NSE आईपीओ का जीएमपी दूसरे दिन भी सिर्फ 8%, SS Retail का जीएमपी 32% के पार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आईपीओ में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी उम्मीद से कम दिख रही है। खुलने के दूसरे दिन यह आईपीओ 11:30 बजे तक सिर्फ 55 फीसदी सब्सक्राइब हुआ था। अनऑफिशियल मार्केट में शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम भी नहीं बढ़ रहा है। उधर, एसएस रिटेल के आईपीओ को इनवेस्टर्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिलता दिख रहा है। शेयर का जीएमपी भी एनएसई के मुकाबले काफी ज्यादा चल रहा है। क्या इसका मतलब है कि एसएस रिटेल के आईपीओ में लिस्टिंग गेंस ज्यादा रह सकता है?

NSE के आईपीओ में 21 सितंबर तक लगा सकते हैं बोली

NSE का आईपीओ 17 सितंबर को खुला था। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। कंपनी ने 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये है। यह ऑफर पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि एक्सचेंज इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। सिर्फ कुछ इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचेंगे।

ओपन होने के दूसरे दिन भी एनएसई आईपीओ का जीएमपी सिर्फ 8.29%

अनऑफिशियल मार्केट को ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म आईपीओवॉच के मुताबिक, 18 सितंबर को एनएसई के शेयर का जीएमपी 148 रुपये यानी 8.29 फीसदी था। 17 सितंबर को भी जीएमपी इतना ही था। इसका मतलब है कि इस शेयर का जीएमपी आईपीओ खुलने के दूसरे दिन भी नहीं बढ़ा है। जीएमपी से यह पता चलता है कि शेयर बाजारों में शेयर की लिस्टिंग कैसी रहेगी। हालांकि, यह सिर्फ एक संकेत होता है। एक्चुअल लिस्टिंग गेंस में फर्क हो सकता है।

एसएस रिटेल का आईपीओ 14 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब

एसएस रिटेल के आईपीओ का आज यानी 18 सितंबर तीसरा दिन है। यह आईपीओ 14.67 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। इसका मतलब है कि इस आईपीओ में इनवेस्टर्स ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि यह आईपीओ सिर्फ 500 करोड़ रुपये का है। इसके मुकाबले एनएसई का आईपीओ बहुत बड़ा है। एनएसई का आईपीओ 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।

एसएस रिटेल के आईपीओ का जीएमपी 32 फीसदी के पार

अनऑफिशियल मार्केट में एसएस रिटेल के आईपीओ पर चल रहे प्रीमियम ने चौंकाया है। 17 सितंबर के मुकाबले इसका जीएमपी बढ़ा है। 17 सितंबर को इसका जीएमपी 133 रुपये यानी 31.37 फीसदी चल रहा था। यह 18 सितंबर को बढ़कर 32.31 फीसदी हो गया। अगर लिस्टिंग गेंस की बात की जाए तो इसका मतलब है कि एसएस रिटेल के आईपीओ में ज्यादा लिस्टिंग गेंस मिल सकता है। एसएस रिटेल के शेयरों की लिस्टिंग शेयर बाजारों में 23 सितंबर को हो सकती है। एनएसई के शेयर 24 सितंबर को लिस्ट होंगे।

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कई ब्रांड्स के मोबाइल का रिटेल चेन ऑपरेट करती है एसएस रिटेल

एसएस रिटेल मल्टी ब्रांड रिटेल चेन को ऑपरेट करती है। यह मोबाइल फोन, एक्सेसरीज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स बेचती है। कंपनी का ऑपरेशंस देश के कई राज्यों में है, जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा और गुजरात शामिल हैं। कंपनी के शेयर 23 सितंबर को बीएसई और एनएसई दोनों पर लिस्ट होंगे, जबकि एनएसई का शेयर 24 सितंबर को सिर्फ बीएसई पर लिस्ट होगा।

NSE और हीरो मोटर्स IPO के GMP में बड़ी गिरावट, निवेशकों को किस बात का है डर?

