Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

Silver Prices: चांदी में निवेश करने वालों को पिछले कुछ महीनों में बड़ा झटका लगा है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर तक यह गिरकर ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 45.8% की गिरावट आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में है। मंगलवार को इसकी कीमत करीब 56.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जनवरी के 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से यह करीब 54% नीचे है।

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इससे बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। चांदी पर इसका दबाव पड़ रहा है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज आय नहीं होती।

चांदी का भाव कितना गिर सकता है?

J.P. Morgan Global Research को उम्मीद है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने 2026 के लिए औसत भाव का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। 2027 के लिए उसका अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।

Bloomberg Intelligence के कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भी गिरावट की आशंका जताई है। Kitco के मुताबिक, उनके अनुसार चांदी निकट भविष्य में 50 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। लंबे समय तक इसका भाव 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकता है।

तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों पर नजर

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने की आशंका बढ़ती है।

बाजार को उम्मीद है कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में दरें नहीं बदलेगा। हालांकि, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी CPI और PPI आंकड़े इस दिशा में अहम होंगे। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक सकती।

चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कीमत गिरने को सस्ता खरीदने का संकेत न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी करने से समय चुनने का जोखिम कुछ कम हो सकता है।

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI की 444 दिनों की स्पेशल FD स्कीम! जानें ₹5 लाख और ₹10 लाख फिक्स कराने पर कितना मिलेगा रिटर्न

SBI Amrit Vrishti Scheme: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्पेशल फिक्स्ड डिपॉजिट योजना ‘अमृत वृष्टि’ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। अगर आप सुरक्षित जगह पर निवेश करके शानदार रिटर्न पाना चाहते हैं, तो यह खास 444 दिनों की योजना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बैंक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जानिए इस स्पेशल टेन्योर स्कीम की हर एक जरूरी बात।

ब्याज दरें: किसे कितना मिलेगा फायदा?

इस योजना के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के निवेशकों के लिए ब्याज दरें तय की गई हैं:

  1. आम नागरिक: 6.45% सालाना
  2. वरिष्ठ नागरिक: 6.95% सालाना (सामान्य नागरिकों से 0.50% ज्यादा)
  3. सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): 7.05% सालाना

स्कीम की मुख्य विशेषताएं और नियम

अवधि: इस एफडी की मैच्योरिटी अवधि ठीक 444 दिन (करीब 14.5 महीने) तय की गई है।

न्यूनतम और अधिकतम राशि: इस योजना में रिटेल डिपॉजिट के तहत ₹1,000 से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, और अधिकतम राशि ₹3 करोड़ से कम होनी चाहिए।

कौन कर सकता है निवेश: भारत के सामान्य नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें निवेश के पात्र हैं।

ब्याज भुगतान के विकल्प: निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार ब्याज का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, छमाही या सीधे मैच्योरिटी के समय ले सकते हैं।

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशकों को इस एफडी पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल यानी समय से पहले पैसे निकासी के नियम

अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ जाती है और आप एफडी तुड़वाते हैं, तो बैंक नियमों के तहत पेनल्टी काटता है:

₹5 लाख तक की राशि पर: 0.50% की पेनल्टी।

₹5 लाख से ₹3 करोड़ से कम राशि पर: 1.0% की पेनल्टी।

खास छूट: अगर एफडी को बुक करने के 7 दिनों के भीतर बंद किया जाता है, तो कोई ब्याज नहीं मिलता है। हालांकि, बैंक के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस पेनल्टी से छूट दी गई है।

कैसे कर सकते हैं आवेदन?

SBI की इस योजना का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को बैंक जाने की भी जरूरत नहीं है, इसे घर बैठे ऑनलाइन भी शुरू किया जा सकता है:

  • SBI YONO App के जरिए।
  • एसबीआई की आधिकारिक इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल से।
  • अपने नजदीकी एसबीआई की किसी भी शाखा में जाकर फॉर्म भरकर।

₹5 लाख और ₹10 लाख की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न

एसबीआई की 444 दिनों वाली ‘अमृत वृष्टि’ एफडी में अगर आप 5 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो 6.45% सालाना ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹39,800 से ₹40,000 का ब्याज मिलेगा, जिससे कुल रकम बढ़कर करीब ₹5.40 लाख हो जाएगी; वहीं 6.95% की दर से वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹43,000 से ₹43,200 तक का रिटर्न मिलेगा, जिससे उनकी कुल रकम ₹5.43 लाख के पार पहुंच जाएगी।

