सुभाष चंद्रा की मुश्किल बढ़ी, अब CBI ने लोन फ्रॉड मामले में केस दर्ज किया

एस्सेल ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब सीबीआई ने एक लोन फ्रॉड मामले में उनके और दूसरे लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला 1,322 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। 31 अगस्त को फाइल एफआईआर के मुताबिक, यह लोन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था।

पहले LIC HF ने मामले में की थी शिकायत

इस मामले में पहले LIC Housing Finance ने शिकायत की थी। इसमें उसने आरोप लगाया था कि चंद्रा, लोन लेने वाली कंपनियों और उनके डायरेक्टर्स ने लोन लेने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए। इतना ही नहीं उन्होंने ऐसे डॉक्युमेंट्स पेश किए जिनमें चंद्रा का नेटवर्थ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए थे। अब CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट सहित दूसरे आरोपों में मामला दर्ज किया है।

LIC HF ने चंद्रा की गारंटी पर दिए थे लोन

LIC Housing Finance ने मार्च 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को बिजनेस के विस्तार से लिए 500 करोड़ रुपये का लोन दिया था। इस लोन के लिए चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी। अगस्त 2018 में LICHF ने और 480 करोड़ रुपये का लोन Digital Subscriber Management and Consultancy Services और Spririt Infrapower and Multiventures को एक रेंटल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी के तहत दिया। इस लोन के लिए भी चंद्रा ने अपनी पर्सनल गारंटी दी थी।

नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स का इस्तेमाल

शिकायत में यह कहा गया है कि पहला लोन आंशिक रूप से नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। चंद्रा ने यह सर्टिफिकेट पेश किया था, जिसमें उनका नेटवर्थ 31 मार्च, 2017 को 59,113 करोड़ रुपये बताया गया था। दूसरा लोन आंशिक रूप से दूसरे सर्टिफिकेट के आधार पर मंजूर किया गया था। इस सर्टिफिकेट में नेटवर्थ 40,562 करोड़ रुपये बताया गया था।

LIC HF के दोनों लोन पर कंपनियों ने किए डिफॉल्ट

बाद में दोनों ही लोन पर कंपनियों ने डिफॉल्ट किया। वसंत सागर के लोन में 570.50 करोड़ रुपये आउटस्टैंडिंग अमाउंट (बकाया पैसा) है, जबकि दूसरे लोन में आउटस्टैंडिंग अमाउंट 507.25 करोड़ रुपये है। LIC Housing Finance ने अपनी शिकायत में यह कहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि चंद्रा ने बाद में पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसिडिंग्स के दौरान सर्टिफिकेट में बताए गए अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया।

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चंद्रा ने खुद अपने नेटवर्थ को मानने से इनकार कर दिया

शिकायत के मुताबिक, चंद्रा ने कहा कि 2024 में उनका नेटवर्थ 31.79 करो़ड़ रुपये था और यहां तक कि 2017-18 में भी यह 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं था। LICHF ने कहा है कि चंद्रा ने लोन लेने वाली कंपनियों, उनके डायरेक्टर्स और अधिकारियों के साथ मिलकर यह फ्रॉड किया। नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने के लिए फर्जी डॉक्युमेंट्स इस्तेमाल किए गए। बाद में लोन लेने वाली कंपनियों ने लोन के पैसे का दुरुपयोग किया।

कनाडा में पंजाबी मूल का पुलिस अफसर गिरफ्तार:घर से दस्तावेजों से भरे बक्से ले गई पुलिस; धोखाधड़ी-चोरी और विश्वासघात के 9 केस

