Rajpal Yadav: राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से फटकार! पुश्तैनी संपत्ति बेचकर चुकाना होगा करोड़ों का कर्ज, अभिनेता का प्रस्ताव स्वीकार

Rajpal Yadav cheque bounce case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। चेक बाउंस मामले में बकाया रकम चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पुश्तैनी संपत्ति बेचने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने तत्काल ₹2 करोड़ जमा कराने की व्यवस्था पर भी गौर किया। शीर्ष अदालत ने चेक बाउंस के मामले में तत्काल 1.15 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया। इसके बाद राजपाल यादव ने कोर्ट में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा किया। इस दौरान राजपाल यादव के वकील ने कहा कि 85 लाख रुपए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर देंगे। कोर्ट ने 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यादव ने 2010 में एक फिल्म के लिए उन्हें दी गई पांच करोड़ रुपये की वित्तीय मदद के निपटारे के लिए 2013 में 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे। कंपनी ने आरोप लगाया कि उक्त चेक बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौते में यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई थी। शीर्ष अदालत ने 15 सितंबर को यादव को आत्मसमर्पण करने से मिली छूट को पांच अक्टूबर तक बढ़ा दिया था।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राजपाल यादव की याचिका पर सुनवाई की। यह मामला उनकी 2012 की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े लोन और चेक बाउंस का है। राजपाल यादव और उनकी पत्नी को फिल्म के लिए निजी कंपनी ‘मुरली प्रोजेक्ट्स (Murli Projects)’ प्राइवेट लिमिटेड से करीब ₹5 करोड़ मिले थे। फिल्म तय समय पर पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई समझौते हुए। इसी दौरान दिए गए सुरक्षा चेक बाद में विवाद की वजह बन गए।

₹2 करोड़ अभी देने की तैयारी

‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से बताया गया कि उनके पास ₹1.15 करोड़ की डिमांड ड्राफ्ट तैयार है। वहीं, उनकी पुश्तैनी संपत्ति के संभावित खरीदार ने ₹85 लाख देने की बात कही है। इस तरह तत्काल ₹2 करोड़ का भुगतान करने की व्यवस्था बताई गई। राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुश्तैनी संपत्ति की कीमत ₹30 करोड़ से ज्यादा है। खरीदार भुगतान करने में सक्षम है। हालांकि, पितृ पक्ष के कारण फिलहाल संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।

कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राजपाल यादव की देनदारी ₹2 करोड़ से कहीं ज्यादा है। शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि यदि अभी ₹2 करोड़ मिल जाते हैं तो बाकी रकम चुकाने के लिए तीन महीने का समय दिया जा सकता है। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने राजपाल यादव के अब तक के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कोर्ट उनकी नीयत या मामले के गुण-दोष से प्रभावित नहीं है। यहां राहत सिर्फ इसलिए दी जा रही है ताकि शिकायतकर्ता को उसका पैसा वापस मिल सके। कोर्ट ने यह तक चेतावनी दी कि राजपाल यादव की तीन महीने की सजा बढ़ाकर दो साल तक की जा सकती है।

कब हुई थी सजा?

मई 2024 में सेशन कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाई। लेकिन भुगतान को लेकर कई बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद रकम जमा न होने पर मामला फिर बिगड़ गया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था। राजपाल यादव ने 5 फरवरी को सरेंडर किया और बाद में ₹1.5 करोड़ जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिली। इसके बावजूद बाकी रकम का भुगतान न होने पर हाईकोर्ट ने उन्हें तीन महीने की कैद की सजा सुनाई। अब इसी आदेश को राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद होगी।

‘आपकी जगह जेल में है’

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट पांच अक्तूबर को चेक बाउंस के लंबे समय से जारी कई मामलों में राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई थी। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 15 सितंबर को यादव को दो सप्ताह का आखिरी मौका देते हुए निजी कंपनी को बकाया रकम चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव देने और शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में दो करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। सोमवार को अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि दो सप्ताह की अवधि खत्म होने के बावजूद पांच अक्टूबर तक कोई भुगतान नहीं किया गया है।

