DDA Plans: डीडीए ने दिल्ली के 45 जेजे क्लस्टर्स के इन-सिटू पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की, 1 लाख लोगों को मिलेगा फायदा

DDA Plans: राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बड़ा कदम उठाया है। ‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047’ के तहत DDA ने 45 JJ क्लस्टरों के इन-सिटू रिहैबिलिटेशन (उसी जगह पुनर्वास) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 15 परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल से करीब 21,229 परिवारों और एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या है DDA की योजना?

दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में DDA ने दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में परिकल्पित In-Situ Rehabilitation (ISR) योजना को आगे बढ़ाने की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनकी मौजूदा जगह या उसके आसपास ही बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। DDA ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसके तहत तीन ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स(TA) नियुक्त किए जाएंगे। ये सलाहकार दिल्ली के 15 प्रोजेक्ट्स से जुड़े 45 JJ क्लस्टरों के लिए विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेंगे।

45 JJ क्लस्टरों में कितने परिवार?

DDA के मुताबिक, इन 15 परियोजनाओं में शामिल 45 JJ क्लस्टर करीब 135.74 एकड़ जमीन पर फैले हुए हैं। इनमें लगभग 21,229 परिवार रहते हैं। प्रस्तावित पुनर्वास योजना से एक लाख से ज्यादा लोगों को बेहतर आवास, नागरिक सुविधाएं और रहने की बेहतर परिस्थितियां मिलने की संभावना है।

ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स क्या करेंगे?

नियुक्त किए जाने वाले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स सिर्फ जमीन और मकानों का आकलन नहीं करेंगे। बल्कि प्रत्येक परियोजना की पूरी व्यवहार्यता जांचेंगे। इसमें मुख्य रूप से:-

– कितने लोगों और परिवारों के पुनर्वास की जरूरत है

– जमीन पर विकास की कितनी संभावनाएं हैं

– सड़क, पानी, सीवर और अन्य बुनियादी ढांचे की जरूरत

– परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता

– पुनर्वास के लिए उपयुक्त मॉडल

– परियोजना को व्यवस्थित और टिकाऊ तरीके से लागू करने की योजना जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

17 लाख लोगों के पुनर्वास का लक्ष्य

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के 650 से अधिक JJ क्लस्टरों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के लिए सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। मौजूदा पहल को इसी बड़े लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। DDA के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के विजन के अनुरूप समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगी।

सिर्फ पुनर्वास नहीं, जमीन का भी बेहतर इस्तेमाल

इस योजना का उद्देश्य केवल झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास करना नहीं है। DDA के मुताबिक, इन-सिटू स्लम रिहैबिलिटेशन के जरिए झुग्गी बस्तियों की जमीन का योजनाबद्ध और बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। इससे एक तरफ मौजूदा निवासियों को बेहतर आवास और नागरिक सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ बड़ी मात्रा में आवासीय और व्यावसायिक स्थान विकसित किया जा सकेगा। इससे दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए अतिरिक्त हाउसिंग स्टॉक और कमर्शियल स्पेस उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अब आगे क्या होगा?

पहले ट्रांजेक्शन एडवाइजर्स इन 15 परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इन रिपोर्टों में तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे परियोजनाओं की संरचना और क्रियान्वयन का मॉडल तैयार किया जाएगा। DDA का कहना है कि यह प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से JJ क्लस्टरों के पुनर्विकास का आधार तैयार करेगी। यह पहल दिल्ली में झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास और समावेशी शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

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रनर्स के साथ दौड़ती रही ये कुतिया, 21 KM बाद भी नहीं रुकी; 38 KM तक ऐसे निभाया साथ, वीडियो हुआ वायरल

कानपुर में एक रनिंग ग्रुप उस वक्त हैरान रह गया, जब एक आवारा कुतिया उनके साथ दौड़ने लगी। शुरुआत में लोगों ने सोचा कि वह कुछ दूर तक साथ आएगी और फिर वापस चली जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिल्लू लगातार ग्रुप के साथ दौड़ती रही और करीब 38 किलोमीटर की दूरी पूरी कर डाली।इस दौरान रनर्स जब पानी पीने या आराम करने के लिए रुकते, तो पिल्लू भी उनके साथ रुक जाती। ब्रेक के बाद वह फिर दौड़ना शुरू कर देती।

उसकी रफ्तार और स्टैमिना देखकर रनर्स भी हैरान थे। इसी दौरान उसे प्यार से ‘Pillu Goggins’ नाम दे दिया गया। अब उसके वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं।

