चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में नई याचिकाएं

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमों में नया पेंच आ गया है। इस मामले में दो नई याचिकाएं दायर की गई हैं। असल में 2023 में बने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले पर 23 सितंबर को दो जजों जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने विचार किया था। दोनों जजों ने अलग अलग फैसला सुनाया। जस्टिस दत्ता ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने की जरुरत नहीं है, जबकि जस्टिस शर्मा ने कहा कि इसे पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।

हालांकि दोनों इस बात पर सहमत हुए कि मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज देना चाहिए। बुधवार, सात अक्टूबर को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने बताया कि इस मामले में एक याचिका दायर की गई, जिसमें जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा के फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस याचिका की जांच की जाएगी। वकील ने यह भी बताया कि एक अन्य सुधारात्मक याचिका भी दायर की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनको उस याचिका की भी जानकारी है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक पैनल का गठन किया था, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस को रखा गया था। हालांकि अदालत ने कहा था कि यह अस्थायी व्यवस्था है। इसके बाद सरकार ने संसद में एक कानून बनाया, जिसमें नियुक्ति समिति से चीफ जस्टिस को हटा कर वहां एक केंद्रीय मंत्री को रख दिया गया। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। उसे बड़ी बेंच के सामने भेजने का मामला उलझा हुआ है।

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इसे संविधान पीठ को भेजने की बात रही है। लेकिन जस्टिस शर्मा को लेकर पक्षपात की आशंका जताई गई है। उनके बेटे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुना आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। बहरहाल, अगर सुप्रीम कोर्ट नई याचिकाओं की जांच करता है और उसे सुनवाई के लिए स्वीकार करता है तो इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं की सुनवाई प्रभावित होगी और इसे बड़े बेंच को भेजने का मामला भी अटकेगा।

2026 के साहित्य नोबेल का ऐलान आज:चीन की कैन श्वे सबसे आगे, भारत के अमिताव घोष भी दावेदार; सिर्फ 1 भारतीय के पास यह पुरस्कार

