Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

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Stocks to Watch: Sensex की मंथली एक्सपायरी; Groww, IRB Infra और Vedanta समेत ये 18 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 34.00 प्वाइंट्स यानी 0.14% की गिरावट के साथ 24,362.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स और बैंकेक्स समेत बीएसई के सभी इंडेक्सेज के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 26 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 183.15 प्वाइंट्स यानी 0.24% की गिरावट के साथ 77,472.94 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 126.80 प्वाइंट्स यानी 0.52% की फिसलन के साथ 24,207.75 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Juniper Green Energy Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जुनिपर ग्रीन एनर्जी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 54.2% बढ़कर ₹33.5 करोड़ और रेवेन्यू 81.2% उछलकर ₹291.2 करोड़ पर पहुंच गया।

ICICI Prudential AMC

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक प्रूडेंशियल कॉरपोरेशन होल्डिंग्स की योजना ICICI प्रूडेंशियल एएमसी में 2% हिस्सेदारी ₹3,121 करोड़ में बेचने की है। हालांकि यह मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की शर्तों को पूरा करने के लिए है। जून 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से अभी कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 87.6% है जिसमें प्रूडेंशियल कॉरपोरेशन की हिस्सेदारी 34.59% है।

Foseco India

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मॉर्गनाइट क्रूसिबल और मॉर्गन टेरासेन बीवी ब्लॉक डील्स के जरिए फोसेको इंडिया में अपनी पूरी 15.27% हिस्सेदारी बेच सकती है। ₹664.4 करोड़ के इस डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹5,773.63 तय किया गया है।

Aye Finance

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक अल्फा वेव इंडिया I एलपी ब्लॉक डील के जरिए आय फाइनेंस में अपनी पूरी 7.8% हिस्सेदारी बेच सकती है। ₹320.4 करोड़ के इस डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹167 तय किया गया है।

Fino Payments Bank

आरबीआई ने फिनो पेमेंट्स बैंक के अंतरिम सीईओ के तौर पर केतन मर्चेंट का कार्यकाल तीन महीने और बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। वह 27 अगस्त 2026 से तीन महीने या रेगुलर एमडी-सीईओ की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, तक जिम्मेदारी संभालेंगे।

IRB Infrastructure Developers

आईआरबी इंफ्रा के बोर्ड ने प्रस्तावित प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए IRB InvIT Fund की यूनिट्स में ₹351 करोड़ तक के निवेश को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 5.4 करोड़ अतिरिक्त यूनिट्स को ₹65 के भाव पर खरीदने का प्रस्ताव रखा है। IRB InvIT Fund मार्केट में लिस्टेड इंफ्रा इंवेस्टमेंट ट्रस्ट आईआरबी इंफ्रा ट्रस्ट से दो प्रोजेक्ट SPV खरीदने के लिए फंड जुटा रहा है।

Bharat Electronics Ltd (BEL)

भारत इलेट्रॉनिक्स को 10 अगस्त से ₹730 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं।

Max Healthcare Institute

मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट की सब्सिडियरी आल्प्स हॉस्पिटल को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स इंटेलिजेंस (DGGI), मुंबई से एक शो-कॉज-कम-डिमांड नोटिस मिला है। इसमें ₹165.7 करोड़ के जीएसटी की मांग की गई है, जिसमें ₹110.47 करोड़ का जुर्माना भी शामिल है।

Vedanta

वेदांता की पैरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज ने वह वेदांता, वेदांता एल्युमीनियम या वेदांता ग्रुप की किसी अन्य कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की चर्चाओं को खारिज कर दिया और कहा कि फिलहाल कोई भी हिस्सेदारी बेचने की ऐसी कोई योजना नहीं है।

Physicswallah

लाइटस्पीड अपॉर्चुनिटी फंड II LP ने फिजिक्सवाला के अपने पूरे 4.67 करोड़ शेयर (1.61% हिस्सेदारी) ₹549.73 करोड़ में प्रति शेयर ₹117.72 के भाव पर बेच दिए। इस ब्लॉक डील के तहत ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर, सोसिएट जेनरल, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरीशस, विरिडियन एशिया अपॉर्चुनिटीज मास्टर फंड, सफ्रा सारासिन फंड मैनेजमेंट SA, घिसालो मास्टर फंड, मेडिओलानम इंटरनेशनल फंड्स, न्यूयॉर्क स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट सिस्टम, OP-इंडिया फंड और टाटा AIA लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने शेयर बेचे हैं।

