Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT performance comparison

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT performance comparison

The Tata Sierra and Kia Seltos are among the few mid-size SUVs available with a diesel engine option. We have already compared their fuel efficiency figures, but this time we are looking at how the two perform in terms of acceleration. It should be noted that the Seltos diesel AT was tested in slightly wet conditions at a temperature of 27deg C. Here is how the two SUVs compare.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Specifications

SUVSierraSeltos
Cylinder count44
Displacement1497cc1493cc
Power118hp at 4000rpm 116hp at 4000rpm
Torque280Nm at 1500-2750rpm250Nm at 1500-2750rpm
Automatic transmission6-speed torque converter6-speed torque converter
Tyre size19 inch18 inch

The Tata Sierra and Kia Seltos use four-cylinder diesel engines with nearly the same displacement, at 1,497cc and 1,493cc, respectively. The Sierra makes 118hp, which is 2hp more than the Seltos’ 116hp. Its bigger advantage is torque, with 280Nm compared with 250Nm for the Seltos. Notably, the Sierra AT diesel makes 20Nm more torque than the manual version.

Both SUVs get a six-speed torque-converter automatic gearbox and are also equipped with a variable-geometry turbocharger, which helps improve power delivery and reduce turbo lag. In terms of wheel size, the Sierra gets 19-inch tyres, while the Seltos is equipped with 18-inch units.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: 0-100kph sprint

SUVSierraSeltos
20kph (s)1.441.36
40kph (s)3.533.11
60kph (s)5.935.81
80kph (s)9.319
100kph (s)13.3713.17

In our tests, the Kia Seltos is quicker than the Tata Sierra in accelerating from a standstill to the 100kph mark. From 0-20kph, the Seltos takes 1.36 seconds, 0.08 seconds quicker than the Sierra’s 1.44 seconds figure. The gap increases to 0.42 seconds at 40kph, with the Seltos taking 3.11 seconds versus 3.53 seconds for the Sierra.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT 0-100kph sprint

At 60kph, the Seltos takes 5.81 seconds, just 0.12 seconds quicker than the Sierra’s 5.93 seconds. The difference is even smaller at 80kph, where the Seltos takes 9 seconds compared with 9.31 seconds for the Tata SUV. At 100kph, the Kia SUV completes the run in 13.17 seconds, while the Sierra takes 13.37 seconds, making it 0.20 seconds quicker.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Rolling acceleration

In the 20-80kph run, with the cars in third gear and using kickdown, the Seltos is quicker than the Sierra. It takes 7.72 seconds to complete the run, compared with 7.97 seconds for the Sierra, giving it a 0.25 second advantage.

The result reverses in the 40-100kph fourth-gear kickdown test. Here, the Sierra takes 9.42 seconds, making it 0.62 seconds quicker than the Seltos, which completes the run in 10.04 seconds.

Tata Sierra vs Kia Seltos diesel AT: Prices

SUVSierraSeltos
Price range (Rs lakh)15.99-21.2915.32-21.82

The Kia Seltos has a lower starting price at Rs 15.32 lakh, compared with Rs 15.99 lakh for the Tata Sierra, making it Rs 67,000 cheaper at the base end. However, the Sierra has a lower top-spec price of Rs 21.29 lakh, while the Seltos goes up to Rs 21.82 lakh, making the Sierra Rs 53,000 cheaper at the top end.

Autocar India’s performance testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Ex-showroom prices are as of August 11, 2026.

Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

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Vedanta Group: इन कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद-बेच सकते हैं प्रमोटर, ₹3000 करोड़ तक जुटाने की तैयारी

Vedanta Group: माइनिंग दिग्गज वेदांता ग्रुप की हाल में लिस्ट हुई कुछ कंपनियों में जल्द ही प्रमोटर खरीद-बिक्री कर सकते हैं। Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके लिए खुले बाजार से धीरे-धीरे शेयर खरीदने का रास्ता अपनाया जा सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने CNBC-TV18 को यह जानकारी दी है।

