम श्रेणी असंगठित खुदरा क्षेत्र में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता को प्रोत्साहन देती है। इसके साथ ही, छोटे विक्रेता विशेष सूक्ष्म व्यापारी खाता वर्गीकरण (पी2पीएम) के अंतर्गत काम करते हैं, जो उन्हें वाणिज्यिक शुल्कों से सुरक्षा प्रदान करता है। एमडीआर फ्रेमवर्क विशेष रूप से इस तरह से तैयार किया गया है कि असंगठित खुदरा क्षेत्र के छोटे व्यवसाय बिना किसी मार्जिन कटौती के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकें।

पी2पीएम फ्रेमवर्क क्या है और यह छोटे व्यापारियों की सुरक्षा कैसे करता है?

पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) फ्रेमवर्क एनपीसीआई की ओर से तैयार की गई एक विशेष खाता श्रेणी है, जिसका उद्देश्य छोटे विक्रेताओं को सीधे उनके निजी बैंक खातों में भुगतान प्राप्त करने में मदद करना है। पी2पीएम दिशानिर्देशों के अंतर्गत, यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर का लाभ मिलता है। यह वर्गीकरण अनौपचारिक स्ट्रीट वेंडर सेटअप और औपचारिक वाणिज्यिक मर्चेंट एक्वायरिंग खातों के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे सूक्ष्म व्यवसायों के लिए कोई लागत नहीं आती है। यह असंगठित क्षेत्र में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देता है।

क्या छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर कोड को अपग्रेड करने या बदलने की जरूरत है?

नहीं। मौजूदा क्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर सामान्य तरीके से काम करता रहेगा। व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर स्टैंड या साउंडबॉक्स को बदलने, पुनः पंजीकृत करने या उनमें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। दुकानों में लगे हुए सभी यूपीआई क्यूआर कोड बिना किसी रुकावट के भुगतान प्रक्रिया जारी रखेंगे। व्यापारी बैंक शाखा में जाए बिना या सॉफ्टवेयर अपडेट किए बिना अपने मौजूदा सेटअप के माध्यम से ग्राहकों से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी छोटे व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त होता है तो क्या होता है?

एमडीआर की प्रयोज्यता समग्र व्यापारी खाता वर्गीकरण के माध्यम से निर्धारित की जाती है। ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त करने पर पी2पीएम जैसे छूट प्राप्त श्रेणियों के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा।

समर्पित लघु व्यापारी कोष के लिए विस्तृत रूपरेखा को कब अंतिम रूप दिया जाएगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ सलाह मशविरा करके लघु व्यापारी निधि के लिए विस्तृत परिचालन फ्रेमवर्क को अगले तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। इस सहयोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से पूंजी आवंटन के सटीक मानदंड, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और व्यापारी प्रोत्साहन संरचनाएं निर्धारित की जाएंगी। हितधारकों के साथ परामर्श से यह सुनिश्चित होगा कि योजना जमीनी स्तर पर वितरण संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करे।

क्या शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारी को जीएसटी के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है?

नहीं, यूपीआई लेन-देन पर शून्य एमडीआर सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत शून्य-रेटेड प्रोसेसिंग की पात्रता मासिक संग्रहण सीमा (प्रति माह ₹1 लाख तक) और बैंक खाता वर्गीकरण की ओर से निर्धारित की जाती है, चाहे कर पंजीकरण की स्थिति कुछ भी हो। अनिवार्य वैधानिक कर सीमा से नीचे काम करने वाले सूक्ष्म उद्यम जीएसटी दस्तावेज प्रदान किए बिना डिजिटल भुगतान संसाधित कर सकते हैं। इससे अनौपचारिक सूक्ष्म व्यवसायों को डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ने में आने वाली नियामक अनुपालन संबंधी बाधाओं से छूट मिलती है।

अधिग्रहण करने वाले बैंक शून्य एमडीआर के लिए पात्र छोटे व्यापारियों (पी2पीएम) की पहचान कैसे करेंगे?