21 किलोमीटर के बाद भी नहीं रुकी

इंडियन बैडमिंटन खिलाड़ी प्रथमम ने इस पूरी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए। उनके मुताबिक, उन्होंने उस दिन करीब 43 किलोमीटर दौड़ लगाई, जबकि पिल्लू लगभग 38 किलोमीटर तक उनके साथ रही।

ग्रुप ने शुरुआत में सिर्फ 21 किलोमीटर तक दौड़ने का प्लान बनाया था। इसके बाद सभी को ऑटो से वापस लौटना था। उन्हें लगा था कि पिल्लू भी इतने किलोमीटर के बाद रुक जाएगी।

लेकिन 21 किलोमीटर पूरे होने के बाद भी पिल्लू ने दौड़ना जारी रखा। वह बिना किसी परेशानी के ग्रुप के साथ आगे बढ़ती रही। उसकी वजह से रनर्स का उत्साह भी बना रहा।

रनर्स ने भी रखा पिल्लू का ख्याल

पिल्लू ने पूरी दूरी अकेले नहीं दौड़ी। रनर्स ने भी उसका ध्यान रखा। जब ग्रुप पानी के लिए रुकता, तो उसे भी पानी दिया जाता और आराम का मौका मिलता।

वीडियो में वह कभी आगे तो कभी रनर्स के साथ-साथ दौड़ती दिखाई देती है। उसकी लगातार बनी रहने वाली रफ्तार ने लोगों को काफी प्रभावित किया।

दौड़ खत्म होने के बाद कहां गई पिल्लू?

इतनी लंबी दूरी तक दौड़ने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों को पिल्लू की चिंता होने लगी। कई लोगों ने पूछा कि आखिर दौड़ खत्म होने के बाद वह कहां गई।

प्रथमम ने बताया कि पिल्लू उनके घर के आसपास ही रहती है। उसने उनके साथ दौड़ शुरू की थी और आखिर में उनके घर पर ही पहुंची। उन्होंने यह भी साफ किया कि पिल्लू पहले से ही उनके इलाके में रहती है और इस तरह दौड़ना उसके लिए नया नहीं है।

इंटरनेट पर छाया ‘Pillu Goggins’ नाम

पिल्लू की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स उसके फैन हो गए हैं। कोई उसे सबसे अच्छा रनिंग पार्टनर बता रहा है, तो कोई उसकी फिटनेस और वफादारी की तारीफ कर रहा है।

एक सामान्य सी रनिंग से शुरू हुई यह कहानी अब इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत रही है। पिल्लू को शायद यह भी पता नहीं कि उसने 38 किलोमीटर की दौड़ पूरी की है, लेकिन उसके साथ दौड़ने वाले लोगों के लिए वह उस दिन की सबसे यादगार साथी जरूर बन गई।

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ प्रवास स्थगित

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बुधवार और गुरुवार को प्रस्तावित दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास स्थगित कर दिया गया है।

चुनाव आयोग ने अपरिहार्य कारणों से मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का निर्धारित कार्यक्रम फिलहाल स्थगित किया है। संशोधित कार्यक्रम की तारीख बाद में घोषित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के मुख्य चुनाव पदाधिकारी कार्यालय ने छह अक्टूबर को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना दी, जिसकी जानकारी आज सुबह दी गई। 

श्री कुमार के प्रस्तावित प्रवास को देखते हुए उन्हें राज्य अतिथि का दर्जा दिया गया था। उनके आगमन के मद्देनजर सुरक्षा, आवागमन और अन्य प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी की जा रही थीं। प्रस्तावित प्रवास के दौरान चुनाव संबंधी तैयारियों सहित विभिन्न विषयों पर अधिकारियों के साथ बैठक और समीक्षा की संभावना थी। चुनाव आयोग से संशोधित कार्यक्रम प्राप्त होने के बाद नई तारीख की जानकारी संबंधित विभागों को अलग से दी जाएगी।

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फिलहाल सात और आठ अक्टूबर का निर्धारित प्रवास स्थगित है। इस बीच, श्री कुमार से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म 6 में कथित बदलाव का विषय भी उठा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म 6 में किए गए किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “हम भी होमवर्क करते हैं। 

हमें भी मामले की जानकारी है। श्री कुमार को निलंबित करने की मांग पर न्यायालय ने तत्काल कोई आदेश देने से इनकार करते हुए कहाहम याचिका पर नोटिस जारी कर रहे हैं। याचिका का आधार न्यूज रिपोर्ट है, वह शत प्रतिशत सही, आंशिक रूप से सही या गलत भी हो सकती है। हम उसके आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकते हैं।” न्यायालय ने याचिका में उठाए गए मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

Pic Credit : UNI

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का लोन जल्दी चुकाने से ₹69000 का ब्याज बचेगा, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना काफी आसान है, लेकिन उसका ब्याज जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब लोन की अवधि लंबी हो। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपके पास पैसा आ जाए तो लोन को जल्दी खत्म करना कितना फायदेमंद है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। ब्याज दर 12% सालाना है और लोन की अवधि 5 साल यानी 60 महीने है।

5 साल तक चलाया तो कितना ब्याज देंगे?