2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज किया जाएगा। स्वीडिश अकादमी भारतीय समय के मुताबिक शाम 4:30 बजे विजेता के नाम की घोषणा करेगी। ऐलान से पहले बुकमेकरों के अनुमान में चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे सबसे आगे चल रही हैं। भारत के लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल है। भारत से अब तक सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें 1913 में यह पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई भी थे। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 11.5 करोड़ रुपए है। सपनों जैसी कहानियां लिखती हैं कैन श्वे चीन की 73 साल की लेखिका कैन श्वे इस बार साहित्य के नोबेल की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। उनका असली नाम डेंग शियाओहुआ है। कैन श्वे की कहानियां आम कहानियों से अलग होती हैं। इनमें सपने जैसे दृश्य होते हैं और कहानी से ज्यादा किरदारों के मन में चल रहे विचारों पर ध्यान दिया जाता है। उनके लेखन की तुलना मशहूर लेखकों फ्रांज काफ्का और जॉर्ज लुइस बोर्खेस से भी की गई है। उनकी चर्चित किताबों में ‘द लास्ट लवर’, ‘लव इन द न्यू मिलेनियम’ और ‘आई लिव इन द स्लम्स’ शामिल हैं। इंटरनेशनल बुकर की शॉर्टलिस्ट में पहुंचे थे अमिताव घोष भारत के लेखक अमिताव घोष की चर्चित किताब ‘सी ऑफ पॉपीज’ 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनके आइबिस ट्रिलॉजी का पहला हिस्सा है। घोष की किताबों में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी एक और चर्चित किताब ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके असर के बारे में है। दक्षिण एशियाई मूल के दूसरे चर्चित लेखकों में सलमान रुश्दी, माइकल ओंडाट्जे और मॉरीशस की भारतीय मूल की लेखिका आनंदा देवी शामिल हैं। जापान-ऑस्ट्रेलिया समेत 10 देशों के लेखक भी नोबेल की रेस में जापान के मशहूर लेखक हारुकी मुराकामी लंबे समय से साहित्य के नोबेल के संभावित विजेताओं में शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के जेराल्ड मर्नेन और अमेरिका के थॉमस पिंचन भी प्रमुख नामों में हैं। इसके अलावा मेक्सिको की क्रिस्टीना रिवेरा गार्सा, स्पेन के एनरिक विला-मातास, पुर्तगाल की लिडिया जॉर्ज, रूस की ल्यूडमिला उलित्स्काया, कनाडा की मार्गरेट एटवुड और फ्रांस के मिशेल ह्वेलेबेक के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, ये आधिकारिक दावेदारों की सूची नहीं है। स्वीडिश अकादमी संभावित विजेताओं की शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक नहीं करती। पिछले 10 साल में 4 महिलाओं को मिला साहित्य नोबेल पिछले 10 साल में साहित्य का नोबेल 10 लेखकों को मिला, जिनमें 4 महिलाएं थीं। इनमें 6 ने अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में लिखा, जबकि 6 विजेता यूरोप से रहे। 2024 में दक्षिण कोरिया की हान कांग एशिया से पुरस्कार जीतने वाली लेखिका थीं। इस दौरान दक्षिण एशिया से कोई लेखक नहीं जीता। हर साल स्वीडिश अकादमी नॉमिनेशन मंगाती है। इसमें अकादमी के सदस्य, साहित्य और भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों के प्रमुख नाम भेज सकते हैं। लेखक खुद को नामांकित नहीं कर सकते। नोबेल कमेटी पहले 15 से 20 नाम चुनती है, फिर मई में इन्हें 5 उम्मीदवारों तक सीमित किया जाता है। इसके बाद स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य वोटिंग से विजेता चुनते हैं। 50 साल तक गोपनीय रहता है नॉमिनेशन स्वीडिश अकादमी नोबेल के नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट जारी नहीं करती। नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है। इसलिए 2026 में किन लेखकों को नामांकित किया गया, इसकी पूरी जानकारी 2076 में सामने आएगी। नोबेल रिकॉर्ड के मुताबिक, सरवपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आरके नारायण जैसे भारतीय लेखकों को अलग-अलग वर्षों में साहित्य नोबेल के लिए नामांकित किया गया था। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 2026 का केमिस्ट्री नोबेल फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को:अणुओं के मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई; दवाएं बनाने में मदद मिली 2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

मौत का मलबा! दिल्ली में सीमापुरी में बिल्डिंग गिरने से गर्भवती महिला समेत 3 की मौत

बुधवार को दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद राहत और बचाव टीमों ने मलबे से अब तक 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। मलबे से बचाए गए 11 लोगों में से आठ लोग घायल हैं, जिन्हें इलाज के लिए ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं अभी कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। ये इमारत सीमापुरी इलाके में ईदगाह मस्जिद के पास स्थित थी।

घायलों की पहचान मोमिन मिर्जा (56), अबदान (3), अब्दुल रहमान (28), देवरुद्दीन (28), सलमा (50), छोटे (34), सकीना (35) और समद (30) के रूप में हुई है। अस्पताल में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। ये घटना सत्य निकेतन में इमारत गिरने की के करीब एक महीने बाद हुई।

तीन लोगों की हुई मौत

न्यू सीमापुरी में इमारत गिरने के हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में 12 साल की एक बच्ची, 21 वर्षीय गुलाफ्सा और एक अन्य बच्चा शामिल है। गुलाफ्सा करीब चार महीने की गर्भवती थी। 12 साल की बच्ची और दूसरे बच्चे की पहचान अभी नहीं हो पाई है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और अधिकारियों की ओर से घटना से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में इमारत गिरने के बाद आसपास के दो से तीन मकानों के कुछ हिस्से भी मलबे में दब गए।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा

दिल्ली पुलिस ने कहा, “दिल्ली के न्यू सीमापुरी के E-ब्लॉक में E-401 नंबर की चार मंजिला इमारत गिरने की सूचना मिली है। यह इमारत करीब 25 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी। इमारत गिरने से आसपास की दो अन्य इमारतों को भी मामूली नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाके से करीब 3 साल के बच्चे समेत 7 घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।” दिल्ली फायर सर्विस को बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, जिसके बाद दमकल की गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर भेजी गईं। एक अधिकारी ने बताया कि मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल राहत और बचाव दल मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश में जुटा है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