IPO बाजार में इस समय NSE और Hero Motors के इश्यू चर्चा में हैं। दोनों IPO को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह दिखा। लेकिन फिर इनके GMP यानी Grey Market Premium में तेज गिरावट देखने को मिली। बेशक GMP अंतिम लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। मगर इससे निवेशकों के उत्साह और आईपीओ की डिमांड का मोटा अंदाजा मिलता है।

NSE IPO का GMP क्यों गिरा?

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, NSE IPO का GMP शुरुआत में ₹310 था, जो 17 सितंबर की घटकर करीब ₹145 रह गया। यानी इसमें लगभग 53% की गिरावट आई। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले ₹145 का GMP करीब 8% के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

GMP में गिरावट की कई वजहें हैं। पहली बात की NSE का IPO करीब ₹22,562 करोड़ का है और यह पूरी तरह Offer for Sale (OFS) है। यानी इस इश्यू से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इतना बड़ा इश्यू होने का मतलब है कि ज्यादातर लोगों को अलॉटमेंट मिलने की संभावना रहती है। इसलिए ग्रे मार्केट में अब ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा।

दूसरी बड़ी चिंता NSE की कमाई को लेकर है। कंपनी की आमदनी में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी है और खासकर डेरिवेटिव्स कारोबार में रेगुलेटरी बदलावों का असर पड़ा है। FY26 में NSE का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों घटा था। इससे ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

इसके अलावा, बाजार का मौजूदा माहौल भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। अमेरिकी फेड की दरों से जुड़ा रुख, कच्चे तेल की कीमत और हाल की बाजार गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर असर डाला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी इन फैक्टर्स को भारतीय बाजार के मौजूदा सतर्क माहौल की वजहों में शामिल किया है। ऐसे में NSE की कमाई पर आगे भी असर पड़ सकता है।

Hero Motors IPO का GMP भी फिसला

हीरो ग्रुप की कंपनी Hero Motors IPO का GMP भी शुरुआती उछाल के बाद कमजोर हुआ है। 13 सितंबर को इसका GMP करीब ₹24 था, जो 17 सितंबर को घटकर करीब ₹8 रह गया। यानी चार दिनों में प्रीमियम लगभग 66.7% नीचे आया है। ₹84 के अपर प्राइस बैंड पर ₹13 का GMP करीब 9.5% संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

Hero Motors के मामले में एक अहम बात QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स की कमजोर शुरुआती मांग है। 17 सितंबर की सुबह तक IPO कुल 2.20 गुना सब्सक्राइब हुआ था, लेकिन QIB हिस्सा सिर्फ 0.01 गुना भरा था। इसके मुकाबले रिटेल हिस्सा 3.49 गुना और NII हिस्सा 2.10 गुना सब्सक्राइब हुआ।

यानी IPO को रिटेल और NII निवेशकों से अच्छी मांग मिल रही थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की शुरुआती भागीदारी कम रही। ग्रे मार्केट में इस तरह की डिमांड को लेकर धारणा GMP पर असर डाल सकती है। बाद में सब्सक्रिप्शन बढ़ने पर तस्वीर बदल भी सकती है।

GMP गिरने का मतलब IPO कमजोर होना नहीं

GMP को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यह अनऑफिशियल मार्केट का संकेतक है। इसमें ट्रेडिंग सीमित होती है और सेंटीमेंट तेजी से बदल सकता है। इसलिए GMP में ₹20-30 की गिरावट का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के बिजनेस में उसी अनुपात में बदलाव आया है।

NSE के मामले में GMP में गिरावट के साथ बड़ा इश्यू साइज, डेरिवेटिव्स से जुड़ी रेगुलेटरी चिंताएं और वैल्यूएशन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। वहीं Hero Motors में शुरुआती QIB डिमांड और ग्रे मार्केट सेंटीमेंट महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। हालांकि, अंतिम लिस्टिंग प्राइस का पता शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ही चलेगा।

NSE IPO : लिस्टिंग के बाद NSE के निफ्टी में शामिल होने पर SEBI से अभी कोई चर्चा नहीं-एनएसई

