ईरान पर अमेरिका का भीषण हमला, इन सैन्य ठिकानों पर बरसाए बम! होर्मुज में चरम पर तनाव

अमेरिका ने ईरान पर सीजफायर खत्म होने के बाद तीसरे दौर की एयरस्ट्राइक शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम पर कई हमले किए हैं। इसके अलावा होर्मुज के आसपास मौजूद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कई बोट को भी निशाना बनाया गया। इससे पहले अमेरिका ने बुधवार और गुरुवार को भी एयरस्ट्राइक की थी।

ईरान की नई चेतावनी

इससे पहले ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार संदेश जारी किया। उन्होंने कहा- ‘मैं अपने पिता के बेगुनाह खून का बदला जरूर लूंगा, यही हमारे देश की भी इच्छा है।’

फिर शुरू हुआ हमलों का दौर

रविवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई नए मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। इन हमलों में कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई। इसके अलावा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है। ईरान की राजधानी तेहरान का दावा है कि विस्फोटक ड्रोन से कुवैत में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद के भंडार और अमेरिकी रडार स्टेशन को निशाना बनाया गया। वहीं एक अन्य हमले में बहरीन में अमेरिकी संचार और रडार सुविधाओं पर हमला करने का भी दावा किया गया है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यह भी दावा किया है कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच कतर की सेना ने दावा किया कि उसने देश को निशाना बनाकर दागी गई मिसाइल को बीच रास्ते में ही रोक दिया। वहीं बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी कहा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम ईरान की ओर से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कार्रवाई कर रहा है। इस दौरान कई जगहों पर धमाकों की आवाजें भी सुनी गईं।

हमले के बाद एक भारतीय लापता

ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज ‘GFS गैलेक्सी’ पर हमला हुआ। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को बताया कि इस जहाज पर 11 भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि एक भारतीय अब भी लापता है। भारत ने हमले की कड़ी निंदा की है।

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन समय से पहले चुकाना सही है या नहीं? समझिए कब होगा फायदा

Personal Loan Prepayment: पर्सनल लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखते हैं। लेकिन कुछ महीने बाद जब बोनस मिलता है या बचत बढ़ती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या लोन समय से पहले चुका देना चाहिए?

इसका जवाब हर किसी के लिए एक जैसा नहीं है। कई बार प्रीपेमेंट से लाखों रुपये का ब्याज बच जाता है। लेकिन कई बार फायदा बहुत कम होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है।

सबसे ज्यादा फायदा कब होता है?

पर्सनल लोन की EMI में शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज्यादा होता है। धीरे-धीरे ब्याज कम होता जाता है और मूलधन (Principal) का हिस्सा बढ़ता जाता है।

यानी अगर आप लोन की शुरुआत में प्रीपेमेंट करते हैं, तो ज्यादा ब्याज बचा सकते हैं। अगर आखिरी साल में लोन चुकाते हैं, तो बचत बहुत कम होती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 15% सालाना ब्याज पर लिया है। इस पर EMI करीब ₹11,895 बनेगी। पूरे 5 साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा यानी सिर्फ ब्याज के तौर पर करीब ₹2.14 लाख चुकाने होंगे।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने बाद ₹2 लाख का प्रीपेमेंट कर दिया। ऐसी स्थिति में आपकी बची हुई ब्याज की रकम में हजारों रुपये की कमी आ सकती है। अगर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज कम लेता है, तो यह फैसला काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

ब्याज दर ज्यादा है तो सोचिए जरूर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 10% से 24% तक हो सकती है। यह होम लोन से काफी ज्यादा होती है। अगर आपका लोन 14%, 15% या 16% पर चल रहा है, तो जल्दी चुकाने से अच्छी बचत हो सकती है। लेकिन अगर किसी कंपनी स्कीम या ऑफर के तहत आपको कम ब्याज पर लोन मिला है, तो पहले हिसाब जरूर लगाएं।

प्रीपेमेंट चार्ज जरूर देखें

ज्यादातर बैंक और NBFC लोन समय से पहले बंद करने पर 2% से 5% तक फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट चार्ज लेते हैं। कई बैंक पहले 6 या 12 महीने तक प्रीपेमेंट की अनुमति भी नहीं देते। इसलिए पहले यह देखें कि ब्याज में जितनी बचत होगी, वह चार्ज से ज्यादा है या नहीं।

