पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सही इलाज दिलाने के लिए दुनियाभर के क्रिकेटर आगे आए हैं। सुनील गावस्कर, कपिल देव समेत 21 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ सरकार को पत्र लिखकर वर्ल्ड कप विजेता कप्तान इमरान खान को सही मेडिकल इलाज देने की मांग रखी है। 23 अगस्त को लिखे गए लेटर में मांग की गई कि इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इमरान की मेडिकल जांच की जाए। लेटर लिखने वालों में भारत के 3, ऑस्ट्रेलिया के 8, इंग्लैंड के 6, वेस्टइंडीज-श्रीलंका के 1-1 और न्यूजीलैंड के 2 पूर्व कप्तान शामिल हैं। क्रिकेटर्स ने ईमेल से लेटर भेजा पूर्व कप्तानों का छह महीने बाद दूसरा लेटर इस पत्र में कहा गया है- ‘छह महीने पहले 14 पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट कप्तानों ने आपको और पाकिस्तान सरकार को इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार और सही मेडिकल इलाज की अपील की थी। हमने तब राजनेताओं के तौर पर नहीं, बल्कि पूर्व साथियों के तौर पर लिखा था। उन्होंने कहा- क्रिकेट मैदान पर बना यह रिश्ता उन सीमाओं और मतभेदों से ऊपर है, जो अक्सर देशों को बांटते हैं। अब हम फिर लिख रहे हैं और इस बार 7 अन्य पूर्व कप्तान भी हमारे साथ हैं। 6 देशों के 21 पूर्व कप्तान, इनमें पाकिस्तान-बांग्लादेश का एक भी नहीं निजी डॉक्टरों को जांंच में शामिल करने को कहा पूर्व कप्तानों ने लिखा- सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड में उनके पर्सनल डॉक्टरों और बहन डॉ. उजमा खान को शामिल करने और परिवार से हर हफ्ते मुलाकात का आदेश दिया था। हालांकि, कोर्ट के आदेश के विपरीत राज्य द्वारा नियुक्त टीम ने महज कुछ ही घंटे में उन्हें फिट बताकर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अदियाला जेल वापस भेज दिया।’ इमरान के परिवार और कानूनी टीम ने इसे अदालत के निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताया है। वहीं, मामले पर नजर रख रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने स्पष्ट किया कि वे पाकिस्तान की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला नहीं दे रहे, बल्कि निष्पक्षता के लिए गठित मेडिकल बोर्ड को पूरी और स्वतंत्र जांच करने देने की अपील कर रहे हैं। जैक गोल्डस्मिथ ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री को पत्र लिखा ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य और इमरान के पूर्व बहनोई जैक गोल्डस्मिथ ने 21 अगस्त को ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड को पत्र लिखा। उन्होंने ब्रिटेन के विदेश मंत्री से इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की। गोल्डस्मिथ ने आरोप लगाया- ‘अगर सार्थक हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो पाकिस्तानी सरकार इमरान खान को सिर्फ इसलिए खत्म कर देगी, क्योंकि जब तक वह जिंदा हैं, वे उनकी सत्ता और भ्रष्टाचार के लिए खतरा हैं।’ गोल्डस्मिथ पहले भी ब्रिटेन की संसद में इमरान की जेल का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने इस्लामाबाद पर ज्यादा कूटनीतिक दबाव बनाने की मांग की थी। ब्रिटेन के मंत्रियों ने कहा है कि पाकिस्तान को बुनियादी आजादी, जेल में मानवीय व्यवहार और उचित मेडिकल इलाज तक पहुंच का सम्मान करना चाहिए। इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विवाद जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच उनके स्वास्थ्य और इलाज को लेकर विवाद चल रहा है। यह मामला अब मानवीय चिंता का विषय बन गया है। हालिया तनाव तब बढ़ा, जब इमरान को कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने के बजाय इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। PTI और पाकिस्तान सरकार ने एक-दूसरे पर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दाहिनी आंख की 85% रोशनी जाने का दावा इमरान के स्वास्थ्य में गिरावट के दावों के बीच उनके वकीलों ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी जा चुकी है। इमरान ने अक्टूबर 2025 से आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन वकीलों के मुताबिक जेल अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। पाकिस्तान