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 18 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। जबकि निफ्टी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। दोपहर 3:30 बजे CAS के बाद बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 21.86 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,314.59 पर था, जबकि निफ्टी 53 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 पर पहुंच गया।

रियल्टी और फार्मा सेक्टर में 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई। जबकि मीडिया में 1.35 प्रतिशत और ऑटो व मेटल सेक्टर में लगभग 1-1 प्रतिशत की तेजी आई। बैंकिंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। छोटे-मझोले शेयरों (ब्रॉडर मार्केट) का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके चलते मिडकैप 0.92 प्रतिशत और स्मॉलकैप 0.71 प्रतिशत ऊपर बंद हुए। मार्केट ब्रेथ पॉजिटिव रहा। आज 1,487 शेयरों में गिरावट के मुकाबले 2,480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। जबकि इंडिया VIX में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड में कमी से ग्लोबल इक्विटी मार्केट को कुछ समय के लिए सहारा मिला और महंगाई के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीदें भी मजबूत हुईं। इसके बावजूद,घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। लेकिन हालिया गिरावट के बाद ‘वैल्यू बाइंग’के चलते बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और US टैरिफ के जोखिम के कारण ब्याज दरें और बढ़ाने के दौर की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क रहने की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर बना रहा क्योंकि निवेशकों ने उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जिनकी कमाई की संभावना मजबूत है,जिनके पास अच्छे ऑर्डर हैं और जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है। इनमें खासकर कैपिटल गुड्स,इंडस्ट्रियल,डिफेंस,पावर और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां शामिल रहीं।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि निफ्टी 23,300 के रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है। अगर यह मजबूती से इस लेवल के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी 23,500 तक जा सकती है,जबकि इसके लिए सपोर्ट लेवल 23,200 और 23,000 पर बना हुआ है। जब तक निफ्टी 23,300 के लेवल को साफ तौर पर पार नहीं कर लेता,तब तक बाजार के कंसोलिडेशन मोड में रहने की संभावना है।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार ने कहा कि निफ्टी इंडेक्स में रिकवरी की रैली जारी रही और यह मामूली बढ़त के साथ फ्लैट-टू-पॉज़िटिव बंद हुआ। हालांकि,उन्होंने कहा कि पोज़िशनल चार्ट का स्ट्रक्चर अभी भी नेगेटिव बना हुआ है,जिसमें 23,450–23,600 के दायरे में कई रेजिस्टेंस लेवल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक इंडेक्स इस रेजिस्टेंस ज़ोन के नीचे ट्रेड करता है तब तक उछाल पर बिकवाली की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाने की सलाह होगी। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,100–23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट जोन का काम करेगा।

टेक्निकल व्यू

एनालिस्ट्स का कहना है कि मार्केट में तेजी लौटने के लिए निफ्टी को 23,300 के स्तर को मजबूती से पार करना होगा। बजाज ब्रोकिंग में रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा कि निफ्टी ने अभी तक ‘हायर हाई-हायर लो’ का स्ट्रक्चर नहीं बनाया है,जिससे बाज़ार का मूड अभी भी सतर्क बना हुआ है। मंगलवार के हाई के पास स्थित 23,600 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,600 के ऊपर टिकता है,तो इससे मौजूदा गिरावट के थमने का संकेत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि नीचे की तरफ 23,116 (मंगलवार और बुधवार का लो) का जोन अभी भी तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले सेशन में गिरावट का दौर 23,000 और 22,800 के स्तर तक बढ़ सकता है।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया ने कहा कि टेक्निकल नज़रिए से देखें तो 23,350 के नीचे निफ्टी का रुख सावधानी के साथ मंदी (बेयरिश) वाला बना हुआ है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,100 पर है। अगर यह इस लेवल के नीचे टूटता है तो इंडेक्स 22,800 की ओर जा सकता है। ऊपर की तरफ, 23,350 और 23,500 अहम रेजिस्टेंस लेवल बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में और कमी या फेड का रुख कम सख्त होने से रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है और निकट भविष्य के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है।