अधिग्रहण करने वाले बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता, पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यापारियों के लिए प्रति माह ₹1 लाख की आने वाले लेन-देन सीमा की निगरानी के लिए लेन-देन गति जांच का इस्तेमाल करते हैं। लगातार 3 महीने तक प्रति माह ₹1 लाख से अधिक यूपीआई भुगतान का आने वाला क्रेडिट प्राप्त करने वाले व्यापारियों को औपचारिक रूप से पी2एम श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है?

हां, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पी2पीएम व्यापारियों की ओर से स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है। ग्रामीण भारत में डिजिटल तकनीक को प्रोत्साहन देना एक प्रमुख नीतिगत उद्देश्य बना हुआ है। सभी ग्रामीण दुकानदारों को सीमा छूट (₹2,000 से कम के भुगतान पर शून्य एमडीआर) का लाभ मिलेगा और प्रस्तावित समर्पित भुगतान प्रोत्साहन कोष के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त मदद भी मिलेगी। इसके साथ ही, अधिग्रहण करने वाले बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय दुकानदारों पर लागत का बोझ काफी कम हो जाएगा।

बड़े वाणिज्यिक लेन-देन के लिए कौन सा एमडीआर लागू होता है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का मामूली एमडीआर लागू किया जाएगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। यह 0.4% की दर क्रेडिट कार्ड या पेमेंट गेटवे जैसे वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तुलना में काफी कम है। इसके साथ ही, ₹2,000 की सीमा से कम के लेन-देन स्थापित व्यावसायिक संस्थाओं के लिए भी निःशुल्क रहेंगे। यह संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि उद्यम व्यापारी सिस्टम के रखरखाव में उचित योगदान दें, साथ ही दैनिक लेन-देन लागत को भी बेहद कम रखें।

क्या बहुत अधिक राशि वाले यूपीआई भुगतान पर अधिकतम शुल्क की कोई सीमा है?

हां, बड़े लेन-देन करने वाले उद्यमों की सुरक्षा के लिए, ₹75,000 और उससे अधिक के भुगतानों पर प्रति लेन-देन पर ₹300 की अधिकतम शुल्क सीमा निर्धारित की गई है। उदाहरण के लिए, ₹1,00,000 के लेन-देन पर ₹400 का प्रतिशत-आधारित शुल्क नहीं लगेगा; बल्कि, शुल्क ₹300 की निर्धारित सीमा पर ही समाप्त हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च मूल्य के लेन-देन की लागत पूर्वानुमानित और प्रतिस्पर्धी बनी रहे।

प्रतिशत दर के बजाय निश्चित एमडीआर के लिए कौन सी विशिष्ट श्रेणियां पात्र हैं?

रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन जैसी विशिष्ट व्यापारी श्रेणियों के लिए, 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेन-देन 5 रुपये का एक समान मासिक दर (एमडीआर) लागू होगा। 0.4% की परिवर्तनीय दर लागू करने के बजाय, ये विशिष्ट क्षेत्र लेन-देन राशि की परवाह किए बिना 5 रुपये का निश्चित शुल्क अदा करेंगे। यह एक समान दर मॉडल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं, उपयोगिता बिल संग्रह और ईंधन खुदरा जैसे कम लाभ वाले क्षेत्रों में लागत बढ़ोतरी को रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यक उपभोक्ता सेवाएं कम लागत वाली और डिजिटल रूप से कुशल बनी रहें।

क्या एंटरप्राइज मर्चेंट एमडीआर का बोझ खरीददार पर डाल सकते हैं?

नहीं, यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते समय पंजीकृत व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ता केवल निर्धारित मूल्य का ही भुगतान करें।

सटीक लेन-देन (जैसे, ₹5,000 बनाम ₹1,00,000) पर एमडीआर की गणना कैसे की जाती है?