Rubicon Research

जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने रुबिकॉन रिसर्च के 1.38 करोड़ शेयर (8.37% हिस्सेदारी) ₹2,291.61 करोड़ में प्रति शेयर ₹1660 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक कंपनी में 35.83% हिस्सेदारी वाले विदेशी प्रमोटर जनरल अटलांटिक ने ब्लॉक डील के जरिए 10 घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स- कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, नोमुरा इंडिया इन्वेस्टमेंट फंड मदर फंड, एचडीएफसी एएमसी, ICICI प्रूडेंशियल AMC, SBI म्यूचुअल फंड, VEMF-A LP, एक्सिस MF, TIMF होल्डिंग्स, एरंडा इन्वेस्टमेंट्स और PI अपॉर्चुनिटीज AIF V LLP को बेचे हैं।

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

रिबिट कैपिटल V ने ग्रो के 6.31 करोड़ इक्विटी शेयर ₹196 के भाव पर ₹1,238.1 करोड़ में तो रिबिट केमैन GW होल्डिंग्स V ने 4.99 करोड़ शेयर ₹196.06 के भाव पर ₹979.16 करोड़ में बेच दिए। इन दोनों कंपनियों ने मिलकर कुल 11.31 करोड़ शेयर (1.8% हिस्सेदारी) 2,217.3 करोड़ रुपये में बेचे। जून 2026 तक रिबिट केमैन GW होल्डिंग्स V के पास ग्रो में 4.46% और रिबिट कैपिटल V LP की 5.64% हिस्सेदारी थी।

Welspun Corp

प्रति शेयर ₹2,275.30 के भाव पर प्रमोटर वेल्सपन इन्वेस्टमेंट्स एंड कमर्शियल्स ने वेल्सपन कॉर्प के 60 लाख शेयर (2.27% हिस्सेदारी) ₹1,365.2 करोड़ तो वेल्सपन कॉर्प के एमडी और सीईओ विपुल माथुर ने 3 लाख शेयर (0.11% हिस्सेदारी) ₹68.3 करोड़ में बेच दिए। दोनो ने कुल मिलाकर 2.38% हिस्सेदारी बेची। वहीं कैपिटल ग्रुप ने 14 स्कीमों के जरिए ₹1,088.6 करोड़ में 1.81% हिस्सेदारी के बराबर वेल्सपन कॉर्प के 47.84 लाख शेयर और खरीदे तो एबरडीन ग्रुप ने छह स्कीमों के जरिए ₹150.76 करोड़ में 6.62 लाख शेयर (0.25% हिस्सेदारी) खरीदे। इसके अलावा क्वांट म्यूचुअल फंड, क्वांट स्मॉल कैप फंड, एडलवाइस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और एडलवाइस म्यूचुअल फंड ने भी शेयर खरीदे हैं।

Viyash Scientific

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म द कार्लाइल ग्रुप की कंपनियों- सीए हुल इन्वेस्टमेंट्स और सीए हार्बर इन्वेस्टमेंट्स ने वियश साइंटिफिक के 4.75 करोड़ शेयर (10.88% हिस्सेदारी) अलग-अलग भाव पर ₹1,259.4 करोड़ में बेच दिए। जून 2026 तक कार्लाइल ग्रुप की कंपनी में 61.31% हिस्सेदारी थी। कार्लाइल ने जो शेयर बेचे हैं, उसमें 1.08 करोड़ शेयर छह निवेशकों- कोटक महिंद्रा AMC, बंधन MF, एडलवाइस MF, पनवीरा इंडिया इनोवेशन फंड, एस गुप्ता होम्स और आगम इन्वेस्टमेंट्स ने खरीदे हैं।

Gaja Alternative Asset Management

इनवेस्को म्यूचुअल फंड ने लिस्टिंग के दिन गजा कैपिटल के अतिरिक्त 85.95 लाख शेयर (6.09% हिस्सेदारी) ₹157.8 करोड़ में खरीद लिए। IPO बंद होने के बाद लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार इनवेस्को इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज फंड की कंपनी में 1.71% हिस्सेदारी थी, और अब लिस्टिंग के दिन खरीदारी के बाद उसकी कुल हिस्सेदारी 7.8% हो गई।

