Petrol Diesel Price Today: देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का नया अपडेट, जानें कहां कितना है भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 09 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Market cues : 22000 के मनोवैज्ञानिक लेवल पर भी मंडरा रहा खतरा, 21700 तक फिसल सकता है निफ्टी

Trade setup for today : 8 अक्टूबर को निफ्टी पर मदड़ियों का दबदबा बना रहा। यह 1.64 प्रतिशत गिरा और लगातार एक और सेशन में इसमें गिरावट जारी रही। मोमेंटम इंडिकेटर ‘बेयरिश’ जोन में बने रहे। जबकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से काफी नीचे ट्रेड करता रहा। तेल की ऊंची कीमतें, रुपये में कमजोरी, FII की लगातार बिकवाली और इंडिया VIX का 15 के स्तर से ऊपर जाना भी मार्केट सेंटीमेंट पर भारी पड़ा। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी गुरुवार के 22,180 के निचले स्तर को साफ तौर पर तोड़ता है तो मंदड़िए 22,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को टारगेट कर सकते हैं और उसके बाद निफ्टी अप्रैल 2025 के निचले स्तर 21,700 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,22,400 एक शुरुआती रेजिस्टेंस बन सकता है और उसके बाद 22,600-22,700 का जोन बड़े रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,232) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस : 22,497, 22,596 और 22,756

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,177, 22,078 और 21,918

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 पिछले 18 महीनों के सबसे निचले क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया और डेली टाइमफ्रेम पर एक लंबी लाल कैंडल बनाई,जो बाजार में भारी गिरावट के दबाव का संकेत है। 10, 20, 50, 100 और 200-दिन के EMA सभी नीचे की ओर झुके हुए थे। RSI सुपर-बेयरिश जोन में बना रहा और 30 से गिरकर 27.55 पर आ गया, जबकि MACD सिग्नल लाइन के नीचे रहा और हिस्टोग्राम में एक बढ़ती हुई लाल पट्टी दिखाई दी। कुल मिलाकर ये संकेत लगातार मंदी के रुझान की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि इंडेक्स पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है।

बैंक निफ्टी (54,515) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 54,899, 55,055 और 55,307

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 54,395, 54,239 और 53,987

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 55,897, 57,285

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 54,053, 52,784

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

गुरुवार को 1 प्रतिशत की गिरावट के बाद बैंक निफ्टी पिछले हफ़्ते के क्लोजिंग लेवल के करीब आ गया। बैंकिंग इंडेक्स ने डेली चार्ट पर एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई और सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना रहा,जो लगातार बनी कमजोरी को दिखाता है। RSI गिरकर 40 के ज़ोन से नीचे 36.45 पर आ गया,जबकि MACD जो अपनी सिग्नल लाइन की ओर ऊपर की तरफ बढ़ रहा था,सिग्नल लाइन से नीचे ही बना रहा। हालांकि,MACD हिस्टोग्राम लगातार छठे सेशन में भी मंदी के रुझान (बेयरिश मोमेंटम) में कमी दिखाता रहा। कुल मिलाकर ये इंडिकेटर बताते हैं कि मंदी का दबाव बना हुआ है,भले ही यह दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा हो।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

मार्केट में संभावित उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX कल 10.01% बढ़कर 15.275 पर पहुंच गया। यह 11 जून, 2026 के बाद इसका सबसे ऊंचा क्लोजिंग लेवल है। यह सभी अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है, जो बुल्स के बीच बढ़ती बेचैनी का संकेत है। 15 के लेवल से ऊपर बने रहने पर बुल्स पर दबाव बना रह सकता है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 8 अक्टूबर को गिरकर 0.73 पर आ गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.89 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: अंबुजा सीमेंट्स, बंधन बैंक, LIC हाउसिंग फाइनेंस

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: SAIL

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सोने की चमक फीकी, 24 और 22 कैरेट का इतना रह गया भाव