एमडीआर की गणना लेन-देन मूल्य सीमा के आधार पर एक स्पष्ट और अनुमानित सूत्र का पालन करती है। ₹3,000 की खरीदारी पर, 0.4% की दर लागू करने पर व्यापारी की ओर से अपने अधिग्रहण बैंक को ₹12 का एमडीआर शुल्क देना होता है। ₹50,000 की खरीदारी पर, 0.4% शुल्क ₹200 के बराबर होता है। हालांकि, ₹1,00,000 की उच्च-मूल्य वाली खरीदारी के लिए, 0.4% की गणना (जो ₹400 के बराबर है) ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा से अधिक हो जाती है (₹75,000 और उससे अधिक के भुगतान के लिए प्रति लेन-देन ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा है। ₹2,000 से कम के किसी भी लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगता है)।

मर्चेंट को भुगतान की गई राशिलागू एमडीआरमर्चेंट की ओर से भुगतान किया गया एमडीआर
₹ 2,000₹ 0
₹ 3,0000.40% ₹ 12
₹ 50,000 0.40% ₹ 200
₹ 75,000 और उससे अधिकनिश्चित ₹ 300 ₹ 300

क्या एमडीआर यूपीआई या क्रेडिट लाइन से जुड़े क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए लेन-देन पर लागू होता है?

क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान, जैसे कि यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड या पूर्व-स्वीकृत बैंक क्रेडिट लाइनें, अलग क्रेडिट उत्पाद नियमों के अंतर्गत संचालित होते हैं। चूंकि क्रेडिट-लिंक्ड लेन-देन में जारीकर्ता बैंकों की ओर से वित्तपोषित अल्पकालिक लोन शामिल होते हैं, इसलिए वे मानक क्रेडिट कार्ड दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। इस संशोधन में चर्चा की गई एमडीआर विशेष रूप से यूजर्स खाते से व्यापारी खाते में सीधे किए जाने वाले यूपीआई लेन-देन पर लागू होती है।

यूपीआई के माध्यम से पूंजी बाजार लेन-देन पर कौन सी विशिष्ट एमडीआर दरें और सीमाएं लागू होती हैं?

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों को किए जाने वाले भुगतानों सहित पूंजी बाजार लेन-देन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लेन-देन मूल्य का नाममात्र 0.02% निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है। औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह शुल्क मानक वाणिज्यिक लेन-देन दरों से कम है।

इस पूंजी बाजार एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत कौन सी संस्थाएं और लेन-देन के प्रकार शामिल हैं?

यह विशिष्ट एमडीआर श्रेणी पूंजी बाजारों में कार्यरत सभी विनियमित संस्थाओं को स्पष्ट रूप से कवर करती है, जिनमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (म्यूचुअल फंड), एसईबीआई-पंजीकृत स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और निवेश प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह इक्विटी खरीद, डेट बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड खरीद और ब्रोकर वॉलेट टॉप-अप के लिए यूपीआई के माध्यम से किए गए फंड ट्रांसफर पर लागू होता है। इस श्रेणी को अलग से परिभाषित करके, यह सुनिश्चित किया जाता है कि पूंजी बाजार ट्रांसफर नियमित खुदरा खरीदारी या सामान्य सेवा भुगतानों से अलग हों।

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क्या बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष एमडीआर रियायतों के लिए पात्र हैं?

हां, यूपीआई के माध्यम से स्वीकार किए गए बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष निश्चित-दर की छूट के पात्र हैं। ₹2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम भुगतान पर, प्रतिशत-आधारित शुल्क के बजाय प्रति लेन-देन ₹5 का निश्चित एमडीआर लागू होता है। यह रियायती मॉडल सुनिश्चित करता है कि उच्च मूल्य के वार्षिक या अर्ध-वार्षिक बीमा भुगतान करने वाले पॉलिसीधारकों को भारी बैकएंड शुल्क का सामना न करना पड़े। बीमा कंपनियों को कम लागत वाले डिजिटल संग्रह से लाभ होता है, जिससे पूरे भारत में बीमा कवरेज का विस्तार करने में मदद मिलती है।

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खरीद के लिए एमडीआर कैसे काम करता है?

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर की गई ईंधन खरीद पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 की एक समान रियायती दर लागू होती है। यह ₹5 की एक समान फीस पेट्रोल पंप संचालकों को टैंक रिफिल पर लगने वाले उच्च प्रोसेसिंग शुल्क से बचाती है। ₹2,000 से कम के सभी ईंधन भुगतानों पर एमडीआर 0% रहता है, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों के लिए ईंधन भरना पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हो जाता है, जबकि ईंधन स्टेशन संचालकों को ऐसे लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं देना पड़ता है।

क्या सरकारी उपयोगिता बिल संग्रह (बिजली, पानी) पर प्रतिशत एमडीआर लागू होगा?