खुले बाजार से होगी खरीदारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर चुनिंदा कंपनियों के शेयर खुले बाजार से धीरे-धीरे खरीद सकते हैं। इसे Creeping Purchase कहा जाता है। इसमें एक साथ बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के बजाय समय के साथ थोड़ा-थोड़ा शेयर खरीदा जाता है।

SEBI के नियमों के तहत प्रमोटर इस तरीके से एक साल में अपनी हिस्सेदारी 5% तक बढ़ा सकते हैं। हालांकि, असल खरीदारी कितनी होगी और किस कंपनी में होगी, यह अभी साफ नहीं है।

₹2,000 से ₹3,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर Oil & Gas और Iron & Steel कारोबार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। इसके लिए Vedanta Ltd. या Vedanta Aluminium के शेयरों को गिरवी रखने या बेचने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

हालांकि, Vedanta ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है। CNBC-TV18 के सवाल पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वह बाजार में चल रही अटकलों पर टिप्पणी नहीं करती।

अनिल अग्रवाल ने क्या कहा था?

इन डीमर्ज्ड कंपनियों की लिस्टिंग के समय Vedanta Group के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि उनके लिए ‘मालिक बने रहना जरूरी नहीं है।’ उन्होंने कहा था कि कंपनी की ग्रोथ के लिए वह हर संभव कदम उठाएंगे। इसमें कारोबार का पुनर्गठन और विदेशों में विस्तार भी शामिल है।

वेदांता ग्रुप के शेयरों का हाल

मंगलवार को Vedanta का शेयर 2.70%% गिरकर 276 रुपये पर बंद हुआ। वहीं Vedanta Oil & Gas का शेयर 39.64 रुपये पर लगभग सपाट रहा।

Vedanta Iron & Steel का शेयर 5% के अपर सर्किट के साथ 38.81 रुपये पर पहुंच गया। दूसरी ओर, Vedanta Aluminium Metal का शेयर 0.69% गिरकर 469.35 रुपये पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Samsung Galaxy S26 FE के फीचर्स लॉन्च से पहले लीक! मिलेगा 120Hz AMOLED, 50MP कैमरा और 4,900mAh बैटरी

Samsung Galaxy S26 FE के सितंबर में लॉन्च होने की उम्मीद है और इससे पहले ही इसके सभी स्पेसिफिकेशन्स लीक हो गए हैं। उम्मीद है कि इस ‘फैन एडिशन’ मॉडल का डिजाइन Galaxy S26 सीरीज जैसा ही होगा, लेकिन इसमें पिछले साल के Galaxy S25 वाला Exynos 2500 चिपसेट इस्तेमाल किया जाएगा। WinFuture.de की एक नई रिपोर्ट में फोन के डिस्प्ले, कैमरे, बैटरी, कनेक्टिविटी, साइज और स्टोरेज ऑप्शन के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। उम्मीद है कि इस फोन में 6.7-इंच का AMOLED डिस्प्ले, 4,900mAh की बैटरी, 45W चार्जिंग और Samsung के One UI के साथ Android 17 होगा।

Samsung Galaxy S26 FE स्पेसिफिकेशन्स (अनुमानित)

WinFuture.de की रिपोर्ट के अनुसार, Samsung के आने वाले Galaxy S26 FE में 6.7-इंच का Dynamic AMOLED 2X पैनल होगा, जिसका रिजॉल्यूशन 2,340×1,080 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 120Hz तक हो सकता है। जबकि सामान्य स्थितियों में ब्राइटनेस 1,200 निट्स और हाई-ब्राइटनेस मोड में 1,900 निट्स तक पहुंचने की उम्मीद है।

उम्मीद है कि इस हैंडसेट में Exynos 2500 चिपसेट का इस्तेमाल किया जाएगा। Samsung ने Galaxy S25 में भी इसी चिपसेट का इस्तेमाल किया था। इसमें 10 CPU कोर हैं और यह 3.3GHz तक की स्पीड दे सकता है। खबरों के मुताबिक, इस प्रोसेसर के साथ 8GB RAM होगी और 128GB व 256GB स्टोरेज के ऑप्शन भी होंगे। इसके अलावा, यह फोन Android 17 पर आधारित One UI 9 के साथ आ सकता है।

