अगले 6-12 महीनों में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है बाजार, नीलेश शाह ने बताई वजह

बाजार अगले 6-12 महीनो में नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। इनविजन कैपिटल के फाउंडर नीलेश शाह ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रहने की उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ, अनुकूल पॉलिसी और बेहतर होते इनवेस्टर सेंटिमेंट से अगली कुछ तिमाही में पेटीएम के शेयरों में तेजी जारी रह सकती है।

बाजार अगले चरण की तेजी के लिए तैयार

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कंसॉलिडेशन के बाद शेयर बाजारों में अगले चरण की तेजी के लिए एक मजबूत बुनियाद बनी है। बैंकिंग और आईटी जैसे सेक्टर में अच्छी अर्निंग्स ग्रोथ दिख सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) की खरीदारी भी फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इससे अगले 6 से 12 महीनों में बाजार के प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

इन वजहों से बढ़ेगी कॉर्पोरेट अर्निंग्स

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ने के बड़े कारण हैं। अगली कुछ तिमाहियों में स्ट्रॉन्ग ग्रोथ दिख सकती है। बीती कुछ तिमाहियों में पॉलिसी के स्तर पर जो कदम उठाए गए हैं, उनका पूरा असर अभी कंपनियों की अर्निंग्स पर नहीं दिखा है।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार नए रिफॉर्म्स करती है तो इससे विदेशी कैपिटल की आवक शुरू हो सकती है।

इन सेक्टर का प्रदर्शन कंसॉलिडेशन के दौरान भी बेहतर

शाह ने कहा कि कुल मिलाकर आउटलुक कंस्ट्रक्टिव लगता है। ऐसा लगता है कि बुरा दौर बीत चुका है। उन्होंने उन सेक्टर्स को अपनी पसंद बताया, जिनका प्रदर्शन बाजार में कंसॉलिडेशन के दौरान भी अच्छा रहा। इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, डिफेंस और एयरोस्पेस कंपनियां शामिल हैं।

आने वाले हैं बाजार में बड़े आईपीओ

उन्होंने कहा कि एनएसई और एनएसडीएल के आईपीओ आने वाले हैं। मार्केट में लिक्विडिटी का एक बड़ा हिस्सा इन शेयरों में जाएगा। हालांकि, म्यूचु्अल फंड्स और सिप के जरिए अच्छा निवेश हो रहा है, जिससे मार्केट में अतिरिक्त सप्लाई से कोई निगेटिव असर नहीं पड़ेगा।

यह भी पढ़ें: यूएस फ्यूचर्स, भारत, दक्षिण कोरिया सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में मचा कोहराम

बाजार का सेंटीमेंट अब हो रहा बेहतर

बीते कुछ महीनों में बाजार पर बड़ा दबाव दिखा था, जिसकी वजह मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड की कीमतों में उछाल था। अब क्रूड की कीमतें नीचे आ रही हैं। इसका पॉजिटिव असर मार्केट पर पड़ा है। अमेरिका-ईरान के बीच डील की खबर का भी बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ा है।

PSU Stocks: 7 कारोबारी दिनों में 48% चढ़ा इस सरकारी कंपनी का शेयर, इस कारण निवेशकों को मिला छप्परफाड़ रिटर्न

New India Assurance Shares: न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के शेयरों में आज लगातार सातवें दिन खरीदारी का शानदार रुझान दिखा। इन सात दिनों में यह 48% से अधिक उछलकर यह एक साल के नए हाई पर पहुंच गया। यह इसके शेयरों के लिए अब तक की सबसे लंबी रैली है। इससे पहले नवंबर 2024 में यह लगातार 12 कारोबारी दिनों तक ऊपर चढ़ा था और 21 नवंबर से 9 दिसंबर तक क्लोजिंग बेसिस पर 12 कारोबारी दिनों में यह 22% से अधिक ऊपर चढ़ा था। इसके शेयरों के मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 6.56% के उछाल के साथ ₹215.35 (New India Assurance Share Price) पर है। इंट्रा-डे में यह 7.87% उछलकर ₹218.00 तक पहुंच गया था।

