Climate impact Alert: जलवायु परिवर्तन की मार से गेहूं में होगा बड़ा बदलाव! रोटी की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा; सेहत पर भी पड़ सकता है असर

Climate impact ON wheat: जलवायु परिवर्तन का असर अब हमारी थाली तक पहुंच सकता है। जी हां, जिस गेहूं से हर दिन करोड़ों लोगों की रोटी बनती है, उसकी पोषण संबंधी गुणवत्ता और प्रोटीन संरचना भविष्य में बदल सकती है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी में सामने आया है कि वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का स्तर बढ़ने से गेहूं के प्रोटीन की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। इसका असर न केवल आटे और ब्रेड की क्वालिटी पर पड़ सकता है, बल्कि गेहूं से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है।

स्टडी में खुलासा हुआ है कि वातावरण में बढ़ती CO₂ गेहूं की प्रोटीन संरचना को बदल सकती है। इसका असर बेकिंग गुणवत्ता पर पड़ने के संकेत मिले हैं। जर्मनी के लीबनिज इंस्टीट्यूट फॉर फूड सिस्टम्स बायोलॉजी और टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख से जुड़े शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल फूड केमिस्ट्री (Food Chemistry) में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में गेहूं की खेती पर विचार करते समय केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। अनाज की गुणवत्ता और उसमें मौजूद प्रोटीन के प्रकारों को भी समझना जरूरी है।

हवा में बढ़ती CO₂ से गेहूं पर कितना असर?

स्टडी के अनुसार, वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है। वर्ष 1980 में इसका स्तर लगभग 340 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) था, जो 2024 में बढ़कर करीब 425 ppm तक पहुंच गया। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह स्तर 600 ppm तक जा सकता है। गेहूं दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है। ऐसे में वातावरण में CO₂ की बढ़ती मात्रा के बीच इसकी खेती और अनाज की क्वालिटी में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों ने इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए गेहूं की अलग-अलग किस्मों पर प्रयोग किया।

10 किस्मों पर हुआ प्रयोग, सामने आए चौंकाने वाले बदलाव

शोधकर्ताओं ने सर्दियों में उगाई जाने वाली गेहूं की 10 खेती की किस्मों को वास्तविक कृषि और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप उगाया। इनमें से कुछ पौधों को सामान्य परिस्थितियों में मौजूद CO₂ के स्तर पर रखा गया। जबकि अन्य पौधों को 546 ppm की बढ़ी हुई CO₂ में उगाया गया। फसल तैयार होने के बाद वैज्ञानिकों ने गेहूं के दानों में मौजूद प्रोटीन का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके लिए हाई-रिजॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

स्टडी में विशेष रूप से ग्लूटेन प्रोटीन, एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs), प्यूरोइंडोलिन और सीलिएक रोग से संबंधित कुछ पेप्टाइड्स पर ध्यान दिया गया। नतीजों से पता चला कि CO₂ कॉन्सेंट्रेशन का स्तर बढ़ने पर गेहूं के अलग-अलग प्रोटीन समूहों में एक जैसा बदलाव नहीं हुआ। कुछ प्रोटीन बढ़े। जबकि कुछ की मात्रा घट गई। इसका मतलब है कि जलवायु परिवर्तन गेहूं की प्रोटीन संरचना को प्रभावित कर सकता है।

बढ़ेगा एक तरह का प्रोटीन, घट सकता है ग्लूटेन

इस स्टडी में पाया गया कि बढ़ी हुई CO₂ कॉन्सेंट्रेशन में गेहूं के दानों में एमाइलेज/ट्रिप्सिन इनहिबिटर्स (ATIs) की मात्रा बढ़ गई। दूसरी ओर, प्यूरोइंडोलिन, ग्लूटेन प्रोटीन और सीलिएक रोग से एक्टिव हो सकने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में कमी देखी गई। ATIs ऐसे प्रोटीन हैं जिनकी संभावित हेल्थ संबंधी भूमिका पर वैज्ञानिक अध्यन करते रहे हैं। इनकी मात्रा बढ़ने का असर मानव स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेकिन इस स्टडी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बढ़ी हुई CO₂ में उगा गेहूं सीधे तौर पर लोगों को बीमार कर देगा। वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्लूटेन प्रोटीन की मात्रा घटने के साथ गेहूं की बेकिंग गुणवत्ता में गिरावट देखी गई। यानी प्रोटीन की संरचना में बदलाव का असर रोटी, ब्रेड और गेहूं से बनने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों की निर्माण संबंधी विशेषताओं पर पड़ सकता है।

क्या गेहूं से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बदल सकता है?

अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू गेहूं से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि CO₂ बढ़ने के कारण ATIs और सीलिएक रोग से सक्रिय होने वाले कुछ पेप्टाइड्स की मात्रा में बदलाव हुआ। सीलिएक रोग एक प्रतिरक्षा सिस्टम से जुड़ी बीमारी है, जिसमें ग्लूटेन के सेवन से छोटी आंत को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, स्टडी में कुछ संबंधित पेप्टाइड्स की मात्रा घटने का संकेत मिला। जबकि ATIs की मात्रा बढ़ी। इसलिए इन बदलावों का कुल स्वास्थ्य प्रभाव क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समझने के लिए आगे अध्ययन करना जरूरी है कि गेहूं में प्रोटीन संरचना के ये बदलाव वास्तव में मानव शरीर की जैविक और प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाओं को किस तरह प्रभावित करते हैं। फिलहाल इस शोध को गेहूं से जुड़ी बीमारियों में निश्चित वृद्धि या कमी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

हर गेहूं की किस्म पर एक जैसा असर नहीं

पीटीआई के मुताबिक, इस अध्ययन में एक और अहम बात सामने आई कि सभी गेहूं की किस्मों में बदलाव समान नहीं थे। प्रमुख शोधकर्ता सबरीना गाइस्लिट्ज के अनुसार, प्रोटीन संरचना में परिवर्तन की सीमा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि गेहूं की कौन-सी किस्म उगाई गई है। यह निष्कर्ष भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि कुछ किस्में बढ़ी हुई CO₂ परिस्थितियों में अपनी गुणवत्ता बेहतर बनाए रखती हैं, तो उन किस्मों की पहचान और विकास पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों और कृषि क्षेत्रों में और परीक्षण करने होंगे।

भविष्य की खेती के लिए क्या है सबक?

इस स्टडी से साफ संकेत मिलता है कि जलवायु परिवर्तन का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि खेतों में कितना अनाज पैदा हो रहा है। यह भी देखना होगा कि उस अनाज में किस तरह के प्रोटीन मौजूद हैं। उसकी बेकिंग गुणवत्ता कैसी है। उसके सेवन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य पहलुओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भविष्य में गेहूं की ऐसी किस्में विकसित करने की जरूरत होगी, जो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार के साथ बेहतर गुणवत्ता बनाए रख सकें।

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Dion Gowda stepping up to F3 with Lando Norris’ team

Dion Gowda stepping up to F3 with Lando Norris’ team
Dion-Gowda-F3

Dion Gowda will make his Formula 3 debut next season, joining Lando Norris’ LN4 Fusion team. This will make him the third Indian racer to compete in the junior racing series, following Jehan Daruvala and Kush Maini.
“I’m really excited to be joining LN4 Fusion for the FIA Formula 3 Championship next year,” said Gowda. “Racing in FIA F3 is a dream come true and I’m really grateful for the opportunity. There are amazing people in this team, and I can’t wait to get started!”

  1. Gowda will be the third Indian to compete in F3
  2. He’s currently racing in the Formula Regional European Championship

Dion Gowda to make F3 debut in 2027

Dion Gowda Formula Regional European Championship

After making his way through the karting ranks in Asia and Europe, Gowda made his single seater debut in the 2023 F4 UAE winter series. He then enjoyed an impressive rookie campaign in the British F4 championship, claiming four race wins, three pole positions and six podiums enroute to finishing P4 in the championship.

Since then, he’s also participated in F4 UAE, Italian F4, Euro 4 and most recently in the Formula Regional European Championship (FREC) where he’s been competing for two seasons. In 2025 he also took home the 2025 FREC rookie title.

The 18-year old is now set to race alongside James Egozi and Gabriel Gomez in Lando Norris’ new LN4 Fusion F3 team next year. This will also be the newly-founded team’s inaugural F3 campaign.

“We are delighted to welcome Dion to LN4 Fusion, and we are very happy to be working with him,” said LN4 Fusion Chief Executive Officer Dan Richards.

“He showed promising speed in Formula Regional this season, regularly running in the top 10. We believe there is plenty of room for him to keep growing as a competitor, and on top of that he is a great person to work with. Everyone in the team is looking forward to starting this new journey together.”
 

कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

Kanpur fake cement factory

Kanpur fake cement factory: औद्योगिक नगरी कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट फैक्ट्री के खुलासे ने प्रदेश भर के निर्माण तंत्र और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। नामी कंपनियों की साख की आड़ में पिछले तीन सालों से चल रहे इस अवैध खेल में न सिर्फ 10 लाख से अधिक बोरियां खपाए जाने का संगीन आरोप है, बल्कि इसके तार मेरठ से लेकर सीएम ग्रिड और लखनऊ एयरपोर्ट जैसे हाई-प्रोफाइल निर्माण कार्यों तक जुड़ने के दावे सामने आ रहे है। अब योगी सरकार के एक्शन का इंतजार है।

 

यूपी के कानपुर में SOG और स्थानीय पुलिस ने पनकी थाना क्षेत्र के इस्पात नगर में छापेमारी कर नामी ब्रांडों (ACC और अंबुजा) के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली एक विशाल अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने पिछले 3 वर्षों में करीब 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बड़े सरकारी व निजी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई की है। इस पूरे मामले में एक स्थानीय भाजपा नेता द्वारा आरोपियों को संरक्षण देने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। 

कैसे हुआ इस बड़े खेल का खुलासा?

अडानी ग्रुप की कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक को जब अचानक अपने ब्रांड्स की बिक्री में भारी गिरावट महसूस हुई, तो कंपनी की विजिलेंस टीम ने पिछले 15 दिनों से निजी स्तर पर खुफिया जांच शुरू की। कंपनी की पुख्ता शिकायत मिलने पर कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर SOG और स्थानीय पुलिस की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित गोदाम पर अचानक छापेमारी कर इस अवैध सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया। छापेमारी के दौरान मौके से 1000 से अधिक भरी हुई नकली बोरियां, 3000 खाली बोरियां, अत्याधुनिक पैकिंग मशीनें और नकली सीमेंट से लदे दो ट्रक जब्त किए गए। 

​महज 30 रुपए की लागत और मुनाफा… 

​पुलिस जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट बेहद शातिर तरीके से लोगों की जान और सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ कर रहा था। यह गैंग बुंदेलखंड इलाके से खराब और एक्सपायर्ड हो चुकी सीमेंट को महज ₹10 से ₹20 प्रति बोरी की दर से खरीदता था। मेरठ के सप्लायरों (सुनील मित्तल और निशांत मित्तल) की मदद से इस पुराने माल को मशीनों में दोबारा पीसकर, उसमें हानिकारक केमिकल्स और थोड़ी असली सीमेंट मिलाकर नामी कंपनियों के ब्रांडेड बैगों में पैक किया जाता था।

 

​मोटा मुनाफा : महज ₹30 की लागत में तैयार होने वाली इस जानलेवा नकली सीमेंट की बोरी को बाजार में असली बताकर ₹250 से ₹280 में बेचा जा रहा था। गिरोह हर महीने करीब 30,000 से ज्यादा बोरियां बाजार में खपा रहा था। 

Kanpur fake cement factory

​बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया खतरा!

​इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठ रहा है। जांच में सामने आया है कि ​CM ग्रिड सड़क योजना के तहत बन रही महत्वपूर्ण सड़कों में भी इसी घटिया सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। ​लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण कार्यों में भी इस नकली सीमेंट की भारी सप्लाई किए जाने का गंभीर दावा किया गया है।

​पुलिसिया कार्रवाई और गरमाई सियासत

​पुलिस ने फैक्ट्री के मुंशी/सुपरवाइजर राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, मुख्य संचालक भाई नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता अपने दो अन्य साझेदारों के साथ फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है, इंतजार योगी सरकार के बड़े एक्शन का है।

 

​इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कड़ा तंज कसा है कि भाजपा का भ्रष्टाचार देश और प्रदेश की नींव को कमजोर कर रहा है। साथ ही, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स में भी इस सीमेंट के इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।

UltraTech Cement Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 21% बढ़ा, रेवेन्यू रहा 19% ज्यादा

आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट का जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 21 प्रतिशत बढ़ गया। आंकड़ा 1,493.77 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 1,231.58 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडटेड रेवेन्यू करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 23,295.07 करोड़ रुपये हो गया। सितंबर 2025 तिमाही में यह 19,606.93 करोड़ रुपये था।

कंपनी ने शेयर बाजारों को बताया है कि सितंबर 2026 तिमाही में कुल खर्च बढ़कर 21,338.88 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 18,119.56 करोड़ रुपये के थे। सितंबर 2026 के आखिर तक कंपनी में प्रमोटर्स के पास 58.48 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

6 महीनों में कैसा बिजनेस

अप्रैल-सितंबर 2026 यानि कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में अल्ट्राटेक सीमेंट का ऑपरेशंस से कंसोलिडटेड रेवेन्यू 47,943.27 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 40,882.38 करोड़ रुपये था। शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 4,093 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो सितंबर 2025 छमाही में 3,457.48 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेशंस से कंसोलिडटेड रेवेन्यू 88,511.53 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 8,165.84 करोड़ रुपये रहा था।

Ixigo Share Price: गिरते बाजार में शेयर 15% तक भागा, कंपनी के मुनाफे में लौटने से निवेशक गदगद

