बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

deep depression in bay of bengal

बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। इसके चक्रवाती तूफान अर्नब में बदलने और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

 

ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश

ओडिशा के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते ओडिशा में ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य के 7 जिलों में 24 सितंबर तक शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया गया है, जबकि सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें ड्यूटी पर लौटने को कहा गया है। 

 

आईएमडी ने 23 और 24 सितंबर को कोरापुट, गजपति और गंजाम में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। 24 और 25 सितंबर के लिए कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण ओडिशा में 23 और 24 सितंबर को बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। 25 और 26 सितंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

राजस्थान से मानसून की विदाई

उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौटने लगा है और अगले 3-4 दिनों में राज्य के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 23 से 25 सितंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। ALSO READ: अभी खत्म नहीं हुआ मानसून! लौट आया बारिश का दौर, 24 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए फिलहाल कोई अलर्ट नहीं जारी किया है। यहां बुधवार को मौसम सामान्य तौर पर सूखा रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में ज्यादा राहत नहीं मिलेगी और अधिकतम तापमान करीब 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

4 KM तक बहता रहा 4 दिन का नन्हा हाथी, मछुआरों ने जान जोखिम में डालकर मां से मिलाया; दिल छू लेगा ये VIDEO, देखें

4 KM तक बहता रहा 4 दिन का नन्हा हाथी, मछुआरों ने जान जोखिम में डालकर मां से मिलाया; दिल छू लेगा ये VIDEO, देखें

Wholesome Elephant Rescue : पश्चिम बंगाल की तीस्ता नदी में बह रहे हाथी के महज चार दिन के बच्चे को स्थानीय मछुआरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना बचा लिया। तेज बहाव के बीच करीब चार किलोमीटर तक बह चुके इस नन्हे हाथी को मछुआरों ने नाव से पीछा कर सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वन विभाग की मदद से उसे उसकी मां से मिलाया गया। मां ने बच्चे को अपनाया और उसे दूध पिलाया तो वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला बन गया।

 

तेज बहाव में बह गया था हाथी का बच्चा

 

जानकारी के मुताबिक, हाथियों का एक झुंड शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे गजोल्डोबा बैराज के पास तीस्ता नदी पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान तेज बहाव में हाथी का बच्चा अपनी मां से अलग हो गया और पानी के साथ करीब चार किलोमीटर दूर बह गया।

 

बच्चे को तीस्ता नदी के 12वें स्पर के पास संघर्ष करते देख स्थानीय मछुआरों ने तुरंत अपनी नाव उसकी ओर मोड़ दी। नॉर्थ बंगाल फिशरमेन फोरम से जुड़े पांच मछुआरे—मिठू दास, विश्वनाथ दास, राजेश दास, गोपाल दास और बबलू दास बच्चे के पीछे करीब चार किलोमीटर तक गए।

 

बच्चा लगातार तेज लहरों में बह रहा था और सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहा था। उसकी छोटी-सी सूंड पानी के ऊपर दिखाई दे रही थी। हालात बेहद मुश्किल थे, लेकिन मछुआरों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। तीन मछुआरे पानी में उतर गए और किसी तरह बच्चे को खींचकर नाव तक लाने में कामयाब रहे।

 

 मां से मिलते ही बदल गया पूरा मंजर

 

बचाए जाने के बाद हाथी के बच्चे को वन विभाग के कर्मचारियों को सौंप दिया गया। उसे काठांबारी रेंज कार्यालय ले जाकर पशु चिकित्सकों ने उसकी जांच की। राहत की बात रही कि बच्चे को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी।

 

इसके बाद बैकुंठपुर वन प्रभाग की टीम ने उसकी मां को तलाशने का अभियान शुरू किया। वनकर्मियों, स्थानीय लोगों और मछुआरों के करीब दो घंटे के संयुक्त प्रयास के बाद आखिरकार बच्चे को उसकी मां तक पहुंचाया गया।

 

मां हाथी अपने बच्चे के पास आई और उसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद उसे बच्चे को दूध पिलाते हुए भी देखा गया। यह पल पूरे बचाव अभियान का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहा। 

 

बैकुंठपुर के DFO मुदित कुमार ने मछुआरों की समय पर की गई कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने बताया कि बच्चे को जल्द से जल्द मां से मिलाना बेहद जरूरी था, क्योंकि लंबे समय तक इंसानों के संपर्क में रहने पर कई बार हाथियों का झुंड बच्चों को दोबारा स्वीकार नहीं करता।