New India Assurance के शेयरों में NSE IPO ने भरी चाबी

न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों को एनएसई के आईपीओ से सपोर्ट मिला है। पिछले हफ्ते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने आईपीओ का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल किया था। इस ड्राफ्ट से सामने आया कि एनएसई के आईपीओ के तहत जो शेयरहोल्डर् अपनी हिस्सेदारी हल्की कर रहे हैं, उनमें न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी का भी नाम है। ड्राफ्ट के मुताबिक न्यू इंडिया एश्योरेंस इस आईपीओ के तहत ₹1 की फेस वैल्यू वाले 1.05 करोड़ शेयर बेचने वाली है। चूंकि सरकारी इंश्योरेंस कंपनी के लिए एनएसई में होल्डिंग प्रति शेयर महज ₹0.32 के भाव के हिसाब से है तो शेयर बेचने पर इसे तगड़ा फायदा होने वाला है।

मार्च 2026 तिमाही के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के हिसाब से न्यू इंडिया एश्योरेंस में सरकार की हिस्सेदारी 85% है तो पब्लिक शेयरहोल्डर्स में एलआईसी की हिस्सेदारी 8.67% और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) की 1.31% होल्डिंग है। साथ ही ₹2 लाख तक के निवेश वाले 1.5 लाख छोटे खुदरा निवेशकों की कंपनी में 1.8% हिस्सेदारी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों ने निवेशकों की ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले वित्त वर्ष 2026 के आखिरी कारोबारी दिन 30 मार्च 2026 को बीएसई पर यह ₹116.95 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 3 ही महीने में यह 86.49% उछलकर आज 22 जून 2026 को ₹218.00 के भाव पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। वैसे बता दें कि सरकारी बीमा कंपनी ने साल 2018 में 1:1 के रेश्यो में बोनस इश्यू जारी किया था और यह बोनस से एडजस्टेड आईपीओ प्राइस ₹400 के नीचे बना हुआ है।

NOCIL Shares: 20% उछलकर शेयर अपर सर्किट पर, DGTR के इस फैसले के बाद बनाया उछाल का रिकॉर्ड

Dividend Stocks: 5 लाख खुदरा निवेशकों को स्पेशल डिविडेंड देने की तैयारी, ऐलान पर बढ़ी इस FMCG स्टॉक की चमक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स ने 19 इन्वेस्टमेंट बैंकों को बनाया बुक रनिंग लीड मैनेजर, ₹37700 करोड़ जुटाने की रहेगी कोशिश

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने IPO के लिए शुक्रवार, 19 जून को ड्राफ्ट पेपर कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कर दिया। इस पब्लिक इश्यू के जरिए कंपनी करीब 4 अरब डॉलर (लगभग 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बना रही है। इससे कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 137 अरब डॉलर आंकी गई है। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने अपने प्रस्तावित IPO के लिए 19 इन्वेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। यह किसी एक पब्लिक ऑफरिंग के लिए नियुक्त किए गए बैंकों की संख्या के हिसाब से दूसरा सबसे बड़ा मामला है।

DRHP के अनुसार, इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।

इन 19 इनवेस्टमेंट बैंकों में से कोटक महिंद्रा कैपिटल को कैपिटल स्ट्रक्चरिंग, DRHP ड्राफ्टिंग, SEBI और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के नियमों का पालन, कानूनी विज्ञापन, मध्यस्थों की नियुक्ति और घरेलू संस्थागत मार्केटिंग के लिए लीड कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।

Jio IPO जारी होंगे 27 करोड़ नए शेयर

19 जून को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।

NSE IPO के लिए 20 बैंकर

हाल ही में, NSE ने घोषणा की थी कि उसके प्रस्तावित IPO में लगभग 20 बैंकर होंगे, जो किसी एक इश्यू के लिए बैंकरों की सबसे ज्यादा संख्या होगी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) भी सेबी के पास अपने IPO का ड्राफ्ट जमा कर चुका है। इससे करीब 30,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का प्लान है। IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। शेयरों को बिक्री के लिए रखने वालों में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड शामिल हैं। NSE में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाली LIC कोई शेयर नहीं बेचेगी।

Jio Platforms IPO में जारी होंगे 27 करोड़ तक नए शेयर, जल्द मिलने वाला है पैसा लगाने का मौका

देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है Jio IPO

Jio का पब्लिक इश्यू भारत में अब तक का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लेकर आ रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

NSE IPO: एएसई में हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी, न्यू इंडिया 14% उछला

एनएसई में हिस्सेदारी रखने वाले बैंकों और कंपनियों के शेयरों में 18 जून को पंख लग गए। एनएसई ने 17 जून को आईपीओ के लिए सेबी के पास पेपर्स फाइल कर दिए हैं। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) होगा। मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपने करीब 14.89 करोड़ शेयर ओएफएस में बेचेंगे।

