NSE IPO: बैंक ऑफ बड़ौदा की OFS में 35% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, जानिए आईपीओ का पूरा अपडेट

NSE IPO: पब्लिक सेक्टर का बैंक ऑफ बड़ौदा NSE में अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचने जा रहा है। बैंक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए NSE के IPO में 76,90,375 तक शेयर बेच सकता है। यह बैंक की NSE में कुल हिस्सेदारी का 35% है। बिक्री के लिए जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी लेनी होगी।

NSE के शेयर एस्क्रो अकाउंट में पहुंचे

Bank of Baroda ने बताया कि OFS की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके तहत NSE के शेयर 8 सितंबर 2026 को एस्क्रो अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए हैं। NSE के मुताबिक, यह बिक्री सितंबर 2026 के अंत तक पूरी हो सकती है।

बिक्री के बाद मिलेगी रकम

Bank of Baroda को शेयर बेचने की रकम OFS पूरा होने के बाद मिलेगी। बैंक अपने NSE शेयरों को प्रस्तावित IPO में बेच रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक को NSE से ₹76.90 करोड़ का डिविडेंड भी मिला था।

₹30,000 करोड़ का हो सकता है NSE IPO

NSE का करीब ₹30,000 करोड़ का IPO 18 सितंबर को खुल सकता है। इसके 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है, तो यह 2024 के Hyundai Motor India के ₹27,870 करोड़ के IPO को पीछे छोड़ देगा। इस तरह यह भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

15 सितंबर को आ सकता है प्राइस बैंड

NSE IPO का प्राइस बैंड 15 सितंबर को घोषित होने की उम्मीद है। इसके बाद 17 सितंबर को एंकर बुक खुलेगी। पब्लिक इश्यू 18 सितंबर को खुल सकता है। यह 21 और 22 सितंबर को भी खुला रह सकता है।

नए शेयर जारी नहीं होंगे

NSE का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें ₹1 फेस वैल्यू वाले 14.89 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे। ये NSE की पेड-अप इक्विटी कैपिटल के करीब 6% के बराबर हैं। इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यानी IPO से NSE को सीधे कोई पैसा नहीं मिलेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: अगले हफ्ते शुरू हो सकती है निवेशकों से बातचीत, नवंबर में IPO लाने की तैयारी

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की Jio Platforms IPO लाने की तैयारी में तेजी ला रही है। कंपनी अगले हफ्ते से निवेशकों से औपचारिक बातचीत शुरू कर सकती है। अगर प्लान के मुताबिक सब हुआ तो नवंबर में IPO आ सकता है। यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है।

ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि Jio Platforms अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग, लंदन और मिडिल ईस्ट में निवेशकों के साथ बैठकें करेगी। ये बैठकें अगले हफ्ते से शुरू हो सकती हैं।

नवंबर में IPO लाने का लक्ष्य

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Jio Platforms की अपने बैंकर्स के साथ IPO को लेकर बातचीत चल रही है। इसमें नवंबर में IPO लाने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, अभी कुछ भी फाइनल नहीं है। IPO का आकार, कंपनी की वैल्यूएशन और टाइमिंग आगे बदल सकती है। Jio Platforms की ओर से इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms ने 19 जून को IPO के लिए ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट दाखिल किए थे। 28 अगस्त को SEBI से मंजूरी भी मिल गई।

IPO में 27 करोड़ तक नए शेयर जारी किए जाएंगे। ब्लूमबर्ग न्यूज की कैलकुलेशन के मुताबिक, इससे कंपनी की इक्विटी में करीब 2.9% हिस्सेदारी डायल्यूट होगी। कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी।

4 अरब डॉलर तक जुटा सकती है कंपनी

मामले से जुड़े लोगों ने पहले ब्लूमबर्ग को बताया था कि Jio Platforms IPO से 4 अरब डॉलर तक जुटा सकती है।

अगर ऐसा होता है तो यह भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल होगा। Jio Platforms, Reliance Industries के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार का हिस्सा है। इसके पास भारत की सबसे बड़ी वायरलेस कंपनी भी है।

NSE का IPO भी कतार में

भारत का IPO बाजार इस समय काफी सक्रिय है। कई बड़े इश्यू आने की तैयारी में हैं। NSE को भी इस महीने SEBI से IPO की मंजूरी मिल चुकी है। NSE का IPO सितंबर में आने की उम्मीद है। इससे करीब 3 अरब डॉलर जुटाए जाने की संभावना है।

ऐसे में NSE के बाद Jio Platforms का IPO भी बाजार के लिए बड़ा इवेंट हो सकता है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

NSE IPO: सेबी की हरी झंडी के बाद हलचल तेज! जानिए आईपीओ की पूरी डिटेल और किसे होगा कितना बंपर फायदा?