सुनवाई के दौरान यादव के वकील ने कहा, “वे (शिकायतकर्ता) गरीब नहीं हैं।” इस पर जस्टिस बागची नाराज हो गए और कहा, “हो सकता है कि वे आपसे अधिक अमीर हों, लेकिन आपने रकम उनसे हड़पी है… इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।” पीठ ने कहा कि वह यादव की अपील खारिज कर सकती है। लेकिन ऐसा करने से शिकायतकर्ता के लिए रकम वसूलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इसलिए वह ऐसा करने से हिचक रही है।

पीठ ने कहा कि यादव को सोमवार तक भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया। यादव के वकील ने 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की एक प्रति पेश की और कहा कि बैंक में ड्राफ्ट की प्रक्रिया जारी है। पीठ ने कहा, “यह असली है या नहीं? हमें नहीं पता।” वकील ने जब कहा कि डिमांड ड्राफ्ट बैंक के पास है। उसकी प्रक्रिया जारी है, तो शिकायतकर्ता के वकील ने अभिनेता पर अदालत के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं करने का आरोप लगाया।

Haiwaan Movie Review: साइकोलॉजिकल थ्रिलर का नया अंदाज पेश करती है अक्षय कुमार-सैफ अली खान की फिल्म ‘हैवान’

फिल्म: हैवान

डायरेक्टर: प्रियदर्शन

कास्ट: सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, ​​श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, ​​शारिब हाशमी

रेटिंग: 4/5

Haiwaan Movie Review: साइकोलॉजिकल थ्रिलर की कहानी कहने का एक नया दौर शुरू हो रहा है, जहां डर सिर्फ खून-खराबे या बड़े ट्विस्ट से नहीं, बल्कि दिमाग और इंस्टिंक्ट के खेल से पैदा होगा। प्रियदर्शन की ‘हैवान’ इसी बदलते अंदाज की तरफ एक दिलचस्प कदम है। मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ से कहानी का बेस लेने के बावजूद फिल्म सिर्फ रीमेक बनकर नहीं रह जाती, बल्कि अपने ट्रीटमेंट और किरदारों के जरिए इसे नया एहसास देती है। अक्षय कुमार का खतरनाक परशुराम और सैफ अली खान का नेत्रहीन श्याम जब आमने-सामने आते हैं, तो मुकाबला ताकत का नहीं, बल्कि सोच, सुनने और सर्वाइवल का बन जाता है। यही बात ‘हैवान’ को आज की बाकी थ्रिलर्स से अलग करती है और फिल्म शुरू होते ही कई सवाल छोड़ देती है।

पुरानी कहानी, नया अंदाज

‘ओप्पम’ से निकली ‘हैवान’ की कहानी भले ही नई नहीं है, लेकिन इसका हिंदी ट्रीटमेंट इसे फ्रेश बनाता है। आजकल की कई थ्रिलर्स जहां हर कुछ मिनट में ट्विस्ट परोसने की कोशिश करती हैं, ‘हैवान’ थोड़ा ठहरकर कहानी को खोलती है। फिल्म आपको सबकुछ बताने के बजाय इतना दिखाती है कि आप खुद आगे का अंदाजा लगाने लगें।

अक्षय का सबसे अलग विलन रोल

अक्षय कुमार का किरदार परशुराम उनकी आम हीरो वाली इमेज से बिल्कुल उलट है। वह चीखता नहीं, ज्यादा एक्सप्रेशन नहीं देता, लेकिन स्क्रीन पर आते ही माहौल बदल जाता है। उनकी खामोशी और कंट्रोल्ड बॉडी लैंग्वेज इस विलन को अलग बनाती है। हाल की फिल्मों में अक्षय को एक्शन हीरो के तौर पर देखने के बाद उन्हें इस तरह के डार्क रोल में देखना निश्चित तौर पर दिलचस्प है।

सैफ का सर्वाइवल गेम

सैफ अली खान का श्याम कहानी को दूसरी ताकत देता है। वह देख नहीं सकता, लेकिन उसकी सुनने की क्षमता और इंस्टिंक्ट उसे हर पल अलर्ट रखते हैं। फिल्म की दिलचस्पी यहीं बढ़ती है कि दर्शक भी कई बार श्याम की तरह सिर्फ आवाज और आहट के भरोसे सीन को समझने की कोशिश करता है। अक्षय का परशुराम जहां खतरा है, वहीं श्याम उस खतरे को महसूस करने वाला किरदार है।

थ्रिलर में क्या है अलग?

