Stock market Outlook : 23400 के ऊपर जाने पर ही निफ्टी में आ सकती है तेजी, ट्रेडिंग के लिए इन अहम लेवल्स पर रहे नजर

Stock market Outlook : गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और मॉनेटरी पॉलिसी को और सख्त करने के संकेत के बाद बाजार में सावधानी का माहौल रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ा। इंट्राडे में हुई बढ़त को गंवाते हुए सेंसेक्स 21.86 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 341.11 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,677.56 पर पहुंच गया था। वहीं, निफ्टी मामूली बढ़त के साथ 5.3 अंक या 0.02 प्रतिशत ऊपर 23,270.60 पर बंद हुआ।

पिछले पांच हफ्तों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट के बाद कल निफ्टी लगातार दूसरे सेशन में हरे निशान में रहा। इस बढ़त का कारण कुछ खास सेक्टर में ओवरसोल्ड’लेवल से आई शॉर्ट-कवरिंग को बताया जा रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के बाद बाजार में सतर्कता का रुख देखने को मिल रहा है।

बाजार जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी 23,400 के लेवल से ऊपर जाता है तो इसमें और शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिल सकती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में टेक्निकल रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट रुचित जैन का कहना है कि निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 23,400 और 23,600 के आसपास दिख रहा है। किसी भी टिकाऊ तेजी के लिए इंडेक्स को पहले इन्हें पार करना होगा।

SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,380-23,400 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 23,400 के स्तर से ऊपर जाने पर बाजार में जारी पुलबैक मज़बूत होगा और नियर टर्म में निफ्टी 23,550 के स्तर तक बढ़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,130-23,100 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। अगर यह 23,100 के नीचे जाता है और वहां बना रहता है तो फिर से बिकवाली का दबाव दिखेगा और मार्केट में एक और करेक्शन का दौर शुरू हो सकता है,जिससे इंडेक्स शॉर्ट टर्म में 22,950 के लेवल तक गिर सकता है।

SEBI-रजिस्टर्ड ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म,एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि कल निफ्टी की शुरुआत सपाट रही,लेकिन यह 23,200 के स्तर से ऊपर बना रहा। यह लेवल पूरे सेशन के दौरान बार-बार सपोर्ट लेवल के तौर पर काम करता रहा। आखिर में यह बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि,आगे और तेज़ी के लिए इस बढ़त को बनाए रखना और 23,300-23,400 के रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार करना जरूरी होगा। नीचे की तरफ,23,100-23,070 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है। अगर इस रेंज के नीचे की गिरावट आती है तो इससे बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि मोमेंटम अभी भी सतर्कता वाला बना हुआ है। RSI 27 के आसपास है और अपनी औसत लाइन से थोड़ा ऊपर तो बढ़ा है,लेकिन अभी भी ओवरसोल्ड स्तर से नीचे है। इससे पता चलता है कि थोड़ी रिकवरी के बावजूद मोमेंटम बहुत कमज़ोर है।

 

 

Market cues : टेक्निकल इंडिकेटर्स दे रहे मंदी के ट्रेंड का संकेत, शॉर्ट टर्म में 23000-23600 के दायरे में रह सकता है निफ्टी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Asian Market Today: क्रूड में गिरावट और US बॉन्ड यील्ड में नरमी से चढ़े एशिया बाजार, कोस्पी 2% ऊपर

Asian Market Today:  ग्लोबल मार्केट्स से अच्छे संकेत मिल रहे है। कच्चे तेल में गिरावट और US बॉन्ड यील्ड में नरमी से अमेरिकी बाजारों में शानदार रिकवरी आई।  चिप शेयरों ने तेजी को  लीड किया।  10 साल की यील्ड 5 परसेंट के नीचे फिसली। एशिया में भी मजबूती देखने को मिली।

शुरुआती एशियाई कारोबार में कोस्पी ने बढ़त बनाने वाले क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे आगे रहते हुए 2.32% की छलांग लगाई, जबकि निक्केई में 0.75% की बढ़त हुई। इसके उलट, टॉपिक्स में 0.32% की गिरावट आई। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.4% की बढ़त के संकेत मिले।