NSE IPO Benefits & Details: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ₹30000 करोड़ के आईपीओ को बीते दिनों सेबी से मंजूरी मिली। लगभग एक दशक के लंबे इंतजार के बाद आ रहा यह इश्यू देश का सबसे बड़ा आईपीओ बनने जा रहा है। इस मेगा आईपीओ में कौन-कौन से बड़े सरकारी बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां अपने शेयर बेच रही हैं, किसे कितना तगड़ा मुनाफा होगा और आईपीओ की प्रमुख डिटेल्स क्या हैं? आइए आपको बताते हैं।

किसे और कितना होगा बंपर फायदा?

यह पूरा आईपीओ ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी एक्सचेंज कोई नया शेयर जारी नहीं कर रहा है। इसके बजाय NSE के शुरुआती शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचकर भारी ‘वैल्यू अनलॉकिंग’ करेंगे। चूंकि इन कंपनियों ने बहुत ही मामूली कीमत पर शेयर खरीदे थे, इसलिए इन्हें तगड़ा फायदा मिलने वाला है:

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): सबसे बड़ा लिस्टेड सेलिंग शेयरधारक। SBI अपने 2.47 करोड़ शेयर्स बेचेगा, जिससे बैंक के खजाने में भारी कैश आएगा।

बैंक ऑफ बरोड़ा: लगभग 1.1 करोड़ शेयर्स ऑफलोड करके बंपर मुनाफा कमाने की तैयारी में है।

जीआईसी री (GIC Re): सरकारी री-इंश्योरेंस कंपनी लगभग 1.1 करोड़ शेयर्स बेचेगी।

न्यू इंडिया एश्योरेंस (NIACL): लगभग 1.05 करोड़ शेयर्स बेचने की योजना है।

आईएफसीआई (IFCI): इसकी सब्सिडियरी SHCIL के जरिए NSE में 4.4% की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है, जिससे इसके शेयरों में भी जबरदस्त एक्शन देखने को मिलेगा।

NSE IPO की प्रमुख डिटेल्स

कुल इश्यू साइज: ₹30,000 करोड़ (14.89 करोड़ शेयर्स)।

सब्सक्रिप्शन की संभावित तारीख: 15 सितंबर 2026 (अनुमानित)।

शेयर लिस्टिंग डेट: 24 से 25 सितंबर 2026 के बीच (पितृपक्ष शुरू होने से ठीक पहले लिस्टिंग का लक्ष्य)।

प्राइस बैंड: अगले हफ्ते जारी होने की उम्मीद है।

कैसी है NSE की वित्तीय सेहत?

आईपीओ में उतरने से पहले NSE का चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन रहा है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) 7% बढ़कर ₹3120 करोड़ पर पहुंच गया। कुल आय में 9% की बढ़ोतरी के साथ ₹5252 करोड़ दर्ज की गई। इस दौरान कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया ट्रांजेक्शन फीस रही, जिससे ₹3623 करोड़ का राजस्व मिला।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आशीषकुमार चौहान टाटा संस का चेयरमैन बनने की रेस में नहीं, NSE ने रिपोर्ट्स को खारिज किया

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 6 सितंबर को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि NSE के MD और CEO आशीषकुमार चौहान Tata Sons के चेयरमैन बन सकते हैं।

NSE ने साफ कहा कि ये खबरें एक्सचेंज के पास मौजूद किसी जानकारी पर आधारित नहीं हैं। चौहान ने भी इन खबरों को गलत बताया है। ये सारी बातें ऐसे समय में हो रही हैं, जब NSE आईपीओ लाकर शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा हैष

PTI की रिपोर्ट के बाद सफाई

यह सफाई 5 सितंबर की PTI रिपोर्ट के बाद आई। रिपोर्ट में Tata Sons के अगले चेयरमैन की दौड़ में Tata Steel के CEO टीवी नरेंद्रन और Tata Sons के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल नरेंद्रन और अग्रवाल के साथ चौहान का नाम भी शामिल किया गया था।

NSE के मुताबिक, चौहान ने ऐसी खबरों रो साफ तौर पर खारिज किया है। उन्होंने इन्हें अटकलों पर आधारित और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।