UltraTech Cement के शेयर में गिरावट

19 अक्टूबर को अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर में गिरावट है। शेयर दिन में BSE पर पिछले बंद भाव से 3 प्रतिशत तक टूटकर 10590.05 रुपये के लो तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 3.13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 10 प्रतिशत गिरा है। BSE पर शेयर का 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 13,104 रुपये और एडजस्टेड लो 10,329 रुपये है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Scooter sales hit record high in first half of FY2027

Scooter sales hit record high in first half of FY2027
Graphic with Activa, Jupiter, and Access on a podium

Two-wheeler manufacturers have dispatched a record 48,65,192 scooters in the domestic market in the first half (H1) of FY2027. That’s an additional 10.8 lakh units over the same period last year, representing a 29 percent increase. The six-month period included two monthly records: April 2026 opened as the best-ever April, with 6,91,993 units, while September registered 9,95,576 units – the highest monthly total ever for the category and just 4,424 units short of the million-unit (10 lakh) milestone.

Zooming out, the scale of the growth becomes clearer. Scooter sales have more than doubled over 12 years. In H1 FY2016, the total was 2.4 million units, whereas FY2027’s first half has already reached about 60 percent of FY2026’s full-year record of 8.11 million units.

Electric scooters double, claim a 20 percent share

Honda leads overall, TVS grows faster

The fastest-growing part of the segment is electric. E-scooter wholesales hit 9,78,017 units in H1 FY2027, up 103 percent year-on-year from 4,81,199 units in H1 FY2026. This surge has pushed EVs’ share of total scooter sales from 13 percent to 20 percent in a single year.

TVS Motor Company leads the e-scooter market, with 3,05,972 iQube and Orbiter units dispatched, up 107 percent year-on-year, giving it a 31 percent share. Bajaj Auto is second, with 2,60,982 Chetak and Yulu units – a 116 percent jump – and a 27 percent share. Together, the two account for 58 percent of all e-scooters sold in the first half. Ather Energy, with 1,71,611 units and 56 percent growth, held third place, though its share dipped from 23 percent to 18 percent as the market expanded. Hero MotoCorp’s Vida dispatched 1,33,964 units, up 118 percent, for a 14 percent share.

The three Japanese players – Honda, Suzuki and Yamaha – collectively sold 12,523 e-scooters, accounting for a combined 1 percent share. Honda led the group with 7,010 units, up 176 percent.

Across ICE and EV models combined, Honda Motorcycle & Scooter India remains the category leader with 1.65 million units, up 15 percent, although its market share has dipped from 38 percent to 34 percent. TVS Motor Company is in second place with 1.43 million units and 32 percent growth, adding 3,49,404 units year-on-year. Nearly half of that incremental volume came from its electric lineup.

Suzuki, with 6,22,722 units and 11 percent growth, and Hero MotoCorp, with 4,09,319 units and 70 percent growth, hold third and fourth place, respectively. Bajaj Auto has climbed to fifth with 2,60,982 units and 116 percent growth, displacing Yamaha, which recorded 2,02,131 units, up 33 percent. Ather Energy is seventh with 1,71,611 units, while River Mobility has entered the top 10, overtaking Piaggio with 30,232 units of the Indie scooter.

With the festive season now underway, the industry will be looking to convert the strong H1 momentum into retail sales. Whether Q3 and Q4 can sustain the near-30 percent growth rate needed to push scooter sales past 10 million units for the first time remains to be seen, but the trajectory points firmly in that direction.

 

कनाडा से अलग होने पर आज अल्बर्टा में वोटिंग:70% लोग साथ रहने के पक्ष में, तेल की कमाई को लेकर 50 साल पुराना झगड़ा