5 लाख रुपये के इस लोन पर 12% ब्याज के हिसाब से आपकी EMI करीब 11,122 रुपये बनेगी। आप 60 महीने तक यह EMI चुकाते हैं तो बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे।

यानी 5 लाख रुपये की मूल रकम के ऊपर करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाएगा।

3 साल में लोन खत्म किया तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आप इसी 5 लाख रुपये के लोन को 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने का फैसला करते हैं। इस स्थिति में आपकी EMI बढ़कर करीब 16,607 रुपये हो जाएगी

हालांकि, लोन की अवधि कम होने से कुल ब्याज काफी घट जाएगा। 36 महीने में आप बैंक को करीब 5.98 लाख रुपये चुकाएंगे। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये होगा। यानी 5 साल की जगह 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69,476 रुपये का ब्याज बच सकता है।

लोन की अवधिEMIकुल ब्याज
5 सालकरीब ₹11,122करीब ₹1.67 लाख
3 सालकरीब ₹16,607करीब ₹97,858
ब्याज में बचत—करीब ₹69,476

लेकिन EMI बढ़ाना हर किसी के लिए सही नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। लोन जल्दी खत्म करने का मतलब है कि आपको हर महीने ज्यादा रकम EMI में लगानी होगी। इसलिए फैसला सिर्फ ब्याज बचत देखकर नहीं करना चाहिए।

अगर आपकी आमदनी स्थिर है और 16-17 हजार रुपये की EMI आसानी से संभाल सकते हैं, तो छोटी अवधि वाला लोन ब्याज के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर ज्यादा EMI से आपका बाकी खर्च या इमरजेंसी फंड प्रभावित होता है, तो जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।

दूसरे चार्ज का ध्यान रखना भी जरूरी

अगर आप पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज भी जरूर देख लें। इन चार्ज की वजह से वास्तविक बचत अलग हो सकती है।

इस उदाहरण में 12% ब्याज दर और बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के हिसाब से 5 लाख रुपये का लोन 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये का ब्याज बचता है। यानी सिर्फ लोन जल्दी खत्म करने से ही आपकी जेब में अच्छी-खासी रकम बच सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Rajpal Yadav: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से फटकार! पुश्तैनी संपत्ति बेचकर चुकाना होगा करोड़ों का कर्ज, अभिनेता का प्रस्ताव स्वीकार

Rajpal Yadav cheque bounce case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। चेक बाउंस मामले में बकाया रकम चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पुश्तैनी संपत्ति बेचने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने तत्काल ₹2 करोड़ जमा कराने की व्यवस्था पर भी गौर किया। शीर्ष अदालत ने चेक बाउंस के मामले में तत्काल 1.15 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया। इसके बाद राजपाल यादव ने कोर्ट में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया। इस दौरान राजपाल यादव के वकील ने कहा कि 85 लाख रुपए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर देंगे। कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यादव ने 2010 में एक फिल्म के लिए उन्हें दी गई पांच करोड़ रुपये की वित्तीय मदद के निपटारे के लिए 2013 में 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे। कंपनी ने आरोप लगाया कि उक्त चेक बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौते में यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। शीर्ष अदालत ने 15 सितंबर को यादव को आत्मसमर्पण करने से मिली छूट को पांच अक्टूबर तक बढ़ा दिया था।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राजपाल यादव की याचिका पर सुनवाई की। यह मामला उनकी 2012 की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े लोन और चेक बाउंस का है। राजपाल यादव और उनकी पत्नी को फिल्म के लिए निजी कंपनी ‘मुरली प्रोजेक्ट्स (Murli Projects)’ प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹5 करोड़ मिले थे। फिल्म तय समय पर पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई समझौते हुए। इसी दौरान दिए गए सुरक्षा चेक बाद में विवाद की वजह बन गए।