HDFC सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्स वकील ने कहा कि अगर निफ्टी 23,100 के पास स्थित हाल के स्विंग लो से ऊपर बना रहता है तो यह 23,500 के रेजिस्टेंस ज़ोन की ओर वापसी कर सकता है। हालांकि,23,100 के नीचे जाने पर निफ्टी 22,700 के पोजीशनल सपोर्ट तक गिर सकता है।

 

NSE IPO : लिस्टिंग के बाद NSE के निफ्टी में शामिल होने पर SEBI से अभी कोई चर्चा नहीं-एनएसई

 

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NSE IPO: एंकर बुक से ₹6746 करोड़ जुटाए, LIC ने अकेले ₹465 करोड़ के शेयर खरीदे

NSE IPO: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE ने 16 सितंबर को एंकर निवेशकों से ₹6,746.2 करोड़ जुटाए। इसमें देश और विदेश के कई बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया। LIC, Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore, Fidelity, ADIA, Nippon Life और HDFC Life जैसे नाम इसमें शामिल हैं। LIC सबसे बड़ा खरीदार रहा।

NSE का ₹22,561.57 करोड़ का IPO 17 सितंबर को खुलेगा। निवेशक इसमें 21 सितंबर तक पैसा लगा सकेंगे। यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे। IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रखा गया है।

LIC ने खरीदे ₹465 करोड़ के शेयर

LIC के पास NSE में पहले से 10.72% हिस्सेदारी है। अब उसने एंकर बुक में ₹465.3 करोड़ के शेयर खरीदे हैं। इसके साथ LIC NSE के एंकर निवेशकों में सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

SBI Pension Funds, SBI Life, HDFC Life, HDFC Pension Fund, Axis Max Life, UTI Pension Fund और Kotak Mahindra Life जैसे इंश्योरेंस संस्थानों ने भी निवेश किया है। LIC समेत इन सभी इंश्योरेंस निवेशकों ने कुल ₹1,081.8 करोड़ लगाए हैं। यह कुल एंकर बुक का करीब 16% है।

विदेश से भी आया बड़ा निवेश

NSE की एंकर बुक में कई बड़े विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाया है। Government Pension Fund Global ने ₹250 करोड़ और Monetary Authority of Singapore ने ₹200 करोड़ का निवेश किया। Abu Dhabi Investment Authority – Monsoon ने भी ₹200 करोड़ के शेयर खरीदे।

इसके अलावा Fidelity, Goldman Sachs, Eastspring Investments India, Integrated Core Strategies (Asia), Carmignac Portfolio और Ashoka WhiteOak जैसे निवेशकों ने भी NSE में दिलचस्पी दिखाई। Societe Generale, BNP Paribas, Morgan Stanley और BofA Securities भी एंकर बुक में शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड्स ने भी खरीदे शेयर

NSE ने 29 घरेलू म्यूचुअल फंड्स को 1.39 करोड़ शेयर आवंटित किए हैं। यह कुल एंकर बुक का 36.98% हिस्सा है। इन फंड्स ने 98 अलग-अलग स्कीम के जरिए आवेदन किया था।

इनमें SBI MF, ICICI Prudential AMC, HDFC AMC, Nippon Life India, Kotak Mahindra AMC, Axis MF, Aditya Birla Sun Life AMC, UTI AMC, Mirae Asset और Tata MF शामिल हैं। Invesco, Quant MF, WhiteOak Capital और HSBC MF ने भी हिस्सा लिया है।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

यह IPO पूरी तरह OFS है। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा। इश्यू से जुड़े खर्च को छोड़कर पूरी रकम मौजूदा शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को मिलेगी।

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ के शेयर भी रिजर्व किए हैं। कर्मचारियों को ये शेयर अंतिम इश्यू प्राइस से ₹170 प्रति शेयर की छूट पर मिलेंगे।

NSE का शेयर बाजार में दबदबा

NSE कुल टर्नओवर के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म हुई तीन महीने की अवधि में कैश मार्केट में इसकी हिस्सेदारी 93.05% थी। इक्विटी फ्यूचर्स में हिस्सेदारी 99.72% रही।

इक्विटी ऑप्शंस में NSE की हिस्सेदारी 68.48% थी। एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 100% रही। ये आंकड़े कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर हैं।