पूरी बचत लोन में मत लगा दीजिए

मान लीजिए आपके पास ₹3 लाख की बचत है और आपने पूरी रकम लोन चुकाने में लगा दी। एक महीने बाद अगर मेडिकल इमरजेंसी में ₹2 लाख की जरूरत पड़ जाए, तो फिर आपको नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेना पड़ सकता है। इसलिए लोन चुकाने के बाद भी कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च जितनी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में जरूर बचाकर रखें।

होम लोन लेना है तो पहले पर्सनल लोन खत्म करें

अगर आने वाले समय में आप होम लोन लेने वाले हैं, तो पर्सनल लोन पहले बंद करना फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी Debt-to-Income (DTI) Ratio बेहतर होती है। बैंक आपकी कुल EMI देखते हैं। EMI कम होगी तो नए लोन की मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

कब प्रीपेमेंट करने की जरूरत नहीं?

अगर आपका लोन आखिरी साल में पहुंच चुका है, तो जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है। तब तक ज्यादातर ब्याज चुकाया जा चुका होता है। इसी तरह अगर आपके पास ऐसा निवेश का मौका है, जहां 15% रिटर्न मिलने की संभावना है और आपका लोन 11% पर है, तो पहले निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। हालांकि, इसमें जोखिम का भी ध्यान रखें।

आपका फैसला क्या होना चाहिए?

पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट तब सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, जब लोन शुरुआती दौर में हो, ब्याज दर ज्यादा हो और प्रीपेमेंट चार्ज कम हो। लेकिन सिर्फ कर्ज खत्म करने के लिए अपनी पूरी बचत खर्च करना सही नहीं है। पहले हिसाब लगाइए, फिर फैसला लीजिए। कई बार थोड़ा इंतजार करना भी आपके लिए ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

Gold Price Outlook: सोना अभी खरीदे या थोड़ा और रुकें? एक्सपर्ट्स ने बताया दिवाली तक का ये टारगेट

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

मेट्रो कॉरिडोर, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर… 1647 करोड़ के ये 28 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स मंजूर, अब बदल जाएगी दिल्ली की सूरत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की रफ्तार और सूरत को बदलने के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 1647 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दे दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। इस भारी-भरकम बजट से दिल्ली में मेट्रो कॉरिडोर, बारापुला एलिवेटेड रोड, नए फ्लाईओवर और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) चार्जिंग स्टेशन समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) को बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रोत्साहन के रूप में 756 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि को भी मंजूरी दी है। यह जानकारी दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में दी गई है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि इस योजना के तहत दिल्ली को क्या-क्या मिलने जा रहा है:

मंजूर हुए दिल्ली सरकार के सभी 28 बड़े प्रोजेक्ट्स

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्तावित सभी 28 प्रमुख कैपिटल प्रोजेक्ट्स को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की SASCI योजना के तहत मंजूरी मिली है। मंजूर किए गए इन 28 प्रोजेक्ट्स में मुख्य रूप से ये चीजें शामिल हैं:

  • दिल्ली मेट्रो रेल परियोजनाएं: नए मेट्रो कॉरिडोर के विकास को रफ्तार मिलेगी।
  • बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर: इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के काम को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • करावल नगर फ्लाईओवर: इस इलाके में जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए फ्लाईओवर का निर्माण होगा।
  • डीटीसी डिपो में ईवी चार्जिंग स्टेशन: दिल्ली परिवहन निगम के डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
  • सड़क बुनियादी ढांचा: इनके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण सड़क बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी इस मंजूरी का हिस्सा हैं।

क्या है SASCI स्कीम, इससे दिल्ली को मिला फंड?

ये सभी 28 प्रोजेक्ट्स केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI) योजना के तहत मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र सरकार की एक विशेष योजना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूरी तरह से ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना सिर्फ वित्तीय सहायता देने तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह राज्यों द्वारा रणनीतिक सुधारों को लागू करने और पूंजीगत निवेश को बढ़ाने को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय इंसेंटिव भी देती है। इसी के तहत दिल्ली को 756 करोड़ रुपये का अतिरिक्त इंसेंटिव मिला है।