सरकार ने उनकी हालत की गंभीरता पर सवाल उठाया है। इमरान के परिवार और वकीलों ने उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान से मिलने और इलाज में उन्हें शामिल करने की मांग की है। इमरान के इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड बनेगा सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की सेहत की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को भी मेडिकल बोर्ड में शामिल करने को कहा है। मेडिकल बोर्ड में कई विशेषज्ञ डॉक्टर होंगे। वे मिलकर इमरान की पूरी जांच करेंगे और पुरानी मेडिकल रिपोर्ट भी देखेंगे। इसके बाद डॉक्टर पता लगाएंगे कि उन्हें क्या परेशानी है, ब्लड क्लॉट क्यों बन रहा है और आगे कोई खतरा तो नहीं है। जांच के बाद बोर्ड बताएगा कि इमरान को किस इलाज की जरूरत है और उनका इलाज जेल में हो सकता है या अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। तोशाखाना क्या है और इमरान खान का मामला क्या है? तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का सरकारी भंडार है। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों को विदेशों से मिले कीमती तोहफे जमा किए जाते हैं। इनमें घड़ियां, गहने, पेंटिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। इमरान खान से जुड़े विवाद इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्हें कई महंगे विदेशी तोहफे मिले। आरोप है कि कुछ तोहफों की जानकारी और उनकी बिक्री से मिली रकम की पूरी जानकारी नहीं दी गई। इससे जुड़े तीन मामले… 1. तोहफों की जानकारी छिपाने का आरोप 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान को तोहफों की जानकारी गलत तरीके से घोषित करने का दोषी माना और उन्हें अयोग्य ठहराया। 2. तोशाखाना का पहला मामला इमरान पर आरोप था कि उन्होंने कुछ महंगे तोहफे तय कीमत देकर अपने पास रखे और बाद में बेच दिए। अगस्त 2023 में उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई। बाद में सजा निलंबित हो गई। 3. तोशाखाना-2 मामला इसमें 2021 में सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले बुल्गारी ज्वेलरी सेट का मामला है। अभियोजन के मुताबिक इसकी कीमत करीब 8 करोड़ पाकिस्तानी रुपए थी, जबकि इसे करीब 29 लाख रुपए में रखने का आरोप है। इमरान खान के प्रमुख केस की स्थिति 1. तोशाखाना केस 2023 में इमरान खान को तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा हुई थी। बाद में यह सजा निलंबित हुई। हालांकि, बाद में तोशाखाना से जुड़े एक अन्य मामले में दिसंबर 2025 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह सजा महंगे सरकारी तोहफों की कथित कम कीमत पर खरीद से जुड़े मामले में है। 2. साइफर केस इमरान खान को साइफर/स्टेट सीक्रेट्स केस में मिली 10 साल की सजा हाईकोर्ट ने पलट दी थी। जून 2024 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया। 3. इद्दत निकाह केस फरवरी 2024 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 7-7 साल की सजा मिली थी। जुलाई 2024 में दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया। 4. अल-कादिर ट्रस्ट/£190 मिलियन केस यह मामला इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते हुए ब्रिटेन से पाकिस्तान लौटाए गए करीब £190 मिलियन और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है।17 जनवरी 2025 को इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई गई। मई 2026 में इस सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। उनकी मुख्य अपील पर सुनवाई जारी है। पाकिस्तान की ‘तिहाड़’ है अडियाला जेल अडियाला जेल रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी जेल है। यहां 176 हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए अलग हाई-सिक्योरिटी बैरक है। 2013 में यहां 67 हाई-प्रोफाइल आतंकवादी समेत करीब 5,000 कैदी बंद थे। सुरक्षा के लिए यहां पुलिस, रेंजर्स और दूसरी एजेंसियां तैनात की जाती हैं। 2024 में यहां आतंकी हमले जैसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, रेंजर्स, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और रेस्क्यू टीम ने जॉइंट मॉक ड्रिल भी की थी। इमरान खान के यहां बंद होने के बाद जेल के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा पिकेट और एलीट कमांडो भी तैनात किए गए थे। यानी इसकी तुलना भारत की हाई-सिक्योरिटी तिहाड़ जेल से की जा सकती है। ———————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी लिखें… कर्ण शर्मा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया:भारत के लिए 4 मुकाबले खेले; 25 अगस्त को यूपी लीग में आखिरी मैच खेलेंगे 38 साल के लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। उन्होंने भारत के लिए 1 टेस्ट, 2 वनडे और 1 टी-20 मैच खेला। पूरी खबर पढ़ें…