Galaxy S26 FE में फोटोग्राफी के लिए मुख्य रूप से 50MP का प्राइमरी कैमरा होने की उम्मीद है, जिसमें f/1.8 अपर्चर और हार्डवेयर इमेज स्टेबलाइजेशन की सुविधा होगी। इसके रियर कैमरा सेटअप में f/2.2 अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम व f/2.4 अपर्चर वाला 8MP का टेलीफ़ोटो सेंसर भी शामिल हो सकता है। वहीं, सेल्फी के लिए सामने की तरफ 12MP का f/2.2 कैमरा होने की उम्मीद है, हालांकि इसमें ऑटोफोकस की सुविधा नहीं होगी। वीडियो रिकॉर्डिंग की बात करें तो रियर कैमरों से 30fps पर 8K वीडियो रिकॉर्ड किया जा सकता है। वहीं, 4K वीडियो 60fps तक रिकॉर्ड करने का विकल्प मिल सकता है।

कनेक्टिविटी के लिए, Galaxy S26 FE फोन में Bluetooth 5.4, Wi-Fi 6 और NFC का सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। Samsung इसमें दो नैनो-सिम स्लॉट के साथ-साथ एक या दो eSIM का सपोर्ट भी दे सकता है। इसके अलावा, इस हैंडसेट में धूल और पानी से बचाव के लिए IP68 रेटिंग भी होने की उम्मीद है।

Samsung Galaxy S26 FE में 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट के साथ 4,900mAh की बैटरी हो सकती है। आम इस्तेमाल में इसका बैटरी बैकअप 50 घंटे तक का बताया जा रहा है, जबकि EPREL क्लासिफिकेशन के तहत इसकी बैटरी को 1,200 चार्जिंग साइकल के लिए रेट किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Samsung इसमें सिलिकॉन-कार्बन सेल का इस्तेमाल कर सकता है।

फोन के वजन की बात करें तो Galaxy S26 FE का वजन करीब 193 ग्राम हो सकता है, जबकि इसकी मोटाई 7.4mm रहने की उम्मीद है। Samsung इस फोन को Graphite, Pistachio और Blueberry कलर ऑप्शन में पेश कर सकता है। इनमें Graphite को डार्क ग्रे, Pistachio को हल्का हरा और Blueberry को हल्का नीला रंग बताया गया है।

इसका डिजाइन देखें तो Galaxy S26 FE का लुक Galaxy S26 सीरीज के बाकी मॉडल्स जैसा ही रहने की उम्मीद है।

बता दें कि Samsung सितंबर की शुरुआत में Galaxy S26 FE लॉन्च कर सकता है। पहले आई लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोप में इसकी कीमत EUR 799 (लगभग 88,000 रुपये) हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा कीमत पर Galaxy S26 Plus एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह मॉडल लगभग EUR 700 (लगभग 77,100 रुपये) में मिल सकता है और इसमें ज्यादा स्टोरेज, बेहतर डिस्प्ले और ज्यादा दमदार कैमरे जैसे फीचर्स मिल सकते हैं।

SIP for Child: 18 साल का होने से पहले बच्चा बन जाएगा करोड़पति! समझिए कितना निवेश करना होगा और कैसे करें प्लानिंग

SIP for Child: इस वित्तीय अनिश्चितता के दौर में अपने बच्चों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि बहुत से लोग बच्चे के पैदा होने के साथ निवेश की प्लानिंग शुरु कर देते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि शुरुआत से ही बहुत बड़ी रकम लगाई जाए। सही निवेश, लंबी अवधि और कंपाउंडिंग की ताकत से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है। सवाल है कि हर महीने कितना निवेश करना होगा और अलग-अलग रिटर्न पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपका बच्चा अभी पैदा हुआ है। आपके पास पूरे 18 साल हैं। अगर आप हर महीने एक तय रकम SIP में लगाते हैं और औसतन 10%, 12% या 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो कितना पैसा बन सकता है, इसे समझते हैं।

1 करोड़ के लिए हर महीने कितना निवेश?