समय पर काम पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार ने शुरुआत से ही इस योजना को प्राथमिकता दी है और दिल्ली की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को इसके तहत मंजूरी दिलाने के लिए लगातार केंद्र सरकार से आग्रह किया था। अब फंड मंजूर होने के बाद, मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के वित्त विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इन स्वीकृत परियोजनाओं से जुड़े सभी संबंधित विभागों के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गति को तेजी से आगे बढ़ाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि दिल्ली के निवासियों को जल्द से जल्द इन परियोजनाओं का लाभ मिल सके।

गौतम गंभीर की कोचिंग टीम से खुश नहीं हैं BCCI? जल्द ले सकती है बड़ा फैसला

इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ लगातार टी20 सीरीज में मिली हार के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और उनके सपोर्ट स्टाफ पर सवाल उठने लगे हैं। पहले आयरलैंड ने भारत को टी20 सीरीज में 2-0 से हराया और उसके बाद इंग्लैंड ने पांच मैचों की सीरीज 4-0 से अपने नाम कर ली। लगातार मिली इन हारों की वजह से टीम प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की नजर 14 जुलाई से शुरू हो रही इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज पर होगी। वनडे सीरीज भारतीय टीम के लिए वापसी का बड़ा मौका मानी जा रही है। वहीं इसी बीच गौतम गंभीर की कोचिंग स्टॉफ को लेकर बड़ी खबर आई है।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, असिस्टेंट कोच रेयान टेन डोएशेट और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज के बाद अपना मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर अपने पद छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) दोनों कोचों से राष्ट्रीय टीम के साथ उनके भविष्य को लेकर बातचीत कर रहा है।

क्या जारी रखेंगे अपना कार्यकाल

रिपोर्ट में कहा गया कि, “रेयान टेन डोएशेट अभी इस जिम्मेदारी को आगे जारी रखने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उन्होंने पूरे साल टीम के साथ लगातार यात्रा करने में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया है। वहीं, मोर्ने मोर्कल भी फिलहाल अपने ऑप्शनों पर विचार कर रहे हैं। बोर्ड दोनों कोचों से बातचीत कर रहा है और ये जानने की कोशिश कर रहा है कि क्या इस मामले का कोई समाधान निकाला जा सकता है।” रिपोर्ट के मुताबिक, रेयान टेन डोएशेट कथित तौर पर पहले से ही एक आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ बातचीत कर रहे हैं, जबकि मोर्ने मोर्कल ने अभी तक अपने भविष्य को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अगर रेयान टेन डोएशेट और मोर्ने मोर्कल के साथ बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता, तो बीसीसीआई को हाल ही में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में फास्ट बॉलिंग कोच बनाए गए लक्ष्मीपति बालाजी को टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर भेजना पड़ सकता है।”

कब से जुड़े हैं टीम इंडिया के साथ

डोएशेट और मोर्कल दोनों साल 2024 में भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ से जुड़े थे। हेड कोच बनने के बाद गौतम गंभीर ने खुद उन्हें अपनी टीम में शामिल किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में भारतीय टीम की खराब फील्डिंग को देखते हुए फील्डिंग कोच टी. दिलीप का भविष्य भी अनिश्चित माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, “बोर्ड टीम के गिरते फील्डिंग स्तर से संतुष्ट नहीं है। पिछले साल नायर के हटने के बाद टी. दिलीप को राहत मिली थी, लेकिन अब उनकी स्थिति फिर से सवालों के घेरे में है।”

Upcoming IPO: जुलाई के आखिर तक आएंगे 5 बड़े IPO, कंपनियां जुटाएंगी ₹15000 करोड़

Upcoming IPO: पिछले दो महीनों से रफ्तार पकड़ रहा भारत का IPO बाजार अब और गर्म होने वाला है। अगले हफ्ते SBI Funds Management का IPO खुलने के बाद जुलाई के अंत तक 5 और बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां मिलकर करीब ₹15,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।

कौन-कौन से IPO आएंगे?

जुलाई के अंत तक जिन कंपनियों के IPO आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं…

  • Caliber Mining & Logistics
  • Milky Mist Dairy Foods
  • Juniper Green Energy
  • Lohia Corp
  • Manipal Health Enterprises

जून और जुलाई में बढ़ी रफ्तार

जून में 7 IPO आए थे, जिनके जरिए कंपनियों ने ₹2,718 करोड़ जुटाए। वहीं जुलाई में अब तक Knack Packaging, Kusumgar और Laser Power & Infra के IPO लॉन्च हो चुके हैं।

अगले हफ्ते SBI Funds Management और Alpine Texworld के IPO भी खुलने वाले हैं।

किस कंपनी का IPO कितना बड़ा होगा?