Rohullah Mehdi Arrested: सोशल मीडिया के ज़रिए चल रहे कथित ड्रग्स नेटवर्क के मामले में मुंबई के मीरा रोड इलाके के काशीमीरा में एक्टर और मॉडल रोहुल्लाह मेहदी को गिरफ़्तार किया गया है। काशीमीरा पुलिस क्राइम ब्रांच ने लगभग 5.60 लाख रुपये कीमत की 28 ग्राम MD ड्रग्स जब्त की और दो लोगों को गिरफ़्तार किया। FIR नंबर 437/2026 के मुताबिक, मेहदी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने बताया कि उन्हें स्नैपचैट, वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए MD ड्रग्स बेचे जाने की जानकारी मिली थी। इस जानकारी के आधार पर, अधिकारियों ने एक नकली ग्राहक का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कासिफ़ नाम के एक व्यक्ति को 28 ग्राम MD की डिलीवरी के लिए दहिसर चेक नाका इलाके में ठाकुर मॉल के पास बुलाया गया। पुलिस ने उसे कथित ड्रग डील के दौरान पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर मेहदी का नाम लिया।
जानकारी मिलने पर पुलिस ने मलाड में एक स्टूडियो के बाहर से मेहदी को गिरफ़्तार किया, जहां वह शूटिंग कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, मेहदी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले का रहने वाला है और मुंबई के गोरेगांव में रह रहा था। उसने शाहिद कपूर के साथ फ़िल्म ‘देवा’ में काम किया है और कई वेब सीरीज़ में भी नज़र आया है।
गिरफ़्तारी के बाद मेहदी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब कथित ड्रग नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेहदी ने किसे ड्रग्स सप्लाई किए होंगे। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री के और लोग भी इस मामले से जुड़े हैं।
यह ऑपरेशन DCP ज़ोन-1 राहुल चव्हाण की देखरेख में काशिमीरा पुलिस टीम ने चलाया। पुलिस ने कहा कि जांच चल रही है और और भी नाम सामने आ सकते हैं।
FD vs SCSS: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसा कहां रखा जाए, जहां नियमित कमाई भी होती रहे और मूलधन भी सुरक्षित रहे। ऐसे में ज्यादातर लोग बैंक FD और सीनियर सिटिजंस रेविंग्स स्कीम (SCSS) के बीच उलझ जाते हैं।
अगर सिर्फ सुरक्षा देखें, तो SCSS आगे निकलती है। लेकिन कुछ बैंक ऐसी FD भी दे रहे हैं, जिनका ब्याज SCSS के बराबर या उससे थोड़ा ज्यादा है। ऐसे में फैसला सिर्फ ब्याज देखकर नहीं करना चाहिए।
एक नजर में FD vs SCSS
| पैमाना | Senior Citizen FD | SCSS |
| ब्याज दर | बड़े बैंकों में 7%-8%+, कुछ SFB में 8.3% तक | 8.20% |
| सुरक्षा | DICGC बीमा ₹5 लाख तक | भारत सरकार की गारंटी |
| अवधि | बैंक के हिसाब से | 5 साल (3 साल बढ़ा सकते हैं) |
| अधिकतम निवेश | कोई सीमा नहीं | ₹30 लाख |
| ब्याज भुगतान | मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर | हर तिमाही |
| टैक्स लाभ | 5 साल की टैक्स-सेविंग FD पर | धारा 80C के तहत पात्र |
₹10 लाख पर किसमें कितना मिलेगा?
अब मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। सवाल यह है कि साल भर में जेब में कितना पैसा आएगा। यही तुलना सबसे साफ तस्वीर देती है।
| विकल्प | ब्याज दर | सालाना ब्याज | हर तिमाही |
| SCSS | 8.20% | ₹82,000 | ₹20,500 |
| FD (7.5%) | 7.50% | ₹75,000 | ₹18,750 |
| FD (8%) | 8% | ₹80,000 | ₹20,000 |
| FD (8.3%) | 8.30% | ₹83,000 | ₹20,750 |
यहां एक बात साफ दिखती है। अगर किसी छोटे फाइनेंस बैंक में 8.3% की FD मिल जाए, तो कमाई SCSS से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। लेकिन बड़े सरकारी और निजी बैंकों की ज्यादातर FD पर SCSS अब भी आगे है।
₹30 लाख पर कितनी होगी कमाई?