कई शेयरहोल्डर्स ओएफएस में बेचेंगे हिस्सेदारी

एनएसई के कई शेयरहोल्डर्स ओएफएस में अपने शेयर बचेंगे। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी शामिल हैं। इन सभी के शेयरों में 18 जून को तेजी देखने को मिली। सबसे ज्यादा 14 फीसदी का उछाल न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों में आया।

एसबीआई 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एनएसई के 2.48 करोड़ शेयर बेचेगा। एमएस स्ट्रेटेजिक (मॉरीशस) 1.6 करोड़ शेयर बेचेगी। LIC की एनएसई में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। वह ओएफएस में शेयर नहीं बेचेगी। इस खबर से 18 जून को एलआईसी के शेयरों में भी उछाल दिखा। यह शेयर 2.97 फीसदी चढ़कर 430.55 रुपये पर बंद हुआ।

ये कंपनियां भी ओएफएस में बेचेंगी शेयर

कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड एनएसई के ओएफएस में 1.19 करोड़ शेयर बेचेगा। Aranda Investments (Mauritius) 1.12 करोड़ शेयर बेचेगी। बैंक ऑफ बड़ौदा 1.1 करोड़ शेयर बेचेगा। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन 1.09 करोड़ शेयर बेचेगा। जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन 1.07 करोड़ शेयर बेचेगी। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।

स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन की 4.44 फीसदी हिस्सेदारी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एनएसई में 3.23 फीसदी हिस्सेदारी है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33 फीसदी हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की एनएसई में 4.44 फीसदी हिस्सेदारी है।

30,000 करोड़ का हो सकता है एनएसई का आईपीओ

एनएसई के मौजूदा शेयरहोल्डर्स एक्सचेंज के 6 फीसदी शेयर बेचेंगे। एनएसई का आईपीओ 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई के नाम है। उसने 2024 में भारत में 27,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। इससे पहले एलआईसी का आईपीओ सबसे बड़ा था। करीब 21000 करोड़ का यह आईपीओ 2022 में आया था।

हिस्सेदारी बेचने वाली कंपनियों को जबर्दस्त प्रॉफिट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनएसई में हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों में 18 जून को तेजी इस वजह से आई, क्योंकि इन शेयरों को अपने शेयर बेचने से निवेश पर जबर्दस्त प्रॉफिट होने जा रहा है। उदाहरण के लिए एसबीआई को एनएसई में अपने 2 करोड़ रुपये के निवेश पर करीब 5000 करोड़ का प्रॉफिट हो रहा है।

Max Healthcare Share Price: 6% उछलकर निफ्टी का टॉप गेनर बना शेयर, सिटी हुआ बुलिश, दिया ‌₹1,240 का टारगेट प्राइस

Max Healthcare Share Price: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट (Max Healthcare) के शेयर गुरुवार 18 जून को 6 फीसदी की तेजी देखने को मिली और यह निफ्टी 50 पर टॉप गेनर बना। दोपहर के ट्रेड में मैक्स हेल्थकेयर का स्टॉक 1,088 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जिससे हॉस्पिटल ऑपरेटर की वैल्यू लगभग 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह रैली बड़े मार्केट से काफी आगे निकल गई, उस समय निफ्टी 50 0.12 फीसदी की तेजी दिखा रहा था।

बता दें कि सिटी ने पिछले साल स्टॉक में करेक्शन के बाद एक फेवरेबल रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल पर जोर दिया और अगले कई सालों में मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान लगाया। सिटी ने मैक्स हेल्थकेयर स्टॉक पर 1,240 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी। ब्रोकरेज ने कहा कि पिछले साल स्टॉक में लगभग 18 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे वैल्यूएशन हिस्टोरिकल एवरेज पर वापस आ गए हैं।

सिटी के मुताबिक, वैल्यूएशन करेक्शन से स्टॉक का अट्रैक्शन बेहतर हुआ है, ऐसे समय में जब कंपनी मीडियम-टर्म में मज़बूत ग्रोथ प्रोफाइल दे रही है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मैक्स हेल्थकेयर FY26 और FY30 के बीच 20 परसेंट EBITDA कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देगी, जिसे कैपेसिटी बढ़ाने और इसके हॉस्पिटल नेटवर्क में ग्रोथ से सपोर्ट मिलेगा।

सिटी को FY27 में लगभग 15 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है और कहा कि FY28 में ग्रोथ और तेज़ हो सकती है क्योंकि एक्सपेंशन के काम ज़्यादा असरदार तरीके से होने लगेंगे। हालांकि, ब्रोकरेज ने एग्ज़िक्यूशन में देरी को एक बड़ा रिस्क बताया है जो ग्रोथ की रफ़्तार पर असर डाल सकता है।