Avenue Supermarts (DMart)

कैपिटल ग्रुप की अमेरिकन फंड्स इंश्योरेंस सीरीज ग्लोबल ग्रोथ एंड इनकम फंड ने डीमार्ट के एवेन्यू सुपरमार्ट्स के 67.64 लाख शेयर (1.03% हिस्सेदारी) ₹2,537.12 करोड़ में प्रति शेयर ₹3,750.58 के भाव पर बेच दिए।

Standard Engineering Technology

अमांसा होल्डिंग ने स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के अतिरिक्त 11.58 लाख शेयर ₹37.59 करोड़ में प्रति शेयर ₹324.60 के भाव पर बेच दिए।

TCC Concept

गोल्डमैन सैक्स एशिया स्ट्रैटेजिक ने टीसीसी कॉन्सेप्ट के 4.04 लाख शेयर ₹10.46 करोड़ में प्रति शेयर ₹258.48 के भाव पर बेच दिए।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

एक्स-डिविडेंड: PFC (पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन), पीएंडजी (प्रॉक्टर एंड गैंबल) हेल्थ, थॉमस कुक (इंडिया), DOMS इंडस्ट्रीज, यश हाईवोल्टेज, मानक्सिया कोटेड मेटल्स एंड इंडस्ट्रीज

एक्स-राइट्स: एनसीएल रिसर्च एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

F&O बैन: आज SAIL में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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हर 1,000 व्यूज पर ₹60! इस चीनी प्लेटफॉर्म ने क्रिएटर्स का खींचा ध्यान, YouTube को देगा कड़ी टक्कर

चीनी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म Bilibili अपने घरेलू बाजार से बाहर तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में एक खास कमाई के आंकड़े ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। X पर RT की एक पोस्ट के अनुसार, Bilibili क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग $0.70 (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है। अगर यह दावा सही है, तो यह कदम प्लेटफॉर्म को कंटेंट क्रिएटर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर YouTube को टक्कर दे रहा है। हालांकि, कंपनी ने खुद इस पेमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

Bilibili की रिपोर्टेड पेमेंट

यह जानकारी RT के जरिए सामने आई, जिसने Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए यह आंकड़ा बताया। अगर यह सही है, तो एक मिलियन व्यूज पाने वाले क्रिएटर्स टैक्स और प्लेटफॉर्म के किसी भी एडजस्टमेंट से पहले लगभग $700 कमा सकते हैं। हालांकि, Bilibili के ऑफिशियल क्रिएटर प्रोग्राम डॉक्यूमेंटेशन में किसी तय CPM या RPM का जिक्र नहीं है।

इसके बजाय, प्लेटफॉर्म का कहना है कि कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवर्टाइजर की डिमांड, कंटेंट कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसी चीजों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसमें यह भी बताया गया है कि अनुमानित रेवेन्यू को इनवैलिड ट्रैफिक, रिफंड, फ्रॉड का पता लगाने, टैक्स और पॉलिसी लागू करने के आधार पर एडजस्ट किया जा सकता है।

मॉनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें

Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए। हालांकि, इन शर्तों को पूरा करने के बाद भी मोनेटाइजेशन मिलना तय नहीं है। क्योंकि प्लेटफॉर्म हर चैनल की जांच करता है। इसमें कंटेंट ओरिजिनल है या नहीं, कॉपीराइट नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन तो नहीं हुआ और अकाउंट की स्थिति जैसी चीजें देखी जाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म खरीदे गए व्यूज, फेक सब्सक्राइबर, ऑटोमेटेड एंगेजमेंट और दूसरे तरह के बनावटी ट्रैफिक पर भी रोक लगाता है। इसके अलावा, क्रिएटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा अपलोड किए गए सभी कंटेंट के मालिकाना हक उनके पास हों या उन्हें उस कंटेंट से कमाई करने की अनुमति मिली हो।