SCSS में एक व्यक्ति अधिकतम ₹30 लाख तक निवेश कर सकता है। अगर कोई पूरी रकम निवेश करता है, तो हर साल ₹2,46,000 ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में ₹61,500 खाते में आएंगे। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग इसे नियमित आय के लिए चुनते हैं।
सुरक्षा में कौन आगे?
यहीं सबसे बड़ा फर्क आता है। SCSS पूरी तरह भारत सरकार की गारंटी वाली योजना है। दूसरी तरफ बैंक FD में DICGC का बीमा सिर्फ ₹5 लाख तक मिलता है। इसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। अगर आपके पास बड़ी रकम है, तो सुरक्षा के लिहाज से SCSS ज्यादा मजबूत विकल्प माना जाता है।
टैक्स का क्या होगा?
दोनों में मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो दोनों योजनाएं धारा 80C के तहत टैक्स लाभ के लिए पात्र हो सकती हैं। हालांकि 80C की कुल सीमा अलग से लागू होती है।
किसे क्या चुनना चाहिए?
अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है, तो SCSS बेहतर विकल्प है। अगर आपको हर तीन महीने में तय आय चाहिए, तब भी SCSS मजबूत साबित होती है। वहीं ₹30 लाख से ज्यादा रकम निवेश करनी है, तो FD का सहारा लेना पड़ेगा। अगर किसी भरोसेमंद बैंक में SCSS से ज्यादा ब्याज वाली FD मिल रही है, तो उस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
आखिरी फैसला कैसे करें
अगर सवाल है कि सीनियर सिटिजन के लिए सबसे सुरक्षित और नियमित आय वाला विकल्प कौन सा है, तो SCSS बढ़त ले जाती है। इसमें 8.2% की सरकारी गारंटी वाली ब्याज दर मिलती है। हर तिमाही पैसा खाते में आता है। वहीं अगर लक्ष्य सिर्फ ज्यादा ब्याज पाना है, तो कुछ छोटे फाइनेंस बैंकों की FD थोड़ा बेहतर रिटर्न दे सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
PPF vs NSC Investment Return Comparison: अगर आपके पास ₹10 लाख हैं और आप उसे अगले 5 सालों के लिए सरकारी गारंटी वाली स्कीम में बिना किसी रिस्क के जमा करना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे बेहतरीन जरिया हैं।
स्मॉल सेविंग्स में दो सबसे पसंदीदा विकल्प पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) हैं। चालू वित्त वर्ष (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) के लिए सरकार ने पीपीएफ की ब्याज दर 7.1% और एनएससी की ब्याज दर 7.7% पर बरकरार रखी है।
अगर आप ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो 5 साल में कहां ज्यादा फायदा मिलेगा? जानिए पूरी कैलकुलेशन।
₹10 लाख के निवेश पर 5 साल की कैलकुलेशन
अगर हम दोनों स्कीम्स में ₹10 लाख के कॉर्पस पर 5 साल के ग्रोथ की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:
PPF कैलकुलेशन (7.1% ब्याज): ₹10 लाख की जमा राशि 5 साल में 7.1% सालाना ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर लगभग ₹14,09,120 हो जाएगी। इसमें आपको 5 साल में करीब ₹4,09,120 का प्री-टैक्स ब्याज मिलेगा।
NSC कैलकुलेशन (7.7% ब्याज): ₹10 लाख का निवेश 5 साल में 7.7% की चक्रवृद्वि ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर ₹14,49,030 हो जाएगा। यानी 5 साल में करीब ₹4,49,030 का प्री-टैक्स मुनाफा होगा।
ध्यान रहे कि पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा करने की इजाजत है। इसलिए ₹10 लाख का यह आंकड़ा तुलनात्मक गणना के लिए 7.1% ब्याज के आधार पर दर्शाया गया है। NSC में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।
प्री-टैक्स रिटर्न में NSC आगे, लेकिन टैक्स का पेंच समझें
कागजों पर 5 साल में NSC, PPF की तुलना में सीधे तौर पर ₹39,910 का ज्यादा रिटर्न देता दिख रहा है। लेकिन असली गणित टैक्स Slab के बाद बदलता है:
PPF पर EEE स्टेटस: पीपीएफ पूरी तरह से ‘EEE’ कैटगरी में आता है। यानी जमा राशि, मिला हुआ ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पूरी तरह से टैक्स-फ्री होते हैं।
NSC पर टैक्स नियम: एनएससी से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। हालांकि, पहले 4 सालों के री-इन्वेस्टेड इंटरेस्ट पर सेक्शन 80C के तहत छूट क्लेम की जा सकती है, लेकिन आखिरी साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल रहता है। Higher Tax Slab वाले निवेशकों के लिए NSC का नेट रिटर्न कम हो सकता है।
मैच्योरिटी और लिक्विडिटी में कौन सा बेहतर?