मैक्स हेल्थकेयर के अपने फिस्कल चौथी तिमाही के रिज़ल्ट बताने के कुछ हफ़्ते बाद ब्रोकरेज की यह पॉज़िटिव कमेंट्री आई है। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल 3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 387 करोड़ रुपये पोस्ट किया, जबकि रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 2,664 करोड़ रुपये हो गया।

रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से ज़्यादा पेशेंट थ्रूपुट की वजह से हुई, जिसमें एक साल पहले की तुलना में ऑक्यूपाइड बेड डेज़ में 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पूरे नेटवर्क में बेड ऑक्यूपेंसी 75 फीसदी पर स्थिर रही, जो हेल्थकेयर सर्विसेज़ की लगातार डिमांड को दिखाता है।

हालांकि, एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स परफॉर्मेंस को मिला-जुला माना। वॉल्यूम ग्रोथ अच्छी रही, लेकिन एग्रेसिव हायरिंग और चल रही कैपेसिटी बढ़ाने की वजह से मार्जिन पर दबाव आया। नतीजों के बाद स्टॉक में गिरावट आई थी क्योंकि अर्निंग्स एनालिस्ट्स के अनुमान से कम रही थीं।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के एनालिस्ट्स ने अर्निंग्स मिस का कारण ज़्यादातर ज़्यादा टैक्स रेट बताया था, हालांकि ब्रोकरेज ने कहा कि ऑपरेटिंग ट्रेंड्स मोटे तौर पर स्थिर रहे।

NSE IPO: दमानी, मुंजाल, गोपालकृष्णन की जेब में आ सकते हैं करोड़ों रुपये, यहां देखें शेयरहोल्डर्स की पूरी लिस्ट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NSE IPO: दमानी, मुंजाल, गोपालकृष्णन की जेब में आ सकते हैं करोड़ों रुपये, यहां देखें शेयरहोल्डर्स की पूरी लिस्ट

एनएसई के आईपीओ से कई शेयरहोल्डर्स को मोटी कमाई हो सकती है। इनमें कई दिग्गज इनवेस्टर्स और बड़े उद्योगपति शामिल हैं। इनमें डीमार्ट के प्रमोटर राधाकिशन दमानी, हीरो ग्रुप के फाउंडर सुनील कांत मुंजाल, इंफोसिस के को-फाउंडर एस गोपालकृष्णन, डीमार्ट के पूर्व सीईओ और एमडी ग्नाटियस नविल नोरोन्हा और दिग्गज इनवेस्टर डॉली खन्ना शामिल हैं।

अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई के शेयर की कीमत 2000 रुपये से ऊपर चल रही है। दमानी की एनएसई में 1.58 फीसदी हिस्सेदारी है। इसकी वैल्यू करीब 7,817 करोड़ रुपये है। इसका मतलब है कि एनएसई के शेयर बेचने से उन्हें बड़ा मुनाफा होगा। उन्होंने ये शेयर किस भाव पर लिए थे, यह जानकारी एनएसई के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में नहीं है।

सुनील कांत मुंजाल की एनएसई में करीब 0.41 फीसदी हिस्सेदारी है। उनके पास एनएसई के 1.02 करोड़ शेयर हैं। इन शेयरों की वैल्यू करीब 2,040 करोड़ रुपये है। गोपालकृष्णन के पास एनएसई के 94.29 लाख शेयर हैं। इनकी वैल्यू 1,886 करोड़ रुपये है। नोरोन्हा के पास एनएसई के 30 लाख शेयर हैं, जिनकी वैल्यू 600 करोड़ रुपये है।

डॉली खन्ना के पास एनएसई के 15.17 लाख शेयर हैं, जिनकी वैल्यू 303 करोड़ रुपये है। सिद्धार्थ बालाचंद्रन की एनएसई में करीब 0.38 फीसदी हिस्सेदारी है, जिनकी वैल्यू 1,863 करोड़ रुपये है। दिग्गज इनवेस्टर वनाजा सुंदर अय्यर के पास 44 लाख शेयर हैं, जिनकी वैल्यू 880 करोड़ रुपये है।

एनएसई के शेयर रखने वाले निवेशकों की लिस्ट काफी बड़ी है। ऐसे एक दर्जन से ज्यादा इनवेस्टर्स हैं, जिनकी एनएसई में 0.05 से 0.30 फीसदी तक हिस्सेदारी है। इनकी वैल्यू 140 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये के बीच है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन निवेशकों की हिस्सेदारी की फाइनल वैल्यूएशन का पता आईपीओ में शेयर का प्राइस बैंड तय होने के बाद चलेगा। लेकिन, सेबी के पास फाइल डीआरएचपी से यह संकेत मिलता है कि इन शेयरों को काफी कम कीमत पर खरीदा गया था।

