इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं।
लेकिन उन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी कौन लेता है?
उत्तर प्रदेश के 28 वर्षीय वैभव राठौर ने इसी सवाल का जवाब खोजा। उनकी संस्था Revamp India Foundation की ‘Faldaar’ पहल में पेड़ों को सिर्फ़ लगाया नहीं जाता, उनसे रिश्ता बनाया जाता है।
जब हर पौधे को एक पहचान मिली और हर बच्चे को उसकी ज़िम्मेदारी, तो नतीजा भी बदल गया।

40+ सरकारी स्कूल
10,000+ फलदार पेड़
करीब 75% सर्वाइवल रेट

आज ये पेड़ सिर्फ़ छाया और फल नहीं दे रहे, बल्कि बच्चों को ज़िम्मेदारी, टीमवर्क और प्रकृति से जुड़ाव भी सिखा रहे हैं।

लेकिन सफर अभी बाकी है।
कुछ पौधे आज भी जानवरों या ट्री गार्ड की कमी की वजह से नुकसान झेलते हैं।
अगर आप सिर्फ़ ₹200 का योगदान करते हैं, तो एक पौधे के लिए ट्री गार्ड लगाने में मदद कर सकते हैं।

Revamp India Foundation के साथ
आप वॉलंटियर बनकर भी इस मिशन से जुड़ सकते हैं।

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कभी-कभी बदलाव किसी बड़ी तकनीक से नहीं, बल्कि एक छोटे-से आइडिया से शुरू होता है।

क्या आपको लगता है कि हर स्कूल में ऐसी पहल होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।:point_down:

@vaibhavrathoree

naming trees helped 10000 saplings survive, Children protecting trees in schools, How to increase tree survival rate

इस एक आइडिया ने बचा दिए 10,000 पेड़ | FALDAAR Initiative | Revamp India Foundation | Uttar Pradesh

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Mahindra Thar Roxx gets up to Rs 1.20 lakh discount in August 2026

Roxx

Mahindra is offering discounts across much of its ICE line-up in August 2026. The Thar Roxx and Scorpio N receive the highest benefits among the brand’s mainstream SUVs this month, while offers are also available on the Scorpio Classic, Thar, XUV 3XO, Bolero Neo and Bolero Neo Plus. Offers are valid until August 31 and may vary depending on the region, dealer and stock availability.

Disclaimer: Offers may vary by region, dealer, stock availability and customer eligibility. Please check with your nearest authorised Mahindra dealership for exact details.

Mahindra Scorpio N discounts in August 2026

Up to Rs 1.25 lakh off

The Scorpio N is available with benefits of up to Rs 1,25,000. These include a cash discount of Rs 1,00,000 and accessories worth Rs 25,000. These discounts apply to existing pre-facelift stock available with dealers.

The Scorpio N is priced between Rs 13.69 lakh and Rs 25.49 lakh (ex-showroom). It rivals the Tata Safari and Thar Roxx. It impresses with its smooth petrol and diesel engines and off-road capability, although the third-row seats and luggage space are not great.

Mahindra Thar Roxx discounts in August 2026

Up to Rs 1.20 lakh off

The Thar Roxx receives benefits of up to Rs 1.20 lakh this month. This comprises a cash discount of Rs 92,000 along with a ceramic coating package worth Rs 28,000. Priced between Rs 12.52 lakh and Rs 23.52 lakh, the Thar Roxx rivals the Force Gurkha 5-door and serves as a more practical alternative to the three-door Thar. It combines the Thar’s off-road capability with a more practical cabin, better refinement and stronger road manners.

Mahindra Scorpio Classic discounts in August 2026

Up to Rs 75,000 off

Mahindra is offering benefits of up to Rs 75,000 on the Scorpio Classic. The offer comprises a cash discount of Rs 50,000 and accessories worth Rs 25,000. Priced between Rs 13.37 lakh and Rs 17.40 lakh, the Scorpio Classic continues to appeal with its refined diesel engine and rugged character, although it lacks the features and driving sophistication of newer rivals.