NSC (5 साल का लॉक-इन): एनएससी की मैच्योरिटी ठीक 5 साल में पूरी हो जाती है। इसके अलावा, इसमें निवेश करते ही ब्याज दर पूरे 5 साल के लिए लॉक हो जाती है, जो मार्केट में ब्याज दरें घटने पर भी नहीं बदलती।
PPF (15 साल का लॉक-इन): पीपीएफ मूल रूप से 15 साल की लंबी अवधि की स्कीम है। हालांकि, इसमें 7वें साल से आंशिक निकासी और तीसरे साल से लोन की सुविधा मिलती है। पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है।
PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?
अगर आपकी प्राथमिकता 5 साल की फिक्स्ड अवधि, गारंटीड रिटर्न और ज्यादा ब्याज दर है और आप लोअर टैक्स स्लैब में आते हैं तो NSC आपके लिए बेस्ट है। दूसरी ओर, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से टैक्स-फ्री फंड बनाना है, तो PPF से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करके दोनों स्कीम्स का सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
आईटी और फिनटेक सेक्टर की कंपनी GACM Technologies Ltd ने हाल ही में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) के जरिए ₹49.5 करोड़ जुटाए हैं। इसके बाद कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI/FII) की हिस्सेदारी करीब 29% हो गई है। कंपनी का शेयर भी अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है।
QIP से जुटाए ₹49.5 करोड़
कंपनी ने QIP के तहत ₹1 प्रति शेयर के भाव पर 49.50 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए। इससे कुल ₹49.5 करोड़ जुटाए गए। यह इश्यू 13 अगस्त 2026 को खुला था और 14 अगस्त को बंद हुआ था।
चार विदेशी फंड बने बड़े निवेशक
QIP में चार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया। Minerva Ventures Fund को 14.5 करोड़ शेयर मिले। Magnifica Global Opportunities VCC-MGO High Conviction Fund को 14 करोड़ शेयर मिले। वहीं Al Maha Investment Fund PCC-Onyx Strategy और Ebisu Global Opportunities Fund को 10.5-10.5 करोड़ शेयर आवंटित किए गए।
QIP के बाद 29% हिस्सेदारी
कंपनी के पोस्ट-QIP कैपिटल स्ट्रक्चर के मुताबिक ये चारों निवेशक मिलकर कंपनी की करीब 29% इक्विटी रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ये सभी निवेशक भारत के FPI फ्रेमवर्क के तहत रजिस्टर्ड विदेशी संस्थागत निवेशक हैं। इससे कंपनी में संस्थागत भागीदारी और मजबूत हुई है।
FY26 में रेवेन्यू और मुनाफा बढ़ा
कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी सुधार दिखा है। FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 57% से ज्यादा बढ़ा। टैक्स के बाद कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में 108% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई। कंपनी लगातार 12 तिमाहियों से मुनाफे में बनी हुई है।
AI-EdTech बिजनेस से भी उम्मीद
GACM का कहना है कि उसकी AI-EdTech बिजनेस में 30% हिस्सेदारी है। इस बिजनेस को ₹30 करोड़ से ज्यादा के कन्फर्म ऑर्डर मिले हैं। इनमें दिल्ली सरकार से ₹25 करोड़ और तमिलनाडु सरकार से ₹5 करोड़ के ऑर्डर शामिल हैं। कंपनी ने AI से जुड़े पांच पेटेंट भी रजिस्टर कराए हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ICMR's major statement on swine flu : देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है। स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।
देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है।
स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान वायरस मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल वायरस से मेल खाता है। लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण बिगड़ने पर थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इन लोगों में बीमारी की वजह से परेशानी थोड़ी बढ़ सकती है। अगर किसी के लक्षण 3-4 दिन में ठीक न हों, या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कत होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। H1N1 के लक्षण आम मौसमी फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं।
यहां बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में इन्फ्लूएंजा ए के 2392 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के हैं। मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर, बेड और दवाइयां पर्याप्त हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रख रहा है।
छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। अब तक 38 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 25 मरीज रायपुर के हैं। रायपुर में मिले मरीजों में आधे से अधिक अभी एक्टिव हैं। इसके अलावा बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, बस्तर, बेमेतरा और रायगढ़ में भी मरीज मिले हैं। इसे लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट है।
मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उज्जैन में एच-1एन-1 संक्रमण से ग्रस्त महिला की मौत के बाद अब प्रदेशभर से स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने लगे हैं। बीते 5 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो इंदौर और उज्जैन में स्वाइन फ्लू के 4 मामले सामने आए थे, जबकि सिर्फ शनिवार को ही अलग-अलग शहरों से 3 संकर्मितों की पुष्टि हुई है।
गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो सांस के जरिए, खांसने या छींकने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। सही समय पर आराम, तरल पदार्थों के सेवन और डॉक्टर की सलाह से यह ठीक हो जाता है।
India-China Border Issues: भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचेंगे। इस दौरान सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार 25 अगस्त को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे।
डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं।
जानकारों का कहना है कि यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं।
शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत
शी जिनपिंग की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है। इसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
सीमा विवाद पर विदेश मंत्री जयशकंर ने क्या कहा?
बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार 22 अगस्त को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है।
जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में कहा, “मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।” उन्होंने कहा, “आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।”
अरुणाचल प्रदेश पर चीन का बयान
अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति फिलहाल आम तौर पर स्थिर है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को बहुत गंभीर मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी।
इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती।
Ranveer Singh: रणवीर सिंह अपने करियर के उस मुश्किल दौर को याद कर रहे हैं, जो ‘धुरंधर’ की जबरदस्त सफलता से पहले आया था। एक्टर ने बताया है कि जब उनकी कुछ फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं, तब उन्हें जो सपोर्ट मिला, उसी की वजह से इस बड़े एक्शन फ़्रैंचाइजी के लिए उन पर जताया गया भरोसा और भी अहम हो गया।
खबरों के मुताबिक, दो हिस्सों वाली ‘धुरंधर’ फ़िल्म सीरीज ने दुनिया भर में थिएटर्स में रिलीज के दौरान 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की है। इस सफर के बारे में बात करते हुए, रणवीर ने जियो टीम और अंबानी परिवार को इस प्रोजेक्ट को पूरे भरोसे के साथ सपोर्ट करने का श्रेय दिया, जबकि इसमें बड़े पैमाने पर काम और कई जोखिम शामिल थे।
‘धुरंधर’ से पहले के मुश्किल दौर को याद करते हुए रणवीर सिंह
रणवीर ने रिलायंस की डॉक्यूमेंट्री ‘परवाह है तो परिवार है’ में इस फिल्म के बारे में बात की और माना कि ‘धुरंधर’ को बनाना बिल्कुल भी आसान काम नहीं था। मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, रणवीर ने कहा, “‘धुरंधर’ को शुरू करना या उसे बनाना आसान नहीं था। इसमें कई चुनौतियां थीं।”एक्टर ने याद किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए इसमें शामिल लोगों को मजबूत सपोर्ट की जरूरत थी, क्योंकि टीम कुछ बहुत ही बड़े और महत्वाकांक्षी स्तर पर करने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने कहा कि “डंके के चोट पर अपने विश्वास के साथ वापस आना कि अगर यह सफल हुआ तो हम नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे,”। हालांकि, रणवीर के लिए यह समर्थन एक और कारण से महत्वपूर्ण था। यह ऐसे समय में मिला जब उनकी अपनी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मुश्किल दौर से गुजर रही थी।
‘मेरी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं’
किसी फिल्म का नाम लिए बिना रणवीर ने स्वीकार किया कि धुरंधर से पहले उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए थे। मुझे यह कहना होगा कि मुझे उस समय भी पूरा प्यार, समर्थन और प्रोत्साहन मिला जब मेरी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं,”।
रणवीर ने आगे कहा कि एक अभिनेता के करियर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और उन्होंने उन सभी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस कठिन दौर में उनका साथ दिया। एक्टर ने कहा कि लेकिन इस तरह का समर्थन मिलना मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
इस जुड़ाव को एक सौभाग्य बताते हुए रणवीर ने कहा, “इससे जुड़ना किसी आशीर्वाद, सम्मान और सौभाग्य से कम नहीं है।” यह बात तब सामने आई है जब ‘धुरंधर’ ने रणवीर के बॉक्स-ऑफिस करियर की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। खबरों के मुताबिक, दो फिल्मों वाली इस एक्शन फ़्रैंचाइज़ी ने कुल मिलाकर 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की है और यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी थिएटर हिट फ़िल्मों में से एक बन गई है।
‘प्रलय’ के साथ प्रोड्यूसर बने रणवीर सिंह