18 साल में कुल 216 महीने होते हैं। 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए अनुमानित मंथली SIP इस तरह होगी।

अनुमानित सालाना रिटर्न18 साल में 1 करोड़ के लिए मंथली SIPकुल निवेशअनुमानित फायदा
10%₹17,487₹37.77 लाख₹62.23 लाख
12%₹14,184₹30.64 लाख₹69.36 लाख
15%₹10,298₹22.24 लाख₹77.76 लाख

यहां एक बात समझना जरूरी है। 15% रिटर्न मानकर चलना ज्यादा आक्रामक अनुमान है। शेयर बाजार आधारित निवेश में रिटर्न तय नहीं होता। इसलिए प्लान बनाते समय बहुत ज्यादा रिटर्न मानकर चलना ठीक नहीं है।

12% रिटर्न पर ₹10,000 की SIP से कितना पैसा बनेगा?

अब दूसरा उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप बच्चे के जन्म से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं। 18 साल तक निवेश जारी रखते हैं।

अगर औसत रिटर्न 10% रहा तो करीब 57.2 लाख रुपये बनेंगे। 12% रिटर्न पर यही रकम करीब 70.5 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, 15% औसत रिटर्न मिला तो फंड करीब 97.1 लाख रुपये पहुंच सकता है। यानी सिर्फ 10,000 रुपये की मासिक SIP से भी 18 साल में 1 करोड़ के काफी करीब पहुंचा जा सकता है।

अलग-अलग SIP से कितना फंड बनेगा?

12% सालाना औसत रिटर्न मानकर देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।

मासिक SIP18 साल में कुल निवेशअनुमानित फंड
₹5,000₹10.80 लाख₹35.3 लाख
₹10,000₹21.60 लाख₹70.5 लाख
₹15,000₹32.40 लाख₹1.06 करोड़
₹20,000₹43.20 लाख₹1.41 करोड़

इस हिसाब से 15,000 रुपये की मासिक SIP 12% औसत रिटर्न पर 18 साल में करीब 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकती है।

बच्चा 5 साल का हो चुका है तो?

मान लीजिए आपने निवेश जन्म के समय शुरू नहीं किया और बच्चा अब 5 साल का है। आपके पास 18 साल की उम्र तक सिर्फ 13 साल बचे हैं।

12% सालाना औसत रिटर्न मानें तो 1 करोड़ रुपये के लिए करीब 28,200 रुपये हर महीने निवेश करना होगा। समय कम होने की वजह से मासिक निवेश काफी बढ़ जाता है।

अगर बच्चा 10 साल का हो चुका है तो सिर्फ 8 साल बचेंगे। ऐसे में इसी अनुमानित रिटर्न पर करीब 64,300 रुपये महीने की SIP चाहिए होगी। यही वजह है कि बच्चे के लिए निवेश में जल्दी शुरुआत सबसे बड़ा फायदा देती है।

₹1,000 या ₹2,000 की SIP करें तो?

अगर शुरुआत में बड़ी रकम निवेश करना संभव नहीं है, तो ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से भी शुरुआत की जा सकती है। मान लीजिए 18 साल तक हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो करीब ₹7.6 लाख का फंड बन सकता है।

वहीं, ₹2,000 की SIP से करीब ₹15.2 लाख हो सकते हैं। 15% औसत रिटर्न मिलने पर यही रकम क्रमशः करीब ₹10.9 लाख और ₹21.8 लाख हो सकती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन कम उम्र से निवेश शुरू करने का फायदा यह है कि समय के साथ SIP बढ़ाई जा सकती है।

पैसा कहां निवेश करें?