Mahindra Thar discounts in August 2026

Up to Rs 50,000 off

The three-door Thar is available with a cash discount of up to Rs 50,000 this month. Priced between Rs 10.32 lakh and Rs 18.00 lakh, the Thar rivals the Force Gurkha and Maruti Suzuki Jimny. It offers great  off-road capability and is offered with refined and punchy petrol and diesel engine options, although luggage space is limited and access to the rear seats can be cumbersome.

Mahindra Bolero Neo and Bolero Neo Plus discounts in August 2026

Up to Rs 45,000 off

The Bolero Neo and Bolero Neo Plus receive cash discounts of up to Rs 45,000. The Bolero Neo is priced between Rs 8.99 lakh and Rs 10.79 lakh, while the Bolero Neo Plus costs Rs 11.39 lakh to Rs 12.49 lakh. Both SUVs are built to withstand rough roads and heavy use, although they are not as refined or as well equipped as newer compact SUVs.

Mahindra XUV 3XO discounts in August 2026

Up to Rs 40,000 off

The XUV 3XO is available with a cash discount of up to Rs 40,000 this month. Priced from Rs 7.79 lakh to Rs 15.04 lakh (ex-showroom), the XUV 3XO rivals the Maruti Brezza, Tata Nexon, Hyundai Venue, Kia Sonet, Skoda Kylaq and Nissan Magnite. It offers strong petrol and diesel engines along with a feature-rich cabin, although its boot is smaller than several rivals.

All prices are ex-showroom, India.

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

Crude Oil Price Today:  बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।

आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।

इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

स्कूल टीचर जेब में ₹10000 लेकर दिल्ली आया, खड़ी कर दी ₹80000 करोड़ की कंपनी; जानिए हैवेल्स के मालिक की पूरी कहानी

Havells India Success Story: 1958 की बात है। पंजाब का एक 21 साल का स्कूल टीचर नौकरी छोड़कर दिल्ली पहुंचा। जेब में सिर्फ 10,000 रुपये थे। कोई बड़ा कारोबारी परिवार नहीं था। इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। लेकिन बिजली के सामान के कारोबार की थोड़ी समझ थी और अपना कारोबार खड़ा करने का इरादा था।

उस युवक का नाम था कीमत राय गुप्ता। दिल्ली के पुराने इलाके भागीरथ पैलेस में उन्होंने बिजली के सामान की ट्रेडिंग शुरू की। छह दशक से ज्यादा समय बाद उसी छोटे कारोबार का नाम Havells India है। आज कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 80,000 करोड़ रुपये है और इसके प्रोडक्ट 70 से ज्यादा देशों में पहुंचते हैं।

लेकिन 10,000 रुपये से 80,000 करोड़ रुपये तक का यह सफर सीधी लाइन में नहीं चला। इसमें कई ऐसे फैसले आए, जिन्होंने कंपनी की दिशा बदल दी।

भागीरथ पैलेस से शुरुआत

कीमत राय गुप्ता का जन्म 1937 में मालेरकोटला में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बजाय उन्होंने कारोबार का रास्ता चुना और 1958 में दिल्ली आ गए। उन्होंने भागीरथ पैलेस में Guptaji & Company शुरू की।

उस समय भागीरथ पैलेस बिजली के सामान के बड़े थोक बाजार के रूप में जाना जाता था। गुप्ता ने शुरुआत में केबल, वायर, स्विचगियर और दूसरे इलेक्ट्रिकल सामान की ट्रेडिंग की।

कारोबार छोटा था, लेकिन यहां उन्होंने एक ऐसी चीज सीखी जो आगे चलकर बहुत काम आई। उन्हें समझ आने लगा कि ग्राहक सिर्फ सस्ता सामान नहीं चाहता। उसे सही समय पर सामान चाहिए। भरोसेमंद सप्लायर चाहिए। और सबसे जरूरी, लगातार अच्छी सर्विस चाहिए। यही तजुर्बा आगे Havells की नींव बना।

