Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

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आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 4 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : गुरुवार, 3 सितंबर के ट्रेडिंग सेशन में बाजार की क्लोजिंग गिरावट के साथ हुई। US फ़ेडरल रिज़र्व के साथ ही दुनिया भर के केंद्रीय बैंक बढ़ती कीमतों के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इस आशंका के चलते बाजार दबाव में आ गया। कारोबार के अंत में निफ्टी 0.17% की गिरावट के साथ 23,873 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.55% गिरकर 76,152 पर बंद हुआ। ये दोनों इंडेक्स लगातार चौथे सेशन में गिरावट लेकर बंद हुए। हालांकि, हालांकि, ब्रॉडर मार्केट ने अपनी शुरुआती गिरावट से उबरते हुए अच्छी वापसी की। इसके चलते निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.40% की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.27% की बढ़ोतरी देखने को मिली।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी, मीडिया, केमिकल और प्राइवेट बैंक के शेयरों में खरीदारी आई। वहीं, IT, FMCG, ऑटो और फार्मा शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि बाजार की रिकवरी की कोशिशें असफल हो गईं। ग्लोबल स्तर पर मिले अच्छे संकेतों और FII के नए निवेश के बावजूद, लंबे समय से चले आ रहे जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी का असर भी देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बाजारर को सपोर्ट दिया। स्मॉल-कैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखी। यह घरेलू विकास की संभावनाओं में भरोसे को दिखाता है। कच्चे तेल की लगातार बनी ऊंची कीमतें घरेलू बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हालांकि भारत की मज़बूत ग्रोथ स्टोरी और हाल ही में सॉवरेन रेटिंग में सुधार जैसे पॉजिटिव फैक्टर बने हुए हैं। लेकिन बाजार की निकट भविष्य की दिशा मुख्य रूप से ग्लोबल मैक्रो और जियोपॉलिटिकल जोखिमों में होने वाली घट-बढ़ पर निर्भर करेगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च, अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहा और वीकली एक्सपायरी के दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के कारण निफ्टी गैप-अप के साथ खुला। हालांकि, जैसे-जैसे कारोबारी सेशन आगे बढ़ा बिकवाली के दबाव के कारण इंडेक्स नीचे आ गया। नतीजतन अंत में निफ्टी 0.17% गिरकर दिन के निचले स्तर के पास 24,873.45 पर बंद हुआ। सेंसेक्स लगभग 0.55% गिरकर 76,152.86 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। रियल्टी, बैंकिंग और एनर्जी शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि IT और FMCG शेयरों पर दबाव रहा। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा। इससे मिडकैप इंडेक्स में लगभग 0.37% की बढ़त हुई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 1.20% ऊपर बंद हुआ।

शुरुआत में मार्केट को ग्लोबल मार्केट में रिकवरी, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी, FII की खरीदारी और RBI के उम्मीद से ज़्यादा FCNR डिपॉजिट रोलओवर से सपोर्ट मिला, जिससे मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। हालांकि, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच निवेशक सतर्क रहे, क्योंकि ये फैक्टर ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता को प्रभावित करते रहते हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ़्टी को रिकवरी के दौरान रुकावट का सामना करना पड़ रहा है, जो शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर के कमजोर होने का संकेत है। इसके लिए 23,800 का जोन शॉर्ट-टर्म के लिए एक अहम सपोर्ट बना हुआ है और अगर यह लेवल टूटता है, तो 23,700–23,600 के जोन की ओर गिरावट आ सकती है। ऊपर की ओर, 24,000–24,150 का जोन रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमजोर मार्केट मोमेंटम को देखते हुए रिस्क मैनेजमेंट पर खास फोकस रखते हुए सतर्क और स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच अपनाने की सलाह होगी।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों और मैक्रो-इकोनॉमिक हालात पर निर्भर करेगी। अगर हालात और बिगड़े तो बाजार में सावधानी बरती जा सकती है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि इंस्टीट्यूशनल निवेश में स्थिरता और भारत की मज़बूत ग्रोथ की उम्मीद बाजार को सहारा दे सकती है। खास तौर पर ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले सेक्टर में सोच-समझकर निवेश करने की रणनीति अपनाने की जरूरत है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी की शुरुआत गैप-अप के साथ हुई, लेकिन राइजिंग चैनल के निचले बैंड के पास उसे रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा, जिससे पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। डेली टाइमफ्रेम पर ‘डार्क क्लाउड कवर’ कैंडलस्टिक पैटर्न बना है जो निकट भविष्य में कमजोरी बने रहने का संकेत देता है। निफ्टी के लिए निचले स्तर पर 23,850 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स 23,700–23,730 के स्तर तक गिर सकता है। ऊपरी स्तर पर, 24,000 पर रेजिस्टेंस है। मंदी के रुझान को खत्म करने के लिए निफ्टी के लिए 24,000 के स्तर के ऊपर टिके रहना जरूरी होगा।