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह हो रहा है। इसमें लोग तय करेंगे कि प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं। इप्सोस-ग्लोबल न्यूज के सर्वे में अल्बर्टा के करीब 70% लोग कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद अलग देश बनाने की मांग करने वाले लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अल्बर्टा में अलग देश बनाने की मांग कोई नई बात नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह तेल से होने वाली कमाई और केंद्र सरकार के साथ पैसों के बंटवारे को लेकर नाराजगी है। अल्बर्टा में तेल का चौथा सबसे बड़ा भंडार अल्बर्टा में दुनिया के प्रमाणित तेल भंडार के मामले में चौथा सबसे बड़ा भंडार है। यहां का तेल उद्योग, रोजगार और कमाई का बड़ा जरिया है। अलग देश बनाने के समर्थकों का कहना है कि अल्बर्टा केंद्र सरकार को बहुत पैसा देता है, लेकिन उसे बदले में उतना फायदा नहीं मिलता। उनका आरोप है कि प्रांत की कमाई का इस्तेमाल कनाडा के दूसरे हिस्सों की मदद के लिए किया जाता है। वर्ष 2015 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह विवाद फिर बढ़ा। उनकी सरकार ने कार्बन टैक्स और प्रदूषण घटाने के लिए कई नियम लागू किए। अल्बर्टा के तेल उद्योग से जुड़े लोगों ने इनका विरोध किया। उनका मानना था कि इन नियमों से तेल का कारोबार प्रभावित होगा। क्या वोटिंग के बाद अल्बर्टा अलग देश बन जाएगा? नहीं। इस जनमत संग्रह में लोगों से सीधे यह फैसला नहीं कराया जा रहा कि अल्बर्टा तुरंत अलग देश बने या नहीं। उनसे पूछा जा रहा है कि क्या अलग होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। लोगों के सामने दो विकल्प हैं- 1. कनाडा का हिस्सा बने रहना 2. भविष्य में अलग होने पर फैसला लेने के लिए जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करना अगर लोग दूसरे विकल्प के पक्ष में वोट देते हैं, तब भी अल्बर्टा तुरंत अलग देश नहीं बन जाएगा। इसके लिए कनाडा की केंद्र सरकार, दूसरे प्रांतों और वहां रहने वाले मूल निवासी समुदायों के साथ बातचीत करनी होगी। अलग होने की स्थिति में कई सवालों पर फैसला लेना होगा। इनमें संसाधनों का बंटवारा, अधिकार और कनाडा के साथ भविष्य के रिश्ते शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्नी अल्बर्टा के हैं, अलग के पक्ष में नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी खुद अल्बर्टा में पले-बढ़े हैं। वे भी मानते हैं कि प्रांत के लोगों में नाराजगी है। हालांकि, वे अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि वे अलग होने के पक्ष में वोट न करें। ऐसा फैसला देश में लंबे समय तक राजनीतिक खींचतान और अनिश्चितता पैदा कर सकता है। कार्नी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण अल्बर्टा के कई लोगों को ऐसा लगता है, जैसे उनके अपने संसाधन भी उनके नहीं हैं। हालांकि सरकार अल्बर्टा के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अलग होने के खिलाफ फिर जनमत संग्रह क्यों करा रहीं? अल्बर्टा के मुख्यमंत्री डेनियल स्मिथ ने पिछले साल जनमत संग्रह कराने की प्रक्रिया आसान कर दी थी। इसके बाद आजादी का मुद्दा राज्य की राजनीति में और चर्चा में आ गया। हालांकि, स्मिथ खुद अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अलग होने के खिलाफ वोट दे रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस जनमत संग्रह के पीछे स्मिथ की अपनी पार्टी की राजनीति भी है। उनकी पार्टी में कई लोग अल्बर्टा को अलग देश बनाने के पक्ष में हैं। स्मिथ जनमत संग्रह के जरिए अपनी ही पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच चल रहे मतभेदों को सुलझाना चाहती हैं। जनमत संग्रह के अलावा 9 और सवाल पूछे जा रहे अल्बर्टा में सिर्फ आजादी के मुद्दे पर ही वोटिंग नहीं हो रही है। लोगों से कुल 10 सवालों पर राय मांगी जा रही है। 1. अल्बर्टा की आजादी: क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बन जाना चाहिए? 2. प्रवासियों की संख्या: क्या अल्बर्टा सरकार को प्रांत में आने वाले प्रवासियों की संख्या सीमित करने का अधिकार मिलना चाहिए? 3. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता: क्या नौकरियों में अल्बर्टा के लोगों को बाहर से आने वाले लोगों के मुकाबले प्राथमिकता दी जानी चाहिए? 4. स्वास्थ्य सेवाओं पर अलग नियम: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग नियम बनाए जाने चाहिए? 5. शिक्षा की सुविधाएं: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के बच्चों को सरकारी शिक्षा देने पर कुछ पाबंदियां लगाई जानी चाहिए? 6. सरकारी आर्थिक मदद: क्या सरकारी आर्थिक सहायता और दूसरी सुविधाएं पाने के लिए लोगों के लिए अल्बर्टा में कम से कम 12 महीने रहना जरूरी होना चाहिए? 7. वोट देने के लिए पहचान पत्र: क्या प्रांतीय चुनाव में वोट देने वालों के लिए नागरिकता का सबूत दिखाना जरूरी होना चाहिए? 8. प्रांतों को जज चुनने का अधिकार: क्या अल्बर्टा और दूसरे प्रांतों को अपनी अदालतों के जज चुनने का अधिकार मिलना चाहिए? 9. कनाडा की सीनेट खत्म करना: क्या देश की संसद के ऊपरी सदन सीनेट को खत्म कर देना चाहिए? 10. प्रांतों को ज्यादा अधिकार: क्या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मामलों में प्रांतीय सरकारों को केंद्र सरकार के मुकाबले ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए? मुख्यमंत्री स्मिथ ने पहले प्रस्ताव के खिलाफ और बाकी नौ प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अल्बर्टा को ज्यादा ताकत मिलेगी। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी इसी साल जनवरी में ऐसा संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि अल्बर्टा के पास बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं और वह अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के लोग स्वतंत्र सोच वाले हैं और ऐसी चर्चा है कि वहां के लोग कनाडा में बने रहने या अलग होने पर जनमत संग्रह करा सकते हैं।