 

इस पूरे रेस्क्यू ने एक बार फिर दिखाया कि मुश्किल वक्त में इंसान और वन्यजीवों के बीच की संवेदनशीलता कितनी खूबसूरत हो सकती है। नन्हे हाथी की जिंदगी बचाने से लेकर उसे उसकी मां की गोद तक पहुंचाने तक, मछुआरों और वन विभाग की यह कोशिश दिल जीत लेने वाली है।

छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना

छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना

पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गाँव की सोनाली के पास न कोई बड़ी Dance Academy है, न महंगा कैमरा और न कोई शानदार सेटअप।
पिता एक मामूली पेंटर हैं, माँ ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करती हैं।
घर में आर्थिक तंगी की वजह से सोनाली की पढ़ाई तक छूट गई, लेकिन उनके बचपन का सपना एक बेहतरीन डांसर बनने का आज भी ज़िंदा है।
पुराने फोन से विडियोज बनाकर और यूट्यूब से सीखकर सोनाली रोज़ अपने सपने के थोड़ा और करीब बढ़ रही है।
क्योंकि उन्हें खुद पर यकीन है कि उनकी। मेहनत एक दिन उन्हें उस बड़े मंच तक पहुँचा देगी।

@sonalikt92

छोटे कमरे से बड़े मंच की तैयारी करती गाँव की सोनाली | Painter की बेटी Sonali का Dancer बनने का सपना | West Bengal |

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Bengal SIR Dispute: बंगाल में अबतक SIR में कटे 93% वोटर्स की अपील मंजूर, बहाल हुआ तो मिलेगा वोटिंग का अधिकार, EC ने कहा- चुनाव नतीजों पर नहीं पड़ा असर

Bengal SIR Dispute: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में अहम आंकड़े पेश किए हैं। आयोग के मुताबिक, अब तक जिन मामलों में अपील पर फैसला हुआ है, उनमें करीब 93 फीसदी लोगों ने अपनी अपील जीत ली है। उन्हें दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया है। चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में यह जानकारी दी है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के साथ दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,26,194 मामलों का निपटारा 16 सितंबर तक किया गया था। इनमें से 1,13,943 लोग अपीलीय प्रक्रिया में यह साबित करने में सफल रहे कि वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाने का फैसला सही नहीं था। वहीं, करीब 8,649 लोगों की अपील खारिज हुई और उनके नाम वोटर लिस्ट से बाहर ही रहेंगे।

24 अपीलीय ट्रिब्यूनल ने सुनीं अपीलें

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। इन पैनलों में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जजों को शामिल किया गया था। जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने का दावा खारिज कर दिया गया था, वे इन ट्रिब्यूनल के सामने अपील कर सकते थे। इन अपीलों की सुनवाई अप्रैल से शुरू हुई थी। हलफनामे में बताया गया कि अलग-अलग जिलों में कई मतदाताओं ने अपील दायर की। इस दौरान कई मामलों का निपटारा किया गया।

10 सितंबर और 16 सितंबर के आंकड़ों में अंतर

चुनाव आयोग के हलफनामे में एक दिलचस्प अंतर भी सामने आया है। मुख्य हलफनामे में कहा गया है कि 16 सितंबर तक 1,26,194 मामलों का निपटारा हो चुका था। वहीं, 24 ट्रिब्यूनल द्वारा 10 सितंबर तक 1,22,592 मामलों के निपटारे की जानकारी दी गई है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि अभी निपटाए गए मामलों की संख्या कुल मामलों की तुलना में काफी कम है, इसलिए इसे अंतिम परिणाम का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती चरण में उन मामलों का निपटारा पहले हुआ जिनमें मतदाताओं के पास अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मौजूद थे। इसलिए अभी के आंकड़ों में नाम दोबारा शामिल किए जाने का अनुपात अधिक दिखाई दे सकता है।

TMC के 31 सीटों वाले दावे पर EC का जवाब

चुनाव आयोग ने यह हलफनामा तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उसके सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे के जवाब में दाखिल किया है, जिसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के कारण पार्टी को विधानसभा की 31 सीटों पर नुकसान हुआ। आयोग ने ओ’ब्रायन पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हीं आंकड़ों के दूसरे पक्ष को नजरअंदाज किया, जिनका इस्तेमाल अपने दावे के समर्थन में किया गया था।