कनाडा के वैनकूवर पुलिस विभाग (VPD) में करीब 20 साल से सेवा दे रहे पंजाबी मूल के पुलिस अफसर और युवाओं के लिए काम करने वाली संस्था किड्स प्ले यूथ के प्रमुख कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ को लंबी जांच के बाद गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कथित सहयोगी सरबजीत सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया है। काल दोसांझ पर धोखाधड़ी, चोरी और विश्वासघात समेत 9 केस दर्ज हैं, जबकि सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े 6 मामले दर्ज हैं। इधर, काल दोसांझ की पत्नी और सरी से पार्षद पद की उम्मीदवार सैंडी दोसांझ ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुलिस घर पहुंची, उस समय उनकी बेटी सो रही थी और उनकी सास घर पर थीं, जबकि काल दोसांझ घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके परिवार को घर से बाहर निकाल दिया। सैंडी ने कार्रवाई का संबंध उनके पार्षद चुनाव लड़ने से होने की आशंका भी जताई और कहा कि उन्होंने या उनके परिवार ने कोई अपराध नहीं किया, वे निर्दोष हैं। सरे स्थित घर पर पुलिस की छापेमारी पुलिस ने सरे में 129 स्ट्रीट और 59 एवेन्यू के पास स्थित काल दोसांझ के घर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों को घर से दस्तावेजों से भरे कई बक्से बाहर ले जाते हुए देखा गया।ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने दोसांझ और सरबजीत सिंह गिल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि की है। दोसांझ पर 9, साथी पर 6 केस दर्ज पुलिस के अनुसार, काल दोसांझ पर कुल 9 आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। इनमें: वहीं, सरबजीत सिंह गिल पर धोखाधड़ी और चोरी से जुड़े कुल 6 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े कथित अपराध 8 दिसंबर 2017 से 25 जुलाई 2025 के बीच हुए। ये मामले वैनकूवर, सरे और ब्रिटिश कोलंबिया के अन्य क्षेत्रों से जुड़े बताए गए हैं। रियल एस्टेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह कथित मामला एक बड़े निवेश घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों से रियल एस्टेट में निवेश करने और उस पर भारी रिटर्न देने का वादा करके बड़ी रकम ली गई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फगवाड़ा के पास गांव के रहने वाले हैं दोसांझ कुलविंदर सिंह उर्फ काल दोसांझ मूल रूप से पंजाब में फगवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने करीब 20 वर्षों तक वैनकूवर पुलिस विभाग में सेवा दी है। पुलिस सेवा के अलावा वे सरे स्थित ‘किड्सप्ले फाउंडेशन’ से भी जुड़े हुए थे। यह संस्था युवाओं को अपराध और नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक अवसरों की ओर प्रेरित करने के लिए काम करती है। स्थानीय समुदाय में दोसांझ अपने सामाजिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। पत्नी सैंडी दोसांझ की बड़ी बातें… ************* ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस MLA ने CM की पत्नी का लीगल नोटिस फाड़ा: खैहरा बोले- जो चाहे कर लो, मैं जवाब नहीं दूंगा; रेप केस में ₹5 करोड़ रिश्वत के आरोपों का मामला पंजाब के CM भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर दोनों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। (पढ़ें पूरी खबर)

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

satyendra jain

दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। ALSO READ: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

 

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विजय सिंह ने जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सत्येंद्र जैन जमानत दे दी। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को जमानत मिली। भाजपा का ऑपरेशन पंजाब फेल। 'सत्यमेव जयते'।

एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं।  जमानत याचिका पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।

 

जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा।

 

एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

Uber ड्राइवर ने गलती से भेजे गए ₹37,000 पैसेंजर को लौटाए, इनाम लेने से भी किया मना

कोलकाता की एक पत्रकार ने बताया कि कैसे एक उबर ड्राइवर ने उन्हें 37,000 रुपये कुछ ही मिनटों में लौटा दिए, जब उन्होंने गलती से Google Pay के जरिए उसे पैसे भेज दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लोगों में उनका भरोसा फिर से जगा दिया है।

संचारी घोष ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 1 सितंबर को Google Pay से पेमेंट करते समय उन्होंने गलती से आनंद दास नाम के गलत व्यक्ति को 37,000 रुपये भेज दिए थे।

मनीकंट्रोल से बात करते हुए घोष ने कहा कि वह एक ऐसे कॉन्टैक्ट को पैसे भेजना चाहती थीं, जिसका पहला नाम और सरनेम उनके फोन में सेव किसी दूसरे व्यक्ति जैसा ही था। उन्हें अपनी गलती का एहसास कई घंटों बाद हुआ, जब जिस व्यक्ति को पैसे मिलने थे, उसने पेंडिंग पेमेंट के बारे में उनसे संपर्क किया।

उन्होंने पैसे पाने वाले शख्स को कैसे ढूंढा?