इस स्कीम में ₹10 लाख की FD करने पर 6.45% सालाना चक्रवर्ती ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹80,000 से ₹80,500 तक का शुद्ध रिटर्न मिलेगा (कुल मैच्योरिटी रकम करीब ₹10.80 लाख हो जाएगी); वहीं 6.95% सालाना ब्याज दर के साथ वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹86,500 से ₹87,000 तक का ब्याज प्राप्त होगा, जिससे 444 दिनों बाद उनकी कुल जमा रकम बढ़कर लगभग ₹10.87 लाख पहुंच जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Commodity Cornor: क्रूड में नरमी से महंगाई की चिंता हुई कम , यील्ड में गिरावट से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों में स्थिरता रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने सोने को और सहारा दिया। शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 4,165 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से 0.09 प्रतिशत बढ़कर 4,185 डॉलर प्रति औंस (12:40 GMT) के करीब पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप, घरेलू बाजार में MCX पर हाजिर सोना शाम के सत्र में 1,45,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम (18:16 IST) पर आ गया।

LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “सोने में काफी हद तक स्थिरता रही। 4,190 डॉलर के ऊपरी स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यह कॉमेक्स (Comex) सोने के रुझान का अनुसरण कर रहा है। 4,200 डॉलर का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (बाधा) बना हुआ है, जबकि डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोने में तेजी सीमित हो रही है।”

डॉलर इंडेक्स 0.09 फीसदी बढ़कर 101.93 पर कारोबार कर रहा था, जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 108.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

PL कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा, “अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और यील्ड कम रहती है, तो सोने और चांदी में रिकवरी जारी रह सकती है। हालांकि, अगर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है या फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की ओर से कोई सख्त रुख (hawkish signal) देखने को मिलता है, तो सोने की ये बढ़त खतरे में पड़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। “अब सबकी नजरें फेड के बयान के लहजे और महंगाई के आंकड़ों के अगले दौर पर टिकी हैं।” ओम्निसिएंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हैं, लेकिन साथ ही कुछ बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो सोना बेच रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं।

गुप्ता ने कहा, “भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, फेड (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।”

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: चांदी की चमक बढ़ी या हुई सस्ती? जानें आपके अपने शहर में आज का सिल्वर रेट

Silver price Today: देश में चांदी की कीमत और नीचे आ गई है। 19 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते सप्ताह चांदी का भाव 13,500 रुपये नीचे आया। MCX पर चांदी का वायदा भाव 758 रुपये यानी 0.36 प्रतिशत बढ़कर 2,11,418 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,10,660 रुपये पर बंद हुआ था। बुलियंस के मुताबिक चांदी 2,11,840 रुपये प्रति किलो और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 57.52 डॉलर प्रति औंस पर है।

हाई से अब इतनी सस्ती Silver 

बीते पांच कारोबारी दिनों में चांदी की वायदा कीमत में आई गिरावट के बाद अब Silver अपने लाइफ टाइम हाई से और भी ज्यादा सस्ती हो गई है. बता दें जनवरी महीने में वायदा चांदी का भाव अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए पहली बात 4 लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर के पार निकली थी और इसने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का हाई लेवल छुआ था लेकिन इसके बाद चांदी की कीमत ज्यादातर दिनों क्रैश होती नजर आई और ताजा गिरावट के बाद तुलना करें, तो Silver Price अपने हाई लेवल से 2,08,630 रुपये किलो कम हो चुका है

आइए गुडरिटर्न के आंकड़ों के मुताबिक 16 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में चांदी की ताजा कीमतों पर एक नजर डालते हैं

1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹ 2,29,900
मुंबई₹ 2,29,900
कोलकाता₹2,29,900
चेन्नई₹2,39,900
लखनऊ₹2,29,900
पटना₹2,29,900
जयपुर₹2,29,900
अहमदाबाद₹2,29,900
पुणे₹2,29,900
बेंगलुरु₹ 2,29,900
हैदराबाद₹2,29,900
भोपाल₹2,29,900
चंडीगढ़₹2,29,900
नोएडा₹2,29,900
गुरुग्राम₹2,29,900

कीमतों में दबाव क्यों

अमेरिकी मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) में बढ़ोतरी के कारण फेड द्वारा ब्याज दरों में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिससे चांदी (XAG) पर दबाव कायम है। अमेरिकी डॉलर में हालिया गिरावट से चांदी की कीमतों में कुछ सुधार आ सकता है, लेकिन ऊर्जा की ऊंची लागत और ब्याज दरें और बढ़ने का जोखिम इस सुधार को सीमित कर सकता है।