  • Caliber Mining & Logistics करीब ₹500-600 करोड़ जुटा सकती है। यह देश की शीर्ष 10 कोयला खनन सेवा कंपनियों में शामिल है।
  • Milky Mist Dairy Foods का IPO करीब ₹2,000 करोड़ का हो सकता है। यह तमिलनाडु की प्रमुख डेयरी कंपनी है।
  • Juniper Green Energy करीब ₹1,800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। पहले इसका IPO ₹3,000 करोड़ का प्रस्तावित था, लेकिन अब इसका आकार घटा दिया गया है।
  • Lohia Corp करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाएगी। कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
  • Manipal Health Enterprises का IPO सबसे बड़ा हो सकता है। कंपनी करीब ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह Manipal Hospitals चेन का संचालन करती है।

Zepto भी एंट्री कर सकती है

बेंगलुरु की Tonbo Imaging और मध्य प्रदेश की Symbiotec Pharmalab भी जुलाई के आखिरी या अगस्त के पहले हफ्ते में IPO ला सकती हैं। हालांकि, इनके इश्यू का साइज पहले की योजना से छोटा हो सकता है।

इसके अलावा Zepto भी IPO की कतार में शामिल हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर बाजार में आ सकती है।

IPO बाजार में क्यों लौटी रौनक?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Jio Platforms और NSE के ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने के बाद प्राइमरी मार्केट में फिर से उत्साह बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बढ़ती खरीदारी से भी IPO बाजार को समर्थन मिल रहा है।

आमतौर पर जुलाई और अगस्त को IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त महीनों में गिना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में निवेशकों को कई बड़े पब्लिक इश्यू देखने को मिल सकते हैं।

टाटा की TCS 8900 खास इंजीनियरों की टीम बनाएगी, OpenAI और माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने की तैयारी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन सामने आई, जानिए कब दौड़ेगी देश की पहली Bullet Train

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला हिस्सा अगले साल शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन शुरू होगा। इसके बाद पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को फेज के हिसाब से तरीके से चालू किया जाएगा। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा, “मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले साल सूरत और बिलिमोरा के बीच इसका पहला सेक्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद बाकी हिस्सों को भी अलग-अलग चरणों में शुरू किया जाएगा।”

बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाकी हिस्सों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, उसके बाद अहमदाबाद से ठाणे और आखिर में अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। उनका कहना है कि अगले साल से परियोजना के अलग-अलग हिस्से एक-एक करके लोगों के लिए खोले जाएंगे। अश्विनी वैष्णव ने देशभर में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक 261 रेलवे स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर काम ट्रेन सेवाएं जारी रखते हुए किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया के कई देशों में रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण के दौरान ट्रेन सेवाएं रोक दी जाती हैं, लेकिन भारत में ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि यहां ट्रेनों का संचालन जारी रखते हुए ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन पर सभी प्लेटफॉर्म के ऊपर एक बड़ा एयर कॉनकोर्स (ऊपरी हॉल) बनाया जा रहा है। यह काम पूरी सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।

हैदराबाद को बनेगा बड़ा हब

हैदराबाद में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर हैदराबाद के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद के लिए तीन हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना दी है। इनमें पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शामिल हैं। रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से हैदराबाद हाई-स्पीड रेल का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही पूरे क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा और अलग-अलग शहरों की अर्थव्यवस्थाएं आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगी।

तेलंगाना में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार पर बात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का राज्य को बड़ा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के तहत 100 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे तेलंगाना को भी काफी फायदा हुआ है। अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तेलंगाना में रेलवे परियोजनाओं के लिए 5,400 करोड़ रुपये का बजट दिया है। उनके अनुसार, इस निवेश से राज्य में रेलवे के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

Viral Video: 40 किमी का सफर पड़ा 2,000 किमी की उड़ान पर भारी! बेंगलुरु ट्रैफिक का ये वीडियो हो रहा खूब वायरल

Viral Video: बेंगलुरु के एक व्यक्ति का सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है। उन्होंने बताया कि शहर से केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने में उन्हें लगभग उतना ही समय लगा, जितने समय में वह कोलकाता जैसी करीब 2,000 किलोमीटर दूर की यात्रा पूरी कर सकते थे। उनके इस पोस्ट के बाद बेंगलुरु के ट्रैफिक और शहर की व्यवस्था को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। फाइनेंस इन्फ्लुएंसर मनीष कुमार सिंह ने इस अनुभव को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए शेयर किया।