गलती का पता चलने के बाद, घोष ने HDFC बैंक और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल से संपर्क किया। अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखने और यह शक होने पर कि पैसे पाने वाला व्यक्ति शायद उनकी पिछली किसी राइड से जुड़ा हो सकता है, उन्होंने उबर से भी संपर्क किया।

लेकिन, जब आधिकारिक तरीकों से मामले पर कार्रवाई हो रही थी, तब उन्होंने खुद भी छानबीन करने का फैसला किया।

घोष ने पब्लिकेशन को बताया कि उन्होंने अपने पिछले ट्रांजैक्शन चेक किए और पाया कि उन्होंने 24 अगस्त को आनंद दास नाम के ड्राइवर को उबर का 180 रुपये का किराया दिया था।

इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली राइड की जानकारी निकाली और सीधे उस ड्राइवर से संपर्क करने में कामयाब रहीं।

15 मिनट में पैसे वापस मिल गए

घोष ने बताया कि उन्होंने दास को पूरी बात बताई। दास ने तुरंत ट्रांजैक्शन की जांच की और पूरे 37,000 रुपये वापस कर दिए।

उन्होंने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया, “पूरी बात सुनने के बाद, उन्होंने तुरंत जांच की और पूरी रकम वापस कर दी।” पत्रकार ने आगे बताया कि बाद में उन्होंने दास से मिलकर उन्हें तारीफ के तौर पर कुछ छोटा-सा तोहफा देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। इसके बजाय, दास ने उनसे कहा: “आपकी तारीफ और भरोसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। 37,000 रुपये से मैं कब तक गुजारा कर पाता? लेकिन यह भरोसा मुझे बहुत आगे ले जाएगा।”

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‘8 अरब लोगों के लिए लैपटॉप खरीदने लायक काला धन मौजूद’, ग्लोबल मनी लॉन्ड्रिंग पर बोले CJI सूर्यकांत

CJI Surya Kant: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने दुनिया भर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े पैमाने पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि एक साल में दुनिया भर में अवैध तरीके से घुमाया जाने वाला पैसा इतना हो सकता है कि उससे दुनिया के 8 अरब लोगों में से हर एक के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उस पैसे का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा कभी वापस मिल पाता है।

शनिवार को कैम्ब्रिज में ‘इकोनॉमिक क्राइम’ पर 43वें इंटरनेशनल सिम्पोजियम के समापन सत्र में बोलते हुए, जस्टिस कांत ने आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए पैसे का पता लगाने, उसे जब्त करने और उसे वापस पाने पर वैश्विक स्तर पर ज्यादा ध्यान देने का आह्वान किया।

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे धोखाधड़ी वाले मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने संसद के कदम उठाने का इंतजार करने के बजाय, ऐसे नए तरह के अपराधों पर तेजी से प्रतिक्रिया दी है।

‘100 में से एक से भी कम’ पैसा हो पाता है बरामद

जस्टिस कांत ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का दायरा इतना बड़ा है कि वैश्विक अनुमानों के आधार पर भी उसे समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “अगर मनी लॉन्ड्रिंग के वैश्विक अनुमान मोटे तौर पर भी सही हैं, तो दुनिया एक साल में इतना पैसा लॉन्डर करती है कि उससे आज धरती पर मौजूद सभी 8 अरब लोगों के लिए एक साधारण लैपटॉप खरीदा जा सकता है, और फिर भी खजाने में कुछ पैसे बच जाएंगे।”

इसके बाद उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैध तरीके से कमाए गए धन का बहुत छोटा हिस्सा ही आखिरकार वापस मिल पाता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “अवैध धन की इस विशाल रकम में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी 100 में से एक फीसदी से कम ही कभी वापस हासिल किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हर 100 हिस्सों में से 99 हिस्सों का जिक्र सिर्फ भाषणों और रिपोर्टों में होता है, जबकि वास्तव में सिर्फ एक हिस्से को ही वापस हासिल किया जा पाता है।”

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराध के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ समस्या पहचानने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। अब ध्यान अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाने और उसे वापस हासिल करने पर होना चाहिए।