₹2 करोड़ अभी देने की तैयारी

‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि उनके पास ₹1.15 करोड़ की डिमांड ड्राफ्ट तैयार है। वहीं, उनकी पुश्तैनी संपत्ति के संभावित खरीदार ने ₹85 लाख देने की बात कही है। इस तरह तत्काल ₹2 करोड़ का भुगतान करने की व्यवस्था बताई गई। राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुश्तैनी संपत्ति की कीमत ₹30 करोड़ से ज्यादा है। खरीदार भुगतान करने में सक्षम है। हालांकि, पितृ पक्ष के कारण फिलहाल संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।

कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राजपाल यादव की देनदारी ₹2 करोड़ से कहीं ज्यादा है। शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि यदि अभी ₹2 करोड़ मिल जाते हैं तो बाकी रकम चुकाने के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने राजपाल यादव के अब तक के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कोर्ट उनकी नीयत या मामले के गुण-दोष से प्रभावित नहीं है। यहां राहत सिर्फ इसलिए दी जा रही है ताकि शिकायतकर्ता को उसका पैसा वापस मिल सके। कोर्ट ने यह तक चेतावनी दी कि राजपाल यादव की तीन महीने की सजा बढ़ाकर दो साल तक की जा सकती है।

कब हुई थी सजा?

मई 2024 में सेशन कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाई। लेकिन भुगतान को लेकर कई बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद रकम जमा न होने पर मामला फिर बिगड़ गया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था। राजपाल यादव ने 5 फरवरी को सरेंडर किया और बाद में ₹1.5 करोड़ जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिली। इसके बावजूद बाकी रकम का भुगतान न होने पर हाईकोर्ट ने उन्हें तीन महीने की कैद की सजा सुनाई। अब इसी आदेश को राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद होगी।

‘आपकी जगह जेल में है’

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट पांच अक्तूबर को चेक बाउंस के लंबे समय से जारी कई मामलों में राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई थी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 15 सितंबर को यादव को दो सप्ताह का आखिरी मौका देते हुए निजी कंपनी को बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने और शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। सोमवार को अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि दो सप्ताह की अवधि खत्म होने के बावजूद पांच अक्टूबर तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।

सुनवाई के दौरान यादव के वकील ने कहा, “वे (शिकायतकर्ता) गरीब नहीं हैं।” इस पर जस्टिस बागची नाराज हो गए और कहा, “हो सकता है कि वे आपसे अधिक अमीर हों, लेकिन आपने रकम उनसे हड़पी है… इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।” पीठ ने कहा कि वह यादव की अपील खारिज कर सकती है। लेकिन ऐसा करने से शिकायतकर्ता के लिए रकम वसूलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसलिए वह ऐसा करने से हिचक रही है।

पीठ ने कहा कि यादव को सोमवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की एक प्रति पेश की और कहा कि बैंक में ड्राफ्ट की प्रक्रिया जारी है। पीठ ने कहा, “यह असली है या नहीं? हमें नहीं पता।” वकील ने जब कहा कि डिमांड ड्राफ्ट बैंक के पास है। उसकी प्रक्रिया जारी है, तो शिकायतकर्ता के वकील ने अभिनेता पर अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया।

दिल्ली से UP-बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत? दिवाली-छठ पर चलेगी वंदे भारत स्पेशल, जानें पूरा शेड्यूल

Vande Bharat Special Train: दिवाली और छठ महापर्व के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, भारतीय रेलवे ने त्योहारों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा कर सकती है। हालांकि, अभी ट्रेन के संचालन को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके चलने की तारीख, समय और अन्य जानकारी साफ होगी।

यूपी के कई स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

अगर इस वंदे भारत स्पेशल को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन का विकल्प मिल सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, ट्रेन नई दिल्ली से चलकर अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकेगी। इसके बाद ट्रेन बक्सर और आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। यानी दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी काम की हो सकती है।

दीपावली और छठ के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में काफी दबाव रहता है। ऐसे में अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो यह वंदे भारत स्पेशल त्योहार के समय यात्रियों को भीड़ से राहत देने और सफर के लिए एक अतिरिक्त विकल्प देने में मदद कर सकती है।

21 अक्टूबर से संचालन का प्रस्ताव, त्योहार में बढ़ेंगे विकल्प

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ट्रेन जोड़ी 02252/02251 को नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक सोमवार, बुधवार और शनिवार को चलाने का प्रस्ताव है। वापसी में पटना से यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को चल सकती है। इसके अलावा, 02253/02254 ट्रेन जोड़ी चलाने का भी प्रस्ताव है। मंजूरी मिलने पर त्योहारों के दौरान दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त ट्रेन का विकल्प मिलेगा। हालांकि, अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

कब-कब चलेगी वंदे भारत स्पेशल?