उन्होंने बताया कि वह कोलकाता जाने के लिए HSR लेआउट से कार में बैठकर बेंगलुरु के बेंगलुरु एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे। इसी सफर के दौरान उन्होंने शहर के ट्रैफिक को लेकर अपना अनुभव लोगों के साथ शेयर किया।

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

वीडियो में उन्होंने कहा, “मैं आप लोगों के साथ एक दिलचस्प बात शेयर करना चाहता हूं। इसे सुनकर शायद आप भी हंस पड़ेंगे। बैंगलोर शहर से एयरपोर्ट पहुंचने में करीब 2.5 से 3 घंटे लग जाते हैं, जबकि बेंगलुरु से कोलकाता की फ्लाइट सिर्फ 2 घंटे 20 मिनट में पहुंचा देती है।” उन्होंने आगे कहा, “आप ही बताइए, क्या किसी शहर की प्लानिंग ऐसी होनी चाहिए कि एयरपोर्ट पहुंचने में ही इतना समय लग जाए? मैंने न्यूयॉर्क और शिकागो जैसे बड़े शहर भी देखे हैं। वहां भी आबादी और ट्रैफिक है, लेकिन एयरपोर्ट तक पहुंचने में इतना वक्त नहीं लगता। मेरे हिसाब से यह हमारे देश की सिटी प्लानिंग की एक बड़ी कमी है।”

 

एयरपोर्ट के लिए होनी चाहिए बेहतर कनेक्टिविटी

उन्होंने कहा कि, दुनिया के कई देशों में एयरपोर्ट शहर से कुछ दूरी पर बनाए जाते हैं, लेकिन वहां अच्छी सड़क और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था होने की वजह से लोग 30 से 40 मिनट में आसानी से एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं। उनके मुताबिक, असली समस्या एयरपोर्ट का शहर से दूर होना नहीं है, बल्कि वहां तक बेहतर और तेज कनेक्टिविटी का अभाव है। उन्होंने नए बने नोएडा और नवी मुंबई एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा, “सबसे पहले अच्छी ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर सिटी प्लानिंग पर ध्यान देना चाहिए। पहले एयरपोर्ट बना देना और बाद में उसकी कनेक्टिविटी के बारे में सोचना सही तरीका नहीं है।”

सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए रिएक्शन

उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा, “हमारी सिटी प्लानिंग पूरी तरह गड़बड़ है। शहर लोगों की समस्याएं कम करने के बजाय कई बार उन्हें और बढ़ा रहे हैं।” वहीं इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर रिएक्शन दिए है। कई लोगों ने भारतीय शहरों के ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर उनकी बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “बैंगलोर की सिटी प्लानिंग सबसे खराब है।”

दूसरे ने कहा, “यहां सिटी प्लानिंग जैसी कोई चीज नहीं है, शहर पूरी तरह बिखर चुका है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह कोई नई बात नहीं है। कई जगहों पर एयरपोर्ट की फ्लाइट से कम समय एयरपोर्ट तक पहुंचने में लग जाता है।” एक और व्यक्ति ने कहा, “बैंगलोर एक बेहद अनप्लान्ड शहर है, जहां की सड़कें सबसे ज्यादा उलझी हुई हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने सलाह दी, “मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना बेहतर है, इससे ट्रैफिक से बचकर समय पर एयरपोर्ट पहुंचा जा सकता है।”

टाटा की TCS 8900 खास इंजीनियरों की टीम बनाएगी, OpenAI और माइक्रोसॉफ्ट को टक्कर देने की तैयारी

देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। टाटा ग्रुप की यह कंपनी AI से जुड़ी नई सर्विसेज को बढ़ाने के लिए 5,900 से 8,900 तक फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) की टीम तैयार करेगी। इसके साथ ही AI से जुड़ी कंपनियों को खरीदने (Acquisition) के विकल्प भी तलाश रही है।

आखिर FDE क्या होते हैं?

फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स (FDEs) ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते हैं, जो सिर्फ कंपनी के ऑफिस में बैठकर कोड नहीं लिखते। वे सीधे क्लाइंट के साथ काम करते हैं और उसकी समस्याओं के हिसाब से AI या टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन तैयार करते हैं।

अब मान लीजिए किसी बैंक को AI से अपने कस्टमर सर्विस सिस्टम को बेहतर बनाना है। ऐसे में TCS का FDE उस बैंक के साथ मिलकर काम करेगा। वह बैंक के मौजूदा सॉफ्टवेयर, डेटा और बिजनेस प्रोसेस को समझेगा। फिर AI मॉडल को उसी हिसाब से जोड़ेगा और उसे लागू करेगा।

इन इंजीनियरों का काम क्या होगा?

TCS के CEO के. कृतिवासन ने रॉयटर्स से कहा कि कंपनी अपने कुल कर्मचारियों में से 1% से 1.5% को फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर बनाना चाहती है।

ये इंजीनियर सीधे क्लाइंट के साथ काम करेंगे। उनका काम कंपनियों में AI टूल्स को लागू करना, उन्हें मौजूदा सिस्टम से जोड़ना और कारोबार की जरूरत के हिसाब से AI सॉल्यूशन तैयार करना होगा।

OpenAI और Microsoft से मुकाबला

TCS की यह रणनीति ऐसे समय आई है, जब OpenAI, Anthropic और Microsoft जैसी कंपनियां भी फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की भर्ती बढ़ा रही हैं। इन इंजीनियरों की मदद से कंपनियां अपने ग्राहकों के यहां AI को तेजी से लागू कर रही हैं।

AI, डेटा सिक्योरिटी में अधिग्रहण की तैयारी

TCS अब AI, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े अधिग्रहणों पर भी विचार कर रही है। TCS के CFO समीर सेक्सरिया ने कहा कि कंपनी ऐसे कारोबार तलाश रही है, जो उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत बना सकें।

AI से आउटसोर्सिंग मॉडल को खतरा नहीं

कई निवेशकों को डर है कि AI की वजह से आईटी कंपनियों को मिलने वाले प्रोजेक्ट कम हो सकते हैं। लेकिन TCS के CEO का मानना है कि ऐसा नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को AI अपनाने के लिए ऐसे पार्टनर की जरूरत होगी, जो उनके मौजूदा सिस्टम, डेटा और प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझते हों। यही TCS की सबसे बड़ी ताकत है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ कम लागत का मामला नहीं, बल्कि कंपनी के अनुभव और प्रतिभा का फायदा है।

AI कारोबार की ग्रोथ धीमी हुई

हालांकि, जून तिमाही में TCS के AI कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है। पहली तिमाही में AI से होने वाली सालाना आय की ग्रोथ 13% रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 28% थी।

CEO ने कहा कि लंबी अवधि में वह AI कारोबार में करीब 25% तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ देखना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि यह बढ़ोतरी हर तिमाही एक जैसी नहीं रहेगी।

AI पर ₹8,500 करोड़ खर्च

TCS हर साल करीब 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,500 करोड़) टैलेंट डेवलपमेंट और AI पर खर्च करती है। इसमें कर्मचारियों की ट्रेनिंग, AI स्किल्स डेवलप करना और नई AI तकनीकों के लिए एक्सपर्ट्स की हायरिंग शामिल है।

*रॉयटर्स से इनपुट के साथ

Dividend Stocks: इस हफ्ते 7 कंपनियों के शेयरधारक होंगे मालामाल, ₹229 तक मिलेगा डिविडेंड

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

VIDEO: यूपी से शिलॉन्ग घूमने गए लोगों ने Airbnb से बुक प्रॉपर्टी का किया बुरा हाल, होस्ट ने उनकी शर्मिंदा करने वाली करतूतों की पूरी लिस्ट बताई

Viral Video: मेघालय की राजधानी शिलांग में एक Airbnb होमस्टे में ठहरे कुछ मेहमानों पर तोड़फोड़ और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगे हैं। होमस्टे मालिक के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से आए चार मेहमानों ने उनकी नई शुरू हुई प्रॉपर्टी में तोड़फोड़ की, केयरटेकर के साथ मारपीट की और स्टाफ को धमकाया। होमस्टे मालिक ने सोशल मीडिया पर प्रॉपर्टी की कथित खराब हालत की तस्वीरें और पूरी घटना शेयर की है। वहीं ये घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा। इस घटना को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