22 सितंबर को अलॉटमेंट

NSE IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं शेयरों की BSE पर ट्रेडिंग 24 सितंबर से शुरू हो सकती है।

Stocks to Watch: 17 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के मेगा आईपीओ के बारे में यहां जानें अपने हर जरूरी सवाल का पूरा जवाब

एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुल रहा है। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। इस इश्यू का इनवेस्टर्स को काफी समय से इंतजार रहा है। अब आईपीओ खुलने से पहले इनवेस्टर्स के मन में कई सवाल चल रहे हैं। क्या इश्यू में एनएसई ने शेयर का जो प्राइस बैंड तय किया है, वह ठीक है? भविष्य में एनएसई की ग्रोथ कैसी रहेगी? क्या डेरिवेटिव्स पर एनएसई की ज्यादा निर्भरता सही है? बीएसई के मुकाबले एनएसई का शेयर शेयर सस्ता है या महंगा है?

मनीकंट्रोल ने इन सवालों का जवाब जानने के लिए पॉल एसेट में रिसर्च हेड प्रसेनजीत पॉल से बातचीत की। उन्होंने इस इश्यू से जुड़े सभी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,700-1,785 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू 22,562 करोड़ रुपये का है। यह सिर्फ ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि एक्सचेंज इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा।

क्या एनएसई की 4.42 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन सही है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि एनएसई का बिजनेस काफी स्ट्रॉन्ग है। यह प्रतिस्पर्धा में आगे है। लेकिन, शेयर का जो प्राइस तय किया गया है, उसके लिए अर्निंग्स का बढ़ना जरूरी है। 1,785 रुपये की कीमत पर इसकी वैल्यू FY26 की अर्निंग्स का करीब 43 गुना है। यह बीएसई के शेयरों की वैल्यूएशन से कम है। इस हिसाब से वैल्यूएशन ठीक है। यह न तो महंगा है और न ही सस्ता है।

एनएसई की ग्रोथ आगे कहां से आएगी,क्योंकि पहले से ही एनएसई का मार्केट शेयर काफी ज्यादा?

एनएसई को ग्रोथ के लिए मार्केट शेयर बढ़ाने की जरूरत नहीं है। कैपिटल मार्केट का आकार बढ़ने पर एनएसई की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। जून 2026 तक एनएसई के रजिस्टर्ड इनवेस्टर्स की संख्या 13.24 करोड़ थी। हालांकि, एनएसई की ग्रोथ के लिए कैश-मार्केट में एक्टिविटी में इजाफा, नए प्रोडक्ट्स, इंडेक्स लाइसेंसिंग, डेटा सर्विसेज और गिफ्ट सिटी का सपोर्ट जरूरी होगा।

अनलिस्टेड मार्केट में शेयर की कीमत 2,000-2,100 रुपये है, जबकि एक्सचेंज ने प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये तय किया है, क्या यह इनवेस्टर्स के लिए राहत की बात है?

प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर प्राइस अनलिस्टेड मार्केट के प्राइस से करीब 11-15 फीसदी कम है। यह इनवेस्टर्स के लिए राहत की बात है। लेकिन, अनऑफिशियल मार्केट की कीमत सिर्फ एक सांकेतिक कीमत होती है। इससे जरूरी यह देखना है कि क्या अर्निंग्स के हिसाब से शेयर की कीमत सही है या नहीं।

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चूंकि एनएसई का मुकाबला बीएसई से है तो वैल्यूएशन के लिहाज से दोनों में कौन बेहतर है?