लंबे समय का लक्ष्य है तो निवेश का तरीका भी उसी हिसाब से चुनना चाहिए। 18 साल का समय होने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP एक विकल्प हो सकती है। लेकिन इसमें बाजार का जोखिम रहता है।

जैसे-जैसे बच्चा 18 साल के करीब पहुंचे, पूरे पैसे को इक्विटी में रखना सही नहीं होगा। लक्ष्य से कुछ साल पहले धीरे-धीरे रकम को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट किया जा सकता है।

एक और तरीका हर साल SIP बढ़ाना है। उदाहरण के लिए शुरुआत 10,000 रुपये महीने से करें और हर साल इसे 10% बढ़ाते जाएं। इससे शुरुआती वर्षों में कम रकम से शुरुआत होगी और समय के साथ निवेश बढ़ता जाएगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

Marc Philipp Gemballa Marsien GT revealed with over 830hp

Marsien GT front quarter

Based on the 992-series Porsche 911 Turbo S, the Marsien GT has been revealed ahead of its global premiere at the Pebble Beach Concours d’Elegance on August 13, 2026. Produced by Marc Philipp Gemballa GmbH, the Marsien GT is the company’s second limited-edition model – the first was the desert-focused Marsien of 2021. Including 40 units of the latter and another 30 examples of the grand tourer (GT), there’ll be a total of 70 Marsiens produced. The 70-unit combined production run honours the 70th anniversary of Uwe Gemballa, Marc Philipp Gemballa’s father, the marque stated.

  • Has a carbon-fibre exterior, active aero and custom colour options
  • Gets Michelin Pilot Sport Cup 2 tyres and an Akrapovic titanium exhaust system
  • Revised six-cylinder boxer engine outputs over 830hp and 930Nm

Marsien GT design and interior

Marsien GT front

The exterior styling of the Marsien GT is the work of French automotive designer Alan Derosier. It features a one-off four-layer metallic colour called Anniversary Liquid Champagne Gold, in honour of the 70th anniversary of Uwe Gemballa. The colour is applied at a paint studio that the brand claims can “fulfil the most daring customer colour requests.” The brand also says that the Marsien GT has a full carbon-fibre exterior, consisting of over a hundred individual carbon-fibre components. The front axle-lift system has been retained from the 911 Turbo S, though.

Marsien GT rear quarter

Noticeably different elements over the donor vehicle include the uniquely shaped outside rearview mirrors (ORVMs), a top-mounted scoop, active air flaps on the front fenders, ram-air intakes, side skirts with integrated air channels, and a large active rear wing whose design is reminiscent of the Porsche 959’s. Adding to these are the forged aluminium wheels wrapped in Michelin Pilot Sport Cup 2 tyres, an Akrapovic titanium exhaust system, and a carbon-fibre underfloor. All these lightweight measures ensure weight savings of 75kg over the donor vehicle, whilst the active aero features cool the brakes and reduce turbulence from the wheel arches, as per the brand.

Marsien GT interior

Some of the stand-out design elements inside the Marsien GT are visible along the centre console, which itself is raised over what’s seen in the standard 911 Turbo S, but there’s also an aluminium gear lever that’s inspired by the unit found in the Carrera GT. Customers can opt this gear lever to be covered in either exposed carbon or mahogany wood, instead of softer materials like leather or Alcantara. The interior also features hand-stitched brand logo on the steering wheel, headrests, armrest and floor mats.

Marsien GT gear lever

The centre console also sports a metal badge displaying the individual production number of each vehicle. Apart from the carbon bucket seats and dark grey Alcantara, the interior of this launch-ready example features champagne accents for much of the stitching, plus on the seatbelts and within the instrument cluster. There are also matte carbon-fibre accents and an Alcantara-trimmed roll bar. According to the brand, customers can purchase a carbon-fibre interior package that adds even more exposed carbon-fibre elements.

Marsien GT powertrain and suspension

Marsien GT rear

Porsche engine specialist RUF Automobile is key behind the powertrain of the Marsien GT. Uwe Gemballa and RUF Automobile have collaborated to produce powertrains for various vehicles in the 1980s, said Marc Philipp Gemballa GmbH. Compared to the 911 Turbo S, the six-cylinder boxer engine of the Marsien GT features a remapped ECU (engine control unit) and enhanced variable-geometry turbochargers – this results in a claimed output of over 830hp and 930Nm of torque. The 8-speed dual-clutch automatic transmission (DCT) has also been revised to handle the extra power and torque.