Havells ब्रांड ₹7 लाख में खरीदा

कहानी में बड़ा मोड़ 1971 में आया। गुप्ता ने करीब 7 लाख रुपये में Havells ब्रांड खरीद लिया। उस समय यह कोई बड़ा और चमकदार ब्रांड नहीं था। कारोबार संघर्ष कर रहा था। लेकिन गुप्ता को इस नाम की पहचान पहले से थी। उन्होंने ब्रांड को खत्म करने के बजाय उसी नाम के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।

यहीं से उनका नजरिया बदल गया। अब मकसद सिर्फ दूसरे निर्माताओं का सामान खरीदकर बेचना नहीं था। वह अपना सामान बनाना चाहते थे। अपना ब्रांड खड़ा करना चाहते थे। यह फैसला छोटा दिख सकता है, लेकिन Havells की पूरी कहानी में यही सबसे अहम मोड़ था।

ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक

गुप्ता ने धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग में पैसा लगाना शुरू किया। 1976 में दिल्ली के कीर्ति नगर में Havells का पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा। यहां रीवायरेबल स्विच और चेंजओवर स्विच बनाए जाते थे।

अब कंपनी सिर्फ बाजार में मौजूद दूसरे ब्रांडों पर निर्भर नहीं थी। उसके पास अपना उत्पादन था। इसका मतलब था कि कंपनी प्रोडक्ट की क्वालिटी, उपलब्धता और डिजाइन पर ज्यादा नियंत्रण रख सकती थी। आगे चलकर Havells ने एनर्जी मीटर और दूसरे इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स में भी कदम बढ़ाया। कंपनी धीरे-धीरे ट्रेडर से निर्माता बनने लगी।

कंपनी बनी, फिर शेयर बाजार पहुंची

8 अगस्त 1983 को Havells India की स्थापना हुई। अगले दशक में कंपनी का कारोबार और विस्तार बढ़ता गया। दिसंबर 1993 में कंपनी का पब्लिक इश्यू आया और इसके शेयर शेयर बाजार में लिस्ट हुए।

यह कंपनी के लिए बड़ा बदलाव था। अब Havells सिर्फ एक परिवार का कारोबार नहीं था। इसमें पब्लिक शेयरहोल्डर्स भी थे। कंपनी के पास आगे विस्तार के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता भी खुल गया। इसी दौर में Havells ने दूसरी कंपनियों और ब्रांड्स को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।

दूसरी कंपनियां खरीदीं, कारोबार बढ़ाया

Havells ने Towers and Transformers जैसे कारोबारों का अधिग्रहण किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने एक घाटे में चल रहे कारोबार को भी अपने साथ जोड़ने के बाद करीब एक साल में मुनाफे में ला दिया।

इसके बाद Standard Electricals और Crabtree India जैसे नाम भी Havells के पोर्टफोलियो में आए। यहां कंपनी की रणनीति साफ दिखाई देने लगी थी। सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना लक्ष्य नहीं था। अलग-अलग प्रोडक्ट, ब्रांड और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को एक साथ जोड़ना था।

बेटे ने संभाली कमान

कीमत राय गुप्ता के बेटे अनिल राय गुप्ता 1992 में Havells से जुड़े। आगे चलकर उनके नेतृत्व में कंपनी का फोकस आम ग्राहक तक और ज्यादा पहुंच बनाने पर गया।

Havells ने पंखे, लाइटिंग, मॉड्यूलर स्विच, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों जैसे प्रोडक्ट्स में विस्तार किया। कंपनी अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल सामान बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई थी। वह धीरे-धीरे घरों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स का ब्रांड बन रही थी। यही बदलाव आगे की ग्रोथ का बड़ा आधार बना।