एनएसई का वैल्यूएशन मल्टीपल बीएसई जैसा नहीं होगा, क्योंकि इसका आकार काफी बड़ा है। एनएसई का अर्निंग्स बेस काफी बड़ा है। हालांकि, बीएसई का ऑप्शंस बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है। जून तिमाही में बीएसई की प्रॉफिट ग्रोथ 62 फीसदी रही, जबकि एनएसई की 7 फीसदी रही। वैल्यूएशन इस बात पर निर्भर करेगी कि आगे दोनों की अर्निंग्स ग्रोथ कैसी रहती है।

UPI पर एमडीआर चार्ज का असर क्या शेयर बाजारों में निवेश पर भी पड़ेगा? जानिए NSE के चेयरमैन ने क्या कहा

यूपीआई यानी यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस छोटे-बड़े पेमेंट के लिए लोगों की पहली पसंद बन गया है। अब तक यह फ्री है यानी इस्तेमाल पर किसी तरह की फीस नहीं लगती है। लेकिन, आगे यूपीआई के जरिए पेमेंट करने पर आपको फीस चुकानी होगी। हालांकि, 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर ही फीस लगेगी। लेकिन, प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट में निवेश के लिए अब काफी ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल होने लगा है। तो क्या यूपीआई पर फीस का असर शेयर मार्केट में निवेश पर भी पड़ेगा?

ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय के लिए पड़ सकता है असर

NSE का मानना है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर MDR का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कुछ समय समय के लिए पड़ेगा। लेकिन, उसके बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने कहा, “2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर एमडीआर चार्जेज का असर ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर सिर्फ शुरुआत में पड़ेगा।” उनहोंने कहा कि कुछ समय बाद इसके सामान्य हो जाने की संभावना है।

एनएसई का आईपीओ 17 सितंबर को खुलने जा रहा है

चौहान ने यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज के बारे में यह बात तब कही है, जब एनएसई का आईपीओ आ रहा है। यह इश्यू 17 सितंबर को खुल जाएगा। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा। एक्सचेंज के कुछ पुराने इनवेस्टर्स ओएफएस में अपने शेयर बेच रहे हैं। कुछ 12.64 करोड़ शेयर ओएफएस में बेचे जाएंगे।

आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी

चौहान ने कहा कि एनएसई के आईपीओ में एंकर इनवेस्टर्स की उम्मीद से ज्यादा दिलचस्पी दिख रही है। खासकर आईपीओ का साइज घटने के बाद ऐसा दिख रहा है। उनहोंने कहा, “एनएसई आईपीओ के लिए एंकर इनवेस्टर्स की डिमांड अनुमान से काफी ज्यादा है…क्योंकि इश्यू का साइज घट गया है।”

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यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल होगा

उन्होंने कहा, “लोकल म्यूचुअल फंड्स जैसे हर ग्रुप को खास ऐलॉटमेंट करने होंगे। एंकर बुक काफी बड़ा है। यह हमारी उम्मीद से ज्यादा है।” इस आईपीओ से एनएसई को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसकी वजह यह है कि एनएसई इस इश्यू में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा। पहले एनएसई का प्लान 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का था। लेकिन, कई पुराने इनवेस्टर्स ने कम शेयर बेचने के फैसले लिए, जिससे इश्यू का आकार घट गया।

NSE IPO: एनएसई के शेयरों पर लगातार घट रहा जीएमपी, आईपीओ में बोली लगाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

NSE IPO: एनएसई के आईपीओ के खुलने में अब सिर्फ एक दिन बाकी रह गया है। इस बीच शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम लगातार घट रहा है। यह आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा। इसमें 21 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयर की लिस्टिंग 24 सितंबर को होगी। इनवेस्टर्स को लंबे समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

शेयरों पर जीएमपी में लगातार गिरावट 

अनऑफिशियल मार्केट एक्टिविटी ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, एनएसई के शेयर के GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट देखने को मिली है। अब शेयर पर जीएमपी घटकर करीब 10-11 फीसदी पर आ गया है। इनवेस्टरगेंस के मुताबिक, शेयर का जीएमपी 179 रुपये था, जो 10.03 लिस्टिंग गेंस का संकेत देता है। आईपीओ वॉच के मुताबिक, जीएमपी से शेयर पर 11.65 फीसदी लिस्टिंग गेंस का संकेत मिलता है। एक दिन पहले शेयर का जीएमपी 12 फीसदी से ज्यादा था।