EC ने कहा कि 21 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले अभी विचाराधीन हैं, जिनकी संख्या संबंधित सीटों पर जीत के अंतर से अधिक है। आयोग के मुताबिक, इन सीटों में जीतने वाले उम्मीदवारों में TMC के उम्मीदवार भी शामिल हैं। आयोग ने अपने हलफनामे में तर्क दिया कि यदि ओ’ब्रायन द्वारा अपनाए गए तर्क और कसौटी को ही लागू किया जाए, तो TMC को उन विधानसभा सीटों के चुनाव परिणामों को भी चुनौती देनी होगी, जहां उसकी अपनी पार्टी के उम्मीदवार जीत चुके हैं।

अभी फाइनल तस्वीर साफ नहीं

चुनाव आयोग के मुताबिक, अपीलों के मौजूदा आंकड़े पूरी प्रक्रिया का फाइनल रिजल्ट नहीं बताते हैं। अभी सभी मामलों का निपटारा नहीं हुआ है। कई अपीलों पर फैसला होना बाकी है। इसलिए फिलहाल 93 फीसदी अपीलों के पक्ष में फैसला आने का आंकड़ा शुरुआती तस्वीर देता है। जबकि SIR के तहत वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी नामों और लंबित अपीलों का फाइनल आंकड़ा सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

अब तक की बड़ी बातें

  • सफलता की दर: जिन मामलों का निपटारा हुआ है, उनमें से 1,13,943 लोग ट्रिब्यूनल को यह समझाने में सफल रहे कि EC द्वारा उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करने का फैसला गलत था।
  • चुनाव नतीजों पर असर नहीं: चुनाव आयोग का कहना है कि इन नामों को हटाए जाने से विधानसभा चुनाव के अंतिम नतीजों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
  • अपील की प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 24 अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन किया गया था, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जजों की पीठ ने अप्रैल से इन अपीलों की सुनवाई शुरू की थी।
  • TMC के दावों का खंडन: आयोग ने TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि इनकी वजह से उन्हें 31 सीटों का नुकसान हुआ। चुनाव आयोग ने कहा कि यह तर्क पूरी तरह से काल्पनिक और गुमराह करने वाला है।

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

80 साल के दादा 60 साल से कर रहे गांव की सफाई  | Inspiration | West Bengal | Senior Citizen

दूषित नदियों, रास्तों और पहाड़ों की शिकायत करने वाले लोग तो आपको जरूर कहीं न कहीं मिल जाएंगे। लेकिन बिना किसी शिकायत के अपने शहर और देश की गलियों को अपना घर समझकर सफाई करने वाले लोग आपको कहाँ मिलेंगे?
एक इंसान की जिंदगी के 70 साल दूसरों के चलने का रास्ता साफ करते हुए गुजर गए।
क्या हम उनके जीवन के इस आखिरी पड़ाव में उनके साथ थोड़ा खड़े नहीं हो सकते?
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चाय की दुकान से Olympic सपने तक पहुंची ये खिलाड़ी बेटी | From Village Fields to the Olympic Dream

चाय की दुकान से Olympic सपने तक पहुंची ये खिलाड़ी बेटी  | From Village Fields to the Olympic Dream

हर खिलाड़ी की कहानी सिर्फ़ Medal से नहीं, उस सफर से बनती है जो उसे Medal तक पहुंचाता है। मौमिता मंडल का सफर भी कुछ ऐसा ही है, बिना सुविधाओं, नंगे पैर और सीमित संसाधनों के बीच अपने सपने को जिंदा रखा। सुबह 3 बजे उठना, घर का काम करना और 2 घंटे ट्रेन से Practice के लिए जाना उनकी रोज़ की मेहनत थी।
आज उनके नाम कई National Medals हैं, Indian Railways में नौकरी है और पिता को चाय की दुकान पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती।
लेकिन सपना अभी बाकी है—2028 Olympics में भारत के लिए Medal जीतना।
क्योंकि खिलाड़ी की असली ताकत उसकी जीत नहीं, हार के बाद भी मैदान में लौटने का हौसला होता है।

@itsmoumita___

चाय की दुकान से Olympic सपने तक पहुंची ये खिलाड़ी बेटी | From Village Fields to the Olympic Dream | Runner Moumita Mondal

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भारतीय रेलवे का मेगा प्लान आया सामने, इन 5 राज्यों में बिछेगी 656 किमी नई पटरी, 10783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाएं मंजूर

Indian Railways Cabinet Decisions: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेलवे के विस्तार को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने देश के 5 राज्यों में कनेक्टिविटी सुधारने और ट्रेनों की भीड़कम करने के लिए ₹10,783 करोड़ की 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

प्रधानमंत्री गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मंजूर की गई इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा मिलेगा। इसके तहत कुल 656 किलोमीटर लंबी नई रेल पटरियां बिछाई जाएंगी, जिन्हें साल 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानिए इस मेगा प्लान की 5 सबसे बड़ी बातें।

किन 3 बड़ी रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी?

आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने जिन तीन रेल लाइनों के विस्तार को मंजूरी दी है, वे निम्नलिखित हैं:

  • खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडीही): चौथी नई रेल लाइन।
  • कटनी से पेंड्रा रोड: चौथी नई रेल लाइन।
  • बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड: तीसरी नई रेल लाइन।

2. 14 जिलों के 4,790 गांवों को सीधा फायदा

यह रेल विस्तार 5 राज्यों के 14 जिलों में फैले लगभग 4,790 गांवों को भारतीय रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगा। इससे क्षेत्र की लगभग 56 लाख आबादी को आवागमन में सीधी राहत मिलेगी और यात्रा का समय घटेगा।

3. धार्मिक और पर्यटन स्थलों का सफर होगा आसान

इन नई रेल पटरियों के बिछने से कई प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्व और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों तक पहुंचना काफी सुगम हो जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश)
  • अमरकंटक मंदिर (मध्य प्रदेश)
  • अचानकमार टाइगर रिजर्व (छत्तीसगढ़)
  • भगवान जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा)
  • रतनपुर महामाया मंदिर (छत्तीसगढ़)

4. माल ढुलाई में तेजी और कम होगी लॉजिस्टिक्स लागत

यह पूरा रूट औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसी भारी औद्योगिक सामग्रियों की आपूर्ति होती है। इन नई लाइनों के शुरू होने से रेलवे सालाना 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगी। पटरियों की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे ट्रकों पर निर्भरता घटेगी और रसद/लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी।

5. पर्यावरण को बंपर फायदा: 12 करोड़ लीटर तेल की बचत

सरकार के अनुमान के मुताबिक, सड़कों के बजाय रेलवे से माल ढुलाई बढ़ने से पर्यावरण को बहुत बड़ा फायदा होगा। हर साल लगभग 12 करोड़ लीटर तेल की खपत कम होगी। पर्यावरण में 62 करोड़ किलोग्राम (CO2) कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटेगा। यह लाभ लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।

 

Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 28 वर्षीय भतीजी बृष्टि मुखर्जी (Bristy Mukherjee) की मंगलवार को बीरभूम जिले के रामपुरहाट में मौत हो गई।   बृष्टि का शव उनके गांव स्थित आवास में फंदे से लटका मिला। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बृष्टि मुखर्जी का शव रामपुरहाट इलाके के कुसुम्बा स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल के एक कमरे से बरामद किया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।

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शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी

 

रिपोर्टों के मुताबिक, बृष्टि मुखर्जी उन करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में शामिल थीं, जिनकी नियुक्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले में जांच हुई थी। बृष्टि बोलपुर के एक अपर प्राइमरी स्कूल में गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थीं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वाले उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम कथित तौर पर 608वें स्थान पर था। हाईकोर्ट के फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

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कोर्ट के फैसले के बाद तनाव में होने की बात

 

रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षक भर्ती मामले में अदालत के फैसले के बाद बृष्टि मानसिक तनाव में थीं। परिवार की ओर से बताया गया कि उनका इलाज भी चल रहा था। हालांकि, उनकी मौत के वास्तविक कारण और परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

क्या है West Bengal SSC भर्ती मामला?

यह मामला 2016 West Bengal State Level Selection Test (SLST) के जरिए स्कूलों में हुई शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ा है। आरोप था कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को कथित तौर पर अनियमित तरीके से नौकरी दी गई। मामले की जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन के आरोप सामने आए थे।

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इसी मामले के चलते करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने का मामला अदालत तक पहुंचा। यह प्रकरण पश्चिम बंगाल में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए प्रमुख भर्ती विवादों में शामिल रहा है। पुलिस फिलहाल बृष्टि मुखर्जी की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।