‘धुरंधर’ की सफलता के बाद रणवीर अब एक और बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुके हैं। यह एक्टर अभी ‘प्रलय’ पर काम कर रहे हैं, जो जय मेहता के निर्देशन में बन रही एक सर्वाइवल ड्रामा फ़िल्म है। खबरों के अनुसार, फ़िल्म की कहानी भविष्य के मुंबई पर आधारित है, जहां एक जानलेवा महामारी के बाद ज़ॉम्बी का प्रकोप फैल जाता है। ‘प्रलय’ रणवीर के करियर का एक अहम पड़ाव भी है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के साथ वे प्रोडक्शन के क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। वह कल्याणी प्रियदर्शन के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे, जिन्हें 2025 में ‘लोकाह चैप्टर 1 चंद्र’ के बाद काफी पहचान मिली थी। ‘प्रलय’ के बारे में और जानकारी अभी सामने नहीं आई है क्योंकि इसकी शूटिंग चल रही है।
रणवीर और दीपिका पादुकोण दूसरे बच्चे के माता-पिता बनने वाले हैं
यह एक्टर अपनी पर्सनल लाइफ में भी एक नए दौर में कदम रख रहा है। रणवीर और दीपिका पादुकोण फिर से माता-पिता बनने की तैयारी कर रहे हैं। दीपिका ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए यह खबर शेयर की, जिसमें उनकी बेटी दुआ भी नज़र आई। इस कपल ने 2024 में दुआ का स्वागत किया था।
25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा करियर की शुरुआत और कमाई बढ़ाने की कोशिश में जुटे होते हैं, वहीं एक टियर-2 शहर के युवा उद्यमी ने करीब ₹1.6 करोड़ की नेटवर्थ बना ली है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इतनी संपत्ति बनाने के बाद भी उसकी चिंता खत्म नहीं हुई। अब उसका सवाल है- पैसा कमाने के बाद उसे सही जगह कैसे लगाया जाए और अगला लक्ष्य क्या हो?
18 की उम्र में शुरू हुई कमाई की कहानी
इस युवा की आर्थिक यात्रा 18 साल की उम्र में freelancing से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे उसने Instagram पर theme pages बनाए और इन्हीं पेजों को आगे चलकर अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस में बदल दिया। आज उसकी कमाई का मुख्य जरिया यही बिजनेस है। हालांकि, बिजनेस से होने वाली आय तय नहीं रहती और समय के साथ इसमें उतार-चढ़ाव आता रहता है।
करोड़ों की संपत्ति, कई जगह फैला निवेश
Reddit के r/personalfinanceindia पर अपनी कहानी शेयर करते हुए 25 वर्षीय उद्यमी ने अपने निवेश का पूरा ब्योरा बताया। उसके पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय शेयरों का है। उसके मुताबिक, करीब ₹85 लाख भारतीय इक्विटी, ₹7.5 लाख अमेरिकी शेयरों और ₹5 लाख म्यूचुअल फंड्स में लगे हैं। इसके अलावा ₹5 लाख Sovereign Gold Bonds और ₹2 लाख Gold ETFs में निवेश किए गए हैं। रियल एस्टेट में करीब ₹15 लाख और क्रिप्टोकरेंसी में ₹3 लाख लगाए गए हैं।
₹40-45 लाख कैश में, लेकिन निवेश को लेकर उलझन
सबसे दिलचस्प हिस्सा उसके पास मौजूद नकदी है। करीब ₹40-45 लाख लंबे समय से बैंक अकाउंट में पड़े हैं। वह खुद भी मानता है कि इतनी बड़ी रकम को सिर्फ सेविंग अकाउंट में रखना शायद पैसे का सबसे बेहतर इस्तेमाल नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि वह सिर्फ इसलिए निवेश नहीं करना चाहता कि पैसा कहीं लगा हुआ दिखे। वह ऐसी जगह तलाश रहा है, जहां जोखिम और संभावित रिटर्न उसके हिसाब से संतुलित हों।
अब लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं
युवा उद्यमी के मुताबिक, उसका अगला लक्ष्य बिजनेस को आगे बढ़ाने के साथ अपनी संपत्ति को अलग-अलग जगहों पर फैलाना है। वह किसी एक बिजनेस या एसेट पर जरूरत से ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहता। आखिरकार उसकी नजर FIRE यानी Financial Independence, Retire Early पर है। यानी वह ऐसी आर्थिक स्थिति बनाना चाहता है, जहां भविष्य में रोजी-रोटी के लिए काम करना मजबूरी न रहे।
₹1.6 करोड़ के बाद भी Reddit पर मांगी सलाह
अपनी स्थिति बताते हुए उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि अगर कोई 25 साल की उम्र में करीब ₹1.5-2 करोड़ की नेटवर्थ और ₹40-45 लाख कैश के साथ हो, तो उसे आगे किस दिशा में ध्यान देना चाहिए। पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प रहीं। कई यूजर्स ने उसकी उपलब्धि की तारीफ की और कहा कि वह अपनी उम्र के ज्यादातर लोगों से काफी आगे है। एक यूजर ने उसके काम के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह Instagram पर कई theme pages का मालिक है, जिनमें meme pages भी शामिल हैं।