डेरिवेटिव्स पर निर्भरता बड़ा रिस्क

जीएमपी में कमी के बीच एनालिस्ट्स का कहना है कि एनएसई की काफी निर्भरता डेरिवेटिव्स पर है, जो इसके लिए बड़ा रिस्क है। एनएसई के रेवेन्यू में ऑप्शंस ट्रांजेक्श फीस की बड़ी हिस्सेदारी है। पॉल मैनेजमेंट में रिसर्च हेड प्रसेनजीत पॉल ने कहा कि एनएसई का बिजनेस स्ट्रॉन्ग है। एक्सचेंज प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज से काफी आगे है।

शेयर महंगा नहीं तो सस्ता भी नहीं

उन्होंने कहा, “प्राइस बैंड के 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स का करीब 43 गुना है। यह वाजिब है, लेकिन इसे कम नहीं कहा जा सकता। आगे एक्सचेंज की ग्रोथ कैपिटल मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ने, कैश-मार्केट एक्टिविटी, नए प्रोडक्ट्स, डेटा, सूचकांकों और गिफ्ट सिटी पर निर्भर करेगा। सिर्फ मार्केट शेयर बढ़ने से काम नहीं चलेगा।”

अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम पर रखनी होगी नजर

उन्होंने कहा, “डेरिवेटिव्स पर निर्भरता एक्सचेंज के लिए बड़ा रिस्क है। रेवेन्यू में ऑप्शन ट्रांजेक्शंस फीस का बड़ा योगदान है। लिस्टिंग के बाद इनवेस्टर्स को अर्निंग्स ग्रोथ, कैश मार्केट वॉल्यूम, ऑप्शंस एक्टिविटी और प्रॉफिटबिलिटी पर नजर रखनी होगी।” इनवेस्टर्स पर एनएसई के एमडी और सीईओ आशीषकुमार चौहान के बयान का भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि 2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजेक्शन पर एमडीआर का असर कुछ समय के लिए पड़ेगा।

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बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर 

NSE का मानना है कि यूपीआई से 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का ट्रॉजेक्शन वॉल्यूम पर थोड़ समय तक असर पड़ेगा। लेकिन, बाद सब सामान्य हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है। इसका मतलब है कि इस इश्यू में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेच रहे हैं। हालांकि, यह आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर है। बाजार पर करीब बीते डेढ़ महीनों से दबाव दिख रहा है।

NSE IPO: ओरिएंटल इंश्योरेंस बेचेगी 49.57 लाख शेयर, हिस्सेदारी बिक्री से FY27 में मुनाफे में लौटने की उम्मीद

सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी चालू वित्त वर्ष 2026-27 में मुनाफे में लौटने की राह पर है। कंपनी को यह बढ़त नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में अपनी हिस्सेदारी बेचने से मिलेगी। NSE का IPO 17 सितंबर को खुलने जा रहा है। इस इश्यू का लंबे वक्त से इंतजार हो रहा है। इश्यू का साइज 22,561.57 करोड़ रुपये और प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर है। क्लोजिंग 21 सितंबर को होगी और शेयरों की लिस्टिंग BSE पर 24 सितंबर को होने की उम्मीद है।

NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में मौजूदा शेयरहोल्डर 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखने वाले हैं। शेयर बिक्री करने वालों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, SBI कैपिटल मार्केट्स, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, क्राउन कैपिटल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, इंडियन बैंक, ICICI लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी आदि शामिल हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) संजय जोशी का कहना है, ‘‘हम इस साल कुछ मुनाफा कमाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं… NSE के IPO से मिलने वाली रकम को मुनाफे के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, इससे कंपनी को नकदी भी मिलेगी।’’

NSE IPO में कितने शेयर बेचेगी Oriental Insurance

कंपनी NSE के IPO में अपनी हिस्सेदारी का केवल एक छोटा हिस्सा ही बेच रही है। इसके तहत करीब 49.57 लाख शेयर बिक्री के लिए रखे जाने वाले हैं। NSE में 30 जून, 2026 तक ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के पास 3.52 करोड़ शेयर थे। शेयरों की यह संख्या NSE की 1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। IPO के प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर बिक्री के जरिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को लगभग 843-885 करोड़ रुपये मिलेंगे।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के शुरुआती निवेशकों में से एक है। जोशी का कहना है कि NSE के लिस्ट होने के बाद, उसमें बची हुई होल्डिंग वैल्यू का इस्तेमाल कंपनी की सॉल्वेंसी (देनदारी भुगतान क्षमता) को कैलकुलेट करने के लिए किया जा सकेगा। इससे कंपनी के सॉल्वेंसी रेशियो में सुधार होने की उम्मीद है।