शेयर सूचकांकों में यह बढ़त गुरुवार को S&P 500 में आई 1.1% की उछाल के बाद हुई है, जो अगस्त की शुरुआत के बाद से एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी। नैस्डैक 100 ने 1.7% की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 3.1% की तेज़ी आई। अमेरिकी बाज़ारों ने फेडरल रिज़र्व द्वारा 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाने से हुए नुकसान की भरपाई कर ली।

इस बीच भारत में, GIFT निफ्टी ने शेयर बाज़ार के लिए 23,300 अंकों से ऊपर हरे निशान में धीमी शुरुआत का संकेत दिया।

इस तेज़ी की वजह तेल की कीमतें थीं। ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल से नीचे लगभग $104 प्रति बैरल पर बंद हुआ और अमेरिकी क्रूड में लगातार तीसरे सत्र में गिरावट आई, जिससे यह $101.15 प्रति बैरल पर आ गया।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुईं और बाज़ारों का ध्यान उन कूटनीतिक कोशिशों पर गया जो अमेरिका-ईरान संघर्ष की दिशा तय कर सकती हैं।

सऊदी अरब ने बाज़ारों को भरोसा दिलाने के लिए कदम उठाए; ड्रोन हमले के कारण बंद हुई अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की लगभग आधी क्षमता को कुछ ही दिनों में बहाल करने का काम शुरू किया। अलग से, चीन ने ईरान से यमन के हूथी विद्रोहियों को रोकने में मदद करने का आग्रह किया। यह कदम बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (जो वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है) के आसपास शिपिंग में आ रही रुकावटों को कम कर सकता है।

तेल की कीमतों में गिरावट का असर बॉन्ड पर भी पड़ा और अमेरिकी ट्रेज़री में तेज़ी आई। 10-वर्षीय यील्ड नौ बेसिस पॉइंट गिरकर 4.93% पर आ गई, जो फेड के कदम के बाद बुधवार को 5.02% के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, ऊर्जा की कीमतों में नरमी से कंज्यूमर कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, जिससे सेंट्रल बैंकों को सख्त पॉलिसी के असर को समझने के लिए ज़्यादा गुंजाइश मिलेगी।

अब सबकी नज़रें येन पर हैं, जो 155.95 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बैंक ऑफ़ जापान के रेट से जुड़े फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे हैं, इसलिए करेंसी में स्थिरता बनी हुई है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉलिसी बनाने वालों के बेंचमार्क रेट को 1% से बढ़ाकर 1.25% करने की उम्मीद है।

US-ईरान टकराव और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण, इन्वेस्टर्स इस बात को लेकर भी सतर्क हैं कि क्या तेल की कीमतों में आई गिरावट बनी रहेगी।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, $102 के नीचे आया; सऊदी अरब की पाइपलाइन से मिली राहत

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में 17 सितंबर को भी गिरावट जारी रही। संकेत हैं कि मध्य पूर्व में सप्लाई पर बना दबाव अब कुछ कम हो सकता है। इसकी बड़ी वजह सऊदी अरब की एक अहम पाइपलाइन का कुछ हिस्सा फिर से चालू होना है।

Brent crude $102 प्रति बैरल से नीचे आ गया। बुधवार को भी इसमें 2.7% की गिरावट आई थी। सऊदी अरब अगले कुछ दिनों में अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

ड्रोन हमलों के बाद पिछले हफ्ते इस पाइपलाइन को बंद कर दिया गया था। अब इसे धीरे-धीरे शुरू करने की तैयारी है। सऊदी अरब ने एशियाई रिफाइनरों को ज्यादा तेल भी बेचा है। इसकी डिलीवरी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ठीक बाहर की जगहों पर की जा रही है।

इस साल 70% से ज्यादा चढ़ा तेल

कच्चे तेल की कीमत इस साल 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है। इसी दबाव को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरें बढ़ाईं। फेड ने आगे भी सख्ती के संकेत दिए हैं।

हालांकि, गुरुवार को तस्वीर थोड़ी बदली। शेयर बाजार में तेजी आई। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और तेल की कीमतों में गिरावट रही।