पाकिस्तान में आटे के संकट से जूझ रहे लोग:20 किलो आटे का बैग 3300 रुपए पहुंचा, रोटी 20 से बढ़कर 30 रुपए हुई

पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमत तेजी से बढ़ने से लोग परेशान हैं। 20 किलो मोटे आटे का बैग 3,300 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। आटे की कीमत बढ़ने का असर तंदूरों पर भी पड़ा है। ANI के मुताबिक, 20 रुपए में मिलने वाली 50 ग्राम की रोटी अब 30 रुपए में बिक रही है। कई इलाकों में एक रोटी की बिक्री भी बंद कर दी गई है और 40 रुपए में दो रोटियां दी जा रही हैं। सरकारी सब्सिडी वाला आटा बाजार से लगभग गायब हो गया है। इसके चलते दुकानों पर व्यावसायिक आटे की कीमत बढ़ गई है। 20 किलो महीन आटे का बैग 3,120 रुपए में बिक रहा है, जबकि 80 किलो मोटे आटे की कीमत 13,200 रुपए पहुंच गई है। 20 किलो चोकर का बैग भी 1,480 रुपए में मिल रहा है। कारोबारियों पर आटे की जमाखोरी का आरोप आटे की कीमत बढ़ने के पीछे कुछ कारोबारियों पर जमाखोरी करने के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि कारोबारियों ने आटे का स्टॉक गोदामों में रोक लिया, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता कम हो गई और कीमतें तेजी से बढ़ीं। आटे की अचानक बढ़ी कीमतों के बाद कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियां बड़े कारोबारियों और आटा गोदामों पर नजर रख रही हैं। इस संकट के बीच आटा कारोबारियों के कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपए का मुनाफा कमाने की बात भी सामने आई है। कई इलाकों में दुकानदारों ने एक अकेली रोटी देना बंद किया पेशावर के खैबर बाजार, अशरफ रोड, कराची मार्केट, नमक मंडी और गवर्नमेंट कॉलेज चौक जैसे इलाकों में कई दुकानदार अब एक अकेली रोटी नहीं दे रहे हैं। ग्राहकों को 40 रुपए में दो रोटियां खरीदनी पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि आटे की कीमत बढ़ने के साथ रोटी का वजन भी कम किया जा रहा है। आटे और रोटी की बढ़ती कीमतों से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से तय कीमत पर आटा और रोटी उपलब्ध कराने के साथ रोटी का वजन भी तय मानक के मुताबिक रखने की मांग की है। सरकार का दावा- सब्सिडी वाला आटा अब भी बांटा जा रहा खाद्य विभाग का कहना है कि सब्सिडी वाला आटा अब भी पूरे प्रांत में बांटा जा रहा है। विभाग के मुताबिक, पिछले हफ्ते 1,611 सक्रिय डीलरों के जरिए सरकारी दरों पर 4,17,168 बैग आटा सप्लाई किया गया। पेशावर डिवीजन को 1,01,955, मलाकंड को 1,20,737 और मरदान को 59,389 बैग मिले। हजारा को 38,129, बन्नू को 12,588, डेरा इस्माइल खान को 41,688 और कोहाट को 42,682 बैग की सप्लाई की गई। पाकिस्तान में पहले भी कई बार आटे का संकट आया पाकिस्तान में आटे की कमी कोई नई समस्या नहीं है। देश में पिछले कुछ वर्षों में कई बार गेहूं और आटे की सप्लाई प्रभावित हुई है। 2019-20 में आटे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के साथ आटे की कमी का संकट सामने आया था। इसके बाद 2023 में भी गेहूं और आटे की भारी किल्लत हुई, जब सब्सिडी वाले आटे के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गई थीं। 2023 के संकट में सरकार की ओर से कम कीमत पर दिए जाने वाले आटे की मांग तेजी से बढ़ गई थी। कई जगह लोग घंटों कतार में खड़े रहे। कुछ स्थानों पर आटा लेने के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति भी बनी थी। इससे साफ हुआ कि आटे की सप्लाई में रुकावट का सबसे ज्यादा असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें…. पाकिस्तान में 60 लड़कियों के फोन लेकर फरार हुए ठग:नौकरी का झांसा देकर बुलाया, सभी के मोबाइल जमा कराए, फिर बाइक से भाग निकले पाकिस्तान के कराची में ठग नौकरी का झांसा देकर कम से कम 60 लड़कियों के मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए। ठगों ने सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए उन्हें एक कार्यक्रम में स्टॉल संभालने का काम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सैयामी खेर ने सिनेमा में पूरे किए 10 साल