 

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Gold Rate Today: सोने में नहीं थम रही गिरावट, लगातार हो रहा सस्ता; ये है लेटेस्ट रेट

सोने की कीमत में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। 3 सितंबर की सुबह भी ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट का भाव गिरा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में हाजिर सोना लगातार छठे कारोबारी दिन गिरा और 3 सप्ताह से ज्यादा समय के निचले स्तर पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं के बीच हाजिर सोने की कीमतें दबाव में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,303.12 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली139490152160
मुंबई139340152010
अहमदाबाद139390152060
चेन्नई139340152010
कोलकाता139340152010
हैदराबाद139340152010
जयपुर139490152160
भोपाल139390152060
लखनऊ139490152160
चंडीगढ़139490152160

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चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमतें भी दबाव में हैं। 3 सितंबर की सुबह चांदी टूटकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.64 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Salary vs EMI: सैलरी आते ही EMI से खाली हो जाता है अकाउंट? कर्ज के जाल से निकलने के लिए अपनाएं ये 3 आसान स्टेप्स

Debt Management Tips: महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है और कुछ ही घंटों में EMIs कटने के बाद अकाउंट खाली लगने लगता है। अगर आपकी सैलरी का भी एक बड़ा हिस्सा पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल और होम लोन की किश्तों में जा रहा है, तो बचत करना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे संभालना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसी स्थिति में अक्सर लोग किसी इमरजेंसी खर्च से निपटने के लिए एक और नया लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर लेते हैं, जो उन्हें एक गंभीर ‘डेट ट्रैप’ यानी कर्ज के जाल में फंसा देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों में बार-बार आगाह करता है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी EMI के दबाव से परेशान हैं, तो इन 3 आसान स्टेप्स के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति पर दोबारा नियंत्रण पा सकते हैं।

कर्ज के दबाव को कम करने का 3-स्टेप फॉर्मूला

स्टेप 1: जानिए पैसा कहां जा रहा है और महंगे कर्ज पहले खत्म कीजिए

कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ देखनी होगी। अपनी हर EMI, क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया, यूटिलिटी बिल्स और राशन/किराए जैसे फिक्स्ड खर्चों को एक कागज पर लिखें। क्रेडिट कार्ड बकाया और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बहुत ज्यादा होती हैं, जबकि होम लोन या कार लोन तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं।

सभी कर्जों को एक साथ भरने के बजाय सबसे महंगे कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) को पहले चुकाने का लक्ष्य बनाएं। बाकी कर्जों की सिर्फ मिनिमम EMI देते रहें और जितनी भी एक्स्ट्रा बचत हो, उसे सबसे महंगे लोन को बंद करने में लगाएं।

स्टेप 2: एक छोटा कैश बफर जरूर तैयार करें

जब बजट पहले से टाइट हो, तो महीने के ₹1,000 या ₹2,000 बचाना भी मुश्किल लगता है। लेकिन यही छोटी बचत आपकी ढाल बनती है। अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या गाड़ी की खराबी आ जाए, तो इमरजेंसी फंड न होने पर आपको दोबारा क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है।

रिजर्व बैंक का मानना है कि हर परिवार के पास एक छोटा कैश बफर होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में नया कर्ज न लेना पड़े। शुरुआत में ₹5,000 से ₹10,000 का छोटा बफर बनाएं, फिर धीरे-धीरे इसे 3-6 महीने के आवश्यक खर्चों के बराबर ले जाएं।

स्टेप 3: सैलरी इंक्रीमेंट या बोनस का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें

साल में जब भी सैलरी बढ़े, बोनस मिले या कोई टैक्स रिफंड आए, तो उस पूरे पैसे को नए शौक या लाइफस्टाइल पर खर्च करने की गलती न करें। मिली हुई एक्स्ट्रा राशि का कम से कम 50% से 70% हिस्सा अपने सबसे महंगे लोन के प्रिंसिपल को चुकाने में लगाएं। इससे आपका आने वाला ब्याज काफी घट जाता है।

लोन की प्री-पेमेंट करने से पहले अपने बैंक के नियमों और प्री-पेमेंट चार्जेस की जांच जरूर कर लें। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों को लोन की शर्तों में प्री-पेमेंट चार्जेस का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है।

पुराने लोन को चुकाने के लिए कभी न लें नया लोन!