मध्य पूर्व में खतरा अभी टला नहीं

तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है।

ट्रेडर्स की नजर हूती लड़ाकों पर भी है। वे लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में मौजूद Bab el-Mandeb Strait की ओर बढ़ रहे हैं। इस बीच सऊदी अरब के तेल और शिपिंग से जुड़े ठिकानों पर हमले भी बढ़े हैं।

Yanbu से तेल की लोडिंग भी रुकी थी

इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमत करीब चार महीने के हाई पर पहुंच गई थी। शिपिंग इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के Red Sea एक्सपोर्ट हब Yanbu से कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी गई थी।

रियाद ने यूरोप के कुछ ग्राहकों की तेल डिलीवरी भी रद्द की थी। यह फैसला ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद लिया गया। यही पाइपलाइन Yanbu तक कच्चा तेल पहुंचाती है।

पाइपलाइन लंबे समय बंद रही तो बड़ा असर

ट्रेडर्स के मुताबिक, अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो दुनिया की करीब 4% तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

सऊदी अरब ने अभी यह नहीं बताया है कि पाइपलाइन पूरी तरह कब चालू होगी। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने मंगलवार को CNBC से कहा था कि अगले कुछ दिनों में इस पाइपलाइन से कच्चे तेल की सप्लाई फिर शुरू हो सकती है।

FII Selling: FII की बिकवाली नहीं रुक रही! बाजार चढ़ा, फिर भी ₹3209 करोड़ के शेयर बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Outlook : मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 18 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। जबकि निफ्टी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। दोपहर 3:30 बजे CAS के बाद बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 21.86 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,314.59 पर था, जबकि निफ्टी 53 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 पर पहुंच गया।

रियल्टी और फार्मा सेक्टर में 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई। जबकि मीडिया में 1.35 प्रतिशत और ऑटो व मेटल सेक्टर में लगभग 1-1 प्रतिशत की तेजी आई। बैंकिंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। छोटे-मझोले शेयरों (ब्रॉडर मार्केट) का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके चलते मिडकैप 0.92 प्रतिशत और स्मॉलकैप 0.71 प्रतिशत ऊपर बंद हुए। मार्केट ब्रेथ पॉजिटिव रहा। आज 1,487 शेयरों में गिरावट के मुकाबले 2,480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। जबकि इंडिया VIX में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड में कमी से ग्लोबल इक्विटी मार्केट को कुछ समय के लिए सहारा मिला और महंगाई के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीदें भी मजबूत हुईं। इसके बावजूद,घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। लेकिन हालिया गिरावट के बाद ‘वैल्यू बाइंग’के चलते बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और US टैरिफ के जोखिम के कारण ब्याज दरें और बढ़ाने के दौर की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क रहने की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर बना रहा क्योंकि निवेशकों ने उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जिनकी कमाई की संभावना मजबूत है,जिनके पास अच्छे ऑर्डर हैं और जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है। इनमें खासकर कैपिटल गुड्स,इंडस्ट्रियल,डिफेंस,पावर और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां शामिल रहीं।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि निफ्टी 23,300 के रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है। अगर यह मजबूती से इस लेवल के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी 23,500 तक जा सकती है,जबकि इसके लिए सपोर्ट लेवल 23,200 और 23,000 पर बना हुआ है। जब तक निफ्टी 23,300 के लेवल को साफ तौर पर पार नहीं कर लेता,तब तक बाजार के कंसोलिडेशन मोड में रहने की संभावना है।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार ने कहा कि निफ्टी इंडेक्स में रिकवरी की रैली जारी रही और यह मामूली बढ़त के साथ फ्लैट-टू-पॉज़िटिव बंद हुआ। हालांकि,उन्होंने कहा कि पोज़िशनल चार्ट का स्ट्रक्चर अभी भी नेगेटिव बना हुआ है,जिसमें 23,450–23,600 के दायरे में कई रेजिस्टेंस लेवल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक इंडेक्स इस रेजिस्टेंस ज़ोन के नीचे ट्रेड करता है तब तक उछाल पर बिकवाली की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाने की सलाह होगी। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,100–23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट जोन का काम करेगा।