‘हैवान’ को ‘अंधाधुन’, ‘फ्रेडी’ या हाल की साइकोलॉजिकल थ्रिलर्स की लाइन में रख सकते हैं, लेकिन इसका गेम थोड़ा अलग है। यहां सिर्फ यह सवाल नहीं है कि अगला ट्विस्ट क्या होगा, बल्कि यह भी है कि कौन किसे देख रहा है और कौन किसकी चाल समझ पा रहा है। प्रियदर्शन इसी बिल्ड-अप का इस्तेमाल करते हैं और बड़े खुलासों को जल्दी सामने नहीं आने देते।

सपोर्टिंग कास्ट और म्यूजिक

पहल चौधरी का ट्रैक कहानी में इमोशन जोड़ता है, लेकिन उनके किरदार के बारे में ज्यादा बताना फिल्म का मजा कम कर सकता है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर, बोमन ईरानी और शारिब हाशमी कहानी को सपोर्ट करते हैं। असरानी की मौजूदगी भावुक पल देती है। प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर खासकर तनाव वाले सीन्स में असर बढ़ाता है, जबकि ‘मेरे हीरो हैं’ और ‘रंगियारा’ कहानी के मूड को अलग-अलग रंग देते हैं।

देखें या नहीं

कुल मिलाकर, ‘हैवान’ हर मोड़ पर अपना राज खोलने के बजाय आपको अंदाजा लगाने का मौका देती है। अक्षय का डार्क अवतार, सैफ का अलग किरदार और प्रियदर्शन का ट्रीटमेंट इसे एक फ्रेश थ्रिलर बनाते हैं। कहानी ‘ओप्पम’ से जुड़ी है, लेकिन एहसास नया है। आखिर में सवाल बस एक की इस खेल में असली हैवान कौन है? जिसे जानने के लिए आपको यह दिलचस्प फिल्म देखनी होगी।

Rajpal Yadav Case: अभिनेता राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, चेक बाउंस मामले फिर जाएंगे जेल

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: दिल्ली हाईकोर्ट से बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को बहुत बड़ा झटका लगा है। दरअसल, कोर्ट ने शुक्रवार को चेक बाउंस मामले में सुनवाई करते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा और उनके व्यवहार को संदिग्ध बताया। इसके साथ ही कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें दोबारा जेल भेज जाए।

राजपाल यादव के खिलाफ क्या मामला है?

बता दें कि 2010 में, राजपाल यादव ने अपनी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। पैसे न चुका पाने के आरोपों के बाद, यह मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई में बदल गया।

अप्रैल 2018 में, एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। 2019 की शुरुआत में सेशंस कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की। ​​जून 2024 में, हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी और उनसे लगभग 9 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने के लिए “ईमानदार और सच्चे कदम” उठाने को कहा। हालांकि, इस साल 2 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया, क्योंकि वे पैसे चुकाने के अपने वादों को पूरा करने में बार-बार नाकाम रहे थे।

सरेंडर करने से पहले अभिनेता राजपाल ने बॉलीवुड हंगामा से बात की और एक इमोशनल टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सर, क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं। और कोई उपाय नहीं दिखता।” एक्टर के सरेंडर करने के बाद उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में डाल दिया गया।

इंडस्ट्री राजपाल यादव के समर्थन में आई

वहीं, राजपाल यादव के मुश्किल समय में, कई एक्टर्स ने उन्हें आर्थिक मदद देने का फैसला किया और इंडस्ट्री के दूसरे लोगों से भी इस मुश्किल घड़ी में उनकी मदद करने की अपील की। ​​सोनू सूद, अजय देवगन और सलमान खान से लेकर गुरमीत चौधरी तक, कई लोगों ने उन्हें सपोर्ट किया। साथ ही, कई सिंगर्स और फिल्ममेकर्स ने उन्हें एडवांस पेमेंट दिया और अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स में उन्हें कास्ट किया। बता दें कि राजपाल यादव को इस मामले में 16 फरवरी को जमानत मिल गई थी।

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