Rate Hike: त्योहारी सीजन में RBI दे सकता है झटका! बढ़ जाएगी आपकी EMI, बैंक FD पर भी पड़ेगा बड़ा असर

RBI Repo Rate Hike Expectations: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के बाद अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। देश में बढ़ती रिटेल इंफ्लेशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई भी अक्टूबर 2026 की MPC समीक्षा बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अगर दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.50% से बढ़कर 5.75% हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आरबीआई यह कदम क्यों उठा सकता है और इसका आपकी होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों पर क्या असर पड़ेगा।

आरबीआई क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट?

अमेरिकी फेड के फैसले के अलावा भारत के आंतरिक आर्थिक हालात भी आरबीआई को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई जो जुलाई में 4.45% थी। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, खाद्य वस्तुओं के दाम और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई 6% के ऊपरी दायरे को पार कर सकती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट का बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी।

एसबीआई, एचएसबीसी, डॉयचे बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बीपीएस की दो किश्तों में रेपो रेट बढ़ा सकता है।

होम लोन ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आरबीआई अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर आपके रिटेल लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक आपके लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे।इससे अगली रीसेट डेट पर या तो आपकी मासिक EMI बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।

इसे उदाहरण से समझे तो अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई में हर महीने ₹400 से ₹500 तक का एक्स्ट्रा इजाफा हो सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने पर अमूमन बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन लोन की तरह यह तुरंत लागू नहीं होता। बैंक बाजार में लिक्विडिटी, अपने एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) और फंड की जरूरतों के आधार पर ही एफडी दरों में रिवीजन करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक विशेष मैच्योरिटी वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे नए एफडी निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनेगी।

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क्या घर खरीदने के लिए तैयार है Gen Z? जानिए नई पीढ़ी को होम लोन लेते वक्त किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

भारत की Gen Z डिजिटल क्रेडिट के दौर में बड़ी हुई है। EMI और Buy Now, Pay Later उसके लिए नई चीज नहीं हैं। लेकिन फोन की कुछ महीनों की EMI और 20 साल का होम लोन एक जैसी जिम्मेदारी नहीं है।

भारत की Gen Z ऐसे समय में बड़ी हुई है, जब डिजिटल क्रेडिट और EMI रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन कर्ज लेकर चीजें खरीदना और घर खरीदने के लिए कर्ज लेना अलग बात है। फोन की कुछ महीनों की EMI एक बात है। वहीं, घर के लिए 20 साल की EMI बिल्कुल अलग जिम्मेदारी है।

अब युवा भारतीय पहले के मुकाबले कम उम्र में घर खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वे क्रेडिट लेने में सहज हैं या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या वे लंबे समय की इस वित्तीय जिम्मेदारी के लिए तैयार हैं।

घर खरीदने वाला युवा हो रहा है

Knight Frank की रिपोर्ट ‘Beyond Bricks: The Pulse of Home Buying 2025’ के मुताबिक, 71% Gen Z किराये पर रहने के बजाय अपना घर खरीदना पसंद करती है। वहीं, 7,400 से ज्यादा मौजूदा और संभावित होमबायर्स पर आधारित 2026 की सर्वे रिपोर्ट ‘How Bharat Finances Its Housing Dreams’ भी इसी बदलाव की तरफ इशारा करती है। इसके मुताबिक, Millennials और Gen Z अब करीब 90-95% घरों की खरीदारी में शामिल हैं।

बेसिक होम लोन के को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि होम लोन लेने वालों की औसत उम्र भी 35 साल से ज्यादा से घटकर करीब 25 साल हो गई है। मोंगा के मुताबिक, ‘युवा भारतीय घर खरीदने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं कर रहे हैं। वे कम उम्र में ही हाउसिंग मार्केट में एंट्री कर रहे हैं।’

Home Loan बाकी कर्ज से अलग है

Gen Z क्रेडिट को समझती है। लेकिन लंबे समय के कर्ज की जिम्मेदारी अलग होती है। फोन की EMI कुछ महीनों में खत्म हो सकती है। Home Loan के साथ ऐसा नहीं है। 20 साल में जिंदगी कई बार बदल सकती है। करियर बदल सकता है। परिवार बढ़ सकता है। शहर बदलना पड़ सकता है। आर्थिक जरूरतें भी बदल सकती हैं।

इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि बैंक आपको कितना लोन दे सकता है। सवाल यह है कि आप कितनी EMI लंबे समय तक आराम से चुका सकते हैं।

अतुल का कहना है, ‘आज का फैसला अगले 20 साल की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कितना लोन मिल सकता है। यह देखना भी जरूरी है कि कितना लोन टिकाऊ तरीके से चुकाया जा सकता है।’

युवा चाहते हैं डिजिटल Home Loan

युवा सिर्फ घर खरीदने का तरीका नहीं बदल रहे हैं। वे होम लोन लेने की प्रक्रिया भी बदल रहे हैं। स्टडी के मुताबिक, 40 साल से कम उम्र के 72% उधारकर्ता ऑनलाइन होम लोन के लिए आवेदन करना पसंद करते हैं। वहीं, लोन लेने की प्रक्रिया में DigiLocker का इस्तेमाल करने वाले करीब 80% लोग 35 साल या उससे कम उम्र के हैं।

यानी यह पीढ़ी चाहती है कि फाइनेंशियल सर्विस आसान, डिजिटल और पारदर्शी हो। लेकिन सिर्फ प्रक्रिया का डिजिटल होना काफी नहीं है। आवेदन जल्दी हो सकता है। लोन भी जल्दी मिल सकता है। फिर भी सही फैसला लेने के लिए लोन की शर्तों को समझना जरूरी है।

सिर्फ लोन मिलना काफी नहीं

मोंगा का कहना है कि पहली बार होम लोन लेने वाले युवा के लिए कई चीजें समझना जरूरी हैं। मसलन, लोन की अवधि कितनी है। कुल ब्याज कितना देना होगा। प्रीपेमेंट का क्या असर होगा। और सबसे जरूरी, कितनी रकम वास्तव में अफोर्ड की जा सकती है।

यहां एक फर्क समझना जरूरी है। बैंक जितना लोन देने को तैयार है, जरूरी नहीं कि उतना लोन लेना आपके लिए सही भी हो। होम लोन का बोझ अगले कई साल तक साथ रहता है। इसलिए आज की EMI के साथ कल की जरूरतों के लिए भी जगह बचनी चाहिए।

Buy Now, Pay Later से आगे की सोच

Gen Z ने Buy Now, Pay Later का दौर देखा है। लेकिन Home Loan में सोच अलग रखनी होगी। यह सिर्फ तुरंत कुछ खरीदने की बात नहीं है। यह लंबे समय की वित्तीय योजना है।

मोंगा के मुताबिक, ‘अच्छी बात यह है कि युवा घर खरीदने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वे पहले घर खरीदना चाहते हैं। डिजिटल फाइनेंस को अपना रहे हैं। अब जरूरत यह है कि उन्हें सिर्फ क्रेडिट तक पहुंच न मिले। उन्हें यह भी साफ समझ आए कि उस क्रेडिट की असली जिम्मेदारी क्या है।’

उनका कहना है कि मकसद सिर्फ घर की चाबी हासिल करना नहीं होना चाहिए। घर खरीदने के बाद भी परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे, यह ज्यादा जरूरी है। क्योंकि असली मौका सिर्फ किसी युवा को होम लोन मिलने में नहीं है। असली बात ये है कि वो ऐसा फैसला ले, जिसे अगले 20 साल तक आसानी से निभा सके।Z

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।