बाजार जानकारों का कहना है कि चांदी के आउटलुक को मजबूत करने के लिए इसे $50-$55 के सपोर्ट ज़ोन पर टिके रहना होगा और $60 के स्तर को पार करना होगा।

चांदी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

चांदी खरीदने से पहले उसकी शुद्धता, वजन और पक्का बिल जरूर जांचें। 999 शुद्धता वाली चांदी में 99.9 प्रतिशत चांदी होती है, जबकि 925 स्टर्लिंग सिल्वर में 92.5 प्रतिशत चांदी होती है। गहनों की कीमत में मेकिंग चार्ज और लागू GST भी जुड़ सकता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Asian Market: टेक शेयरों में गिरावट के बाद रिकवरी से एशियाई बाजारों में उछाल, Kospi 1% से ज़्यादा चढ़ा

Asian Market: एशियाई शेयरों में रिकवरी देखने को मिली। जबकि इससे पहले दो सेशन में गिरावट आई थी। निवेशकों को उम्मीद है कि US फेडरल रिजर्व को अगले साल अपनी पॉलिसी को बहुत ज़्यादा सख्त करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। MSCI के एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में 0.2% की बढ़त हुई। मंगलवार को चिप शेयरों में भारी गिरावट के कारण यह इंडेक्स अगस्त के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ था। दक्षिण कोरिया का Kospi 1.73% चढ़ा, Taiex में 0.52% और Nikkei 225 में 0.47% की बढ़त हुई, जबकि Topix 0.11% गिर गया। Hang Seng फ्यूचर्स में कोई खास हलचल नहीं दिखी।

इस क्षेत्र में दूसरी जगहों पर, चीनी शेयरों के फिर से ‘बेयर मार्केट’ (गिरावट वाले बाज़ार) में जाने का खतरा बना हुआ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बात पर शक बढ़ रहा है कि क्या बीजिंग अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए कोई बड़ा स्टिमुलस (आर्थिक राहत पैकेज) देगा या नहीं।

CSI 300 इंडेक्स जून के अपने पीक (उच्चतम स्तर) से 15% से ज़्यादा गिर चुका है और अगस्त 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर है।

भारत में, GIFT Nifty – जो यह बताता है कि देश का शेयर बाज़ार दिन की शुरुआत कैसे करेगा – ने नेगेटिव शुरुआत का संकेत दिया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के शेयर ट्रेडिंग पर लगने वाले ट्रांज़ैक्शन टैक्स पर चर्चा सुनने की इच्छा ज़ाहिर करने के बाद देश के शेयरों पर सबकी नज़र है, क्योंकि देश ज़्यादा कैपिटल इनफ्लो (पूंजी का निवेश) आकर्षित करना चाहता है।

मंगलवार को उनके भाषण के दौरान Nifty 50 में बढ़त जारी रही और यह 1.6% ऊपर बंद हुआ, जो दो महीने से ज़्यादा समय में इसकी सबसे बड़ी बढ़त थी।

इस बीच, जापान की करेंसी स्थिर रही और शुरुआती कारोबार में 158.33 प्रति डॉलर पर ट्रेड करती रही। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ऑफ़ जापान के अधिकारी इस महीने लगातार दूसरी बार ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पॉलिसी बनाने वालों ने दिसंबर में एक और कदम उठाने का विकल्प खुला रखा है।

ऑफशोर युआन में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और यह 6.6930 प्रति डॉलर पर रहा। वॉल स्ट्रीट पर शांत कारोबार के बाद इस क्षेत्र में रिकवरी दिखी। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स के यह कहने के बाद कि उन्हें लगता है कि इस साल एक और बार ब्याज दरें बढ़ानी चाहिए, लेकिन 2027 में और सख्ती की ज़रूरत नहीं है, S&P 500 ने अपनी शुरुआती गिरावट को कम किया और लगभग बिना किसी बदलाव के बंद हुआ।

उनके बयानों से टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव कम हुआ और माइक्रोसॉफ्ट रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। न्यूयॉर्क में ट्रेडिंग के दौरान US ट्रेजरी में तेज़ी आई और US डॉलर कमज़ोर हुआ, क्योंकि निवेशक ब्याज दरों के आउटलुक पर नए संकेतों के लिए बुधवार के US कंज्यूमर प्राइस डेटा का इंतज़ार कर रहे थे।