फिर आया सबसे बड़ा दांव

साल 2007 में Havells ने एक बड़ा फैसला लिया। कंपनी ने यूरोप की बड़ी लाइटिंग कंपनी Sylvania Lighting International को करीब 227.5 मिलियन यूरो में खरीद लिया। उस समय यह सौदा करीब 1,400 करोड़ रुपये का था।

इस अधिग्रहण से Havells को तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा नेटवर्क मिल गया। स्थापित ब्रांड और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी मिला। लेकिन यह दांव उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रहा।

विदेशी कारोबार बना चुनौती

2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने हालात बदल दिए। करेंसी में उतार-चढ़ाव हुआ। Sylvania के कारोबार को संभालना भी आसान नहीं रहा। अधिग्रहण से मिलने वाले फायदे के बजाय कंपनी पर दबाव बढ़ने लगा।

Havells ने यहां एक और अहम फैसला लिया। उसने सिर्फ इसलिए कारोबार पकड़े नहीं रखा कि उसके लिए बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी। 2016 में Havells ने अपने लाइटिंग बिजनेस में 80% हिस्सेदारी Shanghai Feilo Acoustics को बेच दी। यह फैसला बताता है कि कंपनी के लिए विस्तार से ज्यादा जरूरी पूंजी और मैनेजमेंट का सही इस्तेमाल था।

Lloyd ने बदल दिया गेम

इसके बाद Havells ने भारत के कंज्यूमर मार्केट पर और ज्यादा ध्यान लगाया। 2017 में कंपनी ने Lloyd Electric & Engineering का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कारोबार करीब 1,600 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदा।

Lloyd के साथ Havells को एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन जैसे बड़े कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में सीधी एंट्री मिली। यह अधिग्रहण भी कंपनी की रणनीति का हिस्सा था। Havells पारंपरिक इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स से आगे बढ़कर घर के बड़े अप्लायंसेज तक पहुंचना चाहती थी।

₹10,000 से ₹80,000 करोड़ तक

कीमत राय गुप्ता का निधन नवंबर 2014 में 77 साल की उम्र में हुआ। तब तक उनका छोटा सा कारोबार एक बड़ी लिस्टेड कंपनी बन चुका था। आज Havells का कारोबार केबल और वायर, स्विचगियर, पंखे, लाइटिंग, एयर कंडीशनर, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों तक फैला है। कंपनी के पोर्टफोलियो में Havells, Lloyd, Crabtree और Standard जैसे ब्रांड हैं।

11 अगस्त 2026 को Havells का शेयर करीब 1,278 रुपये पर बंद हुआ। और कंपनी का मार्केट कैप करीब 80,123 करोड़ रुपये था। यानी जिस कारोबार की शुरुआत एक युवा ने दिल्ली के थोक बाजार में 10,000 रुपये से की थी, वह करीब 68 साल बाद 80,000 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है।

इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात सिर्फ रकम नहीं है। असली कहानी उन फैसलों की है जो सही समय पर लिए गए। पहले ट्रेडिंग छोड़ी और मैन्युफैक्चरिंग में आए। फिर अपना ब्रांड बनाया। जरूरत पड़ी तो दूसरी कंपनियां खरीदीं। विदेशी दांव फंसा तो उससे बाहर निकल गए। और फिर भारतीय कंज्यूमर मार्केट पर फोकस कर दिया।

यही वजह है कि Havells की कहानी सिर्फ एक इलेक्ट्रिकल कंपनी के बनने की कहानी नहीं है। यह समय के साथ बिजनेस मॉडल बदलने की कहानी भी है।

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दावा- अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की बात झूठी:पड़ोसी देश की हरकतों पर भारतीय सेना की नजर; विदेश मंत्रालय बोला- अरुणाचल हमारा अटूट हिस्सा