बॉलीवुड अभिनेत्री सैयामी खेर ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 10 साल पूरे कर लिये हैं। वर्ष 2016 में राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मिर्ज़्या’ से हर्षवर्धन कपूर के साथ अभिनय की शुरुआत करने वाली सैयामी ने इस खास मौके पर अपने अब तक के सफर, संघर्ष, सीख और अनुभवों को याद किया।

सैयामी ने सोशल मीडिया पर अपने सफर से जुड़े अनुभव साझा करते हुए बताया कि नासिक की एक शांत और शर्मीली लड़की से लेकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने तक का सफर उनके लिये बेहद खास रहा है। उन्होंने कहा कि इन 10 वर्षों में उनकी फिल्मों के साथ-साथ उन्हें मिले लोगों, अनुभवों और सीख ने भी उनके व्यक्तित्व और करियर को गहराई से प्रभावित किया।

उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले ही कई लोगों ने उन्हें यह कहकर हतोत्साहित किया कि उनमें अभिनेत्री बनने की क्षमता नहीं है। उन्हें ‘गांव की लड़की’ तक कहा गया और बिना मांगी सलाह दी गई कि इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के लिये किसी अभिनेता या निर्देशक को डेट करें अथवा कॉस्मेटिक सर्जरी करवाएं। हालांकि, अपने माता-पिता और परवरिश से मिले आत्मविश्वास के कारण उन्होंने इन बातों को गंभीरता से लेने के बजाय उनमें भी हास्य तलाशना सीखा।

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सैयामी के करियर में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब आदूर मुखर्जी ने उन्हें फोन कर बताया कि निर्देशक दिलीप शंकर उनका ऑडिशन लेंगे। इसके बाद उन्होंने दिलीप शंकर और अभिनेता आदिल हुसैन के साथ करीब तीन महीने तक वर्कशॉप की। उन्होंने कहा कि इन वर्कशॉप ने उन्हें खुद को स्वीकार करने, अपने काम में ईमानदारी रखने और अपनी पहचान पर भरोसा करना सिखाया।

इसके छह महीने बाद सैयामी को राकेश ओमप्रकाश मेहरा की ‘मिर्ज़्या’ में काम करने का अवसर मिला। उन्होंने राकेश ओमप्रकाश मेहरा और उनकी पत्नी भारती के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों ने उन्हें परिवार के सदस्य की तरह अपनाया। राकेश मेहरा ने उन्हें खुद बने रहने की स्वतंत्रता दी और अभिनय से प्रेम करना सिखाया।

सैयामी ने कहा कि ‘मिर्ज़्या’ उनके लिये केवल एक फिल्म नहीं थी, बल्कि इस दौरान उन्हें ऐसी दोस्तियां भी मिलीं, जो 10 साल बाद भी उनके साथ हैं। इसी फिल्म के दौरान उन्हें गीतकार एवं लेखक गुलज़ार के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने गुलज़ार को ज्ञान और समझ का ‘समंदर’ बताते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में उन्होंने उन्हें शब्दों से कहीं अधिक दिया है।

अपने सफर में परिवार और दोस्तों की भूमिका को याद करते हुए सैयामी ने कहा कि उन्होंने हमेशा उन्हें जमीन से जोड़े रखा और याद दिलाया कि फिल्मों, कैमरे और शोहरत की दुनिया से बाहर भी जिंदगी है।