The brand is currently working on a second-stage engine upgrade option, which will take the output to over 900hp. Even in its current avatar, the Marsien GT has a claimed top speed of 330kph and a 0-97kph sprint time of 2.4 seconds. That said, the Marsien GT retains the all-wheel-drive (AWD) system of the Porsche 911 Turbo S.

Marsien GT wheels

However, Marc Philipp Gemballa GmbH has partnered with KW Automotive for its car’s suspension needs. It claims that the new double-wishbone front setup has been specifically developed for the Marsien GT, with its electronically controlled dampers capable of adjusting and responding to changing road conditions within just 20 milliseconds. This suspension setup ensures that the Marsien GT offers precise control without sacrificing ride comfort that’s expected of a grand tourer, according to the brand.

Marsien GT price

Marsien GT exterior top-down

The Marc Philipp Gemballa Marsien GT will be making its world premiere during the upcoming 2026 Monterey Car Week at the Pebble Beach Concours d‘Elegance in California, USA. Production will begin in 2027, with first customer deliveries commencing later the same year. The starting price of the Marsien GT will be EUR 770,000, not including the cost of the donor vehicle, i.e., the 992 Porsche 911 Turbo S. For reference, the latter starts at EUR 271,000 in Germany.

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भारतीयों के लिए खुशखबरी! विदेश घूमने का मौका न चुके, अबू धाबी का 30 दिन का वीजा बिलकुल फ्री

अबू धाबी घूमने का सपना देख रहे भारतीय ट्रैवलर के लिए अब यह ट्रिप आसान हो गयी हैं अबू धाबी की यात्रा का खर्च और झंझट दोनों कम हो सकते हैं। क्योंकि एलिजिबल भारतीय ट्रैवलर को 30 दिन का फ्री यूएई टूरिस्ट वीजा फैसिलिटी लॉन्च की है। इससे अबू धाबी घूमने की प्लानिंग बना रहे लोगों के लिए वहां जाना पहले के मुकाबले आसान हो गया है।

फ्री वीजा स्कीम

Abu Dhabi Airports Reports Record Growth in First Half of 2025

एलिजिबल इंडियन पासपोर्ट होल्डर को इस स्कीम में 30 दिन का यूएई टूरिस्ट वीजा बिना किसी शुल्क के मिल सकता है। इस वीजा के लिए करीब Dh285 यानी लगभग 7,500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इस स्कीम का फायदा लेने के लिए ट्रिप की बुकिंग इसमें शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए करनी होगी।

 

बुकिंग का तरीका

Abu Dhabi Wallpapers (51 images) - WallpaperCat

इस फैसिलिटी का लाभ सीधे किसी भी बुकिंग से नहीं मिलेगा। ट्रैवलर को इस स्कीम में शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए अबू धाबी का हॉलिडे पैकेज बुक करना होगा। अगर कोई ट्रैवलर 31 अक्टूबर से पहले पैकेज बुक कर लेता है, लेकिन उसकी ट्रिप इस टाइम ड्यूरेशन के बाद है, तो उसे फ्री वीजा का फायदा नहीं मिलेगा।

वीजा प्रोसेस

फ्री वीजा की प्रोसेस ट्रैवल एजेंसियों के जरिए पूरी की जाएगी। एजेंसी अबू धाबी के तय डेस्टिनेशन मैनेजमेंट पार्टनर के साथ मिलकर वीजा प्रोसेस कर सकती है। कुछ एजेंसियां अपने मौजूदा पार्टनर के जरिए भी काम कर सकती हैं।

फैमिली ट्रिप

इस स्कीम में फैमिली मेंबर सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, तो वे भी इस सुविधा का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन पूरी स्कीम फिलहाल 20,000 वीजा तक लिमिटेड है। वीजा के लिए कोई अलग से फास्ट ट्रैक सुविधा नहीं होगी।

ट्रैवल कंडीशन

फ्री वीजा पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ट्रैवलर के पास भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए और उसे भारत से अबू धाबी की ट्रिप करनी होगी। बुकिंग में अबू धाबी के होटल में कम से कम लगातार तीन रात रुकना और भारत से आने-जाने की फ्लाइट शामिल होनी चाहिए। जर्नी 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 के बीच ही करनी होगी।