बिजली वितरण, नगरपालिका जल शुल्क और पाइपलाइन की ओर से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस जैसे सार्वजनिक उपयोगिता भुगतान निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के उपयोगिता बिल भुगतानों पर 0.4% बदलाव दर के बजाय ₹5 का एक समान रियायती मासिक दर एमडीआर लागू होता है। ₹2,000 से कम के उपयोगिता लेन-देन पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता है। यह फ्रेमवर्क सुनिश्चित करता है कि राज्य उपयोगिता बोर्ड और नगर निगम उच्च प्रसंस्करण शुल्क लगाए बिना बिल संग्रह को डिजिटल बना सकें, जिससे सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं सस्ती बनी रहें।

क्या शैक्षणिक संस्थान मानक एमडीआर प्रतिशत शुल्क से मुक्त हैं?

स्कूल ट्यूशन, विश्वविद्यालय सत्र शुल्क और संस्थागत प्रवेश परीक्षाओं सहित शैक्षणिक शुल्क संग्रह, निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर निश्चित-फीस संरचना या सीमित प्रोसेसिंग दरें लागू होती हैं, जिससे बड़ी राशि पर लगने वाले उच्च प्रतिशत-आधारित शुल्कों से बचा जा सकता है। ₹2,000 तक के शैक्षणिक लेन-देन पूरी तरह से एमडीआर से मुक्त हैं। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि स्कूल, कॉलेज और छात्र भारी प्रशासनिक शुल्कों के बिना डिजिटल रूप से ट्यूशन फीस का भुगतान कर सकें।

MP News: ‘न धमकी, न दबाव…’; धर्म परिवर्तन केस में मुस्लिम युवक बरी, पत्नी ने जज से कही ये बात

MP News: मध्य प्रदेश के भोपाल की एक सत्र अदालत ने जबरन धर्म परिवर्तन और दबाव डालकर शादी कराने के आरोपों से जुड़े मामले में 26 वर्षीय मुस्लिम युवक को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ठोस सबूतों के आधार पर साबित करने में विफल रहा। मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया, जब आरोपी से शादी करने वाली हिंदू महिला ने अदालत के समक्ष पुलिस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि उस पर न तो धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और न ही उसे किसी तरह की धमकी दी गई।

पत्नी ने नकारे जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप

मामला वर्ष 2024 में सामने आया था। स्थानीय पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि युवक ने शादी के लिए अपनी पहचान छिपाई और बाद में महिला पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मध्य प्रदेश के धर्म की स्वतंत्रता से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं की। जिरह के दौरान और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत दर्ज अपने बयान में महिला ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने अपनी इच्छा से शादी की थी।

महिला ने कोर्ट में क्या कहा?

अपनी मर्जी से शादी: महिला ने अदालत को बताया कि उसने आरोपी से अपनी स्वतंत्र इच्छा से शादी की थी और उसे अपने पति की पृष्ठभूमि की जानकारी थी। कोई धमकी या दबाव नहीं। उसने कहा कि आरोपी या उसके परिवार की ओर से उसे किसी तरह की धमकी नहीं दी गई और न ही शारीरिक हिंसा या धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। महिला ने बताया कि शुरुआती पुलिस रिपोर्ट गलतफहमी और परिवार के दबाव की वजह से सामने आई थी। उसने आरोपी पर किसी आपराधिक कृत्य का आरोप लगाने से इनकार किया।

कमजोर पड़ा अभियोजन का मामला

अदालत के सामने जब शिकायतकर्ता ने ही जबरन धर्म परिवर्तन और दबाव के आरोपों से इनकार कर दिया, तो अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। अभियोजन आरोपी के खिलाफ ऐसे स्वतंत्र गवाह, दस्तावेज या अन्य ठोस सामग्री पेश नहीं कर सका, जिससे कथित धोखाधड़ी या जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप साबित हो सकें। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मध्य प्रदेश के धर्म की स्वतंत्रता से संबंधित कानून के तहत आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए गलत पहचान या गलत जानकारी, बल, अनुचित प्रभाव या दबाव जैसे तत्वों का स्पष्ट प्रमाण जरूरी है।