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के सूत्रों ने दावा किया कि चीनी घुसपैठ की बातें झूठी हैं। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक सेना ने मंगलवार को कहा कि सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस लगातार चीन की हरकतों पर नजर रखे हुए है और सोशल मीडिया पर किए जा रहे घुसपैठ के दावे गलत हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट हिस्सा है। MEA ने यह बात चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को चीनी नाम देने की कोशिशों के बीच कही है। चीन के LAC पार कर घुसपैठ का दावा किया गया था मीडिया रिपोर्ट्स में स्थानीय लोगों दावा किया थीं कि चीन के सैनिक अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में घुस आए थे। बताया गया था कि चीनी सैनिकों ने LAC पार कर पुकार ला और ओल्लो इलाके में प्रवेश किया। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 6 अगस्त को भारत-चीन सीमा मामलों पर सलाह और तालमेल के लिए बनी डब्ल्यूएमसीसी की 36वीं बैठक हुई थी। इस बैठक में दोनों देशों ने खुलकर बातचीत की। LAC पर मौजूदा हालात की भी समीक्षा की गई। भारत ने कहा कि सीमा इलाकों में शांति और सुकून बना रहना जरूरी है। यही दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए भी जरूरी है। चीन अरुणाचल को ‘साउथ तिब्बत’ बताता रहा है ANI के मुताबिक, चीन अरुणाचल प्रदेश पर ‘साउथ तिब्बत’ के नाम से दावा करता रहा है। 1960 की सीमा वार्ता में चीन ने अरुणाचल प्रदेश की करीब 69,000 वर्ग किमी जमीन पर दावा किया था। भारत ने चीन के इस दावे को कई बार खारिज किया है। भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया था। इस पर चीन ने कहा कि भारत का अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को अपने मैप पर दिखाना गलत है। यह अमान्य’ है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता।

Video: यूपी में सड़क के लिए DM ऑफिस पहुंच गए Gen Alpha बच्चे, हमीरपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मांगने लगे जवाब

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से जनरेशन अल्फा को लेकर एक अनोखी खबर आ रही है। हमीरपुर में मंगलवार को स्कूली बच्चों ने अपने स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बच्चों का एक समूह अपने माता-पिता के साथ स्कूल से निकलकर डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस पहुंचा। हाथों में तिरंगा लेकर बच्चों (जनरेशन अल्फा) ने नारे लगाए और गांव से स्कूल तक जाने वाली खराब सड़क को जल्द ठीक कराने की मांग की। छात्रों ने कहा कि, सड़क की खराब हालत के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती है। वहीं बारिश के दिनों में वहां से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है।

बच्चों के इस प्रदर्शन से डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन भी हैरान रह गया। बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों से सड़क की समस्या को जल्द दूर करने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल बच्चे हमीरपुर के कुरारा ब्लॉक की चंदूपुर ग्राम पंचायत के अलग-अलग गांवों और बस्तियों से आए थे।

आने-जाने में होती है दिक्कत

छात्रों और उनके माता-पिता का कहा कि, इस इलाके में करीब 3,000 लोग रहते हैं और यहां आने-जाने के लिए कच्ची सड़क ही मुख्य रास्ता है। तेज बारिश होने पर यह सड़क कीचड़ से भर जाती है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। इतना ही नहीं, किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। छात्रों का आरोप है कि पहले आने-जाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दूसरा रास्ता वन विभाग ने बंद कर दिया है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

 

पहले भी किया है प्रदर्शन

सड़क की समस्या को लेकर बच्चों ने पहले भी आवाज उठाई थी। छात्रों ने 3 जुलाई को भी सड़क को लेकर प्रदर्शन किया था। तब मिट्टी डालकर रास्ता ठीक किया गया, लेकिन बारिश में सड़क फिर खराब हो गई। स्थायी समाधान न मिलने पर छात्र डीएम कार्यालय पहुंच गए। बच्चे तिरंगा और बैनर लेकर जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे तो प्रशासन और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने बच्चों को आगे जाने से रोकने की कोशिश की।