कनाडा से अलग होने पर आज अल्बर्टा में वोटिंग:70% लोग साथ रहने के पक्ष में, तेल की कमाई को लेकर 50 साल पुराना झगड़ा

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह हो रहा है। इसमें लोग तय करेंगे कि प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए या नहीं। इप्सोस-ग्लोबल न्यूज के सर्वे में अल्बर्टा के करीब 70% लोग कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद अलग देश बनाने की मांग करने वाले लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अल्बर्टा में अलग देश बनाने की मांग कोई नई बात नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह तेल से होने वाली कमाई और केंद्र सरकार के साथ पैसों के बंटवारे को लेकर नाराजगी है। अल्बर्टा में तेल का चौथा सबसे बड़ा भंडार अल्बर्टा में दुनिया के प्रमाणित तेल भंडार के मामले में चौथा सबसे बड़ा भंडार है। यहां का तेल उद्योग, रोजगार और कमाई का बड़ा जरिया है। अलग देश बनाने के समर्थकों का कहना है कि अल्बर्टा केंद्र सरकार को बहुत पैसा देता है, लेकिन उसे बदले में उतना फायदा नहीं मिलता। उनका आरोप है कि प्रांत की कमाई का इस्तेमाल कनाडा के दूसरे हिस्सों की मदद के लिए किया जाता है। वर्ष 2015 में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह विवाद फिर बढ़ा। उनकी सरकार ने कार्बन टैक्स और प्रदूषण घटाने के लिए कई नियम लागू किए। अल्बर्टा के तेल उद्योग से जुड़े लोगों ने इनका विरोध किया। उनका मानना था कि इन नियमों से तेल का कारोबार प्रभावित होगा। क्या वोटिंग के बाद अल्बर्टा अलग देश बन जाएगा? नहीं। इस जनमत संग्रह में लोगों से सीधे यह फैसला नहीं कराया जा रहा कि अल्बर्टा तुरंत अलग देश बने या नहीं। उनसे पूछा जा रहा है कि क्या अलग होने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। लोगों के सामने दो विकल्प हैं- 1. कनाडा का हिस्सा बने रहना 2. भविष्य में अलग होने पर फैसला लेने के लिए जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करना अगर लोग दूसरे विकल्प के पक्ष में वोट देते हैं, तब भी अल्बर्टा तुरंत अलग देश नहीं बन जाएगा। इसके लिए कनाडा की केंद्र सरकार, दूसरे प्रांतों और वहां रहने वाले मूल निवासी समुदायों के साथ बातचीत करनी होगी। अलग होने की स्थिति में कई सवालों पर फैसला लेना होगा। इनमें संसाधनों का बंटवारा, अधिकार और कनाडा के साथ भविष्य के रिश्ते शामिल हैं। प्रधानमंत्री कार्नी अल्बर्टा के हैं, अलग के पक्ष में नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी खुद अल्बर्टा में पले-बढ़े हैं। वे भी मानते हैं कि प्रांत के लोगों में नाराजगी है। हालांकि, वे अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि वे अलग होने के पक्ष में वोट न करें। ऐसा फैसला देश में लंबे समय तक राजनीतिक खींचतान और अनिश्चितता पैदा कर सकता है। कार्नी ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण अल्बर्टा के कई लोगों को ऐसा लगता है, जैसे उनके अपने संसाधन भी उनके नहीं हैं। हालांकि सरकार अल्बर्टा के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अलग होने के खिलाफ फिर जनमत संग्रह क्यों करा रहीं? अल्बर्टा के मुख्यमंत्री डेनियल स्मिथ ने पिछले साल जनमत संग्रह कराने की प्रक्रिया आसान कर दी थी। इसके बाद आजादी का मुद्दा राज्य की राजनीति में और चर्चा में आ गया। हालांकि, स्मिथ खुद अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे अलग होने के खिलाफ वोट दे रही हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस जनमत संग्रह के पीछे स्मिथ की अपनी पार्टी की राजनीति भी है। उनकी पार्टी में कई लोग अल्बर्टा को अलग देश बनाने के पक्ष में हैं। स्मिथ जनमत संग्रह के जरिए अपनी ही पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच चल रहे मतभेदों को सुलझाना चाहती हैं। जनमत संग्रह के अलावा 9 और सवाल पूछे जा रहे अल्बर्टा में सिर्फ आजादी के मुद्दे पर ही वोटिंग नहीं हो रही है। लोगों से कुल 10 सवालों पर राय मांगी जा रही है। 1. अल्बर्टा की आजादी: क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बन जाना चाहिए? 2. प्रवासियों की संख्या: क्या अल्बर्टा सरकार को प्रांत में आने वाले प्रवासियों की संख्या सीमित करने का अधिकार मिलना चाहिए? 3. स्थानीय लोगों को प्राथमिकता: क्या नौकरियों में अल्बर्टा के लोगों को बाहर से आने वाले लोगों के मुकाबले प्राथमिकता दी जानी चाहिए? 4. स्वास्थ्य सेवाओं पर अलग नियम: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अलग नियम बनाए जाने चाहिए? 5. शिक्षा की सुविधाएं: क्या अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों के बच्चों को सरकारी शिक्षा देने पर कुछ पाबंदियां लगाई जानी चाहिए? 6. सरकारी आर्थिक मदद: क्या सरकारी आर्थिक सहायता और दूसरी सुविधाएं पाने के लिए लोगों के लिए अल्बर्टा में कम से कम 12 महीने रहना जरूरी होना चाहिए? 7. वोट देने के लिए पहचान पत्र: क्या प्रांतीय चुनाव में वोट देने वालों के लिए नागरिकता का सबूत दिखाना जरूरी होना चाहिए? 8. प्रांतों को जज चुनने का अधिकार: क्या अल्बर्टा और दूसरे प्रांतों को अपनी अदालतों के जज चुनने का अधिकार मिलना चाहिए? 9. कनाडा की सीनेट खत्म करना: क्या देश की संसद के ऊपरी सदन सीनेट को खत्म कर देना चाहिए? 10. प्रांतों को ज्यादा अधिकार: क्या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मामलों में प्रांतीय सरकारों को केंद्र सरकार के मुकाबले ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए? मुख्यमंत्री स्मिथ ने पहले प्रस्ताव के खिलाफ और बाकी नौ प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार के साथ बातचीत में अल्बर्टा को ज्यादा ताकत मिलेगी। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी इसी साल जनवरी में ऐसा संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि अल्बर्टा के पास बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन हैं और वह अमेरिका का स्वाभाविक साझेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्बर्टा के लोग स्वतंत्र सोच वाले हैं और ऐसी चर्चा है कि वहां के लोग कनाडा में बने रहने या अलग होने पर जनमत संग्रह करा सकते हैं।