टेक्निकल व्यू

एनालिस्ट्स का कहना है कि मार्केट में तेजी लौटने के लिए निफ्टी को 23,300 के स्तर को मजबूती से पार करना होगा। बजाज ब्रोकिंग में रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा कि निफ्टी ने अभी तक ‘हायर हाई-हायर लो’ का स्ट्रक्चर नहीं बनाया है,जिससे बाज़ार का मूड अभी भी सतर्क बना हुआ है। मंगलवार के हाई के पास स्थित 23,600 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,600 के ऊपर टिकता है,तो इससे मौजूदा गिरावट के थमने का संकेत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि नीचे की तरफ 23,116 (मंगलवार और बुधवार का लो) का जोन अभी भी तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले सेशन में गिरावट का दौर 23,000 और 22,800 के स्तर तक बढ़ सकता है।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया ने कहा कि टेक्निकल नज़रिए से देखें तो 23,350 के नीचे निफ्टी का रुख सावधानी के साथ मंदी (बेयरिश) वाला बना हुआ है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,100 पर है। अगर यह इस लेवल के नीचे टूटता है तो इंडेक्स 22,800 की ओर जा सकता है। ऊपर की तरफ, 23,350 और 23,500 अहम रेजिस्टेंस लेवल बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में और कमी या फेड का रुख कम सख्त होने से रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है और निकट भविष्य के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है।

HDFC सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्स वकील ने कहा कि अगर निफ्टी 23,100 के पास स्थित हाल के स्विंग लो से ऊपर बना रहता है तो यह 23,500 के रेजिस्टेंस ज़ोन की ओर वापसी कर सकता है। हालांकि,23,100 के नीचे जाने पर निफ्टी 22,700 के पोजीशनल सपोर्ट तक गिर सकता है।

 

NSE IPO : लिस्टिंग के बाद NSE के निफ्टी में शामिल होने पर SEBI से अभी कोई चर्चा नहीं-एनएसई

 

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एक्सपायरी पर Sensex फ्लैट, लगातार दूसरे दिन Nifty मजबूत, किन घटी निवेशकों की दौलत

Share Market Rally: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाई लेकिन चूंकि घरेलू मार्केट को पहले से ही इसकी उम्मीद थी तो इसका कोई खास असर नहीं दिखा। कच्चे तेल की नरमी पर सेंसेक्स और निफ्टी ने रेड जोन से शानदार वापसी की और सेंसेक्स इंट्रा-डे के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवरी को तो निफ्टी भी 23200 के नीचे से रिकवर होकर 23350 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रौनक रही और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए।

सेक्टरवाइज मार्केट को आज फार्मा, मेटल, ऑटो और रियल्टी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला है। इसमें से रियल्टी और फार्मा सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स डेढ़ फीसदी के आस-पास बंद हुए तो मेटल और ऑटो सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स करीब 1-1% मजबूत हुए। हालांकि दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों ने मार्केट को नीचे खींचने की कोशिश और निफ्टी पीएसयू बैंक में हल्की गिरावट रही लेकिन निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब आधे फीसदी कमजोर हुआ। ओवरऑल मार्केट के इस माहौल में आज बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में डेढ़ लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 17 सितंबर को सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 21.86 प्वाइंट्स यानी 0.03% की मामूली गिरावट के साथ 74,314.59 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 53.00 प्वाइंट्स यानी 0.23% की बढ़त के साथ 23,270.60 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 172.50 प्वाइंट्स टूटकर 74,163.95 तक आया था जिससे यह 513.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,677.56 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 23.95 प्वाइंट्स गिरकर 23,193.65 तक आया था जिससे यह 169.90 प्वाइंट्स चढ़कर 23,363.55 तक पहुंचा था।

₹1.87 लाख करोड़ बढ़ी निवेशकों की दौलत

एक कारोबारी दिन पहले यानी 16 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,74,23,712.00 करोड़ था। आज यानी 17 सितंबर 2026 को यह बढ़कर ₹4,76,10,906.37 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹187,194.36 करोड़ का इजाफा हुआ है।

