SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट (Bulk Term Deposit) पर ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने चुनिंदा अवधि की एफडी पर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (bps) तक की कमी की है। SBI की वेबसाइट के मुताबिक, नई ब्याज दरें 15 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

 

सामान्य ग्राहकों के लिए SBI Bulk FD की नई ब्याज दरें

 

SBI ने 7 दिन से लेकर 179 दिन तक की सभी बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट अवधि पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। वहीं, 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट घटाई गई है। 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अन्य अवधि पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

  • 7 दिन से 14 दिन 4.50 4.25
  • 15 दिन से 45 दिन 5.00 4.75
  • 46 दिन से 179 दिन 5.10 4.85
  • 180 दिन से 210 दिन 5.60 5.50
  • 211 दिन से 1 साल से कम 5.60 5.60
  • 1 साल से 2 साल से कम 6.25 6.25
  • 2 साल से 3 साल से कम 6.15 6.15
  • 3 साल से 5 साल से कम 6.00 6.00
  • 5 साल से 10 साल तक 6.00 6.00
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कम हुई SBI Bulk FD की ब्याज दर

 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए SBI ने 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क एफडी पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट कम हुई है। वहीं, 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

7 दिन से 14 दिन 5.00 4.75

15 दिन से 45 दिन 5.50 5.25

46 दिन से 179 दिन 5.60 5.35

180 दिन से 210 दिन 6.10 6.00

211 दिन से 1 साल से कम 6.10 6.10

1 साल से 2 साल से कम 6.75 6.75

2 साल से 3 साल से कम 6.65 6.65

3 साल से 5 साल से कम 6.50 6.50

5 साल से 10 साल तक 6.50 6.50

समय से पहले FD तोड़ने पर 1% पेनल्टी

 

SBI की बल्क डिपॉजिट के ग्राहकों के लिए सभी अवधि पर समय से पहले एफडी निकालने की स्थिति में 1 प्रतिशत की प्रीमैच्योर विदड्रॉल पेनल्टी लागू होगी। यह नियम नई जमा राशि पर लागू होगा।

 

3 करोड़ रुपये से कम की FD पर कोई बदलाव नहीं

 

SBI ने 3 करोड़ रुपये से कम की सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। सामान्य ग्राहकों के लिए SBI की नियमित एफडी पर ब्याज दरें 3.05% से 6.40% तक हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं।

RBI Minutes: अब लोन महंगा होने का खतरा, महंगाई बढ़ी तो बढ़ सकता है रेपो रेट

RBI Minutes: RBI की अगस्त बैठक के मिनट्स से साफ संकेत मिले हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में और राहत की उम्मीद कम है। केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस अब महंगाई पर है। अगर कीमतों का दबाव और बढ़ा, तो इस साल रेपो रेट बढ़ाने की नौबत भी आ सकती है।

5 अगस्त को हुई MPC बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट को 5.25% पर ही रखा था। वहीं SDF 5% और MSF 5.5% पर बरकरार रहे। नीति का रुख भी ‘Neutral’ ही रखा गया।

गवर्नर ने क्या कहा?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी मजबूत बनी हुई है। उनका अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में महंगाई औसतन करीब 5% रह सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी महंगाई का बड़ा कारण सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। अच्छी बात यह है कि यह पूरे बाजार में नहीं फैली है। कोर महंगाई भी अभी ज्यादा नहीं है।

उनका मानना है कि तीसरी तिमाही के बाद महंगाई कुछ कम हो सकती है। इसलिए अभी ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर महंगाई हर सेक्टर में फैलने लगी, तो RBI सख्ती कर सकता है।

डिप्टी गवर्नर का रुख ज्यादा सख्त

RBI की डिप्टी गवर्नर पूणम गुप्ता ने साफ कहा कि अभी ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश नहीं दिखती।

उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। हालांकि फिलहाल उनका सुझाव यही है कि कुछ समय और इंतजार किया जाए।

दूसरे सदस्यों की क्या राय रही?

MPC सदस्य इंद्रनील भट्टाचार्य ने भी जल्दबाजी से बचने की बात कही। उनका कहना है कि आने वाले महीनों में मानसून और महंगाई की तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

उन्होंने कहा कि अभी दरों को स्थिर रखना RBI के लिए आगे फैसला लेने की लचीलापन बनाए रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि दरें लंबे समय तक नहीं बदलेंगी।

RBI किन बातों से चिंतित है?

बैठक के मिनट्स में कई ऐसे जोखिम गिनाए गए हैं, जो महंगाई बढ़ा सकते हैं।

  • मानसून का असमान रहना
  • एल नीनो का असर
  • पश्चिम एशिया में तनाव
  • होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम

MPC सदस्यों का मानना है कि इन वजहों से आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी होगा।

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