Bilibili का ग्लोबल विस्तार जारी है

यह पेमेंट की जानकारी तब सामने आई है जब Bilibili अपने इंटरनेशनल प्लान को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सेमाफोर (Semafor) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपना इंटरनेशनल ऐप फिर से लॉन्च किया है। इसके अलावा, वह इंग्लिश भाषा की वेबसाइट बना रही है और अमेरिका, यूरोप, जापान और लैटिन अमेरिका जैसे मार्केट में कम्युनिटी मैनेजर की भर्ती शुरू कर दी है।

बता दें कि Bilibili खुद को ऐसे क्रिएटर्स के लिए एक डेस्टिनेशन के तौर पर भी पेश कर रही है, जो नए ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं और साथ ही कमाई का नए जरिया बनाना चाहते हैं। विज्ञापन के अलावा, कंपनी एक मार्केटप्लेस भी बना रही है जो स्पॉन्सरशिप के मौकों के लिए क्रिएटर्स को ब्रांड्स से जोड़ेगा।

हालांकि, प्रति 1,000 व्यूज पर $0.70 के पेमेंट की जानकारी ने काफी दिलचस्पी पैदा की है, लेकिन क्रिएटर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि Bilibili ने अभी तक आधिकारिक तौर पर स्टैंडर्ड पेमेंट रेट की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, प्लेटफॉर्म की पब्लिश्ड पॉलिसी में सिर्फ यह बताया गया है कि कमाई कई बातों पर निर्भर करेगी और जैसे-जैसे इसका ग्लोबल क्रिएटर इकोसिस्टम विकसित होगा, इसमें बदलाव हो सकता है।

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Solar Stock: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹455 करोड़ का ऑर्डर मिला, 1 लाख घरों की छत पर सोलर पैनल लगाएगी

पुणे की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी GK Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है, जो राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी ने दिया है। इसके तहत कंपनी को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर में 1 किलोवाट का सिस्टम लगेगा। यानी पूरे प्रोजेक्ट की क्षमता 100 MW होगी।

ऑर्डर की कुल कीमत करीब ₹454.5 करोड़ है। इसमें GST भी शामिल है। कंपनी को हर किलोवाट के लिए ₹45,450 मिलेंगे।

1 लाख घरों पर लगेगा सोलर

GK Energy को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर पर 1 kW का सिस्टम होगा। कंपनी का काम सिर्फ पैनल लगाने तक नहीं है। उसे पूरा काम संभालना होगा। इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, सामान की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और सिस्टम शुरू करना शामिल है।

इन सोलर सिस्टम का 5 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस करना होगा। हर प्रोजेक्ट को संबंधित वर्क ऑर्डर मिलने के 60 दिनों के अंदर पूरा करना होगा।

जून तिमाही के नतीजे

GK Energy का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 54% बढ़कर ₹57 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹37 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ा। यह 55.4% बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹325 करोड़ था।

EBITDA 44% बढ़कर ₹82.4 करोड़ हो गया। हालांकि, यहां एक छोटी चिंता भी है। EBITDA मार्जिन 17.6% से घटकर 16.3% रह गया। यानी बिक्री बढ़ी, लेकिन खर्च भी बढ़े। प्रॉफिट बिफोर टैक्स भी बढ़कर ₹80.3 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹50.5 करोड़ था।

कंपनी करती क्या है?

GK Energy का मुख्य कारोबार सोलर से जुड़ा है। कंपनी दो बड़े काम करती है। पहला है सोलर प्रोजेक्ट्स का EPC कारोबार। यानी डिजाइन से लेकर निर्माण और इंस्टॉलेशन तक पूरा काम। दूसरा कारोबार सोलर सेल और दूसरे सोलर प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग का है। पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में EPC कारोबार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

शेयर में 6.83% से ज्यादा तेजी

बुधवार को GK Energy के शेयर 6.83% बढ़कर ₹134.81 पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.62% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 19.63% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.73 हजार करोड़ रुपये है।

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Tempsens में लिस्टिंग पर हो जाएगा पैसा डबल! ग्रे मार्केट से मिल रहे ये संकेत

Tempsens Listing: आईपीओ को 184 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर ऐसे शानदार संकेत मिल रहे हैं कि आईपीओ निवेशकों का पैला लिस्टिंग पर ही डबल हो जाएगा। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹300 यानी 100% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को पैसा डबल हो सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹300 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Tempsens चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Tempsens चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Tempsens IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