Sensex के 21 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 21 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज टाटा स्टील, बीईएल और इंडिगो सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक, टाइटन और आईसीआईसीआई बैंक में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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113 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4535 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2686 शेयर आज मजबूत हुए तो 1642 में गिरावट रही जबकि 207 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 113 शेयर एक साल के हाई और 139 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 11 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 43 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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इन चार वजहों से आज छा गई मार्केट में रौनक

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डे-लो से 500 प्वाइंट्स ऊपर भागा Sensex, चार वजहों से Nifty फिर 23350 के पार

Share Market Rally: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें महंगी की लेकिन चूंकि घरेलू मार्केट को पहले से ही इसकी उम्मीद थी तो इसका कोई खास असर नहीं दिखा। कच्चे तेल की नरमी पर सेंसेक्स और निफ्टी ने रेड जोन से शानदार वापसी की और सेंसेक्स इंट्रा-डे के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवरी को तो निफ्टी भी 23200 के नीचे से रिकवर होकर 23350 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की बढ़त है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 12:46 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 280.73 प्वाइंट्स यानी 0.38% की बढ़त के साथ 74,617.18 और निफ्टी 130.35 प्वाइंट्स यानी 0.56% के उछाल के साथ 23,347.95 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 172.50 प्वाइंट्स टूटकर 74,163.95 तक आया था जिससे यह 513.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,677.56 तक पहुंचा तो निफ्टी भी 23.95 प्वाइंट्स गिरकर 23,193.65 तक आया था जिससे यह 169.90 प्वाइंट्स चढ़कर 23,363.55 तक पहुंचा था।

Stock Market Rally: ये है वजह

कच्चे तेल में नरमी

सऊदी अरब ने ओमान के जरिए अतिरिक्त कार्गो की पेशकश की, जिससे सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कुछ कम हुईं। इससे कच्चा तेल नरम पड़ा और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल 2% से अधिक टूटकर $104 के नीचे आ गया। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

ऑटो-फार्मा सेक्टर से शानदार सपोर्ट

सेक्टरवाइज मार्केट को आज आईटी, फार्मा और रियल्टी सेक्टर से मजबूत सपोर्ट मिला है। इनके निफ्टी इंडेक्स में डेढ़-डेढ़ फीसदी की मजबूती आई है। निफ्टी मेटल भी करीब 1% ऊपर चढ़ा है तो निफ्टी एफएमसीजी में आधे फीसदी की तेजी है।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया विक्स में गिरावट से मार्केट को सपोर्ट मिला। फिलहाल यह 6.47% की गिरावट के साथ 12.32 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

वैल्यू बाइंग

हाल-फिलहाल मार्केट की तेज गिरावट के चलते कई स्टॉक्स आकर्षक वैल्यूएशन पर आ गए तो निवेशक ताबड़तोड़ खरीदारी करने लगे जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। एलकेपी सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी और सेंसेक्स ओवरसोल्ड जोन में आ चुके हैं तो मौजूदा लेवल पर टेक्निकल बाउंस दिख सकता है।

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Rate Hike: त्योहारी सीजन में RBI दे सकता है झटका! बढ़ जाएगी आपकी EMI, बैंक FD पर भी पड़ेगा बड़ा असर

RBI Repo Rate Hike Expectations: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के बाद अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। देश में बढ़ती रिटेल इंफ्लेशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई भी अक्टूबर 2026 की MPC समीक्षा बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अगर दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.50% से बढ़कर 5.75% हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आरबीआई यह कदम क्यों उठा सकता है और इसका आपकी होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों पर क्या असर पड़ेगा।

आरबीआई क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट?