प्रस्ताव के मुताबिक, वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से सुबह 8:35 बजे रवाना होकर दोपहर करीब 2:45 बजे प्रयागराज पहुंच सकती है। इसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा होते हुए ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचने का प्रस्ताव है।

वापसी में ट्रेन पटना से सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3:35 बजे प्रयागराज और रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है। मंजूरी मिलने पर यह टाइमिंग दिल्ली और यूपी के बीच सफर करने वालों के लिए एक और विकल्प दे सकती है।

दिल्ली-यूपी सफर के लिए कितना देना होगा किराया

प्रस्ताव के मुताबिक, नई दिल्ली से पटना तक एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब 2,575-2,600 रुपये हो सकता है। वहीं, एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया करीब 4,650-4,680 रुपये रहने का अनुमान है।

हालांकि, यह अभी प्रस्तावित किराया है। अंतिम किराया रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद तय होगा। वहीं, दिल्ली से कानपुर या प्रयागराज तक जाने वालों का किराया अलग होगा, जिसकी सही जानकारी बुकिंग शुरू होने पर IRCTC पर मिलेगी।

मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

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मेसी जैसा कोई नहीं: अर्जेंटीना की जर्सी में जब जादू ने आखिरी बार रंग दिखाया

फुटबॉल में कुछ खिलाड़ी मैच खत्म होने के साथ मैदान छोड़ते हैं और कुछ खिलाड़ी मैदान छोड़ने के बाद भी खेल का हिस्सा बने रहते हैं। लियोनेल मेसी दूसरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

 

ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोनुमेंटल में 6 अक्टूबर की रात अर्जेंटीना ने बेनिन को 3-0 से हराया। मेसी ने एक गोल किया और दो गोल में असिस्ट दिया। लेकिन उस रात स्कोर से ज्यादा महत्वपूर्ण था वह पल, जब दुनिया ने अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में मेसी को आखिरी बार देखा। 39 साल की उम्र में उन्होंने 21 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगा दिया।

 

स्टेडियम में 85 हजार से ज्यादा लोग थे। 10वें मिनट में उनके नंबर 10 के सम्मान में तालियां बजीं। मैदान पर ‘Gracias’ लिखी विशाल जर्सी रखी गई। मैच खत्म होने के बाद आसमान में ड्रोन शो हुआ और हर तरफ एक ही भावना थी- धन्यवाद, लियो।

 

यह विदाई इसलिए भी भारी थी क्योंकि मेसी ने सिर्फ अर्जेंटीना के लिए फुटबॉल नहीं खेला। उन्होंने एक पूरी पीढ़ी की फुटबॉल की कल्पना को आकार दिया।

 

मेसी से दुनिया प्यार क्यों करती है?

इस सवाल का जवाब उनके गोल, ट्रॉफियों और रिकॉर्ड से कहीं बड़ा है। मेसी से प्यार करने के लिए अर्जेंटीना का होना जरूरी नहीं। उनके प्रशंसक दुनिया के लगभग हर कोने में हैं, क्योंकि उनके खेल में कुछ ऐसा था जो भाषा और देश की सीमाओं से बाहर चला जाता था।

 

गेंद उनके पास आती थी और अचानक खेल की रफ्तार बदल जाती थी। वह तीन खिलाड़ियों के बीच से निकल जाते थे। किसी को उम्मीद नहीं होती थी कि वह पास देंगे, लेकिन गेंद बिल्कुल सही जगह पहुंच जाती थी। कभी वह खुद गोल कर देते और कभी ऐसा पास देते कि साथी खिलाड़ी के लिए गोल करना सबसे आसान काम रह जाता।

 

उनका सबसे बड़ा हुनर शायद यही था कि वह उस चीज को पहले देख लेते थे, जिसे बाकी खिलाड़ी बाद में देख पाते थे।

 

मेसी ने फुटबॉल को जटिल नहीं बनाया। उन्होंने उसे आसान दिखाई देने वाला बना दिया। यही महान कलाकार की पहचान होती है।

 

उनके खेल में एक कलाकार क्यों नजर आता था?