टेंपसेंस का ₹650 करोड़ का आईपीओ 20-24 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 184.22 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 302.88 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 314.44 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 61.00 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 124.95 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹95 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹4 की फेस वैल्यू वाले 1.85 करोड़ शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹18.13 करोड़ कर्ज हल्का करने कैपिटल एक्सपेंडिचर, ₹55.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹14.18 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹50.65 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Tempsens के बारे में

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स फैक्ट्रियों और बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए तापमान से जुड़े प्रोडक्ट्स बनाती है। यह तापमान नापने वाले सेंसर, मशीनों/प्रोसेस को गर्म करने वाले हीटर और खास तरह के इंडस्ट्रियल केबल बनाती है। मार्च 2026 में टेंपरेचर सेंसर सेगमेंट में इसकी करीब 10.5% हिस्सेदारी है। रेवेन्यू के हिसाब से यह देश में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है तो इलेक्ट्रिकल हीटर्स के मामले में सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है। यह MRO (मेटेंनेंस, रिपेयर एंड ऑपरेशंस) का भी काम देखती है। इसका कारोबार भारत के अलावा 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 32% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹71.07 करोड़ और टोटल इनकम करीब 28% के सीएजीआर से ₹455.86 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹77.95 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹465.16 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cyient Share Price: इन्वेस्टर डे के बाद शेयर 4% उछला, जेपी मॉर्गन ने दिया ₹1,050 का टारगेट

Cyient Share Price: IT सर्विस कंपनी Cyient के शेयरों में 26 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर 4 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयर में तेजी कंपनी द्वारा’इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के ग्रोथ और मार्जिन से जुड़ी जानकारी और ब्रोकरेज फर्मों ने रिकवरी की रफ्तार को लेकर मिक्स राय के बाद आई है।

Cyient ने कहा कि ग्रोथ को फिर से तेज करना उसकी शॉर्ट टर्म की प्राथमिकता है। कंपनी का लक्ष्य FY28-29 तक सालाना आधार पर डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ और तिमाही-दर-तिमाही स्थिर ग्रोथ हासिल करना है।

शॉर्ट टर्म में, कंपनी का लक्ष्य 15% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है, जबकि मध्यम से लंबी अवधि में उसका लक्ष्य इंडस्ट्री में सबसे अच्छी ग्रोथ के साथ-साथ 16% से अधिक EBIT मार्जिन हासिल करना है।

कंपनी ने कहा कि उसकी ‘गो-टू-मार्केट’ (GTM) टीम अब बड़े सौदे करने और बिजनेस को प्रोजेक्ट-आधारित काम से हटाकर एन्युइटी-आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स की ओर ले जाने के लिए तैयार है, जिनसे रेवेन्यू का बेहतर अनुमान लगाया जा सकता है। अभी प्रोजेक्ट-आधारित काम कंपनी के कुल बिजनेस का लगभग 40% है।

मैनेजमेंट ने बताया कि Cyient की ‘लार्ज-डील पाइपलाइन’ (बड़े सौदों की संभावित सूची) अभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। इसमें 9 ऐसे सौदे शामिल हैं जिनकी कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू लगभग 300 मिलियन डॉलर है।कंपनी ने FY26 को कई रणनीतिक बदलावों के बाद स्थिरता का साल बताया है और उम्मीद है कि FY27 और FY28 में उसकी नई रणनीति से रिकवरी शुरू होगी।

मार्जिन के मामले में Cyient ने पहले ही प्रगति की है; Q1 FY27 में EBIT मार्जिन बढ़कर 13.2% हो गया, जो पहले लगभग 12.2% था। मैनेजमेंट का लक्ष्य AI-आधारित रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेटिंग कॉस्ट में दक्षता के जरिए मध्यम अवधि में 15% का लक्ष्य हासिल करना है।

JPMorgan के अनुसार, मैनेजमेंट जिन मुख्य पैमानों पर नजर रखेगा, उनमें खास तौर पर बड़े सौदों से ऑर्डर आने में डबल-डिजिट ग्रोथ और मार्जिन का 15% तक बढ़ना शामिल है।