चौहान ने भी किया इनकार

चौहान ने NSE को भेजे ईमेल में कहा कि Tata Sons के चेयरमैन पद से उनका नाम जोड़ने वाली खबरें पूरी तरह निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान अभी NSE की जिम्मेदारियों पर है। खासतौर पर एक्सचेंज के प्रस्तावित IPO पर उनका फोकस है।

NSE IPO पर ध्यान

चौहान ने कहा कि वह बोर्ड और शेयरधारकों के साथ मिलकर NSE की सफल लिस्टिंग के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह लगे हुए हैं।

NSE लंबे समय से अपने IPO की तैयारी कर रहा है। ऐसे में कंपनी के नेतृत्व की भूमिका अहम है। चौहान ने साफ किया है कि फिलहाल उनका ध्यान NSE की लिस्टिंग और उससे जुड़े काम पर है।

GST Council Meeting: 12 सितंबर की मीटिंग टली, ब्रिक्स की वजह से अब 7 अक्टूबर को होगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FY27 में SBI में 12000 तक कर्मचारियों की हो सकती है ​हायरिंग, खुलेंगी 250 नई ब्रांच

सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (SBI) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती करने वाला है। साथ ही लगभग 250 नई ब्रांच खोलने का भी प्लान है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक बातचीत में SBI के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने कहा कि बैंक चालू वित्त वर्ष में क्लर्क और अधिकारी स्तर पर करीब 11,000 से 12,000 नियुक्तियां करेगा। रिटायरमेंट और उभरती जरूरतों के आधार पर नियुक्तियों की संख्या कुछ कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक करीब 12,000 लोगों की भर्ती हो जाएगी।

पिछले साल बैंक ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की थीं, जिसमें 1,500 विशेषज्ञ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) अधिकारी भी शामिल हैं। इस साल आईटी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में भर्तियों की जरूरत नहीं है। मार्च 2026 तक SBI के कर्मचारियों की संख्या 2.45 लाख से अधिक थी। बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में SBI ने कुल 25,633 कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। अधिकारी स्तर पर 4,640, एसोसिएट लेवल पर 19,340 और कॉन्ट्रैक्चुअल स्टाफ के तौर पर 1,653 लोगों को हायर किया गया था।

शेट्टी ने कहा कि बड़ा ब्रांच नेटवर्क होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अब भी SBI के लिए विस्तार की गुंजाइश है। नई कॉलोनियों के विकसित होने के साथ-साथ व्यावसायिक रूप से सक्रिय जिलों में भी बैंक अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। मौजूदा वित्त वर्ष में 200 से 250 नई ब्रांच खोलने की योजना है।

NSE IPO में कितनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में शेयरों की बिक्री के बारे में शेट्टी ने कहा कि SBI और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स मिलकर NSE में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। NSE 0.65 प्रतिशत और NSE कैपिटल मार्केट्स 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। अन्य शेयरधारकों के भी हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में SBI समूह की ओर से बिक्री 1 प्रतिशत से कम भी रह सकती है। वर्तमान में SBI के पास NSE में 3.23 प्रतिशत और SBI कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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NSE 30,000 करोड़ रुपये का IPO ला रहा है। बीते सप्ताह इसे कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना IPO लाने के लिए के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। लेकिन अब रास्ता साफ है। आइए जानते हैं NSE IPO के बारे में अब तक क्या पता चला है…

साइज और नेचर

NSE IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए शेयर बिक्री से मिला पैसा, OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा।

OFS में कौन बेचेगा शेयर

एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर यानि लगभग 6% हिस्से को बिक्री के लिए रखेंगे। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। SBI अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेच सकती है। एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री कर सकती है।

शेयर बेचने वाले अन्य प्रमुख शेयरधारकों में कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इनवेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।

ओपनिंग और लिस्टिंग की संभावित तारीख

इश्यू के 15 सितंबर को खुलने और 24 या 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है। शेयर BSE पर लिस्ट होंगे।

नए सप्ताह में तय हो सकता है प्राइस बैंड

कहा जा रहा है कि NSE अगले सप्ताह IPO के लिए प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य डिटेल्स की घोषणा कर सकता है।

कैसे होगा देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब NSE का 30,000 करोड़ रुपये का IPO आ रहा है। हालांकि, सबसे बड़े IPO के तमगे को लेकर इसकी टक्कर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड से है। जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है। लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है।

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IPO के बाद टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में हो सकती है NSE की एंट्री

यह IPO NSE को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल कर सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IPO से NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर

NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।

IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट

NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE की वित्तीय सेहत

NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या NSE के IPO से पहले BSE के शेयरों में निवेश करना समझदारी है?