पुलिस ने की छात्रों को रोकने की कोशिश

सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार और सर्कल ऑफिसर यशपाल सिंह पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे और छात्रों से बातचीत करने की कोशिश की। लेकिन अपनी मांग को लेकर छात्र पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हुए और डीएम कार्यालय की ओर आगे बढ़ते रहे। पुलिस और एडमिनिस्ट्रेटिव की टीम ने छात्रों को कलेक्ट्रेट के गेट पर रोक दिया, जिसके बाद बच्चे वहीं बैठकर प्रदर्शन करने लगे। कुछ देर तक छात्रों ने नारे लगाते हुए अपने गांव से स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की मांग की। छात्रों ने साफ कहा कि जब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में भी छात्रों ने इसी तरह सड़क की समस्या को लेकर प्रदर्शन किया था। उनके विरोध के बाद प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान दिया था।

Gold Silver Prices Today: दो महीने की ऊंचाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी 2000 रुपये उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 11 अगस्त को तेजी दिखी। सोने की कीमतें चढ़कर दो महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई। चांदी में भी 2000 रुपये का उछाल आया। सोने में आज लगातार छठे सत्र तेजी जारी रही। आज सोने का भाव 1,200 रुपये चढ़कर 1,57,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

सोने में स्ट्रॉन्ग डिमांड

ऑल इंडिया सर्राफ एसोसिएशन के मुताबिक, 10 अगस्त को सोना 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। खास बात यह है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बावजूद सोने की कीमतें चढ़ रही है। ट्रेडर्स का कहना है कि सोने में डिमांड स्ट्रॉन्ग है। इसका असर कीमतों पर दिखा है।

6 सत्र में 6.65 फीसदी तेजी

आज से पहले 12 जून को सोने का भाव इस लेवल पर था। तब यह 1,56,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। पिछले छह कारोबारी सत्रों में सोना करीब 6.65 फीसदी यानी 9,800 रुपये चढ़ा है। इससे सोने के निवेशकों को राहत मिली है। गोल्ड ईटीएफ के निवेशक भी इससे खुश हैं।

चांदी में भी उछाल 

11 अगस्त को चांदी में भी अच्छी तेजी दिखी। इसका भाव 2000 रुपये के उछाल के साथ 2,42,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे चांदी भी दो महीने से ज्यादा समय की ऊंचाई पर पहुंच गई है। इससे पहले चांदी का भाव इस लेवल पर 30 अप्रैल को था।

इनफ्लेशन डेटा पर नजरें 

लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस वजह से सोने में लगातार छठे दिन तेजी दिखी। चांदी में भी इनवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड स्ट्रॉन्ग है। चांदी इस मामले में सोने से अलग है, क्योंकि इसका इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में होता है।

विदेश में सोने में तेजी

ग्लोबल मार्केट्स में स्पॉट गोल्ड 0.38 फीसदी चढ़कर 4,373.43 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी में गिरावट थी। यह करीब 1.3 फीसदी की कमजोरी के साथ 64.90 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बावजूद बुलियन में अच्छी डिमांड दिख रही है।

कल आएंगे इनफ्लेशन के डेटा

इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। 12 अगस्त को ये डेटा आएंगे। इससे पता चलेगा कि अमेरिका में महंगाई का ट्रेंड कैसा है। अगर महंगाई में ज्यादा उछाल आता है तो फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर असर पड़ सकता है। 12 अगस्त को भारत में भी इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं।

जल्द शुरू होगी बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, 24 नहीं सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर! जानें रूट, किराया और स्टॉपेज की लिस्ट