लोगों ने दी निवेश से ज्यादा सुरक्षा की सलाह
कुछ Reddit यूजर्स का ध्यान उसके निवेश से ज्यादा insurance पर गया। एक यूजर ने term insurance बढ़ाने और पर्याप्त health insurance लेने की सलाह दी। साथ ही emergency fund तैयार रखने की बात भी कही गई। एक अन्य यूजर ने real estate में धीरे-धीरे कदम रखने और rental income बनाने का सुझाव दिया।
असली कहानी ₹1.6 करोड़ की नहीं, अगले फैसले की है
इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू सिर्फ यह नहीं है कि 25 साल की उम्र में किसी ने कितनी संपत्ति बना ली। असली सवाल यह है कि जब कमाई एक मुकाम तक पहुंच जाए, तो उसके बाद सही फैसले कैसे लिए जाएं?
8 इंटरव्यू में रिजेक्शन के बाद टेक प्रोफेशनल ने अपनाई ‘चीट शीट’ वाली तरकीब, फिर मिले 2 जॉब ऑफर
Lalithaa Jewellery Listing: आईपीओ को 66 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर शानदार संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹72 यानी 35.82% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 24 अगस्त को करीब 36% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।
इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹201 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।
BSE की साइट पर ऐसे करें चेक
https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।
इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Lalithaa Jewellery चुनें।
एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।
फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।
सर्च पर क्लिक करें।
शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।
रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक
https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html, लिंक पर क्लिक करें।
सेलेक्ट कंपनी पर क्लिक करके Lalithaa Jewellery चुनें।
पैन, एप्लीकेशन नंबर, डीपी/क्लाइंट आईडी, अकाउंट नंबर/IFSC में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।
सबमिट करें।
शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।
Lalithaa Jewellery IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस
ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।
इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।
Lalithaa Jewellery के बारे में
ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।
आईपीओ को लेकर क्या था ब्रोकरेजेज का रुझान
एसबीआई सिक्योरिटीज ने ललिता ज्वैलरी आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि वह अभी की बजाय लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाही तक कंपनी के परफॉरमेंस को ट्रैक करेगी। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 की कमाई के मुकाबले 11.1 गुना पर थी जोकि ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री पियर्स के हिसाब से है। हालांकि हेजिंग पॉलिसी नहीं होने को एक रिस्क बताया था। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक गोल्ड के भाव स्थिर होने पर कंपनी का मार्जिन कम हो सकता है।
एक और ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने ललिता ज्वैलरी को सब्सक्राइब रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने लिस्टिंग गेन के साथ-साथ रिस्क उठा सकने वाले निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कल्याण ज्लैवर्स (Kalyan Jewellers) और टाइटन (Titan) जैसे दिग्गजों के मुकाबले P/E बेसिस पर यह आईपीओ 75% डिस्काउंट पर है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म ने ₹1066 करोड़ के जीएसटी विवाद और प्रमोटर से जुड़े मामले को अहम रिस्क के तौर पर जिक्र किया है लेकिन यह भी कहा कि टैक्स से जुड़े पुराने मामले काफी हद तक सुलझ चुके हैं।
Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट से लिस्टिंग को लेकर मिल रहे ये संकेत
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।