सिर्फ ₹5 की कॉफी ने खड़ा किया ₹180 करोड़ का बिजनेस! जानिए कैसे ‘हट्टी कापी’ बनी देश का मशहूर ब्रैंड?

नई दिल्ली। बेंगलुरु में 5 रुपये प्रति कप कॉफी बेचने से शुरू हुआ एक छोटा सा कारोबार आज करीब 180 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है। इस कंपनी का नाम है हट्टी कापी (Hatti Kaapi)। यूएस महेंद्र (U.S. Mahendra) ने साल 2009 में एक इमारत की सीढ़ियों के नीचे छोटी सी जगह से इसकी शुरुआत की थी। आज कंपनी के आउटलेट ऑफिस, एयरपोर्ट और होटलों तक पहुंच चुके हैं।

महेंद्र कर्नाटक के हासन जिले में पले-बढ़े थे और उन्हें कॉफी के बिजनेस की अच्छी समझ थी। वह कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ से भी इंस्पायर्ड थे। उन्होंने कॉफी के अच्छे टेस्ट और सर्विस पर ध्यान दिया। बाद में उन्होंने जंबराडी गांव के 15 से 20 किसानों से कॉफी खरीदनी शुरू की।

देश-विदेश तक ऐसे पहुंचा हट्टी कापी का बिजनेस

हट्टी कापी की पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद कंपनी ने अपने आउटलेट को बढ़ा दिया है। साल 2014 में इंफोसिस ने अपने कैंपस में इसे जगह दी। इसके बाद डेलॉइट और SAP जैसी कंपनियों के ऑफिस और एयरपोर्ट पर भी इसके काउंटर खुल गए। कंपनी मैरियट इंटरनेशनल से जुड़े होटलों को भी सर्विस दे रही है और पैक की हुई कॉफी ऑनलाइन बेचती है।