Bengaluru-Mumbai Vande Bharat sleeper: बेंगलुरु और मुंबई के बीच सफर करने वाले रेल यात्रियों को जल्द ही आरामदायक सफर मिलने वाला है। जल्द ही बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की नई सुविधा शुरू हो सकती है। साउथ वेस्टर्न रेलवे ने इस रूट के लिए दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार कर लिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जल्द ही तय किए गए रूट पर ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा। सेवा शुरू करने से पहले रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की ओर से स्पीड टेस्ट भी किया जाएगा, ताकि ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा की जांच हो सके।

16-16 होंगे कोच

अधिकारियों के मुताबिक, जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत होगी। वहीं अभी तक रेलवे की ओर से ट्रेन के चलने की तारीख और पूरा टाइमटेबल जारी नहीं किया गया है। News18 के मुताबिक, दोनों वंदे भारत ट्रेनों में 16-16 कोच हैं, जिन्हें बेंगलुरु स्थित BEML ने चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के कार्यक्रम के तहत बनाया है। इस सेवा के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच रात में सफर करने वाले यात्रियों को तेज और आरामदायक रेल यात्रा का ऑप्शन मिल सकेगा।

जल्द ही होगी तारीखों की घोषणा

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को शहर के किस स्टेशन से चलाया जाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। रेलवे अधिकारी तय करेंगे कि ट्रेन KSR बेंगलुरु स्टेशन से शुरू होगी या सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल (SMVT) से। ट्रेन के शुरुआती स्टेशन का फैसला होने के बाद ही उसके रखरखाव के लिए मुख्य सुविधा केंद्र भी तय किया जाएगा। ट्रेन का ट्रायल और जरूरी जांच पूरी होने के बाद रेलवे इसकी समय-सारणी और शुरू होने की तारीख की घोषणा करेगा।

इन शहरों से होकर जाएगी ट्रेन

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के प्रस्तावित रूट में कर्नाटक के कई प्रमुख शहर शामिल होंगे। ट्रेन बेंगलुरु से चलकर रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी होते हुए मुंबई पहुंचेगी। इस पूरे सफर की दूरी करीब 1,137 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूरी तरह बिजली से चलने वाली ट्रेनों के लिए तैयार है और डबल लाइन होने के कारण यहां ट्रेन संचालन को बेहतर तरीके से किया जा सकता है। रूट के ज्यादातर हिस्सों पर ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती है। वहीं इस ट्रेन में 3AC का किराया करीब ₹3,000 रहने की उम्मीद है।

अभी यात्रा करने में लगते हैं 24 घंटे

बेंगलुरु और मुंबई के बीच मौजूदा रेल सेवाओं में यात्रियों को सफर पूरा करने में करीब 24 घंटे लगते हैं। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के आने से इस रूट पर यात्रा पहले के मुकाबले काफी कम समय में पूरी होने की उम्मीद है। अनुमान है कि सफर का समय करीब 16 घंटे तक हो सकता है, लेकिन ट्रेन की सही गति और यात्रा अवधि का पता ट्रायल और अंतिम टाइमटेबल जारी होने के बाद ही चलेगा।

हुबली को क्यों नहीं चुना गया

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर के लिए चुना गया रास्ता हुबली वाले विकल्प की तुलना में छोटा और तेज है। हुबली के रास्ते की दूरी करीब 1,216 किलोमीटर होती और इस रूट के कुछ हिस्से सिंगल लाइन वाले हैं। इसके अलावा कई जगहों पर ट्रेन की रफ्तार भी सीमित रहती है। इसी वजह से तेज स्लीपर ट्रेन के लिए मौजूदा रूट को ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

3 reasons to buy the Honda Amaze and 3 reasons to avoid it

Honda Amaze front three quarter static

Honda sells both the second-gen and third-gen iterations of the Amaze in India. However, our focus here would be solely on the latter as it’s the latest and thus the best-equipped to tussle with other sub-4-metre sedans. As the Japanese brand’s most affordable offering, the Amaze carries a price tag of between Rs 7.65 lakh and 10.00 lakh (ex-showroom). Considering the brand’s badge appeal and some segment-first features, should you buy the Honda Amaze? Let’s find out.