पुराने जमाने की धोखाधड़ी से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक

CJI ने कहा कि आर्थिक अपराध कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक पुरानी बुराई है जो टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सिस्टम में बदलाव के साथ बदलती रही है।

उन्होंने चौथी सदी ईसा पूर्व के एक यूनानी व्यापारी हेगेस्ट्रेटोस का उदाहरण दिया, जिसने कथित तौर पर इंश्योरेंस का क्लेम पाने के लिए अपना माल बेचने के बाद अपना जहाज डुबोने की योजना बनाई थी। जस्टिस कांत ने इस मामले को आर्थिक धोखाधड़ी का शुरुआती उदाहरण बताया।

उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का भी जिक्र किया, जिसमें उन 40 तरीकों की पहचान की गई थी जिनसे अधिकारी सरकारी राजस्व का गबन कर सकते थे। इस ग्रंथ में ऑडिट, मुखबिर, क्रॉस-वेरिफिकेशन और जब्ती जैसे उपाय भी बताए गए थे।

CJI ने कहा, “अर्थशास्त्र में बताए गए चोरी के 40 तरीकों के साथ-साथ अब पता लगाने, फ्रीज करने और वापस पाने के चालीस बेहतर तरीकों को भी शामिल किया जाए।”

भारत का कानूनी ढांचा

जस्टिस कांत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए भारत के कानूनी ढांचे का जिक्र किया, जिसमें ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002’ और ‘फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018’ शामिल हैं।

उन्होंने अपराध से मिली कमाई का पता लगाने, उसे जब्त करने और अपने कब्जे में लेने के लिए इस्तेमाल होने वाले संस्थागत सिस्टम के तहत खास एजेंसियों और स्पेशल कोर्ट का भी जिक्र किया।

CJI ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेजी से जरूरी होता जा रहा है क्योंकि गैर-कानूनी पैसा आसानी से सीमाओं के पार जा सकता है।

उन्होंने कहा, “दूसरे देशों के साथ ‘म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी’ (आपसी कानूनी सहायता समझौते) – भले ही उनका सिस्टम और तौर-तरीके कितने भी अधूरे क्यों न हों – प्रत्यर्पण (extradition) की तुलना में बरामद संपत्ति को कहीं ज्यादा भरोसेमंद तरीके से वापस लाते हैं। आखिरकार, गैर-कानूनी दौलत शायद ही कभी उस जगह रहती है जहां से उसे चुराया गया था।”

उन्होंने गैर-कानूनी फंड का पता लगाने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस शेयरिंग और ‘बेनिफिशियल ओनरशिप रजिस्ट्री’ जैसे टूल्स पर भी जोर दिया, जिन्हें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

चोरी हुई संपत्ति वापस पाने पर ध्यान दें

जस्टिस कांत ने कहा कि कानून को सख्ती से लागू करने का काम कानून के दायरे में ही होना चाहिए। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का भी जिक्र किया, जिसमें धोखेबाज सरकारी या कानून लागू करने वाले अधिकारियों का रूप धारण कर लोगों से पैसे ऐंठते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ कोशिशों की कामयाबी को इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि समस्या का वर्णन कितनी अच्छी तरह किया गया है, बल्कि इस आधार पर मापा जाना चाहिए कि चोरी हुई संपत्ति का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस लाने में कितनी कामयाबी मिली है।

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भिड़े OpenAI और SpaceX, इस कारण टूटने जा रहा एआई सर्विसेज का कॉन्ट्रैक्ट

OpanAI vs SpaceX: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई और एलॉन मस्क (Elon Musk) के स्पेसएक्स (SpaceX) के बीच की साझेदारी खत्म हो सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओपनएआई स्पेसएक्स के कोडिंग-टूल कंपनी कर्सर (Cursor) को एआई मॉडल की उपलब्धता बंद करने की योजना बना रही है। इस कदम से ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलॉन मस्क के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट भरी टक्कर और बढ़ गई है। बता दें कि जून में स्पेसएक्स ने कर्सर बनाने वाले स्टार्टअप एनीस्फीयर (Anysphere) को $6 हजार करोड़ की ऑल-स्टॉक डील में खरीदने का ऐलान किया था और इस महीने की शुरुआत में यह अधिग्रहण पूरा हो गया।

OpanAI vs SpaceX: Cusror को क्यों बंद होगी सर्विसेज?