मेसी को सिर्फ महान फुटबॉलर कहना उनके खेल के साथ थोड़ा अन्याय है। उनके पैरों में गेंद होती थी तो मैदान किसी कैनवास की तरह लगता था। डिफेंडर रंग थे, गेंद ब्रश और गोलपोस्ट अंतिम तस्वीर।

 

लेकिन इस कला में सबसे खूबसूरत बात उनकी सहजता थी। मेसी कभी-कभी ऐसे चलते हुए दिखाई देते थे जैसे खेल उनके लिए बहुत धीमा हो। फिर एक क्षण में वह गति बदलते और पूरी डिफेंस लाइन पीछे छूट जाती।

 

उनकी ड्रिब्लिंग में ताकत से ज्यादा संतुलन था। उनके पास में दिखावे से ज्यादा समझ थी। उनके गोल में सिर्फ शॉट नहीं, कोण और टाइमिंग की समझ थी। और उम्र बढ़ने के साथ यह कला खत्म नहीं हुई।

 

शरीर पहले जैसा तेज नहीं रहा, लेकिन दिमाग और बायां पैर अब भी खेल को पढ़ते रहे। 2026 विश्व कप में 39 की उम्र में भी वह अर्जेंटीना की टीम का हिस्सा रहे और छह विश्व कप खेलने वाले खिलाड़ियों में शामिल हुए। यही मेसी की सबसे बड़ी खूबी थी कि उन्होंने अपनी उम्र के साथ खेलना सीख लिया।

 

महानता की राह आसान नहीं थी

आज जिस मेसी को अर्जेंटीना में लगभग देवता जैसा सम्मान मिलता है, उनके लिए यह रिश्ता हमेशा इतना आसान नहीं था। एक समय था जब उन पर आरोप लगता था कि वह क्लब के लिए तो सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन अर्जेंटीना के लिए नहीं।

 

2014 विश्व कप का फाइनल हारना, 2015 और 2016 में कोपा अमेरिका के फाइनल में हारना और लगातार बढ़ता दबाव, इन सबने मेसी को भीतर तक प्रभावित किया। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल हारने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास तक घोषित कर दिया था।

 

लेकिन वह लौटे। और फिर वही वापसी उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई।

 

2021 में अर्जेंटीना ने कोपा अमेरिका जीता। मेसी ने पहली बड़ी सीनियर अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी उठाई। अगले साल कतर में विश्व कप मिला। 2024 में एक और कोपा अमेरिका खिताब आया।

 

जिस खिलाड़ी पर कभी सवाल उठते थे कि वह अर्जेंटीना को कुछ नहीं दे पाया, वही बाद में देश के सबसे बड़े फुटबॉल नायक बन गया।

 

शायद इसी वजह से उनकी कहानी इतनी मानवीय है। वह हमेशा जीतते हुए खिलाड़ी नहीं थे। वह हारकर वापस आने वाले खिलाड़ी थे।

 

विश्व कप ने कहानी पूरी कर दी

मेसी के करियर की सबसे बड़ी कमी लंबे समय तक यही कही जाती रही कि उनके पास विश्व कप नहीं है। उनकी तुलना बार-बार डिएगो माराडोना से होती थी। हर हार के बाद सवाल उठता था कि क्या मेसी कभी वह कर पाएंगे, जो माराडोना ने 1986 में किया था।

 

फिर 2022 आया। कतर के फाइनल में अर्जेंटीना और फ्रांस आमने-सामने थे। वह मैच आज फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार फाइनल में गिना जाता है। 

 

अर्जेंटीना विश्व चैंपियन बना। मेसी के हाथ में विश्व कप था। उस पल के बाद उनकी महानता को साबित करने के लिए किसी तर्क की जरूरत नहीं रह गई। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विश्व कप जीतने के बाद भी उन्होंने खेलना बंद नहीं किया।

 

2026 में उन्होंने अपना छठा विश्व कप खेला। अर्जेंटीना फाइनल तक पहुंचा, लेकिन स्पेन से हार गया। पराजय के बावजूद मेसी की कहानी अधूरी नहीं हुई। क्योंकि उनके पास वह ट्रॉफी पहले से थी, जिसका इंतजार उनके करियर के सबसे कठिन वर्षों में हुआ था।

 

आखिरी मैच में भी वही मेसी

बेनिन के खिलाफ आखिरी मैच में शायद सबसे खूबसूरत बात यही थी कि मेसी ने विदाई को औपचारिकता नहीं बनने दिया। उन्होंने निकोलस ओटामेंडी के गोल में मदद की। फिर निको पाज के गोल के लिए असिस्ट दिया और 71वें मिनट में पेनल्टी पर खुद गोल किया।

 

यानी आखिरी बार भी उन्होंने वही किया, जो पूरी जिंदगी करते आए थे, खेल को अपने आसपास बेहतर बनाना।

 

एक गोल। दो असिस्ट। और 3-0 की जीत। उनका अर्जेंटीना करियर 208 मैचों और 126 अंतरराष्ट्रीय गोलों के साथ खत्म हुआ। वह देश के सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले और सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर विदा हुए।

 

लेकिन आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण वह दृश्य था, जब अंतिम सीटी के बाद मेसी भावुक होकर मैदान पर खड़े थे। उनकी आंखों में आंसू थे। शायद इसलिए कि इस बार वह जानते थे कि अब वापस आने का कोई अगला मैच नहीं है।

 

मेसी की सबसे बड़ी विरासत क्या है?