व्यापक चिंताओं के बावजूद US इक्विटीज़ ने अच्छा प्रदर्शन किया है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, मंगलवार तक 53 सेशन में S&P 500 में एक दिन में 1% की गिरावट नहीं देखी गई, जो जनवरी 2020 के बाद से ऐसा सबसे लंबा दौर था।

US अर्निंग्स सीज़न की शुरुआत ने भी सेंटीमेंट को प्रभावित किया। JPMorgan Chase, Citigroup और Wells Fargo, तीनों ने तीसरी तिमाही में रिकॉर्ड लेंडिंग इनकम दर्ज की, क्योंकि ऊंची दरों के बावजूद ग्राहक लोन लेते रहे।

Goldman Sachs में इक्विटी ट्रेडर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन फिक्स्ड-इनकम और रेट्स ट्रेडिंग वॉल स्ट्रीट के अनुमानों से काफी पीछे रही। निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रेड के बारे में संकेतों के लिए भी अर्निंग्स पर नज़र रखे हुए थे, जिस पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि इस बात पर संदेह है कि क्या अरबों डॉलर खर्च करने से उतना ही रिटर्न मिलेगा।

तेल की कीमतें बढ़ती रहीं। US क्रूड 0.8% बढ़कर लगभग $94.80 प्रति बैरल हो गया, जो लगातार पांचवें दिन की बढ़त थी, क्योंकि वेस्ट एशिया में नए हमलों ने अरब खाड़ी से एनर्जी शिपमेंट की बहाली को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट शुरुआती एशियाई ट्रेडिंग में $106.51 प्रति बैरल तक बढ़ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.7% बढ़कर $94.81 हो गया। बाज़ारों को चिंता थी कि क्रूड की ऊंची कीमतें महंगाई को लगातार ऊंचा रख सकती हैं, जिससे बुधवार के US महंगाई के आंकड़ों का महत्व और बढ़ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Outlook: शॉर्ट टर्म में इस कारण अहम रहेगी सोने-चांदी चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए क्या त्योहारों में बढ़ेंगे दाम

Gold Silver Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में 13 अक्टूबर को स्थिरता देखने को मिली। अमेरिका के महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर के सोने के वायदा (futures) का भाव ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम था, जिसमें 0.01% की गिरावट आई। दिसंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा का कारोबार ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम पर हुआ, जिसमें 0.05% की गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है क्योंकि बाज़ार अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर फिर से विचार कर रहे हैं। हालांकि ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से बुलियन (सोने-चांदी) को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर का मजबूत होना अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त हो रही है, हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता आगे की बढ़त को सीमित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि निवेशक महंगाई और फेड के अगले नीतिगत कदमों के बारे में नए संकेतों के लिए अमेरिका के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे हैं।

कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों?

सोने और चांदी से कोई ब्याज आय नहीं मिलती है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या बाज़ार को उम्मीद होती है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, तो निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों को ज़्यादा आकर्षक मान सकते हैं, जिससे बुलियन की कीमतों पर दबाव पड़ता है। इसके विपरीत, डॉलर का कमजोर होना और ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीदें कीमती धातुओं को सहारा दे सकती हैं।

वेंचुरा (Ventura) में कमोडिटी हेड एन एस रामास्वामी ने कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि कमजोर पेरोल आंकड़ों के बाद बाज़ार में अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि साल के आखिर में और 2027 की पहली छमाही में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कीमतों पर असर डाल सकती हैं।

जियोपॉलिटिकल तनाव भी ऊर्जा की कीमतों पर असर डालकर बुलियन को प्रभावित कर रहे हैं। रामास्वामी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताओं और ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों को और बढ़ा सकती हैं, जिससे सोने के लिए निकट भविष्य में चुनौतीपूर्ण माहौल बन सकता है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स में रिसर्च हेड, राजीव शरण ने कहा कि सोने की कीमतों पर सिर्फ़ जियोपॉलिटिकल घटनाओं के बजाय कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का ज़्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कीमतों में और गिरावट आने पर त्योहारों के मौसम से पहले खरीदारी बढ़ सकती है।

निवेशकों को आगे किस चीज़ पर नजर रखनी चाहिए?