ओपनएआई ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि कर्सर को एआई मॉडल नहीं देने का फैसला इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं है कि स्पेसएक्स उनकी तकनीक का इस्तेमाल तय शर्तों के अनुसार करेगा। ओपनएआई ने यह भरोसा नहीं होने की वजह एलॉन मस्क की कंपनियों का ओपनएआई के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स की शर्तों के उल्लंघन के लंबे अनुभव को बताया। वहीं इस मामले को लेकर कर्सर के को-फाउंडर माइकल ट्रुएल (Michael Truell) का कहना है कि वह ओपनएआई के शुरुआती यूजर्स में से एक है और अब इसके साथ मौजूदा मुद्दे को सुलझाने के लिए वहीं ओपनएआई की टीम से बातचीत कर रहे हैं।

ओपनएआई का कहना है कि स्पेसएक्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के लिए खास कॉन्ट्रैक्ट्स होता है और इसमें यह तय किया जाता है कि तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सुरक्षा के साथ किया जाए। ओपनएआई के मुताबिक कर्सर को उसकी सर्विसेज 12 नवंबर 2026 तक बंद की जा सकती है। ओपनएआई का कहना है कि कर्सर के साथ कॉन्ट्रैक्ट में स्वामित्व में बदलाव के बादसीमित समय में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार मिल गया है।

Elon Musk vs Sam Altman: लंबा है टकराव

एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच कई वर्षों से टकराव चल रही है, और यह कोर्ट केस तक पहुंच गया। सुनवाई के दौरान मस्क के वकील ने कहा था कि मस्क और दूसरे गवाहों ने ऑल्टमैन के झूठे होने की गवाही दी है तो ओपनएआई का कहना था कि मस्क कंपनी पर कंट्रोल चाहते थे।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने ओपनएआई पर $15 हजार करोड़ का मुकदमा किया था। मस्क ने कंपनी और ऑल्टमैन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने फायदे के लिए कंपनी के मूल नॉन-प्रॉफिट मिशन से धोखाधड़ी करके एक चैरिटी को हड़प लिया। इस साल की शुरुआत में एक फेडरल जूरी ने मस्क के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि उन्होंने बहुत देर से केस फाइल किया था।

गिरता Nifty नहीं बना पा रहा पुट से पैसा, समझें कहां हो रही गड़बड़ी, कैसी स्ट्रैटेजी करेगी काम

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।

पटना से मैक्सिको तक का सफर, बिहार में जन्मे IIT ग्रेजुएट 4 बिजनेस शुरू करने के लिए छोड़ी Uber की नौकरी

बिहार में जन्मे एक एंटरप्रेन्योर की कहानी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कहानी उनके जीजाजी ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। इस कहानी में IIT दिल्ली से पढ़ाई और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में 10 साल के करियर के बाद मेक्सिको में चार बिजनेस चलाने तक का सफर शामिल है।

पटना के रहने वाले 33 साल के विजीत सुमन ने Uber में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़्रॉड प्रिवेंशन (धोखाधड़ी रोकने) के क्षेत्र में बिजनेस शुरू किए। हाल ही में उनके जीजाजी राहुल राज ने X पर उनकी उपलब्धियों के बारे में पोस्ट किया, जिससे उनका यह अनोखा करियर सफर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस ओर गया।

IIT दिल्ली से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में 10 साल का सफर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर शुरू करने से पहले सुमन ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी। उन्होंने पेमेंट और फ़्रॉड प्रिवेंशन के क्षेत्र में 10 साल से ज़्यादा समय तक काम किया और कंपनियों को अरबों डॉलर से जुड़े फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में मदद की। उनके प्रोफेशनल सफर में ऐसी कंपनियों में काम करना भी शामिल है, जिन्हें बाद में दूसरी कंपनियों ने खरीद लिया था, जैसे Falabella द्वारा Linio और Uber द्वारा Cornershop का अधिग्रहण।

लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में कई साल बिताने के बाद, सुमन ने एक अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला किया। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में पहला कदम तब रखा जब वे टेक सेक्टर में काम कर रहे थे।

इसकी शुरुआत मैक्सिको में भारतीय खाने से हुई

2023 में, सुमन और उनके बिज़नेस पार्टनर अर्पित खुराना ने मैक्सिको सिटी में ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) शुरू किया। यह आइडिया विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक आम समस्या से आया: घर जैसा स्वाद वाला खाना मिलना। न तो सुमन और न ही खुराना को रेस्टोरेंट चलाने का कोई अनुभव था, लेकिन जल्द ही उनके बिज़नेस को शादियों और दूसरे इवेंट्स में कैटरिंग के लिए रिक्वेस्ट मिलने लगीं।

जो एक रेस्टोरेंट के तौर पर शुरू हुआ था, वह आगे चलकर कई बिज़नेस में से पहला बिज़नेस बन गया। 2024 तक, सुमन ने पूरी तरह से एंटरप्रेन्योरशिप पर ध्यान देने के लिए उबर (Uber) छोड़ दिया। वे एक बिज़नेस से चार बिज़नेस तक पहुंचे।

कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ने के बाद, सुमन ने मैक्सिको सिटी में ‘संतुलन’ (Santulan) नाम का एक योग स्टूडियो शुरू किया।

शुरुआत में यह स्टूडियो एक छोटा सा वेंचर था, लेकिन जल्द ही कस्टमर्स ने पिलेट्स रिफॉर्मर क्लास की मांग की। बिज़नेस का विस्तार हुआ और सुमन के अनुसार, दो साल के भीतर यह मैक्सिको सिटी के सबसे ज़्यादा रेटिंग वाले स्टूडियो में से एक बन गया। उनकी तीसरी कंपनी एक और समस्या के समाधान के तौर पर शुरू हुई, जिसका सामना उन्हें स्टूडियो चलाते समय करना पड़ा था।

बिज़नेस को मैनेज करने के लिए सही सॉफ़्टवेयर न मिलने पर, सुमन ने अपना खुद का सॉफ़्टवेयर बनाया। बाद में दूसरे स्टूडियो मालिकों ने भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ‘क्लासियस’ (Klasius) बना – यह स्टूडियो मैनेजमेंट पर केंद्रित एक सॉफ़्टवेयर बिज़नेस है।

अपने चौथे वेंचर के साथ वे उस फील्ड में वापस लौटे जिसे वे सबसे अच्छी तरह जानते थे।

सुमन और उनके तीन दोस्तों ने ‘फोर्टिफाई’ (Fortify) नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, जो धोखाधड़ी रोकने पर केंद्रित था। एंटरप्रेन्योर के अनुसार, कंपनी अब मेक्सिको की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक के साथ पायलट प्रोग्राम चला रही है। इस तरह सुमन अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ — इंडियन फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी — में चार बिज़नेस चला रहे थे।

300 मेहमानों वाली शादी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई

इस सफ़र के सबसे यादगार पलों में से एक तब आया जब ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) ने 300 से ज़्यादा मेहमानों वाली एक शादी में कैटरिंग की। उस स्तर पर यह टीम का पहला बड़ा इवेंट था। कैटरिंग के इस सफल काम से बिज़नेस का कॉन्फिडेंस काफ़ी बढ़ा, खासकर तब जब मेहमानों ने टीम से कहा कि खाने ने उन्हें दिल्ली की याद दिला दी।

भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर शुरू किए गए बिज़नेस के लिए, लोगों की इस प्रतिक्रिया ने ‘अरोमा करी’ को शुरू करने के मूल मकसद को और मज़बूत किया। फिर उनके जीजाजी ने उनके बारे में पोस्ट किया। जब सुमन के जीजा राहुल राज ने X पर उनकी कहानी शेयर की, तो यह बहुत से लोगों तक पहुंची।

इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे वे IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल से मैक्सिको में कई बिज़नेस चलाने वाले एंटरप्रेन्योर बने। सुमन के अनुसार, इस पोस्ट ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और इसे 1,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। उन्होंने बताया कि इस अचानक मिली चर्चा की वजह से उन्हें ऐसे लोगों के मैसेज भी मिले जिनसे उन्होंने कॉलेज के बाद से बात नहीं की थी। इस अप्रत्याशित वायरल मोमेंट ने परिवार के एक सदस्य की पोस्ट को उनके अनोखे करियर सफ़र के बारे में एक बड़ी चर्चा में बदल दिया।

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

CJP Abhijeet Dipke TN CM Vijay

CJP Abhijeet Dipke Tamil Nadu CM Vijay: देश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन अब एक देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। इसी बीच, तमिलनाडु सरकार द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश को वापस लेने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने तमिलनाडु सरकार, पश्चिम बंगाल में एक छात्र के पिता की हत्या, सुप्रीम कोर्ट के एफआईआर वापसी के निर्देश और 'पीएम केयर्स फंड' जैसे गंभीर मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।   

अगर डर लग रहा है तो स्कूल ठीक करो

हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार ने शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन को एक विवादास्पद आदेश जारी किया था, जिसके तहत छात्रों को CJP और वामपंथी दलों द्वारा आयोजित 'स्कूल ठीक करो' जैसे आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, भारी जन-विरोध के बाद सरकार ने यह आदेश वापस ले लिया है। ALSO READ: तमिलनाडु की विजय सरकार का यू-टर्न, CJP और लेफ्ट के प्रदर्शन में जाने से छात्रों को रोकने वाला आदेश वापस

 

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ऐसा आदेश आना ही गलत था। आंदोलन करना और अपनी बात रखना नागरिकों का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार (Fundamental Right) है। ऐसे आदेश दिखाते हैं कि सरकारें जनता और छात्रों से डर रही हैं। अगर आपको डर है कि लोग वीडियो बना लेंगे या बदनामी होगी, तो स्कूलों की हालत सुधार दीजिए! लोग रोकने के बजाय आपकी तारीफ में वीडियो बनाएंगे। ALSO READ: आखिर क्‍यों CM विजय थलापति ने वापस लिया स्‍टूडेंट को कॉकरोचों से दूर रखने वाला आदेश, क्‍या है वजह?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी धोखा दे रही सरकार?

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी मुकदमों का ब्योरा मांगा था ताकि उन्हें निरस्त (Quash) किया जा सके। इस पर दीपके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले सरकारें सुप्रीम कोर्ट के कंधों पर बंदूक रखकर यह बहाना बनाती थीं कि अदालत की वजह से केस वापस नहीं लिए जा सकते। लेकिन अब जब सुप्रीम कोर्ट खुद केस खत्म करने को तैयार है, तब भी सरकारें डेटा जमा नहीं कर रही हैं। यह देश के युवाओं के साथ सीधी धोखाधड़ी है।  

PM CARES में 8000 करोड़ की FD क्यों? शिक्षा नीति पर उठाया सवाल

CJP नेता अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर 'PM CARES Fund' में जमा पड़ी विशाल धनराशि पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ देश के गरीब बच्चे बिना पीने के पानी, टूटी बेंचेस और जर्जर क्लासरूम में पढ़ने को मजबूर हैं, तो दूसरी तरफ PM CARES Fund में लगभग 8,000 करोड़ रुपए बिना किसी इस्तेमाल के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में पड़े हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा किसी नेता के रिटायरमेंट के लिए बचाकर रखा गया है? जब देश के बच्चे एक अच्छे स्कूल और सड़कों के लिए रो रहे हैं, तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में हाई-टेक मॉडल स्कूल बनाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा?

पश्चिम बंगाल में स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाया तो हेट क्राइम का शिकार हुए अब्दुल के पिता

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना पर दीपके बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए। 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत अपने पुराने सरकारी स्कूल का वीडियो बनाने और बदहाली उजागर करने के कारण अब्दुल हफीज के परिवार पर प्राणघातक हमला हुआ, जिसमें उनके पिता की जान चली गई।  