ट्रॉफियां? गोल? रिकॉर्ड? आठ बैलन डी’ओर? निश्चित तौर पर ये सब उनकी महानता का हिस्सा हैं। लेकिन मेसी की सबसे बड़ी विरासत शायद इससे आगे है।

 

उन्होंने दुनिया को बताया कि फुटबॉल सिर्फ ताकत और रफ्तार का खेल नहीं है। इसमें कल्पना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक बच्चे को दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टार बनने की कहानी दी। उन्होंने लाखों बच्चों को यह सपना देखने की वजह दी कि गेंद को पैरों के करीब रखकर भी दुनिया जीती जा सकती है।

 

उन्होंने यह भी सिखाया कि महानता हमेशा शोर नहीं करती। मेसी मैदान पर बहुत कम बोलते थे। गेंद उनके लिए बोलती थी।

 

अब फुटबॉल कितना सूना होगा?

फुटबॉल खत्म नहीं होगा। नए खिलाड़ी आएंगे। नए सितारे बनेंगे। कोई अगला बड़ा गोल करेगा, कोई अगला रिकॉर्ड तोड़ेगा। लेकिन मेसी जैसा खिलाड़ी बार-बार नहीं आता। अब वह इंतजार नहीं होगा कि गेंद मेसी के पास कब आएगी।

 

वह क्षण नहीं होगा जब स्टेडियम में अचानक हजारों लोग एक साथ खड़े हो जाएं क्योंकि उन्हें पता है कि कुछ असाधारण होने वाला है।

 

कोई डिफेंडर उनके सामने खड़ा होगा, मेसी उसे देखेंगे, एक छोटा सा मूवमेंट होगा और अगले ही पल पूरा खेल बदल जाएगा। उस अनुभव का कोई विकल्प नहीं है।

 

अर्जेंटीना के लिए तो यह खालीपन और बड़ा है। मेसी अब सिर्फ टीम के कप्तान नहीं थे। वह उस टीम की पहचान बन चुके थे जिसने लंबे इंतजार और निराशाओं के बाद दुनिया को फिर अपने साथ खड़ा किया।

 

यह अंत नहीं, एक अध्याय का अंत है

मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी उतार दी है। फुटबॉल नहीं। वह क्लब फुटबॉल में इंटर मियामी के साथ खेलते रहेंगे। लेकिन अर्जेंटीना के नंबर 10 के रूप में उनकी कहानी अब पूरी हो चुकी है। और शायद यही इस विदाई की खूबसूरती है।

 

उन्होंने तब विदा ली, जब लोग यह नहीं पूछ रहे थे कि मेसी कब रिटायर होंगे? लोग पूछ रहे थे कि मेसी अभी क्यों रिटायर हों? क्योंकि उम्र ने उन्हें रोका नहीं था। आखिरी मैच में भी वह गोल कर रहे थे, असिस्ट दे रहे थे और खेल को अपनी शर्तों पर प्रभावित कर रहे थे।

 

लेकिन हर महान कहानी का एक अंतिम पन्ना होता है। मेसी का वह पन्ना ब्यूनस आयर्स में लिखा गया। आसमान में उनके नाम की रोशनी थी। स्टेडियम में हजारों आवाजें थीं। आंखों में आंसू थे। और अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में एक आखिरी बार वही नंबर चमक रहा था- 10।

 

कुछ खिलाड़ी फुटबॉल खेलते हैं। कुछ खिलाड़ी फुटबॉल जीतते हैं। और कुछ ऐसे होते हैं, जिनके जाने पर लगता है कि फुटबॉल का एक हिस्सा अपने साथ चला गया। लियोनेल मेसी उसी आखिरी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

Video: होम गार्ड भर्ती में साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता की कहानी! पति नहीं रहे तो बच्चों, ससुराल का बोझ उठाने का ये जज्बा इमोशनल कर देगा

रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।

ऐसे में साड़ी ही उनका अभ्यास का पहनावा बन गई है। तेज धूप, लंबा रास्ता और सीमित साधन भी उनके कदम नहीं रोक पाए। कविता की कोशिश सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करना चाहती हैं।