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NSE IPO 10 सालों से पेंडिंग

NSE ने IPO में अपने कर्मचारियों के लिए 70 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व किए हैं। ये उन्हें फाइनल इश्यू प्राइस पर 170 रुपये प्रति शेयर की छूट के साथ ऑफर किए जाएंगे। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था और सितंबर में SEBI की मंजूरी मिल गई। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Hero Motors IPO: 16 सितंबर को खुलेगा ₹1000 करोड़ का इश्यू, जानिए GMP, प्राइस बैंड समेत पूरी डिटेल

Hero Motors IPO: हीरो ग्रुप की Hero Motors Ltd अपना ₹1,000 करोड़ का IPO ला रही है। इश्यू 16 से 18 सितंबर तक खुलेगा। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹79-84 तय किया है। इस भाव पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹3,815 करोड़ बैठता है।

IPO में ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू है। वहीं ₹400 करोड़ का हिस्सा ऑफर फॉर सेल (OFS) है। OFS में ₹395 करोड़ प्रमोटर O P Munjal Holdings और ₹5 करोड़ Hero Cycles को जाएंगे।

Hero Motors IPO का GMP

ग्रे मार्केट में भी हीरो मोटर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टगेन के मुताबिक, इसका लेटेस्ट GMP ₹24 है। यह अपर प्राइस बैंड के हिसाब से 28.57% लिस्टिंग गेन का संकेत है। हालांकि, इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं मानना चाहिए क्योंकि ये लगातार बदलता रहता है।

Hero Motors की कारोबारी सेहतर

हीरो मोटर्स फ्रेश इश्यू से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज घटाने और क्षमता बढ़ाने में करेगी। करीब ₹190 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे। वहीं ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर प्लांट में नए उपकरण खरीदने पर खर्च होंगे।

FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू 9.1% बढ़कर ₹1,188.35 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट 25.5% बढ़कर ₹41.17 करोड़ पहुंच गया। अब कंपनी के सामने बड़ी चुनौती अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना और इन निवेशों से बेहतर रिटर्न हासिल करना है।

हीरो मोटर्स क्या करती है?

हीरो मोटर्स, पंकज एम. मुंजाल से जुड़ी ऑटो कंपोनेंट और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह सीधे ग्राहकों को बाइक या स्कूटर नहीं बेचती। कंपनी पावरट्रेन सिस्टम, गियर और ई-बाइक ड्राइवट्रेन बनाती है। इसके ग्राहक BMW, Ducati जैसी कंपनियां और दुनिया की कई ई-बाइक कंपनियां हैं।

इसका कारोबार भारत के साथ अमेरिका, यूरोप और ASEAN देशों में भी है। कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी तेजी से बढ़ रहा है।

दूसरे ‘हीरो’ कंपनियों से कैसे अलग है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Hero Motors और Hero MotoCorp अलग कंपनियां हैं। Hero MotoCorp बाइक और स्कूटर बनाकर सीधे ग्राहकों को बेचती है। इसके Splendor और Xtreme जैसे ब्रांड हैं। दूसरी ओर, Hero Motors मुख्य रूप से B2B कंपनी है। यानी यह दूसरी ऑटो कंपनियों के लिए कंपोनेंट और टेक्नोलॉजी तैयार करती है।

NSE IPO में पैसा लगाएं या नहीं? जानिए ब्रोकरेज की राय, जोखिम और लेटेस्ट GMP

Hero Cycles साइकिल कारोबार में है। वहीं, Hero Electric इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाती है। चारों कंपनियां मुंजाल परिवार की अलग-अलग कारोबारी शाखाओं से जुड़ी हैं। इसलिए Hero नाम एक जैसा होने के बावजूद इनके कारोबार और निवेश की कहानी अलग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।