  • हेट क्राइम का आरोप : पुलिस रिपोर्ट्स में पकड़े गए आरोपियों का संबंध राजनीतिक पृष्ठभूमि से बताया गया है। दीपके ने इसे साफ तौर पर 'हेट क्राइम' करार दिया।
  • मुआवजा नहीं, स्कूल चाहिए : अब्दुल के जज्बे को सलाम करते हुए दीपके ने कहा कि पिता को खोने के बाद भी उस लड़के ने कोई आर्थिक मुआवजा (Compensation) नहीं मांगा। उसकी एक ही मांग है कि उसके गांव में एक वर्ल्ड क्लास स्कूल बने और उसका नाम उसके दिवंगत पिता के नाम पर रखा जाए। इससे बड़ा देशभक्त कोई नहीं हो सकता।  

गांधी के विचारों को कोई नहीं मार सकता

आंदोलन पर उठे हिंसा और अराजकता के सवालों पर जवाब देते हुए दीपके ने कहा कि आज जब महात्मा गांधी का परिवार खुद इस मुहिम के साथ खड़ा है, तो इससे बड़ा देशभक्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसक घटनाओं पर आधारित नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला के अहिंसक और शांतिपूर्ण रास्तों पर चलता है। जिस विचारधारा ने गांधी की हत्या की थी, वे आज भी उनके विचारों को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन भारत की आत्मा गांधी के सिद्धांतों में ही बसती है।

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

भारत में मोबाइल SIM कार्ड को लेकर नियम और सख्त होने जा रहे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करेगा, जो अपने नाम पर निर्धारित अधिकतम संख्या में SIM कार्ड पहले ही ले चुके हैं। ऐसे यूजर्स को अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन लेने से रोका जाएगा।

 

देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 SIM कार्ड की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य SIM कार्ड के जरिए होने वाले धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।

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10वां SIM लेने की कोशिश की तो क्या होगा?

 

एक बार निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां उसी व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेंगी। नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति के नाम पर 9 SIM कार्ड हैं, तो उसकी जानकारी और उपलब्ध होने पर फोटो भी Digital Intelligence Platform (DIP) पर दिखाई देगी। टेलीकॉम कंपनियां नया कनेक्शन देने से पहले यह जांच सकेंगी कि ग्राहक पहले ही तय सीमा तक SIM ले चुका है या नहीं।

 

यह व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू होने की योजना है। शुरुआत में टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन जारी करने से पहले DIP में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्रॉस-चेक करेंगी। इसके बाद सिस्टम को धीरे-धीरे अधिक ऑटोमेटेड बनाया जाएगा।

 

पहले से लिमिट से ज्यादा SIM हैं तो क्या होगा?

 

नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे, जिनके नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे अतिरिक्त SIM कार्ड की पहचान कर उन्हें डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। DoT की तकनीक पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए SIM कार्ड या निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन की पहचान करने में सक्षम है।

 

SIM कार्ड के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम

 

सरकार के इस कदम का बड़ा मकसद उन SIM कार्ड के इस्तेमाल को रोकना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी दूसरे लोगों की पहचान बनाकर, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध करने के लिए करते हैं। DIP के जरिए DoT पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ SIM और टेलीकॉम दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करता है।

 

नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम तैयार

 

DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रियल-टाइम SIM जांच व्यवस्था लागू करने और अपने सिस्टम को Digital Intelligence Platform के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की समयसीमा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले ग्राहकों की पहचान जल्द हो सके और अतिरिक्त कनेक्शन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

ASTR भी करेगा फर्जी SIM की पहचान

 

सरकार ने फर्जी दस्तावेजों या निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में जारी किए गए SIM कार्ड की पहचान के लिए ASTR नाम का AI आधारित सिस्टम भी तैयार किया है। यह तकनीक संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने में मदद करती है।

 

CNAP से कॉल आने पर दिखेगा नाम

 

SIM कार्ड की संख्या सीमित करने के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के रूप में हो रहा है। CNAP के जरिए जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आएगी तो मोबाइल स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ा नाम दिखाई देगा, भले ही वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो। CNAP में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा, न कि किसी क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस का।

 

कुल मिलाकर, SIM की सीमा सख्त करना, DIP के जरिए जानकारी साझा करना और CNAP लागू करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फर्जी मोबाइल कनेक्शन के जरिए पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों पर शिकंजा कसना है।