बीएसई के शेयरों में 4 सितंबर को जोरदार तेजी आई। यह 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 3,411 रुपये पर बंद हुआ। 3 सितंबर को भी शेयर में तेजी आई थी। इस तेजी की बड़ी वजह बीएसई के एमडी और सीईओ का यह बयान है कि आईपीओ के बाद एनएसई अपने शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करा सकता। 4 सितंबर को एनएसई के आईपीओ को सेबी की क्लियरेंस मिल गई। सवाल है कि क्या अभी बीएसई के शेयरों में निवेश करना समझदारी है?

ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद बिकवाली दबाव

शेयर डॉट मार्केट बाय फोनपे के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि बीएसई के शेयर इस साल की शुरुआत में 4,500 रुपये के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गए थे। उसके बाद शेयरों पर लगातार बिकवाली का दबाव दिखा है। हालांकि, करीब 3,265 रुपये के 200-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को टेस्ट करने के बाद शेयर में फिर से खरीदारी शुरू हुई।

रेसिस्टेंस लेवल को पार करने के बाद आ सकती है तेजी

उन्होंने कहा, “डेली चार्ट पर शेयर 3,265 रुपये के अपने 200-डे एसएम के करीब सपोर्ट लेवल को टेस्ट कर रहा है। यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का भरोसेमंद बेस है। हालांकि, 3,550 रुपये के नजदीक 50-डे एसएम पर अगला रेसिस्टेंस है।” उन्होंने कहा कि अगर शेयर इस लेवल को पार करने के बाद लगातार इसके ऊपर बना रहता है तो इसका ट्रेंड बदलने की पुष्टि हो जाएगी। इसके बाद इसमें तेजी दिखेगी।

CAS पर सेबी के बयान से बीएसई के शेयरों में तेजी

सेबी के इस बयान से भी बीएसई के शेयर को मजबूती मिली है कि वह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS पर विचार करेगा। CAS की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। उसके बाद शेयरों में काफी ज्यादा खासकर एक्सपायरी के दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सेबी को सीएएस के बारे में काफी फीडबैक मिले हैं। वह उन पर विचार करने के बाद CAS सिस्टम में कुछ बदलाव कर सकता है।

शॉर्ट टर्म में दिख सकता है शेयर में पुलबैक

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वाइस प्रेसिडेंट रुचित जैन ने कहा कि बीएसई का शेयर 4,400 रुपये के हाई लेवल से करेक्ट हुआ है। यह 3,200 रुपये पर आ गया है। RSI से शेयर के ओवरसोल्ड जोन में होने का संकेत मिलता है। अगर यह शेयर 3,200-3,150 रुपये के सपोर्ट लेवल से ऊपर बना रहता है तभी शॉर्ट टर्म में इसमें पुलबैक दिख सकता है।

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एनएसई के शेयर अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होंगे

पीएल कैपिटल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर एनएसई के शेयर उसके खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं तो इससे FY27 में बीएसई की अर्निंग्स पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ऐसा लगता है कि एनएसई के शेयर अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होंगे। स्टॉक एक्सचेंज के शेयर को अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की इजाजत नहीं है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

NSE के आईपीओ को सेबी की हरी झंडी, जानें किस तारीख को लिस्ट होंगे शेयर

NSE के आईपीओ के लिए रास्ता साफ हो गया है। इसे सेबी की हरी झंडी मिल गई है। मार्केट रेगुलेटर ने 4 सितंबर को एनएसई को ऑब्जर्वेशन लेटर इश्यू कर दिया। इस इश्यू का इनवेस्टर्स को लंबे समय से इंतजार रहा है। यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

जून में फाइल किया था DRHP

NSE ने सेबी के पास 17 जून, 2026 को ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया था। करीब एक दशक पहले एनएसई ने आईपीओ पेश करने की कोशिश की थी। लेकिन, रेगुलेटरी मसलों की वजह से इश्यू को मंजूरी नहीं मिल सकी थी। अब ऑब्जर्वेशन लेटर मिल जाने के बाद एनएसई का आईपीओ अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है।