सैयामी ने कहा पहली बार फिल्म के सेट पर कदम रखे हुए 10 साल हो गए हैं। ये 10 साल मेरी जिंदगी के सबसे बड़े बदलाव लाने वाले अनुभवों से भरे रहे हैं। आज भी मुझे वही जुनून, थोड़ी घबराहट और उत्साह महसूस होता है, जो शूटिंग के पहले दिन महसूस हुआ था। उन्होंने कहा कि बतौर अभिनेत्री अभी उनका सफर लंबा है और उन्हें बहुत कुछ सीखना और तलाशना बाकी है। वह कैमरे के सामने और उसके बाहर खुद को लगातार चुनौती देती रहना चाहती हैं।

सैयामी ने अपने 10 वर्ष के सफर को याद करते हुए कहा कि वह आने वाले वर्षों में भी अच्छी कहानियों, अच्छे लोगों, अच्छे काम और सकारात्मक ऊर्जा की तलाश जारी रखेंगी। सैयामी ने कहा मैं खुद को बहुत भाग्यशाली और शुक्रगुजार मानती हूं कि मुझे इतनी अच्छी कहानियों का हिस्सा बनने और इतने अच्छे लोगों से मिलने का मौका मिला। आने वाले सफर के नाम, अगले 10 सालों के नाम।

Pic Credit : UNI

Tata Sons AGM: टाटा संस में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की असली लड़ाई अभी बाकी, शेयरहोल्डर्स के वोट पर टिकी नजर

Tata Sons AGM: एन चंद्रशेखरन ने 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्डरूम में वोट जीत लिया था। लेकिन उनका बतौर CEO तीसरा कार्यकाल अभी पक्का नहीं है। अब असली फैसला टाटा संस की सालाना आम बैठक यानी AGM में होगा। यहां शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।

बोर्ड के वोट और शेयरहोल्डर्स के वोट में बड़ा फर्क है। बोर्डरूम में चंद्रशेखरन के पक्ष में फैसला हो चुका है। लेकिन AGM का वोट अभी खुला है। अगले कुछ हफ्ते इस पूरे मामले में काफी अहम रहने वाले हैं।

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर भी टाटा ट्रस्ट्स के विवाद पर कोई फैसला या रुख अपना सकता है। कुछ ट्रस्टियों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। वहीं टाटा संस में करीब 13% हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ग्रुप की कंपनियों को भी अपना वोट तय करना होगा।

टाटा ट्रस्ट्स के वोट सबसे अहम

इस पूरी लड़ाई के बीच टाटा ट्रस्ट्स सबसे बड़ा खिलाड़ी है। उसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह हिस्सेदारी सात अलग-अलग ट्रस्ट्स में बंटी है। इसलिए यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि सभी ट्रस्ट एक साथ एक ही तरफ वोट करेंगे।

SDTT और SRTT सबसे अहम ट्रस्ट हैं। दोनों के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है। ऐसे में इन दोनों ट्रस्ट्स के भीतर चल रहा विवाद सीधे AGM की वोटिंग को प्रभावित कर सकता है।

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9 नवंबर को बदल सकता है पहला समीकरण

9 नवंबर एक अहम तारीख है। इसी दिन वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा का सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में तीन साल का कार्यकाल खत्म होगा। SDTT के पास टाटा संस की 27.98% हिस्सेदारी है।

SDTT में छह ट्रस्टी हैं। इनमें नोएल टाटा, दारियस खंबाटा, भास्कर भट्ट, नेविल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह शामिल हैं। ट्रस्ट के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ चुके हैं।

खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा मौजूदा विवाद में मोटे तौर पर नोएल टाटा के साथ हैं। 5 अक्टूबर को इन चारों ने श्रीनिवासन और विजय सिंह के रुख का विरोध किया था। मामला टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन और ट्रस्ट्स के अधिकारों से जुड़ा है।

खंबाटा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। खबर से जुड़े लोगों के मुताबिक, वह शायद दूसरा कार्यकाल न मांगें। अगर वह दोबारा ट्रस्टी बनना चाहते हैं तो सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी होगी।