शेयर पर क्या है ब्रोकरेज की राय

JPMorgan ने Cyient के लिए ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,050 प्रति शेयर का प्राइस टारगेट तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि Cyient की नई रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन स्टॉक की री-रेटिंग के लिए इसे सही ढंग से लागू करना अहम होगा। JPMorgan ने ‘इन्वेस्टर डे’ पर कंपनी के बड़े सौदों पर फोकस, एन्युइटी-आधारित रेवेन्यू की ओर बदलाव और मार्जिन बढ़ाने की योजनाओं को मुख्य सकारात्मक बातें बताया।

इस बीच, मोतीलाल ओसवाल ने Cyient पर अपनी ‘Sell’ रेटिंग को दोहराया है और इसका प्राइस टारगेट ₹740 रखा है। इसका मतलब है कि मंगलवार की क्लोजिंग कीमत से इसमें लगभग 24% की गिरावट आ सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि वह कंपनी के काम करने के तरीके (एग्जीक्यूशन) के बारे में बेहतर सबूत मिलने का इंतज़ार करेगा, क्योंकि रिकवरी में अभी समय लगेगा और FY27 में ऑर्गेनिक ग्रोथ के मोटे तौर पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल Cyient के सेमीकंडक्टर से जुड़े मौकों को लेकर पॉजिटिव है, लेकिन उसका कहना है कि इस बिज़नेस को बड़ी वैल्यूएशन देने से पहले वह ‘प्रूफ ऑफ़ कॉन्सेप्ट’ का इंतज़ार करेगा।

इधर Emkay Global ने Cyient पर अपनी ‘Reduce’ रेटिंग बनाए रखी है और इसका प्राइस टारगेट ₹900 तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि ऐसा लगता है कि मैनेजमेंट ने कंपनी की ग्रोथ में आने वाली मुख्य रुकावटों को दूर कर लिया है और अब उनके पास सही स्ट्रैटेजी और ज़रूरी साधन मौजूद हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि उसकी राय और रेटिंग में बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपनी योजनाओं को कितनी अच्छी तरह लागू करती है।

Cyient पारंपरिक इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) सर्विसेज़ से हटकर ज़्यादा बड़े ‘लाइफसाइकिल इंजीनियरिंग सर्विसेज़’ मॉडल की ओर बढ़ रही है। कंपनी का अनुमान है कि उसका एड्रेसेबल मार्केट पारंपरिक ER&D के लगभग $80-100 बिलियन के मौके से बढ़कर $2.4-3.2 ट्रिलियन के पूरे इंजीनियरिंग लाइफसाइकिल मौके तक फैल सकता है।

मंगलवार को Cyient के शेयर 4.54% बढ़कर ₹1022.15 पर बंद हुए और पिछले एक महीने में इस स्टॉक में 18% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ESDS Software IPO: 28 अगस्त से खुलेगा ₹720 करोड़ का आईपीओ, GMP 58% के पार; आशीष कचोलिया का भी है निवेश

ESDS Software IPO: महाराष्ट्र की कंपनी ESDS Software Solution अपना ₹720 करोड़ का IPO ला रही है। यह 28 अगस्त को खुलेगा और 1 सितंबर को बंद होगा। कंपनी ने IPO का प्राइस बैंड ₹408 से ₹429 प्रति शेयर तय किया है। इस कीमत पर कंपनी की वैल्यू करीब ₹5,028.3 करोड़ बैठती है।

IPO की पूरी डिटेल

यह IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। यानी IPO से मिलने वाला पूरा पैसा कंपनी को मिलेगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 27 अगस्त को खुलेगी। IPO का अलॉटमेंट 2 सितंबर तक फाइनल होने की उम्मीद है। कंपनी के शेयर 4 सितंबर से शेयर बाजार में लिस्ट हो सकते हैं।

कंपनी ने पहले ₹600 करोड़ का IPO लाने की योजना बनाई थी। अब इश्यू का आकार बढ़ाकर ₹720 करोड़ कर दिया गया है।

रिटेल निवेशक कितना पैसा लगाएगा?