9 अक्टूबर को देश में सोने में गिरावट है। सुबह के वक्त कई शहरों में भाव नीचे आया है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड फिसलकर 149690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,600 रुपये बढ़ी। इसकी वजह रही- फेस्टिव सीजन से पहले आभूषण विक्रेताओं और खुदरा कारोबारियों की ओर से मांग बढ़ना। त्योहारों से पहले ज्वेलरी की मांग बढ़ने की उम्मीद में विक्रेता आमतौर पर कच्चे माल के रूप में सोने की खरीद बढ़ा देते हैं।

सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने में तेजी का रुख है। कीमत 4,147.77 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 149690 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137240 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 137090 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 149560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 149560 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 137090 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 149560 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 137090 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली137240149690
मुंबई137090149560
अहमदाबाद137140149590
चेन्नई137090149560
कोलकाता137090149560
हैदराबाद137090149560
जयपुर137240149690
भोपाल137140149590
लखनऊ137240149690
चंडीगढ़137240149690

SIP Calculator: बच्चे के जन्म पर ₹2000 की SIP, 18 साल बाद कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

चांदी का भाव

दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में भी गिरावट है। 9 अक्टूबर की सुबह चांदी देश में 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। इस साल जनवरी में चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 59.62 डॉलर प्रति औंस है।

SIP Calculator: बच्चे के जन्म पर ₹2000 की SIP, 18 साल बाद कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: बच्चे के जन्म के साथ ही माता-पिता के सामने एक लंबी लिस्ट आ जाती है। पढ़ाई, कॉलेज, करियर और आगे की जरूरतें। इनमें से ज्यादातर खर्च आज छोटे लगते हैं, लेकिन 15-18 साल बाद इनकी रकम काफी बड़ी हो सकती है। ऐसे में छोटी उम्र से निवेश शुरू करना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

मान लीजिए बच्चे के जन्म के साथ ही उसके नाम से हर महीने 2,000 रुपये की SIP शुरू की गई। रकम बहुत बड़ी नहीं है। परिवार के मासिक बजट पर भी इसका बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। लेकिन 18 साल का समय इस छोटी रकम को अच्छी-खासी पूंजी में बदल सकता है।

10% रिटर्न मिला तो करीब 11.5 लाख रुपये

अगर इस SIP से लंबी अवधि में औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 18 साल बाद करीब 11.53 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है। यानी 4.32 लाख रुपये आपका लगाया हुआ पैसा होगा, जबकि करीब 7.21 लाख रुपये रिटर्न से बनेंगे। यहां समय सबसे बड़ा फैक्टर है। निवेश की अवधि 18 साल होने की वजह से रिटर्न पर भी आगे रिटर्न मिलता रहता है।

12% रिटर्न पर रकम 14 लाख के पार

अब अगर लंबी अवधि में औसत रिटर्न 12% सालाना रहा, तो तस्वीर और मजबूत हो जाती है। 2,000 रुपये की यही मंथली SIP 18 साल बाद करीब 14.23 लाख रुपये का फंड बना सकती है। इसमें भी कुल योगदान सिर्फ 4.32 लाख रुपये रहेगा। करीब 9.91 लाख रुपये की रकम निवेश से मिलने वाले रिटर्न से बनेगी।

15% रिटर्न मिला तो करीब 20 लाख रुपये

सबसे तेज तस्वीर तब बनती है जब निवेश पर औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसी स्थिति में 2,000 रुपये की SIP 18 साल बाद करीब 19.65 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यहां कुल निवेश वही 4.32 लाख रुपये है। लेकिन रिटर्न करीब 15.33 लाख रुपये हो जाता है। यही वह जगह है जहां कंपाउंडिंग का असर साफ दिखाई देता है। निवेश की रकम छोटी है, लेकिन समय लंबा होने के कारण रिटर्न को भी बढ़ने के लिए पर्याप्त वक्त मिलता है।

18 साल बाद कितना पैसा?