SRTT में दिसंबर में बड़ा बदलाव संभव

सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के पास टाटा संस की 23.56% हिस्सेदारी है। यहां किसी नए ट्रस्टी को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है। इसलिए यहां साधारण बहुमत से काम नहीं चलता।

यह नियम पहले भी परेशानी पैदा कर चुका है। नेविल टाटा को SRTT में शामिल करने की कोशिश हुई थी। लेकिन 2024 के आखिर में प्रस्तावित बैठक टाल दी गई थी। श्रीनिवासन ने इस पर आपत्ति जताई थी।

अब श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। अगर उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता है तो ट्रस्ट के भीतर समीकरण बदल सकते हैं। इससे SRTT का रुख नोएल टाटा के करीब जा सकता है।

हालांकि, इसके लिए ट्रस्ट को अपना कामकाज ठीक से चलाने और AGM में वोट करने की स्थिति में होना जरूरी होगा। SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां भी लागू हैं।

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SRTT की वजह से टाटा संस की AGM टली थी

SRTT की स्थिति का असर पहले ही टाटा संस की AGM पर पड़ चुका है। 18 अगस्त की AGM टालनी पड़ी थी। वजह यह थी कि SRTT SDTT के साथ मिलकर AGM के लिए प्रतिनिधि नामित करने की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका था।

इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को AGM कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया। अब AGM की तारीख खुद इस पूरे विवाद में काफी अहम हो गई है।

वहीं श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने SDTT के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने टाटा संस के मामलों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर चिंता जताई है।

नोएल टाटा गुट का क्या कहना है?

नोएल टाटा, खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा ने इस रुख का विरोध किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट्स टाटा संस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लेने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, ट्रस्ट्स सिर्फ उन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उन्हें टाटा संस के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर होने के नाते मिले हैं। इस विवाद पर चैरिटी कमिश्नर ने SDTT से जवाब भी मांगा है।

66% हिस्सेदारी दिखती एकजुट, लेकिन है नहीं

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह सात अलग-अलग चैरिटेबल ट्रस्ट्स में बंटी हुई है। हर ट्रस्ट में ट्रस्टियों की संरचना भी अलग है।

नोएल टाटा और उनके तीन बच्चे नेविल, लिया और माया इन सात ट्रस्ट्स में कुल 36 में से 17 ट्रस्टी पदों पर हैं। लेकिन इस ताकत का बड़ा हिस्सा छोटे ट्रस्ट्स में है। असली वजन SDTT और SRTT के पास है।

इसलिए AGM में सभी ट्रस्ट्स का एक ही लाइन पर आना जरूरी नहीं है। हर ट्रस्ट को अपनी बैठक करके अपने वोट पर फैसला करना पड़ सकता है।

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टाटा ग्रुप की कंपनियों के वोट भी अहम

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा टाटा ग्रुप की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83% हिस्सेदारी है। इनमें सात लिस्टेड कंपनियां हैं। इन सात की कुल हिस्सेदारी 11.92% है। टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के पास 3.06-3.06% हिस्सेदारी है। टाटा केमिकल्स के पास 2.53% और टाटा पावर के पास 1.65% हिस्सेदारी है।

इंडियन होटल्स के पास 1.11%, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के पास 0.43% और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास 0.08% हिस्सेदारी है। इन कंपनियों के वोट को अभी किसी एक पक्ष के साथ जोड़ना मुश्किल है। हर कंपनी का अपना बोर्ड है। उसे अपनी हिस्सेदारी को लेकर अलग फैसला करना होगा।

चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों का असर

चंद्रशेखरन कई ऐसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं, जिनके पास टाटा संस में हिस्सेदारी है। इनमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं नोएल टाटा टाटा स्टील के वाइस चेयरमैन हैं। वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल के चेयरमैन भी हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां किसी एक व्यक्ति के पक्ष में वोट करेंगी। इन कंपनियों के बोर्ड को अपनी-अपनी हिस्सेदारी को लेकर फैसला करना होगा।

शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी बड़ा शेयरहोल्डर

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास भी टाटा संस की 18% से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए AGM में उसके वोट भी काफी अहम हो सकते हैं।