निवेशकों को कम से कम 34 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी। इसके बाद 34 शेयर के मल्टीपल में ही बोली लगाई जा सकेगी।

अपर प्राइस बैंड ₹429 के हिसाब से रिटेल निवेशक के लिए न्यूनतम निवेश ₹14,586 होगा। वहीं अधिकतम निवेश करीब ₹1,89,618 तक जा सकता है।

ESDS Software IPO का GMP

ESDS Software के आईपीओ को ग्रे मार्केट में काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका GMP ₹250 रुपये है। यानी अपर प्राइस बैंड के हिसाब से निवेशकों को 58.28% का संभावित लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि, GMP सिर्फ आईपीओ की डिमांड का अंदाजा होती है। इसलिए लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए।

IPO का पैसा कहां लगेगा?

ESDS Software Solution IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा अपने डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में लगाएगी।

कंपनी करीब ₹576 करोड़ का इस्तेमाल क्लाउड कंप्यूटिंग इक्विपमेंट और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की खरीद और इंस्टॉलेशन पर करेगी। यह खर्च FY27 और FY28 के दौरान किया जाएगा। बाकी पैसा सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में लगाया जाएगा।

कंपनी क्या करती है?

ESDS Software Solution क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा कारोबार करती है। कंपनी GPUaaS, क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस देती है।

कंपनी का दावा है कि भारत में वह उन चुनिंदा कंपनियों में है जो इन सभी सेवाओं का पूरा स्पेक्ट्रम देती हैं। उसके डेटा सेंटर बेंगलुरु, नोएडा, नासिक और मोहाली जैसे शहरों में हैं। कोलकाता और साहिबाबाद में भी नए डेटा सेंटर बनाने की योजना है।

AI से जुड़ा बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

मार्च 2026 में ESDS Software ने ऑस्ट्रेलिया की एक neocloud AI compute कंपनी के साथ रणनीतिक समझौता किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर 5 साल का है। इसे 2 साल और बढ़ाने का विकल्प भी है।

पूरे संभावित 7 साल के लिए इस समझौते की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 1.25 अरब डॉलर है। कंपनी को इस समझौते से FY27 की तीसरी तिमाही से रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

कंपनी के शेयरहोल्डर्स कौन हैं?

कंपनी के प्रमोटर्स के पास करीब 46.06% हिस्सेदारी है। पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 52.65% हिस्सेदारी है।

पब्लिक शेयरहोल्डर्स में मुकुल महावीर अग्रवाल की 6.99%, आशीष कचोलिया की 2.39% और Anchorage Capital Fund की 1.32% हिस्सेदारी है।

मुनाफा दोगुने से ज्यादा बढ़ा

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। FY26 में कंपनी का मुनाफा बढ़कर ₹120.8 करोड़ हो गया। FY25 में यह ₹55.6 करोड़ था। इसी दौरान कंपनी का रेवेन्यू 30.7% बढ़कर ₹472.2 करोड़ हो गया। FY25 में रेवेन्यू ₹361.3 करोड़ था।

IPO के लिए DAM Capital Advisors और Systematix Corporate Services को बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

TCS MHP Deal Porsche: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर में मंगलवार सुबह शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। पोर्शे की कंसल्टिंग सहायक कंपनी MHP के 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3573 करोड़ के अधिग्रहण के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने सतर्क रुख अपनाया है।

एनालिस्ट का मानना है कि इस डील से यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में TCS की पकड़ मजबूत होगी, लेकिन MHP के घटते रेवेन्यू और इंटीग्रेशन की चुनौतियों को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी चिंतित हैं।

आज 25 अगस्त, मंगलवार को मार्केट खुलने के साथ ही  TCS के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। शेयर NSE पर 0.7% गिरकर ₹2,268 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। साल 2026 में अब तक TCS का शेयर करीब 29.2% टूट चुका है।

डील में क्या-क्या है शामिल?

TCS ने जर्मन लग्जरी कार निर्माता पोर्शे की कंपनी MHP Management- und IT-Beratung GmbH की 100% हिस्सेदारी करीब ₹3573 करोड़ में खरीदी है। इस अधिग्रहण के साथ ही पोर्शे ने MHP और TCS के साथ 5 साल के लिए करीब ₹14000 करोड़ का रणनीतिक समझौता भी किया है।

ब्रोकरेज हाउसेस का क्या है कहना?