रिटर्नकुल निवेश18 साल बाद फंडमुनाफा
10%₹4.32 लाख₹11.53 लाख₹7.21 लाख
12%₹4.32 लाख₹14.23 लाख₹9.91 लाख
15%₹4.32 लाख₹19.65 लाख₹15.33 लाख

नोट: 10%, 12% और 15% सिर्फ संभावित रिटर्न हैं। असल रिटर्न बाजार के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।

सिर्फ 2,000 रुपये पर रुकना जरूरी नहीं

2,000 रुपये की SIP को शुरुआत मान सकते हैं। जैसे-जैसे परिवार की आय बढ़े, SIP की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। मान लीजिए कुछ साल बाद मासिक SIP 2,000 से बढ़ाकर 3,000 या 5,000 रुपये कर दी जाती है। तब 18 साल के अंत में बनने वाला फंड काफी बड़ा हो सकता है।

इसे स्टेप-अप SIP के जरिए भी प्लान किया जा सकता है, जिसमें आमदनी बढ़ने के साथ निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। इसका फायदा यह है कि शुरुआत में परिवार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। और बाद में बढ़ती आय के साथ बच्चे का फाइनेंशियल लक्ष्य भी बड़ा किया जा सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया:8 आईटी कंपनियों के खिलाफ एक्शन, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर सीधा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें चार भारतीय कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल भी शामिल हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी एक्शन लिया गया है। अब ये सभी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के लिए एप्लीकेशन नहीं दे पाएंगी। इसके तहत कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करती है। इस फैसले के बाद ट्रम्प सरकार ने कहा कि हम अमेरिकियों की नौकरियां छीनकर विदेशियों को नौकरी पर नहीं रख सकते। फैसले के बाद इन कंपनियों के जरिए अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश कर रहे हजारों भारतीय कर्मचारियों की प्रॉसेस रुक सकती है। सवाल- इन कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? जवाब- अमेरिकी श्रम विभाग ने इन कंपनियों को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से सस्पेंड किया है। अब इन कंपनियों के नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जो आवेदन पहले से चल रहे हैं, उनकी प्रक्रिया भी रोक दी गई है। सवाल- PERM क्या होता है? जवाब- अमेरिका में किसी विदेशी कर्मचारी को नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड दिलाने के लिए कंपनी को पहले यह साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया को PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कहा जाता है। सवाल- इसका ग्रीन कार्ड से क्या संबंध है? जवाब- PERM ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक जरूरी कदम है। अगर यह प्रक्रिया रुक जाती है तो कंपनी अपने कर्मचारी के ग्रीन कार्ड की आगे की प्रक्रिया भी नहीं बढ़ा पाती। सवाल- क्या भारतीय कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड रद्द हो गया? जवाब- नहीं। जिन लोगों को पहले ही ग्रीन कार्ड मिल चुका है, उन पर इस फैसले का असर नहीं है। इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है जिनका ग्रीन कार्ड प्रोसेस चल रही है या जो जल्द इसके लिए आवेदन करने वाले थे। सवाल- भारतीय कर्मचारियों पर असर क्यों पड़ेगा? जवाब- टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी कर्मचारी अमेरिका में काम करते हैं। इनमें कई कर्मचारी H-1B वीजा पर हैं और आगे चलकर अपनी कंपनी की मदद से ग्रीन कार्ड पाने की कोशिश करते हैं। अब PERM प्रक्रिया रुकने से उनके ग्रीन कार्ड में देरी हो सकती है। सवाल- क्या H-1B वीजा भी रद्द होगा? जवाब- नहीं। H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड अलग हैं। H-1B वीजा विदेशी कर्मचारी को कुछ समय के लिए अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति देता है। वहीं ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। इसलिए PERM पर रोक लगने से H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होगा। सवाल- जिनके पास पहले से ग्रीन कार्ड है, उनका क्या होगा? जवाब- उनका ग्रीन कार्ड रद्द नहीं होगा। इस फैसले का असर उन लोगों पर है जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सवाल- अमेरिका ने यह कार्रवाई क्यों की? जवाब- अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए इमिग्रेशन नियमों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। उनके मुताबिक, 2009 से इन 8 कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए। इस दौरान उन्हें 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा और 1 लाख से ज्यादा PERM मंजूरियां मिलीं। सोंडरलिंग का दावा है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हुईं। हालांकि, कंपनियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अंतिम रूप से साबित नहीं हुए हैं। सवाल- जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर क्या आरोप लगाया? जवाब- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, जबकि कंपनी को करीब 6,300 H-1B वीजा और 3,000 ग्रीन कार्ड मिले। वेंस का आरोप है कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए इमिग्रेशन नियमों का इस्तेमाल कर रही हैं। सवाल- क्या सभी भारतीय आईटी कर्मचारियों पर असर पड़ेगा? जवाब- नहीं। इसका असर खास तौर पर उन भारतीय कर्मचारियों पर पड़ेगा जिनका ग्रीन कार्ड प्रोसेस इन 8 कंपनियों के जरिए चल रहा है या जो इसके लिए आवेदन करने वाले हैं। सिर्फ H-1B वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों का वीजा इस फैसले से अपने आप रद्द नहीं होगा। सवाल- कितने भारतीय प्रभावित होंगे? जवाब- अमेरिकी सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि कितने भारतीय कर्मचारी प्रभावित होंगे। यह भी साफ नहीं है कि रोक कितने समय तक रहेगी। हालांकि, टाटा, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के शामिल होने से बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है। सवाल- अब आगे क्या होगा? जवाब- फिलहाल इन कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और पुराने लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रुकी रहेगी। अब इन कंपनियों के कर्मचारियों का ग्रीन कार्ड प्रोसेस कब शुरू होगा, यह अमेरिकी सरकार के अगले फैसले पर निर्भर करेगा।