Reasons to buy the Honda Amaze

Rear-seat comfort and a spacious boot

Usable interior space and a large boot add practicality to the Amaze

Honda Amaze rear seats

The rear seats of the Amaze are especially more comfortable than the front ones. Not only do the outer seats provide ample support, but their backrest angle is good too. Making these back seats more comfortable is the usable amount of kneeroom and legroom on offer, partly helped by the scooped-out portion of the front seatbacks. Further aiding comfort here are the dedicated AC vents, a centre armrest with cupholders, and headrests for all three passengers.

Honda Amaze boot space

As for the Amaze’s luggage-carrying capacity, its 416-litre boot is one of the most spacious in the segment, easily trumping the Maruti Dzire and Hyundai Aura. While the loading lip is high, The Amaze’s boot offers plenty of width and depth to accommodate your luggage.

Easy to live with

The Amaze gets several user-friendly details right while also feeling more premium

The Amaze’s beige-black interior theme, an expansive glass area and a low-set dashboard make its cabin feel light and airy. This two-tone colour scheme, along with the high perceived quality and overall levels of fit & finish, make the Honda Amaze’s interior feel more premium over its rivals.

Honda Amaze interior

The light steering and clutch, a tight turning radius plus an easy-to-use manual gearbox mixed with good all-round visibility, make pottering around town easy. If you go for the CVT (continuously variable transmission) option, driving the Honda Amaze becomes a hassle-free affair. It comes with paddle shifters that react promptly and also come in handy when there’s a need for engine braking. Meanwhile, the physical controls for the HVAC system allow users to adjust the temperature or the fan speed without getting too distracted.

ADAS is available

This is the only car in its class to feature advanced driver-assistance systems

Honda Amaze front tracking

The Amaze is offered with the camera-based Honda Sensing ADAS (advanced driver-assistance systems) suite on the top-spec ZX trim. For those who want that extra layer of active safety nannies, features such as adaptive cruise control with autonomous emergency braking, lane-keeping assist and automatic high-beam will be useful add-ons. The Amaze can also be had with the brand’s LaneWatch Camera system, which displays the camera feed on the infotainment screen, aiding situational awareness.

Reasons to avoid the Honda Amaze

Poor cabin insulation

The Amaze’s cabin is quite an audible one

One of the aspects of driving the Honda Amaze is its lack of proper cabin insulation. Apart from engine and road noises, even ambient sounds from the outside world make it into this cabin with relative ease. This means that the Amaze’s cabin never really feels as relaxing as it could have been.

Underwhelming performance

This Honda sedan lacks engine punch to keep up with some rivals

The 1.2-litre four-cylinder petrol engine of the Honda Amaze is happy to rev to its redline without complaint, but it isn’t a punchy unit. While there’s enough grunt once you get past the 4500rpm mark, this engine feels weak below 2,000rpm. Honda has tried to counter this by providing shorter ratios for the first and second gears.

Honda Amaze soft suspension

However, this leads to one having to downshift constantly when driving in bumper-to-bumper traffic or even when trying to drive away from speed-breakers. Even though the CVT masks this engine’s weak low-end and mid-range performance, pushing it results in the type’s characteristic rubber-band effect becoming apparent. The soft suspension means that the Amaze sags under load, raising the risk of scraping the belly on large speed-breakers. It also causes the Amaze to roll noticeably in the corners.

Pricier than rivals

The Amaze remains the most expensive offering in its segment

Honda Amaze LaneWatch camera

Unlike the top-spec Maruti Dzire, which is Rs 64,000 cheaper the fully loaded Honda Amaze, it still gets a powered sunroof and a 360-degree camera setup. The Amaze also lacks Type-C USB ports, offering just Type-A and 12-volt outlets. While the higher price tag of the top-spec trim can be explained away due to the inclusion of ADAS, buyers would still want the aforementioned missing features at this price bracket.

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