11 सितंबर को प्राइस बैंड का ऐलान 

एनएसई इस महीने के आखिर में आईपीओ लॉन्च कर सकता है। एक्सचेंज के शेयर BSE पर लिस्ट होंगे। बाजार के सूत्रों ने बताया है कि आरएचपी फाइलिंग 8 सितंबर यानी मंगलवार को हो सकती है। प्राइस बैंड का ऐलान 11 सितंबर को हो सकता है। एक हफ्ते बाद इश्यू बाजार में आ सकता है। शेयरों की लिस्टिंग 25 सितंबर को हो सकती है।

यह इश्यू पूरी तरह से OFS होगा

सूत्रों ने बताया कि अभी एनएसई की तरफ से इश्यू से जुड़े अहम डेट्स का ऐलान नहीं किया गया है। इस बारे में अभी एक्सचेंज मर्चेंट बैंकर्स से चर्चा कर रहा है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इस इश्यू में एक्सचेंज नए शेयर इश्यू नहीं करेगा।

आईपीओ में 14.89 करोड़ शेयर बिकेंगे

एक्सचेंज के आईपीओ में 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री होगी, जो एनएसई के पेड-अप कैपिटल का करीब 6 फीसदी है। चूंकि, एक्सचेंज इस इश्यू में नए शेयर इश्यू नहीं करेगा, जिससे उसे आईपीओ से कोई पैसा नहीं मिलेगा। अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई की वैल्यूएशन के आधार पर यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।

देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा 

यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इससे पहले ह्युंडई मोटर इंडिया ने 2024 में 27,870 करोड़ का आईपीओ पेश किया था, जो देश का सबसे बड़ा आईपीओ था। एनएसई के आईपीओ से यह रिकॉर्ड टूट जाएगा। हालांकि, एनएसई ने अभी आईपीओ के फाइनल साइज का ऐलान नहीं किया है।

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एसबीआई ग्रुप बेच रहा सबसे ज्यादा शेयर 

इस आईपीओ में सबसे ज्यादा शेयर एसबीआई ग्रुप बेच रहा है। एनएसई का मुकाबला बीएसई से है। बीएसई न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज है। लेकिन, कैश और डेरिवेटिव के ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में यह एनएसई से काफी पीछे है। BSE का शेयर 4 सितंबर को 3.17 फीसदी गिरकर 3,411 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल करीब 30 फीसदी चढ़ा है।

ESDS Software Solution: लिस्टिंग के दिन डबल से भी ज्यादा हुआ IPO निवेशकों का पैसा, अब क्या स्ट्रैटेजी- बाय, सेल या होल्ड?

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के IPO में शेयर पाने वाले निवेशक इस वक्त सातवें आसमान पर हैं। कारण है कि लिस्टिंग के दिन ही उनका पैसा डबल से भी ज्यादा हो गया है। 4 सितंबर को कंपनी का शेयर BSE पर करीब 74 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 746.30 रुपये और NSE पर 76.4 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 757 रुपये पर लिस्ट हुआ। इसके बाद इसमें 20 प्रतिशत का उछाल आया और BSE पर 895.55 रुपये व NSE पर 908.40 रुपये पर अपर सर्किट लगा। इस तरह शेयर फाइनल इश्यू प्राइस 429 रुपये प्रति शेयर से 111.75 प्रतिशत तक ऊपर पहुंच गया है।

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का 720 करोड़ रुपये का IPO 1 सितंबर को बंद हुआ था। इसे कुल 142.88 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 274.97 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 202.87 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 41.68 गुना भरा था।

कंपनी AI-इनेबल्ड क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर-एज-अ-सर्विस (IaaS), मैनेज्ड सर्विसेज और सॉफ्टवेयर-एज-अ-सर्विस (SaaS) जैसी एंड-टू-एंड सर्विसेज देती है।

ESDS Software Solution पर ब्रोकरेज की राय

स्वास्तिका इन्वेस्टस्मार्ट में वेल्थ हेड शिवानी न्याति का कहना है, ‘हमारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर-सिक्योरिटी और डिजिटलाइजेशन की मांग बढ़ रही है। यह ESDS के लिए लंबे समय में ग्रोथ का एक अच्छा मौका दे रही है। इसके चलते लिस्टिंग के बाद भी मीडियम से लॉन्ग टर्म के लिए सकारात्मक नजरिया बना हुआ है।’