खासकर तब, जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर किसी एक रुख पर सहमति नहीं बनती है। ऐसी स्थिति में दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स की भूमिका बढ़ सकती है।

अब AGM की तारीख सबसे अहम

जब AGM होगी, तब तक टाटा ट्रस्ट्स की स्थिति कुछ बदल सकती है। खंबाटा का SDTT में कार्यकाल खत्म हो चुका होगा। वहीं दिसंबर में श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल भी खत्म होना है।

चैरिटी कमिश्नर की कार्रवाई भी दोनों बड़े ट्रस्ट्स की स्थिति पर असर डाल सकती है। दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड को अपनी हिस्सेदारी के वोट पर फैसला करना होगा।

इसलिए मामला अब सिर्फ चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का नहीं है। असली सवाल यह है कि AGM से पहले टाटा संस के शेयरहोल्डर्स के बीच ताकत का संतुलन किस तरफ जाता है।

यही वजह है कि AGM की तारीख बेहद अहम होगी। उस समय तक ट्रस्ट्स की संरचना, नियामकीय स्थिति और टाटा ग्रुप की कंपनियों के रुख में बदलाव इस वोट को पूरी तरह बदल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Anant Raj: हरियाणा में विदेशी कंपनियों का डेटा होस्ट करेगी कंपनी, ऑरेंज बिजनेस के साथ बड़ा समझौता

Anant Raj: अनंत राज लिमिटेड की सब्सिडियरी अनंत राज क्लाउड सिंगापुर और ऑरेंज बिजनेस सर्विसेज सिंगापुर ने हरियाणा सरकार के साथ समझौता किया है। इसका मकसद हरियाणा में विदेशी कंपनियों का डेटा होस्ट करने की संभावनाएं तलाशना है।

यह समझौता हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के जरिए हुआ है। इसके तहत हरियाणा में मौजूद क्लाउड और डेटा सेंटर सेवाओं को विदेशी ग्राहकों तक पहुंचाने पर भी काम होगा।

विदेशी ग्राहकों को जोड़ने का काम करेगी अनंत राज

अनंत राज क्लाउड सिंगापुर, कंपनी के क्लाउड प्लेटफॉर्म अशोक क्लाउड की मार्केटिंग करेगी। इसके साथ ही हरियाणा में मौजूद डेटा सेंटर सेवाओं को भी विदेशी ग्राहकों के सामने रखा जाएगा।

कंपनी ऐसे विदेशी ग्राहकों को जोड़ने में भी मदद करेगी, जो अपना डेटा हरियाणा में रखना चाहते हैं।

AI और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग पर भी फोकस

ऑरेंज बिजनेस डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं में टेक्नोलॉजी पार्टनर के तौर पर काम करने की संभावनाएं तलाशेगा।

इसमें AI और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। ऑरेंज बिजनेस टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर, क्लाउड और AI हार्डवेयर और तकनीकी विशेषज्ञता दे सकता है।

हरियाणा में 307 MW क्षमता बनाने की तैयारी

अनंत राज हरियाणा में डेटा सेंटर कारोबार तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के ग्रुप की कंपनियां मानेसर, पंचकूला और राय में करीब 307 MW IT लोड की क्षमता विकसित करने की योजना बना रही हैं।

यह निवेश चरणों में किया जाएगा। हालांकि, आगे का निवेश मांग और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल कंपनी मानेसर और पंचकूला में डेटा सेंटर चला रही है। इन दोनों जगहों पर क्षमता बढ़ाने का काम भी चल रहा है। कंपनी के मुताबिक, सोनीपत के राय कैंपस में करीब 200 MW IT लोड की संभावित क्षमता है।

डेटा सेंटर के लिए 25,000 करोड़ रुपये का निवेश

अनंत राज ने जून 2026 में हरियाणा सरकार के साथ एक और MoU किया था। यह समझौता ‘मेक इन हरियाणा’ कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसके तहत कंपनी ने राज्य में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।

हरियाणा सरकार ने भी डेटा सेंटर कारोबार को बढ़ावा देने के लिए डेटा सेंटर पॉलिसी 2026 शुरू की है। इसमें डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