सबूतों के अभाव में आरोपी को मिली राहत

कोर्ट ने पाया कि मामले में मुख्य शिकायतकर्ता की गवाही अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं करती। इसके अलावा आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त स्वतंत्र या भौतिक साक्ष्य भी अदालत के सामने नहीं रखा गया। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके चलते 26 वर्षीय आरोपी को मामले में पूर्ण रूप से बरी कर दिया गया। यह फैसला ऐसे मामलों में अदालत के समक्ष ठोस साक्ष्य और शिकायतकर्ता के न्यायिक बयान की अहमियत को भी रेखांकित करता है।

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‘आप तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं…’ सांसद कंगना रनौत ने MPLADS फंड खर्च न होने पर अफसरों को लगाई फटकार

Kangana Ranaut: हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर, शनिवार को BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई।

BJP सांसद ने सांसद निधि (MPLADS) के तहत उपलब्ध फंड का पूरा इस्तेमाल न किए जाने को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। X पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उनके MP फंड में करोड़ों रुपये उपलब्ध थे, लेकिन उनमें से केवल आधी रकम का ही इस्तेमाल किया गया है।

DISHA मीटिंग में कंगना रनौत का गुस्सा: वीडियो

रनौत ने अधिकारियों से कहा, “मुझे ये बेकार के जुमले (झूठे वादे) मत सुनाइए। मुझे हर DISHA कमिटी मीटिंग में यही सुनने को मिलता है।”

उन्होंने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDOs) से खर्च की रिपोर्ट मांगी। कंगना ने कहा कि इससे पहले अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि काम में कोई रुकावट नहीं है और सांसद निधि की करीब 90 फीसदी रकम खर्च की जा चुकी है।

कंगना ने आगे कहा, “अब बस काम पूरा करके दिखाइए। अब सिर्फ बातें करने का समय नहीं रहा। ये मामले दो साल पुराने हैं। कुछ डेढ़-दो साल पुराने मामले हैं। अब काम पूरा कीजिए और मुझे रिपोर्ट दीजिए कि काम हो गया है! कंगना ने 11 करोड़ रुपये दिए, फिर भी एक भी काम नहीं हुआ। यह कितनी अक्षमता और शर्मनाक बात है।”

रनौत ने आरोप लगाया कि बैठकों में दिखाए गए खर्च के आंकड़े असल खर्च से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने एजेंसी की उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें दावा किया गया था कि MPLADS फंड का 30-40 प्रतिशत हिस्सा धोखाधड़ी करने वाले लाभार्थियों को दिया गया था और उसे वापस नहीं पाया जा सका।

‘अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं’

एक्टर से नेता बनीं रनौत ने कहा कि एक सांसद के तौर पर उनके काम को लेकर नेशनल मीडिया में उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अधिकारी तो मुझसे भी बेहतर एक्टिंग करते हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंडी के लोग रुके हुए प्रोजेक्ट्स के बारे में लगातार रील्स पोस्ट कर रहे हैं, जबकि अधिकारी अपने दफ्तरों में उन पर हंस रहे हैं और उन्हें “कोस” रहे हैं।

कंगना ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे बिना किसी देरी के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को पूरा करें और उपलब्ध MPLADS फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करें।

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सुभाष चंद्रा की मुश्किल बढ़ी, अब CBI ने लोन फ्रॉड मामले में केस दर्ज किया

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब सीबीआई ने एक लोन फ्रॉड मामले में उनके और दूसरे लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। 31 अगस्त को फाइल एफआईआर के मुताबिक, यह लोन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था।

पहले LIC HF ने मामले में की थी शिकायत

इस मामले में पहले LIC Housing Finance ने शिकायत की थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि चंद्रा, लोन लेने वाली कंपनियों और उनके डायरेक्टर्स ने लोन लेने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसे डॉक्युमेंट्स पेश किए जिनमें चंद्रा का नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे। अब CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट सहित दूसरे आरोपों में मामला दर्ज किया है।