कई बार लोग EMI कम करने के लिए लोन कंसोलिडेशन या री-फाइनेंसिंग का सहारा लेते हैं। जब बैंक किसी नए लोन में कम EMI दिखाता है, तो लोग आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि EMI इसलिए कम दिखती है क्योंकि लोन की अवधि बढ़ा दी जाती है।

लोन की अवधि बढ़ाने से आपकी महीने की किस्त तो छोटी हो सकती है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर से भुगतान करने पर आपको न केवल लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा, बल्कि आपका CIBIL स्कोर भी खराब होगा, जिससे भविष्य में इमरजेंसी लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्या हो लोन रीपेमेंट की बेस्ट स्ट्रेटजी

कर्ज के जाल से बाहर निकलने का रास्ता किसी जादुई फॉर्मले से नहीं, बल्कि सही वित्तीय अनुशासन से निकलता है। जब धीरे-धीरे आपकी एक-एक EMI खत्म होगी, तो उससे बचने वाला पैसा ही आपकी भविष्य की बचत और निवेश की नींव बनेगा। पहला लक्ष्य स्थिति को बिगड़ने से रोकना है, और दूसरा लक्ष्य हर एक्स्ट्रा रुपये को किसी नए कर्ज में फंसाने के बजाय उससे निकलने का जरिया बनाना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Drop: लगातार 5वें दिन फिसला सोना, ऑल-टाइम हाई से ₹10700 की टूट; जानें गिरावट की ये 4 बड़ी वजहें

Gold Prices Today Fall: भारतीय वायदा बाजार पर सोने की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 अगस्त को ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद, MCX पर सोना अब तक ₹10,700 से ज्यादा टूटकर ₹1,52,514 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी सोना $4,734 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर लगभग $4,420 प्रति औंस पर पहुंच गया है। महज एक सत्र में MCX पर सोना करीब ₹1,900 और COMEX पर $75 तक फिसल गया।

सोने की कीमतों में गिरावट के 4 मुख्य कारण

1. अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका: जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख ने सोने के बाजार को प्रभावित किया है। फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में लगा रहे हैं।

2. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से अमेरिकी डॉलर (USD) मजबूत हुआ है और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग घट जाती है।

3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव बना हुआ है।

4. घरेलू मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर: आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जरूरत न होने पर सोना न खरीदने की अपील का असर घरेलू सेंटीमेंट पर पड़ा है। इससे भारतीय बाजार में त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी और रिटेल मांग में थोड़ी सुस्ती की आशंका है।

अगस्त का प्रदर्शन और सितंबर के लिए आउटलुक

ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में सोने ने 9.4% और चांदी ने 15% का मजबूत रिटर्न दिया, जो इस साल का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन था। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस हफ्ते जारी होने वाले अमेरिकी लेबर मार्केट डेटा सोने की अगली चाल तय करेंगे। अगर डेटा मजबूत आता है तो डॉलर और मजबूत होगा, जिससे सोने में गिरावट जारी रह सकती है।

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FD Interest Rates: वरिष्ठ नागरिकों के लिए गुड न्यूज! इन बैंकों ने बदलीं FD की दरें, जानें किसमें मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न

FD Interest Rates for Senior Citizens: एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और फेडरल बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। ये बैंक आम नागरिकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं।

अगर आप या आपके घर के सीनियर सिटीजन ₹3 करोड़ से कम की एफडी में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो जानिए किस बैंक में सबसे ज्यादा रिटर्न मिल रहा है और निवेश करने से पहले किन जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

तीन प्रमुख बैंकों द्वारा सीनियर सिटीजन्स को दी जाने वाली अधिकतम और सामान्य ब्याज दरों की तुलना:

Axis Bank दे रहा है सबसे ज्यादा 7.25% ब्याज

एक्सिस बैंक ने अपने डोमेस्टिक एफडी रेट्स में संशोधन किया है। बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर रहा है। 5 साल से लेकर 10 साल तक की लंबी अवधि की एफडी पर अधिकतम 7.25% प्रति वर्ष का ब्याज दे रहा है। सीनियर सिटीजन्स के लिए कुल ब्याज दरें 3.50% से 7.25% के बीच हैं।

Federal Bank 48 महीने की FD पर 7.20% रिटर्न

फेडरल बैंक ने भी ₹3 करोड़ से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक अधिकतम 7.20% का ब्याज प्रति वर्ष दे रहा है जो 48 महीने यानी 4 साल की एफडी कराने पर मिलेगी। ऐसे ही 15 महीने की एफडी पर 7.15% और 24 महीने से 48 महीने से कम की एफडी पर 7.00% का ब्याज दिया जा रहा है।

HDFC Bank: लंबी अवधि की एफडी पर बढ़ीं दरें

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने कुछ स्पेशल अवधियों के लिए दरों में बढ़ोतरी की है। बैंक अधिकतम ब्याज दर 7.10% प्रति वर्ष दे रहा है जो पहले 7.00% थी। 3 साल 1 दिन से लेकर 4 साल 7 महीने से कम की अवधि वाली एफडी पर 7.10% का ब्याज मिलेगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए FD ब्याज दरें

FD कराने से पहले ध्यान रखें ये 3 जरूरी बातें

केवल सबसे ऊंची ब्याज दर देखकर ही फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा न लगाएं। निवेश से पहले इन 3 पहलुओं का मूल्यांकन जरूर करें:

लॉक-इन अवधि: देखें कि आपका पैसा कितने समय के लिए ब्लॉक हो रहा है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो बहुत लंबी अवधि की एफडी चुनने से बचें।

समय से पहले निकासी शुल्क: मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ने पर बैंक कितना पेनाल्टी या चार्ज काटते हैं, इसकी जानकारी पहले ही ले लें।

ब्याज पर टैक्स: एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से कर योग्य होता है। आयकर कानून की धारा 80TTB के तहत वरिष्ठ नागरिकों को एक वित्तीय वर्ष में एफडी/सेविंग्स ब्याज पर ₹50,000 तक की छूट मिलती है। इससे अधिक ब्याज होने पर टीडीएस कटता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

september changes

अगस्त का आज आखिरी दिन है। सितंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के जीवन, खर्च और बचत से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। बैंकिंग, गैस सिलेंडर, टैक्स, यात्रा और क्रेडिट कार्ड जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के ये बदलाव आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। इनमें से कुछ बदलावों के कारण आपको अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, तो वहीं कुछ नियमों से आपको बड़ी राहत मिलने की संभावना है। किसी भी परेशानी या अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए, नए नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

 

विदेश यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत

1 सितंबर से भारत से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। इमिग्रेशन काउंटर पर अब यात्रियों के बोर्डिंग पास पर भौतिक (फिजिकल) मुहर नहीं लगाई जाएगी। इमिग्रेशन ब्यूरो ने प्रक्रिया को सुगम और तेज बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नए नियम के अनुसार, यात्री अपने मोबाइल फोन पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से अपनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और अस्पष्ट मुहरों जैसी पुरानी तकनीकी समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।

 

LPG सिलेंडर

31 अगस्त को एलपीजी कनेक्शन के लिए ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन आखिरी दिन है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया 1 सितंबर को बंद हो जाएगी। यदि आपने इस अवधि में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो आप घरेलू सब्सिडीयुक्त सिलेंडर प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी प्रमुख तेल कंपनियां ग्राहकों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की सलाह देते हुए लगातार संदेश भेज रही हैं। 1 सितंबर से एलपीजी या पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई बदलाव हो सकता है। 

 

बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव

बैंकों में बड़ी सावधि जमा (एफडी) करने वालों के लिए भी नियमों में पारदर्शिता लाई जा रही है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज दर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग शाखाएं एक ही दिन जमा की गई एक ही राशि पर अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। हालांकि, इस नियम का आम नागरिकों की छोटी एफडी पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। ध्यान दें कि एफडी पारदर्शिता के ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। 1 सितंबर से एटीएम से जुड़े चार्जेस में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर बैंक आपसे मोटी फीस वसूल सकता है।