 ध्यान दे

आप भी इस टाइम पर अबू धाबी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो जरूरी शर्तें पूरी करके इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन वीजा लिमिटेड है, इसलिए ट्रैवल और बुकिंग से पहले सभी रूल चेक करें।

Aprilia Tuono Special Edition review: the new standard

Aprilia Tuono Special Edition review: the new standard

When you hear the words Special Edition, the natural assumption is that this is the special version of a normal bike. Aprilia thinks otherwise, and unlike what the name suggests, the new Special Edition is the only Tuono 457 you can buy in India today.

Tuono 457 Special Edition Comfort – 7/10

 

The changes are all aimed at making the Tuono a little easier to live with. When first launched, the Tuono was quite literally the naked version of the racy RS 457 with the only differences being in how it looked and the fact that it had a flat handlebar instead of clip-ons. The result was a high capable bike but one that was unforgiving in terms of comfort.

Fly screen is now standard fit

The Special Edition aims to make the Tuono more inviting with tweaks made to the riding position as well as the suspension. The handlebar is the same, but a new riser raises it by about 10mm. While the Tuono used to have the same seats as the RS 457, the rider seat now has additional padding which again raises the seat height by about 10mm.

Same handlebar as before but with taller risers

These two changes may sound marginal, but they have a noticeable effect. At 6’1”, I used to find the Tuono uncomfortably cramped, with my knees feeling locked in place by the tank and the handlebar aggressively low. The new setup improves things and while this is still a compact riding position with high-set footpegs, it’s not punishingly so – I do appreciate the difference it makes to comfort after an hour of riding.

Tuono 457 Special Edition Suspension and Handling – 9/10

SpecificationsValues
Front Suspension TypeØ 41mm USD fork, adjustable preload, 120mm wheel travel
Rear Suspension TypeMonoshock, adjustable preload, 130 mm wheel travel
Front Tyre Size110/70 – 17
Rear Tyre Size150/60 – 17
Brake typeFront – Disc, Rear – Disc

The other change comes in the form of retuned suspension with a focus on comfort. Wheel travel is unchanged, but the compression/rebound damping and spring rates have been reduced a little at the front while the rear gets reduced spring rates as well as a little less compression damping – rebound damping is similar to before. Aprilia stresses that while the suspension is softer, it will not bottom out under hard riding conditions.

The riding position is still sporty but now noticeably more comfortable
SpecificationsValues
Fuel Tank Size12.7 L
Kerb Weight175 kg

From what I could tell, the bike does feel a little softer and more absorptive in the initial travel, but we faced an unusual difficulty in making a clear verdict – the roads around Baramati where we were riding it were shockingly good! You could tell that this was still a very agile and reactive motorcycle with a taut feel. I’m quite confident that its superb handling skills are still intact and the only difference may be seen when being pushed to the limit at the race track – something we look forward to evaluating soon. At the same time, I don’t expect this to be a plush and comfortable bike over Mumbai’s bumpy concrete roads, but it should be a little less harsh than before.

Rider seat gets more padding for better comfort

The other changes on the Tuono are largely visual. It now gets a fly screen as standard which adds to the look but doesn’t transform its wind protection capabilities in any significant way. There’s also a new adjustable brake lever and a smart shade of black that I think makes the Tuono 457 a better looking bike.

Tuono 457 Special Edition Engine and performance – 9/10

The 457cc twin cylinder engine has strong performance and makes a great sound
SpecificationsValues
Engine Displacement457 cc
Max Engine Power47.6 hp @ 9400 rpm
Max Engine Torque43.5 Nm @ 6700 rpm
Number of Gears6

The rest remains the same, including the absolutely delectable 457cc parallel twin engine that makes a superb sound and has solid punch. The engine doesn’t have a great top end, but the mid range is strong enough to pull clutch up wheelies in second gear in a way that no other locally manufactured bike can match. Highway speeds are smooth and effortless and the bike can sit at 130 or higher without stress. This really would make for a great engine in a Tuareg 457 ADV whenever that finally becomes a reality. The company also seems to be ironing out the significant reliability concerns that plagued the first RS 457 models and the number of customer complaints has reduced.