2024 से चल रही है ऑरेंज बिजनेस के साथ साझेदारी

अनंत राज और ऑरेंज बिजनेस के बीच यह पहला समझौता नहीं है। दोनों कंपनियों की साझेदारी 2024 में शुरू हुई थी। तब दोनों ने भारत में मैनेज्ड क्लाउड सर्विसेज के लिए साझेदारी की थी। अब नया समझौता इसी साझेदारी को आगे बढ़ाता है।

7 अक्टूबर को अनंत राज लिमिटेड का शेयर 0.43% बढ़कर 611.50 रुपये पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कोलकाता में कांग्रेस का विशाल प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सड़कों पर उतर कर हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में बुधवार को एक विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, “यह रैली चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। हम चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार भी किया। मध्य कोलकाता में आयोजित इस महारैली में श्री सरकार ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और कांग्रेस के पोलिंग एजेंटों को बूथों से बाहर खदेड़ दिया गया।

प्रदर्शनकारी मध्य कोलकाता के बैंटिंक स्ट्रीट स्थित एक सिनेमा हॉल के पास एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित ‘लोक भवन’ की ओर बढ़े। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस बड़े प्रदर्शन के कारण शहर के केंद्रीय व्यावसायिक क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई।

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दिल्ली के सीमापुरी में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत, कई लोगों के दबे होने की आशंका

दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक गिर गई। ये हादसा ईदगाह मस्जिद के पास हुआ। इमारत गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस और फायर विभाग की टीम का बचाव काम जारी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत के मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका है। हादसे में घायल लोगों को एंबुलेंस की मदद से राजीव गांधी अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के करीब एक महीने बाद सामने आई है।

मलबे में अभी भी फंसे हैं कुछ लोग

दिल्ली फायर सर्विस को बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे सीमापुरी में इमारत गिरने की सूचना मिली। जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। फिलहाल रेस्क्यू टीम लोगों को बाहर निकालने में जुटी हुई है।

 

राहत और बचाव काम जारी

X पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पोस्ट में लिखा, “सीमापुरी में एक बहुमंजिला इमारत गिर गई है और रेस्क्यू टीम मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। सीमापुरी गोल चक्कर, DLF भोपुरा और आसपास की सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है। एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहनों को जल्दी निकलने देने के लिए हर लेन को खाली रखें। संभव हो तो इस इलाके में जाने से बचें। हादसे वाली जगह के पास न रुकें, न पार्किंग करें और न ही भीड़ इकट्ठा करें। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।”

प्रधानमंत्री मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में जेन-जी संवाद प्रस्तावित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 अक्टूबर को काशी में हजारों युवाओं के साथ जेन-जी संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) अथवा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित किए जाने की तैयारी है।

प्रस्तावित कार्यक्रम में 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 हजार युवाओं के शामिल होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जिला और महानगर इकाइयों के साथ ही क्षेत्रीय संगठन भी आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। काशी में 22, 24 और 25 अक्टूबर को भव्य एयर शो भी प्रस्तावित है।

नमो घाट पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है। एयर शो की तैयारियों के तहत नमो घाट पर छह बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया जा रहा है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत डोमरी में वॉच टावर भी बनाया जा रहा है।

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एसपीजी और एटीएस समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तैयारियों में जुटी हैं। प्रस्तावित एयर शो में सेना के विभिन्न प्रकार के विमान और एयरक्राफ्ट करीब 90 मिनट तक हवाई करतब प्रस्तुत करेंगे। गंगा के दोनों तटों से इस भव्य आयोजन को देखने के लिए करीब 30 लाख दर्शकों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को भीड़ के दबाव वाले संभावित स्थानों को चिह्नित कर विस्तृत क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस आयुक्त ने सभी प्रमुख घाटों और दर्शक स्थलों पर प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग मार्ग, बैरिकेडिंग, होल्डिंग एरिया, क्यू मैनेजमेंट तथा पैदल आवागमन के लिए निर्धारित मार्ग बनाने के निर्देश दिए हैं।

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