पहले देखने पहुंचीं, फिर खुद दौड़ने लगीं

कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी दौड़ लगाने का फैसला किया। शुरुआत में 1.6 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में उन्हें करीब 8 मिनट लगते थे। अब वह यही दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी कर लेती हैं।

भर्ती परीक्षा के दौरान साड़ी पहनकर दौड़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि कविता को काफी समय तक पता ही नहीं था कि उनका वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में आ चुका है।

दो बच्चों की मां, परिवार की जिम्मेदारी भी कंधों पर

कविता के पति का निधन हो चुका है और वह अपने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग ससुरालवालों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा। वह बताती हैं कि उनका मकसद सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं है। वह होमगार्ड बनकर अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।

मैदान पर सिर्फ कविता नहीं, सैकड़ों संघर्ष की कहानियां

सिदो-कान्हू मैदान में हर सुबह का नजारा किसी कहानी से कम नहीं। ट्रैकसूट पहने युवतियों के साथ कई महिलाएं साड़ी और चप्पलों में दौड़ती दिखाई देती हैं। इनमें कई ऐसी हैं, जो घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम निपटाकर सीधे मैदान पहुंचती हैं।

बूढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में दौड़ती हैं। उनका कहना है कि गरीब किसान परिवार से होने के कारण परिवार ट्रैकसूट और जूते नहीं खरीद सका, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ।

किसी के लिए नौकरी, तो किसी के लिए बच्चों का भविष्य

गोला की मोनिका कुमारी ने 1.6 किलोमीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 4 सेकंड में पूरी की। वहीं कई अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सिर्फ रोजगार का मौका नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। फिटनेस कोच सिकंदर पांडेय और एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक बड़ी दौड़ में करीब 2,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

284 पदों ने जगाई नई उम्मीद

रामगढ़ में 284 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए और अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भर्ती में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा लंबाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण होंगे। प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से योग्यता और फिटनेस के आधार पर चयन की तैयारी की है।

Video: ‘हिंदी सीखो वरना नौकरी छोड़ दो’… Zomato सुपरवाइजर का वीडियो वायरल, अब मांगी माफी

कल का मौसम: IMD ने 8 राज्यों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और बारिश का जताया अनुमान; उत्तराखंड के 8 जिलों में येलो अलर्ट जारी

IMD Weather Forecast: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है।

8 अक्टूबर को कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम?

दिल्ली में 8 अक्टूबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दौरान तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

इसके बाद 9 अक्टूबर को अधिकतम तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है और यह 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 10 और 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। इन दोनों दिनों में तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

उत्तराखंड का मौसम

IMD ने उत्तराखंड के 8 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और अगले पांच दिनों में मध्यम बारिश का अनुमान लगाया है। इस अलर्ट में देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर शामिल हैं।

इन जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। अगले पांच दिनों के दौरान सभी जिलों में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 4,200 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।

मौसम विभाग ने कहा कि पिछले शनिवार को राज्य से मॉनसून के लौटने के बाद मौसम में यह बदलाव आया है और अब एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) मौसम को प्रभावित कर रहा है।

हिमाचल प्रदेश का मौसम

हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम खराब रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। राज्य में रविवार तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

जम्मू-कश्मीर का मौसम

जम्मू-कश्मीर में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने के साथ-साथ आने वाले दिनों में बारिश होने की भी संभावना है।

लद्दाख का मौसम

लद्दाख में अगले कुछ दिनों तक मौसम बदला हुआ रह सकता है। यहां आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की संभावना है। इसके अलावा कई इलाकों में बारिश भी हो सकती है।

उत्तर प्रदेश का मौसम

उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और बिजली कड़कने की संभावना है, और राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश भी हो सकती है।

हरियाणा और चंडीगढ़ का मौसम

हरियाणा और चंडीगढ़ में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने के साथ-साथ मौसम के अस्थिर रहने की उम्मीद है। और रविवार तक बारिश व आंधी-तूफान की संभावना बनी रहेगी।

पंजाब का मौसम

आने वाले दिनों में पंजाब में आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज़ हवाएं चलने की संभावना है।

दक्षिण भारत का मौसम

आने वाले दिनों में तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, दक्षिण अंदरूनी कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप में बारिश जारी रहने की संभावना है।

IMD का ताजा अनुमान

ताजा अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में मौसम खराब बना रहेगा और अलग-अलग इलाकों में बारिश, आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की उम्मीद है।

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PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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