 

ईटीएफ पर नए नियम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने ईटीएफ (ETF) कारोबार को लेकर 1 सितंबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नए नियमों के हिसाब से ईटीएफ की कीमत की सीमा तय के लिए पिछले कारोबारी दिन के आखिरी 30 मिनट की ट्रेडिंग वॉल्यूम की औसत कीमत को आधार बनाया जाएगा। इससे ईटीएफ की कीमत बाजार की ताजा स्थिति के आसपास बनी रहेगी।

 

विदेश यात्रा से जुड़ा बड़ा बदलाव

1 सितंबर 2026 से विदेश यात्रा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव होने वाला है। भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प लगवाने की जरूरत नहीं होगी. यात्री मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा कर सकेंगे। इस नए नियम से हवाई यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Nifty से ज्यादा Gold ETF में गिरावट, दो वजहों से 4 % तक आया नीचे

Gold ETF Big Fall: गोल्ड और सिल्वर के ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में आज बिकवाली का तेज दबाव दिखा और यह 4% तक टूट गया। इसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वार्श (Kevin Warsh) की हॉकिश यानी सख्त कमेंट्स से झटका लगा, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ीं तो सोने-चांदी के ईटीएफ की चमक फीकी पड़ी। यह बिकवाली वैश्विक मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में आई तेजी के मुताबिक ही है। इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में सोमवार को भी गिरावट जारी रही।

शुक्रवार को सोने में 3% से अधिक की गिरावट आई, जो जून की शुरुआत के बाद इसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। सिंगापुर में कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 0.7% गिरकर प्रति औंस $4,422.75 प्रति औंस तो सिल्लर भी 0.4% गिरकर $66.12 प्रति औंस पर आ गया। इसका असर घरेलू बूलियन मार्केट में भी दिखा और MCX Gold प्रति 10 ग्राम 1.14% गिरकर ₹1,54,496 और MCX Silver Futures करीब 1.28% गिरकर ₹2,39,341 प्रति किग्रा पर आ गया।

Gold ETF की तुलना में Silver ETF में अधिक गिरावट

आज 31 अगस्त तो गोल्ड ईटीएफ की तुलना में सिल्वर ईटीएफ में अधिक गिरावट रही। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ (SBI Silver ETF) 4.05% गिरकर ₹226.55 पर आ गया, तो निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ (Nippon India Silver ETF- Silver BeES) 4.06% गिरकर ₹221.07 पर आ गया। टाटा सिल्वर ईटीएफ (Tata Silver ETF) भी 3.98% गिरकर ₹22.44 और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ (ICICI Prudential Silver ETF) भी 3.87% गिरकर ₹231.21 पर आ गया।

गोल्ड ईटीएफ में भी भारी गिरावट रही। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ (ICICI Prudential Gold ETF) 3.59% गिरकर ₹130.75, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ (SBI Gold ETF) 3.50% टूटकर ₹130.30 और निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईएसएस (Nippon India ETF Gold BeES) 3.48% गिरकर ₹126.30 पर आ गया। वहीं टाटा गोल्ड ईटीएफ (Tata Gold ETF) 3.19% गिरकर ₹14.87 पर आ गया।

क्या है US Fed का रुझान

फेडरल रिजर्व की सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में केविन वॉर्श ने कहा कि वह महंगाई को केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य पर वापस लाने के लिए प्रतिबंध है। इसके बाद सोना-चांदी धड़ाम हो गया क्योंकि इससे अमेरिकी मौद्रिक नीतियों के सख्त होने की उम्मीदें बढ़ गई। ट्रेडर्स का मानना है कि सितंबर में नीतिगत बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 50% से अधिक है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड का असर सोने और चांदी जैसी बिना यील्ड वाली एसेट्स पर पड़ता है।

सोने-चांदी की चमक पर अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई गहहाने से तेल की कीमतों में उबाल ने और दबाव बनाया। अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया जोकि एक महीने से अधिक समय में ईरान के खिलाफ अमेरिका की पहली सैन्य कार्रवाई थी। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया, जबकि बाजार पहले से ही आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कैलकुलेशन कर रहा था।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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