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS और इंफोसिस समेत कई टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इन कंपनियों को एक इमिग्रेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने वर्कर वीजा सिस्टम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को वॉशिंगटन में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से अमेरिका में किसी कंपनी ने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा गलत इस्तेमाल नहीं किया है।

Infosys, Wipro और HCL भी कार्रवाई के दायरे में

अमेरिकी श्रम सचिव Keith Sonderling ने बताया कि Microsoft के अलावा कई दूसरी टेक कंपनियों पर भी कार्रवाई हुई है। इनमें Cognizant Technology Solutions, Infosys, TCS, Wipro, HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं।

Sonderling ने कहा कि इस मामले में कई संघीय जांच चल रही हैं। जिस प्रोग्राम पर कार्रवाई हुई है, वह अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने में मदद करता है।

ट्रंप प्रशासन क्यों सख्त हुआ?

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इमिग्रेशन सिस्टम पर सख्ती की बात करता रहा है। अब कानूनी और गैर-कानूनी दोनों रास्तों से होने वाले प्रवासन पर कार्रवाई बढ़ाई जा रही है।

H-1B वीजा प्रोग्राम भी लंबे समय से ट्रंप के समर्थकों के निशाने पर है। उनका कहना है कि इस प्रोग्राम से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।

ट्रंप समर्थक यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि H-1B सिस्टम में बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल होता है। इसी वजह से यह प्रोग्राम अमेरिकी इमिग्रेशन पॉलिसी की बहस में लगातार बना हुआ है।

कंपनियों के लिए क्या मतलब है?

इस फैसले से सबसे बड़ी चिंता विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में लंबे समय तक रखने की प्रक्रिया को लेकर है। ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरिंग पर असर पड़ने से कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों की लॉन्ग टर्म प्लानिंग मुश्किल हो सकती है।

इसका असर खासकर उन भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका अमेरिकी कारोबार बड़ा है और जो बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को अमेरिका में भेजती हैं। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक वित्तीय असर कितना होगा, यह आगे होने वाली संघीय जांच और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

BPSC 72nd CCE Prelims 2026: 25 अक्टूबर को होने वाली 72वीं सीसीई प्रीलिम्स फिर टली, आयोग जल्द करेगा नई तारीख की घोषणा

BPSC 72nd CCE Prelims 2026: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 72वीं कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (CCE) प्रीलिमिनरी परीक्षा को टाल दिया है। 25 अक्टूबर, 2026 को होनी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा को फिर से स्थगित कर दिया गया है और आयोग ने अभी तक नई तारीख की घोषणा नहीं की है। बीपीएससी की वेबसाइट पर परीक्षा रद्द करने के बारे में एक नोटिस भी जारी किया गया है। 72वीं बीपीएससी सीसीई प्री परीक्षा पहले जुलाई में होने वाली थी।