अधिग्रहण की खबर के बाद प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने TCS के शेयर पर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस जारी किए हैं:

सिटी ने TCS के शेयरों को बेचना की सलाह बरकरार रखी है, जो इसके करेंट भाव से करीब 20% की गिरावट का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि MHP का रेवेन्यू साल 2024 के 830 मिलियन यूरो से घटकर 2025 में 742 मिलियन यूरो रह गया है। गिरता रेवेन्यू TCS के लिए जोखिम बन सकता है। Citi का टारगेट प्राइस ₹1825 का है।

वहीं HSBC ने निवेशकों को TCS के शेयर होल्ड करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस डील से TCS की यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में मौजूदगी तो बढ़ेगी, लेकिन कंपनी के प्रति शेयर आय पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा। साथ ही दोनों कंपनियों का विलय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। HSBC का टारगेट प्राइस ₹2350 का है।

क्या करती है MHP कंपनी?

MHP एक ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग कंपनी है, जिसके पास 4,500 से अधिक कर्मचारी हैं। यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में काम करती है।

आईटी सेक्टर के लिए क्या हैं चुनौतियां?

यह डील ऐसे समय में हुई है जब पूरी भारतीय आईटी इंडस्ट्री टेक खर्च में सुस्ती और जेनेरिक एआई के कारण आ रहे बदलावों से जूझ रही है। MHP के कम वैल्युएशन पर मिलने की मुख्य वजह भी इसके घटते रेवेन्यू का रिस्क ही है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पोर्शे के साथ लंबी अवधि के सौदे से TCS को भविष्य में रेवेन्यू का सपोर्ट मिलेगा, लेकिन MHP के गिरते बिजनेस को वापस पटरी पर लाना और इसका TCS के साथ तालमेल बिठाना कंपनी प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hindustan Copper OFS: सरकार 6% तक हिस्सेदारी बेचेगी, ₹514 का फ्लोर प्राइस तय; 1 साल 140% चढ़ा स्टॉक

Hindustan Copper OFS: सरकारी कंपनी Hindustan Copper में भारत सरकार ऑफर ऑफर सेल (OFS) के जरिए 6% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए OFS का फ्लोर प्राइस ₹514 प्रति शेयर तय किया गया है।

DIPAM के सचिव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। सरकार पहले कंपनी की 3% हिस्सेदारी बेचेगी। अगर इश्यू को ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिलता है, तो अतिरिक्त 3% हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के तहत बेची जा सकती है।

सरकार जुटा सकती है ₹3,000 करोड़

अगर ग्रीन-शू ऑप्शन समेत पूरी 6% हिस्सेदारी बिक जाती है, तो ₹514 के फ्लोर प्राइस पर सरकार को करीब ₹3,000 करोड़ मिल सकते हैं। फिलहाल Hindustan Copper में सरकार की हिस्सेदारी करीब 66% है। पूरी 6% हिस्सेदारी बेचने के बाद यह घटकर करीब 60% रह जाएगी।

OFS में 10% हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व होगा। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों के लिए 25,000 शेयर अलग रखे गए हैं।

मजबूत नतीजों के बाद हिस्सेदारी बिक्री

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जून तिमाही में Hindustan Copper का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर दोगुने से ज्यादा बढ़कर ₹353 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹134 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 81.4% बढ़कर ₹936.5 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹516.4 करोड़ था।

कॉपर की कीमतों में तेजी का फायदा

ग्लोबल मार्केट में कॉपर की कीमत पिछले हफ्ते 14,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई थी। यह जनवरी के अंत के बाद का सबसे ऊंचा इंट्राडे स्तर था।

कॉपर की कीमतों में लगातार छह हफ्तों तक तेजी रही। सप्लाई की कमी और अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की चिंता कम होने से कॉपर को सहारा मिला।

शेयर भाव से कितना नीचे है फ्लोर प्राइस?

Hindustan Copper के शेयर सोमवार को 0.25% की बढ़त के साथ ₹574.15 पर बंद हुए। इस हिसाब से OFS का ₹514 का फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से करीब 10.5% नीचे है।

पिछले 1 महीने में स्टॉक 17.54% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 140% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।