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की एनएसई में सबसे ज्यादा 10.7 फीसदी हिस्सेदारी है। उसके पास एनएसएई के 26.5 करोड़ शेयर हैं। इसकी कीमत 50,641 करोड़ रुपये है। एनएसई ने सेबी के पास डीआरएचपी 17 जून को फाइल कर दिया। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा।

ओएफएस का मतलब है कि इस आईपीओ में एनएसई इनवेस्टर्स को नए शेयर एलॉट नहीं करेगी। शेयरहोल्डर्स एक्सचेंज के करीब 6 फीसदी शेयर बेचेंगे। करीब 30,000 करोड़ रुपये का एनएसई का आईपीओ भारत का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। अभी सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड ह्यूंडई मोटर के नाम है। उसने 2024 में 27,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था।

NSE ने 10 साल बाद IPO के लिए दाखिल किया DRHP; ₹30000 करोड़ का हो सकता है इश्यू; SBI बेचेगा सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का IPO आखिरकार 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आगे बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने बुधवार को SEBI और BSE के पास 607 पेज का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया। NSE के शेयर सिर्फ BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक वैसे ही जैसे BSE के शेयर सिर्फ NSE पर लिस्टेड हैं।

यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी एक्सचेंज को कोई नया पैसा नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। प्रस्तावित योजना के तहत शेयरधारक मिलकर NSE की करीब 6% इक्विटी बेचेंगे।

कितना होगा NSE का वैल्यूएशन

अनलिस्टेड मार्केट में NSE का वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये माना जा रहा है। इस आधार पर मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,000 करोड़ रुपये के IPO के बाद सबसे बड़ा IPO होगा।

दिलचस्प बात यह है कि NSE की प्रमुख शेयरधारक और देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) इस OFS में अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रही है।

SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक

ड्राफ्ट दस्तावेज के मुताबिक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ा सेलिंग शेयरधारक होगा। बैंक 2.47 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। इसके अलावा मॉरीशस स्थित MS Strategic (Mauritius) Limited 1.60 करोड़ शेयर बेच सकती है। वहीं, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड करीब 1.19 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी।

अन्य प्रमुख विक्रेताओं में Aranda Investments (Mauritius) Pte. Ltd., बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन शामिल हैं। ये सभी करीब 1.1 करोड़ शेयर तक बेच सकते हैं।

बीमा कंपनियां भी बेचेंगी हिस्सेदारी

सरकारी बीमा कंपनियां भी इस IPO में अपनी हिस्सेदारी घटाएंगी।

  • जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) करीब 1.06 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड करीब 1.05 करोड़ शेयर बेचेगी।
  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड लगभग 60-60 लाख शेयर बेचेंगी।

IPO फाइलिंग से पहले NSE की IPO कमेटी ने बुधवार को बैठक कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया। NSE के बोर्ड ने सोमवार को DRHP को मंजूरी दी थी।

जनवरी में मिली थी SEBI की मंजूरी

NSE के बोर्ड ने 6 फरवरी 2026 को IPO प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले जनवरी 2026 में SEBI ने एक्सचेंज को ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) दिया था। इसी के बाद लिस्टिंग का रास्ता साफ हुआ।

SEBI की यह मंजूरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने मामलों के अंतिम निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था IPO

NSE की लिस्टिंग करीब 10 साल से अटकी हुई थी। इसकी सबसे बड़ी वजह को-लोकेशन विवाद था, जिसमें कुछ ब्रोकरों को ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले तेज और प्राथमिक पहुंच मिलने के आरोप लगे थे।

NSE ने 2016 में करीब 10,000 करोड़ रुपये के OFS के लिए पहली बार ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। लेकिन SEBI ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए। IPO की तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर समेत कई सलाहकार भी नियुक्त किए। फिलहाल NSE के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं।

को-लोकेशन केस में सेटलमेंट की कोशिश

NSE ने जून 2025 में को-लोकेशन मामले में सेटलमेंट एप्लिकेशन दाखिल की थी। इसमें केस निपटाने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) करीब 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश कर चुकी थी। यह मामला अभी भी SEBI के विचाराधीन है।

Stocks to Watch: 18 जून को इन 10 स्टॉक्स पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।