अमेरिकी फेड के फैसले के अलावा भारत के आंतरिक आर्थिक हालात भी आरबीआई को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई जो जुलाई में 4.45% थी। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, खाद्य वस्तुओं के दाम और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई 6% के ऊपरी दायरे को पार कर सकती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट का बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी।

एसबीआई, एचएसबीसी, डॉयचे बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बीपीएस की दो किश्तों में रेपो रेट बढ़ा सकता है।

होम लोन ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आरबीआई अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर आपके रिटेल लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक आपके लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे।इससे अगली रीसेट डेट पर या तो आपकी मासिक EMI बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।

इसे उदाहरण से समझे तो अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई में हर महीने ₹400 से ₹500 तक का एक्स्ट्रा इजाफा हो सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने पर अमूमन बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन लोन की तरह यह तुरंत लागू नहीं होता। बैंक बाजार में लिक्विडिटी, अपने एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) और फंड की जरूरतों के आधार पर ही एफडी दरों में रिवीजन करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक विशेष मैच्योरिटी वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे नए एफडी निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GIFT Nifty falls: US फेड के ब्याज दरों में बढ़त का Sensex-Nifty पर पड़ेगा असर,जानें ग्लोबल मार्केट और गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहे संकेत

GIFT Nifty falls:  गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के हल्की गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT Nifty कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, क्योंकि US Federal Reserve ने तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं और संकेत दिया है कि आगे और सख्ती की जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एशिया के कुछ हिस्सों में बढ़त से कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन US यील्ड में बढ़ोतरी और Fed द्वारा और रेट बढ़ाने की उम्मीदों के कारण निवेशक सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8 बजे GIFT Nifty 23,222 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से 45 अंक या 0.2 प्रतिशत नीचे था। पिछले सेशन में भारतीय इक्विटी में रिकवरी हुई थी, जिससे दो दिन की गिरावट का सिलसिला थम गया था। Sensex 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 99 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर पहुंचा। IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जो गिरावट के साथ बंद हुआ।

गुरुवार को फोकस Fed के फैसले के असर, US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में नरमी आई है, लेकिन यह अभी भी $104 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

US Fed ने दरें बढ़ाई, और सख्ती के संकेत दिए

Federal Reserve ने बुधवार को तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार अपनी मुख्य ब्याज दर बढ़ाई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच लगातार बनी हुई महंगाई को काबू में करने के लिए यह कदम उठाया गया। Fed ने कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया और संकेत दिया कि महंगाई को तेजी से कम करने के लिए निकट भविष्य में और सख्ती की जा सकती है।

इस फैसले के बाद बाजारों ने एक और रेट बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं, और दिसंबर तक एक और बढ़ोतरी की संभावना को अब पूरी तरह से मान लिया गया है। शॉर्ट-टर्म US ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया क्योंकि निवेशकों ने और सख्ती की संभावना के हिसाब से खुद को ढाला, हालांकि Fed के कदम से लंबे समय वाले बॉन्ड में हालिया बिकवाली को शांत करने में मदद मिली।

भारतीय इक्विटी के लिए, US में ऊंची दरों और यील्ड की संभावना विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो के लिए एक संभावित चुनौती बनी हुई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, तेल की कीमतों और करेंसी पर दबाव के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों से मिले-जुले संकेतों की वजह से निवेशकों का मूड सतर्क रहने की संभावना है।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट, US फ्यूचर्स में वापसी

फेड की घोषणा के बाद उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद US इक्विटीज़ ज़्यादातर गिरावट के साथ बंद हुईं। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 631.33 अंक या 1.21 प्रतिशत गिरकर 51,461.78 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,552.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ, यह 0.01 प्रतिशत गिरकर 25,978.43 पर रहा।

सप्लाई की चिंता कम होने से ब्रेंट $105 से नीचे आया

गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे हाल के हफ़्तों में एनर्जी की कीमतों में भारी उछाल के बाद भारतीय बाज़ारों को कुछ राहत मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत गिरकर $104.59 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.1 प्रतिशत गिरकर $101.29 पर आ गया। बुधवार को दोनों बेंचमार्क में लगभग $3 की गिरावट आई थी।

यह गिरावट उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब ओमान के ज़रिए अतिरिक्त क्रूड कार्गो की पेशकश कर रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की कुछ चिंताएं कम हुईं।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी निफ्टी के लिए 23,300-23,400 को तुरंत रेजिस्टेंस ज़ोन मानते हैं। अगर यह 23,400 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 23,500-23,600 की ओर रिकवरी में मदद मिल सकती है, हालांकि वह इलाका एक मज़बूत बाधा बना हुआ है और वहां फिर से बिकवाली हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, फेड ने बढ़ाई ब्याज दरें एशिया बाजार में ते