LIC HF ने चंद्रा की गारंटी पर दिए थे लोन

LIC Housing Finance ने मार्च 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को बिजनेस के विस्तार से लिए 500 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इस लोन के लिए चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। अगस्त 2018 में LICHF ने और 480 करोड़ रुपये का लोन Digital Subscriber Management and Consultancy Services और Spririt Infrapower and Multiventures को एक रेंटल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी के तहत दिया। इस लोन के लिए भी चंद्रा ने अपनी पर्सनल गारंटी दी थी।

नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स का इस्तेमाल

शिकायत में यह कहा गया है कि पहला लोन आंशिक रूप से नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। चंद्रा ने यह सर्टिफिकेट पेश किया था, जिसमें उनका नेटवर्थ 31 मार्च, 2017 को 59,113 करोड़ रुपये बताया गया था। दूसरा लोन आंशिक रूप से दूसरे सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। इस सर्टिफिकेट में नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।

LIC HF के दोनों लोन पर कंपनियों ने किए डिफॉल्ट

बाद में दोनों ही लोन पर कंपनियों ने डिफॉल्ट किया। वसंत सागर के लोन में 570.50 करोड़ रुपये आउटस्टैंडिंग अमाउंट (बकाया पैसा) है, जबकि दूसरे लोन में आउटस्टैंडिंग अमाउंट 507.25 करोड़ रुपये है। LIC Housing Finance ने अपनी शिकायत में यह कहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि चंद्रा ने बाद में पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स के दौरान सर्टिफिकेट में बताए गए अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया।

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चंद्रा ने खुद अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया

शिकायत के मुताबिक, चंद्रा ने कहा कि 2024 में उनका नेटवर्थ 31.79 करो़ड़ रुपये था और यहां तक कि 2017-18 में भी यह 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं था। LICHF ने कहा है कि चंद्रा ने लोन लेने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टर्स और अधिकारियों के साथ मिलकर यह फ्रॉड किया। नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए गए। बाद में लोन लेने वाली कंपनियों ने लोन के पैसे का दुरुपयोग किया।

कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा के वैनकूवर पुलिस विभाग (VPD) में करीब 20 साल से सेवा दे रहे पंजाबी मूल के पुलिस अफसर और युवाओं के लिए काम करने वाली संस्था किड्स प्ले यूथ के प्रमुख कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ को लंबी जांच के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कथित सहयोगी सरबजीत सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया है। काल दोसांझ पर धोखाधड़ी, चोरी और विश्वासघात समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े 6 मामले दर्ज हैं। इधर, काल दोसांझ की पत्नी और सरी से पार्षद पद की उम्मीदवार सैंडी दोसांझ ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस घर पहुंची, उस समय उनकी बेटी सो रही थी और उनकी सास घर पर थीं, जबकि काल दोसांझ घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया। सैंडी ने कार्रवाई का संबंध उनके पार्षद चुनाव लड़ने से होने की आशंका भी जताई और कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कोई अपराध नहीं किया, वे निर्दोष हैं। सरे स्थित घर पर पुलिस की छापेमारी पुलिस ने सरे में 129 स्ट्रीट और 59 एवेन्यू के पास स्थित काल दोसांझ के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को घर से दस्तावेजों से भरे कई बक्से बाहर ले जाते हुए देखा गया।ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने दोसांझ और सरबजीत सिंह गिल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। दोसांझ पर 9, साथी पर 6 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, काल दोसांझ पर कुल 9 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। इनमें: वहीं, सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े कथित अपराध 8 दिसंबर 2017 से 25 जुलाई 2025 के बीच हुए। ये मामले वैनकूवर, सरे और ब्रिटिश कोलंबिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़े बताए गए हैं। रियल एस्टेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कथित मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों से रियल एस्टेट में निवेश करने और उस पर भारी रिटर्न देने का वादा करके बड़ी रकम ली गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फगवाड़ा के पास गांव के रहने वाले हैं दोसांझ कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ मूल रूप से पंजाब में फगवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने करीब 20 वर्षों तक वैनकूवर पुलिस विभाग में सेवा दी है। पुलिस सेवा के अलावा वे सरे स्थित ‘किड्सप्ले फाउंडेशन’ से भी जुड़े हुए थे। यह संस्था युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक अवसरों की ओर प्रेरित करने के लिए काम करती है। स्थानीय समुदाय में दोसांझ अपने सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। पत्नी सैंडी दोसांझ की बड़ी बातें… ************* ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस MLA ने CM की पत्नी का लीगल नोटिस फाड़ा: खैहरा बोले- जो चाहे कर लो, मैं जवाब नहीं दूंगा; रेप केस में ₹5 करोड़ रिश्वत के आरोपों का मामला पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