Suspension is now a little softer while the braking set up is the same

Braking hardware is the same as well and it is good enough for road use. It’s only under repeated hard braking conditions that you will want to upgrade to better brake pads at the very least. The one missing feature is a bi-directional quickshifter which can be bought for an additional Rs 21,000.

Tuono 457 Special Edition Price and Conclusion – 8/10

The Aprilia Tuono 457’s Rs 4 lakh ex-showroom price is suddenly a lot more appealing than it used to be. That’s not because Aprilia lowered it in any way, but simply because they haven’t raised it after the GST rate hike. While its chief rival the KTM 390 Duke used to cost around Rs 1 lakh less, that difference is now just Rs 50,000 and that suddenly puts the Tuono in a new light.

It is still a more expensive bike – both to buy and run – and the dealer network is far more limited as well. However, as far as riding thrills go, no rival comes close to the ‘scaled down big bike’ feel this bike offers and with these changes, it makes for a much more appealing package at this price. 

18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट… आज से इंटरव्यू शुरू, राम मंदिर के पहले CEO की तलाश तेज

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। चयन प्रक्रिया से जुड़े लोगों के अनुसार, करीब 5,200 लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 18 उम्मीदवारों को अगले दौर के लिए चुना गया है। ट्रस्ट ने यह कदम अपनी प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी को मजबूत करने के लिए उठाया है। यह फैसला दान में मिले पैसे के गलत इस्तेमाल के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति से ट्रस्ट के कामकाज और आर्थिक मामलों की निगरानी को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

18 उम्मीदवार किए गए शॉर्टलिस्ट

शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवार 10 अगस्त को अयोध्या पहुंच गए। ट्रस्ट ने उनके ठहरने के लिए पहले से व्यवस्था की थी। इन उम्मीदवारों में कुछ पूर्व सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत के बड़े मंदिरों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर काम कर चुके लोगों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन सभी उम्मीदवारों का इंटरव्यू आज से राम मंदिर में शुरू होगा। इंटरव्यू के जरिए ट्रस्ट इस पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार का चयन करेगा।

इंटरव्यू की तैयारी

चयन समिति के एक सदस्य ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि समिति ने तय किए गए नियमों और योग्यता के आधार पर 5,000 से ज्यादा आवेदनों की जांच की थी। उन्होंने बताया कि आवेदन की जांच के दौरान कुछ उम्मीदवारों से ऑनलाइन बातचीत भी की गई। इसका मकसद उनकी योग्यता से जुड़ी कुछ बातों को स्पष्ट करना और उनके विचारों को समझना था। समिति के सदस्य के मुताबिक, करीब 20 दिनों तक चली चयन प्रक्रिया के बाद अंतिम इंटरव्यू के लिए करीब 18 उम्मीदवारों को चुना गया है।

चयम समिति में शामिल हैं ये लोग

चयन समिति में पूर्व जज प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वैज्ञानिक व शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं। उम्मीदवारों के इंटरव्यू सुबह 10 बजे से शुरू होने हैं। मामले की जानकारी रखने वाले ट्रस्ट के एक अधिकारी के हवाले से ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने बताया कि इंटरव्यू राम मंदिर में ही होंगे। सभी उम्मीदवारों को मीडिया से बात न करने के निर्देश दिए गए हैं।

दो दिन तक चलने वाली इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति ट्रस्ट को तीन उम्मीदवारों के नाम सुझाएगी। इसके बाद ट्रस्ट इनमें से किसी एक को पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करेगा। नए सीईओ की जिम्मेदारी राम मंदिर के प्रशासन की निगरानी करने के साथ-साथ मंदिर से जुड़े अलग-अलग कामों और व्यवस्थाओं को संभालना होगा। इस पद के लिए चुने जाने वाले व्यक्ति के लिए हिंदू धर्म को मानने वाला होना जरूरी है। इसके अलावा उसे हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का भी सख्ती से पालन करना होगा।