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‘ब्याज दरें जल्द कम करें…’ फेड की दर वृद्धि के बाद ट्रंप ने 1% या उससे कम रेट की मांग की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक बार फिर ब्याज दरों में कटौती की मांग की है। खास बात यह है कि ट्रंप की यह मांग ऐसे समय आई है, जब फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है। हालांकि, इस बार ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श पर सीधे निशाना साधने से परहेज किया है। अब चलिए जानते हैं ट्रंप ने आखिर ब्याज दरों में कटौती की मांग क्यों की, और फेड ने इसके उलट दरें बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?

गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, “हम दुनिया के लगभग हर देश का ‘बोझ उठा’ रहे हैं, और ऐसा अब और नहीं चल सकता। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के लिए ब्याज दरें कम करें, और जल्द करें!”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि देश की क्रेडिट रेटिंग बहुत अच्छी है और निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कम लागत पर उधार लेना सही ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन देशों के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है, उनके साथ व्यापार बंद करने से हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमाए जा सकते हैं। दरअसल, उनका तर्क था कि व्यापार घाटा असल में नुकसान ही है।

उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा, “अमेरिका में ब्याज दरें 1% या उससे कम होनी चाहिए, क्योंकि हमारी क्रेडिट रेटिंग दुनिया में सबसे अच्छी है — और इसमें कोई शक नहीं है। हमारे देश में नए निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं! अगर हम उन सभी देशों के साथ व्यापार बंद कर दें जिनके साथ हमारा व्यापार घाटा है — और ऐसे ज्यादातर देश हैं — तो हम हर साल कम से कम 1.5 ट्रिलियन डॉलर कमा सकते हैं। ‘Deficit’ शब्द असल में ‘Loss’ के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक फैंसी शब्द है।”

बता दें कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। वहीं, इस फैसले के साथ फेड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को नजरअंदाज कर दिया जिसमें उन्होंने ब्याज दरें घटाने की मांग की थी। सेंट्रल बैंक के प्रमुख केविन वार्श ने कहा कि महंगाई अभी भी काफी ज्यादा है और लंबे समय से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

फेड की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4.00% के बीच करने के लिए वोट किया। कमिटी का कहना है कि दरें बढ़ने से महंगाई को उसके 2% के लक्ष्य तक जल्द वापस लाने में मदद मिलेगी।

ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉर्श ने कहा कि यह फैसला “गंभीर” था, लेकिन इसे लेना जरूरी था।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “साफ बात यह है कि महंगाई बहुत ज्यादा है और काफी समय से ऐसी ही बनी हुई है।”

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Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, दिल्ली में ₹140810 पर पहुंचा 22 कैरेट; वैश्विक बाजार में कीमत लुढ़की

देश में सोने की कीमत में और तेजी दिख रही है। 17 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अन्य शहरों में भी भाव चढ़ा है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 3 सत्रों की गिरावट के बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,200 रुपये बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,240.1 डॉलर प्रति औंस पर है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद वैश्विक बाजार में सोना लुढ़का है। फेड ने आने वाले महीनों में ब्याज दरें और बढ़ने का संकेत दिया है। इस फैसले के बाद डॉलर मजबूत हुआ और बिना रिटर्न वाली कीमती धातुओं जैसे सोने पर बुरा असर पड़ा। फेड ने बेंचमार्क ओवरनाइट ब्याज दर को 0.25% बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में पहुंचा दिया है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 153600 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140810 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 153450 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 140660 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली140810153600
मुंबई140660153450
अहमदाबाद140710153500
चेन्नई140660153450
कोलकाता140660153450
हैदराबाद140660153450
जयपुर140810153600
भोपाल140710153500
लखनऊ140810153600
चंडीगढ़140810153600

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चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी में गुरुवार को गिरावट है। 17 सितंबर की सुबह चांदी फिसलकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में चांदी 2 कारोबारी सत्र स्थिर रहने के बाद 7,000 रुपये उछली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत गिरकर 62.57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।