satyendra jain

दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। ALSO READ: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

 

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विजय सिंह ने जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सत्येंद्र जैन जमानत दे दी। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को जमानत मिली। भाजपा का ऑपरेशन पंजाब फेल। 'सत्यमेव जयते'।

एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं।  जमानत याचिका पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।

 

जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा।

 

एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

Uber ड्राइवर ने गलती से भेजे गए ₹37,000 पैसेंजर को लौटाए, इनाम लेने से भी किया मना

कोलकाता की एक पत्रकार ने बताया कि कैसे एक उबर ड्राइवर ने उन्हें 37,000 रुपये कुछ ही मिनटों में लौटा दिए, जब उन्होंने गलती से Google Pay के जरिए उसे पैसे भेज दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लोगों में उनका भरोसा फिर से जगा दिया है।

संचारी घोष ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 1 सितंबर को Google Pay से पेमेंट करते समय उन्होंने गलती से आनंद दास नाम के गलत व्यक्ति को 37,000 रुपये भेज दिए थे।

मनीकंट्रोल से बात करते हुए घोष ने कहा कि वह एक ऐसे कॉन्टैक्ट को पैसे भेजना चाहती थीं, जिसका पहला नाम और सरनेम उनके फोन में सेव किसी दूसरे व्यक्ति जैसा ही था। उन्हें अपनी गलती का एहसास कई घंटों बाद हुआ, जब जिस व्यक्ति को पैसे मिलने थे, उसने पेंडिंग पेमेंट के बारे में उनसे संपर्क किया।

उन्होंने पैसे पाने वाले शख्स को कैसे ढूंढा?

गलती का पता चलने के बाद, घोष ने HDFC बैंक और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल से संपर्क किया। अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखने और यह शक होने पर कि पैसे पाने वाला व्यक्ति शायद उनकी पिछली किसी राइड से जुड़ा हो सकता है, उन्होंने उबर से भी संपर्क किया।

लेकिन, जब आधिकारिक तरीकों से मामले पर कार्रवाई हो रही थी, तब उन्होंने खुद भी छानबीन करने का फैसला किया।

घोष ने पब्लिकेशन को बताया कि उन्होंने अपने पिछले ट्रांजैक्शन चेक किए और पाया कि उन्होंने 24 अगस्त को आनंद दास नाम के ड्राइवर को उबर का 180 रुपये का किराया दिया था।

इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली राइड की जानकारी निकाली और सीधे उस ड्राइवर से संपर्क करने में कामयाब रहीं।

15 मिनट में पैसे वापस मिल गए

घोष ने बताया कि उन्होंने दास को पूरी बात बताई। दास ने तुरंत ट्रांजैक्शन की जांच की और पूरे 37,000 रुपये वापस कर दिए।

उन्होंने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया, “पूरी बात सुनने के बाद, उन्होंने तुरंत जांच की और पूरी रकम वापस कर दी।” पत्रकार ने आगे बताया कि बाद में उन्होंने दास से मिलकर उन्हें तारीफ के तौर पर कुछ छोटा-सा तोहफा देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। इसके बजाय, दास ने उनसे कहा: “आपकी तारीफ और भरोसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। 37,000 रुपये से मैं कब तक गुजारा कर पाता? लेकिन यह भरोसा मुझे बहुत आगे ले जाएगा।”

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