अब हट्टी कापी का कारोबार भारत से बाहर भी पहुंच गया है। कंपनी लंदन में मौजूद है और एम्स्टर्डम, अमेरिका, दुबई के साथ यूरोप के दूसरे शहरों में भी बिजनेस बढ़ाने की प्लानिंग बना रही है।

बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनी ने अलग-अलग इंवेस्टर्स से पैसा जुटाया। Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक:

• मई 2024 में कंपनी को करीब 21.9 लाख डॉलर का इन्वेस्टमेंट मिला।

• अप्रैल 2025 में करीब 10.2 लाख डॉलर की फंडिंग मिली।

• कंपनी ने कुल 13 चरणों में करीब 66.83 करोड़ रुपये जुटाए।

• 19 अगस्त 2025 तक कंपनी की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

हट्टी कापी की कमाई साल 2025 में करीब 44.11 करोड़ रुपये रही। इसके बावजूद कंपनी को 18.59 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। साल 2024 में यह घाटा 3.86 करोड़ रुपये था। हट्टी कापी ने कॉफी से शुरुआत करके देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कंपनी की कमाई के साथ घाटा भी हुआ है। अब कंपनी के इस बिजनेस को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

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Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ को एग्जैक्ट कहां गोली मारनी है, पैपराजी वीडियो से कैसे की ट्रैकिंग? ये सारी जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं

Tiger Shroff Firing Case: फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, वारदात में कथित रूप से शामिल आरोपियों ने फायरिंग से पहले करीब 10 दिनों तक अभिनेता की गतिविधियों और उनके आने-जाने के समय पर नजर रखी थी। आरोपियों ने कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ के घर और जिम की भी रेकी की थी। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर पैपराज़ी और ब्लॉगर्स के वीडियो से आरोपियों को उन जगहों का पता लगाने में मदद मिली, जहां अभिनेता अक्सर जाते थे।

10 दिनों तक टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों पर नजर

सूत्रों के अनुसार, आरोपी फायरिंग की घटना से पहले अभिनेता की दिनचर्या और उनके शेड्यूल पर नजर रख रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह पता लगाने की कोशिश की कि टाइगर श्रॉफ किन जगहों पर जाते हैं और उनकी आवाजाही का सामान्य समय क्या रहता है। जांच एजेंसियां इस पहलू की पड़ताल कर रही हैं कि कथित रेकी किस उद्देश्य से की गई थी और वारदात की योजना बनाने में इसकी क्या भूमिका रही।

सोशल मीडिया वीडियो से जुटाई जानकारी?

सूत्रों का दावा है कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर मौजूद पैपराजी और ब्लॉगर्स के वीडियो का इस्तेमाल कर उन जगहों की पहचान की, जहां टाइगर श्रॉफ अक्सर आते-जाते थे। इन वीडियो के जरिए अभिनेता की गतिविधियों और उनके नियमित ठिकानों से जुड़ी जानकारी जुटाए जाने की आशंका है। हालांकि, सोशल मीडिया वीडियो से जानकारी जुटाने और उसका इस्तेमाल कथित वारदात की योजना में किए जाने की बातों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

WhatsApp और Signal के जरिए हैंडलर्स से संपर्क का दावा

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर WhatsApp और Signal के जरिए अपने हैंडलर्स के लगातार संपर्क में थे। यह भी दावा किया गया है कि वारदात वाली जगह की लोकेशन आरोपियों के साथ इन्हीं मैसेजिंग ऐप के जरिए शेयर की गई थी। पुलिस अब कथित संपर्कों और आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फायरिंग की योजना किसने बनाई और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार हुए तीन आरोपी

इस मामले में राजस्थान पुलिस और एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने 17, 18 और 22 साल के तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया है। तीनों कथित तौर पर मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के बाद फरार चल रहे थे। ये लोग ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद अब जांच का फोकस कथित रेकी, वारदात की योजना और आरोपियों के संपर्कों पर है। पुलिस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग के पीछे किसका हाथ था और आरोपियों को निर्देश देने में कथित हैंडलर्स की क्या भूमिका रही।

रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में अज्ञात हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की थी। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए। जबकि उनका चालक और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। सोशल मीडिया में वायरल हुए एक पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने हमले की जिम्मेदारी ली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि मुंबई पुलिस अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना में शामिल लोगों और उनके आकाओं का पता लगाएगी और इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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फडणवीस ने नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि पुलिस को आरोपियों की पहचान के संबंध में अहम सुराग मिले हैं। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोपी महाराष्ट्र के बाहर, संभवत: विदेश से काम कर रहे हैं। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस दूसरे राज्यों के साथ समन्वय करेगी। मुंबई पुलिस केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी लेगी।