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम कारक हैं। उम्मीद से ज़्यादा महंगाई से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो सकती हैं, जबकि कम महंगाई के आंकड़े मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) की चिंताओं को कम करके कीमतों को सहारा दे सकते हैं।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि सोने और चांदी के लिए निकट भविष्य का आउटलुक सतर्कता वाला बना हुआ है। उन्होंने अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और महंगाई के आंकड़ों को नज़र रखने के लिए अहम कारक बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि करेंसी में उतार-चढ़ाव भी घरेलू बुलियन की कीमतों पर असर डालते हैं क्योंकि भारत अपना ज़्यादातर सोना और चांदी आयात करता है।

भारतीय खरीदारों के लिए, कमज़ोर रुपया आयातित बुलियन को महंगा बना सकता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर हों या गिर रही हों। घरेलू कीमतें आयात शुल्क और स्थानीय मांग से भी प्रभावित होती हैं।

क्या त्योहारों का मौसम सोने को मिलेगा सहारा

धनतेरस और दिवाली से पहले गहनों की खरीदारी से घरेलू सोने की मांग को सहारा मिल सकता है, हालांकि रिटेल खरीदारी से कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी हो ज़रूरी नहीं है।

रामास्वामी को उम्मीद है कि दिवाली से पहले सोना ₹1.50 लाख से ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा, और त्योहारों की मांग के पीक समय के बाद इसमें कंसोलिडेशन (स्थिरता) हो सकता है। यह बाज़ार का एक अनुमानित आउटलुक है, न कि कीमतों की गारंटी वाली रेंज।

VT मार्केट्स के प्रिंसिपल एनालिस्ट डैनियल मुंडे ने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में साप्ताहिक निवेश से पता चलता है कि कुछ निवेशक कीमतों में गिरावट का इस्तेमाल अपनी पोजीशन बनाने और अनिश्चितता से बचाव (हेजिंग) के लिए कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई के मज़बूत आंकड़े और ब्याज दरें बढ़ने की नई उम्मीदें रिकवरी को धीमा कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए, शॉर्ट-टर्म रिबाउंड (अल्पकालिक उछाल) और दिशा में लगातार बदलाव के बीच का अंतर समझना ज़रूरी है। डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, महंगाई के आंकड़े, कच्चा तेल और निवेश का प्रवाह यह तय करने में मदद करेंगे कि सोना और चांदी रिकवर कर सकते हैं या दबाव में रहेंगे।

 

Gold- Silver price: सोना ₹1.50 लाख के नीचे, चांदी हुई सस्ती, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

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Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन भी चांदी गिरी, जानिए आपके आपने शहर का ताजा भाव

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन भी चांदी की कीमतो में गिरावट देखने को मिली। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। उधर गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमत 2,40,000 रुपये प्रति किलो हो गई।

आज बाजार ओपन होने से पहले तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव 1.24% घटकर यानी 2805 रुपये गिरावट के साथ 2,22,950 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,25,755 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियंस के मुताबिक चांदी की कीमत 2,23,280 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60.37 डॉलर प्रति औंस हो गई।

औद्योगिक मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव, ये सभी घरेलू स्तर पर चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। स्थानीय बाज़ार की स्थितियों के आधार पर अलग-अलग शहरों में कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं।

आइए 13 अक्टूबर को भारत के प्रमुख शहरों में चांदी की ताजा कीमतों पर एक नज़र डालते हैं

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹ 2,39,900
मुंबई₹ 2,39,900
कोलकाता₹2,39,900
चेन्नई₹2,44,900
लखनऊ₹2,39,900
पटना₹2,39,900
जयपुर₹2,39,900
अहमदाबाद₹2,39,900
पुणे₹2,39,900
बेंगलुरु₹2,39,900
हैदराबाद₹2,39,900
भोपाल₹2,39,900
चंडीगढ़₹2,39,900
नोएडा₹2,39,900
गुरुग्राम₹2,39,900

चांदी में गिरावट क्यों

डॉलर मजबूत होने की वजह से चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आ पा रही है। वहीं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर है, जिनसे यह संकेत मिलेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों में क्या बदलाव कर सकता है।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स करीब 18 महीने के ऊंचे स्तर पर है, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में तेजी सीमित हो रही है। सोने और चांदी की कीमतों पर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। वहीं, ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय ऐसे विकल्पों में पैसा लगाना पसंद कर सकते हैं, जिनसे ब्याज मिलता है।

दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो दो सप्ताह के ऊंचे स्तर के करीब है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने में देरी कर सकता है।

अब कहां रखें नजर

आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, फेडरल रिजर्व के बयान, डॉलर की चाल और अमेरिकी बॉन्ड की ब्याज दरें सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले सप्ताह फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ऊंची ब्याज दरों से सोने-चांदी पर दबाव पड़ा था। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत में प्रगति से जुड़ी टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे बाजार के माहौल में सुधार आया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।