जुलाई में प्रस्तावित परीक्षा को पोस्टपोन करने के बाद आयोग ने परीक्षा को दूसरी बार रद्द किया है। बाद में अपने संशोधित परीक्षा कैलेंडर में 25 अक्टूबर को टेंटेटिव तारीख के तौर पर शामिल किया था। परीक्षा 25 अक्टूबर को होने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा खबरों के मुताबिक, परीक्षार्थियों को अब नए शेड्यूल का इंतजार करना होगा। जो कैंडिडेट्स 25 अक्टूबर की टाइमलाइन के हिसाब से तैयारी कर रहे थे, उन्हें अब आयोग द्वारा संशोधित तारीख की घोषणा का इंतजार करना होगा।

बीपीएससी 72वीं सीसीई की नई तारीख घोषित नहीं हुई

बीपीएससी ने अभी तक 72वीं सीसीई प्री परीक्षा की नई तारीख की घोषणा नहीं की है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने एग्जाम प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले आयोग के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करें। आयोग के परीक्षा कैलेंडर में पहले 72वीं इंटीग्रेटेड सीसीई प्री परीक्षा की तारीख 25 अक्टूबर बताई गई थी और साफ तौर पर बताया गया था कि कैलेंडर में तारीखें टेंटेटिव हैं। बदली हुई एग्जाम की तारीख, एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़े दूसरे निर्देश की जानकारी बाद में आधिकारिक नोटिस के जरिए जारी होने की उम्मीद है।

आधिकारिक वेबसाइट देखें परीक्षार्थी

उम्मीदवारों को 72वीं सीसीई प्री परीक्षा के बारे में ताजा अधिसूचना के लिए नियमित तौर पर आधिकारिक बीपीएससी वेबसाइट देखनी चाहिए। जब तक आयोग ऑफिशियली बदले हुए शेड्यूल की पुष्टि नहीं कर देता, तब तक कैंडिडेट्स को सोशल मीडिया या दूसरे अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर चल रही बिना सत्यापित तारीखों पर भरोसा करने से भी बचना चाहिए।

बीपीएससी 72वीं सीसीई भर्ती विवरण

बिहार में अलग-अलग सरकारी पदों पर भर्ती के लिए 72वीं सीसीई परीक्षा होती है। बीपीएससी परीक्षा कैलेंडर में 72वीं सीसीई के लिए 1,189 वैकेंसी लिस्ट की गई हैं। चयन प्रक्रिया में आमतौर पर पद और भर्ती नियमों के आधार पर प्री परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू होता है। जो उम्मीदवार प्री परीक्षा में सफल होंगे, वे चयन प्रक्रिया के अगले चरण में जाने के लिए योग्य होंगे।

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हूती मिसाइल ने रियाद एयरपोर्ट को बनाया निशाना, Air India Express और Akasa Air ने रद्द की उड़ानें

रियाद एयरपोर्ट के आसपास हुए धमाकों के बाद सऊदी अरब की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए Air India Express और Akasa Air ने गुरुवार को रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दीं। इससे यात्रियों की यात्रा पर भी असर पड़ा है।

उड़ानें रद्द किए जाने के पीछे यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का एक दावा भी सामने आया है। हूती विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया था।

इस बीच, हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने राजधानी की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया है। हालांकि, हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए इस दावे की तत्काल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Air India Express ने रियाद की उड़ानें रोकीं

रियाद में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच Air India Express ने 10 अक्टूबर तक रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयरलाइन ने इसके पीछे क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति को वजह बताया है।

एयरलाइन ने कहा कि उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को मुफ़्त में यात्रा की तारीख बदलने (रीशेड्यूलिंग) या बुकिंग रद्द करने पर पूरा रिफंड पाने का विकल्प दिया जाएगा।

बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सुरक्षा से जुड़ी ताजा घटना के बाद किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान सेवाओं में फिर से रुकावट आई है।

आकासा एयर ने कोच्चि-रियाद सेवाएं रद्द कीं

आकासा एयर ने 8 अक्टूबर को होने वाली अपनी QP 523 कोच्चि-रियाद और QP 524 रियाद-कोच्चि फ्लाइट्स भी रद्द कर दीं।

एयरलाइन ने कहा कि फ्लाइट रद्द होने से प्रभावित यात्री या तो पूरा रिफंड ले सकते हैं या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपनी यात्रा का समय बदल सकते हैं।

आकासा एयर ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आगे किसी भी बदलाव के बारे में यात्रियों को जानकारी देगी। उसने यह भी कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा और भलाई उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

रियाद एयरपोर्ट ने यात्रियों को फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी

किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यात्रियों से कहा है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।

यह सलाह गुरुवार को रियाद में कई धमाकों की आवाज सुनाई देने और एयरपोर्ट के पास एक बड़े धमाके की खबर के बाद जारी की गई। एक चश्मदीद ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि फ्लाइट्स रोक दी गईं और यात्रियों से एयरपोर्ट से बाहर निकलने को कहा गया।

एयरपोर्ट ने ‘X’ पर एक बयान में कहा: “हम यात्रियों को बताना चाहते हैं कि एयरपोर्ट आने से पहले वे सीधे अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।”

हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया

हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उनके ग्रुप ने दोपहर के समय किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया और दावा किया कि मिसाइल “अपने निशाने पर लगी”।

हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी सेना ने रियाद की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, सऊदी अधिकारियों ने तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं की कि हूती मिसाइल एयरपोर्ट से टकराई है।

यह ताजा घटना इस हफ्ते सऊदी एयरपोर्ट्स पर हुए हूती हमलों की कड़ी में एक और घटना है। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए।

रियाद एयरपोर्ट पर पहले से ही उड़ानें प्रभावित

ताजा हमले ने किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले से चल रही दिक्कतों को और बढ़ा दिया है। ‘द नेशनल’ के मुताबिक, गुरुवार को दर्जनों उड़ानों पर असर पड़ा। एक समय पर 58 उड़ानें देर से चलीं और 11 उड़ानें रद्द कर दी गईं।

इस स्थिति ने सऊदी एयरस्पेस से गुजरने वाली इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए भी बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि हूती और सऊदी-नेतृत्व वाली सेनाओं के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।

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CBI ने बैंकिंग भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का किया भंडाफोड़, CGST इंस्पेक्टर समेत 4 गिरफ्तार

CBI Banking Exam Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देशभर में बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा और अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों के परीक्षा देने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सीबीआई ने दिल्ली (Delhi), बिहार (Bihar), हरियाणा (Haryana) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सक्रिय इस नेटवर्क के चार प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों में एक CGST इंस्पेक्टर भी शामिल है

CBI के मुताबिक, यह कार्रवाई इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सेलेक्शन (IBPS) की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर की गई। मामले की जांच CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच, मुंबई कर रही है।

कई राज्यों में एक साथ छापेमारी

CBI की स्पेशल टास्क ब्रांच ने दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में समन्वित तरीके से कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गिरोह के चार प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।जांच में सामने आया है कि आरोपी बैंकिंग भर्ती की चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में असल उम्मीदवारों की जगह खुद परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल होते थे। आरोपी शारीरिक रूप से अभ्यर्थियों की जगह उपस्थित होकर चयन प्रक्रिया में धोखाधड़ी करते थे।

मेहनती अभ्यर्थियों के हक पर डाका

CBI के अनुसार, इस गिरोह की गतिविधियों से सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई। फर्जी तरीके से चयन प्रक्रिया में शामिल होकर आरोपियों ने उन वास्तविक और मेहनती अभ्यर्थियों के अवसरों को प्रभावित किया, जो अपनी योग्यता के आधार पर भर्ती हासिल करने की तैयारी कर रहे थे। इस मामले में सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। रैकेट में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम

GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े प्रोसेस सुधारों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST को समझना और उसका पालन करना आसान बनाना है। साथ ही रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और टैक्स अधिकारियों का फिजिकल इंटरवेंशन कम किया जाएगा।

ये बदलाव GST के दो-दर वाले स्ट्रक्चर लागू होने के करीब एक साल बाद किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़कर हर महीने 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है। पहले यह 40.19 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, कंज्यूमर्स को रिपोर्ट की गई सप्लाई 26.7% बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

इस दौरान घरेलू सप्लाई पर प्रभावी टैक्स रेट भी घटा है। यह 14.55% से कम होकर 13.13% रह गया है। अब Council का फोकस टैक्स रेट से हटकर GST के रोजमर्रा के कामकाज पर है। इसमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, मुकदमे और टैक्स कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।

GST रिफंड अब तेजी से मिलेगा

सबसे बड़ा बदलाव रिफंड की प्रक्रिया में किया गया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। अगर 10 दिन के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट जारी होता है और न ही डेफिशिएंसी मेमो, तो क्लेम को अपने आप एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।

अब सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर रिफंड क्लेम की 90% रकम को मंजूर करेगा। इसमें अधिकारी की भूमिका कम होगी। एक्नॉलेजमेंट के तीन वर्किंग डे के भीतर रिफंड ऑर्डर जारी करना होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय है।

कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। इसमें अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा खासकर एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है। करीब 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट से जुड़े हैं, जबकि 19% क्लेम कैश लेजर में पहले से पड़े बैलेंस से जुड़े हैं।

GST रजिस्ट्रेशन भी ज्यादा ऑटोमैटिक होगा

GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को भी और ऑटोमैटिक करने का प्रस्ताव है। अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की मंजूरी के सिस्टम के जरिए तीन वर्किंग डे में रजिस्ट्रेशन मिल सकता है। कुल रजिस्ट्रेशन में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 61% है।

रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी बदला जाएगा। इसमें आवेदक को वही फील्ड दिखाई जाएंगी, जो उसके लिए जरूरी हैं। साथ ही, मांगे जा रहे दस्तावेजों का मकसद भी बताया जाएगा। इससे आवेदन भरने की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।

ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर और कारोबार की अतिरिक्त जगहों में बदलाव जैसे कई सामान्य संशोधन अपने आप मंजूर किए जाएंगे। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दाखिल 16.73 लाख रजिस्ट्रेशन अमेंडमेंट एप्लिकेशन में से 65.45% इन्हीं कैटेगरी से जुड़े थे।

Input Tax Credit में कारोबारियों को राहत

Council ने कई क्षेत्रों में Input Tax Credit यानी ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC मिल सकेगा। फैक्ट्री के बाहर लगे टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर भी इसका फायदा मिलेगा।

एक्सपायरी के कारण खराब स्टॉक पर भी ITC मिलेगा, अगर कानून के तहत उस सामान को नष्ट करना जरूरी है। फ्री सैंपल पर भी ITC उपलब्ध होगा। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके कारोबार में ऐसे खर्च नियमित रूप से होते हैं।

सरकार ने कुछ B2B सर्विस चेन में डबल टैक्सेशन रोकने की भी पहल की है। एजेंट के जरिए बुक किए गए 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर टैक्स दो बार लेने के बजाय एक बार ही लिया जाएगा।

इनवर्टेड ड्यूटी में ITC रिफंड का दायरा बढ़ेगा

मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी रिफंड सिर्फ गुड्स इनपुट तक सीमित है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर इनपुट सर्विसेज को भी रिफंड में शामिल किया जाएगा।

प्लांट और मशीनरी को रिफंड से बाहर रखने का नियम भी हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर प्लांट और मशीनरी के रिफंड की गणना हर महीने क्रेडिट के 1/60वें हिस्से के आधार पर होगी। यह अवधि उस एसेट की वर्किंग लाइफ से जुड़ी होगी।

इस बदलाव से फार्मा और FMCG जैसे सेक्टरों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण ITC लंबे समय तक फंसा रहता है, वहां रिफंड का दायरा बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिल सकती है।

छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न का विकल्प

काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ कंज्यूमर्स को सामान या सर्विस बेचने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत ऐसे कारोबारी साल में सिर्फ एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करना होगा।

सरकार के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव टैक्सपेयर्स में से 16.85 लाख सिर्फ कंज्यूमर सप्लाई रिपोर्ट करते हैं। इनमें 99% का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है। ये सभी मिलकर GST की कुल रिपोर्टेड देनदारी का 1% से भी कम हिस्सा रखते हैं।

इस स्कीम का पूरा फ्रेमवर्क और जरूरी कानूनी बदलाव अगली GST काउंसिल बैठक में देखे जाएंगे। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। इसके लागू होने से पहले इसके नियम और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

रास्ते में माल की जांच भी कम होगी

माल लेकर जा रहे वाहनों की फिजिकल जांच को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित हैं। किसी वाहन को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ कोई खास इंटेलिजेंस या सूचना हो। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से मंजूरी जरूरी होगी।

किसी गाड़ी में जा रहे माल की जांच सिर्फ सोर्स स्टेट और डेस्टिनेशन स्टेट कर सकेंगे। रास्ते में पड़ने वाले दूसरे राज्यों को वाहन रोकने की अनुमति नहीं होगी। इससे कारोबारियों को रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से राहत मिल सकती है।

यानी अगर कोई कंसाइनमेंट पांच राज्यों से होकर गुजरता है, तो अभी हर राज्य में उसकी जांच हो सकती है। नए सिस्टम में फिजिकल चेकिंग सिर्फ शुरुआत और अंतिम राज्य तक सीमित रहेगी। इससे सामान की आवाजाही में समय भी बच सकता है।

GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म होगी

GST से जुड़े प्रवर्तन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है। किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जाएगा।

इसके बाद जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा। जहां कोई खास पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी।

सरकार का कहना है कि अब GST सिस्टम खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान कर सकता है। इससे फर्जी ITC को उसी जगह के करीब पकड़ा जा सकता है, जहां वह बनाया जाता है। इसी वजह से सिस्टम में ज्यादा ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है।

सर्विस एक्सपोर्टर्स को भी फायदा

GST काउंसिल ने सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी विदेशी ब्रांच के जरिए किसी विदेशी ग्राहक को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके लिए मौजूदा कानूनी शर्त हटाई जाएगी।

इससे एनालिटिक्स कंपनियों, डिजाइन स्टूडियो, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और भारत से काम करने वाले ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस को फायदा हो सकता है। ऐसे कारोबारों के लिए विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस को एक्सपोर्ट मानने का रास्ता आसान होगा।

अगर किसी विदेशी ग्राहक के सामान पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग का काम किया जाता है, तो वह भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि वह सामान भारत से बाहर जाए।

ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए रास्ता आसान

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में कारोबार की जगह दर्ज करना आसान हो सकता है। प्रस्ताव के तहत कोई विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस घोषित कर सकेगा।

इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी सिस्टम के जरिए अपने आप दी जाएगी। हालांकि, विक्रेता की कम से कम एक राज्य में फिजिकल मौजूदगी बनी रहनी चाहिए। यही उसका होम स्टेट होगा।

यह रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक सीमित रहेगा। काउंसिल अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल में टैक्सेशन को भी एक जैसा करना चाहती है। यानी टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तव में कौन-सी सर्विस दी गई है, न कि प्लेटफॉर्म ने कॉन्ट्रैक्ट किस तरह बनाया है।

इस बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं

57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। आगे से GST रेट से जुड़े मामलों पर साल में एक बार अलग बैठक में चर्चा होगी। यह बैठक सिर्फ रेट से जुड़े मुद्दों के लिए होगी।

इस बार काउंसिल का फोकस पिछले साल के GST 2.0 बदलावों के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं को दूर करने पर रहा। यानी इस बैठक में टैक्स रेट बदलने के बजाय GST के रोजमर्रा के सिस्टम को आसान बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया।

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