ये मामला तब सामने आया जब शिलांग के रीसा कॉलोनी स्थित द ओकवुड नाम के Airbnb होमस्टे के मालिक ने सोशल मीडिया पर पूरी घटना बताई। उन्होंने दावा किया कि मेहमानों के ठहरने के दौरान उनकी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा। इसे दिखाने के लिए उन्होंने पहले और बाद की तस्वीरें भी शेयर कीं। इसके बाद ये मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा।

प्रॉपर्टी में किया तोड़ फोड़

होमस्टे मालिक ने लिखा, “मेहमानों को अच्छा और आरामदायक ठहराव देने के लिए हमने इस होमस्टे को बहुत मेहनत से तैयार किया था। लेकिन कुछ लोग प्रॉपर्टी के साथ जिस तरह का व्यवहार करते हैं, उसे देखकर बेहद दुख होता है। ऐसा लगता है कि उनमें जरा भी नागरिक जिम्मेदारी या सिविक सेंस नहीं है।” पोस्ट में दावा किया गया कि, मेहमानों ने बिना अनुमति के दूसरे लोगों को भी प्रॉपर्टी में बुलाया। उन पर तोड़फोड़ करने, हंगामा करने, शराब पीने और घर के नियमों के बावजूद कमरों के अंदर स्मोकिंग करने का भी आरोप लगाया गया है। होस्ट का कहना है कि जब स्टाफ ने इसका विरोध किया तो मेहमानों ने गुस्से में गलत व्यवहार किया।

 

इन लोगों की बुकिंग ना ले

उन्होंने पोस्ट में मेहमानों की पहचान बताते हुए शिलांग और मेघालय के अन्य होमस्टे व गेस्टहाउस मालिकों से अपील की कि वे इन लोगों की बुकिंग स्वीकार न करें। उन्होंने लिखा, “अगर आपकी मुलाकात कभी विकास सिंह नाम के इस व्यक्ति से हो, तो कृपया उन्हें अपनी प्रॉपर्टी बुक न करने दें।” होस्ट ने यह भी आरोप लगाया कि अखंड सिंह सूर्यवंशी ने उनके केयरटेकर के साथ मारपीट की। उन्होंने आगे कहा, “हम मेहमानों को बेहतर सुविधा देने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं, लेकिन होमस्टे मालिक इस तरह के व्यवहार के हकदार नहीं हैं।” होस्ट का ये भी दावा है कि एक मेहमान ने यहां तक कहा कि चेक-इन से पहले ही प्रॉपर्टी की हालत ऐसी थी।

हजारों रुपए का हुआ नुकसान

इस मामले ने तब और ज्यादा ध्यान खींचा, जब ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर रूबेन चार्ल्स ने इस घटना पर रिएक्शन देते हुए एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने बताया कि वह कुछ दिन पहले इसी Airbnb में ठहरे थे और कहा, “शिलांग के इस Airbnb में उत्तर प्रदेश से आए चार लोगों ने तोड़फोड़ की है।” ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर ने बताया कि जब वह इस होमस्टे में रुके थे, तब सब कुछ ठीक था। बाद में प्रॉपर्टी की खराब हालत देखकर उन्हें हैरानी हुई। उनके मुताबिक, वहां कचरा फैला था, दीवारें क्षतिग्रस्त थीं और कई जगह गंदगी दिखाई दे रही थी। बताया जा रहा है कि इससे प्रॉपर्टी को हजारों रुपये का नुकसान हुआ।

यूजर ने किया कमेंट

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने मेहमानों के कथित व्यवहार की आलोचना की और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही, होमस्टे मालिकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाने की भी बात कही। एक यूजर ने लिखा, “जानवर भी ऐसा नहीं करते।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “उम्मीद है कि आप इस तोड़फोड़ की पुलिस में शिकायत करेंगे। यह देखकर बहुत दुख हुआ।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह बेहद खराब व्यवहार है और बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। आपकी प्रॉपर्टी के साथ जो हुआ, उसके लिए दुख है। दूसरे होस्ट को सावधान करने के लिए यह जानकारी साझा करना सही कदम है।”

वियतनाम में डूबे 15 भारतीयों के शव वापस आएंगे, जानिए फ्लाइट से कैसे आती है डेडबॉडी, कहां रखा जाता है ताबूत?

वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय पर्यटकों के शव हो ची मिन्ह सिटी भेज दिए गए हैं। वहां से सभी शवों को भारत लाने की तैयारी की जा रही है। यह जानकारी रविवार, 12 जुलाई को हनोई स्थित भारतीय दूतावास ने दी। भारतीय दूतावास के मुताबिक, हादसे में बचाए गए 17 भारतीय पर्यटकों में से 16 अपने घर लौट रहे हैं। वहीं एक भारतीय पर्यटक की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज फु क्वोक के एक अस्पताल में चल रहा है।

यह हादसा शनिवार को फु क्वोक द्वीप के पास हुआ था, जब ‘होन मे रुट न्गोई’ इलाके के पास एक स्पीडबोट अचानक पलट गई। नाव में 32 भारतीय पर्यटक और चालक दल के 4 स्थानीय सदस्य सवार थे। हादसे के बाद बाकी सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।

हादसे में 15 भारतीयों की मौत

हनोई स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि नाव हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय नागरिकों के शव हो ची मिन्ह सिटी भेजे जा रहे हैं। दूतावास ने बताया कि सभी शव रविवार शाम तक वहां पहुंच जाएंगे। दूतावास के अनुसार, हो ची मिन्ह सिटी में जरूरी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शवों को जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। भारतीय दूतावास ने यह भी बताया कि उसकी टीमें लगातार वियतनाम के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। वियतनामी प्रशासन ने भरोसा दिया है कि सभी जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर शवों को भारत भेजने में पूरा सहयोग किया जाएगा।

इनके शव लाए जा रहे हैं भारत

भारतीय दूतावास के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीयों में सबसे ज्यादा 10 लोग तमिलनाडु के रहने वाले थे। इसके अलावा तीन लोग आंध्र प्रदेश और दो लोग केरल के निवासी थे। मृतकों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। दूतावास की ओर से जारी सूची के मुताबिक, तमिलनाडु के मृतकों के नाम सेंथिल कुमार जयवेल, मुरुगा प्रभु अरुमुगम, श्रीधर सुंदरराजन, शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद, बालाजी नटेसन, विनय कुमार चिथिरापुरम भास्कर, रविशंकर सुकुमारन, संतोष कुमार शांतिलाल जैन, बाबू कुप्पुस्वामी और अलगुराजन शिवसामी हैं। वहीं आंध्र प्रदेश के मृतकों की पहचान नल्लापेटा आदिशेषैया रवितेजा, श्रीधर मुडियम और जया लक्ष्मी गेल्ली के रूप में हुई है। केरल के मृतकों के नाम एविकोट चेरियन थॉमस और लोवेनी थॉमस हैं।

कुछ लोगों का अस्पताल में चल रहा इलाज

भारतीय दूतावास ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। दूतावास ने बताया कि नाव हादसे में बचाए गए 17 भारतीय पर्यटकों में से 16 को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वे भारत लौट रहे हैं। दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि हादसे में घायल अधिकांश पर्यटकों का इलाज पूरा हो चुका है। गंभीर रूप से घायल दो लोगों में से एक की हालत में सुधार होने के बाद उसे भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और वह भारत लौट रहा है। वहीं दूसरे घायल भारतीय पर्यटक का इलाज अभी भी फु क्वोक के एक अस्पताल में चल रहा है।

जानिए फ्लाइट से कैसे आती है डेडबॉडी

बता दें कि शवों को फ्लाइट में कार्गो यानी माल ढुलाई सर्विस के रूप में लेकर जाया जाता है। यानी जैसे फ्लाइट में अन्य सामान भेजे जाते हैं, उसी तरह शव को भी ताबूत में पैक करके भेजा जा सकता है। हालांकि शवों को फ्लाइट में लेकर जाने से जुड़े कुछ नियम हैं, जिन्हें फॉलो करना होता है। जानकारी के मुताबिक, विमान में इंसान के शवों को फ्लाइट से दो प्रकार से लेकर जाया जा सकता है। उनके मृत शरीर को ताबूत में रखकर या फिर उनके जले हुए अवशेषों को अस्थि कलश में रखकर।

शवों को फ्लाइट से भेजने के लिए गाइडलाइंस

शव को जिस ताबूत में रखा गया है, उसका पहले उपयोग नहीं हुआ होना चाहिए।

ताबूत का पैकिंग मटेरियल मजबूत होना चाहिए, जिससे वह शव का वजन उठा सके।

पैकिंग में भेजने वाले का नाम और पता लिखा होना चाहिए. साथ ही सिर की ओर या ऊपर की तरफ इशारा करने वाला लेबल लगा होना चाहिए।