आगे कहा, “लिस्टिंग के दिन हुए गेन को देखते हुए कुछ समय के लिए मुनाफावसूली हो सकती है क्योंकि वैल्यूएशन, फंडामेंटल से आगे निकल गए हैं। जिन्हें शेयर अलॉट हुए हुए हैं, वे मौजूदा स्तरों पर कुछ हद तक मुनाफा बुक करने और बाकी होल्डिंग पर ₹650–680 के आसपास स्टॉप लॉस लगाने पर विचार कर सकते हैं। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिले हैं, उनके लिए बेहतर होगा कि वे फ्रेश एंट्री के बारे में सोचने से पहले ₹600–650 की ओर गिरावट का इंतजार करें।”

मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफ़िसर डॉ. रवि सिंह का कहना है कि लंबे समय के लिए निवेश करने वालों को कंपनी का बिजनेस अभी भी काम का लग सकता है। इसकी वजह है कि आने वाले सालों में क्लाउड, डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग से कंपनी की ग्रोथ को बढ़ावा मिल सकता है। जिन निवेशकों को शेयर मिले हैं, वे थोड़ा मुनाफा बुक कर सकते हैं और बाकी शेयर लंबे समय के लिए होल्ड कर सकते हैं। वहीं जिन्हें IPO में शेयर नहीं मिले, वे कीमत कम होने पर इन्हें खरीद सकते हैं।

NSE IPO की संभावित डेट आते ही रॉकेट बने IFCI और New India Assurance Company के शेयर

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NSE के आईपीओ की संभावित डेट आते ही रॉकेट बने IFCI और New India Assurance Company के शेयर

न्यू इंडिया एश्योरेंस और आईएफसीआई के शेयर 4 सितंबर को रॉकेट बन गए। इसकी वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ से जुड़ी एक बड़ी खबर है। खबर के मुताबिक, एनएसई 25 सितंबर को अपने शेयर लिस्ट कराना चाहता है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट में बताया गया है कि सेबी से एनएसई के आईपीओ को अगले हफ्ते मंजूरी मिल सकती है।

11 सितंबर को हो सकता है प्राइस बैंड का ऐलान 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, एप्रूवल के बाद NSE सेबी के पास अपडेटेट ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करेगा। इस खबर में यह भी बताया गया है कि एनएसई 11 सितंबर को आईपीओ में शेयर के प्राइस बैंड का ऐलान कर सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपने शेयर की लिस्टिंग 25 सितंबर को चाहता है। इस खबर में कहा गया है कि एक्सचेंज ने सेबी को इस बारे में लिखा है। वह जवाब का इंतजार कर रहा है।

New India Assurance का शेयर 16 फीसदी उछला

इस खबर का 4 सितंबर को IFCI और New India Assurance के शेयरों पर असर दिखा। आईएफसीआई का शेयर एक समय 11 फीसदी तक चढ़ गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 12:45 बजे यह शेयर 8.43 फीसदी चढ़कर 104 रुपये पर चल रहा था। New India Assurance का शेयर 16.29 फीसदी चढ़कर 227 रुपये पर चल रहा था। दोनों कंपनियों की एनएसई में हिस्सेदारी है। एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करेगा NSE

IFCI सरकार की कंपनी है। यह एक एनबीएफसी है। इसकी स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) में 52 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसकी NSE में 4.4 फीसदी हिस्सेदारी है। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की NSE में 1.42 फीसदी हिस्सेदारी है। एनएसई का आईपीओ देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। करीब 55 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर एनएसई आईपीओ में 6 फीसदी हिस्सेदारी बेचती है तो इश्यू का साइज 31,500 करोड़ रुपये रह सकता है।

अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्युंडई के नाम

अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई मोटर इंडिया के नाम है। उसने 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ 2024 में पेश किया था। इससे पहले LIC ने करीब 21000 करोड़ रुपये का आईपीओ 2022 में पेश किया था। ह्युंडई ने सबसे बड़े आईपीओ के एलआईसी का रिकॉर्ड तोड़ा था।

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4 सितंबर को बीएसई के शेयरों में भी दिखी तेजी 

NSE का मुकाबला बीएसई से है। बीएसई एशिया का सबसे पुराना एक्सचेंज है। लेकिन, ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से यह एनएसई से काफी पीछे है। बीएसई के शेयर पहले से एनएसई में सूचीबद्ध हैं। 4 सितंबर को बीएसई के शेयरों में तेजी दिखी। 1 बजे शेयर का भाव 3.23 फीसदी चढ़कर 3,413 रुपये पर चल रहा था।

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